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'बीफ' विरोधी अभियान ने क्रिकेट की गेंद के दाम आसमान पर पहुंचा दिए हैं

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कुछ समय से चल रहे ‘बीफ’ विरोधी अभियान का असर उस खेल पर भी पड़ रहा है जिसे भारत में दूसरा धर्म कहा जाता है. द हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ समय से स्वयंभू गौ रक्षा दलों द्वारा व्यापारियों पर किए जा रहे हमलों में बढ़ोतरी के चलते क्रिकेट की गेंदों की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं.
उत्तर प्रदेश में क्रिकेट की गेंदों बड़ा कारोबार है. गाय की खाल की आपूर्ति में पहले की अपेक्षा काफी गिरावट आ गई है. यही वजह है कि राज्य में चल रही फैक्ट्रियों ने गेंदों की कीमतों में 100 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी है.
अखबार से बात करते हुए मेरठ स्थित एक ऐसी ही फैक्ट्री के निदेशक का कहना है, ‘हमें अब ब्रिटेन से चमड़ा आयात करना पड़ रहा है. यह महंगा है क्योंकि इस पर इंपोर्ट ड्यूटी और दूसरे कई टैक्स लगते हैं. आखिर में इसका नुकसान खरीदने वाले को हो रहा है. साल भर पहले तक जो बॉल 400 रु की मिलती थी आज 800 की मिल रही है.’
बड़ी कंपनियों के पास तो गाय का आयातित चमड़ा इस्तेमाल करने का विकल्प है लेकिन, छोटे उत्पादकों को भैंस के चमड़े से काम चलाना पड़ रहा है जो गुणवत्ता के मामले में उतना अच्छा नहीं होता. जानकारों के मुताबिक यह मोटा होता है जिससे न सिर्फ रंगाई में दिक्कत आती है बल्कि गेंद बनने में लगने वाला समय भी बढ़ जाता है.
गाय के चमड़े के लिए उद्योग जगत अब उन राज्यों पर निर्भर है जहां गोवध पर प्रतिबंध नहीं है. इनमें केरल, पश्चिमी बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम शामिल है. लेकिन यहां से होने वाली आपूर्ति मांग के हिसाब से बहुत कम है.

मुंबई में बिल्डरों की मनमानी पर लगेगी लगाम, टाइम पर घर नहीं दिया तो होगा मुकदमा

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मुंबई। मुंबई या महाराष्ट्र में अपने घर का सपना अब साकार हो सकता है। अब अगर बिल्डर तय वक्त पर फ्लैट खरीदारों को उनका घर नहीं सौंपते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार के आदेश के बाद पुलिस ने सर्कुलर जारी कर दिया है। सरकार की पहल से जहां खरीदार खुश हैं वहीं बिल्डरों में निराशा है।
महाराष्ट्र पुलिस की ओर से जारी इस सर्कुलर को फ्लैट खरीदारों के लिए अच्छे दिनों की आहट के रूप में देखा जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार के आदेश के बाद जारी यह सर्कुलर राज्य के लोगों के लिए राहत लेकर आया है। इस सर्कुलर के मुताबिक तय वक्त पर घर नहीं देने वाले बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई होगी, खरीदार थाने में बिल्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा सकते हैं।
इस सर्कुलर के आते ही प्रशांत बालाकृष्णन की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। प्रशांत ने 2009 में मुंबई के दहिसर में मशहूर बिल्डर डीबी रियलिटी के प्रोजेक्ट में 1 BHK का फ्लैट बुक कराया था। बिल्डर ने तीन साल में यानी 2012 तक घर देने का वादा किया, लेकिन तय वक्त आते ही बिल्डर ने फ्लैट सौंपने का नया वक्त 2015 मुकर्रर कर दिया। करीब 90 फीसदी भुगतान और ऊपर से ईएमआई का भार इसके बावजूद बिल्डर की मार देखिए 2016 में भी प्रशांत का अपने घर में रहने का सपना सपना ही है।
महाराष्ट्र चैंबर हाउसिंग के चेयरमैन धर्मेश जैन का कहना है कि इस फैसले से बिल्डरों के कामों पर असर पड़ेगा, अगर ऐसा है तो हमे सरकार सारी कानूनी इजाजत जल्द से जल्द दे दें, हम अपना प्रोजेक्ट समय पर कर देगें, पर हमें सरकार से ही इजाजत देरी से मिलती है तो हम क्या करें। इस मामले में हम सरकार से जरूर बात करेगें।
महाराष्ट्र सरकार का फैसला बिल्डरों के अलावा सोसायटी पर भी लागू होगा। बिल्डर असोसिएशन की दलील आम लोगों को हजम नहीं हो रही। जानकार तो इस तरह की सख्ती देश के हर हिस्से में चाहते हैं ताकि जिंदगी भर की कमाई से अपने घर का सपना साकार हो सके।

