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बदरीनाथ धाम के कपाट आज शीतकाल के लिए होंगे बंद, फूलों से भव्य पुष्प सज्जा, हजारों श्रद्धालु बने साक्षी

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चमोली। विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार यानी आज दोपहर ठीक 2 बजकर 56 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने की पूर्व संध्या पर सोमवार को धाम को 10 क्विंटल ताजे फूलों से अलौकिक पुष्प श्रृंगार किया गया, जिसकी छटा देखते ही बन रही है। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बनने पहुंचे हैं। अनुमान है कि कपाट बंदी के समय धाम में बड़ी संकया में यात्री मौजूद रहेंगे।

पंच पूजा के साथ पूरी हुईं तैयारियां

21 नवंबर से शुरू हुई पंच पूजाओं की श्रृंखला सोमवार को संपन्न हो गई। गणेश मंदिर, आदि केदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मठ के कपाट बंद होने के बाद मंदिर परिसर में वेद पाठ भी समाप्त हो चुका है। सोमवार शाम को पंच पूजा के चौथे दिन माता महालक्ष्मी मंदिर में भव्य कढ़ाई भोग उत्सव आयोजित हुआ।

बदरीनाथ के रावल अमरनाथ नंबूदरी ने माता लक्ष्मी को विधिवत आमंत्रित कर कढ़ाई प्रसाद अर्पित किया और शीतकाल के लिए भगवान बदरी विशाल के गर्भगृह में उनके साथ विराजमान होने की प्रार्थना की। परंपरा के अनुसार ग्रीष्मकाल में माता लक्ष्मी अपने परिक्रमा मंदिर में विराजमान रहती हैं, जबकि शीतकाल में वे भगवान नारायण के साथ गर्भगृह में ही निवास करती हैं।

शीतकाल में कहां होंगे दर्शन?

कपाट बंद होने के बाद भगवान बदरी विशाल की उत्सव मूर्ति (चल विग्रह) को जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर (ज्योतिर्मठ) में विराजमान किया जाएगा, जहां छह महीने तक पूजा-अर्चना होगी। मूल शालिग्राम स्वयंभू मूर्ति कभी मंदिर से बाहर नहीं निकलती। वहीं, भगवान उद्धव जी की मूर्ति पांडुकेश्वर के योगध्यान बदरी मंदिर और कुबेर जी की मूर्ति भी वहीं विराजमान की जाएगी। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही चारधाम यात्रा 2025 भी औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगी।

दिव्यांग कोटे में फर्जी प्रमाणपत्र : 51 शिक्षकों की नौकरी पर संकट, जारी करने वाले डॉक्टर भी जांच के घेरे में

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उत्तराखंड में दिव्यांगजन कोटे के तहत सरकारी नौकरी पाने वाले 51 शिक्षकों के खिलाफ बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि इन शिक्षकों ने चलन क्रिया (लोकोमोटर), दृष्टि दोष और अस्थि संबंधी विकलांगता के फर्जी या गलत प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की थी। अब इन शिक्षकों के साथ-साथ प्रमाणपत्र जारी करने वाले चिकित्सकों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने सभी 51 शिक्षकों को नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर अपने दावों के समर्थन में मूल दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है। तय समयसीमा के बाद विभाग सख्त कार्रवाई करेगा, जिसमें नौकरी से बर्खास्तगी तक की संभावना है।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि वर्ष 2022 में उन्होंने स्वयं राज्य मेडिकल बोर्ड से इन शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच कराई थी। उस जांच में कई प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी या मानकों के विपरीत पाए गए थे। ये प्रमाणपत्र दिव्यांगजन मेडिकल बोर्ड के कुछ चिकित्सकों द्वारा जारी किए गए थे।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नियुक्ति के समय केवल प्रमाणपत्र देखे जाते हैं, उनकी वैधता को चुनौती देने का अधिकार विभाग के पास नहीं होता। इसलिए अब प्रमाणपत्र जारी करने वाले चिकित्सकों की भी जवाबदेही तय की जाएगी और उनके खिलाफ भी उचित कार्रवाई होगी।

