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भाजपा टिकट न मिलने से आहत आरएसएस कार्यकर्ता ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप

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तिरुवनंतपुरम: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम जिले के त्रिक्कण्णपुरम क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। 32 वर्षीय आरएसएस कार्यकर्ता आनंद थम्पी ने शनिवार शाम आत्महत्या कर ली। पुलिस और परिवार के अनुसार, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए भाजपा टिकट न मिलने और कथित मानसिक उत्पीड़न ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, थम्पी को शनिवार शाम करीब 5:20 बजे उनके घर में फांसी के फंदे पर लटका पाया गया। इससे कुछ देर पहले उन्होंने अपने दोस्तों को व्हाट्सएप पर सुसाइड नोट भेजा था, जिसमें स्थानीय भाजपा और आरएसएस नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

टिकट न मिलने से बढ़ा तनाव

थम्पी त्रिक्कण्णपुरम वार्ड से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। भाजपा द्वारा टिकट न दिए जाने पर उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया। इसके बाद स्थानीय पदाधिकारियों के साथ उनका विवाद बढ़ गया। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि नेताओं ने उन पर लगातार दबाव बनाया, धमकियां दीं और स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश की। इससे वे मानसिक रूप से टूट गए।

सुसाइड नोट में मिट्टी माफिया के आरोप

नोट में थम्पी ने स्पष्ट नाम लिए हैं। इनमें त्रिक्कण्णपुरम वार्ड भाजपा उम्मीदवार विनोद कुमार, क्षेत्र सचिव उदयकुमार, निर्वाचन क्षेत्र समिति सदस्य कृष्ण कुमार और नगर कार्यवाहक राजेश शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता क्षेत्र में मिट्टी माफिया से जुड़े हैं और आर्थिक-पॉलिटिकल लाभ के लिए उन्हें चुनाव से दूर रखने की साजिश रच रहे थे। ये आरोप चुनाव से ठीक पहले भाजपा की स्थानीय इकाई के लिए बड़ा झटका साबित हो रहे हैं। घटना ने पार्टी के संगठनात्मक स्तर पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरएसएस से जुड़ाव को बताया सबसे बड़ी गलती

थम्पी ने नोट में आरएसएस से अपने लंबे जुड़ाव पर अफसोस जताते हुए लिखा, “आरएसएस कार्यकर्ता बनना मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। मैं नहीं चाहता कि कोई भाजपा या आरएसएस सदस्य मेरे शव को देखे। जिस पहचान के साथ मैंने जिया, उसी ने मुझे इस मुकाम पर पहुंचा दिया।”

“सोच जगाने वाला कंटेंट और दमदार स्क्रीनप्ले—‘हक’ ने आलोचकों व दर्शकों दोनों का दिल जीता”

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फिल्म ‘हक’ वर्ष 2025 की एक चर्चित और प्रभावशाली कोर्टरूम ड्रामा है, जिसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन अब तक लगभग ₹14-14.6 करोड़ (नेट) भारत में तथा विश्वभर में ₹22.7 करोड़ (ग्रॉस) तक पहुंच चुके हैं. यह फिल्म यामी गौतम और इमरान हाशमी की असाधारण अदायगी, गंभीर विषय वस्तु, और मजबूत पटकथा की वजह से सुर्खियों में रही है।

मुख्य कलाकार और उनका अभिनय:

यामी गौतम (शाजिया बानो): यामी ने एक पीड़ित लेकिन साहसी महिला की भूमिका बेहद गहराई, आत्मविश्वास और भावनाओं से निभाई है। कोर्ट के दृश्यों में उनका अभिनय दर्शकों को बांधता है.

इमरान हाशमी (अब्बास खान): इमरान के दोहरे (पति और वकील) किरदार में संयमित, भावनात्मक एवं प्रभावित करने वाला अभिनय देखने को मिला। उनका शांत मगर भीतर से तोड़ने वाला अंदाज फिल्म में खास है.

सपोर्टिंग कास्ट जैसे वर्तिका सिंह, शीबा चड्ढा व राहुल मित्तरा ने भी अपनी भूमिकाओं में गहराई और विश्वसनीयता दिखाई है.

कहानी, पटकथा, संवाद और मुख्य थीम:

कहानी सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक शाह बानो मामले से प्रेरित है, जिसमें मुस्लिम महिला के अधिकार, बच्चों के भरण-पोषण, और धर्म बनाम इंसाफ का द्वंद्व दिखाया गया है.पटकथा सधी हुई, कोर्टरूम बहसें वास्तविक व संवेदनशील हैं। संवाद गहरे, विचारशील और हर किरदार का इमोशनल कर्व स्पष्ट है. निर्देशक सुपर्ण वर्मा ने पूर्वाग्रह रहित, क्लीन, इम्पैक्टफुल फिल्म बनाई है, जिसकी थीम है “महिला आत्मसम्मान और समानता की लड़ाई”.

