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RJD नेता जगदानंद सिंह का सनसनीखेज आरोप- ‘हर EVM में पहले से थे 25 हजार वोट’, बैलेट पेपर की मांग तेज

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पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए ईवीएम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। पार्टी की पहली महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक सोमवार को पटना में आयोजित की गई, जिसमें तेजस्वी यादव को सर्वसम्मति से एक बार फिर विधायक दल का नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना गया। बैठक में RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

चुनाव में NDA की प्रचंड जीत (243 में से 202 सीटें) के सामने महागठबंधन बुरी तरह पिछड़ गया। RJD मात्र 25 सीटें ही जीत पाई, जो 2020 के 75 सीटों की तुलना में भारी गिरावट है। बैठक के बाद पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने मीडिया से बातचीत में सनसनीखेज दावा किया कि हर ईवीएम में पहले से करीब 25 हजार वोट ‘कैद’ थे। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी कि चुनाव में राजद की ऐसी स्थिति होगी। फिर भी हमारे 25 विधायक जीत गए, यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है।”

जगदानंद सिंह ने आगे आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने परिस्थितियां बदलने के लिए ‘विशेष उपाय’ किए। उन्होंने सवाल उठाया, “लोकतंत्र की प्रक्रिया में अगर छेड़छाड़ होने लगे तो देश किस दिशा में जाएगा? क्या लोकतंत्र कोई व्यापार है जिसमें धोखाधड़ी चलती रहे?” संविधान बचाने की बात करते हुए उन्होंने ईवीएम में गड़बड़ी को चुनाव परिणामों का बड़ा कारण बताया।

बैठक में मौजूद मनेर से नवनिर्वाचित RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने भी जगदानंद के सुर में सुर मिलाया। उन्होंने कहा, “हम बैलेट पेपर वाले चुनाव में जीतते हैं, ईवीएम वाले चुनाव में हारते हैं। ईवीएम में चोरी हुई है और इसके खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी।” भाई वीरेंद्र ने तेजस्वी यादव को नेता चुनने की प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि पार्टी उनके निर्देशों पर काम करेगी।

RJD नेताओं के इन आरोपों से बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। पार्टी का मानना है कि तकनीकी गड़बड़ियों ने परिणामों को सीधे प्रभावित किया। RJD अब राष्ट्रीय स्तर पर ईवीएम की समीक्षा और बैलेट पेपर की वापसी की मांग को तेज करने की तैयारी में है। कुछ नेताओं ने अदालत जाने का भी संकेत दिया है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग बार-बार ईवीएम की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर जोर देता रहा है। आयोग का कहना है कि ईवीएम से किसी तरह की हेराफेरी संभव नहीं है। NDA की इस ऐतिहासिक जीत को विकास और नीतीश कुमार-मोदी की जोड़ी का करिश्मा बताया जा रहा है, जबकि विपक्ष इसे ‘ईवीएम की सुनामी’ करार दे रहा है।

मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट बंद, बाबा की डोली शीतकालीन प्रवास को हुई रवाना

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रुद्रप्रयाग :पंच केदार के द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट आज मंगलवार को प्रातः काल विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। अब भगवान मध्यमहेश्वर की चल उत्सव विग्रह डोली 21 नवंबर को शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ (जिला रुद्रप्रयाग) में विधिवत विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगी।

मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग ने बताया कि सुबह ठीक 5 बजे से हक-हकूक धारियों, आचार्यों, स्थानीय ग्रामीणों और तीर्थयात्रियों की उपस्थिति में कपाट बंद करने की पूजा-अर्चना शुरू हुई। सभी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए सर्वप्रथम भगवान मध्यमहेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को पंचगव्य, फूल-बेलपत्र और घी-दूध से समाधि दी गई। इसके बाद भोग मूर्तियों को पुष्पों से सजाकर पंचधातु की चल उत्सव डोली में विराजमान किया गया।

डोली यात्रा का चार दिवसीय कार्यक्रम

  • 18 नवंबर (आज): डोली रात्रि विश्राम के लिए गोंडार गांव पहुंचेगी।
  • 19 नवंबर: मां राकेश्वरी मंदिर, रांसी में रात्रि विश्राम।
  • 20 नवंबर: गिरिया गांव में रात्रि विश्राम।
  • 21 नवंबर: भव्य शोभायात्रा के साथ ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में भगवान मध्यमहेश्वर की डोली विराजमान होगी।

