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इंटेलिजेंस ब्यूरो में MTS के 362 पदों पर भर्ती, 10वीं पास युवाओं के लिए सुनहरा मौका, 22 नवंबर से शुरू होंगे आवेदन

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नई दिल्ली। गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS-जनरल) के 362 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। यह भर्ती देशभर के विभिन्न सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) में की जाएगी। मैट्रिक (10वीं) पास उम्मीदवारों के लिए यह केंद्रीय सरकारी नौकरी का शानदार अवसर है, जिसमें पूरे देश से आवेदन किए जा सकते हैं।

शॉर्ट नोटिफिकेशन 18 नवंबर को रोजगार समाचार में जारी किया गया है, जबकि विस्तृत अधिसूचना शीघ्र ही जारी की जाएगी। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 नवंबर 2025 से शुरू होकर 14 दिसंबर 2025 तक चलेगी। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से mha.gov.in या NCS पोर्टल के जरिए स्वीकार किए जाएंगे।

योग्यता एवं आयु सीमा

  • शैक्षिक योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से मैट्रिक (10वीं) पास या समकक्ष।
  • आयु सीमा: 18 से 25 वर्ष (14 दिसंबर 2025 को आधार मानकर)। आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC/EWS/PwBD/भूतपूर्व सैनिक आदि) को सरकार के नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी।

आवेदन शुल्क

  • सामान्य/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस वर्ग: 650 रुपये
  • एससी/एसटी/महिला/पीडब्ल्यूबीडी/भूतपूर्व सैनिक: 550 रुपये
  • (शुल्क में प्रोसेसिंग चार्ज शामिल है, कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।)

चयन प्रक्रिया

चयन लिखित परीक्षा (टियर-1 ऑब्जेक्टिव एवं टियर-2 डिस्क्रिप्टिव), दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल जांच के आधार पर होगा। यह ग्रुप ‘सी’ नॉन-गजेटेड, नॉन-मिनिस्टीरियल पद है, जिसमें पूरे भारत में स्थानांतरण की जिम्मेदारी होगी।

आवेदन कैसे करें

  • आधिकारिक वेबसाइट mha.gov.in पर जाएं।
  • IB MTS Recruitment 2025′ लिंक पर क्लिक करें।
  • रजिस्ट्रेशन पूरा करें, लॉगिन करके फॉर्म भरें।
  • आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें, शुल्क जमा करें और फॉर्म सबमिट कर प्रिंटआउट लें।

इंटेलिजेंस ब्यूरो में नौकरी का यह अवसर स्थायी सरकारी नौकरी, आकर्षक वेतन (पे लेवल-1: 18,000-56,900 रुपये) और विशेष भत्तों के साथ आता है। इच्छुक उम्मीदवार शीघ्र आवेदन करें, ताकि अंतिम तिथि में किसी तरह की तकनीकी समस्या न हो। विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखें।

उत्तराखंड: गहरी खाई में गिरा वाहन, 2 की मौत, 3 घायल,  SDRF ने किया रेस्क्यू

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जोशीमठ (चमोली), 20 नवंबर। उत्तराखंड के जनपद चमोली की उर्गम घाटी में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। टाटा सुमो वाहन (पंजीकरण संख्या UK11TA-1685) अनियंत्रित होकर लगभग 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरा।

हादसे में वाहन में सवार पांच लोगों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया वाहन के असंतुलित हो जाने से हादसा हुआ है। दुर्घटना के सटीक कारणों की जांच की जा रही है।

सूचना मिलते ही राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) पोस्ट जोशीमठ की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सब इंस्पेक्टर देवीदत्त बर्थवाल के नेतृत्व में घटनास्थल पर पहुंचकर जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

कठिन पर्वतीय इलाके और गहरी खाई होने के बावजूद SDRF जवानों ने रस्सियों की मदद से खाई में उतरकर राहत एवं बचाव कार्य किया। रेस्क्यू टीम ने तीन घायलों को सकुशल बाहर निकालकर तत्काल प्रभाव से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है।

वहीं, दो शवों को बरामद कर सड़क तक लाया गया और उन्हें जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। मृतकों की शिनाख्त डीसीआर चमोली के अनुसार पूरी कर ली गई है।

