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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव : डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाया, हिलेरी क्लिंटन पिछड़ीं

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वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप ने सभी को चौंकाते हुए एक्ज़िट पोलों के मुताबिक महत्वपूर्ण राज्यों फ्लोरिडा, उत्तरी कैरोलिना तथा ओहायो में जीत हासिल कर ली है, और डेमोक्रेट प्रत्याशी हिलेरी क्लिंटन के मुकाबले व्हाइट हाउस की दौड़ में आगे दिख रहे हैं.
यूएस नेटवर्क्स की भविष्यवाणी के मुताबिक, अमेरिका के 240 साल के इतिहास में प्रथम महिला राष्ट्रपति बनने का सपना देख रहीं डेमोक्रेट प्रत्याशी हिलेरी क्लिंटन को ज़ोरदार झटके देते हुए रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप प्रमुख राज्य ओहायो के बाद फ्लोरिडा और उत्तरी कैरोलिना में भी जीत हासिल करने जा रहे हैं. इन एक्ज़िट पोलों पर यकीन करें तो 18 राज्यों में डेमोक्रेट प्रत्याशी हिलेरी क्लिंटन को जीत हासिल होने जा रही है, जबकि रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप को 25 राज्यों में जीत मिलेगी.
भारतीय समयानुसार सुबह 11:00 बजे, एक्ज़िट पोल के मुताबिक रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के पास 244 इलेक्टोरल कॉलेज वोट थे, जबकि डेमोक्रेट हिलेरी क्लिंटन के पास 215 वोट थे. राष्ट्रपति पद पर काबिज होने के लिए प्रत्याशी को 270 इलेक्टोरल कॉलेज वोट हासिल करना ज़रूरी है.
एक्ज़िट पोलों के अनुसार, ऊटा, आयोवा, फ्लोरिडा, उत्तरी कैरोलिना, दक्षिणी कैरोलिना, केन्टकी, वेस्ट वर्जीनिया, इंडियाना, ओकलाहोमा, टेनेसी, अलाबामा, मिसीसिपी, टेक्सास, कन्सास, व्योमिंग, उत्तरी डकोटा, दक्षिणी डकोटा, अरकान्सास, नेब्रास्का, लूसियाना, मोन्टाना, ओहायो, मिसूरी, जॉर्जिया तथा इदाहो में ट्रंप को जीत मिली, जबकि हिलेरी क्लिंटन को वरमॉन्ट, डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया, मैसाच्यूसेट्स, मेरीलैंड, डेलावर, इलिनॉयस, रोड आईलैंड, न्यूजर्सी, न्यूयार्क, कनेक्टिकट, न्यू मैक्सिको, वर्जीनिया, कोलोराडो, कैलिफोर्निया, ओरेगॉन, वॉशिंगटन, नेवाडा तथा हवाई में जीत मिली है.
गौरतलब है कि चुनाव से पहले रॉयटर / आईपीएसओएस के राष्ट्रीय ट्रैकिंग पोल में हिलेरी क्लिंटन को ट्रंप पर बढ़त मिली हुई थी. रॉयटर / आईपीएसओएस के पोल के मुताबिक हिलेरी क्लिंटन के जीतने की संभावनाएं 90 फीसदी हैं.
हालांकि ट्रंप ने मंगलवार को एक बार फिर चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए परिणामों को स्वीकार नहीं करने की बात कही. उन्होंने कुछ जानकारी दी. हालांकि रॉयटर्स तत्काल ऐसी समस्याओं की सत्यता को प्रमाणित नहीं कर सकती.
एक-एक वोट के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन और उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी क्षणों में अमेरिकी जनता के समक्ष जोरदार बहस की. उन्होंने विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए अपनी दूरदृष्टि पेश की. इस तरह, अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे निम्न स्तरीय चुनाव प्रचार अभियान समाप्त हो गया.
नार्थ कैरोलीना के राले में एक विशाल रैली में हिलेरी (69) के साथ उनके पति भी थे. वहां पॉप गायिका लेडी गागा ने लोगों का मनोरंजन भी किया. ट्रंप (70) का आखिरी कार्यक्रम मिशिगन में हुआ, जहां उन्होंने अपने हजारों समर्थकों को इस उम्मीद के साथ संबोधित किया कि वह इस राज्य को रिपब्लिकन पार्टी की झोली में डालने में सक्षम हो सकते हैं.
दोनों रैलियां स्थानीय समय के मुताबिक रात एक बजे खत्म हुई थी. इस तरह ईस्ट कोस्ट में मतदान केंद्र खुलने से ठीक छह घंटे पहले ये खत्म हुई.
न्यू हैम्पशायर के एक गांव में पहला वोट पड़ा, चुनाव के दिन पारंपरिक रूप से वोट डालने वाला राष्ट्र में यह पहला स्थान है जहां हिलेरी ने जीत हासिल की. हिलेरी ने 2016 के चुनाव में न्यू हैम्पशायर के दूर दराज के डिक्सविले नोश में आधी रात के शीघ्र बाद पहली जीत ट्रंप को मिले दो वोट के खिलाफ चार वोटों से हासिल की.
270 निर्वाचक मंडल वोट हासिल करने के लिए अरीजोना (11), फ्लोरिडा (29), नेवादा (6), नेब्रास्का दूसरा कांग्रेस जिला (1), न्यू हैम्पशायर (4) और नार्थ कैरोलीना (15) मुख्य रणक्षेत्र हैं.
देश का 45 वां राष्ट्रपति चुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस सदस्यों, प्रांतीय विधायिकाओं के सदस्यों और स्थानीय निकायों के सदस्यों के अलावा करीब 20 करोड़ लोग वोट डालने के योग्य हैं.
अमेरिकी चुनाव प्रणाली के ‘पहले ही मतदान करने’ के प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए रिकार्ड 4.2 करोड़ लोग पहले ही वोट डाल चुके हैं. यह 2012 के आंकड़े को पार कर गया है जब 3.23 करोड़ लोगों ने पहले ही वोट डाला था.