पश्चिम रेलवे ने यात्रियों को लौटाई एक करोड़ से ज्यादा की रकम

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मुंबई: पश्चिम रेलवे ने दो दिन में एक करोड़ रूपये से भी ज्यादा की राशि रिफंड के रूप में वापस की है। मुंबई के पास डहाणू में मालगाड़ी के 11 डिब्बे पटरी से उतरने की वजह से पश्चिम रेलवे का मुंबई से दिल्ली का रूट बुरी तरह प्रभावित हुआ। अप और डाउन दोनों तरफ की लंबी दूरी की रेलगाड़ियां रद्द करनी पड़ीं।
लोग महीनों पहले रेल टिकट बुक करा लेते हैं इसलिए रेलवे को टिकट के पैसे वापस देने पड़े। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए मुंबई सेन्ट्रल, बांद्रा टर्मिनस, बोरीवली, सूरत, वलसाड और डहाणू रोड स्टेशन पर स्पेशल रिफंड काउंटर खोला था।
हादसा 4 जुलाई 2016 को रात 2 बजकर 50 मिनट पर हुआ था। जेएनपीटी से मुरादाबाद जाने वाली मालगाड़ी के 11 डिब्बे पटरी से उतर गए। दुर्घटनाग्रस्त सभी डिब्बे हटाने, पटरी और ओवरहेड वायर की मरम्मत कर फिर से यातायात शुरू करने में तकरीबन 30 घंटे का समय लगा। इस कारण पश्चिम रेलवे की ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की करीब 500 बीटेक सीटें घटी

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उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में 11 जुलाई से शुरू होने जा रही बीटेक काउंसिलिंग में इस बार सीटों की संख्या कम हो गई है। गत वर्ष के मुकाबले इस साल करीब 500 सीटें कम होंगी। जबकि, काउंसिलिंग के लिए जेईई मेंस में 17 हजार छात्र शामिल हुए थे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस साल बीटेक में दाखिलों की स्थिति कैसी रहने वाली है।
गत वर्ष प्रदेश के बीटेक कॉलेजों की 11548 सीटों के लिए तकनीकी विवि ने काउंसिलिंग कराई थी। इस साल इनकी संख्या घटकर 11064 पर आ गई है। 31 कॉलेजों की इन सीटों पर दाखिले के लिए ऑनलाइन काउंसिलिंग 11 जुलाई से शुरू होने जा रही है। अभ्यर्थी ऑनलाइन काउंसिलिंग में घर बैठे भी अपनी च्वाइस भर सकते हैं।
प्रथम चरण का शुल्क जमा करने की तिथि : 11 से 14 जुलाई, प्रथम चरण के लिए च्वाइस फिलिंग : 13 से 18 जुलाई, प्रथम चरण की बीटेक सीट अलॉटमेंट : 18 जुलाई, आवंटित सीटों पर दाखिलों की तिथि : 19 से 22 जुलाई, दूसरे चरण का शुल्क जमा करने की तिथि : 25 से 27 जुलाई, दूसरे चरण के लिए च्वाइस फिलिंग : 27 से 29 जुलाई, दूसरे चरण की बीटेक सीट अलॉटमेंट : 31 जुलाई आवंटित सीटों पर दाखिले की तिथि : 1 से 5 अगस्त.

