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उत्तराखंड: DM सविन बंसल ने साकार किया होनहार बेटी प्रियंका की नौकरी और M.tech की पढ़ाई का सपना

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  • जिला प्रशासन ने एक ही झटके में दिलाया रोजगार और उच्च शिक्षा का वादा।

  • मुख्यमंत्री के संकल्प “शिक्षित बेटियां– सशक्त समाज” को साकार कर रहा देहरादून प्रशासन।

देहरादून :पिता का साया चार साल पहले उठ जाने और परिवार की बदहाल आर्थिक स्थिति के बावजूद हार न मानने वाली चन्द्रबनी निवासी प्रियंका कुकरेती की जिंदगी में अब उम्मीद की नई किरण जगी है। जिलाधिकारी सविन बंसल के संवेदनशील हस्तक्षेप से प्रियंका को एक प्रतिष्ठित निजी शैक्षणिक संस्थान में लैब ऑफिसर की नौकरी मिल गई है और अब उसी संस्थान में एमटेक (कंप्यूटर साइंस) में दाखिला भी तय हो गया है।

गत माह अक्टूबर में प्रियंका अपनी मां के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची थीं। उन्होंने बताया था कि 2021 में पिता का देहांत हो गया, भाई दिव्यांग है और घर चलाना मुश्किल हो रहा है। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही थी। जिलाधिकारी ने तुरंत रेड क्रॉस फंड से 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी और उनकी योग्यता को देखते हुए एक प्रतिष्ठित निजी संस्थान में लैब ऑफिसर के पद पर नियुक्ति दिलवा दी।

रविवार को प्रियंका अपनी मां के साथ एक बार फिर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने जिलाधिकारी का आभार प्रकट किया। जिलाधिकारी  सविन बंसल ने उनसे पूछा, “क्या नौकरी के साथ-साथ आगे पढ़ाई भी जारी रखना चाहती हो?” प्रियंका ने हां कहा तो डीएम साहब ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रियंका का एमटेक में दाखिला उसी संस्थान में सुनिश्चित किया जाए। फीस, किताबें और अन्य खर्च जिला प्रशासन और संस्थान मिलकर वहन करेंगे। अगले सत्र से प्रियंका स्नातकोत्तर की पढ़ाई भी शुरू कर सकेंगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि “प्रतिभाशाली बेटियों के कदम कभी रुकने नहीं देंगे। चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ हों, उनकी शिक्षा और रोजगार के लिए प्रशासन हरसंभव मदद करेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संकल्प “शिक्षित बेटियां, सशक्त समाज” को देहरादून जिला प्रशासन लगातार चरितार्थ कर रहा है।

आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रही बेटियों को फिर से मुख्यधारा में लाने के लिए “नंदा-सुनंदा योजना” के तहत अब तक लगभग 32 लाख रुपये की सहायता से 90 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की जा चुकी है। प्रियंका कुकरेती का मामला इसी सिलसिले की ताज़ा मिसाल है।

माँ की आंखों में खुशी के आंसू थे। प्रियंका ने कहा, “मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन में नौकरी भी मिल जाएगी और एमटेक का सपना भी पूरा हो जाएगा। जिलाधिकारी सर और उनकी पूरी टीम की मैं जीवन भर शुक्रगुज़ार रहूँगी।”

रोई-रोई बिनाले ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया धमाल, कांतारा चैप्टर 1 का रिकॉर्ड खतरे में!

