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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे उत्तराखंड, राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष पर 8140 करोड़ की परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण और शिलान्यास

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देहरादून।उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देवभूमि पहुंचे। राज्य के रजत जयंती वर्ष के इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की जनता को कई बड़ी सौगातें दीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर राज्य के गौरवशाली इतिहास और आंदोलनकारी शहीदों को नमन करते हुए एक स्मारक डाक टिकट जारी किया, जो उत्तराखंड की संघर्षगाथा और विकास यात्रा को समर्पित है।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने 8140 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें पेयजल, सिंचाई, तकनीकी शिक्षा, ऊर्जा, शहरी विकास, खेल और कौशल विकास जैसे कई अहम क्षेत्रों से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।

इन परियोजनाओं से प्रदेश में न केवल आधारभूत संरचना को मज़बूती मिलेगी, बल्कि युवाओं को रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड ने 25 वर्षों में विकास की नई ऊँचाइयाँ छुई हैं और आने वाला दशक “विकसित उत्तराखंड” का दशक होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों और राज्य सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड में पर्यटन, ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि रजत जयंती वर्ष उत्तराखंड के लिए नई प्रेरणा लेकर आया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राज्य “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है।

राज्य स्थापना दिवस के इस अवसर पर आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल पर पूरे प्रदेश से आए नागरिकों, आंदोलनकारियों और छात्रों ने प्रधानमंत्री का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

उत्तराखंड : 25 साल बाद भी अधूरी उम्मीदें और बढ़ती चुनौतियां, क्या आम आदमी भी जश्न मना रहा है?

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  • प्रदीप रावत ‘रवांल्टा’ 

9 नवंबर 2025 उत्तराखंड अपना 25वां राज्य स्थापना दिवस मना रहा है, लेकिन देवभूमि की यह रजत जयंती खुशी के साथ-साथ गहरे दर्द की भी गवाह है। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर बने इस राज्य ने आंदोलनकारियों के बलिदान से जन्म लिया था। सपना था एक समृद्ध, आत्मनिर्भर पहाड़ी राज्य का, जहां रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं हर गांव तक पहुंचें। लेकिन, 25 साल बाद तस्वीर उलटी है। घोस्ट विलेज, पलायन का दर्द, प्राकृतिक आपदाओं का कहर और बेरोजगारी की मार। राज्य की अर्थव्यवस्था बढ़ी तो है, लेकिन विकास मैदानी इलाकों तक सिमट गया, जबकि पहाड़ खाली होते जा रहे हैं। बड़ा स्वाय यह है कि क्या आम आदमी भी जश्न मना रहा है?

पलायनर : पहाड़ों का सबसे बड़ा नासूर
उत्तराखंड की सबसे बड़ी बदहाली पलायन है। राज्य गठन के बाद से लाखों लोग गांव छोड़ चुके हैं। पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 1700 से अधिक गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं, जिन्हें घोस्ट विलेज कहा जाता है। 2018 में यह संख्या 734 थी, जो अब बढ़कर 2000 के करीब पहुंचती जा रही है। 3 लाख से ज्यादा घरों पर ताले लटक रहे हैं। हर दिन औसतन 138 लोग गांव छोड़ रहे हैं।

कारण?

बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर है, खेती लाभदायक नहीं। युवा शहरों या मैदानी इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं। कोविड के बाद रिवर्स माइग्रेशन हुआ, लेकिन सुविधाओं की कमी से वह स्थायी नहीं रहा। सरकार ने 100 मॉडल गांव बनाने की योजना शुरू की, लेकिन जमीनी स्तर पर असर कम है। सोशल मीडिया पर भी लोग यही सवाल उठा रहे हैं कि 25 साल बाद भी पलायन क्यों नहीं रुका?