PAK में हिंदू मंदिर को गिराए जाने के खिलाफ कोर्ट में याचिका

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पेशावर के पुराना शहर इलाके में स्थित हिंदुओं के 150 वर्ष पुराने मंदिर को ‘गुपचुप ढंग से गिराए जाने’ के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. बताया गया है कि इस प्राचीन मंदिर की जगह कॉमर्शियल प्लाजा बनाने की कोशिश की जा रही है. इस मंदिर में श्रद्धालुओं का आना-जाना बरसों पहले बंद हो गया था.
‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक पेशावर हाई कोर्ट में मुहीबुर रहमान और वाकिफ सलीम ने सोमवार को याचिका दाखिल की. याचिका में मांग की गई है कि इस मंदिर का प्रशासनिक नियंत्रण आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट को सौंपा जाए.
याचिका में कहा गया है कि मंदिर की इमारत में कथित तौर पर बदलाव किए जाने का मुद्दा कुछ महीने पहले सामने आया था, इसके बाद सरकार ने संपत्ति को सील करने के साथ इसमें रहने वाले दो किराएदारों को गिरफ्तार किया था.
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टीज डिपार्टमेंट के साथ साठ-गांठ कर उन तत्वों (किराएदारों) ने मंदिर को गिरा कर प्लाजा का निर्माण शुरू कर दिया. याचिका में कई अखबारों की रिपोर्ट और उनके साथ प्रकाशित फोटो का हवाला देते हुए कहा कि मंदिर को गुपचुप ढंग से गिराया जा रहा है. ये मंदिर करीमपुरा इलाके के मोहल्ला वांगडी गारा में स्थित है. 150 वर्ष पुराना होने के बावजूद मंदिर का ढांचा मजबूत हालत में बताया गया.
याचिका में खैबर पख्तून्ख्वा प्रांत की सरकार के प्रवक्ता के बयान का भी हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा- सरकार ने इस मामले में कदम उठाए क्योंकि संविधान अल्पसंख्यकों को समान अधिकार और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की गारंटी देता है.
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि डिप्टी कमिश्नर और आर्कियोलॉजी डायरेक्टर डॉ अब्दुल समद खान ने मंदिर का मुआयना करने के बाद इसके परिसर को सील कर दिया था. लेकिन इसके बावजूद ऊंची पहुंच वाले तत्व मंदिर को गिराने का काम करते रहे और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे.