घायल व्यक्ति:

कमलेश (25 वर्ष), निवासी ग्राम पल्ला (चालक)

मिलन, निवासी ग्राम सलुड

पूरन सिंह (55 वर्ष), निवासी ग्राम सलुड

मृतक:

कन्हैया (20 वर्ष), निवासी ग्राम सलुड

ध्रुव (19 वर्ष), निवासी ग्राम सलुड

 

उत्तराखंड सरकार ने राज्य कर्मचारियों की हड़ताल पर लगाया छह माह का पूर्ण प्रतिबंध

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देहरादून : उत्तराखंड शासन ने लोकहित और आवश्यक सेवाओं के सुचारू संचालन को ध्यान में रखते हुए राज्याधीन सभी सेवाओं में हड़ताल पर अगले छह माह के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कार्मिक विभाग के सचिव शैलेश बगौली ने बुधवार को इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी।

अधिसूचना में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम, 1966 (यूपी एक्ट नंबर 30 ऑफ 1966) जो उत्तराखंड राज्य में यथावत लागू है, की धारा 3 की उपधारा (1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। यह प्रतिबंध अधिसूचना जारी होने की तिथि यानी 19 नवंबर 2025 से अगले छह महीनों तक प्रभावी रहेगा।

इस अवधि में राज्य सरकार के अधीन किसी भी विभाग या उपक्रम में कार्यरत कर्मचारी या कर्मचारी संगठन किसी भी प्रकार की हड़ताल, कार्य बहिष्कार या सामूहिक अवकाश पर नहीं जा सकेंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध अधिनियम के प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

POK के पूर्व PM का सनसनीखेज कबूलनामा: ‘लाल किले से कश्मीर के जंगलों तक भारत में हमने कराए हमले

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नई दिल्ली : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेता चौधरी अनवरुल हक ने भारत में हाल के आतंकी हमलों में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों की भूमिका को खुलेआम स्वीकार कर बड़ा राजनीतिक भूचाल पैदा कर दिया है। एक वायरल वीडियो में हक ने दावा किया कि दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट से लेकर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए घातक हमले तक, ये सभी पाकिस्तान की ओर से ‘बदले की कार्रवाई’ थे।
हक ने PoK विधानसभा में कहा, “मैंने पहले कहा था कि अगर तुम (भारत) बलूचिस्तान को खून बहाते रहोगे, तो हम लाल किले से लेकर कश्मीर के जंगलों तक भारत को निशाना बनाएंगे। अल्लाह की मेहरबानी से हमारे शाहीनों (आतंकी) ने यह कर दिखाया।” उन्होंने आगे कहा, “लाल किले के पास हमला हुआ और वे अभी भी लाशें गिन रहे हैं। कश्मीर के जंगलों में भी हमने वार किया।”
यह बयान 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास मेट्रो स्टेशन क्षेत्र में हुए कार बम धमाके का सीधा जिक्र करता है, जिसमें कम से कम 15 लोग मारे गए थे। जांच एजेंसियों ने इस हमले के तार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े ‘व्हाइट कॉलर’ मॉड्यूल से जोड़े हैं। इसी तरह, ‘कश्मीर के जंगलों’ से हक का इशारा अप्रैल 2025 में पहलगाम के बैसरन वैली में हुए हमले की ओर है, जिसमें 26 पर्यटक मारे गए थे। उस हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
चौधरी अनवरुल हक हाल ही में PoK में अविश्वास प्रस्ताव से हटाए गए नेता हैं और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक सदस्य रह चुके हैं। उनके इस बयान से पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही ‘सीमा पार आतंकवाद’ की नीति एक बार फिर बेनकाब हो गई है। पाकिस्तान की संघीय सरकार ने हालांकि हक के बयान से खुद को अलग कर लिया है और इसे ‘राजनीतिक रूप से हताश नेता की गलती’ करार दिया है।
भारत ने हमेशा पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि वह जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों को संरक्षण देता है। हक का यह खुला इकबाल भारत के इन आरोपों की पुष्टि करता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की अलग-थलग पड़ने की आशंका बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान बलूचिस्तान में अशांति के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की पाकिस्तानी रणनीति का हिस्सा है, लेकिन यह उल्टा पड़ गया है।
विदेश मंत्रालय ने इस बयान पर तीक्षा से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के सबूत दुनिया के सामने हैं और ऐसे बयान इसकी पुष्टि करते हैं।” सूत्रों के अनुसार, भारत इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए की बैठक: नीतीश कुमार 10वीं बार बनेंगे मुख्यमंत्री