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मुंबई: असमिया सिनेमा की ताजा सनसनी ‘रोई-रोई बिनाले’ ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर तूफान ला दिया है। दिवंगत सुपरस्टार गायक-कलाकार जुबिन गर्ग की आखिरी फिल्म साबित हुई है कि उनकी विरासत दर्शकों के दिलों में जिंदा है। महज तीन हफ्तों में इस फिल्म ने असमिया सिनेमा के कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं और अब नजरें पैन-इंडिया हिट ‘कांतारा चैप्टर 1’ के मील के पत्थर पर टिक गई हैं। क्या यह नई आंधी पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगी? आइए जानते हैं पूरी कहानी।

जुबिन गर्ग की आखिरी जंग: ‘रोई-रोई बिनाले’ का धमाकेदार सफर

31 अक्टूबर 2025 को रिलीज हुई ‘रोई-रोई बिनाले’ ने पहले ही दिन दर्शकों को रोमांचित कर दिया। ETV भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, ओपनिंग डे पर फिल्म ने 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की, जो असमिया सिनेमा के लिए एक नया कीर्तिमान था। इंडिया डेली ने इसे असम की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म करार दिया, जहां पहले दिन ही 1.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन दर्ज हुआ। जुबिन गर्ग की संगीतमय दुनिया और भावुक ड्रामा ने न सिर्फ असम बल्कि पूरे भारत के 30 शहरों में थिएटर्स हिलाकर रख दिए।

दूसरे दिन कलेक्शन में और उछाल आया। रीपब्लिक भारत के अनुसार, शनिवार को फिल्म ने 2 करोड़ रुपये कमाए, जिससे दो दिनों का कुल कारोबार 3.85 करोड़ रुपये हो गया। ABP लाइव की रिपोर्ट बताती है कि शुरुआती ओपनिंग 1.85 करोड़ से शुरू होकर तेजी से बढ़ी। अब तक के आंकड़ों के लिहाज से, फिल्म ने तीन हफ्तों में 25 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है (सैकनिल्क अनुमान)। यह न सिर्फ जुबिन की आखिरी पेशकश है, बल्कि असमिया सिनेमा को नेशनल स्टेज पर नई पहचान दिलाने वाली ब्लॉकबस्टर साबित हो रही है। दर्शक जुबिन की याद में थिएटर्स में रो रहे हैं, और टिकटों की ब्लैकमार्केटिंग की खबरें आम हो गई हैं।

कांतारा चैप्टर 1 का जलवा: रिकॉर्ड जो अब चुनौती में

दूसरी तरफ, ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा चैप्टर 1’ ने 2 अक्टूबर 2025 को रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर भूकंप ला दिया था। इंडिया टीवी हिंदी के अनुसार, पहले दिन सभी भाषाओं में 70-80 करोड़ रुपये की उम्मीद थी, जो हिंदी वर्जन में 15-20 करोड़ के साथ हकीकत बनी। फिल्म ने महज 9 दिनों में वर्ल्डवाइड 500 करोड़ का क्लब जॉइन कर लिया (न्यूज18 हिंदी)।

ट्रेड एनालिस्ट सैकनिल्क की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 दिनों में घरेलू कलेक्शन 589.6 करोड़ रुपये पहुंचा, जो प्रभात खबर में उल्लेखित है। माया पुरी ने इसे इंटरनेशनल बॉक्स ऑफिस पर 850 करोड़ के करीब बताया। 50 दिनों बाद टोटल वर्ल्डवाइड कलेक्शन 834.25 करोड़ रुपये हो गया (टाइम्स नाउ नवभारत)। हिंदी वर्जन ने सबसे ज्यादा 224 करोड़ कमाए (ABP लाइव), जबकि कन्नड़ में 106.95 करोड़।

फिल्म ने अक्षय कुमार की ‘गुड न्यूज’ (205.09 करोड़) और अजय देवगन की ‘गोलमाल अगेन’ (205.69 करोड़) को पछाड़ हिंदी हिट्स लिस्ट में 41वें स्थान पर कब्जा जमाया। केकेएन लाइव के अनुसार, 5 दिनों में 362 करोड़ और 10वें दिन 400 करोड़ के करीब पहुंच गई। ETV भारत ने 28वें दिन 852 करोड़ का आंकड़ा दर्ज किया। यह फिल्म कम बजट (16 करोड़) में 50 गुना रिटर्न देकर साल की सबसे कमाऊ साबित हुई, ‘छावा’ (600 करोड़) को भी पीछे छोड़ते हुए (इंडिया टीवी)।

खतरे की घंटी: रोई-रोई बिनाले क्यों बन रही है खतरा?