कुंबले ने टीम में वापसी के लिए बनाया नया रुल, क्रिकेटर्स की बढ़ेगी मुश्किल

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राजकोट: शिखर धवन, रोहित शर्मा, भुवनेश्वर कुमार और केएल राहुल ये सभी खिलाड़ी इन दिनों चोट से परेशान हैं, वहीं सुरेश रैना बीमारी की वजह से न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे में नहीं खेल पाए थे. अभी तक टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी चोट के बाद सीधे टीम में वापसी कर लेते थे, लेकिन अब मुख्य कोच अनिल कुंबले ने इसके लिए एक ‘कायदा’ बना दिया है. इसके अनुसार चोट से उबर रहे खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में वापसी करने पर अपने नाम का विचार कराने के लिए ‘‘घरेलू क्रिकेट’’ में खेलना होगा. हालांकि कोच कुंबले रोहित शर्मा और केएल राहुल के चोटिल होने से काफी दुखी भी हैं…
कुंबले ने वापसी के लिए नई योजना इसलिए बनाई है, क्योंकि बीते समय में कई बार ऐसा हुआ है कि जब खिलाड़ी गंभीर चोट के बाद तेजी से वापसी के चक्कर में अधिक चोटिल हो गए और उन्हें लंबे समय तक बाहर बैठना पड़ा. कोच कुंबले ने राहुल और रोहित के लिए बहुत दुख जताया. गौरतलब है कि रोहित शर्मा को न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के अंतिम वनडे में जांघ में गंभीर चोट लगी थी, जिसकी सर्जरी की जरूरत हो सकती है.
अनिल कुंबले ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केएल राहुल जो इतना बढ़िया खेला, अब नहीं खेल रहा. इसी तरह भुवी, शिखर. रोहित के लिए यह बड़ा झटका है. रोहित के लिए बहुत दुखी हूं, क्योंकि वह टेस्ट प्रारूप में बढ़िया कर रहा था. निश्चित रूप से हम रोहित की छोटे प्रारूप में अहमियत जानते हैं. ’’
रोहित शर्मा, के एल राहुल, शिखर धवन और भुवनेश्वर कुमार चोटिल खिलाड़ियों की सूची में शामिल हैं. कुंबले को लगता है कि ‘खिलाड़ियों के साथ बातचीत इसमें अहम है’, क्योंकि उनकी वापसी की उत्सुकता को समझा जा सकता है.
कुंबले ने कहा, ‘‘किसी भी टीम की गतिविधि में बातचीत अहम है. अच्छा कर रहे हैं या नहीं, लेकिन चोटिल खिलाड़ियों के साथ बातचीत इतनी ही अहम है. इस खेल को खेलने के बाद मैं जानता हूं कि जब कोई और खिलाड़ी खेल रहा होता है तो उनके दिमाग में क्या चल रहा होता है. वह उम्मीद करता है कि उसकी टीम और वह खिलाड़ी अच्छा करे, लेकिन उन्हें एक साथ रखना काफी अहम होता है.’’

बड़े पर्दे पर एक बार फिर 'पार्टनर' बन सकते है सलमान खान और गोविंदा

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बॉलीवुड के गलियारों में इस बात की चर्चा खूब जोरों पर है कि साल 2007 में आई सलमान खान और गोविंदा की हिट फिल्म ‘पार्टनर’ का सीक्वल बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इस फिल्म में सलमान-गोविंदा की जोड़ी फिर से दिखेगी या किसी फ्रेश जोड़ी को लिया जाएगा.
इसके पहले साल 2011 में भी ऐसी खबरें आईं थीं कि सलमान खान इस फिल्म के सीक्वल में काफी रुचि ले रहे हैं, लेकिन तब बात कुछ बन नहीं पाई. कहा ये भी जा रहा है कि पार्टनर फिल्म के डायरेक्टर डेविड धवन सीक्वल को डायरेक्ट नहीं करेंगे क्योंकि वो 1997 में आई अपनी कॉमेडी फिल्म ‘जुड़वां’ का सीक्वल बनाने में लगे हैं, जिसमें उनके बेटे वरुण धवन काम कर रहे हैं.
अब इस बात की चर्चा है कि फिल्म के निर्देशक के रूप में साजिद-फरहाद को लिया जा रहा है. ‘पार्टनर’ से गोविंदा ने बॉलीवुड में वापसी की थी और से गोविंदा की आखिरी हिट फिल्म भी कहा जा सकता है.
फिल्म में गोविंदा, सलमान खान, कटरीना कैफ और लारा दत्ता लीड रोल में थे.

'शिवाय' ने बॉक्स ऑफिस पर पकड़ी अच्छी रफ्तार, दूसरे वीकेंड पर कमाए 16 करोड़

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‘शिवाय’ का टिकट खिड़की पर दूसरा वीकेंड शानदार रहा है। इस फिल्म ने पिछले तीन दिन में 16 करोड़ के करीब कमाई की है।
शुक्रवार को इसेे 4.61 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। शनिवार को इसे 5.40 करोड़ मिले। संडे को आंकड़ा छह करोड़ के करीब रहा। कुल मिलकार इसे अभी तक 87 करोड़ रुपए का नफा हुआ है।
अब यह तो इत्मिनान से कहा जा सकता है कि दूसरे हफ्ते की कमाई के दौरान यह फिल्म 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर लेगी। लाइफ टाइम बिजनेस जरूर 125 करोड़ रुपए के करीब होगा, जिसे अच्छा नहीं कहा जा सकता क्योंकि फिल्म की लागत काफी है।
गुरूवार को इसने लगभग 6.05 करोड़ रुपए कमाई की थी। सिंगल सिनेमा के दम पर यह फिल्म काफी आगे तक आ गई है। बुधवार को इसने 7.40 करोड़ रुपए की कमाई की थी। वैसे टिकट खिड़की पर फिल्म को खास जंप सोमवार को मिला था, जिसका असर मंगलवार को भी ‍‍देखने को मिला। मंगलवार को देश के कई हिस्सों में छुट्टी थी जिसके कारण फिल्म की 11 करोड़ रुपए की कमाई हुई। मंडे की छुट्‍टी पर अजय देवगन की इस फिल्म ने 17.35 करोड़ रुपए की कमाई की थी। पहले दिन इसे टिकट खिड़की पर मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला था और फिल्म ने 10.24 करोड़ रुपए कमाए थे। शनिवार को यह आंकड़ा दस करोड़ रुपए पर आ गया। संडे को इसने सिर्फ 8.26 करोड़ रुपए कमाए।
‘ऐ दिल है ‍‍मुश्किल’ कुल कमाई के मामले में आगे है और लगभग दस करोड़ रुपए की बढ़त बनाए हुए है। बता दें कि दिवाली के ठीक पहले वाले शुक्रवार को दो बड़ी फिल्मों ‘ऐ दिल है मुश्किल’ और ‘शिवाय’ ने बॉक्स ऑफिस लड़ाई के लिए मैदान संभाला था। लागत के मामले में ‘शिवाय’ महंगी फिल्म है। अजय देवगन ने एक्शन सीन्स पर जमकर पैसा खर्च किया है। तमाम खर्च मिलाकर यह 100 करोड़ से ऊपर की लागत रखती है जबकि करण जौहर की फिल्म 80 करोड़ में रिलीज लायक बनी है।