प्राकृतिक आपदाएं: विकास का विनाशकारी चेहरा
उत्तराखंड जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शुमार है। 2025 में ही उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से भारी तबाही हुई। पिछले 8-10 सालों में 3500 से ज्यादा मौतें हुईं, अरबों की संपत्ति बर्बाद। भूस्खलन की 4654 घटनाएं दर्ज हुई।

अनियोजित विकास
चार धाम यात्रा मार्ग पर चौड़ीकरण से 150 नए भूस्खलन जोन बने। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने भी इसे अवैज्ञानिक बताया। वनों की कटाई, जलविद्युत परियोजनाएं और ग्लेशियर पिघलना आपदाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। 2025 की बाढ़ और भूस्खलन ने सड़कें, पुल और घर बहा दिए। विशेषज्ञ कहते हैं, अगर नहीं चेते तो देर हो जाएगी।

बेरोजगारी और असमान विकास
राज्य की अर्थव्यवस्था 26 गुना बढ़ी, लेकिन लाभ असमान। मैदानी जिलों (हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और दूरादून के मैदानी हिस्से) में विकास की रफ्तार ते रही, जबकि पहाड़ी इलाकों में बेरोजगारी चरम पर है। युवा रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं कमजोर, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं और स्कूलों में ताले लटक रहे हैं। पर्यटन और जलविद्युत पर निर्भरता बढ़ी, लेकिन पर्यावरण को नुकसान हुआ। भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता ने नीतियों को प्रभावित किया। डेमोग्राफिक बदलाव भी चिंता बढ़ा रहा है, जनसंख्या असंतुलन, मूल निवासियों का शोषण सबसे बड़ी चिंताएं हैं, जिस पर किसी का ध्यान नहीं है। हाल में राज्य निर्माण के 25 होने पर विशेष सत्र बुलाया गया, उस सत्र से एक नई बहस पहाड़ और मैदान की शुरू हो गई है।

सरकार की कोशिशें और जनता की निराशा
सरकार मॉडल गांव, रिवर्स माइग्रेशन और आपदा प्रबंधन की योजनाएं चला रही है। लेकिन, जनता कहती है, विकास नेताओं-अफसरों तक सिमटा हुआ है। सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राज्य के स्थापना दिवस पर बधाई किस बात की? जब राज्य में शराब पुलिस पहरे में बेची जा रही है। भ्रष्टाचार चरम पर है और पलायन जारी है।

राज्य संवारने और बचाने की जरूरत
उत्तराखंड की 25 साल की यात्रा सिखाती है कि सिर्फ़ राज्य बन जाना काफी नहीं, उसे बचाना और संवारना ज़्यादा बड़ा संघर्ष है। घोस्ट विलेज, खाली होते स्कूल, टूटते पुल और हर साल बढ़ती आपदाएं चीख-चीखकर बता रही हैं कि हमने सपनों को कागज़ों तक सीमित रखा, धरातल पर उतारने की ईमानदार कोशिश नहीं की।

पहाड़ों के लिए अलग विकास नीति बनाने की आवश्यकता
राज्य की अर्थव्यवस्था चमक रही है, लेकिन वह चमक सिर्फ़ मैदानी शहरों की है; पहाड़ अंधेरे में डूबते जा रहे हैं। पलायन कोई प्राकृतिक प्रक्रिया नहीं, यह नीतिगत विफलता का जीता-जागता सबूत है। चार धाम की चौड़ी सड़कें बन गईं, लेकिन गांवों तक पहुंचने वाली पगडंडियां आज भी टूटती हैं। पर्यटन से कमाई बढ़ी, पर पर्यावरण का नुकसान इतना कि आने वाली पीढ़ियां इसके बोझ से उभर नहीं पाएंगी।

इन बातों पर ध्यान देने की जरूरत

  • पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग विकास मॉडल चाहिए, जो स्थानीय संसाधनों और संस्कृति पर आधारित हो।
  • सख्त भू-कानून, पांचवीं अनुसूची और मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा ज़रूरी है।
  • अनियोजित जलविद्युत परियोजनाओं और सड़क चौड़ीकरण पर रोक लगे, पर्यावरणीय मंज़ूरी को सख्ती से लागू किया जाए।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए स्थानीय उत्पादों को बाज़ार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ब्रांडिंग की ज़रूरत है।
  • राजनीतिक इच्छाशक्ति। बिना भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के कोई योजना सफल नहीं होगी।