हालांकि ‘रोई-रोई बिनाले’ का कलेक्शन अभी ‘कांतारा’ के पैरों तले भी नहीं, लेकिन रीजनल सिनेमा के लिहाज से यह एक चमत्कार है। कांतारा ने पैन-इंडिया स्तर पर 800 करोड़+ का वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड बनाया, लेकिन ‘रोई-रोई बिनाले’ असमिया सिनेमा को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, कांतारा का भारतीय कलेक्शन 465.25 करोड़ था, जो अब 723.75 करोड़ हो चुका। अगर ‘रोई-रोई’ का वर्ड-ऑफ-माउथ जारी रहा, तो यह असमिया फिल्मों के लिए कांतारा जैसा ही मील का पत्थर बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुबिन गर्ग का इमोशनल फैक्टर इसे लंबे समय तक थिएटर्स में रखेगा, जबकि कांतारा का रन अब धीमा पड़ रहा है।

क्या है अनुच्छेद 240? चंडीगढ़ को इसके दायरे में लाने के केंद्र के प्रस्ताव पर पंजाब में क्यों मचा बवाल?

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चंडीगढ़ : केंद्र सरकार के एक प्रस्तावित संशोधन ने पंजाब की सियासत में भूचाल ला दिया है। संसद के शीतकालीन सत्र (1 दिसंबर से शुरू) में पेश होने वाले संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2025 के जरिए केंद्र चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में लाने की तैयारी कर रहा है। इससे राष्ट्रपति को चंडीगढ़ के लिए सीधे नियम बनाने और कानून लागू करने का अधिकार मिल जाएगा, जिससे शहर का प्रशासन पूरी तरह केंद्र के अधीन हो सकता है।

वर्तमान में चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है, और इसका प्रशासन पंजाब के राज्यपाल ही संभालते हैं (1984 से यह व्यवस्था चली आ रही है)। अनुच्छेद 240 लागू होने पर अलग लेफ्टिनेंट गवर्नर (एलजी) या स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति हो सकती है, जो पंजाब के दावे को कमजोर करेगा।

अनुच्छेद 240 क्या है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 240 राष्ट्रपति को कुछ केंद्र शासित प्रदेशों (जिनकी अपनी विधानसभा नहीं होती) के लिए शांति, प्रगति और सुशासन सुनिश्चित करने हेतु विनियम (रेगुलेशन) बनाने की शक्ति देता है। ये विनियम संसद के कानून जितने ही प्रभावी होते हैं और मौजूदा कानूनों को संशोधित या निरस्त भी कर सकते हैं।

वर्तमान में यह अनुच्छेद इन केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू है:

  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
  • लक्षद्वीप
  • दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव
  • पुडुचेरी (जब विधानसभा भंग या निलंबित हो)

चंडीगढ़ अभी तक इस दायरे में नहीं है, इसलिए यहां पंजाब का राज्यपाल ही प्रशासक की भूमिका निभाता है। केंद्र का प्रस्ताव इसे अन्य यूटी की तरह सामान्य केंद्र शासित प्रदेश बनाने का है।

पंजाब में क्यों भड़का विरोध?

पंजाब के सभी प्रमुख दलों – आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) – ने इसे पंजाब पर हमला करार दिया है। उनका कहना है कि चंडीगढ़ मूल रूप से पंजाब की राजधानी है (1966 के पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत बनाई गई), और यह कदम राज्य के ऐतिहासिक, संवैधानिक और भावनात्मक अधिकारों को छीनने की साजिश है।

मुख्य प्रतिक्रियाएं:

मुख्यमंत्री भगवंत मान (AAP): इसे “दिनदहाड़े डकैती” और “पंजाब की राजधानी छीनने की साजिश” बताया। कहा – “चंडीगढ़ था, है और हमेशा पंजाब का हिस्सा रहेगा।”