युद्ध विकल्प नहीं, शांति संभव नहीं… तो क्या करे भारत?

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कश्मीर घाटी के उड़ी में भारतीय सेना के शिविर पर आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। पाकिस्तान की किसी भी तरह के हमले की तैयारियों के बीच भारत भी सीमा पर अपनी तैयारी मजबूत करने लगा है। करीब 778 किलोमीटर लंबी एलओसी पर जवानों की नए सिरे से और ज्यादा संख्या में तैनाती की जा रही है। साथ ही हथियार और फ्यूल भी जमा किये जा रहे हैं। निश्चित रूप से ये तैयारियां जंग जैसे हालात की तरफ इशारा करती है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ट्वीट में लिखा- हमारे रक्षक आसमान में देश की सुरक्षा के लिए तैयार हैं। हमारे लड़ाकू विमान पिछले दो दिन से हाई प्रोफाइल लैंडिंग और उड़ान का अभ्यास कर रहे हैं। जियो टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की तरफ से सर्जिकल स्ट्राइक होने की स्थिति में पाकिस्तान इन टारगेट को तुरंत निशाना बना सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान ने एक ऑपरेशन की प्लानिंग भी की है। भारतीय सेना की तरफ से अगर चुनौती दी जाती है तो इसे अंजाम दिया जाएगा। ‘पाक डिफेंस सोर्सेज का यह भी कहना है कि भारत ने अगर हमला किया तो पाकिस्तान भी चुप नहीं बैठेगा। अगर कोल्ड वॉर, हॉट वॉर में बदलती है तो हम इसके लिए तैयार हैं।’
यह बात सच है कि किसी भी युद्ध ने आज तक इंसानियत का झंडा नहीं लहराया है। युद्ध किसी भी समस्या का ना तो हल है और ना ही विकल्प। भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद की जड़ में चाहे मुद्दा कश्मीर का हो या फिर पाकिस्तान से भारत में आतंकियों की आमद, इसे सुलटाने के लिए युद्ध कोई विकल्प नहीं हो सकता है। कश्मीर को हथियाने की कोशिश में भारत और पाकिस्तान के बीच अभी तक तीन युद्ध हो चुके हैं लेकिन समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुईं हैं। युद्ध अगर विकल्प नहीं है तो अगला कदम क्या होना चाहिए?
संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के कुछ शक्तिशाली देश मसलन अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन आदि हमेशा से इस बात पर जोर देती रही है कि कश्मीर के मुद्दे को भारत और पाकिस्तान आपसी बातचीत से हल करें। लेकिन सवाल यह उठता है कि आपसी बातचीत का सिलसिला आखिर कब तक चलता रहेगा। छह दशक से ज्यादा समय से शांति की खातिर द्विपक्षीय वार्ता का दौर चला आ रहा है। अब जबकि इसमें आतंकवाद का जिन्न पूरी तरह से पाकिस्तान की सेना, पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई में प्रवेश कर चुका है तो कोई यह कहे कि द्विपक्षीय वार्ता से नतीजा निकाला जाए, यह खुद को दिग्भ्रमित करने जैसा होगा। कहने का तात्पर्य यह कि आज के हालात में बातचीत के जरिये भारत-पाक में शांति बहाल करने संभव नहीं है।
युद्ध विकल्प नहीं और शांति संभव नहीं तो फिर पाकिस्तान का क्या करे भारत? इस सवाल का जवाब हालांकि आसान नहीं है। लेकिन यह भी कहने में कोई संकोच नहीं कि भारत के सामने कूटनीतिक घेराबंदी के अलावा और कोई रास्ता बचता नहीं है। भारत यह कूटनीतिक घेराबंदी करता भी रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसको समर्थन भी मिलता रहा है, लेकिन यह घेराबंदी तब कहीं ज्यादा कारगर होगी जब भारत की ताकत और हैसियत को लेकर दुनिया अपनी राय बदले। सीधा मतलब यह है कि भारत जितना मजबूत होगा, दुनिया उसकी बात भी उतनी ही ज्यादा सुनेगी। इस मजबूती का वास्ता सैन्य मजबूती भर से नहीं है, उस आर्थिक हैसियत से भी है जिससे हम दुनिया को प्रभावित कर सकें। इस आर्थिक हैसियत के साथ वह सामाजिक समरसता भी जरूरी है जिससे भारत को अंदरूनी ताकत मिलती है।