अब सेना में होगी एक सम्पूर्ण महिला बटालियन: पर्रिकर

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नई दिल्ली. रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के युद्धपोतों में एक महिला बटालियन बनाने का विचार किया है। सोमवार को इस मुद्दे पर बातचीत करते हुए पर्रिकर ने इंडियन आर्मी में सम्पूर्ण महिला बटालियन होने का विचार रखा। उन्होंने कहा कि तीन महिला पायलट ने आइएएफ में शामिल होकर महिला विरोधी धारणाओं को तोड़ कर रख दिया है।
टाइम ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, फिक्की महिला संगठन के साथ बात करते हुए पर्रिकर ने बताया कि लोग ऐसा मानते हैं कि कोई सैनिक महिला अधिकारी के कमांड को नहीं सुनेगा। लेकिन मैं इस बात से असहमत हूं। शुरुआती दौर में अगर इस तरह की परेशानी आती है तो महिला बटालियन खुद इसका ख्याल रखेगीं।
गौरतलब है कि रक्षा मंत्री ने बताया कि सेना में महिलाओं की भर्ती को आसान बनाया जाएगा। हम देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ही तीनों सेना प्रमुखों से इस बारे में बात होगी। बुनियादी सुविधाओं में कमी ही महिलाओं के प्रशिक्षण में एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
आपको बता दें कि यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा बीते समय में जब अमेरिका ने अपनी सेना पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था जबकि सेना में किन्नर भी शामिल होने पर लगे थे।
जानकारी के मुताबिक पर्रिकर के सम्पूर्ण महिला बटालियन के विचार से भर्ती और नियमों में बड़े बदलाव की जरुरत होगी, क्योंकि 1990 के दशक से सशस्त्र सेना बल महिलाओं को सिर्फ अधिकारी पद पर ही शामिल करता रहा है। इससे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में अन्य रैंकों के साथ महिला बटालियन का होना आसान हो जाएगा।
रक्षा मंत्री का कहना है कि महिलाओं का वॉरशिप में होना एक प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि क्यों हम महिलाओं को वॉरशिप में नहीं देख सकते हैं। मैं महिलाओं को पनडुब्बियों को चलाने का समर्थन नहीं करूंगा। अब तो सैनिक स्कूलों में भी महिला स्टूडेंट की मांग है। लेकिन बारहवीं के बाद एनडीए में शामिल हुए बिना इसकी अनुमति नहीं दी जाती है।
बता दें कि इस समय 13 लाख सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की कुल संख्या 60,000 है। जिसमे 1,436 महिला अधिकारी आर्मी में, 1,331 भारतीय वायुसेना में और 532 नौसेना में हैं।

आतंकियों के निशाने पर पंजाब और दिल्ली, अलर्ट जारी

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नई दिल्ली. केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने मिले इनपुट अनुसार अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों ने पंजाब और दिल्ली में आतंकी हमले को लेकर अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर से तीन गाड़ियों में भारी मात्रा में हथियार भर कर आतंकी पंजाब सीमा में घुसे हैं और अब दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। पंजाब पुलिस को मिले इनपुट में बताया गया है कि तीन गाड़ियों में तीन से चार आतंकी सवार है। उनका निशाना दिल्ली है। ये सभी जम्मू-कश्मीर से निकले हैं। पंजाब पुलिस को अधिक चौकन्ना रहने के लिए कहा गया है और साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि सुरक्षा जांच बढ़ा दी जाए।
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने बताया है कि तीन गाड़ियों में सवार आतंकी के निशाने पंजाब और दिल्ली है। इन आतंकियों को लेकर सतर्कता बरती जानी चाहिए। सुरक्षा के उपाय करने के साथ ही चौकन्ना रहने की जरूरत है। आतंकी किसी भी क्षेत्र को अपना निशाना बना सकते हैं। हालांकि अलर्ट में आतंकियों की संख्या की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने चाहिए।
पश्चिम बंगाल के बर्धवान रेलवे स्टेशन पर एक पैसेंजर ट्रेन से पुलिस ने एक संदिग्ध आतंकवादी को गिरफ्तार कर लिया। रेलवे पुलिस संदिग्ध से पूछताछ कर रही है। अभी पकड़े गए व्यक्ति के बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया है। पुलिस को खुफिया खबर मिली थी कि विश्वभारती फास्ट पैसेंजर ट्रेन से एक संदिग्ध आतंकवादी भागने की फिराक में है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने हावड़ा से ट्रेन में जाते वक्त उसे धर दबोचा और बर्धवान रेलवे पुलिस के हवाले कर दिया। मामला संगीन होने की वजह से पुलिस ने संदिग्ध आतंकवादी का नाम नहीं बताया है।
आइसिस द्वारा ईद के पहले आतंकी हमले की आशंका को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने आइसिस आतंकी मॉड्यूल की जांच के सिलसिले में मंगलवार को हैदराबाद में तीन जगहों पर छापे मारे। जांच एजेंसी ने इन जगहों से हथियार बनाने के 17 लाइव उपकरण बरामद किए।
सेना के जवानों ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में पुंछ-शोपियां रोड पर एक आतंकी ठिकाने का पदार्फाश किया और हथियार तथा कारतूस बरामद किए। सैन्य अधिकारियों ने बताया कि तलाशी अभियान में 16 राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिकों ने पुंछ में पीर की गली इलाके में एक ठिकाने का भंडाफोड़ किया। सैनिकों ने तीन एके राइफल्स, चार पिस्तौल, एके कारतूस की 970 गोलियां, पिस्तौल की 270 गोलियां और छह चीनी ग्रेनेड बरामद किए।