पिछले सालों की समान फिल्में और तुलना

‘निकाह ‘

निर्देशक: बी.आर. चोपड़ा, थीम: मुस्लिम महिला के अधिकार, अभिनय: सलमा आगा, दीपक पराशर का संवेदनशील अभिनय, स्क्रिप्ट: सशक्त, गीत-संगीत भावनात्मक, बॉक्स ऑफिस: सुपरहिट; करीब ₹2.5 करोड़ (1982 में)

Shah Bano (TV Movie, 1986), सच्ची घटना पर आधारित टेलीफिल्म, थीम: मुस्लिम महिला के कानूनी अधिकार

अभिनय व स्क्रिप्ट: सीमित लेकिन प्रभावशाली, बॉक्स ऑफिस: टीवी रिलीज.

‘निकाह ‘ (1982) की ही तरह ‘हक’ का फोकस मुस्लिम महिलाओं के अधिकार और निष्पक्षता पर है. बॉक्स ऑफिस के लिहाज से ‘हक’ कंटेंट-ड्रिवन और आलोचकों की पसंद बन रही है।

फिल्म की ताकत और कमज़ोरियां:

ताकत: यामी और इमरान की शानदार केमिस्ट्री, सधी हुई पटकथा, गहरे संवाद, दर्शकों को सोचने पर मजबूर करने वाली कहानी. मुस्लिम समाज पर आधारित.

कमज़ोरी: धीमी गति के कुछ हिस्से (फर्स्ट हाफ), सीमित मनोरंजन, गंभीरता के कारण व्यावसायिकता में थोड़ा कमज़ोर.

हीरो/हीरोइन की पिछले फिल्में, अगली रिलीज:

इमरान हाशमी की पिछली प्रमुख फिल्म ‘They Call Him OG’ (2025) थी, जिसकी बॉक्स ऑफिस कमाई करीब ₹28 करोड़ थी, जो ‘हिट’ रही.

यामी गौतम की पिछली बड़ी फिल्म ‘Oh My God 2’ (2023) थी, जिसने ₹150 करोड़ से ऊपर की कमाई की और ‘बॉक्स ऑफिस हिट’ रही।

आगामी फिल्में: इमरान हाशमी ‘Ground Zero’ और ‘Selfiee 2’ में, यामी गौतम ‘Dhoom Dhaam’ व ‘Chor Nikal Ke Bhaaga 2’ में नजर आएंगी (रिलीज़ वर्ष 2026 अनुमानित)।

अगर आप गंभीर विषय, सोचने पर मजबूर करने वाली कहानी और बेहतरीन अभिनय पसंद करते हैं, तो ‘हक’ जरूर देखें। लेकिन हल्की-फुल्की मनोरंजन चाहें तो कुछ हिस्सों में फिल्म आपको भारी लगेगी।

 

अगर तुलना करें तो बी आर चोपड़ा की निकाह बाजी मार लेगी। निकाह का संगीत आज भी पसंद किया जाता है और उसके सफल होने का एक प्रमुख कारण था। हक की व्यवसाय में म्यूजिक का योगदान नहीं है।

फिल्म रिव्यू – ‘दे दे प्यार दे 2’:हल्की-फुल्की फैमिली कॉमेडी, इतनी हुई कमाई

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  • रजत तलवार 

फिल्म ‘दे दे प्यार दे 2’ नवंबर 2025 में रिलीज़ हुई रोमांटिक कॉमेडी है, जिसने ओपनिंग डे पर भारत में ₹9.45 करोड़ (नेट) की कमाई की। यह आंकड़ा इसके पहले पार्ट (2019) के मुकाबले लगभग उतना ही है पर रुपये की वैल्यू गिरी है इसलिये इसे कम माना जाना चाहिए, जिसने डे 1 पर ₹9.11 करोड़ की कमाई की थी, और ‘दे दे प्यार दे’ ने भारत में कुल ₹104.13 करोड़ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया था।​

