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भाजपा को वफादारी से आगे भी देखना चाहिए

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गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल का कुर्सी छोड़ने का फैसला न सिर्फ हैरान करने वाला है बल्कि इससे चौतरफा सवाल उठने भी तय हैं. अपने इस फैसले की वजह बताते हुए उनका कहना था कि जल्द ही वे 75 साल की हो जाएंगी सो उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाए. लेकिन यह बात शायद ही किसी को हजम होगी. एक दशक से भी ज्यादा समय तक आनंदीबेन गुजरात में वरिष्ठ मंत्री रहीं. इसके बाद जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने तो मोदी ने गुजरात की जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्हें चुना था. हालांकि उनका इस्तीफा अनौपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है लेकिन आखिरी फैसला भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा.
आनंदीबेन के लचर प्रशासन और गुजरात को ठीक से न संभाल पाने के चलते उनके जाने की भूमिका तैयार हो चुकी थी. बची कसर बीते महीने ऊना की घटना ने पूरी कर दी जिसमें एक दलित परिवार के सदस्यों को सरेआम कोड़ों से मारा गया. इसकी प्रतिक्रिया में दलितों का विरोध प्रदर्शन व्यापक हो चुका है और इस मुद्दे पर सरकारी उदासीनता का आरोप लगाकर कई युवकों ने खुदकुशी की कोशिश की है. राज्य की मशीनरी पर आनंदीबेन की कमजोर पकड़ तब भी दिखी थी जब पाटीदार आंदोलन के चलते गुजरात सरकार का विकास का एजेंडा पटरी से उतरने के कगार पर आ गया था. उस आंदोलन के चरम को करीब साल भर हो चुका है. इसके बावजूद राज्य की 15 फीसदी पटेल समुदाय के बीच उसकी अनुगूंज अब भी है जो सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग कर रहा है. इसका नुकसान तब दिखा जब बीते साल कांग्रेस ने ग्रामीण गुजरात में भाजपा के गढ़ों में सेंध लगाते हुए 31 जिला पंचायतों में से 21 और 230 तालुका पंचायतों में से 110 अपने झोली में डाल लीं.
नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी के राष्ट्रीय राजनीति में व्यस्त रहने के बीच आनंदीबेन प्रकरण भाजपा में प्रतिभा के संकट का भी संकेत है. उनका इस्तीफा उस गुजरात मॉडल पर भी सवाल खड़े करेगा जिसे भाजपा ने लोकसभा चुनाव जीतने की अपनी कवायद में एक झांकी के तौर पर दिखाया था. भाजपा के लिए इस समस्या का समाधान यह है कि वह वास्तव में प्रतिभावान लोगों को खोजे. ऐसे लोग जिन्हें इसका कुछ अंदाजा हो कि एक आधुनिक समाज और समावेशी विकास के एजेंडे के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. आनंदीबेन का उत्तराधिकारी चुनते हुए पार्टी अगर सिर्फ राजनीतिक और वैचारिक वफादारी को आधार नहीं बनाना चाहिए.

