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आधार सभी जगह जरूरी नहीं, सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए अनिवार्य- सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आधार की अनिवार्यता को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बुधवार को संवैधानिक ठहराया। हालांकि अदालत ने आधार संख्या को बैंक खाते तथा फोन नंबर से जोड़ने को असंवैधानिक बताते हुए इससे संबंधित प्रावधान रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा, आधार से जोड़कर बैंक में खाता खोलने की प्रक्रिया को संदेहास्पद नहीं बनाया जा सकता। वहीं, कोर्ट ने आधार को आयकर रिटर्न और पैन से जोड़ने की अनिवार्यता को बरकरार रखा।

आधार नंबर की अनिवार्यता और इससे निजता के उल्लंघन मामले की सुनवाई कर रही शीर्ष अदालत ने 1448 पन्नों में तीन फैसले सुनाए। पहला फैसला जस्टिस ए के सीकरी ने सुनाया जिससे मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और एएम खनविल्कर सहमत थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की राय जुदा थी। वहीं जस्टिस अशोक भूषण ने पहले फैसले से सहमति दिखाई लेकिन अपनी अलग राय व्यक्त की। संविधान पीठ ने कहा कि आधार का मतलब अद्वितीय है और अद्वितीय होना सर्वश्रेष्ठ होने से बेहतर है।

सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने ४:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि आधार से बहुत सारे लोग लाभान्वित हो रहे हैं तो ऐसी हालत में कुछ के छूट जाने के कारण इसे गलत नहीं कह सकते। आधार समाज के वंचित तबके को सशक्त बनाता है और उन्हें पहचान देता है।

अदालत ने कहा कि आधार के लिए न्यूनतम आंकड़े एकत्र किए जाते हैं जो कुछ ही सेकंड बाद सीधे यूआईडी में चले जाते हैं और इन्हें एकत्र करने वाला भी नहीं देख सकता। आधार योजना के सत्यापन के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रणाली है। इससे सिर्फ बायोमीट्रिक डाटा ही मैच किया जाता है, किसी की लोकेशन और लेनदेन नहीं। इसलिए इससे लोगों की प्रोफाइलिंग होना संभव नहीं है।

सर्वोच्च अदालत की की संविधान पीठ ने आधार की अनिवार्यता को लेकर कहा कि पैन नंबर को आधार संख्या से जोड़ना अनिवार्य होगा साथ ही आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए भी आधार संख्या देना जरूरी होगा। कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने और केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली सब्सिडी लेने के लिए आधार संख्या देना अनिवार्य होगा। जबकि बैंक खाते को आधार नंबर से जोड़ना अनिवार्य नहीं। खाता खोलते समय बैंक आधार की मांग नहीं कर सकते मोबाइल सिम लेने के लिए टेलीकॉम कंपनियां आधार नंबर नहीं मांग सकतीं। बच्चों के एडमिशन के समय स्कूल आधार नहीं मांग सकते। सीबीएसई, यूजीसी, नीट और बोर्ड परीक्षाओं के लिए भी आधार जरूरी नहीं है। आधार नहीं होने पर बच्चों को सरकारी सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।

 

अजय देवगन की ऐतिहासिक फिल्म तानाजी की रिलीज डेट फाइनल

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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित फिल्म तानाजी दिवाली के बाद रिलीज की जाएगी। फिलहाल फिल्म के सर्पोटिंग कास्ट के साथ शूटिंग चल रही है। जबकि अजय देवगन के हिस्से की शूटिंग मध्य अक्टूबर से शुरु होगी। ताजा रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म की रिलीज डेट भी फाइनल कर दी गई है। अजय देवगन की यह फिल्म दिवाली बाद 22 नवंबर 2019 को रिलीज की जाएगी।