यह मामला एक बार फिर दिव्यांगजन कोटे में हो रहे दुरुपयोग को उजागर करता है और वास्तविक जरूरतमंद लोगों के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ सख्ती की मिसाल पेश कर सकता है।

इथियोपिया ज्वालामुखी विस्फोट: 12,000 साल बाद उठा राख का विशाल गुबार, भारत पहुंचा खतरा, DGCA ने जारी की सख्त एडवाइजरी

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नई दिल्ली: पूर्वी अफ्रीका के इथियोपिया में स्थित हायली गुब्बी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी में करीब 10,000 से 12,000 साल बाद रविवार को अचानक विस्फोट हो गया। इस विस्फोट से निकला राख का घना और विशाल गुबार 15 से 45 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैल गया, जो लाल सागर को पार करते हुए 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भारत की ओर बढ़ा। सोमवार रात करीब 11 बजे यह राख का बादल गुजरात और राजस्थान होते हुए दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच गया, जिससे हवाई यात्रा पर गंभीर संकट मंडराने लगा।

मौसम विभाग के अनुसार, राख के इस गुबार में सल्फर डाइऑक्साइड, कांच के सूक्ष्म कण, चट्टानों के टुकड़े और अन्य जहरीली गैसें मौजूद हैं। इससे न केवल विमानों के इंजनों को खतरा है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर में पहले से ही ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच चुके वायु प्रदूषण (AQI) में और इजाफा हो गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मंगलवार सुबह सूरज का रंग चमकीला या असामान्य दिखाई दे सकता है, क्योंकि राख के कण सूर्य की किरणों को प्रभावित करेंगे।

उड़ानों पर भारी असर, कई फ्लाइट्स रद्द
इस राख के बादल ने भारत के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में हवाई यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है। दिल्ली, जयपुर, मुंबई, कोच्चि और कन्नूर जैसे हवाई अड्डों पर कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं। कोच्चि से दो अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा, जबकि दिल्ली-मुंबई रूट पर देरी और रूट डायवर्जन की स्थिति बनी हुई है। राख का यह बादल 15,000 से 45,000 फीट की ऊंचाई पर फैला हुआ है, जो अधिकांश व्यावसायिक उड़ानों के क्रूजिंग लेवल से मेल खाता है।

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने सोमवार शाम को सभी एयरलाइंस के लिए तत्काल एडवाइजरी जारी की। इसमें साफ निर्देश दिए गए हैं कि ज्वालामुखी राख से प्रभावित क्षेत्रों, ऊंचाइयों और एयरस्पेस से पूरी तरह बचें। एयरलाइंस को रूट्स, फ्लाइट लेवल और ईंधन आवश्यकताओं को तुरंत समायोजित करने का आदेश दिया गया है। DGCA ने SIGMET (Significant Meteorological Information) भी जारी किया, जिसमें ओमान और अरब सागर के ऊपर राख की मौजूदगी का उल्लेख है। एक अधिकारी ने बताया, “राख विमान इंजनों में जमा होकर उन्हें बंद कर सकती है, इसलिए सुरक्षा सबसे ऊपर है।”

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर संभावित खतरा
राख के पहुंचने से दिल्ली-एनसीआर में हवा और जहरीली हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, AQI ‘सीवियर’ कैटेगरी में पहुंच गया, जो सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि बाहर निकलते समय मास्क पहनें और बच्चों, बुजुर्गों को घरों में ही रहने को कहा जाए। इथियोपिया में स्थानीय समुदायों पर भी इसका असर पड़ रहा है, जहां राख से फसलें और जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं।

बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र का निधन, 89 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा

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मुंबई: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और ‘ही-मैन’ के नाम से मशहूर धर्मेंद्र का सोमवार को 89 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे धर्मेंद्र का निधन उनके जुहू स्थित निवास पर सुबह हुआ। उनके निधन की खबर से देओल परिवार समेत पूरे बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत’ करार देते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है।

लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांस

8 दिसंबर 1935 को लुधियाना (पंजाब) में जन्मे धर्मेंद्र को इस महीने की शुरुआत में सांस लेने में तकलीफ के कारण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वेंटिलेटर पर रखे गए अभिनेता को 12 नवंबर को घर पर छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। परिवार के सदस्यों ने बताया कि अंतिम समय में वे अपनों के बीच थे।