ऐसा हो भविष्य का उत्तराखंड
राज्य स्थापना दिवस सिर्फ़ बधाई और जश्न का दिन नहीं, आत्ममंथन का दिन है। शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। देवभूमि को बचाना है तो अब हर उत्तराखंडी को आगे आना होगा, चाहे वह गांव में रहकर खेती करे, शहर में रहकर आवाज़ उठाए या नीति-निर्माण में हिस्सा ले। 25 साल पूरे हुए, अब अगले 25 साल का सपना देखने का वक़्त है। एक ऐसा उत्तराखंड जहां गांव हंसें, नदियां बहें, जंगल हरे-भरे रहें और हर बच्चे को अपने घर में ही भविष्य नज़र आए।

उत्तराखंड रजत जयंती पीएम मोदी आज देंगे 8260 करोड़ की सौगात

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देहरादून : उत्तराखंड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ यानी रजत जयंती के भव्य समारोह में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून पहुंच रहे हैं। वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में पीएम 8260 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 28 हजार से अधिक किसानों के खातों में 62 करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे हस्तांतरित करेंगे।

कार्यक्रम का समय-सारणी

  • सुबह 11:30 बजे: पीएम का एफआरआई पहुंचना.
  • 11:45 बजे: विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण.
  • 12:05 बजे: विभिन्न हितधारकों से संवाद.
  • 12:30 बजे: रजत जयंती समारोह में भागीदारी, स्मारक डाक टिकट जारी करना एवं जनसमूह को संबोधन.

प्रमुख परियोजनाएं

प्रधानमंत्री जल-क्षेत्र से जुड़ी दो बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे:

  1. सौंग बांध पेयजल परियोजना (देहरादून) – शहर को 150 एमएलडी पेयजल उपलब्ध कराएगी।
  2. जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना (नैनीताल) – पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन में सहायक।

इसके अलावा विद्युत सबस्टेशन, चंपावत में महिला खेल महाविद्यालय, नैनीताल में अत्याधुनिक डेयरी संयंत्र, अमृत योजना के तहत देहरादून जलापूर्ति कवरेज, पिथौरागढ़ में विद्युत सबस्टेशन, सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र, हल्द्वानी स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान आदि परियोजनाएं शामिल हैं। ये परियोजनाएं पेयजल, सिंचाई, तकनीकी शिक्षा, ऊर्जा, शहरी विकास, खेल और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों को मजबूत करेंगी।

पीएम मोदी की शुभकामनाएं

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री ने लिखा, “उत्तराखंड की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर राज्य के मेरे सभी भाई-बहनों को अनेकानेक शुभकामनाएं। प्रकृति की गोद में बसी हमारी यह देवभूमि आज पर्यटन के साथ-साथ हर क्षेत्र में प्रगति की नई रफ्तार भर रही है। प्रदेश के इस विशेष अवसर पर मैं यहां के विनम्र, कर्मठ और देवतुल्य लोगों की सुख-समृद्धि, सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।”

सीएम धामी ने जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीएम की शुभकामनाओं पर जवाब देते हुए लिखा, “उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष पर आपकी स्नेहपूर्ण शुभकामनाओं एवं आशीर्वाद के लिए समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार। आपके दूरदर्शी नेतृत्व और सतत मार्गदर्शन में उत्तराखंड अपनी विकास यात्रा में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कर रहा है। आपकी प्रेरणा से उत्तराखंड ने अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल होकर सुशासन, जनकल्याण और सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। आपका सान्निध्य हमें सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रेरित करता है।”

शहर तैयार, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

प्रधानमंत्री के स्वागत में पूरा दून सजाया गया है। जगह-जगह होर्डिंग्स और बैनर लगाए गए हैं। एफआरआई परिसर को जीरो जोन घोषित कर दिया गया है। शहर में यातायात के लिए व्यापक रूट डायवर्शन किया गया है। पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है ताकि कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो। उत्तराखंड की रजत जयंती और पीएम के आगमन ने पूरे राज्य में उत्साह का माहौल बना दिया है। देवभूमि आज विकास के नए अध्याय की गवाह बनेगी।

राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन बढ़ाई जाएगी, शहीदों के नाम पर सुविधाओं का नामकरण, मुख्यमंत्री धामी की बड़ी घोषणाएं

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देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में बढ़ोतरी समेत कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

मुख्यमंत्री धामी ने सुबह कचहरी परिसर स्थित शहीद स्थल पर राज्य आंदोलनकारी शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित राज्य आंदोलनकारी सम्मान समारोह में राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया।

इस अवसर पर कचहरी परिसर शहीद स्थल और पुलिस लाइन के ऊपर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई, जिसने पूरे समारोह को भावनात्मक बना दिया।

“राज्य निर्माण बलिदान और तप का परिणाम”

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि “उत्तराखंड राज्य का निर्माण केवल राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि देवभूमि के लाखों लोगों के बलिदान, संघर्ष और तप का परिणाम है।” उन्होंने खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा की घटनाओं को राज्य इतिहास के अमर अध्याय बताते हुए कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती रही है और आगे भी देती रहेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के लिए संचालित पेंशन व अन्य सुविधाएं केवल सहायता नहीं, बल्कि पूरे समाज की कृतज्ञता का प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं

1️⃣ शहीद राज्य आंदोलनकारियों के नाम पर उनके क्षेत्रों की प्रमुख अवसंरचना सुविधाओं का नामकरण किया जाएगा।

2️⃣ जेल गए या घायल आंदोलनकारी की पेंशन ₹6,000 से बढ़ाकर ₹7,000 प्रति माह की जाएगी।

3️⃣ अन्य राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन ₹4,500 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति माह की जाएगी।

4️⃣ आंदोलन के दौरान विकलांग होकर पूर्णतः शय्याग्रस्त हुए आंदोलनकारियों की पेंशन ₹20,000 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह की जाएगी, साथ ही मेडिकल अटेंडेंट की व्यवस्था भी की जाएगी।

5️⃣ शहीद आंदोलनकारियों के आश्रितों की पेंशन ₹3,000 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति माह की जाएगी।

6️⃣ वर्ष 2021 तक जिलाधिकारी कार्यालयों में लंबित आंदोलनकारी चिन्हीकरण आवेदन पत्रों के निस्तारण के लिए 6 माह का समय विस्तार दिया जाएगा।

7️⃣ राज्य के सभी शहीद स्मारकों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के योगदान को हमेशा सम्मानपूर्वक याद रखेगी और उनकी भावना को हर नीति व निर्णय में स्थान देगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की राज्य स्थापना दिवस पर अपने घरों में पाँच दीपक राज्य आंदोलनकारियों की स्मृति में अवश्य जलाएँ। उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में राज्य आंदोलन की भावना ही हमारी प्रेरणा है।”

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा का प्रधानमंत्री पर विवादित बयान

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नई दिल्ली/पटना : कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खेड़ा ने दावा किया कि गृह मंत्री जब भी पटना आते हैं, उस दौरान सुरक्षा व्यवस्था में असामान्य गतिविधियां देखी जाती हैं।

खेड़ा ने कहा कि “गृह मंत्री अमित शाह अधिकारियों से गुप्त रूप से मुलाकात करते हैं। जब भी वे पटना आते हैं, तो होटल की लिफ्टों में लगे सीसीटीवी कैमरों को कागज से ढक दिया जाता है। आखिर ऐसी गोपनीयता की जरूरत क्यों पड़ती है? गृह मंत्री कौन सी गुप्त बैठकें करते हैं और किससे?”