रियो ओलंपिक से पहले भारत को झटका, स्पेन से दूसरा मैच भी हारा

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स्पेन दौरे के अपने पहले मैच में बड़ी शिकस्त झेलनी वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम को दूसरे मैच में भी 3-2 से हार का सामना करना पड़ा।
अगले महीने पांच अगस्त से शुरू हो रहे खेलों के महाकुंभ रियो ओलंपिक से पहले भारतीय टीम को स्पेन दौरे में दो अभ्यास मैच खेलने थे लेकिन दोनों ही मुकाबलों में हार से टीम की तैयारियों को करारा झटका लगा है।
पहले मुकाबले में करारी शिकस्त झेलने वाली भारतीय टीम ने इस मुकाबले में बेहतर खेल दिखाया और शुरुआत से ही मेजबान टीम को कड़ी टक्कर दी। पहले क्वार्टर में स्पेन ने एक पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया लेकिन भारतीय गोलकीपर ने इसको विफल कर दिया। इसके बाद कड़े संघर्ष के बीच स्पेन को पहले हाफ के समाप्त होने के पांच मिनट पहले अपना खाता खोलने में सफलता मिली जब जोसेप रोमेऊ ने मिले पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील कर दिया। पहले हाफ में स्पेन को 1-0 की बढ़त थी।
दूसरे हाफ में दोनों ही टीमों ने अपने खेल में और तेजी लाते हुये आक्रामक खेल दिखाया। भारत को 38वें मिनट में पहली सफलता मिली जब मनप्रीत सिंह ने शानदार मैदानी गोल जड़ते हुये टीम को बराबरी दिला दी। हालांकि स्पेन ने इसके चार मिनट बाद ही एक अन्य पेनल्टीकॉर्नर पर पाऊ क्वेमादा के गोल की मदद से 2-1 की बढ़त बना ली।
अंतिम क्वार्टर में मेजबान टीम की तरफ से सल्वाडोर पिएरा ने 53वें मिनट में गोल कर टीम को 3-1 से आगे कर दिया। भारत ने 57वें मिनट में रमनदीप के गोल की बदौलत स्कोर 2-3 कर दिया। हालांकि इसके बाद भारत की बराबरी की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं और स्पेन ने यह मुकाबला 3-2 से अपने नाम कर लिया।

राहुल हैं 'बैटिंग मशीन' : जानिए विराट कोहली के सामने क्या है मुश्किल

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नई दिल्ली: केएल राहुल ने जमैका में टेस्ट करियर का तीसरा शतक जड़ा। तीसरा शतक उन्होंने छक्के के साथ पूरा किया और वीरेंद्र सहवाग की याद दिला दी। इस शॉट को देख वीरू भी ट्विटर पर चहक उठे। सहवाग ने ट्वीट किया कि “सर्वश्रेष्ठ दबंगगिरी जारी है। बीते महीने छक्के के साथ वनडे शतक पूरा किया। अब छक्के के साथ टेस्ट शतक पूरा किया। तीनों टेस्ट शतक विदेशी ज़मीन पर।”
वैसे राहुल ने सहवाग की तरह बल्लेबाजी ही नहीं की बल्कि उनकी तरह मैच के बाद बयान भी दिया। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में केएल राहुल ने कहा कि अगर गेंद मारने वाली होती है तो मैं मारता हूं। यह रणनीति हर फॉर्मेट में मेरे लिए काम करती है और बदलती नहीं है।
छठे टेस्ट मैचों में राहुल के नाम अब तीन शतक हो गए हैं। वह पिछले 3-4 महीनों से गजब की फ़ॉर्म में हैं। जमैका में उन्होंने 158 रनों की पारी खेली, इस पारी में उन्होंने 15 चौके और 3 छक्के लगाए। ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका में वह टेस्ट शतक लगा चुके हैं। ज़िम्बाब्वे के दौरे पर उन्होंने 196 की औसत से रन बनाए। पिछला IPL का सीज़न भी उनके लिए अच्छा गया।
केएल राहुल के मुताबिक, जमैका में मेरे लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था, मैंने शुरुआत से ही गेंद को मारना शुरू कर दिया था। मैं चीज़ों को सरल रखता हूं, जो गेंद मारने के लिए होती है मैं उस पर रन बनाने की कोशिश करता हूं।”
राहुल के शतक से कप्तान कोहली की टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि मुरली विजय के चोटिल होने के कारण उन्हें टीम में जगह मिली थी, अब विजय के फ़िट होने के बाद राहुल को कहां और कैसे फिट किया जाए यह फैसला आसान नहीं होगा।