मुख्य कलाकार और अभिनय:
अजय देवगन : अजय ने अपने अलग अंदाज़ में सधा और परिपक्व अभिनय किया है। उनमें हास्य और डेडपैन कॉमिक टाइमिंग मजबूत दिखी।​ रकुल प्रीत सिंह: रकुल का किरदार उन्नत और मॉडर्न लिखा गया है, और पहले पार्ट की तुलना में उन्हें ज्यादा स्कोप मिला। हालांकि हल्के-फुल्के दृश्यों में वे जमीं, पर इमोशनल सीन और भारी डायलॉग्स में उनकी ओवर-एक्टिंग आलोचना का कारण बनी।​ आर. माधवन: माधवन नये महत्वपूर्ण रोल में प्रभाव छोड़ते हैं। उनकी केमिस्ट्री और फादर-डॉटर टकराव उभरकर आते हैं।​ मीज़ान जाफरी, जावेद जाफरी, गौतमी कपूर, इशिता दत्ता आदि ने भी सपोर्टिंग रोल में योगदान दिया है।

कहानी, स्क्रीनप्ले और संवाद:
फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले और संवाद मुख्यत: हल्के-फुल्के, मनोरंजक स्टाइल में पेश किए गए हैं। युवती के परिवार को नायक से मिलवाने और उम्र व सामाजिक धारणाओं के टकराव पर कहानी टिकी है। फर्स्ट हाफ तेज़ और फनी, जबकि सेकंड हाफ भावनाओं के ओवरडोज के चलते स्लो महसूस होती है। कई जगहों पर स्क्रिप्ट सिंपल और प्रेडिक्टिबल हो जाती है; डायलॉग्स फ्रेश हैं, लेकिन इमोशनल सीन में जान कम दिखती है।​

मुख्य थीम:
मॉडर्न रिलेशनशिप्स, उम्र का अंतर, इंडियन फेमिली वैल्यूज़ और जेनरेशन गैप ये मुख्य थीम्स हैं।​
फिल्म क्लीन पारिवारिक ह्यूमर, हल्के सामाजिक संदेश और रिलेशनशिप की जटिलता को मनोरंजन के साथ जोड़ती है ।

क्या De Pyaar De 2 पहले पार्ट से ज्यादा सफल होगी? ओपनिंग लगभग बराबर है, लेकिन कंटेंट और क्रिटिक रिव्यू के आधार पर पहले पार्ट की टोटल कमाई दोहराना चुनौतीपूर्ण दिखता है, क्योंकि तब्बू जैसी स्ट्रॉन्ग कास्ट की कमी और भावनाओं की गहराई कुछ कम है।

फिल्म की खासियतें (Strengths): ह्यूमर और फनी कलर्स, तेज़ फर्स्ट हाफ, अजय, माधवन और कुछ सपोर्टिंग एक्टर्स का अभिनय, कुछ क्लाइमेक्स ट्विस्ट और फैमिली वैल्यूज़ को मज़ेदार अंदाज़ में दिखाना.
कमजोरियां (Weaknesses): इमोशनल सीन में रकुल की ओवरएक्टिंग​, सेकंड हाफ में स्क्रिप्ट/पेसिंग और क्लिच, कुछ सीन मिक्सिंग/लोकेशन जंप बेमेल,
तब्बू का ना होना कई दर्शकों को अखरता है​।

‘दे दे प्यार दे 2’ एक नॉन-हॉलिडे और बिना टिकट ऑफर के बावजूद बढ़िया ओपनिंग करने में सफल रही है, लेकिन फिल्म की दीर्घकालिक सफलता इसके वर्ड ऑफ माउथ, दूसरा पार्ट की तुलना में स्ट्रॉन्ग इमोशनल ग्रैविटी, और एंटरटेनमेंट क्वोटिएंट पर निर्भर करेगी। पहले पार्ट की तुलना में इसका कंटेंट थोड़ी हल्की, कुछ-कुछ जगहों पर मिडियॉकर लगती है — इसलिए, बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह वही जादू दोहराना चुनौतीपूर्ण रहेगा।​ सोमवार से बॉक्स ऑफिस संकेत ज़्यादा स्पष्ट नज़र आयेंगे।
आपका
रजत तलवार

लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्या ने राजनीति से संन्यास का ऐलान, परिवार से दूरी बनाने की घोषणा

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पटना।राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्या ने राजनीति छोड़ने और अपने परिवार से दूरी बनाने की घोषणा कर राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

रोहिणी ने सोशल मीडिया पर लिखा, मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से भी नाता तोड़ रही हूं। यह वही बात है, जो संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे कहने को कहा था। मैं हार की पूरी ज़िम्मेदारी ले रही हूं।