दरअसल उड़ी में भारतीय सेना पर हमले के बाद देशभर में दो तरह की प्रतिक्रिया सामने आई है। पहली प्रतिक्रिया में पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने पर जोर है ताकि दुनिया (खासतौर पर अमेरिका) इसके साथ बदमाश राष्ट्र या आतंकवाद पोषित राष्ट्र जैसा व्यवहार करे। और दूसरी प्रतिक्रिया में ईंट का जवाब पत्थर से देने की युद्धोन्मादी बात की जा रही है। हालांकि दोनों ही रास्तों से हम वहां नहीं पहुंच सकते जो भारत जैसे राष्ट्र को चाहिए। पाकिस्तान को अलग-थलग करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे पाकिस्तान सरकार कमजोर होगी और आतंकी गुटों को अधिक ताकत व समर्थन मिलेगा। हमारे लिए पड़ोस में सीरिया या इराक (आईएसआईएस के साथ) पैदा होने का जोखिम रहेगा। ईंट का जवाब पत्थर से देने में परमाणु युद्ध का खतरा है, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि को गंभीर नुकसान होगा।
इसके लिए स्पष्ट रणनीति की जरूरत है। कोई यह सोचता है कि पाकिस्तान की सरकार आतंकवाद को रोक सकता है तो यह नादान सोच होगी। इसलिए भारत के पास एक ही विकल्प बचता है और वह है सटीक आर्थिक रणनीति को अंजाम देना। इस रणनीति में पाकिस्तान और चीन के गठजोड़ को भी ध्यान में रखना होगा। सामरिक दृष्टि से भारत के मुकाबले चीन बेहद ताकतवर राष्ट्र है और चीन कभी नहीं चाहेगा कि भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध कायम हो। ऐसे में भारत के खिलाफ चीन हमेशा पाकिस्तान को आर्थिक व सामरिक मदद देता रहेगा। ऐसे कई मौके आए हैं जब चीन ने भारत के बजाए पाकिस्तान की बात को गंभीरता से लिया है। अक्साई चीन के 37, 240 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर अवैध तरीके से ड्रैगन ने कब्जा किया हुआ है। कश्मीर मुद्दे का एक अहम हिस्सा चीन भी है। जिस अंदाज में चीन ने अजहर मसूद जैसे आतंक के आकाओं को बचाने की कोशिश की यह चीन की पाकिस्तान के साथ घनिष्ठता दिखाता है।
दरअसल, पाकिस्तान के साथ चीनी आत्मीयता की कहानी के पीछे सीपीईसी यानी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा असल वजह है। ये कॉरीडोर बलोचिस्तान के ग्वादर और चीन के जिंजियांग को समुद्र मार्ग से जोड़ेगा। जाहिर है चीन खुद को एशिया में इकोनॉमिक लीडर के तौर पर पेश करने की ख्वाहिश रखता है और सीपीईसी इसी का नतीजा है। वैसे चीन द्वारा इस अतिसंवेदनशील इलाके में करीब 46 बिलियन डॉलर का निवेश यह बताने के लिए काफी है कि चीन चाहता क्या है। चीन को लग रहा है कि पैसों के बल पर वह बलोचिस्तान के बुग्ती, खैबर-पख्तून इलाके के पठानों और जिंजियांग प्रांत के उइगर समुदाय को अपना गुलाम बना लेगा और अपने मंसूबों को यानी आर्थिक विस्तारवाद की नीति को मूर्त रूप दे पाएगा।
इस परियोजना की अनुमानित अवधि 15 साल है और इसके अन्तर्गत बलोचिस्तान के ग्वादर पोर्ट से चीन के शिनजियांग प्रान्त तक एक आर्थिक क्षेत्र विकसित करने की योजना है। सीपीईसी की शुरुआत बलोचिस्तान में ग्वादर पोर्ट से होती है। सीपीईसी का बड़ा हिस्सा पाक अधिकृत कश्मीर, गिलगित और बल्तिस्तान से होकर गुजरेगा जो विवादित इलाका है। भारत इसे अपना हिस्सा मानता है। इतने जोखिम भरे प्रोजेक्ट में अगर चीन ने निवेश किया है तो उसकी कोशिश यह भी होनी चाहिए थी कि जिस रास्ते से गलियारा बने उसमें आतंकवाद का साया ना हो। आदर्श स्थिति तो ये थी कि वो भारत में सीमा-पार आतंकवाद की पाकिस्तानी कार्रवाई का विरोध करता, लेकिन हालात इसके उलट हैं। वह पाकिस्तान की नापाक हरकतों को प्रश्रय दे रहा है, जिससे दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच तकरार बढ़ गई है।
हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों को आश्रय देने की नीति को चीन देखना ही नहीं चाहता। वह जानबूझ कर पाकिस्तान द्वारा हिजबुल मुजाहिदीन, अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों को बढ़ावा देने की नीति पर खामोश है। संबंधित भारतीय तकनीकी दल ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस को इस संबंध में साक्ष्य मुहैया कराये, जिसके आधार पर इन देशों ने इस आतंकी समूह पर पाबंदी की सहमति जताई, लेकिन ‘यूनाइटेड नेशंस सेंक्शंस कमेटी’ द्वारा मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने की मुहिम को चीन ने यह कहते हुए समर्थन नहीं दिया कि यह मसला सुरक्षा परिषद द्वारा ‘तय मानदंडों’ के अनुरूप नहीं है।
चीन पाकिस्तान पर शायद इसलिए भी खामोश है क्योंकि वह उइगर समुदाय में बढ़ते असंतोष को कुचलने में पाकिस्तान की मदद चाहता है। उइगर को दबाकर रखने के एवज में जो लाभ वह पाकिस्तान को पहुंचा रहा है उससे अन्य आतंकी संगठन मजबूत हो रहे हैं। यही वजह है कि चीन ने भारत द्वारा जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद को आतंकी करार देने वाले प्रस्ताव को हर मंच पर नजरअंदाज किया।
दरअसल, चीन आर्थिक और सामरिक सहयोग सहित अलग-अलग तरीकों से पाकिस्तान को उपकृत कर उसे भारत के साथ उलझाये रखना चाहता है, ताकि भारत दक्षिण एशिया में सामरिक या आर्थिक दृष्टि से चीन की समानांतर शक्ति बनकर न उभर सके। ऐसे में सवाल यह उठता है कि भारत ऐसा क्या करे कि चीन को पाकिस्तान के आतंकी कैम्पों को लेकर अपनी राय बदलनी पड़े? विशेषज्ञों की राय है कि जिस तरह सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारत चीन के प्रति सजग दिखता है वही सजगता उसे आर्थिक क्षेत्र में भी दिखानी होगी। तेजी से बढ़ते व्यापार में 40 बिलियन डॉलर के घाटे की अहमियत ड्रैगन को समझानी होगी।
इस व्यापार व्यवस्था में भारत को उन चीनी कम्पनियों को निशाने पर लेना होगा जो पाकिस्तान के साथ भी व्यापार करती हैं। उन्हें हमें ‘ना’ कहना होगा। इसका कहीं ना कहीं चीन पर असर जरूर पड़ेगा। हो सकता है एक अवधि के लिए भारत को व्यावसायिक तौर पर नुकसान झेलना पड़े, लेकिन देश की सुरक्षा और पाकिस्तान की गीदड़ भभकी को आईना दिखाने के लिए ये सटीक कदम होगा। संभव है चीन का रूख पाकिस्तान को लेकर थोड़ा बदल जाए।
पाकिस्तान की तरफ से भारतीय सीमा में लगातार आतंकी हमले को अंजाम दिए जाने के बीच भारत को एक और कठोर फैसला लेना चाहिए। वह यह कि पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा तत्काल प्रभाव से वापस ले लेना चाहिए। इससे पाकिस्तान को कई मसलों पर भारत का समर्थन नहीं मिल सकेगा और पाकिस्तान को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों को लेकर एमएफएन स्टेटस दिया जाता है। एमएफएन स्टेटस दिए जाने पर वह देश इस बात को लेकर आश्वस्त रहता है कि उसे व्यापार में किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। मालूम हो कि भारत ने पाकिस्तान को 1996 में एमएफएन का दर्जा दिया था। इससे पाकिस्तान को अधिक आयात कोटा और कम ट्रेड टैरिफ मिलता है। खास बात यह है कि बदले में पाकिस्तान ने आश्वासन देने के बावजूद दो दशक बीतने को हैं, भारत को अब तक पाकिस्तान ने एमएफएन का दर्जा नहीं दिया है।