उनकी पत्नी हेमा मालिनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मेरा साथी, मेरा सहारा अब हमेशा के लिए चला गया। प्रार्थना करें।” बेटे सनी देओल और बॉबी देओल ने भी संयुक्त बयान जारी कर कहा, “पिताजी की सादगी और संघर्ष हमें हमेशा प्रेरित करेंगे।”

करण जौहर ने दी श्रद्धांजलि, सितारे पहुंचे अंतिम दर्शन को

प्रोड्यूसर-निर्देशक करण जौहर ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर निधन की पुष्टि की। उन्होंने लिखा, “एक युग का अंत हो गया। धर्मेंद्र सर, आपकी मुस्कान और ताकत अमर रहेगी।” उनके पोस्ट के बाद अमिताभ बच्चन, करीना कपूर खान, अजय देवग्न, काजोल, आमिर खान, सलमान खान और संजय दत्त जैसे सितारे उनके निवास पर पहुंचे।

अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया, “शोले के गब्बर से लेकर जीवन के योद्धा तक, धर्मेंद्र ने सिनेमा को नई ऊंचाइयां दीं। अलविदा भाई।” अंतिम संस्कार मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में शाम को किया जाएगा।

सिनेमाई सफर: 300 से अधिक फिल्मों का सफर

धर्मेंद्र ने 1960 में ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से डेब्यू किया और छह दशकों में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। ‘फूल और पत्थर’, ‘मेरा गाँव मेरा देश’, ‘यादों की बारात’, ‘शोले’ और ‘सत्या’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बनाया। 2012 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। वे प्रोड्यूसर के रूप में ‘ग़याल’ जैसी फिल्म का निर्माण भी कर चुके थे।

उम्र ढलने पर भी सक्रिय रहने वाले धर्मेंद्र सोशल मीडिया पर जैविक खेती और स्वस्थ जीवन पर वीडियो शेयर करते थे। उनकी आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ 25 दिसंबर को रिलीज होगी, जिसमें वे अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा के साथ नजर आएंगे। फिल्म 1971 के युद्ध नायक अरुण खेतरपाल की जीवनी पर आधारित है, जहां धर्मेंद्र ने पिता का किरदार निभाया है।

बॉलीवुड में शोक की लहर

इस वर्ष बॉलीवुड को पहले ही पंकज धीर, सतीश शाह और असरानी जैसे सितारों को खो चुका है। धर्मेंद्र के निधन ने उद्योग को झकझोर दिया है। हेमा मालिनी, सनी, बॉबी, ईशा और आहना देओल सहित परिवार के सदस्यों ने निजता का अनुरोध किया है। प्रशंसक उनके योगदान को याद कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। धर्मेंद्र की विरासत भारतीय सिनेमा में हमेशा जीवित रहेगी।

बिग ब्रेकिंग : कुंजापुरी मंदिर के पास बड़ा हादसा, गहरी खाई में गिरी बस, 5 की मौत

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टिहरी : टिहरी जिले के नरेंद्रनगर क्षेत्र में सोमवार दोपहर कुंजापुरी मंदिर के समीप एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। गुजरात से कुंजापुरी दर्शन को आई 29 यात्रियों से भरी एक पर्यटक बस अनियंत्रित होकर करीब 70 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में अब तक 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 7 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं।

मृतकों में चार पुरुष और एक महिला शामिल हैं। घायलों में से तीन को तुरंत एम्स ऋषिकेश और चार को श्रीदेव सुमन उप जिला चिकित्सालय नरेंद्रनगर रेफर किया गया है। शेष 17 यात्री मामूली चोटों के साथ सुरक्षित हैं, जिनका प्राथमिक उपचार मौके पर ही किया गया।

हादसा दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसपी आयुष अग्रवाल, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। सेनानायक अर्पण यदुवंशी के निर्देश पर ढालवाला, कोटि कॉलोनी और एसडीआरएफ मुख्यालय से पांच रेस्क्यू टीमें रवाना की गईं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी बहादुरी दिखाते हुए सबसे पहले बचाव कार्य शुरू किया और कई यात्रियों को खाई से बाहर निकाला।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने बताया, “बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। तेज ढलान और तीखे मोड़ पर ड्राइवर का नियंत्रण खोने से यह हादसा हुआ लगता है। रेस्क्यू ऑपरेशन अभी जारी है और सभी घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है।

