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गुजरात: 9वीं की परीक्षा में पूछा गया सवाल, ‘गांधी जी ने आत्महत्या कैसे की..’

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गुजरात में सुफलाम शाला विकास संकुल के अंतर्गत चलने वाले स्कूलों की आंतरिक परीक्षा में कक्षा 9 के विद्यार्थियों से पूछे गए प्रश्न ने कक्षा के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी हैरानी और अचंभे में डाल दिया है। बता दें कि कक्षा नौ के विद्यार्थियों से प्रश्न पूछा गया, कि ‘गांधी जी ने आत्महत्या कैसे की’ इतना ही नहीं बल्कि कक्षा 12 के विद्यार्थियों को भी अचरज में डालने वाला प्रश्न पूछा गया है।

‘अपने इलाक़े में शराब की बिक्री बढ़ने और शराब तस्करों द्वारा पैदा की जाने वाली परेशानियों के बारे में शिक़ायत करते हुए ज़िला पुलिस प्रमुख को एक पत्र लिखें।’ ग़ौरतलब है कि गुजरात में शराब पूरी तरह से प्रतिबंधित है।सुफलाम शाला विकास संकुल कुछ स्व-वित्तपोषित विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों का संगठन है। जिन्हें गांधीनगर में सरकारी अनुदान मिलता है। गांधीनगर के ज़िला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि स्व-वित्तपोषित स्कूलों के समूह ने और अनुदान प्राप्त करने वाले स्कूलों ने यह दोनों प्रश्न अपनी आंतरिक परीक्षा में शामिल किए थे।

यह प्रश्न बहुत ही आपत्तिजनक थे। और गांधीनगर के ज़िला शिक्षा अधिकारी ने बताया है कि उन्होंने इसकी जांच शुरू कर दी है। और रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही भी की जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि सुफलाम शाला विकास संकुल के अंतर्गत संचालित होने वाले इन स्कूलों के प्रबंधन ने ये प्रश्न पत्र तैयार किए थे। इनका राज्य शिक्षा विभाग से कोई संबंध नहीं है।

गूगल ने किया बड़ा एलान, 31 जनवरी से जो भी नए फ़ोन होंगे..

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न्यूज़ ट्रैक पर छपी एक टेक रिपोर्ट की मानें तो 31 जनवरी 2020 के बाद जितने भी नए फ़ोन लॉन्च किए जाएंगे, वह सभी केवल एंड्राइड 10 OS पर ही रन करेंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि जो भी फ़ोन निर्माण में लगी कंपनियां हैं, उन्हें गूगल मोबाइल सर्विस की सुविधा प्राप्त करने के लिए पहले गूगल का अप्रूवल लेना होगा, उसके बाद ही वह इसका उपयोग कर सकेंगी।

साथ ही साथ गूगल ने यह भी स्पष्ट रूप से बता दिया है, कि वह 2020 के बाद एंड्राइड 9 Pie आधारित स्मार्टफोन को अप्रूवल देना बंद कर देगी। बता दें कि एंड्राइड 10 की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि कंपनी ने इस बार नए OS को किसी डिज़र्ट के नाम पर पेश नहीं किया है। बल्कि इसे एंड्रॉयड Q का नाम दिया गया है। ग़ौरतलब है कि एंड्राइड 10 में यूज़र्स को कई नए फीचर की सुविधा भी मिलने वाली है। जिसमें Apple ios 13 में उपलब्ध होने वाले फीचर्स भी शामिल है।

उल्लेखनीय है कि एंड्रॉइड 10 को अब तक का सबसे सिक्योर ऑपरेटिंग सिस्टम बताया जा रहा है। बता दें कि इसमें यूज़र्स की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है, और सिस्टम वाइड डार्क मोड, शेयरिंग फीचर्स, डुएल स्क्रीन, कम्पेटिबिलिटी, मल्टी-टास्किंग मोड, सिंगल बटन यूज़, डिजिटल बेलबिइंग जैसे फीचर्स को भी जोड़ा गया है। बता दें कि एंड्राइड को आधिकारिक रूप से रोल आउट किया जा चुका है। जो कि पिक्सेल और एसेंशियल के लिए उपलब्ध कराया गया था। और अब जल्दी एंट्री लेवल स्मार्ट फ़ोन के लिए एंड्राइड 10 Go Edition को मार्केट में लाया जाएगा।