तेजस्वी के करीबी संजय यादव को लेकर नाराज़गी

सूत्रों के अनुसार, रोहिणी आचार्या पिछले कुछ समय से तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले राज्यसभा सांसद संजय यादव के हस्तक्षेप व बढ़ते प्रभाव से नाराज़ थीं। 18 सितंबर को भी उन्होंने एक पोस्ट साझा कर संजय यादव पर परोक्ष रूप से निशाना साधा था। साझा पोस्ट में लिखा था कि फ्रंट सीट सदैव शीर्ष नेतृत्व के लिए होती है… और उनकी अनुपस्थिति में भी कोई उस सीट पर नहीं बैठे। रोहिणी ने इस टिप्पणी के माध्यम से इशारा किया था कि “कोई व्यक्ति नेतृत्व से ऊपर उठने की कोशिश कर रहा है।

“मेरे लिए आत्म-सम्मान सर्वोपरि है” — रोहिणी

अपने पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने की तस्वीर व वीडियो शेयर करते हुए रोहिणी ने लिखा कि “जो जान हथेली पर रखकर चलती हैं, बेखौफी और खुद्दारी उनके लहू में बहती है। मैंने बेटी और बहन के नाते अपना धर्म निभाया है। मुझे किसी पद की लालसा नहीं। मेरे लिए आत्म-सम्मान सबसे ऊपर है।

उनकी ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। समर्थकों ने लिखा, “बिहार एक बेटी की यह कुर्बानी नहीं भूलेगा।” एक अन्य ने याद दिलाया—आपने अपनी किडनी देकर अपने पिता को जीवनदान दिया, यह अमूल्य है।

राजद की सफाई: “पार्टी में कोई भ्रम नहीं”

रोहिणी के बयान के बाद राजद सांसद संजय यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रोहिणी दीदी ने जो भी कहा, उसका संदर्भ हम समझते हैं। पार्टी एकजुट है और किसी प्रकार का कोई मतभेद या भ्रम नहीं है। राजद की ओर से साफ किया गया है कि पार्टी के अंदर किसी तरह की खाई नहीं है, और सभी नेता एकजुट होकर काम कर रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

रोहिणी आचार्या का अचानक राजनीति छोड़ने और अपने परिवार से दूरी बनाने का फैसला कई सवाल खड़े करता है। क्या यह सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया है? क्या राजद के अंदरूनी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं?या फिर यह आने वाले समय की किसी बड़ी राजनीतिक उठापटक का संकेत है? राजनीतिक विश्लेषकों की नज़रें अब सीधे पटना की ओर टिक गई हैं।

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राष्ट्रीय CBRN प्रतियोगिता में SDRF उत्तराखण्ड ने मारी बाज़ी, देश में हासिल किया दूसरा स्थान

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  • गाज़ियाबाद में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में SDRF टीम का शानदार प्रदर्शन, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने किया सम्मानित।

देहरादून/गाज़ियाबाद: उत्तराखण्ड के जवानों ने एक बार फिर दिखा दिया कि आपदा ही नहीं, प्रतियोगिता में भी वे सबसे आगे हैं। राष्ट्रीय CBRN (Chemical, Biological, Radiological & Nuclear) प्रतियोगिता में SDRF उत्तराखण्ड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए द्वितीय स्थान प्राप्त किया। यह प्रतियोगिता गाज़ियाबाद स्थित 8वीं बटालियन NDRF मुख्यालय में आयोजित की गई थी।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने किया सम्मानित

टीम को सम्मानित करते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने SDRF उत्तराखण्ड को ट्रॉफी और ₹75,000 की पुरस्कार राशि भेंट की। टीम के शानदार प्रदर्शन ने पूरे राज्य का मान बढ़ाया है।

पहले भी जीता था क्षेत्रीय स्तर पर प्रथम स्थान

इससे पहले, लुधियाना में आयोजित क्षेत्रीय CBRN प्रतियोगिता में SDRF उत्तराखण्ड ने प्रथम स्थान हासिल किया था, जिसके बाद टीम का चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ। टीम ने अपने अनुशासन, कौशल और समर्पण से एक बार फिर राज्य का परचम लहराया।

डीजीपी दीपम सेठ ने दी बधाई

उत्तराखण्ड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने SDRF टीम को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर SDRF का प्रदर्शन पूरे राज्य पुलिस परिवार के लिए गर्व का विषय है। टीम ने अपने कौशल और क्षमता से राज्य का नाम रोशन किया है।”

टीमवर्क और प्रशिक्षण की जीत: IG अरुण मोहन जोशी

पुलिस महानिरीक्षक (SDRF) अरुण मोहन जोशी ने कहा कि यह उपलब्धि टीमवर्क, सशक्त प्रशिक्षण और समर्पित कार्यशैली का परिणाम है। SDRF की यह सफलता राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाती है।