मृतकों और घायलों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है। सभी यात्री गुजरात के विभिन्न जिलों से कुंजापुरी मंदिर के दर्शन को आए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों से संपर्क कर लिया है और उन्हें तुरंत उत्तराखंड पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

जस्टिस सूर्यकांत ने ली शपथ, बने देश के 53वें चीफ जस्टिस

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में एक भव्य समारोह में जस्टिस सूर्यकांत को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ दिलाई। जस्टिस सूर्यकांत ने हिंदी में शपथ ली, जो उनके पारंपरिक मूल्यों को दर्शाता है। यह समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस बी.आर. गवई का स्थान लेंगे, जिन्होंने रविवार शाम को सेवानिवृत्ति ली। 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 15 महीने का होगा, जो 9 फरवरी 2027 को उनके 65 वर्षीय सेवानिवृत्ति आयु तक चलेगा। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति 30 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत की गई थी।

समारोह की झलकियां: शपथ ग्रहण के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने अपने बुजुर्ग परिवारजन के चरण स्पर्श किए, जो एक भावुक क्षण था। समारोह में भूटान, केन्या, मलेशिया, ब्राजील, मॉरीशस, नेपाल और श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की मजबूत उपस्थिति रही, जो भारत की न्यायिक कूटनीति को रेखांकित करती है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

कैरियर की प्रमुख उपलब्धियां: जस्टिस सूर्यकांत का न्यायिक सफर प्रेरणादायक है। 2000 में वे हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने और 2001 में वरिष्ठ अधिवक्ता घोषित हुए। 9 जनवरी 2004 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने, जबकि 5 अक्टूबर 2018 से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। 24 मई 2019 को वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

उनकी प्रमुख निर्णयों में अनुच्छेद 370 की समाप्ति (जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाना), पेगासस जासूसी कांड, बिहार निर्वाचन सूची संशोधन, राजद्रोह कानून, इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करना, नागरिकता संशोधन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राज्यपालों की शक्तियों पर राष्ट्रपति संदर्भ शामिल हैं। उन्होंने लिंग भेदभाव के मामलों में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की, जैसे एक महिला सरपंच की बहाली का आदेश देते हुए जेंडर बायस पर टिप्पणी की। वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट से भी जुड़े रहे।

शपथ लेने के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “न्यायपालिका का कर्तव्य है कि अंतिम नागरिक की रक्षा करें।” उनके कार्यकाल में न्यायिक सुधार, डिजिटल न्याय प्रणाली और संवैधानिक मामलों पर विशेष ध्यान अपेक्षित है। यह नियुक्ति भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए एक नया अध्याय खोलती है।

पकिस्तान में पैरामिलिट्री मुख्यालय पर हमला, दो सुसाइड बॉम्बरों ने खुद को उड़ाया

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर में सोमवार को एक भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी (एफसी) पैरामिलिट्री फोर्स के मुख्यालय पर सशस्त्र हमलावरों ने घातक हमला बोल दिया। रॉयटर्स के अनुसार, दो सुसाइड बॉम्बरों ने हमले में हिस्सा लिया, जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में गोलीबारी और विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया, “पहले सुसाइड बॉम्बर ने कॉन्स्टेबुलरी के मुख्य द्वार पर हमला किया, जबकि दूसरा हमलावर कंपाउंड के अंदर घुस गया।” हमलावरों ने बंदूकों से भी अंधाधुंध फायरिंग की, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाल लिया।

घटना की सूचना मिलते ही पाकिस्तानी सेना, पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मुख्यालय को पूरी तरह घेर लिया। अधिकारी ने कहा, “हम संदेह कर रहे हैं कि मुख्यालय के अंदर कुछ आतंकवादी अभी भी छिपे हुए हैं। स्थिति को सावधानीपूर्वक संभाला जा रहा है।” इलाके में सड़कों को ट्रैफिक के लिए बंद कर दिया गया है और आसपास के निवासियों को घरों के अंदर रहने की हिदायत दी गई है।