इस तरह हुआ PMC बैंक घोटाला, सोच-समझ कर की गई…

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पीएमसी बैंक का घोटाला एक सोची-समझी साज़िश का नतीजा है। जिसका अब जाकर ख़ुलासा हुआ है। प्राप्त ख़बरों के अनुसार इस बड़े घोटाले के खेल के सबसे बड़े खिलाड़ी मुख्य आरोपियों में से एक पीएमसी बैंक का पूर्व एमडी जॉय थामस है। ख़बर है कि पूर्व एमडी जॉय थामस ने यह खेल 2012 से ही रचना शुरू कर दिया था। ख़बर है कि पीएमसी बैंक के पूर्व एमडी जॉय थामस ने 2012 से कोंडवा और पुणे शहर में 9 फ्लैट और एक दुकान खरीदी थी।

उल्लेखनीय है कि इन संपत्तियों को जॉय थामस ने अपनी दूसरी पत्नी के साथ मिलकर ख़रीदा था। सूत्रों के प्राप्त ख़बर के अनुसार पीएमसी बैंक के पूर्व एमडी जॉय थॉमस ने दूसरी शादी अपनी असिस्टेंट से की थी। और उसके बाद थामस ने इस्लाम धर्म अपना लिया था। और अब अपना नाम बदलकर उन्होंने जुनैद ख़ान कर लिया है। ग़ौरतलब है कि पुणे में ज़्यादातर सम्पत्तियां थामस के बदले हुए नाम जुनैद ख़ान और उसकी पत्नी के भी बदले हुए नाम के साथ ख़रीदी गई हैं,ऐसा पता चला है.

विश्व बैंक ने घटाया भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान..

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विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6% कर दिया है। बता दे कि वित्त वर्ष 2018-19 में वृद्धि दर 6.9% रही थी। हालांकि, दक्षिण एशिया आर्थिक फोकस के ताज़ा संस्करण में विश्व बैंक ने कहा है, कि मुद्रास्फीति अनुकूल है। और यदि मौद्रिक रुख नरम बना रहा, तो वृद्धि दर धीरे-धीरे सुधार कर 2021 में 6.9% और 2022 में 7.2 ℅ हो जाने का अनुमान लगाया गया है। लेकिन, इस सब के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अभी व्यापक संभावनाओं के साथ तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी हुई है।

विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री (दक्षिण एशिया) हंस टिम्मर ने बताया कि, ‘हालिया सुस्ती के बावजूद भारत तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी हुई है। उसकी आर्थिक वृद्धि के आंकड़े दुनिया के अधिकांश देशों से अधिक हैं। भारत अभी भी व्यापक क्षमता वाली तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है’ भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल का जवाब देते हुए टिम्मर ने कहा, ‘हालिया वैश्विक नरमी से भारत में निवेश और खपत दोनों ही प्रभावित हुए हैं। इसकी वजह से उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।’

भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2016 में 8.2℅ थी, और अगले 2 सालों में यह 2.2 ℅ गिर गई है। टिम्मर ने कहा, हालांकि, यह सबसे बड़ी गिरावट नहीं है, लेकिन 2012 से तुलना करने योग्य है, जहां नरमी का असर था। हालांकि, 2009 में हमने जो गिरावट पाई है, उससे कुछ कम है। लेकिन,यह गंभीर सुस्ती है, यह बात एकदम सही है। टिम्मर कहा कि विश्व बैंक ने अनुमान में कहा है कि, “भारत की 80% आर्थिक नरमी का कारण अंतरराष्ट्रीय कारक हो सकते हैं। उन्होंने कहा, हमारे विचार में यह काफी कुछ उसी के अनुरूप है, जो कि दुनिया में हो रहा है। इस समय दुनिया में सब जगह निवेश की रफ्तार काफी तेज़ी से धीमी पड़ती जा रही है। जहां तक ऋण की बात है, यह धारणा से चल रहा है, जो कि पूरी दुनिया में फैली हुई है, और यह धारणा वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता की है।”

कांग्रेस को लग सकता है एक और झटका, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की…

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अवसर था ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 100 वीं जयंती का और इस विशेष दिन पर ग्वालियर में विजयाराजे सिंधिया की छत्री स्थल (समाधि स्थल) पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया था। बता दें कि इस श्रद्धांजलि समारोह में कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी नेता यशोधरा राजे सिंधिया और वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ उनके परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।

अरुण गवली के गढ़ में एजाज़ ख़ान ने लूटा समा, फूलों से हुआ..