तीन दिवसीय मेले का आयोजन

भगवान मध्यमहेश्वर की डोली के मनसूना आगमन को लेकर 18 से 20 नवंबर तक पारंपरिक मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेला समिति अध्यक्ष संजय मनराल ने बताया कि मेले में स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुति, स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, धार्मिक भजन-कीर्तन और विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताएं होंगी। मेले के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं तथा दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं।

हर साल की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु डोली यात्रा में शामिल होकर “जय बाबा मध्यमहेश्वर”, “बम-बम भोले” के जयकारों से पहाड़ गूंज उठे। ठंड बढ़ने के साथ ही अब पंच केदार के शेष तीन केदारों – तृतीय केदार तुंगनाथ, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ और पंचम केदार कल्पेश्वर के कपाट भी आने वाले दिनों में बंद हो जाएंगे।

दिल्ली ब्लास्ट केस : अल फलाह यूनिवर्सिटी में ED की बड़ी कार्रवाई, चार राज्यों में 30 ठिकानों पर छापे

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नई दिल्ली : दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए विस्फोटक हमले की जांच में नया मोड़ आ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में चार राज्यों—दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश और एक अन्य राज्य—में 30 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। इस कार्रवाई में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद के महू (मध्य प्रदेश) स्थित पुराने आवास, फरीदाबाद में अल फलाह कैंपस और ओखला स्थित ट्रस्ट कार्यालय समेत कई महत्वपूर्ण जगहें शामिल हैं।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच के समन्वय में की जा रही है। एनआईए ने अब तक दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर नबी के करीबी सहयोगी बताए जा रहे हैं। डॉ. उमर, जो विस्फोट में मुख्य भूमिका निभाने वाले संदिग्धों में से एक थे, खुद एक चिकित्सक थे और अल फलाह यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे।

दिल्ली ब्लास्ट का खौफनाक मंजर

10 नवंबर को दोपहर करीब 2:30 बजे दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के नजदीक एक सफेद रंग की हुंडई i20 कार में जबरदस्त विस्फोट हुआ। इस धमाके में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। घटनास्थल पर मची तबाही का आलम यह था कि कार के परखचे चारों तरफ बिखर गए और आसपास के वाहनों व संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि विस्फोट एक आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा था, जिसमें घरेलू विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया गया।

दिल्ली पुलिस और एनआईए की संयुक्त जांच में सामने आया कि इस साजिश में शामिल ज्यादातर संदिग्ध चिकित्सक पृष्ठभूमि के थे। डॉ. उमर नबी, जो विस्फोट में आत्मघाती हमलावर की भूमिका निभा रहे थे, अल फलाह यूनिवर्सिटी के फैकल्टी मेंबर थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि यूनिवर्सिटी के परिसर और इससे जुड़े ट्रस्ट के माध्यम से संदिग्धों ने फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट जुटाया। हालांकि, मनी लॉन्ड्रिंग का केस मुख्य रूप से विदेशी फंडिंग और हवाला नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है।

अल फलाह यूनिवर्सिटी का इनकार, जांच तेज

अल फलाह यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा, “हमारी संस्था शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित है और किसी भी आतंकी गतिविधि से इसका कोई लेना-देना नहीं है। डॉ. उमर नबी का नाम हमारे रिकॉर्ड में प्रोफेसर के रूप में दर्ज है, लेकिन उनकी गतिविधियों से यूनिवर्सिटी का कोई संबंध नहीं। हम जांच एजेंसियों का पूरा सहयोग करेंगे।”

ईडी की छापेमारी में अब तक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही है, जिसमें यूनिवर्सिटी पर विदेशी चैरिटी फंड्स के गलत इस्तेमाल का आरोप है। एनआईए को शक है कि इन फंड्स का एक हिस्सा आतंकी नेटवर्क को ट्रांसफर किया गया।

जांच का दायरा बढ़ा

यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया है, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मुद्दा बताते हुए कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “जांच में और गिरफ्तारियां तय हैं। हम संपूर्ण नेटवर्क को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

एनआईए और ईडी की टीमें फिलहाल ठिकानों पर मौजूद हैं, और अगले 48 घंटों में और खुलासे होने की संभावना है। इस घटना ने दिल्ली सहित पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है। अधिक जानकारी के लिए जांच एजेंसियों के आधिकारिक बयानों का इंतजार है।

