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उत्तराखंड: जनजातीय क्षेत्र में 10 बीघा जमीन की खरीद पर उठे सवाल, जम्मू-कश्मीर निवासी पर आरोप, पाकिस्तान से आया वीडियो?

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देहरादून: उत्तराखंड में डेमोग्राफिक चेंज और बाहरी व्यक्तियों द्वारा जमीन खरीद के मामलों को लेकर सरकार पहले ही सख्त रुख दिखा चुकी है। सीएम पुष्कर सिंह धामी कई मंचों पर राज्य की संवेदनशील भूगोल और जनसंख्या संरचना को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। इसी बीच देहरादून जिले के जनजातीय क्षेत्र कालसी में जमीन खरीद का एक पुराना मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।

मामला क्या है?

जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के निवासी गुलाम हैदर ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों की आचार संहिता के दौरान कालसी क्षेत्र में करीब 10 बीघा जमीन खरीदी। जबकि उत्तराखंड जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम 1950 के मुताबिक राज्य के बाहर का व्यक्ति प्रदेश में सामान्यतः केवल 250 वर्ग मीटर भूमि ही खरीद सकता है।

जनजातीय घोषित इस क्षेत्र में बाहरी व्यक्ति को जमीन खरीदने की अनुमति तभी दी जा सकती है जब वह यहां रहने वाले किसी पारिवारिक रिश्तेदार का प्रमाण प्रस्तुत करे और जिला प्रशासन से अनुमति ले।

जमीन का मूल्य और संवेदनशीलता

कालसी क्षेत्र में एक बीघा जमीन की मौजूदा सरकारी कीमत लगभग 32 लाख रुपये से अधिक आंकी जाती है। क्षेत्र की जनजातीय प्रकृति और संवेदनशीलता को देखते हुए इस सौदे पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मामला सामने कैसे आया?

कुछ महीने पहले कालसी निवासी संजय खान ने देहरादून प्रशासन को कई शिकायतें दीं। उनका आरोप है कि गुलाम हैदर उनकी संपत्ति को अपना बताते हुए उस पर दावा कर रहे हैं।

संजय खान ने यह भी आरोप लगाया कि गुलाम हैदर ने पाकिस्तान में रहने वाले अब्दुल्लाह नाम के व्यक्ति का वीडियो भेजकर दावा किया कि जमीन उनके दादा की थी और वक्फ बोर्ड को दान की गई थी। यह वीडियो पाकिस्तान से उनके मोबाइल पर भेजा गया, जिसके बाद संजय ने इसे साजिश बताया। मामला आगे बढ़कर नैनीताल हाईकोर्ट तक पहुंच गया।

सबसे बड़ा सवाल, इजाजत किसने दी?

चूंकि जनजातीय क्षेत्र में बाहरी व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता, ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि स्थानीय रिश्तेदारी का हवाला देकर नाम रजिस्टर में जुड़वाया गया।

सबसे अहम प्रश्न यह है कि

  • क्या जमीन खरीदने से पहले डीएम/एसडीएम से अनिवार्य अनुमति ली गई?
  • यदि ली गई तो किस आधार पर इतनी बड़ी जमीन के लिए अनुमति जारी हुई?

विपक्ष ने उठाए सवाल

स्वाभिमान मंच के नेता बॉबी पंवार ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है:

“बिना सरकारी मिलीभगत के यह संभव नहीं। जांच होनी चाहिए कि जम्मू-कश्मीर का व्यक्ति यहां इतनी बड़ी जमीन क्यों खरीद रहा था? उसकी मंशा क्या है?”

जांच की मांग तेज

मामला पुराना होने के बावजूद अब राजनीतिक रूप से गर्माता दिख रहा है। सरकार पर सवाल उठ रहे हैं और प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अब सरकार और जिला प्रशासन इस विवादित सौदे पर क्या कदम उठाते हैं।

कांग्रेस का मिशन 2027: हरक सिंह बोले–आज से हर दिन चुनाव का दिन

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देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में शुक्रवार को चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की अध्यक्षता में वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को निर्णायक जीत दिलाने की रणनीति तैयार करना था।