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फ़िल्म अभिनेता एजाज़ खान यूँ तो हमेशा सुर्ख़ियों में बने रहते हैं लेकिन इस बार महाराष्ट्र में हो रहे विधान सभा चुनाव में हर रोज़ एजाज़ किसी ना किसी वजह से चर्चा में बने हुए हैं. लेकिन इस बार उनके चर्चा में रहने की वजह उनके विवादित बयान नही बल्कि उनकी राजनीतिक सरगर्मियों से है. जी हाँ एजाज़ खान ने महाराष्ट्र में होने वाले इस विधान सभा चुनाव में अभिनेता से नेता बनने की ठान ली है.

एजाज़ खान ने अपने राजनीतिक सफ़र की शुरूआत मुम्ब्रा कलवा से करनी चाही थी और AIMIM चीफ़ असदुद्दीन ओवैसी से टिकट माँगा था लेकिन ऐन मौक़े पर असदुद्दीन ओवैसी ने मुम्ब्रा विधानसभा से एजाज़ को टिकट ना देकर किसी और को दे दिया जिससे एजाज़ खान ने बग़ावत का बिगुल बजाते हुए भायखला विधान सभा से निर्दल प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक दी.

बता दें कि जिस दिन से एजाज़ ने भयखला से चुनाव लड़ने का एलान किया उसी दिन से राजनीतिक पारा पूरी तरह से गरम तो हुआ ही साथ ही एजाज़ के मैदान में आते ही सारे समीकरण ध्वस्त हो गए और लड़ाई अब त्रिकोड़ी होती दिख रही है. आज जब एजाज़ खान अपने लिए वोट माँगने भयखला की सड़कों पर उतरे तो हज़ारों की संख्या में लोगों की मौजूदगी ने एक नई चर्चा को जन्म दे दिया.

मज़ेदार बात ते रही की एजाज़ खान खुली गाड़ी से अपना प्रचार प्रसार करते और जनता से मिलते हुए माफिया डॉन अरुण गवली के गढ़ कहे जाने वाले ड़गड़ी चाल में पहुँचे तो वहाँ जो नज़ारा दिखा वो बेहद चौंकाने वाला था. दरअसल हुआ ये की जब एजाज़ खान ड़गड़ी चाल पहुँचे तो वहाँ की ऊँची ऊँची बिल्डिंगों की छतों से मर्द औरत और बच्चे एजाज़ खान पर फूलों की बारिश करने लगे ये सिलसिला लगातार चलता रहा जिससे एजाज़ खान भी दोगुना जोश में दिखाई दिए. चर्चा है कि जिस तरह एजाज़ खान को सुनने,उनसे हाथ मिलाने और सेल्फ़ी लेने की होड़ जनता में दिख रही है उससे विरोधी पार्टियों के उम्मीदवारों की भी नज़र एजाज़ खान पर टिकी हुई है

GST को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कही ऐसी बात सुनकर रह जाएँगे हैरान

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Nirmla Sitaraman

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान पेशेवरों द्वारा जीएसटी पर चिंता ज़ाहिर करने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उद्योग जगत जीएसटी के क्रियान्वयन के तरीके पर सरकार को कोस रहा है। बता दें कि वित्त मंत्री ने सवाल उठाने वाले एक व्यक्ति पर आपत्ति जताते हुए उससे कहा कि संसद और सभी राज्य विधानसभा द्वारा पारित किए गए देश के क़ानून की आलोचना नहीं करें।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बहुत लंबे समय बाद संसद में कई दल और राज्य विधानसभा ने मिलकर काम किया है। और इस क़ानून को देश में लागू करवाने में सहायक बने हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि मुझे पता है कि आप अपने अनुभव के आधार पर ये बात कर रहे हैं। लेकिन अचानक हम ये नहीं कह सकते हैं कि ये कितना ख़राब ढांचा है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने उद्योग जगत, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सचिवों और वित्तीय क्षेत्र के अन्य शेयर धारकों के साथ चर्चा की। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी को लागू हुए अभी सिर्फ़ दो ही साल हुए हैं। उन्होंने कहा कि पहले दिन से ही यह ढांचा संतोषजनक रहना चाहिए था। वित्त मंत्री ने कहा कि सभी सुधारक जीएसटी के बेहतर अनुपालन के लिए कुछ समाधान दें। हमें सिर्फ़ इसकी आलोचना ही नहीं करते रहना चाहिए। भले ही इसमें कुछ कमियां हो सकती हैं। इससे आपको कुछ परेशानी हुई हो सकती है। लेकिन मुझे माफ करें ये क़ानून है।

अफ़्रीका की इन दो मुस्लिम महिलाओं को मिला शांति के नोबल का नामांकन, किया है ऐसा काम…