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गृह मंत्री के कार्यक्रम आधिकारिक और पारदर्शी हैं, तो फिर सुरक्षा उपकरणों को बंद या ढका क्यों जाता है। खेड़ा ने कहा कि यह न केवल सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाता है।

बिहार चुनाव पर भविष्यवाणी

खेड़ा ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान को लेकर दावा किया कि महागठबंधन को 121 सीटों में से करीब 72 सीटों पर जीत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस बार महागठबंधन का प्रदर्शन पिछले चुनावों की तुलना में काफी बेहतर रहेगा।

पीएम मोदी के ‘कट्टा’ बयान पर पलटवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया “कट्टा” बयान पर पलटवार करते हुए पवन खेड़ा ने कहा — “मैंने सुना है कि प्रधानमंत्री की कुछ रैलियों में कटौती की गई है, शायद जनता अब कट्टा नहीं, कटौती का जवाब दे रही है।”

खेड़ा के इन बयानों ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। भाजपा की ओर से इस पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेता का यह बयान “बेतुका और भ्रामक” बताया जा रहा है।

खराब एम्बुलेंस में ही गर्भवती ने दिया बच्चे को जन्म, स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल

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रुद्रप्रयाग : रुद्रप्रयाग जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगरासू क्षेत्र में प्रसव पीड़ा से कराह रही एक गर्भवती महिला को ले जा रही 108 एम्बुलेंस रास्ते में ही खराब हो गई। दूसरी एम्बुलेंस आने में हुई देरी के बीच महिला ने खराब एम्बुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया। जच्चा-बच्चा फिलहाल सुरक्षित हैं, लेकिन यह घटना जिले की जर्जर स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल रही है।

नगरासू में हुई घटना

ग्राम भटगांव (नगरासू) निवासी नीमा देवी (पत्नी गुरुदेव सिंह) को गुरुवार देर रात करीब 2 बजे प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा को कॉल किया। एम्बुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन नगरासू से मात्र 2 किमी दूर शिवनंदी के पास अचानक बंद हो गई। दूसरी एम्बुलेंस बुलाने में लगभग एक घंटे की देरी हुई। इस दौरान महिला ने खराब एम्बुलेंस के अंदर ही बच्चे को जन्म दे दिया। बाद में दोनों को जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति स्थिर है।

क्षेत्र पंचायत सदस्य ने जताई नाराजगी

स्थानीय निवासी व क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश राणा ने घटना पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “जब 108 एम्बुलेंस ही बार-बार खराब हो रही हैं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे सुधरेगी? प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरासू में प्रसूति विशेषज्ञ की मांग वर्षों से लंबित है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

जिले में सिर्फ 8 एम्बुलेंस चालू हालत में

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राम प्रकाश ने बताया कि जिले में कुल 12 एम्बुलेंस हैं, जिनमें से केवल 8 ही संचालित हैं। 20 नई एम्बुलेंस की मांग शासन से की गई है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

 चोपड़ा-गढ़ीधार मोटर मार्ग पर बोलेरो दुर्घटना के घायलों को लेने आई एम्बुलेंस घटनास्थल से 300 मीटर पहले खराब हो गई। दूसरी एम्बुलेंस मंगवानी पड़ी। बार-बार एम्बुलेंस खराब होने से फिटनेस जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। बीडीसी सतीश राणा का आरोप है कि “प्रशासन फिटनेस के नाम पर सिर्फ औपचारिकता करता है। लापरवाही कई बार लोगों की जान पर भारी पड़ती है।”

ग्रामीणों में आक्रोश, मांगें तेज

नगरासू व आसपास के ग्रामीणों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूति विशेषज्ञ की तत्काल नियुक्ति, नई एम्बुलेंस की व्यवस्था और नियमित फिटनेस जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें खराब और दूरी ज्यादा होने के कारण एम्बुलेंस की विश्वसनीयता जीवन-मृत्यु का सवाल बन जाती है।

स्वास्थ्य विभाग का पक्ष

सीएमओ डॉ. राम प्रकाश ने माना कि एम्बुलेंस की कमी और पुरानी गाड़ियों की समस्या है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नई एम्बुलेंस जल्द आने की उम्मीद है और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उत्तराखंड : CM धामी ने की 4 बड़ी घोषणाएं, वृद्ध कलाकारों और लेखकों की पेंशन हुई दोगुनी