आपको बता दें कि तानाजी एक बड़े बजट वाली फिल्म है। इस फिल्म का बजट 150 करोड़ तक बताया जा रहा है। लिहाजा, फिल्म की रिलीज डेट को काफी सोच समझकर चुना गया है, ताकि यह किसी और बड़ी फिल्म से क्लैश ना हो। दिवाली को अक्षय कुमार की ‘हाउसफुल4’ भी रिलीज हो रही है। इसीलिए तानाजी की रिलीज डेट को नवंबर में शिफ्ट कर दिया गया।

ओम राउत के निर्देशन में बन रही यह फिल्म मराठा योद्धा तानाजी मालसुरे की जीवनी पर आधारित है। तानाजी छत्रपति शिवाजी महाराज के घनिष्ठ मित्र और वीर निष्ठावान सरदार थे। इन्होंने शिवाजी के साथ कई युद्ध लड़े हैं।

तानाजी ने प्रतापगढ़, जिसे सिंहगढ़ भी कहा जाता था, का युद्ध भी लड़ा था। जहां युद्ध में उनकी जान चली गई। मुगलों के अधीन सिंहगढ़ किले के रक्षक एक राजपूत सरदार उदयभान सिंह राठौर थे। सिंहगढ़ किले को मुगलों से जीतने के लिए तानाजी के नेतृत्व में मराठों ने सिंहगढ़ पर आक्रमण किया जिसमें तानाजी वीरगति को प्राप्त हुए। जिस दिन यह युद्ध लड़ा गया, उस दिन तानाजी के बेटे की शादी थी। लेकिन तानाजी बेटे की शादी में न जाकर सिंहगढ़ को जीतने निकल पड़े। बाद में गढ़ पर विजय का समाचार जीजामाता को सुनाते हुए शिवाजी ने कहा कि ‘गढ़ आयेला पण सिंह गयेला।’ शिवाजी तानाजी को सिंह अर्थात शेर कहा करते थे।

वैकल्पिक ईंधन की खोज में मिली बड़ी कामयाबी, भूसे से बनेगी गैसोलीन

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दुनिया भर में रासायनिक ईंधन से होने वाले प्रदुषण को समाप्त करने और वैकल्पिक ईंधन की खोज में लगे वैज्ञानिकों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। बेल्जियम के लुवेन के कैथोलीक यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने भूसे या बुरादे से गैसोलीन/ईंधन बनाने का नया तरीका खोज लिया है। इससे गैस संयंत्रों को हरित ईंधन बनाने में और मदद मिलेगी।

वैज्ञानिकों ने भूसे में पर्याप्त मात्रा में मौजूद सेलुलोज को हाइड्रोकार्बन चेन के रूप में विकसित करने का तरीका खोज लिया है। विश्वविद्यालय के बर्ट सेल्स का कहना है कि इस हाइड्रोकार्बन को गैसोलीन में मिलाकर ईंधन के रूप में इसका प्रयोग किया जा सकता है। सेलुलोज मिश्रित गैसोलीन ‘सेकंड जेनरेशन जैव ईंधन’ होगा।

सेल्स का कहना है कि वे पौधों के अवशेषों से शुरुआत कर उसे पेट्रोकेमिकल के रूप में विकसित करने के लिए एक रासायनिक प्रक्रिया का प्रयोग करते हैं। उनके मुताबिक, इस जैव ईंधन की गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि प्रक्रिया खत्म होने के बाद सेलुलोज से बने गैसोलीन और प्राकृतिक गैसोलीन में फर्क करने के लिए आपको कार्बन डेटिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दागी नेता आरोप तय होने के बाद भी लड़ सकेंगे चुनाव

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नई दिल्‍ली : दागी नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि दागी विधायक, सांसद और नेता आरोप तय होने के बाद भी चुनाव सड़ सकेंगे। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई थी कि गंभीर अपराधों में जिसमें सजा 5 साल से ज्यादा हो और अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय होते हैं तो उसके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए।