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Iiwad Elman, Hajer Sharief

इस साल अफ्रीका की दो युवा मुस्लिम महिलाओं को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।बता दें कि सोमालिया की 29 वर्षीय इलवाड एल्मन अपने मानवीय और शांति कार्यों के लिए पहचान बना चुकी हैं। मूल रूप से मोगादिशु सोमालिया की एल्मन के पिता भी शांति कार्यों से जुड़े थे। और 1990 के युद्ध और 2000 दशक की शुरूआत के बाद युवा पुनर्वास और शांति कार्यों में ज़ोर-शोर से जुटे रहने की वजह से एल्मन के पिता की हत्या कर दी गई थी।

एल्मन को सोमालिया छोड़कर कनाडा में रहना पड़ा। लेकिन साल 2010 में 19 साल की उम्र में एल्मन सोमालिया वापस लौटीं और मानवीय और महिला दोनों ही क्षेत्रों में अपने पिता के कामों को आगे बढ़ाने लगी।
महिलाओं को सशक्त बनाने शांति स्थापित करने और मानवता की रक्षा के लिए अपने अथक प्रयासों के ज़रिए वह शांतिदूत की तरह सोमालिया में कार्य करती रहीं। सोमालिया का पहला बलात्कार संकट केंद्र एल्मन के महिलाओं की सुरक्षा और उनके शोषण से बचाव के लिए किए गए कार्यों को दर्शाता है।

इसी तरह शांति के नोबेल के लिए नामांकित हेज़र शैरोज़ जिन्होंने 2011 में लीबिया के गृह युद्ध के भयानक मंज़र को देखा था, वह सिर्फ़ 19 साल की उम्र से ही शांति की कोशिशों और मानवीय कार्यों से सक्रिय रुप से जुड़ गईं। उन्होंने एक संगठन की स्थापना की और देश की महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने के कार्यों में सक्रियता से जुट गयीं। 2013 में शैरोज़ ने 1325 नेटवर्क परियोजना कि सह-शुरुआत की, जो लीबिया के 30 शहरों के मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं का एक विशाल संग्रह है। शैरोज़ लीबिया और पूरे उत्तरी अफ्रीका के लिए शांति महिला और युवा सशक्तिकरण के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।

दिल्ली की बड़ी नेत्री कांग्रेस में हुईं शामिल, चाँदनी चौक से..

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नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी को दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा फ़ायदा होते हुए नज़र आ रहा है. कांग्रेस यहाँ विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पराजित हुई थी लेकिन पिछले कुछ समय में पार्टी का संगठन पहले से बेहतर हुआ है. यही वजह है कि पार्टी उम्मीद कर रही है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहेगा.

इस बीच पार्टी के लिए एक बड़ी ख़बर आ रही है. आम आदमी पार्टी के टिकट पर चाँदनी चौक से विधायक अलका लंबा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है. उनके बारे में लम्बे समय से ये ख़बर थी कि वो कांग्रेस में शामिल हो सकती हैं.

जनता के धन से सरकारी प्रचार- किशन शर्मा

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प्रतीकात्मक तस्वीर

चुनाव की घोषणा से बहुत पहले ही लगभग सभी समाचार पत्रों में पूरे पृष्ठ के या कम से कम आधे पृष्ठ के विज्ञापन प्रकाशित होने शुरू हो गये थे, जिनमें सरकार की उपलब्धियों का गुणगान किया जा रहा है । यह क्रम चलता रहेगा चुनावों की समाप्ति तक । मैं आज तक यह नहीं समझ पाया हूं कि इस प्रकार से सरकार की उपलब्धियों का गुणगान करने की आवश्यकता क्यों होती है । ढोल बजा-बजा कर लोगों को बताना कि सरकार ने क्या क्या पराक्रम किये, इसकी उपयोगिता क्या है? मैं ऐसा मानता हूं कि जनता के हित में अच्छे काम करते रहने के लिये ही तो सरकार बनाई जाती है । जो भी काम हो गये होंगे, उनकी जानकारी तो जनता को तभी मिल जाती है । फ़िर उसके लिये करोडों रुपये खर्च करके विज्ञापन छपवाने की क्या आवश्यकता है?