‘सनम रे’ की अभिनेत्री के पास बॉलीवुड की कोई फिल्म नहीं है

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‘सनम रे’ में खूबसूरती को अभिनय से कन्फ्यूज करने वाली अभिनेत्री उर्वशी रौतेला को ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’ से बहुत उम्मीद थीं. लेकिन रिलीज से पहले लीक होकर पाइरेसी के जंजाल में फंसने की वजह से यह सेक्स-कॉमेडी ऐसी फ्लॉप हुई कि भारत में सिर्फ 14 करोड़ ही कमा पाई और निर्माता एकता कपूर को तकरीबन 30 करोड़ का घाटा दे गई. उर्वशी पर भी किसी की नजर नहीं पड़ी और अब उनके पास बॉलीवुड की कोई फिल्म नहीं है. लेकिन उन्होंने दिल छोटा नहीं किया (!) और अब वे साउथ की उन मसाला फिल्मों में हाथ आजमाना चाहती हैं जहां अभिनय को खूबसूरती से कन्फ्यूज करने वाले एक्टर हाथों हाथ लिए जाते हैं. इसके लिए वे पिछले हफ्ते हैदराबाद भी गईं और साउथ इंडियन अवॉर्ड्स में एक तेलुगू गाने पर जमकर परफॉर्म किया. बदले में जमकर तालियां मिलीं और चूंकि तालियों के बजते वक्त सुपरस्टार चिरंजीवी भी अवॉर्ड फंक्शन में मौजूद थे, उर्वशी को यह उम्मीद भी मिली कि उन्हें जल्द ही साउथ की कोई बढ़िया मसाला फिल्म मिलेगी.

संजय लीला भंसाली अब कंगना के मुरीद हुए

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दीपिका पादुकोण एक लंबे समय से (तीन फिल्मों से) संजय लीला भंसाली की फिल्मों का स्थायी चेहरा बनी हुई हैं. रानी पद्मावती के जीवन पर आधारित अपनी अगली फिल्म के लिए दीपिका को फाइनल करके संजय यह भी जता चुके हैं कि मौजूदा अभिनेत्रियों में वे दीपिका के बराबर काबिल किसी को नहीं मानते. लेकिन, पिछले कुछ दिनों से यार-दोस्तों के अलावा वे पब्लिकली भी कंगना रनोट की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं और खबर है कि इस वजह से कुछ नायिकाओं के होश उड़े हुए हैं!
उनके अभिनय के अलावा संजय कंगना रनोट की दबंगई के भी नये मुरीद बन चुके हैं. जिस तरह बेबाकी से कंगना ने रितिक रोशन विवाद में अपना पक्ष रखा और खुलकर कई मुद्दों पर नायिकाओं के अधिकारों की वकालत की, उससे संजय लीला भंसाली खासे प्रभावित हैं. इतने ज्यादा कि ‘गुजारिश’ में रितिक रोशन के साथ काम करने के बावजूद वे खुलकर कंगना की तारीफ कर रहे हैं.
भंसाली यह भी नजरअंदाज कर रहे हैं कि दीपिका और कंगना की आपस में नहीं बनती और दोनों एक-दूसरे के सामने आने से कतराती हैं. हाल ही में ऐसा ‘मदारी’ की स्क्रीनिंग के वक्त हुआ जब कंगना के जाने के बाद ही दीपिका का आगमन हुआ और लोगों का शक थोड़ा और पुख्ता हुआ कि दोनों ही एक-दूसरे को पसंद नहीं करतीं. पर भंसाली अब कंगना रनोट को पसंद करने लगे हैं. भले ही कुछ दिनों पहले यह हुआ था कि रानी पद्मावती में दिलचस्पी दिखाने के बावजूद कंगना को वह रोल नहीं मिला, लेकिन हो सकता है कि जल्द ही भंसाली की किसी दूसरी फिल्म में कंगना ही अगली दीपिका हो जाएं!