मैदान में दम दिखाने वाली टीम

इस प्रतियोगिता में SDRF टीम का नेतृत्व उपसेनानायक शुभांक रतूड़ी ने किया।

टीम में शामिल थे

उपनिरीक्षक आशीष रावत, जितेंद्र सिंह, मुख्य आरक्षी उमेश भट्ट, नवीन कुंवर, दिनेश पुरी, शैलेन्द्र चमोली, रॉबिन कुमार, आरक्षी राजेंद्र सिंह, नीरज परगाई, संदीप रावत, विकास कुमार, हेमंत रावत, बृजेश चंद्र, विनीत रावत, प्रमोद सिंह, अजीत सिंह, प्रवीन सिंह, प्रमोद मठपाल।

सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक परिश्रम, निष्ठा और उच्च मनोबल का परिणाम है। SDRF भविष्य में भी इसी ऊर्जा और समर्पण से कार्य करती रहेगी।”

लगातार दूसरा राष्ट्रीय सम्मान

गौरतलब है कि इसी वर्ष मार्च में आयोजित राष्ट्रीय CSSR प्रतियोगिता में भी SDRF उत्तराखण्ड ने द्वितीय स्थान प्राप्त कर राज्य का नाम रोशन किया था।

भालू का खौफ: जौनसार में महिला पर हमला, बढ़ते जंगली जानवरों के आतंक से दहशत में ग्रामीण

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विकासनगर (देहरादून): उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र के खरोडा गांव में एक बार फिर भालू ने आतंक मचाया। 45 वर्षीय फकीरी देवी पशुओं के लिए चारा-पत्ती लेने छानीधार जंगल गई थीं, तभी झाड़ियों से निकले भालू ने उन पर हमला कर दिया। महिला ने दरांती से बचाव की कोशिश की, लेकिन अचेत होकर गिर पड़ीं। भालू भी मौके से फरार हो गया। ग्रामीणों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है।

फकीरी देवी विधवा हैं और बच्चों के पालन-पोषण के लिए खेती-बाड़ी और पशुपालन करती हैं। पति के निधन के बाद वे अकेले परिवार की जिम्मेदारी निभा रही हैं। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल मुआवजा और भालू के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।

भालू-गुलदार का बढ़ता कहर

प्रदेश में जंगली जानवरों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पहाड़ी इलाकों में महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।

ग्रामीणों की मांगें

  • तत्काल मुआवजा पीड़ित परिवार को.
  • जंगलों में गश्त बढ़ाई जाए.
  • भालू-गुलदार को सुरक्षित क्षेत्र में शिफ्ट किया जाए.
  • चारा-पत्ती के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था।

“महिलाएं चारा लाने जाती हैं, बच्चे स्कूल, युवक खेती — कोई सुरक्षित नहीं। वन विभाग सिर्फ कागजों में काम करता है।” — खरोडा गांव के सरपंच

वन विभाग का जवाब

वन विभाग के रेंज अधिकारी ने बताया कि टीम मौके पर पहुंची है और भालू की निगरानी की जा रही है। ट्रेंकुलाइज टीम को अलर्ट पर रखा गया है। मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

उत्तराखंड में भालू-गुलदार का बढ़ता कहर

प्रदेश में जंगली जानवरों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पहाड़ी इलाकों में महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। भालू और गुलदार के हमलों के मामले उत्तरकाशी से लेकर पिथौरागढ़ तक सामने आ रहे हैं।

ग्रामीणों की मांगें
  • तत्काल मुआवजा पीड़ित परिवार को
  • जंगलों में गश्त बढ़ाई जाए
  • भालू-गुलदार को सुरक्षित क्षेत्र में शिफ्ट किया जाए
  • चारा-पत्ती के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था

“महिलाएं चारा लाने जाती हैं, बच्चे स्कूल, युवक खेती — कोई सुरक्षित नहीं। वन विभाग सिर्फ कागजों में काम करता है।” — खरोडा गांव के सरपंच

वन विभाग का जवाब

वन विभाग के रेंज अधिकारी ने बताया कि टीम मौके पर पहुंची है और भालू की निगरानी की जा रही है। ट्रेंकुलाइज टीम को अलर्ट पर रखा गया है। मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बिहार चुनावी जीत के बाद BJP का बड़ा फैसला, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को पार्टी से निकाला