स्थानीय निवासी सफदर खान ने रॉयटर्स को बताया, “सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है। सड़कें पूरी तरह बंद हैं और माहौल तनावपूर्ण है।” सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में विस्फोटों और गोलीबारी की आवाजें साफ सुनाई दे रही हैं।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकी गतिविधियां तेज हो रही हैं। 2025 में अब तक इस प्रांत में 782 से अधिक लोग हिंसा का शिकार हो चुके हैं। हाल ही में क्वेट्टा में एक राजनीतिक रैली पर सुसाइड हमले में 11 लोग मारे गए थे, जबकि मार्च में बालोच लिबरेशन आर्मी ने एक ट्रेन को हाईजैक कर सैनिकों को निशाना बनाया था।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने हमले की जिम्मेदारी किसी समूह पर नहीं बताई है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) या उसके सहयोगियों का काम हो सकता है। सेना ने एक बयान जारी कर कहा है कि सभी घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है और ऑपरेशन जारी रहेगा।

इस घटना ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर अफगानिस्तान सीमा के नजदीक स्थित पेशावर जैसे संवेदनशील इलाकों में। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हमले की निंदा की है और पाकिस्तान को आतंकी खतरों से निपटने में सहयोग की पेशकश की है।

भारतीय नौसेना में शामिल होगा पहला स्वदेशी ‘माहे’, सोमवार को मुंबई में कमीशनिंग

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मुंबई : भारतीय नौसेना को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में स्वदेश निर्मित माहे-क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट के पहले जहाज INS माहे को औपचारिक रूप से कमीशन करेगी। इस भव्य समारोह की अध्यक्षता थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी करेंगे, जबकि वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन मेजबानी करेंगे।

कोच्चिन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित यह जहाज ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का सबसे ताजा प्रतीक है। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों से लैस ‘माहे’ क्लास के कुल 8 जहाज बनाए जा रहे हैं। ये जहाज उथले तटीय जलक्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकार करने, खदान बिछाने, तटीय गश्त और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हैं।

खासियतें जो इसे बनाती हैं अनूठा

  • उच्च स्तरीय एंटी-सबमरीन वारफेयर क्षमता.
  • उथले पानी (शैलो वॉटर) में संचालन की क्षमता.
  • स्टेल्थ फीचर्स के साथ कम रडार सिग्नेचर.
  • तेज गति, उच्च पैंतरेबाजी और सटीक हथियार प्रणाली.
  • स्वदेशी सोनार, रडार और हथियार प्रणालियां.

नौसेना के प्रवक्ता ने इसे “पश्चिमी तट का साइलेंट हंटर” करार दिया है। जहाज का ऊपरी ढांचा (सुपरस्ट्रक्चर) भी स्थानीय सांस्कृतिक और मार्शल विरासत से प्रेरित है, जिसे पिछले हफ्ते सार्वजनिक किया गया था।

नौसेना दिवस 2025 की तैयारियां भी तेज

इसी बीच भारतीय नौसेना ने नौसेना दिवस-2025 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार 3 दिसंबर को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के शंगुमुघम बीच पर भव्य ऑपरेशनल डेमोंस्ट्रेशन आयोजित होगा। पहले यह कार्यक्रम 4 दिसंबर को प्रस्तावित था, लेकिन अब एक दिन पहले कर दिया गया है।

इस प्रदर्शन में नौसेना की बढ़ती ताकत, सटीकता और पेशेवराना कौशल का शानदार नजारा देखने को मिलेगा। पिछले वर्ष यह प्रदर्शन ओडिशा के पुरी (2024) और महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग (2023) में हुआ था। ‘माहे’ की कमीशनिंग और नौसेना दिवस का भव्य आयोजन एक साथ मिलकर भारत की समुद्री शक्ति में आत्मनिर्भरता और आक्रामक क्षमता के नए अध्याय की शुरुआत करेंगे।