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देहरादून :उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित हिमालय निनाद महोत्सव-2025 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया और संस्कृति के उत्थान तथा कलाकारों के कल्याण के लिए चार महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

मुख्यमंत्री ने वृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों एवं साहित्यकारों की मासिक पेंशन 3,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये करने की घोषणा की। ये वे कलाकार हैं जिन्होंने जीवनभर कला और साहित्य की साधना की, पर वृद्धावस्था में जीविकोपार्जन से वंचित हैं।

सीएम ने संस्कृति विभाग में सूचीबद्ध सांस्कृतिक दलों के कलाकारों को नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर (NZCC) की तर्ज पर मानदेय और सुविधाएं देने का ऐलान किया। साथ ही प्रत्येक जनपद में प्रेक्षागृह निर्माण और एक राज्य स्तरीय संग्रहालय तथा कुमाऊं व गढ़वाल मंडल में एक-एक मंडलीय संग्रहालय बनाने की घोषणा की।

हिमालय निनाद महोत्सव को हिमालय की आत्मा का उत्सव बताते हुए सीएम धामी ने कहा कि यह केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमालयी परंपराओं, लोक धुनों और साझा चेतना का जीवंत मंच है। उन्होंने इसे आत्ममंथन और नए संकल्प का अवसर करार दिया।

तिब्बत की आध्यात्मिक परंपराएं, असम का बिहू, हिमाचल का खोड़ा, लद्दाख का जोब्रा और उत्तराखंड की लोक कलाएं इस मंच पर एकत्र हुईं। सीएम ने कहा, “भौगोलिक सीमाएं हमें नहीं बांट सकतीं। हम एक साझा हिमालयी विरासत से जुड़े हैं।

राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड हमें बलिदानों और जनसमर्पण के बाद मिला। “उनकी स्मृति को संजोना और नई पीढ़ी को प्रेरित करना हमारा कर्तव्य है। रजत जयंती वर्ष में संस्कृति संरक्षण, विकास और युवा सशक्तिकरण पर जोर दिया जा रहा है। हिमालय निनाद महोत्सव इस दिशा में एक मजबूत कदम है।

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, एनकाउंटर में दो आतंकी ढेर

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श्रीनगर :  जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर सतर्क भारतीय सेना ने पाकिस्तान प्रायोजित घुसपैठ की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। ‘ऑपरेशन पिम्पल’ के तहत चलाए गए संयुक्त अभियान में दो आतंकवादियों को मार गिराया गया। इलाके में तलाशी अभियान अभी भी जारी है और किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

खुफिया सूचना पर त्वरित कार्रवाई

7 नवंबर को खुफिया एजेंसियों से मिली विशिष्ट जानकारी के आधार पर सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने केरन सेक्टर में संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया। सतर्क जवानों ने LoC के पास संदिग्ध गतिविधि देखी और आतंकियों को चुनौती दी। जवाब में आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। सेना की चिनार कोर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया, “संपर्क स्थापित होते ही आतंकियों को घेर लिया गया। दो आतंकी ढेर, इलाके की तलाश जारी।”

कोई जवान घायल नहीं, हथियार बरामद की उम्मीद

सूत्रों के अनुसार, इस मुठभेड़ में भारतीय सेना का कोई जवान घायल नहीं हुआ। आतंकियों के शवों से हथियार, गोला-बारूद और पाकिस्तानी मार्किंग वाले सामान बरामद होने की संभावना है। केरन सेक्टर घने जंगलों और ऊंची चोटियों वाला इलाका है, जहां सर्दियों से पहले घुसपैठ की कोशिशें बढ़ जाती हैं।

सर्दियों से पहले बढ़ी घुसपैठ की कोशिशें

कुपवाड़ा LoC का संवेदनशील हिस्सा है। हाल के महीनों में कई घुसपैठ प्रयास नाकाम किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन स्नोफॉल से पहले घाटी में अराजकता फैलाने की फिराक में हैं। इससे पहले 5 नवंबर को किश्तवाड़ के छत्रू इलाके में भी मुठभेड़ हुई थी।