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पटना/नई दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत के जश्न के बीच बीजेपी ने पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह की प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी है। पार्टी ने इसे “एंटी-पार्टी एक्टिविटी” करार दिया है, लेकिन सिंह ने इसे “भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज दबाने की कोशिश” बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। सिंह ने नीतीश कुमार सरकार पर अडाणी समूह के साथ हुए बिजली खरीद समझौते में 62,000 करोड़ रुपये के घोटाले का गंभीर आरोप लगाया है, जिसे उन्होंने “जनता के साथ धोखा” करार दिया। यह विवाद चुनाव परिणामों के ठीक एक दिन बाद भड़का है, जो बिहार की राजनीति में नया तनाव पैदा कर रहा है।

घोटाले का दावा

सिंह ने सोशल मीडिया पर दस्तावेज साझा करते हुए आरोप लगाया कि भागलपुर के पिरपैंती में 2,400 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट का प्रोजेक्ट, जो मूल रूप से एनटीपीसी द्वारा लगाया जाना था (केंद्रीय बजट में घोषित), अचानक निजी कंपनी अडाणी पावर को सौंप दिया गया। उनका दावा है कि यह बदलाव “किसी के हित में” किया गया, जिससे राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है।

  • बिजली खरीद दर: सरकार अडाणी से 6.75 रुपये प्रति यूनिट (फिक्स्ड चार्ज 4.16 रुपये + फ्यूल चार्ज) पर बिजली खरीदेगी, जबकि बाजार दर इससे काफी कम (लगभग 4.34 रुपये प्रति यूनिट) है।
  • एनटीपीसी मॉडल में: फिक्स्ड चार्ज सिर्फ 2.32 रुपये प्रति यूनिट होता, यानी 1.84 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त बोझ।
  • कुल नुकसान: 25 साल के समझौते में सालाना 2,500 करोड़ का घाटा, कुल 62,000 करोड़ रुपये। भूमि 1,050 एकड़ 1 रुपये प्रति वर्ष पर लीज पर दी गई, जबकि बाजार मूल्य लाखों में है।

सिंह ने सवाल उठाया: “जब एनटीपीसी का इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे रेल लाइन) पहले से तैयार था, तो प्रोजेक्ट क्यों निजी हाथों में सौंपा गया? यह किसे फायदा पहुंचाने के लिए?” उन्होंने लिखा, “चोरी और सीना जोरी साथ नहीं चल सकती। भ्रष्टाचार पर चुप रहना हमारे संस्कार में नहीं है।” सिंह ने बिहार ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर साठगांठ का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की।

प्रोजेक्ट का इतिहास

प्रोजेक्ट 2012 से अटका हुआ था, जब बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी ने भूमि अधिग्रहित की। कई प्रयासों (सार्वजनिक क्षेत्र सहित) के बावजूद यह शुरू नहीं हो सका। 2024 में बिहार सरकार ने ओपन बिडिंग की, जिसमें अडाणी सबसे कम बोली (6.075 रुपये/यूनिट) पर चुना गया। पहला 800 एमडब्ल्यू प्लांट 2028 दिवाली तक चालू होगा। काहलगांव एनटीपीसी प्लांट के पास होने से इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा मिलेगा।

अडाणी और BJP का खंडन

अडाणी पावर ने बयान जारी कर आरोपों को “पूरी तरह आधारहीन” बताया। कंपनी ने कहा कि प्रोजेक्ट 12 साल से अटका था, और बिहार इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2025 के तहत नॉमिनल रेंट पर भूमि लीज दी गई। बोली सबसे कम थी, और कोई “बिक्री” नहीं हुई। बिहार उद्योग मंत्री नितीश मिश्रा ने टिप्पणी से इनकार किया।

बीजेपी ने सिंह को निलंबित करते हुए कहा कि उनके बयान “पार्टी छवि को नुकसान” पहुंचा रहे हैं। राज्य अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा, “एंटी-पार्टी गतिविधियां अस्वीकार्य। सिंह को स्पष्टीकरण मांगा गया है।” यह कार्रवाई सिंह के हालिया बयानों के बाद आई, जहां उन्होंने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और जायसवाल पर भी सवाल उठाए थे।

विपक्ष का साथ: कांग्रेस ने उठाया मुद्दा, “डबल करप्शन गवर्नमेंट”

कांग्रेस नेता पवन खेरा ने आरोपों को “सिद्ध” बताते हुए कहा, “सिंह जैसे BJP नेता भी भ्रष्टाचार उजागर कर रहे हैं। यह डबल इंजन नहीं, डबल करप्शन सरकार है।” उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट के फैसलों पर सवाल उठाया, जो कथित रूप से अडाणी को फायदा पहुंचाते हैं। आरजेडी ने भी CBI जांच की मांग की। पूर्व में ABP न्यूज ने सिंह के इंटरव्यू पर ट्वीट डिलीट किया, जिस पर विवाद हुआ।