पुंछ में तैनात अग्निवीर दीपक सिंह का गोली लगने से निधन, चंपावत में शोक की लहर

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चंपावत : उत्तराखंड के चंपावत जिले के खरही गांव के 23 वर्षीय अग्निवीर दीपक सिंह का जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से निधन हो गया। दीपक सिंह दो साल पहले अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और मेंढर सेक्टर की अग्रिम चौकी पर तैनात थे।

घटना 22 नवंबर (शनिवार) दोपहर करीब 2:30 बजे की बताई जा रही है। चौकी पर अचानक गोली चलने की आवाज सुनकर अन्य जवान मौके पर पहुंचे तो दीपक सिंह खून से लथपथ मिले। उन्हें तुरंत बटालियन मेडिकल कैंप ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सेना और स्थानीय पुलिस ने मामले की संयुक्त जांच शुरू कर दी है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि गोली दुर्घटनावश चली या इसके पीछे कोई अन्य कारण है।

मातृ-पितृ केवल पुत्र की शादी की तैयारी में जुटे थे मृतक दीपक सिंह के पिता शिवराज सिंह और मां तारा देवी ने बताया कि बेटे की शादी की तैयारियां चल रही थीं। मात्र 10 दिन पहले ही दीपक छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर लौटा था। गांव के खरही मेले में भी वह पूरे उत्साह से शामिल हुआ था। अचानक आई इस दुखद खबर से मां सदमे में हैं और पिता खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं। दीपक चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर के थे; दो बड़ी बहनें और एक छोटा भाई है।

पार्थिव शरीर सोमवार तक गांव पहुंचने की संभावना सेना के अधिकारियों के अनुसार, दीपक सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार तक उनके पैतृक गांव खरही (पाटी विकासखंड) पहुंच जाएगा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य भोला सिंह बोहरा, सोनू बोहरा, चंद्रशेखर जोशी, तुलसी शर्मा, सूरज बोहरा, यशवंत सिंह कुमार, भगवान सिंह कुंवर सहित अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामीण परिवार से मिलने पहुंचे और शोक-संतप्त परिजनों को सांत्वना दी।

चंपावत जिला मुख्यालय सहित पूरे पाटी क्षेत्र में शोक की लहर है। लोग अग्निवीर दीपक सिंह को देश की रक्षा करते हुए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के लिए श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

राजनाथ सिंह के ‘सिंध भारत का अभिन्न अंग’ बयान से भड़का पाकिस्तान

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नई दिल्ली/इस्लामाबाद: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सिंध प्रांत को लेकर दिए गए बयान ने पाकिस्तान को बुरी तरह तिलमिला दिया है। पाकिस्तान ने इसे “विस्तारवादी हिंदुत्व” की सोच करार देते हुए भारत को पूर्वोत्तर राज्यों की “समस्याओं” की याद दिलाई है।

गुरुवार को सिंधी समाज के एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था, “भले ही आज भौगोलिक रूप से सिंध भारत में नहीं है, लेकिन सभ्यतागत रूप से सिंध हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा। भविष्य में सिंध फिर से भारत में वापस आ सकता है।”

इस बयान के तुरंत बाद पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, “भारतीय रक्षा मंत्री के भ्रमजाल फैलाने वाले और खतरनाक रूप से संशोधनवादी बयान की पाकिस्तान कड़ी निंदा करता है। ऐसे बयान विस्तारवादी हिंदुत्व विचारधारा को उजागर करते हैं, जो स्थापित वास्तविकताओं को चुनौती देते हैं तथा अंतरराष्ट्रीय कानून, मान्यता प्राप्त सीमाओं की अखंडता और देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन हैं।”

पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर भी इस बयान को “भारत की आक्रामक विस्तारवादी नीति” का सबूत बताया जा रहा है। कुछ पाकिस्तानी विश्लेषकों ने इसे भारत के आंतरिक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया और पूर्वोत्तर भारत में चल रहे अलगाववादी आंदोलनों का जिक्र कर पलटवार किया।

भारतीय पक्ष की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि रक्षा मंत्री का बयान सांस्कृतिक और सभ्यतागत दृष्टिकोण से दिया गया था, न कि वर्तमान भौगोलिक सीमाओं को चुनौती देने के इरादे से। राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं और दोनों देश एक-दूसरे पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे हैं।