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पटना: बिहार विधानसभा के सेंट्रल हॉल में बुधवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सभी नवनिर्वाचित विधायक मौजूद रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष सुमन, उपेंद्र कुशवाहा, बिहार भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा भी उपस्थित थे।

बैठक में भाजपा विधायक दल के नेता सम्राट चौधरी ने एनडीए विधायक दल के नेता के रूप में नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव पर सभी विधायकों ने एकस्वर से सहमति जताई और “नीतीश कुमार जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए सर्वसम्मति से उन्हें नेता चुना गया।

इसके साथ ही एनडीए ने कल होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की पूरी तैयारी कर ली है। गुरुवार को गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में नीतीश कुमार दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस समारोह में शामिल होंगे।

चुनाव परिणामों से पहले ही ‘अमर उजाला’ ने स्पष्ट रूप से खबर दी थी कि बहुमत मिलने की स्थिति में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाएगी। आज हुई बैठक में वह भविष्यवाणी सौ फीसदी सत्य साबित हुई।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ ही देर में राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे, जिसके बाद नए मंत्रिमंडल के गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

बिहार में एनडीए की इस एकजुटता ने स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही प्रदेश आगे बढ़ेगा। कल का शपथ ग्रहण समारोह राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय लिखेगा।

उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: स्वामी कैलाशानंद मिशन ट्रस्ट की पूरी संपत्ति BKTC को सौंपी

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नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्वामी कैलाशानंद मिशन ट्रस्ट की संपूर्ण संपत्ति, मंदिर, धर्मशाला, गोशाला और अन्य चल-अचल संपत्तियों—का प्रबंधन एवं संचालन श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को सौंपने का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने मंगलवार (18 नवंबर 2025) को सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध सबूतों की समीक्षा के बाद यह फैसला सुनाया। आदेश अपील संख्या 2008/2016 तथा संबंधित याचिका संख्या 10511/2025 के संदर्भ में पारित किया गया है।

ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला से सटे इस ट्रस्ट की संपत्तियों पर वर्षों से विवाद चल रहा था। मामला सबसे पहले 2014 में देहरादून जिला न्यायालय में उठा था। लंबी सुनवाई के दौरान सामने आया कि कुछ लोगों ने ट्रस्ट की संपत्तियों पर अवैध कब्जा कर लिया था और उन्हें गैरकानूनी तरीके से बेचा-खरीदा जा रहा था। मूल हकदारों को धोखाधड़ी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था।

अब उच्च न्यायालय के इस आदेश से ट्रस्ट की सभी संपत्तियों का संचालन बीकेटीसी के हाथों में आएगा, जिससे अवैध कब्जे और दुरुपयोग पर रोक लगने की उम्मीद है।

द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट शीतकाल हेतु बंद हुए

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द्वितीय केदार श्री मद्महेश्वर मंदिर के कपाट शीतकाल हेतु बंद हुए।

श्री मद्महेश्वर जी की चलविग्रह उत्सव डोली का देव निशानों के साथ 21 नवंबर को उखीमठ आगमन ।

20 नवंबर से शुरू हो रहा तीन दिवसीय मदमहेश्वर मेला।

उखीमठ/ रूद्रप्रयाग 18 नवंबर। द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर जी के कपाट आज मंगलवार प्रातः 8 बजे शीतकाल हेतु मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी स्वाति नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में बंद हो गये है । सोमवार से ही मंदिर को फूलों से सजाया गया था इस अवसर पर साढ़े तीन सौ से अधिक श्रद्धालु तथा बीकेटीसी कर्मचारी अधिकारी , वनविभाग एवं प्रशासन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कपाट बंद होने की प्रक्रिया के अंतर्गत ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर खुला श्रद्धालुओं ने दर्शन किये पूजा-अर्चना अर्चना के बाद सात बजे से कपाट बंद ही प्रक्रिया शुरू हो गयी।इसके पश्चात पुजारी शिवलिंग ने बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी/ कार्यपालक मजिस्ट्रेट विजय प्रसाद थपलियाल, बीकेटीसी सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान एवं पंच गौंडारी हकहकूकधारियों की उपस्थिति में श्री मदमहेश्वर जी के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप दिया। स्थानीय पुष्पों एवं राख से ढ़का इसके बाद प्रातः आठ सात बजे मंदिर के कपाट श्री मदमहेश्वर जी के जय घोष के साथ शीत काल हेतु बंद हो गये।