दुबई में शाहरुख़ खान के नाम पर बनेगा ₹4,000 करोड़ का 55-मंज़िला ‘Shahrukhz Tower’

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  • टी.एस. लामा

दुबई में शाहरुख़ खान के नाम पर 55 मंज़िला अल्ट्रा-लक्ज़री ‘Shahrukhz Tower’ बनाने की घोषणा की गई है। लगभग ₹4,000 करोड़ की लागत से समुद्र तट के पास तैयार होने वाला यह प्रोजेक्ट एक प्रीमियम स्काईस्क्रेपर होगा, जिसे डेवलपर्स ने आर्किटेक्चरल मास्टरपीस करार दिया है।

डेवलपर्स का कहना है कि यह टॉवर मध्य पूर्व में शाहरुख़ खान की असाधारण लोकप्रियता और सांस्कृतिक प्रभाव को सम्मान देने की पहल है। क्षेत्र में शाहरुख़ को आज भी सबसे अधिक प्यार और सम्मान मिलता है।

इस प्रोजेक्ट के साथ शाहरुख़ खान ने फिल्मों से आगे बढ़कर दुनिया की स्काइलाइन पर भी अपनी छाप छोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ा दिया है। यही कारण है कि उन्हें बॉलीवुड का ‘बादशाह’ ही नहीं, बल्कि वैश्विक आइकॉन माना जाता है।

बांग्लादेश: पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा, ICT ने मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहरा

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ढाका: बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए फांसी की सजा सुनाई है। तीन सदस्यीय पीठ ने हसीना को गैर-हाजिर सुनवाई में दोषी ठहराते हुए कहा कि उन्होंने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हिंसक दमन का आदेश दिया था, जिसमें 1,400 से अधिक मौतें हुईं। कोर्ट ने पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी फांसी की सजा दी, जबकि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को गवाह बनने पर 5 वर्ष की कैद सुनाई। यह फैसला ढाका में लाइव प्रसारित हुआ, जिसके बाद कोर्टरूम में पीड़ित परिवारों ने तालियां बजाईं।

यह सजा बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल ला रही है। हसीना, जो अगस्त 2024 से भारत में निर्वासित हैं, ने फैसले को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताते हुए खारिज कर दिया। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने इसे “न्याय का फैसला” कहा, लेकिन हसीना की आवामी लीग ने राष्ट्रीय हड़ताल का ऐलान किया है। ढाका में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, और सेना तैनात है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन में 1,400 मौतें और 25,000 घायल हुए थे।

कोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष: 5 गंभीर आरोपों पर दोष सिद्ध

ICT की 453 पृष्ठों वाली जजमेंट में हसीना को उकसावे, हत्या के आदेश और रोकथाम में विफलता का दोषी ठहराया गया। मुख्य न्यायाधीश गोलम मोर्तुजा मोजुमदार ने कहा, “हसीना ने हेलीकॉप्टर, ड्रोन और घातक हथियारों का इस्तेमाल कर नागरिकों पर हमला करवाया।” कोर्ट ने 54 गवाहों के बयानों और सबूतों के आधार पर ये निष्कर्ष निकाले:

आरोप संख्या विवरण कोर्ट का निष्कर्ष
1 छात्रों की मांगों को नजरअंदाज कर उन्हें ‘रजाकार’ (1971 युद्ध के सहयोगी) कहना। उकसावे से हिंसा भड़की, हसीना का बयान प्रत्यक्ष सबूत।
2 उकसावे के बाद प्रदर्शनकारियों (मुख्यतः छात्राओं) पर हमला। आवामी लीग की छात्र-युवा शाखाओं ने ढाका यूनिवर्सिटी पर हल्ला बोला।
3 हिंसा रोकने के बजाय सख्त कार्रवाई का आदेश। गृह मंत्री और IG को निर्देश, हेलीकॉप्टर-ड्रोन से फायरिंग।
4 चंखारपुल में 5 अगस्त को 6 प्रदर्शनकारियों की हत्या। हसीना के आदेश पर हुई, दक्षिण ढाका मेयर से बातचीत में सबूत।
5 कुल 1,400 हत्याएं, जिसमें अबु सईद (रंगपुर यूनिवर्सिटी छात्र) की गोली मारकर हत्या। न्याय रोकने और दंडात्मक कार्रवाई में विफलता, मानवता के खिलाफ अपराध।