बैठक में नेताओं ने 2027 के चुनाव में जनता के बीच ले जाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। कांग्रेस के 10 वर्ष बनाम भाजपा के 15 वर्ष के शासन की तुलनात्मक समीक्षा (मंथन) भी हुआ।

मुख्य मुद्दे जिन पर जोर दिया गया:

उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों (जल, जंगल, जलविद्युत) पर मिलने वाले टैक्स में राज्य का हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए विभाजन एक्ट में संशोधन।

टिहरी बांध विस्थापितों से किए गए वादों को पूरा करना, उन्हें मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना।

संवेदनशील जिलों में जिम्मेदार एवं सक्षम अधिकारियों की तैनाती।

ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करवाने के लिए संघर्ष।

युवाओं, किसानों, पूर्व सैनिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाना और उन्हें पार्टी से मजबूती से जोड़ना।

हर जिले के वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लेकर स्थानीय मुद्दों को आंदोलन का रूप देना।

डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा, “आज से हर दिन चुनाव का दिन है। हम बूथ स्तर पर वोटर लिस्ट की बारीकी से निगरानी करेंगे, किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा का तथाकथित बूथ मैनेजमेंट सिर्फ कागजी और हवाई है, समय आने पर हम उसकी पोल खोल देंगे।”

उन्होंने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल बहुत शीघ्र अपनी नई कार्यकारिणी का गठन करेंगे। इसके लिए जल्द ही दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की बैठक भी होगी।

पत्रकार वार्ता में पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह सजवान, पूर्व महानगर अध्यक्ष हरीश विरमानी, सुरेंद्र अग्रवाल, वीरेंद्र पोखरियाल, सुनीता प्रकाश, संजय शर्मा तथा सेवा निवृत्त कर्नल राम रतन नेगी सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

डॉ. रावत ने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि अभी से कमर कस लें और जनता के बीच जाकर भाजपा सरकार की विफलताओं को बेपर्द करें, क्योंकि “अवसर हमारे पास बहुत हैं, बस मेहनत करनी है।”

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे का दूसरा दिन

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नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे का आज दूसरा दिन है। सुबह सबसे पहले वे राजघाट पहुंचे और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके बाद राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत हुआ। वहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। फिलहाल हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता चल रही है।

वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने कहा:

  • भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करना चाहिए और नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहिए।
  • यूक्रेन संकट पर हमने हमेशा खुलकर बात की है।
  • भारत तटस्थ (न्यूट्रल) नहीं है, भारत शांति के पक्ष में है।
  • हम शांति स्थापना के हर प्रयास में रूस के साथ हैं।
  • यह युद्ध का नहीं, बातचीत और कूटनीति का समय है।
  • दुनिया में शांति बहाल होनी चाहिए, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।

दोनों नेताओं के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और निवेश समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है। बैठक के बाद कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

RBI की मौद्रिक नीति: रेपो रेट में 25 बीपीएस कटौती, जीडीपी अनुमान 7.3% पर, महंगाई 2% रहने का पूर्वानुमान

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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार (5 दिसंबर 2025) को अपनी वित्त वर्ष 2025-26 की पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक के नतीजों का ऐलान किया। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 बीपीएस (0.25%) की कटौती कर इसे 5.25% कर दिया। साथ ही, नीति रुख को ‘तटस्थ’ (न्यूट्रल) बनाए रखा। यह फैसला आम कर्जदारों के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे होम लोन, कार लोन और अन्य ईएमआई में कमी आ सकती है।

गवर्नर मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ करार दिया, जहां पहली छमाही में 8% जीडीपी ग्रोथ और 2.2% महंगाई जैसी आदर्श स्थिति है। न तो ज्यादा तेजी और न ही मंदी—सब कुछ संतुलित। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया, जबकि महंगाई (सीपीआई) का अनुमान 2.6% से घटाकर 2% कर दिया। यह अर्थव्यवस्था के मजबूत स्वास्थ्य का संकेत है।

एमपीसी के 10 प्रमुख फैसले और प्रभाव

आरबीआई की इस नीति से जुड़ी 10 अहम बातें, आसान भाषा में:

रेपो रेट कटौती से लोन सस्ते होंगे: रेपो रेट 5.50% से घटकर 5.25% हो गया। इससे बैंकों की उधार लागत कम होगी, जो ग्राहकों को होम लोन या बिजनेस लोन पर ब्याज दरों में कमी के रूप में फायदा देगी। उदाहरण: 50 लाख का होम लोन (20 साल, 8.5% ब्याज) पर ईएमआई 43,391 रुपये से घटकर 42,603 रुपये हो सकती है—महीने में 788 रुपये और सालाना 9,456 रुपये की बचत। इसी तरह, 5 लाख का कार लोन (12% ब्याज) पर 11,282 रुपये से 11,149 रुपये—महीने में 133 रुपये की राहत।

‘गोल्डीलॉक्स’ दौर में अर्थव्यवस्था: गवर्नर ने कहा कि 8% ग्रोथ और 2.2% महंगाई ‘दुर्लभ संतुलन’ दिखाती है। खाद्य कीमतों में गिरावट और कोर महंगाई में नरमी से यह स्थिति बनी है, जो भविष्य के लिए सकारात्मक है।

जीडीपी ग्रोथ अनुमान ऊपर: विनिर्माण व सेवा क्षेत्र की रफ्तार से वित्त वर्ष 2026 की जीडीपी ग्रोथ 6.8% से बढ़ाकर 7.3% का अनुमान। तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 7%, चौथी में 6.5% रहने की उम्मीद।

महंगाई पर काबू, अनुमान घटा: अक्टूबर में महंगाई रिकॉर्ड निचले स्तर 0.25% पर पहुंची। पूरे वर्ष के लिए अनुमान 2.6% से घटाकर 2%—तीसरी तिमाही में 0.6%, चौथी में 2.9%। अगले वर्ष की पहली दो तिमाहियों में 3.9% और 4% रहने का पूर्वानुमान।

नीति रुख तटस्थ: एमपीसी ने तटस्थ रुख चुना, जो महंगाई नियंत्रण के साथ ग्रोथ को बढ़ावा देने का संकेत। इससे भविष्य में और कटौती या स्थिरता की गुंजाइश बनी रहेगी।

विनिर्माण व सेवा क्षेत्र मजबूत: विनिर्माण में निरंतर सुधार और सेवा क्षेत्र में स्थिर वृद्धि। ये रोजगार व अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं, जिनका अच्छा प्रदर्शन सकारात्मक है।

तीसरी तिमाही में भी तेजी: त्योहारों के बाद मांग घटने की आशंका के बावजूद, बिजली खपत व वाहन बिक्री जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स मजबूत गतिविधियों का इशारा कर रहे हैं।

फॉरेक्स रिजर्व रिकॉर्ड स्तर पर: देश का विदेशी मुद्रा भंडार 686 अरब डॉलर पर पहुंचा, जो 11 महीने के आयात बिल को कवर करने लायक। इससे रुपये की स्थिरता बनी रहेगी।

बैंकों को ग्राहक-केंद्रित रहने की सलाह: बैंकों की सेहत व मुनाफा मजबूत, लेकिन गवर्नर ने कहा—ग्राहकों को नीतियों का केंद्र बनाएं। मुनाफे के साथ सुविधाओं पर फोकस।

बाजार में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित: त्योहारी मांग व क्रेडिट जरूरतों को देखते हुए, आरबीआई सिस्टम में टिकाऊ तरलता बनाए रखेगा। दिसंबर में 1 लाख करोड़ रुपये के ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) खरीद से नकदी इंजेक्ट होगी।

यह नीति न केवल कर्जदारों को राहत देगी, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘स्वीट स्पॉट’ में मजबूत बनाएगी। स्टॉक मार्केट ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, जहां सेंसेक्स व निफ्टी 0.3% ऊपर खुले।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने PCS मुख्य परीक्षा पर लगाई रोक, प्रारंभिक परीक्षा में गलत प्रश्नों के कारण बड़ा फैसला

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सम्मिलित राज्य सिविल/प्रवर अधीनस्थ सेवा (PCS) मुख्य परीक्षा-2025 पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह परीक्षा 6 और 9 दिसंबर 2025 को आयोजित होने वाली थी। कोर्ट का यह आदेश प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य अध्ययन के एक प्रश्न के गलत होने और परिणाम पर उसके प्रभाव को लेकर दायर याचिका पर आया है।