अरविंद केजरीवाल (AAP): “पंजाब की पहचान और अधिकारों पर सीधा हमला। सभी पंजाबी दलों को एकजुट होकर विरोध करना चाहिए।”

सुखबीर सिंह बादल (SAD): “संघीय ढांचे पर हमला, पंजाब के साथ विश्वासघात। केंद्र ने चंडीगढ़ पंजाब को देने के वादे किए थे, अब उल्टा कर रहा है।”

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग: “पंजाब विरोधी एजेंडा खुलकर सामने आ गया। चंडीगढ़ छीनने की कोशिश के गंभीर परिणाम होंगे।”

पंजाब के नेता इसे राजीव-लोंगोवाल समझौते (1985) और अन्य पुराने वादों का उल्लंघन बता रहे हैं, जहां चंडीगढ़ को पंजाब देने का आश्वासन दिया गया था।

केंद्र का पक्ष ?

केंद्र की ओर से अभी आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह प्रशासनिक सुगमता के लिए है – जैसे चंडीगढ़ में संपत्ति नियम, भवन उल्लंघन आदि में बदलाव के लिए संसद की मंजूरी की जरूरत न पड़े। कुछ भाजपा नेताओं का कहना है कि इससे प्रशासन तेज होगा, पंजाब का दावा प्रभावित नहीं होगा।

लक्ष्य सेन ने ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर 500 का खिताब जीता, जापानी खिलाड़ी को सीधे सेटों में दी शिकस्त

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सिडनी:  भारत के स्टार शटलर लक्ष्य सेन ने लगातार मिल रही असफलताओं के दौर को तोड़ते हुए साल 2025 का अपना पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीत लिया है। रविवार को ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर 500 टूर्नामेंट के पुरुष एकल फाइनल में लक्ष्य ने जापान के युशी तनाका को मात्र 38 मिनट में 21-15, 21-11 से पराजित कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

24 वर्षीय लक्ष्य ने पूरे मैच में अपनी आक्रामकता और बेहतरीन कोर्ट कवरेज का शानदार प्रदर्शन किया। पहले गेम में तनाका ने शुरुआती बढ़त ली, लेकिन लक्ष्य ने जल्द ही लय पकड़ ली और 11-9 के अंतराल के बाद लगातार अंक जोड़ते हुए गेम अपने नाम किया। दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी पूरी तरह हावी रहे और 26 वर्षीय जापानी प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया।

पेरिस ओलंपिक 2024 में कांस्य पदक से चूककर चौथे स्थान पर रहे लक्ष्य के लिए यह जीत मानसिक रूप से बड़ी राहत लेकर आई है। ओलंपिक के बाद से वह लगातार टूर्नामेंटों में जल्दी बाहर हो रहे थे। उनका पिछला व्यक्तिगत खिताब पिछले साल नवंबर में लखनऊ में हुए सैयद मोदी इंटरनेशनल (सुपर 300) का था। सितंबर में हांगकांग ओपन सुपर 500 के फाइनल में पहुंचकर भी वह उप-विजेता ही रह गए थे।

2021 विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता लक्ष्य अब वर्ल्ड रैंकिंग में और सुधार की उम्मीद कर सकते हैं। इस जीत से उनके आत्मविश्वास में जबरदस्त इजाफा होगा और आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में वह मजबूत दावेदार के रूप में उतरेंगे।

भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर लक्ष्य को बधाई देते हुए इसे उनकी शानदार वापसी का प्रतीक बताया है। बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी ट्वीट कर लक्ष्य की प्रशंसा की है।

उत्तराखंड: ग्राम सभा ने शराब, जुआ और डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का निर्णय

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बड़कोट : ग्राम सभा कोटी ठकराल (जिला उत्तरकाशी) में  प्रधान एमपी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित आम सभा में गांव की पुरानी संस्कृति को बचाने और सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। सभा में मातृ शक्ति, बुद्धिजीवी वर्ग, सम्मानित बुजुर्ग तथा नवयुवकों की भारी उपस्थिति रही। सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति और ध्वनिमत से पारित किए गए।