दागी नेताओं के खिलाफ दायर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि किसी भी नेता के खिलाफ चार्टशीट के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि वह राजनेताओं के आपराधिक डेटा अपनी वेबसाइट पर डालें, जिससे इस बात की जानकारी प्राप्त की जा सके कि एक नेता कितने अपराध कर चुका है।

कोर्ट ने सरकार और राजनितिक पार्टियों के लिए गाइडलाइन भी जारी किया है जिसके अनुसार हर पार्टी के चुनावी उम्मीदवार को अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी देनी होगी और राजनितिक दाल को उस नेता के अपराधों की सम्पूर्ण जानकारी वेबसाइट पर डालनी होगी। इसके अलावा कोर्ट ने सरकार को कहा है कि वे कानून बनाये ताकि आपराधिक गतिविधियों में संलग्न लोगों की राजनीति में प्रवेश रोका जा सके।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ उस याचिका पर सुनवाई चल रही थी, जिसमें मांग की गई है कि गंभीर अपराधों में जिसमें सज़ा 5 साल से ज्यादा हो और अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय होते हैं तो उसके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए। मार्च 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को विचार के लिए भेजा था।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान में आतंकवादी हमले की निंदा की

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ईरान के अहवाज शहर में शनिवार, 22 नवंबर को सैन्य परेड के दौरान हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् ने की है। ईरान में हुए इस आतंकवादी हमले में 25 लोगों की मौत हो गई थी।

परिषद ने सोमवार को एक बयान जारी किया है जिसमें सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने मृतकों के परिजनों और ईरानी सरकार के प्रति संवेदना और दुख व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। परिषद के सदस्यों ने इस निंदनीय काम के लिए जिम्मेदार अपराधियों, योजना बनाने वालों, वित्त पोषण करने वालों और इसमें सहयोग करने वालों पर शिकंजा कसने की जरूरतों और पीड़ितों को न्याय दिलाने पर जोर दिया। परिषद ने सभी देशों और सभी संबंधित विभागों से ईरान की सरकार का सहयोग करने का आग्रह किया।

आतंकवाद को विश्व के लिए एक गंभीर खतरा मानते हुए परिषद ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए आतंकवाद हर प्रकार से सबसे गंभीर खतरों में से एक है और इसलिए सभी देशों को अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के खिलाफ आतंकवाद जनित खतरों से मिलकर सामना करना होगा।

व्यक्ति नहीं, एक धरोहर हैं नंदकिशोर नौटियाल

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वरिष्ठ पत्रकार पंडित नंदकिशोर नौटियाल का जन्मदिन उनके सांताक्रूज पश्चिम स्थित निवास पर मनाया गया
उन्हें जन्मदिन पर बधाई देते हुए रुक्मिणी नौटियाल, अनुराग त्रिपाठी, अनिल गलगली
डॉ मंजू पांडेय, राजीव नौटियाल, दिनेश मधुकुंटा

 

मध्यकाल में योरोपीय समाज में सभ्यता का एक नया मापदंड स्थापित हुआ और वो यह कि सभ्य वही है जो शक्तिशाली है, शासक है जबकि अन्य बर्बर या दस्यु हैं जिन्हें दास बनाकर रखना चाहिए। इससे सभ्यता का विकास और सुव्यवस्था संपन्न होती है। बर्बर और अन्धकारग्रस्त लोगों को अपने अधीन लाकर उन्हें सभ्यता का पाठ पढ़ाना चाहिए। योरोपीय समाज की यह विचारधारा साम्राज्यवाद का वायस बनी। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। कालांतर में जागरण काल और फिर पुनर्जागरण काल में हुए अनेक आंदोलनों ने इस विचारधारा को नकारना शुरू किया परिणाम हुआ साम्राजयवाद का खात्मा।