न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) को निम्नलिखित निर्देश दिए:

सामान्य अध्ययन का प्रश्न संख्या-70 पूरी तरह हटाया जाए।

शेष तीन विवादित प्रश्नों की जांच स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से कराई जाए।

प्रश्न हटाने के बाद 2022 के नियमों के अनुसार संशोधित परिणाम और नई मेरिट सूची जारी की जाए।

नई मेरिट सूची आने तक मुख्य परीक्षा पर पूर्ण रोक रहेगी।

याचिकाकर्ता कुलदीप कुमार और अन्य अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा (8 अक्टूबर को घोषित परिणाम) में कुल चार प्रश्नों को गलत बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान UKPSC ने भी स्वीकार किया कि एक प्रश्न (प्रश्न संख्या-70) वास्तव में गलत था और उसे हटाया जाना चाहिए था।

यह भर्ती डिप्टी कलेक्टर, DSP, वित्त अधिकारी, सहायक आयुक्त राज्य कर, राज्य कर अधिकारी, सहायक नगर आयुक्त, अधिशासी अधिकारी आदि सहित कुल 120 से अधिक महत्वपूर्ण पदों के लिए चल रही है। प्रारंभिक परीक्षा में लगभग 1200 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी विवादित प्रश्नों की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती और संशोधित मेरिट सूची जारी नहीं हो जाती, तब तक मुख्य परीक्षा कराना अभ्यर्थियों के हित में नहीं होगा।

अब UKPSC को जल्द से जल्द विशेषज्ञ समिति का गठन कर जांच पूरी करनी होगी, जिसके बाद ही मुख्य परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा संभव हो सकेगी। इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों की मुख्य परीक्षा अनिश्चित काल के लिए टल गई है।

उत्तराखंड में मौसम अलर्ट: आज से बदलेगा मौसम, पहाड़ों में बारिश-बर्फबारी की संभावना

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देहरादून। उत्तराखंड में आज शुक्रवार (5 दिसंबर 2025) से मौसम में बदलाव होने जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से पर्वतीय जिलों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है। इससे सूखी ठंड से राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि तापमान में और गिरावट आएगी।

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार:

5 दिसंबर (शुक्रवार): उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश और 3200 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी हो सकती है।

6 दिसंबर (शनिवार): मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा।

7-8 दिसंबर (रविवार-सोमवार): एक बार फिर पर्वतीय इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बारिश-बर्फबारी से हवा में नमी बढ़ेगी, जिससे सूखी ठंड से राहत मिलेगी। हालांकि न्यूनतम और अधिकतम तापमान दोनों में गिरावट दर्ज होगी। मैदानी क्षेत्रों में भी शीतलहर और घने कोहरे का असर रहेगा।

पिछले दो महीने (अक्टूबर-नवंबर) में जलवायु परिवर्तन और मौसम के बदले पैटर्न के कारण सर्दियों की सामान्य बारिश नहीं हुई थी। गुरुवार से ही कई इलाकों में शीतलहर शुरू हो गई है, जिससे ठिठुरन बढ़ गई है। आने वाले दिनों में सर्दी और तेज होने की संभावना है।

यात्रियों और स्थानीय लोगों से अनुरोध है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें।

दर्दनाक सड़क हादसा: बरात लौटते समय जीप खाई में गिरी, 5 की मौत, 5 घायल

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पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में शेरा घाट के पास शुक्रवार देर रात करीब 2:30 बजे एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया। चंपावत के पाटी से बरात लेकर लौट रही एक मैक्स जीप अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में एक महिला समेत पांच बरातियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।

मृतकों की अभी तक आधिकारिक पहचान नहीं हो पाई है, लेकिन सभी मृतक और घायल बरात में शामिल लोग बताए जा रहे हैं।

सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, SDRF और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और देर रात तक चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में सभी शवों और घायलों को बाहर निकाला गया।

घायलों में से चार को प्राथमिक उपचार के लिए लोहाघाट अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के सटीक कारणों की जांच शुरू कर दी है।

उत्तराखंड में गहन पुनरीक्षण कवायद

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प्रत्येक मतदाता तक पहुँच , समन्वय और संवाद अभियान

– विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर प्रारम्भिक तैयारियां शुरु

– 2003 की मतदाता सूची से की जाएगी वर्तमान मतदाता सूची की मैपिंग

– हर मतदाता तक पहुंच सुनिश्चित करेंगे फिल्ड ऑफिसर

देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों के कम में उत्तराखण्ड राज्य में प्री एसआईआर गतिविधियां शुरु कर दी गई हैं। इस चरण में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर प्रारम्भिक तैयारियां की जाएंगी, साथ ही एसआईआर के दौरान मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा ना हो इसके दृष्टिगत “प्रत्येक मतदाता तक पहुंच , समन्वय और संवाद’ अभियान पर कार्य किया जा रहा है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ० बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अलग-अलग वर्षों में इससे पूर्व 11 बार विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) पूरे देश में संपादित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में वर्ष 2003 में एसआईआर किया गया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में आयोग द्वारा पहले चरण में बिहार और दूसरे चरण में 12 अन्य राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया गतिमान है। उन्होंने बताया कि आयोग का इस पूरी प्रकिया के पीछे उद्देश्य हर पात्र मतदाता को मतदाता सूची में शामिल करना है।

प्रत्येक मतदाता तक पंहुच, समन्वय और संवाद’ अभियान

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्री एसआईआर फेज में प्रदेश की वर्तमान मतदाता सूची में शामिल लगभग 40 वर्ष तक की आयु के ऐसे मतदाता जिनके नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज थे उनकी सीधे बीएलओ एप से मैपिंग की जाएगी। इसके साथ ही 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के ऐसे मतदाता जिनके नाम 2003 की मतदाता सूची में किसी कारणवश नहीं है तो उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम के आधार पर प्रोजनी के रुप में मैपिंग की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची www.ceo.uk.gov.in एवं www.voters.eci.gov.in पर सर्च की जा सकती है।

*राष्ट्रीय राजनैतिक दलों से बीएल नियुक्त करने की अपील*

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ० बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दलों से अपने-अपने बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) नियुक्त करने की अपील की है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 11733 बूथ के सापेक्ष 4155 बीएलए ही नियुक्त हैं।

हेल्प डेस्क होगी स्थापित

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ० बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि सभी जनपदों में जिलाधिकारी, ईआरओ और बीएलओ को मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि जनपद एवं ईआरओ स्तर पर एक हेल्प डेस्क स्थापित की जा रही है ताकि मतदाताओं को आसानी से मदद मिल सके।

इस अवसर पर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तु दास मौजूद रहे।

उत्तराखंड : मंदिर से पूजा कर लौट रहे व्यक्ति को गुलदार ने मार डाला, गुलदार को मारने के आदेश जारी, शूटर तैनात

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पौड़ी : गुरुवार सुबह करीब सवा छह बजे तहसील पौड़ी के ग्राम पंचायत चवथ के गजल्ड (गजेंद्रपुर) गांव में गुलदार ने एक बार फिर खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। गांव के मंदिर में पूजा करके घर लौट रहे 45 वर्षीय राजेंद्र नौटियाल पुत्र बच्ची राम नौटियाल पर झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक हमला बोल दिया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया।

जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया तुरंत मौके पर पहुंचीं

सूचना मिलते ही जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया, स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी, डीएफओ अभिमन्यु सिंह समेत वन विभाग की रैपिड रेस्पॉन्स टीम के 16 जवान पिंजरे और उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गए। जिलाधिकारी ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और भरोसा दिलाया कि प्रशासन हर कदम पर उनके साथ है।

दो घंटे में मिली शूटिंग की अनुमति

जिलाधिकारी ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन से गुलदार को मारने की अनुमति मांगी गई। महज दो घंटे के अंदर अनुमति मिल गई और अपराह्न 3 बजे तक प्रशिक्षित शूटर मौके पर तैनात कर दिए गए। आक्रोशित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत किया गया।

सुरक्षा के मद्देनजर दो दिन का अवकाश

लोगों की सुरक्षा को देखते हुए संकुल ढ़ाण्डरी, बाड़ा और चरधार के सभी शासकीय-निजी स्कूलों व आंगनबाड़ियों में शुक्रवार (5 दिसंबर) और शनिवार (6 दिसंबर) को अवकाश घोषित कर दिया गया है। पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए चारे की तुरंत व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