विनाशकारी है ये स्‍मॉग! कई देशों को कर चुका है तबाह, ले चुका है हजारों जिंदगियां

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दिल्ली और एनसीआर में छाई धुंध और वायु प्रदूषण ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. हवा बेहद जहरीली हो चुकी है. अगर हालात जल्द सुधरे तो लंदन जैसे हालात बन सकते हैं. दिल्ली की हवा की क्वॉलिटी निचले स्तर पर पहुंच गई है. हवा में मौजूद कई किस्म के छोटे कण वैसे ही खराब हैं, जैसे 1952 में लंदन में हुए थे.
लंदन में 1952 में हुई इस घटना को ‘ग्रेट स्मॉग’ या ‘बिग स्मोक’ कहा जाता है. यह घटना दिसंबर में हुई थी. लंदन में पांच दिसंबर से नौ दिसंबर 1952 तक जबरदस्त वायु प्रदूषण की स्थ‍िति रही.
ऐसा शहर के ऊपर बने एंटी-साइक्लोन की स्थ‍िति, हवा नहीं चलने और कोयले के इस्तेमाल से हवा में घुले प्रदूषकों की वजह से हुआ था. लंदन शहर के ऊपर स्मॉग की मोटी परत जम गई थी.
स्मॉग की वजह से हालात इतने बिगड़ गए कि करीब 4 हजार लोग इसकी चपेट में आकर मारे गए थे. बताया जाता है कि उस घटना के दौरान 10 से 12 हजार लोग प्रभावित हुए थे.
वैसे तो लंदन की हवा इससे पहले भी कई बार खराब हुई थी लेकिन 1952 जैसी न तो पहले कभी बनी थी और न ही अभी तक वैसे हालात बने हैं. इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार ने पर्यावरण की शुद्धता के लिए तमाम कदम उठाए. संसद में क्लीन एयर एक्ट 1956 पारित किया गया.
चीन की राजधानी बीजिंग में भी कुछ वर्षों से ऐसे हालात पैदा हो रहे हैं. यहां ठंड के मौसम में हर साल स्मॉग की स्थिति बन जा रही है. हालत यह है कि बीजिंग की गिनती चीन के सबसे प्रदूषित शहरों में टॉप पर होने लगी है. हालांकि चीन की सरकार ने प्रदूषण से बचने के लिए कई कदम उठाए हैं.
भारत की राजधानी दिल्ली में स्मॉग के ऐसे हालात पहली बार बने हैं. भारत को चीन से सबक लेनी चाहिए. चीन में कार्बन उत्सर्जन का मुख्य कारक कोयला है. चीन ने 2017 तक कोयले के इस्तेमाल में 70 फीसदी कटौती और 2020 तक कोयला मुक्ति का लक्ष्य बनाया है.
चीन 2008 तक वायु प्रदूषण का डाटा गुप्त रखता था. अब उसने 1500 साइट्स के ऑनलाइन एयर रिपोर्टिंग व्यवस्था शुरू की है. 1 जनवरी 2015 से चीन में पर्यावरण संरक्षण कानून सख्ती से लागू हैं.
चीन ने सड़कों पर गाड़ी चलाने के लिए कड़े बंदोबस्त किए हैं. 2017 तक ऐसी सभी गाड़ियों को हटाने का लक्ष्य रखा है जो 2005 तक रजिस्टर्ड हुई.
स्मॉग के कहर से न सिर्फ भारत की राजधानी दिल्ली, बल्कि पड़ोसी मुल्क भी परेशान है. पिछले कुछ दिनों से लाहौर समेत पंजाब प्रांत और कराची समेत पाकिस्तान के तमाम औद्योगिक शहर स्मॉग की मार झेल रहे हैं. लाहौर और कराची शहरों में आंखों में जलन और सांस से जुड़ी दिक्कतों की शिकायत कर रहे हैं. इन दिक्कतों की वजह से कई लोग अस्पताल में भर्ती भी हुए हैं. पाकिस्तान का कहना है कि भारत के पंजाब प्रांत में खेतों में जलने वाली फसल से उसके यहां यह हाल है.

NDTV इंडिया पर एक दिन के बैन के अपने आदेश को स्थगित किया

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नई दिल्ली: सूचना प्रसारण मंत्रालय ने NDTV इंडिया पर एक दिन के बैन लगाने के अपने आदेश को स्थगित कर दिया है. अपने हिन्दी चैनल NDTV इंडिया पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए एक दिन के प्रतिबंध को NDTV ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कल यानी मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी.
सरकार ने NDTV इंडिया पर इसी साल जनवरी में पठानकोट एयरफोर्स बेस पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान संवेदनशील जानकारी का प्रसारण करने का आरोप लगाते हुए बुधवार, 9 नवंबर को उसे एक दिन के लिए ऑफएयर रखे जाने का आदेश दिया है.
NDTV ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा था कि अन्य चैनलों तथा समाचारपत्रों ने भी वही जानकारी दिखाई या रिपोर्ट की थी.
इस प्रतिबंध की पत्रकारों और संपादकों ने चौतरफा आलोचना की . सभी प्रेस काउंसिलों ने इसे ’70 के दशक में देश में लागू की गई एमरजेंसी के समान बताया, जब प्रेस की आज़ादी सहित सभी मूल संवैधानिक अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन किया गया था.
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा था कि अपनी तरह के इस पहले आदेश से पता चलता है कि केंद्र सरकार समझती है कि “उसे मीडिया के कामकाज में दखल देने और जब भी सरकार किसी कवरेज से सहमत न हो, उसे अपनी मर्ज़ी से किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है…” देश के सभी बड़े समाचारपत्रों तथा पत्रिकाओं के संपादकों के समूह ने कहा था कि अगर सरकार को किसी मीडिया कवरेज में कुछ आपत्तिजनक लगता है, तो वह कोर्ट जा सकती है.
उधर, इस प्रतिबंध का बचाव करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा था कि यह प्रतिबंध ‘देश की सुरक्षा के हित में है’, तथा इस मुद्दे पर की जा रही सरकार की आलोचना ‘राजनीति से प्रेरित’ लगती है.