पाकिस्तान में 'ढिशूम' पर बैन लगने से दुखी हुए वरुण धवन

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निर्देशक रोहित धवन की हालिया रिलीज फिल्म ‘ढिशूम’ पाकिस्तान में बैन हो गई है, जिससे इसके एक्टर वरुण धवन काफी निराश हैं. उनका कहना है कि फिल्म में किसी भी देश को गलत तरीके से नहीं दिखाया गया है.
वरुण फिल्म में जुनैद अंसारी नामक पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं. उन्होंने ट्वीट कर पाकिस्तान में फिल्म पर बैन लगाने पर निराशा जाहिर करते हुए इसे ‘गलत फैसला’ करार दिया.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘पाकिस्तान में ‘ढिशूम’ पर बैन की खबर से निराश हूं. मुझे नहीं लगता कि इसमें किसी भी देश की गलत छवि पेश की गई है. यह एक गलत फैसला है.’
‘ढिशूम’ भारत के शीर्ष बल्लेबाज के इर्द-गिर्द घूमती है, जो मिडिल-ईस्ट में लापता हो गए हैं. उनकी तलाश की जिम्मेदारी दो पुलिसकर्मियों को सौंपी जाती है. फिल्म में वरुण के अलावा जॉन अब्राहम और जैकलिन फर्नांडिस भी हैं.

अजय की 'सन्स ऑफ सरदार: द बैटल ऑफ सारागढ़ी' का पोस्टर रिलीज

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बॉलीवुड फिल्म ‘सन्स ऑफ सरदार’ का पहला पोस्टर रिलीज कर दिया गया है। अजय देवगन ने खुद अपनी नई फिल्म का पोस्टर ट्विटर पर शेयर किया। अजय ने पोस्टर शेयर करते हुए लिखा, “पेश है क्रोध, प्यार और बहादुरी की कहानी ‘सन्स ऑफ सरदार- द बैटल ऑफ सारागढ़ी’ का पहला पोस्टर”।
‘सन्स ऑफ सरदार- द बैटल ऑफ सारागढ़ी’, सारागढ़ी के युद्ध पर आधारित है। सारागढ़ी की लड़ाई सिख रेजिमेंट की चौथी बटालियन के 21 सिखों द्वारा 12 सितंबर 1897 को लड़ी गई थी।
इससे पहले भी अजय देवगन कई दफा ऐतिहासिक किरदार निभा चुके हैं। ‘लेजेंड ऑफ भगत सिंह’ में फ्रिडम फाइटर भगत सिंह के रोल के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। आजकल अजय उनकी निर्देशित फिल्म ‘शिवाय’ के ट्रेलर को 7 अगस्त को लॉन्च करने में व्यस्त हैं।
अजय ने इससे पहले बताया था कि ‘सन्स ऑफ सरदार’ की कहानी हॉलीवुड ड्रामा फिल्म ‘300’ से मिलती जुलती है। 2012 में अजय की कॉमेडी फिल्म ‘सन ऑफ सरदार’ आई थी, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था।