10 लाख रुपये मुआवजा जल्द

वन विभाग ने बताया कि मृतक के परिवार को नियमानुसार 10 लाख रुपये का मुआवजा शीघ्र प्रदान किया जाएगा। मौके पर संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, एसडीओ फॉरेस्ट आयशा बिष्ट सहित पुलिस और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। क्षेत्र में गुलदार के आतंक को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड की SCERT शाखा ने की 2013 का अकादमिक ढांचा लागू करने की मांग

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देहरादून : राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड की SCERT शाखा ने बुधवार को खुला आरोप लगाया कि कुछ विभागीय अधिकारियों की व्यक्तिगत स्वार्थ साधने की वजह से राज्य की शीर्ष शिक्षक शिक्षा संस्था SCERT उत्तराखंड को अकादमिक संस्थान के बजाय एक साधारण प्रशासनिक निदेशालय बनाने की साजिश चल रही है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 2013 वाला मूल ढांचा बहाल नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश के शिक्षक सड़कों पर उतरेंगे।

2013 में बना था मजबूत अकादमिक ढांचा

केंद्र प्रायोजित शिक्षक शिक्षा पुनर्गठन योजना के तहत 27 जून 2013 को उत्तराखंड में SCERT को RTE की धारा 27A के अंतर्गत राज्य की शीर्ष अकादमिक संस्था घोषित किया गया था। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे उच्च अकादमिक पद सृजित किए गए थे, जिनकी योग्यता NCERT और क्षेत्रीय शिक्षा संस्थानों (RIE) के बराबर रखी गई थी। अधिकांश खर्च भी केंद्र सरकार ही वहन करने वाली थी।

बार-बार भेजे जा रहे संशोधित प्रस्ताव

राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड की SCERT के अनुसार शासन ने कई बार 2013 शासनादेश की नियमावली मांगी, लेकिन SCERT प्रशासन ने जानबूझकर नियमावली नहीं भेजी। इसके बजाय बार-बार संशोधित प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, जिनमें अकादमिक पदों को खत्म कर प्रशासनिक पदों को बढ़ाया जा रहा है। वजह साफ है – वर्तमान में पदस्थ अधिकांश अधिकारी UGC/NET/PhD जैसी जरूरी अकादमिक योग्यता नहीं रखते, इसलिए वे अपने पद बचाने के लिए मूल ढांचा ही बदलवाना चाहते हैं।

NEP-2020 और केंद्र के मानकों का खुला उल्लंघन

SCERT शाखा अध्यक्ष विनय थपलियाल व मंत्री अखिलेश डोभाल ने कहा कि नए प्रस्ताव न तो भारत सरकार के 2013 दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं और न ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के। NEP-2020 में स्पष्ट है कि SCERT व DIET को चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) चलाना अनिवार्य है, जिसके लिए UGC मानक वाले प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर जरूरी हैं।

अकादमिक संस्थान या नया निदेशालय?

बैठक में तीखा सवाल उठा कि जब अकादमिक संस्थान बनाना था तो अब SCERT को निदेशालय क्यों बनाया जा रहा है? प्रशासनिक काम तो पहले से ही माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय कर रहे हैं। संघ ने कहा कि शीर्ष अकादमिक संस्थान में बैठे अधिकारियों की योग्यता संस्थान के किसी भी सामान्य शिक्षक से कम नहीं होनी चाहिए।

संघ ने दी साफ चेतावनी

संघ ने शासन-प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर 2013 वाला मूल अकादमिक ढांचा लागू करने की मांग की है। संघ ने चेताया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो SCERT से जुड़े सैकड़ों शिक्षक व कार्मिक सड़कों पर उतरेंगे, धरना-प्रदर्शन करेंगे और माननीय न्यायालय की शरण लेंगे। साथ ही केंद्र सरकार को भी इस केंद्र प्रायोजित योजना के उल्लंघन की शिकायत की जाएगी। शिक्षक संघ ने कहा कि SCERT का अकादमिक स्वरूप बचाना राज्य के लाखों बच्चों के भविष्य की लड़ाई है।