सेना की मुस्तैदी सराहनीय

चिनार कोर के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने जवानों की सतर्कता की तारीफ की। उन्होंने कहा, “हमारी टुकड़ियां हर चुनौती के लिए तैयार हैं। राष्ट्र की रक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।” उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने हाल ही में केरन सहित फॉरवर्ड पोस्ट्स का दौरा कर जवानों का मनोबल बढ़ाया था।

घाटी में शांति की राह पर जम्मू-कश्मीर

यह सफलता आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है। पिछले एक साल में 150 से अधिक आतंकी मारे जा चुके हैं। स्थानीय लोग सेना की इस कार्रवाई से सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला: आवारा कुत्तों को स्कूलों, अस्पतालों व हाईवे से हटाएं, शेल्टर में टीकाकरण अनिवार्य

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नई दिल्ली | आवारा कुत्तों से जुड़ी बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाते हुए सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नगरपालिकाओं को तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कुत्तों के काटने की ‘चौंकाने वाली’ वृद्धि पर चिंता जताते हुए सड़कों, राज्य हाईवे, राष्ट्रीय राजमार्गों, स्कूलों, अस्पतालों, बस-रेलवे स्टेशनों और खेल परिसरों से सभी आवारा पशुओं को हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन्हें शेल्टर होम्स में रखा जाए, टीकाकरण किया जाए और मूल स्थान पर न छोड़ा जाए, ताकि सार्वजनिक स्थलों पर दोबारा प्रवेश न हो।

हाईवे निगरानी टीमें गठित, फेंसिंग अनिवार्य

पीठ ने आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने के लिए विशेष ‘हाईवे निगरानी टीमें’ गठित करने का निर्देश दिया। ये टीमें पशुओं को पकड़कर शेल्टर में स्थानांतरित करेंगी। इसके अलावा, सभी सरकारी संस्थानों—जैसे अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड, डिपो और रेलवे स्टेशन—को ठीक से घेराबंदी (फेंसिंग) करने का आदेश है, ताकि आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जा सके। कोर्ट ने एनएचएआई और सड़क निर्माण एजेंसियों को आवारा पशुओं को हाईवे से हटाने और शेल्टर में स्थानांतरित करने की जिम्मेदारी सौंपी। यह फैसला एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) रूल्स 2023 के तहत मानवीय तरीके से पशु नियंत्रण पर जोर देते हुए जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देता है।

कुत्तों के काटने की घटनाओं पर कोर्ट की चिंता

सुनवाई के दौरान पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी और अन्य शहरों में बच्चों समेत बढ़ते रेबीज मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा कार्यालय परिसरों में कुत्तों को खिलाने की प्रवृत्ति पिछली निर्देशों का उल्लंघन है। अधिकारियों को आदेश दिया गया कि पकड़े गए कुत्तों को शेल्टर में नसबंदी, टीकाकरण और डीवर्मिंग के बाद ही रखा जाए। कोर्ट ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) को पक्षकार बनाया और एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल को अनुपालन निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी। पीठ ने राज्यों को संसाधनों का विवरण जमा करने और डिफॉल्टिंग अधिकारियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया।

3 नवंबर को चीफ सेक्रेटरी समन

यह मामला जुलाई 2025 में मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो) से शुरू हुआ था, जब दिल्ली-एनसीआर में कुत्तों के काटने से रेबीज मौतें बढ़ीं। कोर्ट ने पहले सभी राज्यों को पक्षकार बनाया और एबीसी नियमों के अनुपालन पर हलफनामा मांगा। 3 नवंबर को पीठ ने डिफॉल्टिंग राज्यों के चीफ सेक्रेटरियों को तलब किया, लेकिन बाद में व्यक्तिगत हाजिरी की जरूरत न होने पर छूट दी। 7 नवंबर की सुनवाई में कोर्ट ने डिजाइनेटेड फीडिंग जोन स्थापित करने और कुत्तों को सार्वजनिक स्थलों से दूर रखने पर जोर दिया।