कोर्ट ने कहा, “ये हत्याएं हसीना के पूर्ण ज्ञान और आदेश पर हुईं।” पूर्व IG अल-मामून ने गवाही देकर सजा कम करवाई। सुनवाई 28 दिनों में पूरी हुई, जिसमें हसीना को कई बार पेश होने का समन भेजा गया, लेकिन वे नहीं आईं।

पृष्ठभूमि: छात्र आंदोलन से सरकार गिरावट

2024 में सिविल सेवा कोटा पर छात्र आंदोलन शुरू हुआ, जो हसीना के इस्तीफे की मांग में बदल गया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक दमन में तब्दील हो गया, जिसमें पुलिस, बीएसएफ और लीग कार्यकर्ताओं ने गोलीबारी की। 5 अगस्त 2024 को हसीना ने भारत भागकर इस्तीफा दिया। यूनुस सरकार ने ICT के जरिए मुकदमा चलाया, जो हसीना ने खुद स्थापित किया था। मानवाधिकार संगठनों ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” कहा।

प्रतिक्रियाएं: जश्न और तनाव

  • पीड़ित परिवार: मीर मुग्धो के भाई ने कहा, “1,400 हत्याओं के लिए 1,400 फांसी होनी चाहिए।” ढाका यूनिवर्सिटी में छात्रों ने मिठाइयां बांटीं।
  • हसीना का बयान:”यह पक्षपाती और राजनीतिक फैसला है। मैं घातक बल के इस्तेमाल में शामिल नहीं।” उनके बेटे साजीब वाजेद ने अपील न करने का ऐलान किया, जब तक लोकतांत्रिक सरकार न बने।
  • आवामी लीग:”कंगारू कोर्ट” करार देकर हड़ताल। ढाका में 30 बम विस्फोट और 26 वाहन जलाए गए।
  • अंतरिम सरकार:”पारदर्शी प्रक्रिया”, लेकिन हिंसा रोकने के लिए शूट-एट-साइट आदेश।
  • भारत: प्रत्यर्पण पर चुप्पी। हसीना ने भारत को “सबसे बड़ा सहयोगी” कहा, लेकिन यूनुस सरकार ने गुहार लगाई।

वैश्विक प्रभाव: मानवाधिकार चिंताएं

संयुक्त राष्ट्र ने 1,400 मौतों की पुष्टि की। Amnesty International ने कोर्ट को “निष्पक्ष न होने” का आरोप लगाया। हसीना की 19 हत्या की कोशिशों से बचने वाली जिंदगी अब खतरे में। बांग्लादेश में चुनाव से पहले यह फैसला अस्थिरता बढ़ा सकता है।

AFCAT 1 2026: भारतीय वायु सेना में कमिशंड ऑफिसर बनने का सुनहरा अवसर, 340 पदों पर भर्ती शुरू!

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सरकारी नौकरी: भारतीय वायु सेना (IAF) ने एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) 1/2026 के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह भर्ती फ्लाइंग ब्रांच और ग्राउंड ड्यूटी (टेक्निकल व नॉन-टेक्निकल) ब्रांचों में ग्रुप A गजेटेड ऑफिसरों के लिए 340 रिक्तियों को भरने के उद्देश्य से की जा रही है। पुरुष और महिला उम्मीदवारों दोनों के लिए अवसर खुले हैं, और कोर्स जनवरी 2027 से शुरू होंगे। यह परीक्षा उन युवाओं के लिए एक शानदार मौका है जो देश की सेवा में वायुसेना का हिस्सा बनना चाहते हैं।

महत्वपूर्ण तिथियां:

  • आवेदन शुरू होने की तारीख: 17 नवंबर 2025 (सुबह 11:00 बजे से)
  • आवेदन की अंतिम तिथि: 14 दिसंबर 2025 (रात 11:30 बजे तक)
  • एग्जाम डेट: 31 जनवरी 2026 (शनिवार)
  • कोर्स कमेंसमेंट: जनवरी 2027

रिक्तियां का विवरण:

  • फ्लाइंग ब्रांच: 38 पद
  • ग्राउंड ड्यूटी (टेक्निकल): 188 पद
  • ग्राउंड ड्यूटी (नॉन-टेक्निकल): 114 पद
  • NCC स्पेशल एंट्री: फ्लाइंग ब्रांच के लिए अतिरिक्त अवसर

यह भर्ती शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत की जा रही है, जो उम्मीदवारों को वायुसेना में सेवा करने का रोमांचक अवसर प्रदान करेगी।