कपाट बंद होने के बाद श्री मदमहेश्वर जी की चल विग्रह डोली ने अपने भंडार का निरीक्षण तथा मंदिर की परिक्रमा पश्चात ढ़ोल- दमाऊं के साथ प्रथम पड़ाव गौंडार प्रस्थान किया तथा शाम को गौंडार पहुंच गयी।

श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने अपने संदेश में द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने के अवसर पर श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी। श्रद्धालुओं से अपील की है मंदिरों कपाट बंद होने तर शीतकालीन तीर्थस्थलों में दर्शन का पुण्य लाभ अर्जित करें।वहीं बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती एवं उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण ने श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने पर बधाई दी है।

मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने द्वितीय केदार मदमहेश्वर से बताया कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच इस यात्रा वर्ष द्वितीय केदार मदमहेश्वर में बाईस हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किये।
बताया कि कपाट बंद होने के बाद श्री मदमहेश्वर जी की चल विग्रह डोली रात्रि प्रवास हेतु पहले पड़ाव गौंडार के लिए रवाना हुई ।

जारी प्रेस विज्ञप्ति में बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि 19 नवंबर बुधवार को भगवान मदमहेश्वर जी की चल विग्रह उत्सव डोली राकेश्वरी मंदिर रांसी तथा 20 नवंबर गुरुवार को गिरिया प्रवास करेगी तथा 21 नवंबर शुक्रवार को चल विग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी। बताया कि श्री मदमहेश्वर जी की चल विग्रह डोली के स्वागत हेतु श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में तैयारियां शुरू हो गयी हैं।

आज कपाट बंद होने के अवसर पर बीकेटीसी सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान,बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, प्रभारी अधिकारी यदुवीर पुष्पवान,
पंच गौंडारी हकहकूकधारी पूर्व प्रधान वीरसिंह पंवार, सरपंच फतेह सिंह, शिवानन्द पंवार,दीपक पंवार , पारेश्वर त्रिवेदी, मनीष तिवारी देवेन्द्र पटवाल, बृजमोहन, दिनेश पंवार सहित वन विभाग एवं प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी श्रद्धालुज मौजूद हे।

साकेत, रोहिणी, तीस हजारी व पटियाला हाउस कोर्ट सहित CRPF के दो स्कूलों को जैश-ए-मोहम्मद के नाम से बम की धमकी

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नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में मंगलवार सुबह एक बार फिर दहशत फैलाने की कोशिश हुई। साकेत कोर्ट, रोहिणी कोर्ट, तीस हजारी कोर्ट और पटियाला हाउस कोर्ट के साथ-साथ CRPF के दो स्कूलों प्रशांत विहार और द्वारका स्थित को बम होने की धमकी भरा ई-मेल मिला। ई-मेल आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नाम से भेजा गया था।

सुबह करीब 9 बजे धमकी मिलते ही सभी जगहों पर दिल्ली पुलिस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और दमकल विभाग की टीमें पहुंच गईं। साकेत कोर्ट परिसर को पूरी तरह खाली करा लिया गया और सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए। इससे कोर्ट आने-जाने वाले वकीलों व पक्षकारों की गाड़ियां सड़क पर खड़ी हो गईं, जिससे आसपास भारी जाम लग गया।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों CRPF स्कूलों और सभी कोर्ट परिसरों में गहन तलाशी अभियान चलाया गया। कई घंटे की सघन जांच के बाद किसी भी जगह कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पूरे मामले को झूठी धमकी घोषित कर दिया गया है। गौरतलब है कि प्रशांत विहार स्थित CRPF स्कूल में आज ही वार्षिक उत्सव का आयोजन चल रहा था। पिछले साल इसी स्कूल के पास विस्फोट हुआ था, जिसके चलते आज की धमकी से सुरक्षा एजेंसियां खास सतर्क हो गई थीं।