मोदी मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव: स्मृति ईरानी की HRD से छुट्टी

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नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में 19 नए मंत्रियों को शामिल करने के बाद विभागों में फेरबदल करके सबको चौंका दिया है. स्मृति ईरानी की जगह पर प्रकाश जावड़ेकर को मानव संसाधन विकास मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है जबकि स्मृति ईरानी अब कपड़ा मंत्रालय का कार्यभार संभालेंगी. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद विस्तार और फेरबदल के तहत मंगलवार रात स्मृति ईरानी को मानव संसाधन विकास जैसे अहम मंत्रालय से हटाकर कम अहमियत वाले कपडा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी गई.
वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार छोड दिया है. हैदराबाद में दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी और जेएनयू विवाद जैसे वाकयों की वजह से ईरानी का लगभग दो साल का कार्यकाल विवादों में रहा है. बहरहाल, ईरानी को महत्वहीन समझा जाने वाला कपडा मंत्रालय दिए जाने से यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि कहीं ऐसा इसलिए तो नहीं किया गया कि वह 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रचार का चेहरा बनाए जाने की स्थिति में वह प्रचार के लिए ज्यादा वक्त निकाल सकें. प्रधानमंत्री ने आज अपने मंत्रिपरिषद के विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया जिनमें भाजपा नेता एस एस आहलूवालिया, एम जे अकबर और विजय गोयल जैसे जानेमाने नाम शामिल हैं.
पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रकाश जावडेकर को सरकार के इस दूसरे विस्तार में तरक्की देकर कैबिनेट रैंक के मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई. अकबर को विदेश राज्य मंत्री बनाया गया है. विदेश मंत्रालय में वी के सिंह एक अन्य राज्य मंत्री हैं. शहरी विकास मंत्री एम वैंकैया नायडू को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. हालांकि, उनसे संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है. यह जिम्मेदारी अब रसायन एवं उवर्रक मंत्री अनंत कुमार संभालेंगे. मंत्रिपरिषद में हुए इस फेरबदल में डी वी सदानंद गौडा से कानून एवं न्याय मंत्रालय वापस ले लिया गया. कानून एवं न्याय मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार अब रविशंकर प्रसाद संभालेंगे. गौडा को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय आवंटित किया गया है. जयंत सिन्हा को वित्त राज्य मंत्री के पद से हटाकर नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री बनाया गया है. इस पद पर अब तक महेश शर्मा थे. शर्मा अब सिर्फ संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे.
मंत्रिपरिषद में हुए इस फेरबदल में पांच राज्य मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया. पांच मंत्रियों को हटाने और विस्तार के बाद अब मोदी मंत्रिपरिषद में 78 मंत्री हो गए हैं. कैबिनेट मंत्रियों में चौधरी वीरेंद्र सिंह को ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय से हटाकर इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की जिम्मेदारी अब नरेंद्र सिंह तोमर को दी गई है. वह पहले खदान एवं इस्पात मंत्री थे. अन्य कैबिनेट मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के प्रभार में कोई बदलाव नहीं किया गया. बिजली, कोयला एवं अक्षय उर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को खदान मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.
रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा को संचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गई है जबकि संतोष कुमार गंगवार को जयंत सिन्हा की जगह वित्त मंत्रालय में भेजा गया है. इससे पहले, गंगवार कपडा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे. अर्जुन राम मेघवाल वित्त मंत्रालय में दूसरे राज्य मंत्री होंगे. पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी संभाल रहे जावडेकर एकमात्र ऐसे मंत्री रहे जिन्हें कैबिनेट रैंक में तरक्की दी गई, जबकि सभी नए मंत्रियों को राज्य मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई. इससे पहले, ऐसी अटकलें थीं कि गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) निर्मला सीतारमण को कैबिनेट रैंक में तरक्की दी जाएगी. नए मंत्रियों में विजय गोयल को युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री :स्वतंत्र प्रभार: बनाया गया है. असम के मुख्यमंत्री बनने से पहले इस पद पर सर्वानंद सोनोवाल काबिज थे. अनिल माधव दवे को पर्यावरण मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है. भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है जबकि डॉ. एस आर भामरे को रक्षा राज्य मंत्री बनाया गया है.
आहलूवालिया को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है. अजय टम्टा (उत्तराखंड), अर्जुन राम मेघवाल (राजस्थान), कृष्णा राज (उत्तर प्रदेश), रामदास अठावले (महाराष्ट्र), रमेश सी जीगाजिनगी (कर्नाटक) उन दलित मंत्रियों में शामिल हैं जिन्हें राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मोदी और उनके मंत्रिपरिषद के सहकर्मी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और सहयोगी पार्टियों के नेता मौजूद थे. कांग्रेस का कोई भी नेता इस मौके पर मौजूद नहीं था. जिन अन्य चेहरों को मंत्री बनाया गया उनमें पी पी चौधरी, सी आर चौधरी (राजस्थान), ए एम दवे, फग्गन सिंह कुलस्ते (मध्य प्रदेश), महेंद्र नाथ पांडेय उत्तर प्रदेश) पुरुषोत्तम रुपाला, जे भाभोर और मनसुखभाई मंडाविया (गुजरात), राजेन गोहाईं (असम) और एस आर भामरे (महाराष्ट्र) शामिल हैं. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि राष्ट्रपति ने सांवर लाल जाट (जल संसाधन), मोहनभाई कल्याणजीभाई कुंदरिया (कृषि), निहाल चंद (पंचायती राज), मनसुखभाई धानजीभाई वासव (जनजातीय मामले) और राम शंकर कठेरिया (एचआरडी) का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है.