सभा में पारित प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं:

  1. शादी-विवाह एवं किसी भी प्रकार के पार्टी/समारोह में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन करने पर पूरी ग्राम सभा उस शादी/पार्टी का सामाजिक बहिष्कार करेगी तथा दोषी पर 25,000 रुपये का जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी।
  2. कच्ची शराब बनाने पर 21,000 रुपये जुर्माना, अवैध शराब निर्माण को पूरी तरह रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया।
  3. चुनावों में शराब का वितरण/सेवन पूर्णतः प्रतिबंधित।
  4. पंचायत, विधानसभा, लोकसभा या किसी भी चुनाव के दौरान शराब का उपयोग पूरी तरह वर्जित रहेगा।
  5. जुआ तथा ताश खेलने पर पूर्ण प्रतिबंध। उल्लंघन करने पर 5,100 रुपये जुर्माना तथा कानूनी कार्रवाई होगी।
  6. राजकीय इण्टर कॉलेज परिसर में तोड़फोड़ या शराब सेवन पर कार्रवाई, ऐसा करने वाले पर 1,100 रुपये जुर्माना और कानूनी कार्रवाई अनिवार्य होगी।
  7. बाहरी व्यक्ति द्वारा शराब पीकर गांव में उत्पात करने पर सजा, गांव का माहौल खराब करने वाले बाहरी व्यक्ति पर 1,100 रुपये जुर्माना एवं कानूनी कार्रवाई होगी।
  8. शादी-विवाह में डीजे साउंड सिस्टम पर पूर्ण प्रतिबंध, ध्वनि प्रदूषण और परंपरागत संस्कृति को बचाने के लिए डीजे पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसके स्थान पर डोल-नगाड़े, ढोलक और कैसियो जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का ही उपयोग होगा।

ग्राम प्रधान एमपी सिंह ने कहा, “हमारा गांव हमेशा से संस्कृति और सदाचार के लिए जाना जाता रहा है। आज युवा पीढ़ी और मातृ शक्ति के सहयोग से हमने इन कुरीतियों पर हमेशा के लिए रोक लगा दी है। यह निर्णय पूरे गांव की एकता का प्रतीक है।”

सभा में उपस्थित महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने तालियां बजाकर सभी प्रस्तावों का समर्थन किया। ग्रामवासियों ने इसे गांव के नवनिर्माण और नैतिक पुनर्जागरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।

यूएस स्टार्टअप आरोग्याटेक ने आईआईटी रुड़की को दान किया उन्नत स्वास्थ्य निगरानी प्लेटफॉर्म

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रुड़की : अमेरिका स्थित स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी स्टार्टअप आरोग्याटेक ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की को अपना अत्याधुनिक स्वास्थ्य निगरानी प्लेटफॉर्म ‘प्राण’ दान करने की घोषणा की है। इस प्लेटफॉर्म में प्राण सहायता उपकरण के साथ-साथ सहयोगी सॉफ्टवेयर ऐप ‘प्राण कम्पेनियन’ और ‘प्राण गाइड’ शामिल हैं। यह दान डिजिटल स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार तथा छात्रों की भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।

यह उदार दान हर्षा एच और हासू पी. शाह फैमिली फाउंडेशन द्वारा समर्थित है। प्रसिद्ध परोपकारी एवं उद्यमी हासू पी. शाह, जो हर्षा हॉस्पिटैलिटी ग्रुप के संस्थापक हैं, ने इस पहल को बढ़ावा दिया। शाह ने कहा, “मेरा करियर भले ही आतिथ्य उद्योग में रहा हो, लेकिन प्रौद्योगिकी, नवाचार और सामाजिक प्रभाव के प्रति मेरा जुनून हमेशा से रहा है। आरोग्याटेक की युवा एवं प्रतिभाशाली टीम दुनिया की गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान कर रही है। मुझे उनके मिशन का समर्थन करने पर गर्व है।”