मुंबई बना 'बेटियों' का शहर, लड़कों की अपेक्षा ज़्यादा लड़कियों ने लिया जन्म

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मुंबई: जहां एक तरफ भारत के कई राज्यों में आज भी लड़कियों की भ्रूण में ही हत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं मुंबई और महाराष्ट्र के कई अन्य भागों में पिछले पांच सालों में लड़कों की अपेक्षा ज़्यादा लड़कियों का जन्म हुआ है. यह ना सिर्फ राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है.
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (NHFS) (2015-16) के मुताबिक महाराष्ट्र में जन्म के समय लिंगानुपात का 1000 का आंकड़ा पार हो चुका है. वहीं मुंबई में यह आंकड़ा 1,033 है. आम तौर पर 1,000 लड़कों में 950 लड़कियों का लिंगानुपात सामान्य माना जाता है. ऐसे में मुंबई में 1,033 का सेक्स रेशियो काफी अच्छा है.
महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे, नागपुर, औरंगाबाद, भंडारा और अकोला जैसे शहरों में सेक्स रेशियो ने पूरा 1,000 का आंकड़ा छुआ है. सिर्फ कोल्हापुर और पुणे के कुछ इलाकों के अलावा पिछ्ले पांच साल में महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में भी लड़कियों ने लड़कों से ज़्यादा जन्म लिया है. आम तौर पर ऐसा सिर्फ केरल और कुछ उत्तर-पूर्वी राज्यों में ही देखने को मिलता है.
टाइम्स ऑफ इंडिया में दी गयी खबरों के मुताबिक, महाराष्ट्र का वर्धा इस मामले में सबसे आगे है. वर्धा के शहरी इलाकों में यह सेक्स रेशियो 1,266 है और ग्रामीण इलाकों के लिए 1,377 है. अकोला, औरंगाबाद और पुणे में चाइल्ड सेक्स रेशियो 1,068, 1,067 और 1,066 क्रमानुसार हैं. चाइल्ड सेक्स रेशियो के ये आंकड़े लोगों की बदलती विचार धारा को दर्शाते हैं.
लेकिन, हैरानी की बात यह है कि जहां एक तरफ ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़े बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर मुंबई के थाने (747), धुले (805), जलगाओं (819) और कोल्हापुर (831) जैसे ‘रिच’ और ‘डेवेलप्ड’ इलाकों में चाइल्ड सेक्स रेशियो अभी भी कम है.
आपको बता दें कि NHFS, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से बड़े पैमाने पर किए जाने वाला एक सर्वे है. यह सर्वे महाराष्ट्र के 27,000 घरों में किया गया था, जिससे राज्य में लोगों की बदलती मानसिकता का पता चलता है. डिस्ट्रिक्ट-लेवल पर इस सर्वे में 700-800 घरों का निरीक्षण किया गया.
लिंगानुपात के बढ़ते आंकड़ों के साथ ही महाराष्ट्र में लड़कियों के शिक्षा के स्तर और उनकी शादी की उम्र में भी बढ़ोत्तरी हुई है. एक दशक पहले 30% के मुकाबले अब 42% महिलायें (15-49 वर्ष) 10 साल तक शिक्षा प्राप्त करती हैं. वहीं 18 साल की उम्र में शादी करने वाली लड़कियों (20-24 वर्ष) की संख्या 39% से घट कर 25% हो गयी है.
हालांकि, यह आंकड़े महाराष्ट्र में परिवार नियोजन के गिरते स्तर को भी दिखाते हैं. एक दशक पहले जहां 67% महिलायें परिवार नियोजन के तरीकों का इस्तेमाल करती थी, वहीं अब यह स्तर घट कर 65% हो गया है. करीब 9.7% महिलायें ऐसी भी हैं जिनके पास गर्भ निरोधक उपाय उपलब्ध ना होने के कारण उन्हें ना चाहते हुए भी गर्भ धारण करना पड़ता है.
पिछ्ले दशक में बिहार और तमिलनाडु में भी इन आंकड़ों में काफी सुधार आया है. वहीं खबरों के मुताबिक हरयाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटका और वेस्ट बंगाल में यह स्तर और आगे फिसल गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि NHFS-4 के आंकड़ों से ना सिर्फ सरकार को अभी चल रही योजनाओं के प्रभाव का पता चलता है, बल्कि इससे यह जानकारी भी मिलती है कि अभी और किन जगहों पर कौन सी योजनायें लागू करने की ज़रूरत है.