इन आंदोलनों में राजनीतिक और सामाजिक के साथ-साथ जो आंदोलन सबसे अधिक सफल हुआ वह था भाषाई आंदोलन। इस भाषाई आंदोलन में हिंदी पत्रकारिता का बहुत बड़ा योगदान था। आज़ादी के बाद की हिंदी पत्रकारिता ने भारतीय जीवन में एक नया संतुलन स्थापित करने का बीड़ा उठाया। उस काल खंड पर नजर डालें तो सबसे प्रमुख नाम जो उभरकर आता है वह है ”ब्लिट्ज” और नंदकिशोर नौटियाल का नाम।

मुंबई के श्रीमंत समाज में ‘पंडितजी’ और पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य जगत में ‘बाबूजी’ के नाम से प्रख्यात नौटियालजी ने यूं तो अपनी पत्रकारिता का श्रीगणेश 1948 में दिल्ली से किया लेकिन हालात कुछ ऐसे हुए कि दिल्ली छोड़कर बम्बई (अब मुंबई) आना पड़ा। मुंबई में नौटियाल जी ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से भारतीय समाज में जगह-जगह बिखरी असमानता की खाई को भरने का भरपूर काम किया। असमानता की यह खाई सभ्यता के उस मापदंड से उपजी थी जो योरोपीय विचारों की देन थी। यही कारण था कि हिंदी ”ब्लिट्ज,” जिसके संपादक नौटियालजी थे, ने पत्रकारिता के उस नए छितिज को छुआ जहाँ अभी तक कोई नहीं पहुँचा था। नौटियालजी का जुझारूपन और पत्रकारिता के प्रति समर्पण ने उन्हें विशेष की श्रेणी में स्थापित कर दिया। उनकी यह कार्यप्रणाली आज की पीढ़ी के पत्रकारों के लिए एक आदर्श भी है।

असमानता के खड्डों को भरने के लिए नौटियाल जी ने मजदूर आंदोलनों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अपनी पेशेवर जिम्मेदारी को निभाते हुए वह हर उस शख्स के साथ पूरी निष्ठा से खड़े होते जो तथाकथित सभ्य समाज की सभ्यता के औजार थे। यह नौटियालजी का मानवीय पहलू था, आज भी है। बड़ा दिल, ऊँचा हौसला और परोपकार की उदात्त भावना। श्रेय लेने पूरी तरह इंकार कर देने वाले एक श्रेष्ठ इंसान।

मुंबई के सहित्य जगत के अलावा धनिक वर्ग के बहुत सारे लोगों के लिए संकटमोचक भी थे नौटियालजी। कैसी भी दुरूह परिस्थिति या संकट आसन्न हो नौटियालजी के अनुभवों की थाती से एक समस्या के कई निदान निकलकर बाहर आ जाते। अपने परोपकारी स्वभाव के चलते उन कठिन कार्यों में भी नौटियाल जी हाथ डाल देते हैं जिन्हें दूसरे अक्सर असंभव कहकर टाल देते हैं लेकिन नौटियालजी के शब्दकोष में यह शब्द है ही नहीं।

नौटियाल जी की 70 वर्षीय पत्रकारिता 20 वीं शती के आधे से अधिक हिंदी पत्रकारिता के पन्नों पर लेखों, समाचारों, रिपोर्टों, और सम्पादकीय आदि के विभिन्न रूपों में दर्ज है जो किसी ऐतिहासिक दस्तावेज से कम नहीं है। जीवन में सहस्र चन्द्रदर्शन कर लेने वाले नौटियालजी आज भी उसी शिद्दत, उत्साह और निष्काम भाव से कार्यरत हैं। उनकी पत्रकारिता आज भी 20 वर्ष की युवा है।

वर्तमान में ”नूतन सवेरा” उनकी पत्रकारिता का नया आयाम है। आज भी नौटियाल जी भारतीय जीवन की उस असमानता को मिटने के लिए प्रयत्नशील हैं जो कभी शक्तिशाली और सामंत वर्ग ने पैदा की और वर्तमान में राजनीति कर रही है।