आरोग्याटेक के सह-संस्थापक एवं मुख्य उत्पाद तथा प्रौद्योगिकी अधिकारी अजय विक्रम सिंह, जो आईआईटी रुड़की के 1999 बैच के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के पूर्व छात्र हैं, ने अपने अल्मा मेटर को वापस देने की इस पहल का नेतृत्व किया। सिंह ने कहा, “आईआईटी रुड़की ने मुझे इंजीनियर और नवोन्मेषक के रूप में गढ़ा। यह योगदान अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य नवोन्मेषकों को तैयार करने की दिशा में एक छोटा कदम है।”

‘प्राण’ प्लेटफॉर्म गैर-आक्रामक तरीके से रक्त शर्करा जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटर की निगरानी, कैंसर की प्रारंभिक जांच और सामुदायिक स्तर पर जीनोमिक परीक्षण को संभव बनाएगा। यह घरेलू कल्याण और नैदानिक क्षमताओं को सुलभ बनाने का माध्यम बनेगा।

आईआईटी रुड़की के उप निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह ने प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया तथा इसे संस्थान के लिए उल्लेखनीय योगदान बताया। निदेशक प्रो. के.के. पंत ने कहा कि यह सहयोग स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी एवं डेटा-संचालित चिकित्सा जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान को गति देगा।

डीन (रिसोर्सेज एंड एलुमनी अफेयर्स) प्रो. आर.डी. गर्ग और अस्पताल सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. अंशिक कुमार गिरी ने भी इस दान की सराहना की। उन्होंने इसे नैदानिक अनुसंधान, एआई अनुप्रयोगों और प्रौद्योगिकी एकीकरण के लिए मूल्यवान संसाधन बताया।

यह पहल शिक्षाविदों, प्रौद्योगिकी और परोपकार के संयोजन से सुलभ स्वास्थ्य नवाचार को बढ़ावा देने का प्रतीक है। आईआईटी रुड़की समुदाय ने पूर्व छात्रों एवं शुभचिंतकों की इस भागीदारी को एक स्वस्थ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उपनल कर्मचारियों के धरने पर पहुंचे प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, धामी सरकार को दी चेतावनी

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देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने शनिवार को परेड ग्राउंड के बाहर धरने पर बैठे उपनल कर्मचारियों से मुलाकात की और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार एस्मा का भय दिखाकर कर्मचारियों को डराना-धमकाना बंद करे और हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का तुरंत पालन करे।

धस्माना ने धरनास्थल को संबोधित करते हुए कहा, “राज्य सरकार पिछले 12 दिनों से अनशन और धरने पर बैठे उपनल कर्मचारियों से वार्ता करने की बजाय उन पर एस्मा थोपने की धमकी दे रही है। यदि सरकार ने किसी भी आंदोलनकारी कर्मचारी के खिलाफ एस्मा का दुरुपयोग किया तो कांग्रेस पार्टी सड़क से सदन तक पूरी ताकत से विरोध करेगी।”

उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों को ‘समान कार्य-समान वेतन’ देने तथा चरणबद्ध तरीके से विभिन्न विभागों में समायोजन करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। राज्य सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की, जिसे अक्टूबर 2024 में खारिज कर दिया गया। इसके बाद दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी और हाईकोर्ट के 2018 के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।

धस्माना ने कहा, “इतने स्पष्ट न्यायिक आदेशों के बावजूद सरकार जिद पर अड़ी है। नतीजतन प्रदेश भर में शिक्षा, स्वास्थ्य सहित आवश्यक सेवाएं ठप हो गई हैं। इसके लिए पूरी तरह से धामी सरकार जिम्मेदार है।”

कांग्रेस नेता ने यह भी उल्लेख किया कि राजधानी देहरादून में वकील पिछले दस दिनों से चैंबर आवंटन की मांग को लेकर सड़कों पर हैं, लेकिन सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने कहा, “कर्मचारी, वकील, आम जनता – सभी वर्ग सड़कों पर उतर आए हैं, पर ‘वोट चोरी’ में विश्वास रखने वाली भाजपा के मुंह से आंदोलनकारियों के समर्थन में दो शब्द भी नहीं निकल रहे।”