उत्तराखंड के भाजपा नेता हरक सिंह रावत पर रेप का केस दर्ज

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उत्तराखंड के भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के खिलाफ दक्षिणी दिल्ली के सफदरजंग इलाके में दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पुलिस का कहना है कि महिला की शिकायत के बाद दुष्कर्म की धाराओं में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
हरक सिंह रावत से इस बारे में कोई पूछताछ की गई है या नहीं, इस बारे में पुलिस अधिकारी बोलने से बचते रहे।
हालांकि इस मामले में पहले तो दक्षिणी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे रहे, उन्होंने घटना के बारे में किसी बारे में जानकारी नहीं दी। इसके बाद एक अधिकारी ने बताया कि घटना शुक्रवार की है, हरक सिंह रावत का ग्रीन पार्क इलाके में घर है। 32 साल की यह महिला हरक सिंह से मिलने के लिए आई थी, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
महिला असम की रहने वाली बताई जा रही है, घटना के बावत पुलिस ने बताया है कि कुछ भी कहने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई। इसके बाद महिला सफदरजंग इंक्लेव थाने पहुंची और उसने मामले की जानकारी दी। जिसके बाद पुलिस ने दुष्कर्म की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि महिला 164 सीआरपीसी के तहत बयान देने के लिए गई है। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी से जब पूछा गया कि इस महिला ने क्या पहले भी हरक सिंह के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई है? इस पर उन्होंने कहा कि फिलहाल इस मामले की जांच कराई जा रही है, हालांकि अब तक मामला संज्ञान में नहीं आया है। हरक सिंह रावत के खिलाफ 2003 में भी एक महिला ने यौन उत्पीड़न के आरोप दर्ज कराए थे।

बुलंदशहर में हाईवे पर गैंगरेप, पूरा थाना सस्पेंड

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बुलंदशहर : उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एनएच-91 के करीब 35 साल की मां और उसकी 14 साल की नाबालिग बेटी से शुक्रवार रात हुए सामूहिक दुष्‍कर्म के मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. घटना कोतवाली देहात के पास हाईवे पर शुक्रवार देर रात उस वक्त हुई जब महिला का परिवार रिश्तेदार की तेरहवीं के लिए नोएडा से शाहजहांपुर जा रहा था. रास्ते में लोहे की रड रखकर अरराधियों ने घटना को अंजाम दिया. कार जब रड पर चढा तो ऐसा लगा मानों उसका एक्शल टूट गया है जिसके बाद उन्होंने कार सडक के किनारे खड़ा की. कार के रुकते ही झाड़ी से करीब दर्जन भी अपराधी निकले और लूट-पाट की साथ ही कार में मौजूद मां-बेटी से गैंगरेप किया. अब तक मामले में 15 लोगों को हिरासत में लिया गया है. तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. परिवार ने इन अपरोधियों की पहचान कर ली है. सीएम अखिलेश यादव ने पूरा थाना सस्पेंड कर दिया है.
मेरठ रेंज के डीआईजी ने मामले के संबंध में जानकारी दी कि तीन आरोपियों रहीसुद्दीन, शहवाज और जबर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है जिनकी पहचान पीड़ित परिवार ने भी कर ली है. सामूहिक दुष्‍कर्म मामले में अब तक 7 पुलिस अफसरों को निलंबित किया जा चुका है. बुलंदशहर के डीएम एके सिंह ने पीडि़तों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने की बात कही है. सीएम अखिलेश यादव ने बुलंदशहर एसएसपी को 24 घंटे के अंदर दोषियों को गिरफ्तार करने का आदेया दिया था.
यह घटना बुलंदशहर की है जहां अपराधियों ने एनएच-91 पर एक परिवार को बंधक बना लिया और कार में मौजूद मां-बेटी से गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया. कार से यह परिवार नोएडा से शाहजहांपुर जा रहा था. खबर है कि परिवार को अपराधियों ने कोतवाली देहात इलाके के पास रोक लिया और हथियारों के बल पर लूटपाट की.
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि एनएच-91 पर दोस्तपुर गांव के पास अपराधियों ने सड़क पर एक लोहे की रॉड को रख दिया था. जैसे ही कार उसपर चढी हमें लगा कि कार का एक्सेल टूट गया है, इसलिए हमने कार को सड़क किनारे रोक दिया. कार के रुकते ही झाड़ियों से करीब एक दर्जन हथियारबंद अपराधी बाहर निकल आए और परिवार को कार समेत हाईवे से करीब 50 मीटर दूर खेतों में ले गए. अपराधियों ने हमें बंधक बनाकर मौजूद कैश, लाखों रुपये का सामान और महिलाओं के जेवर लूट लिए साथ ही कार में बैठी महिलाओं से सामूहिक दुष्‍कर्म किया.