आवेदन प्रक्रिया:

उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट afcat.edcil.co.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन लिंक आज (17 नवंबर) से सक्रिय हो चुका है। आवेदन भरते समय सभी दस्तावेज (जैसे शैक्षणिक प्रमाणपत्र, फोटो, साइन) तैयार रखें। आवेदन फॉर्म सावधानीपूर्वक भरें, क्योंकि कोई त्रुटि पाई गई तो फॉर्म रद्द हो सकता है।

आवेदन फॉर्म लिंक: AFCAT 1 2026 आवेदन फॉर्म

आवेदन शुल्क:

AFCAT एंट्री के लिए सभी श्रेणियों (जनरल, OBC, SC/ST) के उम्मीदवारों को 550 रुपये का शुल्क जमा करना होगा। यह शुल्क ऑनलाइन माध्यम से (डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या UPI) भरा जा सकता है। NCC स्पेशल एंट्री के लिए कोई शुल्क नहीं है।

योग्यता मानदंड (संक्षिप्त):

  • आयु सीमा: फ्लाइंग ब्रांच के लिए 20-24 वर्ष, ग्राउंड ड्यूटी के लिए 20-26 वर्ष (NCC के लिए विशेष छूट)।
  • शैक्षणिक योग्यता: ग्रेजुएशन में न्यूनतम 60% अंक (टेक्निकल ब्रांच के लिए इंजीनियरिंग डिप्लोमा/बीटेक)।
  • राष्ट्रीयता: भारतीय नागरिक।
  • वैवाहिक स्थिति: आवेदन के समय अविवाहित होना अनिवार्य।
  • पूर्ण पात्रता के लिए आधिकारिक अधिसूचना देखें।

चयन प्रक्रिया:

लिखित परीक्षा (AFCAT):

  • जनरल अवेयरनेस, वर्बल एबिलिटी इन इंग्लिश, न्यूमेरिकल एबिलिटी और रीजनिंग पर आधारित।
  • EKT (टेक्निकल ब्रांच के लिए): इंजीनियरिंग नॉलेज टेस्ट।
  • AFSB इंटरव्यू: साइकोलॉजिकल टेस्ट, ग्रुप टेस्ट और मेडिकल एग्जाम।

अधिसूचना डाउनलोड:

भर्ती से जुड़ी पूरी जानकारी, सिलेबस, एग्जाम पैटर्न और अन्य डिटेल्स के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन PDF डाउनलोड करें।

 

KVS-NVS भर्ती 2025: 14,967 पदों पर सरकारी नौकरी का सुनहरा अवसर, आवेदन शुरू!

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सरकारी नौकरी की तलाश में लगे युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) के लिए संयुक्त भर्ती अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 14,967 पदों पर शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।

आवेदन प्रक्रिया 14 नवंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और 4 दिसंबर 2025 तक चलेगी। यह मौका उन लाखों उम्मीदवारों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो लंबे समय से स्थायी सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।

भर्ती का दायरा: हर योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए खुला द्वार

इस बार की भर्ती का स्केल बेहद बड़ा है। केवीएस में 9,126 पद (जिनमें 7,963 शिक्षण और 1,163 गैर-शिक्षण) जबकि एनवीएस में 5,841 पद भरे जाएंगे। पदों में प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (पीजीटी), ट्रेन्ड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी), प्राइमरी टीचर (पीआरटी), लाइब्रेरियन, असिस्टेंट कमिश्नर, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, स्टेनोग्राफर, क्लर्क, लैब अटेंडेंट, मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) जैसे विविध पद शामिल हैं। हर श्रेणी, हर विषय और हर योग्यता के उम्मीदवारों को अवसर मिलेगा, चाहे वे 10वीं पास हों या पोस्ट ग्रेजुएट।

शिक्षण पदों के लिए बीएड और सीटीईटी पास उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलेगी। टीजीटी के लिए संबंधित विषय में ग्रेजुएशन के साथ बीएड और सीटीईटी पेपर-2 अनिवार्य है, जबकि पीजीटी के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन और बीएड जरूरी। प्राइमरी टीचर (पीआरटी) के लिए 12वीं पास के साथ डीएलएड/बीटीसी और सीटीईटी पेपर-1 पास होना चाहिए। प्रिंसिपल/वाइस प्रिंसिपल जैसे वरिष्ठ पदों के लिए मास्टर्स डिग्री, बीएड और 9-12 वर्ष का अनुभव मांगा गया है। गैर-शिक्षण पदों के लिए 10वीं, 12वीं, ग्रेजुएशन या डिप्लोमा धारक आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा पद के अनुसार 18-50 वर्ष तक है, जिसमें सरकारी नियमों के अनुसार छूट का प्रावधान है।