धस्माना ने धामी सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “कांग्रेस पार्टी किसी भी हाल में कर्मचारियों पर होने वाले उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं करेगी।”

इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ अध्यक्ष दिनेश कौशल, पूर्व पार्षद एवं जिला महामंत्री ललित भद्री, आनंद सिंह पुंडीर सहित कई कांग्रेसी नेता और उपनल कर्मचारी मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि उपनल के हजारों कर्मचारी नियमितीकरण और समान वेतन की मांग को लेकर पिछले 12 दिनों से परेड ग्राउंड के बाहर आमरण अनशन और धरना दे रहे हैं, जिससे प्रदेश के कई अस्पतालों और स्कूलों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

अधिवक्ता प्रतिनिधियों की CM से मुलाक़ात, चैंबर निर्माण पर मिला आश्वासन

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शनिवार को देहरादून बार एसोसिएशन के संघर्ष समिति के अध्यक्ष श्री प्रेमचंद शर्मा तथा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री मनमोहन कंडवाल के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री आवास में भेंट की।

प्रतिनिधिमंडल ने नए जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के लिए आवंटित भूमि तथा पुराने जिला न्यायालय परिसर की भूमि को पूरी तरह अधिवक्ताओं के पक्ष में आवंटित करने और दोनों स्थानों पर सरकार द्वारा अधिवक्ताओं के लिए चैंबरों का निर्माण कराने की मांग को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रतिनिधिमंडल को पूरा आश्वासन देते हुए कहा कि राज्य सरकार अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आपसी संवाद और विचार-विमर्श से ही किसी भी समस्या का स्थायी हल निकल सकता है।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के साक्षी रहे मुख्यमंत्री ने अधिवक्ता समुदाय के योगदान को याद करते हुए कहा कि राज्य के विकास में सभी को सहयोगी बनना होगा और वित्तीय संसाधनों की सीमाओं का भी ध्यान रखना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं से अपना आंदोलन समाप्त करने का आग्रह करते हुए त्वरित समाधान के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने की घोषणा की। इस समिति में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति में किसी वास्तु विशेषज्ञ (आर्किटेक्ट) को भी शामिल किया जाएगा ताकि दोनों पक्षों के लिए सर्वमान्य और व्यावहारिक हल निकाला जा सके।

धामी ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत आख्या तथा समस्याओं के समाधान से जुड़े सभी बिंदुओं को शीघ्र ही कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा और उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अधिवक्ताओं के चैंबर निर्माण के लिए राज्य सरकार भरपूर आर्थिक सहयोग प्रदान करेगी। साथ ही अधिवक्ताओं को सुझाव दिया कि वे इस कार्य में क्षेत्रीय सांसदों तथा विधायकों से भी सहयोग लें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दिशा में वे स्वयं भी व्यक्तिगत पहल करेंगे।

श्री बदरीनाथ धाम 25 नवंबर को कपाट बंद होंगे प्रक्रिया हुई शुरू

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श्री बदरीनाथ धाम यात्रा 2025

• श्री बदरीनाथ धाम में कपाट बंद की प्रक्रिया के तहत पंच पूजाएं कल शुक्रवार से शुरू होंगी

• 25 नवंबर को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होंगे।

• *कपाट बंद होने के अवसर पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी सहित बीकेटीसी पदाधिकारी सदस्य मौजूद रहेंगे।*

श्री बदरीनाथ/ ज्योर्तिमठ/ गोपेश्वर: 20 नवंबर । विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट आगामी मंगलवार 25 नवंबर को अपराह्न 2 बजकर 56 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद हो जायेंगे । कपाट बंद होने की प्रक्रिया के अंतर्गत कल शुक्रवार 21नवंबर से पंच पूजाएं शुरू होंगी।