नौटियालजी सकारात्मक ऊर्जा के अजस्र स्रोत कहे जा सकते हैं। उन्हें पढ़ना और सुनना सकारात्मकता से भर देता है। उनकी पत्रकारिता भी सकारात्मक है। वर्तमान की सनसनीखेज़ खबरें, जो कि वास्तव में होती नहीं हैं उसे जबरन बनाया जाता है, को लेकर नौटियालजी का कहना है कि इससे समाज में नकारात्मकता का भाव पनपता है, इससे बचना चाहिए। उनका दृष्टिकोण सामाजिक है, उदारवादी है, धर्मनिरपेक्ष है, प्रगतिशील है और इसी की वे संस्तुति करते भी हैं।

नौटियाल जी को उनके 88वें जन्मदिन पर विशेष शुभकामनाओं और उनके शतायु होने, स्वस्थ होने की शुभकामना के साथ –

– पी कुमार ‘संभव’

इमरान ने बातचीत के लिए पीएम मोदी को लिखा खत, भारत ने कहा – आतंकवाद और वार्ता साथ नहीं

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इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान की नवनिर्वाचित सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के आयोजन के दौरान भारत-पाक के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हो। हालांकि पाकिस्तान के इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए भारत ने कहा है कि’आतंक और वार्ता साथ-साथ नहीं हो सकती।’

दरअसल पाकिस्तान में इमरान खान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद से ही भारत-पाक के बीच रिश्तों में सुधार के लिए बातचीत की सुगबुगाहट फिर से शुरू हो गई थी।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के आयोजन के दौरान बातचीत की संभावना को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना की चर्चा इमरान खान के पीएम मोदी को 14 सितंबर को लिखे उस लेटर से शुरू हुई जो इमरान खान ने पीएम मोदी के बधाई संदेश के जवाब में लिखा था।

इमरान खान के इस पत्र में ही यह प्रस्ताव दिया गया है कि इस माह के अंत में न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बीच बातचीत हो। इमरान खान ने यह प्रस्ताव भी रखा है कि भारत जल्दी से जल्दी पाकिस्तान में सार्क सम्मेलन आयोजित कराने पर विचार करे। सूत्रों के मुताबिक खान ने कश्मीर सहित सभी बड़े लंबित मसलों को हल करने का भी आह्वान किया है।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक न्यूयॉर्क में 25 सितंबर से शुरू हो रही है, जो अगले 9 दिन तक चलेगी। इसी दौरान सार्क विदेश मंत्रियों की भी बैठक हो सकती है।

 

JNU में कुछ ऐसी ताकतें हैं जो भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ रही : रक्षा मंत्री

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नई दिल्ली। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को आरोप लगाया कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में कुछ ताकतें हैं जो भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ रही हैं और उन्हें संस्थान के छात्रसंघ के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ भी देखा गया है।

रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी JNU छात्रसंघ का चुनाव संपन्न होने के बाद आयी है। अभी हाल ही में संपन्न जेएनयू छात्रसंघ चुनावों में सभी चार प्रमुख पद वामपंथी समूहों ने जीते हैं। चुनाव के दौरान आरएसएस समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और वामपंथी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के सदस्यों के बीच झड़पें भी हुई थीं।

भारतीय महिला प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम के दौरान जेएनयू की पूर्व छात्रा रहीं रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण से विश्वविद्यालय के घटनाक्रम के बारे में सवाल किया गया था। उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ सालों में (जेएनयू में) जो चीजें हुई हैं, वे वास्तव में उत्साहजनक नहीं हैं।’रक्षा मंत्री ने कहा, कुछ ऐसी ताकतें हैं जो भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ रही हैं और वे छात्रसंघ के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ भी देखे जाते हैं। रक्षा मंत्री ने कहा, उनकी पुस्तिकाएं कहती हैं कि वे भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ रहे हैं। उनकी विवरणिकाएं (ब्रोशर) ऐसा कहती हैं। जेएनयूएसयू का नेतृत्व करने वाले या जेएनयूएसयू सदस्य खुले तौर पर ऐसी ताकतों के साथ शामिल होते हैं, इसलिए उन्हें भारत विरोधी कहने में आपको संकोच करने की आवश्यकता नहीं है।