अगर बताना ही है तो यह बताना चाहिये कि कौन कौन से जनहित के काम सरकार नहीं कर सकी और क्यों नहीं कर सकी। जनता को वास्तव में ऐसी जानकारी देने की आवश्यकता होनी चाहिये । जो धन खर्च किया जाता रहता है वह तो जनता का ही है । उसका उपयोग अपनी तारीफ़ में विज्ञापन छपवाकर करना, मेरी दृष्टि में जनता के धन का दुरुपयोग ही है । यही करोडों रुपये, जनता की भलाई के कुछ कामों में खर्च करने से सरकार की अधिक प्रशंसा करते सभी लोग। विपक्ष सरकारी खज़ाने से अपने कार्यों का विवरण इस प्रकार नहीं छपवा सकता। अपना- अपना ढोल बजाने में कोई गलत बात नहीं है, परंतु जनता के धन का उपयोग इस प्रकार किया जाना मेरे विचार से बहुत गलत है । हां, समाचार पत्रों और टेलीविज़न चैनलों के मालिकों की जेबें भरने और उन्हें खुश करने का यह तरीका अवश्य सरकार के नेतागण अपनाते रहते हैं । नेताओं का क्या जाता है? पैसा तो जनता का है। फ़िर भी वाहवाही उन्हीं की होती है।

यह भी सच है कि सरकार जिस समाचार पत्र या टेलीविज़न चैनल को केवल इसलिये पसंद न करे कि वह सरकार की आलोचना करता रहता है, उसको सरकारी विभागों के विज्ञापन मिलना बंद कर दिया जाता है । समाचार पत्र वास्तव में विज्ञापनों की आमदनी पर ही जीवित रहते हैं और उनके मालिक इसी के बल पर करोडपति बनते रहते हैं । समाचार पत्रों की बिक्री से प्राप्त राशि तो नगण्य होती है । इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि हवाई अड्डों पर, कुछ रेलगाडियों में, अधिकांश बडे होटलों में हज़ारों-लाखों प्रतियां प्रतिदिन मुफ़्त में प्रदान कर दी जाती हैं। अगर समाचार पत्र की बिक्री ही आर्थिक महत्व का कारण होती, तो इस तरह लाखों प्रतियां, प्रतिदिन मुफ़्त में प्रदान नहीं की जा सकती हैं। परंतु आर्थिक कमाई का मुख्य स्रोत तो विज्ञापन से ही जुडा होता है।

अभी चुनावी प्रचार-प्रसार शुरू हो गया है। हर दल, हर उम्मीदवार अपनी अपनी तारीफ़ में और अपने अपने पक्ष में हर दिन कुछ न कुछ छपवाते रहेंगे। यह किसको मालूम नहीं है कि इस तरह के सभी समाचार केवल धन प्राप्त होने पर ही छापे जाते हैं और जितना धन प्राप्त होता है, उतना ही स्थान उस समाचार को मिल जाता है सब जानते हैं, परंतु फ़िर भी कोई नहीं जानता। “पेड न्यूज़” के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की धमकी अनेक बार दी जाती रहती है, परंतु सभी जानते हैं कि यह सब केवल बंदर भभकी ही होती है। छोटे समाचार पत्रों की तरफ़ लोग ज़्यादा ध्यान नहीं देते और इसलिये उनको अपेक्षाकृत बहुत कम आर्थिक लाभ मिल पाता है। चुनाव आयोग इस प्रकार के कृत्यों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं करता और इसलिये चुनावी दौर में “पेड न्यूज़” का धंधा ज़ोरशोर से चलता रहता है।

मेरा ऐसा मानना है कि यदि सरकार के किसी नेता को अपने किसी अच्छे काम का ढोल पीटना ही है तो वह अपने कार्यकाल में किसी भी तरह से कमाये हुए अरबों रुपये के भंडार में से विज्ञापन की राशि का भुगतान स्वयं करे । तब मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी । परंतु जनता के धन का अपनी गुणगाथा के लिये उपयोग किया जाना मेरी दृष्टि में अनुचित ही है । जनता  इतनी अनजान नहीं है कि वह यह भी न समझ सके कि उसकी भलाई के लिये किसने क्या क्या काम किये हैं । फ़िर उसके लिये विज्ञापनी ढोल का सहारा क्यों लिया जाता है ? अच्छा काम खुद बोलता है । उसे विज्ञापन के द्वारा प्रचार-प्रसार की आवश्यकता नहीं होती । मैं स्पष्ट रूप से यह मानता हूं कि यह सर्वथा अनुचित है कि मुख्यत: चुनावी दौर में, सरकार का गुणगान करने के लिये जनता के धन का दुरुपयोग करके इस प्रकार विज्ञापन दिये जाएं ।

किशन शर्मा, 901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर, नागपुर – 440015; मोबाइल – 8805001042