श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जानकारी दी कि कपाट बंद होने की प्रक्रिया के अंतर्गत पंचपूजाओं के पहले दिन 21 नवंबर को भगवान गणेश की पूजा होगी।शाम को इसी दिन भगवान गणेश के कपाट बंद होंगे दूसरे दिन 22 नवंबर को आदि केदारेश्वर मंदिर तथा शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे। तीसरे दिन 23 नवंबर को खडग – पुस्तक पूजन तथा वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो जायेगा।चौथे दिन 24 नवंबर मां लक्ष्मी जी को कढाई भोग चढाया जायेगा 25 नवंबर को अपराह्न 2 बजकर 56 मिनट पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे।

26 नवंबर प्रातः को श्री कुबेर जी एवं उद्धव जी सहित रावल जी सहित आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी शीतकालीन प्रवास पांडुकेश्वर तथा श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ को प्रस्थान करेंगे।
श्री उद्धव जी एवं कुबेर जी शीतकाल में गद्दीस्थल पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगे जबकि आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी 27 नवंबर को श्री नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ पहुंचेगी।

जारी प्रेस विज्ञप्ति में बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर को फूलों से सजाया जायेगा बताया कि कपाट बंद के समय बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, उपाध्यक्ष विजय कप्रवान, रावल अमरनाथ नंबूदरी, मुख्य कार्याधिकारी / कार्यपालक मजिस्ट्रेट विजय प्रसाद थपलियाल धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, प्रभारी धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल हकहकूकधारी एवं तीर्थ पुरोहित एवं श्रद्धालुजन मौजूद रहेंगे।

नीतीश कुमार 10वीं बार बने बिहार के मुख्यमंत्री, गांधी मैदान में भव्य शपथ ग्रहण समारोह

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पटना: बिहार की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ने आज रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने नीतीश कुमार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे।

नीतीश कुमार के साथ भाजपा के सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके अलावा कुल 26 मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की, जिसमें भाजपा और जदयू के कोटे से मंत्री शामिल हैं। कैबिनेट में एक मुस्लिम चेहरा (जमा खान), तीन महिलाएं और कुछ नए चेहरे भी शामिल किए गए हैं।

एनडीए की प्रचंड जीत का नतीजा

हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने 243 सीटों में से 202 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी (89 सीटें), जबकि जदयू ने 85 सीटें हासिल कीं। छोटे सहयोगी दलों जैसे लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 19, हम को 5 और रालोमो को 4 सीटें मिलीं। वहीं, महागठबंधन को मात्र 35 सीटों से संतोष करना पड़ा।

चुनाव परिणाम आने के बाद 19 नवंबर को नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया। उन्होंने कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर इस्तीफा देकर नई सरकार बनाने का दावा पेश किया। आज का शपथ ग्रहण समारोह 2010 के बाद गांधी मैदान में पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयोजित किया गया, जो एनडीए की मजबूती और नीतीश की लोकप्रियता का प्रतीक माना जा रहा है।

नीतीश का रिकॉर्डतोड़ सफर

पहली शपथ: मार्च 2000 (केवल 7 दिन का कार्यकाल)

दूसरी से दसवीं: 2005 से अब तक कई बार गठबंधन बदलते हुए मुख्यमंत्री बने।

नीतीश कुमार अब बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं (19 वर्ष से अधिक)। यदि यह कार्यकाल पूरा हुआ तो वे देश में सबसे लंबे समय तक सीएम रहने वाले सिक्किम के पूर्व सीएम पवन चामलिंग का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं।

नीतीश कुमार ने शपथ लेते ही बिहार के विकास और सुशासन की निरंतरता पर जोर दिया। समारोह में उमड़ी भारी भीड़ ने साफ कर दिया कि ‘सुशासन बाबू’ की लोकप्रियता बरकरार है। एनडीए की इस जीत को महिलाओं के समर्थन, कल्याणकारी योजनाओं और मोदी-नीतीश की जोड़ी का कमाल माना जा रहा है। बिहार अब नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। नई सरकार से राज्य में विकास की नई गति की उम्मीद जगी है।

 

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