सऊदी अरब: जेद्दाह का आत्मघाती हमलावर निकला पाकिस्तानी

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रियाद। सऊदी अरब के जेद्दाह स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के निकट कल आत्मघाती हमला करने वाला पाकिस्तानी नागरिक था। यह जानकारी आज सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने दी ।
संदिग्ध पाकिस्तान हमलावर की पहचान 35 वर्षीय अब्दुल्ला कलजर खान के नाम से की गयी है जो जेद्दाह में अपने अभिभावकों तथा पत्नी के साथ 12 वर्ष से रह रहा था। सऊदी अरब के तीन स्थानों जेद्दाह, मदीना तथा कातिफ में कल आत्मघाती हमले किये गये।
हमलावरों के समेत चार व्यक्तियों की मौत हो गयी। यह हमले रमजान के अंतिम सप्तह में किये गये। इन हमलों की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है। हमलों के बाद सऊदी अरब में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है।

ISIS ने हसीना सरकार को बताया 'काफिर,' बांग्लादेश में और हमलों की दी धमकी,

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ढाका हमले को अभी एक हफ्ता भी नहीं बीता कि आतंकी संगठन आईएस ने एक वीडियो जारी कर बांग्लादेश को और हमलों की धमकी दी है. इस वीडियो में आईएस ने ‘मुजाहिदों’ और ‘मुजाहिद देशों’ पर भी हमले करने की धमकी दी है.
ये वीडियो रक्का से बांग्ला में आईएस से जुड़ी एक वेबसाइट पर जारी किया गया और बुधवार को इसे यू-ट्यूब पर भी रिलीज कर दिया गया. वीडियो में जिन लोगों को दिखाया गया है, उनमें से तीन बांग्लादेशी मूल के हैं, लेकिन उनकी पहचान नहीं हो पाई है.
वीडियो में ये लोग कह रहे हैं, ‘हम मुजाहिदों की हत्या करना तब नहीं बंद नहीं करेंगे, जब तक हम जीतेंगे नहीं या अपने धर्म के लिए जान नहीं देंगे. हम शहीद होंगे और शहादत देंगे. हमारे पास खोने के लिए कुछ नहीं है.’ वीडियो में एक दूसरा शख्स सरकार को काफिर कह रहा है. वो कहता है, ‘सरकार ने अल्लाह का कानून बदल दिया है और इंसानों का बनाया हुआ कानून लागू कर दिया है इसलिए ये अब काफ‍िर हो गए हैं. हमारे धर्म के मुताबिक ये हमारा फर्ज है कि हम इनके ख‍िलाफ लड़ें. मुजाहिद दुनियाभर में बेगुनाह मुस्लिमों की विमानों और बम धमाकों के जरिए जान ले रहे हैं.’
वीडियो में तीसरा शख्स मुस्लिम भाई-बहनों को जिहाद के लिए आगे आने को कहता है. वो कहता है, ‘इंशा अल्लाह, अल्लाह हमारा जिहाद कबूल करेगा. आईएस ने ढाका हमले की जिम्मेदारी ली थी. हालांकि बांग्लादेश की जांच एजेंसियों ने इसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का लिंक भी बताया था.
पिछले हफ्ते ढाका में हुए आतंकवादी हमले की जांच में भारतीय सुरक्षा एजेंसियां बांग्लादेश के साथ मिलकर काम कर रही हैं. इस हमले में 22 लोग मारे गए थे. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि भारतीय एजेंसियां बांग्लादेश के जांच अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि ढाका के राजनयिक इलाके के मशहूर होली आर्टिसन बेकरी में 12 घंटे के बंधक संकट के पीछे की साजिश का पता लगाया जा सके.