आवेदन शुल्क: श्रेणी के अनुसार भिन्न

आवेदन शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा और यह पद तथा श्रेणी पर निर्भर करता है:

  • प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, असिस्टेंट कमिश्नर: सामान्य/ओबीसी के लिए ₹2,800; एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी के लिए ₹500; महिलाओं के लिए छूट।
  • पीजीटी, टीजीटी, पीआरटी: सामान्य/ओबीसी के लिए ₹2,000; एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी के लिए ₹500।
  • गैर-शिक्षण पद (क्लर्क, स्टेनो, लैब अटेंडेंट): सामान्य/ओबीसी के लिए ₹1,700; एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी के लिए ₹500।
  • यदि उम्मीदवार एक ही पद के लिए केवीएस और एनवीएस दोनों में आवेदन करते हैं, तो शुल्क केवल एक बार जमा करना होगा।

चयन प्रक्रिया: पारदर्शी और बहु-चरणीय

चयन पूरी तरह पारदर्शी होगा। अधिकांश पदों के लिए टियर-1 (लिखित परीक्षा: 100 प्रश्न, 300 अंक, 2 घंटे; विषय: रीजनिंग, मैथ्स, जीके, इंग्लिश, कंप्यूटर, भाषा) और टियर-2 (70 प्रश्न: 60 ऑब्जेक्टिव + 10 सब्जेक्टिव, 100 अंक, 2.5 घंटे) परीक्षाओं के आधार पर मेरिट बनेगी। वरिष्ठ पदों के लिए इंटरव्यू (100 अंक) और स्किल टेस्ट भी होगा। अंतिम मेरिट टियर-2 (85%) और इंटरव्यू (15%) पर आधारित होगी। दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षा अनिवार्य है।

नोट: सीटीईटी अपीयरिंग उम्मीदवारों को अनुमति नहीं है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि केवल आधिकारिक साइट्स से जानकारी लें, क्योंकि फर्जी लिंक्स का खतरा रहता है। योग्य उम्मीदवार जल्द आवेदन करें, क्योंकि पद सीमित हैं! अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन डाउनलोड करें।

आवेदन कैसे करें? स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

  • आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन है। आसान प्रक्रिया के लिए ये कदम फॉलो करें:
  • आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: cbse.gov.in, kvsangathan.nic.in या navodaya.gov.in।
  • ‘रिक्रूटमेंट’ सेक्शन में ‘केवीएस/एनवीएस 2025’ लिंक पर क्लिक करें।
  • नए यूजर के लिए रजिस्ट्रेशन करें (मोबाइल नंबर/ईमेल से ओटीपी वेरिफिकेशन)।
  • लॉगिन के बाद फॉर्म भरें: व्यक्तिगत विवरण, शैक्षिक योग्यता, अनुभव, श्रेणी आदि।
  • फोटो, सिग्नेचर, प्रमाण-पत्र अपलोड करें (निर्धारित साइज में)।
  • शुल्क जमा करें और फॉर्म सबमिट करें।
  • प्रिंटआउट डाउनलोड करें।

मंदिर के पास गोवंश का कटा सिर मिलने पर हिंदू संगठनों का उग्र प्रदर्शन, तोड़फोड़-पथराव, पुलिस का लाठीचार्ज

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हल्द्वानी: उजाला नगर स्थित उजालेश्वर मंदिर के समीप रविवार रात करीब 8 बजे गाय के बछड़े का कटा सिर मिलने की सूचना सोशल मीडिया पर वायरल होते ही शहर सांप्रदायिक तनाव की चपेट में आ गया। हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और पीलीकोठी से उजाला नगर तक मुस्लिम समुदाय की रेस्तरां, बारबर शॉप, टेलर और कारपेंटर की दुकानों में तोड़फोड़ कर उन्हें जबरन बंद करा दिया।

उजाला नगर में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया, जो धीरे-धीरे बढ़ता चला गया। आसपास की दुकानों पर पत्थर फेंके गए और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी के साथ पुलिसकर्मियों से धक्कामुक्की हुई। स्थिति बेकाबू होती देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इधर, मुस्लिम पक्ष के लोग भी एकत्र होने लगे, जिससे माहौल और बिगड़ गया।