भारत के 'स्मॉग बम' से घबराया पाकिस्तान, लाहौर और कराची आए जद में

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दिल्ली-एनसीआर में हफ्ते भर से छाया स्मॉग पड़ोसी मुल्क तक पहुंच गया है. पंजाब से सटे पाकिस्तान के लाहौर और कराची में ‘स्मॉग बम’ से सभी हैरान हैं.
बीते तीन-चार दिनों से लाहौर शहर के आसमान में धुंध की तरह छाई है. लोगों ने आंखों में खुजली और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की है. आपको बता दें कि लाहौर में ऐसे हालात पहली बार बने हैं. पाकिस्तान के मौसम विभाग का कहना है कि इस तरह के हालात समूचे पंजाब प्रांत में नवंबर से दिसंबर तक रह सकते हैं.
पाकिस्तान की शिकायत है कि भारत के पंजाब में किसान अपने खेतों में फसलें कटने के बाद बचा-खुचा भूसा खेतों में जला देते हैं. इस वजह से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और कराची समेत देश के तमाम औद्योगिक शहरों में स्मॉग का कहर है. लाहौर से इस्लामाबाद के बीच मोटरवे पर भी दृश्यता कम है. इस मोटरवे पर वाहनों की काफी आवाजाही रहती है. मोटरवे के अधिकारियों ने लोगों को धीमी स्पीड से चलने और फॉग लैंप का इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
पाकिस्तान के मौसम विभाग ने कहा है कि चूंकि नवंबर और दिसंबर में बारिश की संभावना बिल्कुल ही नहीं है, ऐसे में स्मॉग से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. खासकर शहरी इलाके स्मॉग से ज्यादा प्रभावित होंगे. पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ने स्मॉग को गंभीरता से लेते हुए मौसम के हालात पर नजर रखने के लिए एक कमेटी का गठन भी किया है.
पंजाब की सरकार स्मॉग से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों और सड़क हादसों के मद्देनजर स्कूल बंद करने पर भी विचार कर रही है. पंजाब में स्मॉग से जुड़ी घटनाओं में पिछले हफ्ते कम से कम 17 लोग मारे गए हैं. अस्पतालों में मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है. इनमें बच्चों और बुजुर्गों की तादाद सबसे ज्यादा है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स ने लोगों को जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलने और मास्क और चश्मे पहनने की सलाह दी है. दिल और सांस के मरीजों को ठंडे पेय पदार्थों से दूर रहे और भाप लेते रहने की सलाह दी जा रही है.

हाफिज सईद ने दी भारत में सर्जिकल स्ट्राइक की धमकी

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लाहौर। गुलाम कश्मीर के भीतर भारत के सर्जिकल स्ट्राइक से घबराए पाकिस्तान की ओर से अब आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद ने मोर्चा संभाला है। मुंबई हमले के मास्टरमाइंड सईद ने भारत में सर्जिकल स्ट्राइक करने की धमकी दी है। प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा प्रमुख ने कश्मीर में इस तरह की सर्जिकल स्ट्राइक करने की धमकी दी है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
बकौल सईद, “मोदी को जो करना था, उन्होंने वह कर दिया। अब मुजाहिदीनों की कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक करने की बारी है।” रविवार को गुलाम कश्मीर के मीरपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए उसने यह धमकी दी। उसका कहना था, “मुजाहिदीन ऐसा सर्जिकल स्ट्राइक करने जा रहे हैं, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। यह इस तरह का हमला होगा, जिसे भारत क्या, पूरी दुनिया ने अब तक नहीं देखा होगा?
ध्यान रहे कि भारत के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने इस तरह की किसी भी सैन्य कार्रवाई से साफ इन्कार किया था। परंतु आतंकी ठिकाने तबाह होने और आतंकवादियों के मारे जाने से खौफजदा हाफिज सईद ने उस समय पाक सेना की तरफ से भारत को धमकी दी थी। उसने कहा था कि मोदी सरकार पाकिस्तानी सेना की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक के लिए तैयार रहे।