गुजरात में डीएनए टेस्टिंग एक बड़ा कारोबार बन गया है

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बीती 26 जून को राजकोट में नारन वसोया की गिरफ्तारी ने पूरे गुजरात को हिलाकर रख दिया. उन पर अपने ही बेटे की हत्या करवाने का आरोप है. खबरों के मुताबिक वसोया को लंबे समय से शक था कि उनका 33 साल का बेटा दीपेश उनका नहीं है. आरोप है कि कुछ समय पहले उन्होंने दो लोगों को पांच लाख रु दिए और दीपेश को मरवा दिया.
यह भले ही एक दुर्लभ मामला हो लेकिन, द हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट की मानें तो गुजरात में लोगों का अपने पितृत्व पर संदेह कोई विरली बात नहीं है. खबर के मुताबिक बीते कुछ समय के दौरान आधुनिक तकनीक की उपलब्धता बढ़ने के बाद ऐसे लोग अब पितृत्व परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं (लैब्स) का रुख कर रहे हैं. यही वजह है कि गुजरात में एक के बाद एक डीएनए कलेक्शन सेंटर खुलते जा रहे हैं. मोटा-मोटा अनुमान है कि बीते चार साल में ऐसे 100 सेंटर खुल गए. कई लोकल पैथॉलॉजी लैब्स भी यह सुविधा देने लगी हैं. वे सैंपल लेती हैं और परीक्षण के लिए उन्हें राज्य से बाहर के शहरों में स्थित प्राइवेट डीएनए लैब्स में भेज देती हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक डीएनए लैब्स इंडिया से जुड़े रवि किरण बताते हैं, ‘गुजरात में डीएनए टेस्टिंग की मांग लगातार बढ़ रही है जिसके चलते हमें वहां पर नए कलेक्शन सेंटर खोलने पड़े हैं.’ हैदराबाद स्थित इस लैब के गुजरात में 22 कलेक्शन सेंटर हैं. एक अन्य कलेक्शन सेंटर के कर्मचारी बताते हैं कि जागरूरकता और तकनीक की उपलब्धता के चलते बीते दो साल में पितृत्व परीक्षण के मामलों की संख्या लगभग दुगुनी हो गई है. वे बताते हैं कि सौराष्ट्र और अपेक्षाकृत पिछड़े उत्तरी गुजरात के दूर-दराज के इलाकों से भी लोग उनके यहां आ रहे हैं.
हालांकि इसमें अपनी पत्नी पर संदेह करने वाले लोगों की भूमिका ही नहीं है. बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने आईवीएफ तकनीक की मदद से संतान सुख पाया है और अब वे जानना चाहते हैं कि डॉक्टर ने अपना काम ठीक से किया या नहीं. आईवीएफ एक ऐसी तकनीक है जिसमें शुक्राणु और अंडाणु को प्रयोगशाला में मिलाया जाता है और इसके बने भ्रूण को गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाता है. गुजरात में आईवीएफ की मदद से माता-पिता बने कई लोग जानना चाहते हैं कि कहीं डॉक्टर ने किसी और का शुक्राणु या अंडाणु तो इस्तेमाल नहीं कर लिया. डीएनए लैब्स के रवि किरण कहते हैं, ‘जिन लोगों ने आईवीएफ पर करीब पांच लाख खर्च कर दिए वे मन की शांति के लिए 13 हजार रु का टेस्ट करवाने के लिए भी तैयार रहते हैं.’
लोगों के ये संदेह निराधार भी नहीं हैं. ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जब पितृत्व परीक्षण के बाद पता चला कि फर्टिलिटी क्लीनिक ने अपना काम ठीक से नहीं किया.