पुलिस ने बरेली रोड से ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया और मंडी बाईपास पर बैरिकेडिंग लगा दी। कथित गोवंश का सिर जांच के लिए भेज दिया गया है। प्रदर्शनकारियों को समझाने के प्रयास विफल रहे, जिसके बाद शहर के कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए। एहतियातन पूरे शहर में दुकानें बंद कराई गईं और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

गौरतलब है कि सीसीटीवी फुटेज में एक कुत्ता उस जानवर के सिर को कहीं से लाते हुए दिखाई दे रहा है, जिससे अफवाह की सच्चाई पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन और पुलिस तनाव कम करने व मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।

पूर्व भाजपा विधायक कुंवर प्रणव के बेटे और गनर ने पूर्व मुख्य सचिव के बेटे से की मारपीट

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देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां पूर्व भाजपा विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बेटे दिव्य प्रताप सिंह ने पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के बेटे आर. यशोवर्धन के साथ दबंगई दिखाते हुए मारपीट की और पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी।

इस दौरान उनके साथ मौजूद गनर कांस्टेबल राजेश सिंह ने राष्ट्रीय ध्वज पर लात मारकर मामले को और गंभीर बना दिया। राजपुर थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। घटना में इस्तेमाल बोलेरो वाहन को सीज कर दिया गया है, जबकि गनर को निलंबित कर दिया गया है।Screenshot 2025 11 17 11 15 58 05 7352322957d4404136654ef4adb64504

पीड़ित यशोवर्धन की तहरीर के अनुसार, वे दिलाराम चौक से साई मंदिर की ओर जा रहे थे। पैसेफिक माल के पास पीछे से आ रही एक कार ने उन्हें ओवरटेक करने की कोशिश की, लेकिन सड़क संकरी होने के कारण वे साइड नहीं दे सके। इसी बात पर कार सवार युवक भड़क उठे। मसूरी डायवर्जन पहुंचते ही एक सफेद लैंड क्रूजर और बोलेरो ने उनकी गाड़ी को टक्कर मारकर रोक लिया।

यशोवर्धन के मुताबिक, गनर ने उन्हें सड़क पर गिराकर लात-घूंसों से पीटा, जबकि दिव्य प्रताप सिंह ने उनके ड्राइवर को पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। मारपीट के दौरान गनर ने यशोवर्धन की शर्ट पर लगे तिरंगे पर लात मार दी, जिससे राष्ट्रीय अपमान का आरोप भी लगा।

पुलिस ने मारपीट, जान से मारने की धमकी, सड़क दुर्घटना, शस्त्र प्रदर्शन और अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। बोलेरो को मौके से सीज किया गया, जबकि लैंड क्रूजर की लोकेशन ट्रेस की जा रही है। एसएसपी ने मामले की खुद मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं और टीमें आरोपियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

सऊदी अरब में भीषण बस हादसा: उमराह यात्रियों से भरी बस डीजल टैंकर से टकराई, 40 से ज्यादा भारतीयों की मौत की आशंका

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सऊदी अरब में एक भयानक सड़क हादसे में 40 से अधिक भारतीयों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। यह दुर्घटना उमराह के लिए गए यात्रियों को लेकर जा रही एक बस के डीजल टैंकर से टकराने से हुई। सऊदी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसा मदीना के पास हुआ और मृतकों में ज्यादातर उमराह यात्री हैं, जिनमें हैदराबाद के कई निवासी शामिल हैं।

डीजल टैंकर से टकराई बस

गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उमराह करने वाले यात्रियों को लेकर बस मक्का से मदीना की ओर जा रही थी, तभी रास्ते में वह डीजल टैंकर से जा टकराई। हादसा स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 1:30 बजे मुहरास या मुफरिआत इलाके में हुआ, जो मदीना से लगभग 160 किलोमीटर दूर है। दुर्घटना के समय बस में सवार कई यात्री सो रहे थे। टक्कर होते ही बस आग की लपटों में घिर गई और लोगों को बच निकलने का मौका तक नहीं मिला। हादसा इतना विकराल था कि शवों की पहचान करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

हादसे में कम से कम 42 लोगों की मौत की सूचना है, जिनमें हैदराबाद के कई यात्री होने की संभावना है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।