13 जनवरी को अगली सुनवाई

कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को निर्धारित की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आवारा पशु समस्या से निपटने में मील का पत्थर साबित होगा, लेकिन प्रभावी कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण होगा। पशु अधिकार कार्यकर्ता मानवीय दृष्टिकोण की सराहना करते हैं, जबकि नागरिक सुरक्षा समूह इसे देर से उठाया कदम बताते हैं। अधिकारियों से अपील है कि एबीसी नियमों का कड़ाई से पालन करें, ताकि कुत्तों के काटने की घटनाएं रुकें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक वर्षीय स्मरण कार्यक्रम का उद्घाटन किया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक चलने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। उन्‍होंने vandemataram150.in पोर्टल भी जारी किया। इसमें लोग राष्‍ट्रीय गीत गाते हुए अपनी वीडियो डाल सकते है और प्रमाण-पत्र प्राप्‍त कर सकते हैं।
नई दिल्‍ली में इंदिरा गांधी इंडोर स्‍टेडियम में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम एक मंत्र, एक ऊर्जा, एक सपना और एक संकल्‍प है। उन्‍होंने इसकी सराहना करते हुए कहा कि यह भारत माता के प्रति भक्ति और श्रद्धा है जो हमें इतिहास की याद दिलाता है, वर्तमान को आत्‍मविश्‍वास से भर देता है और भविष्‍य में एक नए साहस का संचार करता है जिससे यह विश्‍वास पैदा होता है कि किसी भी संकल्‍प और लक्ष्‍य पूरा किया जा सकता है। उन्‍होंने वंदे मातरम के सा‍मूहिक गान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसके सुखद अहसास को शब्‍दों में व्‍यक्‍त नहीं किया जा सकता। उन्‍होंने कहा बंकिमचंद्र चट्टोपाध्‍याय ने इस गीत के माध्‍यम से स्‍वतंत्र, एकजुट और समृद्ध भारत का आह्वान किया था।
प्रधानमंत्री ने बताया कि गुरूदेव रविन्‍द्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था कि बंकिमचंद्र का आनंद मठ केवल एक उपन्‍यास नहीं हैं, यह स्‍वतंत्र भारत का सपना है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्‍याय के लिखे हर शब्‍द का गूढ मतलब था। प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम गीत हर युग में प्रासंगिक है। इस अवसर पर दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल विनय कुमार सक्‍सेना, केंद्रीय संस्‍कृति और पर्यटन मंत्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत और दिल्‍ली की मुख्‍यमंत्री रेखा गुप्‍ता शामिल थीं। श्री शेखावत ने कहा कि वंदे मातरम एक गीत नहीं बल्कि राष्‍ट्रीयता की अभिव्‍यक्ति है।
उन्‍होंने कहा कि इस गीत ने स्‍वतंत्रता सेनानियों के दिलों में विद्रोह की भावना प्रज्‍जवलित की थी, जिन्‍होंने अपनी आखिरी सांस तक इस गीत को अपनी जुबां पर रखा था। उन्‍होंने कहा कि इसने तब से देश के लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार किया है। उन्‍होंने कहा कि वंदे मातरम एक भारत, श्रेष्‍ठ भारत के मंत्र के रूप में हमेशा प्रासंगिक रहेगा और एक सौ 40 करोड़ भारतीयों की शक्ति को एकसूत्र में बांधे रखेगा।
समारोहों में सभी वर्गों के लोगों की भागीदारी के साथ सार्वजनिक स्थानों पर “वंदे मातरम” के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गान किया जाना है। वंदे मातरम की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने अक्षय नवमी 7 नवंबर 1875 को की थी। यह पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के एक भाग के रूप में प्रकाशित हुआ था। मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता के प्रतीक के रूप में याद करते हुए यह गीत भारत की एकता और राष्ट्रीय गौरव का स्थायी प्रतीक बन गया।