सिंह (72 वर्षीय पूर्व आईएएस, 2014-2024 तक ऊर्जा मंत्री) ने कहा, “मुझे निष्कासित करें, लेकिन सच्चाई दब नहीं सकती।” 2024 लोकसभा में आरा से हारने के बाद वे पार्टी से असंतुष्ट थे।

राजनीतिक प्रभाव: चुनावी जीत पर साया

एनडीए की 190+ सीटों वाली जीत के बाद यह विवाद नीतीश सरकार के लिए चुनौती। प्रह्लाद मोदी की जन सुराज ने भी पुराने आरोपों को दोहराया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 2029 लोकसभा का मुद्दा बन सकता है। सरकार ने स्पष्टीकरण देने से इनकार किया, लेकिन जांच की संभावना से इनकार नहीं।

उत्तराखंड में 2025 से सड़क सुरक्षा शिक्षा अनिवार्य: स्कूली बच्चों को 6 ऑडियो-वीडियो गीतों के ज़रिए मिलेगा प्रशिक्षण

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने 2025 से स्कूली पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा को कहानी नहीं, बल्कि अनिवार्य पाठ बना दिया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने सड़क सुरक्षा नियमों पर आधारित 06 ऑडियो/वीडियो गीतों को आधिकारिक तौर पर पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इन गीतों को एससीईआरटी द्वारा तैयार किया गया है और राज्यभर में छात्र-छात्राओं तथा समुदाय में जागरूकता फैलाने के लिए जारी किया गया है।

शिक्षामंत्री ने कहा, “हम पहाड़ी राज्य हैं—यहां सड़कें ही जीवन की डोर हैं। जो इन नियमों को समझेगा, वही सुरक्षित घर पहुंचेगा। जब भी सड़क पर चलें, नियमों का पालन करना धर्म जैसा मानें।”

क्यों ज़रूरी है सड़क सुरक्षा पाठ?

उत्तराखंड के 9 ज़िले पूरी तरह पर्वतीय हैं। मुश्किल भूगोल और घुमावदार रास्तों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। सरकार का कहना है कि सड़क सुरक्षा नियमों को पढ़ाना अब सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि जीवन-कौशल है।

ये हैं गीतों से मिलने वाले मुख्य संदेश—

  • जहां ज़ेब्रा क्रॉसिंग हो, वहीं से सड़क पार करें।
  • अगर सड़क पर सुविधा न हो, तो दोनों ओर देखकर ही सड़क पार करें।
  • चलते समय मोबाइल का इस्तेमाल न करें।
  • वाहन में सीट बेल्ट, हेलमेट और इंडिकेटर का उपयोग अनिवार्य है।
  • नशे की हालत में वाहन न चलाएं।
  • वाहन चलाते समय भीड़, धुंध या खतरे की स्थिति में गति नियंत्रित रखें।
  • दुर्घटना दिखे तो घायलों की मदद करें और तुरंत 112 पर सूचना दें।

स्कूली पाठ्यक्रम में कैसे शामिल हुआ विषय?

SCERT की संयुक्त बैठक में सड़क सुरक्षा विषय को कक्षा 9 के ‘आपदा प्रबंधन’ खंड के भीतर अध्याय 10 के रूप में जोड़ा गया है। तिहरी के हिन्डोला ब्लॉक को “दुर्घटना संवेदनशील क्षेत्र” की श्रेणी में घोषित कर इसे आदर्श मॉडल केन्द्र बनाया गया है।

शिक्षा व परिवहन विभाग का संयुक्त अभियान

  • 2020 से अब तक प्रदेशभर के 5000 शिक्षकों को सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
  • परिवहन विभाग के साथ मिलकर 50,000 पुस्तिकाएँ भी स्कूलों तक पहुंचाई गई हैं।

श्रीनगर के नौगाम थाने में भीषण विस्फोट, 9 की मौत; 27 घायल, एक दर्जन से अधिक वाहन स्वाहा

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श्रीनगर की रात फिर दहल उठी। शुक्रवार देर रात करीब 11:20 बजे नौगाम पुलिस थाने में अचानक ऐसा धमाका हुआ कि जैसे पूरी वादी ने एक ही धड़कन में डर को महसूस किया। विस्फोट इतना तीव्र था कि इसकी आवाज़ राजबाग, पुराना सचिवालय, छानपोरा, सनतनगर, रावलपोरा और पंथा चौक जैसे सात किलोमीटर दूर तक के इलाकों में सुनाई दी।