द्वारका कोर्ट में हालांकि कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा। पुलिस ने बताया कि धमकी के स्रोत का पता लगाने के लिए साइबर सेल को भी अलर्ट कर दिया गया है। पिछले कुछ महीनों में दिल्ली-एनसीआर के सैकड़ों स्कूलों और कई कोर्ट परिसरों को इसी तरह की धमकियां मिल चुकी हैं, जिनमें से अधिकांश फर्जी साबित हुई हैं।

उत्तराखंड : चैंबर निर्माण की मांग को लेकर अधिवक्ताओं की हड़ताल जारी, आज पूर्ण बंद

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देहरादून : जिला न्यायालय परिसर में नए चैंबर निर्माण और अन्य मांगों को लेकर देहरादून बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं की हड़ताल सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रही। अधिवक्ताओं ने मंगलवार को पूरे दिन कचहरी में सभी न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य पूर्णतः ठप रखने का ऐलान किया है।

सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिलाधिकारी सविन बंसल एवं एसएसपी अजय सिंह धरनास्थल पहुंचे और अधिवक्ताओं से वार्ता की। जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि पुराने चैंबरों से अधिवक्ताओं को विस्थापित नहीं किया जाएगा तथा नए चैंबर निर्माण के लिए अतिरिक्त भूमि का आवंटन समयबद्ध ढंग से किया जाएगा। उन्होंने अधिवक्ताओं से एक कमेटी गठित कर शीघ्र लिखित सुझाव देने को कहा, ताकि उन्हें राज्य सरकार तक पहुंचाया जा सके।

हालांकि अधिवक्ताओं ने इन आश्वासनों को अपर्याप्त मानते हुए हड़ताल जारी रखने और मंगलवार को पूर्ण बंद करने का निर्णय लिया। देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने बताया कि रविवार को अधिवक्ता प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई थी, जिसके बाद जिलाधिकारी को वार्ता के निर्देश मिले थे। बार की बैठक में निर्णय लिया गया कि मंगलवार को पुनः एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिलेगा तथा मांगों के लिए संघर्ष समिति का गठन किया जाएगा। तब तक हड़ताल अनिश्चितकालीन रूप से जारी रहेगी।

गौरतलब है कि अधिवक्ता प्रतिदिन हड़ताल का समय आधा घंटा बढ़ा रहे हैं। सोमवार को हड़ताल दोपहर साढ़े तीन बजे तक चली। मंगलवार को स्टांप बिक्री, रजिस्ट्री तथा सभी न्यायिक कार्य पूरे दिन बंद रहेंगे। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक चैंबर निर्माण और अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने NIM घोटाला मामले में केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी किया!

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नैनीताल : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM), उत्तरकाशी में 2018 से 2022 के बीच कथित भर्ती घोटाले और अन्य वित्तीय-प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और उत्तराखंड राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों सरकारों को निर्देश दिया कि वे याचिका में लगाए गए आरोपों पर अपना विस्तृत पक्ष जल्द प्रस्तुत करें। जवाब दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

याचिका दिनेश चंद्र उनियाल ने दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि NIM में उक्त अवधि में भर्ती प्रक्रिया, खरीद-फरोख्त और अन्य कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। याचिकाकर्ता का दावा है कि CAG की रिपोर्ट में भी इन गड़बड़ियों के संकेत मौजूद हैं। वहीं, राज्य और केंद्र सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि संस्थान में कोई अनियमितता नहीं हुई है। CAG ने पहले ही जांच की थी और उसमें कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि जिन अधिकारियों (खासकर तत्कालीन रजिस्ट्रार) पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें याचिका में पक्षकार तक नहीं बनाया गया। याचिकाकर्ता ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि CAG रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कमियां उजागर हुई हैं, इसलिए याचिका जायज है। अदालत ने दोनों पक्षों के दलीलों को सुनने के बाद सरकारों से लिखित जवाब मांगा है।