बता दें कि अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ जेएनयू परिसर में नौ फरवरी, 2016 को आयोजित एक कार्यक्रम में कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी नारे लगाए गए थे। इसके बाद राष्ट्रवाद पर देशव्यापी बहस के केंद्र में जेएनयू आ गया था। रक्षामंत्री के बयान पर जवाहर लाल नेहरू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के अध्यक्ष एन साई बालाजी ने हमला बोला है। बालाजी ने सीतारमण पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने खुद अभी तक राफेल समझौते पर सवालों के जवाब नहीं दिए हैं। बालाजी ने कहा कि सरकार चाहती है कि देश राष्ट्रवाद बनाम राष्ट्रवाद विरोध पर चर्चा करे। वह मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।

अमेरिका के अलग-अलग इलाकों में फ्लोरेंस तूफान ने दी दस्तक, 5 की मौत, भारी तबाही

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वॉशिंगटन। अमेरिका के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में तूफ़ान फ्लोरेंस जमकर तबाही मचा रहा है। इस भयानक तूफान से 10 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हो चुके हैं साथ ही अब तक 5 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। मौसम विभाग ने कहा है कि तूफान से भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है।

तूफान की वजह से कैरोलिना शहर में तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश से कई जगहों में लैडंस्लाइड देखने को मिली है। हालाँकि तूफान आने से पहले ही लाखों लोगों को उनके घरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है लेकिन अभी भी लाखों लोग अपना घर नहीं छोड़ पा रहे हैं।

अमरीकी मौसम विभाग एनएचसी (National Hurricane Center) ने शनिवार को कहा कि फ्लोरेंस फिलहाल साउथ कैरोलिया के मिर्टल बीच से 25 मील दूर पश्चिम में और 40 मील दूर दक्षिण पूर्व में कहर बरपा रहा है। फ्लोरेंस अब धीरे-धीरे 5mph की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ रहा है, जिसकी हवाओं का रफ्तार 60 mph तक हो सकती है। एनएचसी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि आज रात भी इसका कहर जारी रहेगा।

 

भाजपा का यादव सम्मेलन, अर्जुन के रूप में दिखे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ

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लखनऊ।आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने पिछड़े वर्ग और समाज में अपनी पैठ बनाने की कोशिश में जी जान से लगी हुई है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर भारतीय जनता पार्टी यादवों के बीच सेंध लगाने के लिए शनिवार को राजधानी लखनऊ में यादव सम्मेलन करने जा रही है।

इस सम्मेलन के लिए लगाए जा रहे पोस्टरों में एक पोस्टर लोगों में काफी आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। इस पोस्टर में सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ को अर्जुन और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेन्ंद्र यादव को कृण्ण की भूमिका में दिखाया गया है।

आने वाले 2019 के लोकसभा चुनावों में पिछड़े वोटों को पार्टी के लिए एकजुट करने को लेकर बीजेपी लगातार कोशिश कर रही है। इसी क्रम में पिछड़े वर्ग की जातियों के सम्मेलन आयोजित कर रही है। आपको बता दें कि इस सम्मेलन के लिए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मोर्या और युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष यदुवंशी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
भारतीय जनता पार्टी 2019 की तैयारी में अभी से कमर कस ली है। इसके लिए भाजपा लगातार पिछड़ा वर्ग सम्मेलन करने में लगी है। इसके लिए समाजवादी पार्टी की वोटों पर हाथ साफ करने के लिए भाजपा ओबीसी सम्मेलनों के सहारे वोट हथियाने की फिराक में है।