धमाके के तुरंत बाद लगी आग ने थाने परिसर में खड़ी एक दर्जन से अधिक गाड़ियों को चंद ही मिनटों में खाक में बदल दिया। धुएँ और आग की लपटों के बीच मची अफरा-तफरी में कम से कम नौ लोगों की जान चली गई, जबकि 27 लोग—जिनमें बड़ी संख्या पुलिसकर्मियों की है—घायल हो गए। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

सैंपलिंग के दौरान धमाके की आशंका

प्रारंभिक तौर पर सामने आया है कि हाल ही में पकड़े गए सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मामले में जब्त किए गए भारी मात्रा के विस्फोटकों की सैंपलिंग के दौरान हादसा हुआ हो सकता है।

लेकिन—और यही वह जगह है जहाँ सवाल उठते हैं—अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया।

थाने में बरामद 2,900 किलो विस्फोटक की पूरी खेप मौजूद थी या उसका कुछ हिस्सा—यह भी साफ नहीं है। सुरक्षा एजेंसियाँ अब इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि सुरक्षा मानकों के बीच ऐसी चूक कैसे हो गई।

इलाका सील, रातभर चला बचाव अभियान

धमाके के तुरंत बाद पुलिस ने नौगाम थाना क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया। सभी मुख्य रास्तों पर नाकाबंदी कर दी गई और किसी को भी घटनास्थल की ओर बढ़ने नहीं दिया गया। रातभर दमकल और बचाव दल आग पर काबू पाने और मलबा हटाने में जुटे रहे।

अब सवाल यह भी उठ रहा है कि इतनी संवेदनशील बरामदगी को थाने परिसर में ही रखने के पीछे क्या मजबूरी थी? और अगर सैंपलिंग हो भी रही थी तो सुरक्षा प्रोटोकॉल का स्तर क्या था?

उत्तराखंड पुलिस की बड़ी कामयाबी: दुबई से लाया गैंगस्टर जगदीश पुनेठा, 15 करोड़ की ठगी का मास्टरमाइंड

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उत्तराखंड पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल करते हुए दुबई से फरार चल रहे कुख्यात ठग और गैंगस्टर जगदीश पुनेठा को 13 नवंबर को सफलतापूर्वक प्रत्यर्पित कर भारत लाया। सीबीसीआईडी की विशेष टीम ने इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर अबू धाबी पुलिस के सहयोग से उसे दुबई एयरपोर्ट पर दबोचा। पिथौरागढ़ निवासी यह अपराधी 15 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी, फर्जी निवेश योजनाएं चलाने और संगठित अपराध में लिप्त था।

जगदीश पुनेठा और उसके साथियों ने निर्मल बंग कमोडिटी, रॉयल पैन्थर, मात्रछाया आभूषण जैसी नकली कंपनियों के नाम पर लोगों को उच्च रिटर्न का झांसा देकर 15.17 करोड़ की धोखाधड़ी की। इस अवैध कमाई से उसने ₹2.22 करोड़ की चल-अचल संपत्ति अर्जित की, जिसे पुलिस ने पहले ही कुर्क कर लिया है। उसके खिलाफ पिथौरागढ़ और जाजरदेवल थानों में चार गंभीर मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, धमकी और गैंगस्टर एक्ट की धाराएं शामिल हैं।

2022 में उत्तराखंड पुलिस ने जगदीश पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया था। 2024 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद 10 नवंबर 2025 को सीबीसीआईडी की तीन सदस्यीय टीम—मनोज कुमार ठाकुर (अपर पुलिस अधीक्षक), ललित मोहन जोशी (प्रभारी निरीक्षक) और सतीश कुमार शर्मा (निरीक्षक) दुबई रवाना हुई। 13 नवंबर को सुरक्षा मिशन के तहत उसे भारत लाया गया। वह 14 नवंबर को पिथौरागढ़ कोर्ट में पेश किया जाएगा।

विवेचना अधिकारी निरीक्षक प्रताप सिंह नेगी ने ठगी की पूरी श्रृंखला उजागर की। जगदीश का भाई ललित पुनेठा और सहयोगी पंकज शर्मा पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि पिता चंद्र प्रकाश पुनेठा अभी फरार है। पुलिस ने अन्य पीड़ितों की पहचान, शेष संपत्ति कुर्की और गैंग के बाकी सदस्यों पर कार्रवाई तेज कर दी है।

डीजीपी अशोक कुमार ने इसे उत्तराखंड पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई बताया और कहा, “अपराधी चाहे दुनिया के किसी कोने में छिप जाए, कानून उसे जरूर पकड़ेगा।” पुलिस ने जनता से फर्जी निवेश योजनाओं से सावधान रहने और शिकायत दर्ज करने की अपील की है।