कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने विधानसभा में एचडी कुमार स्वामी के विश्वास प्रस्ताव से पहले ही 17 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। और विधानसभा में विश्वास मत प्राप्त करने में विफल रहने पर कुमारस्वामी की सरकार ने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद बीजेपी के बी एस येदुरप्पा के नेतृत्व में राज्य में नई सरकार का गठन किया गया था। और इन विधायकों के अयोग्य घोषित किए जाने की वजह से 17 में से 15 सीटों के लिए 5 दिसंबर को उप चुनाव हो रहे हैं। जिसमें नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 18 नवंबर है।
अगर बीजेपी को सत्ता में बने रहना है तो उसे 15 में से कम से कम 6 सीटों पर जीतना ज़रूरी है। तो वहीं कर्नाटक विधानसभा उपचुनाव में टिकट कटने की वजह से नाराज़ बताए जा रहे प्रदेश के उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सवाडी ने एक बयान देकर सभी अटकलों और अफ़वाहों पर विराम लगा दिया है। लक्ष्मण सवाडी ने कहा है कि वह पार्टी के एक अनुशासित सिपाही हैं। और पार्टी का जो भी निर्णय होगा उन्हें मंजूर है।
सवाडी ने कहा है कि विधायक ना होने के बाद भी जिस पार्टी ने उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया है, वही उनका भविष्य भी तय करेगी। संवाददाताओं से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सवाडी ने कहा है कि वह उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार के लिए सभी संभव प्रयास करते हुए उनकी जीत को सुनिश्चित कराएंगे। सवाडी ने कहा है कि, “मैं कहता आ रहा हूं कि मैं पार्टी का एक अनुशासित सिपाही हूं, पार्टी जो भी निर्देश देगी उसका पालन करना मेरा शुरू से कर्तव्य है। मुझे पार्टी का निर्णय मंजूर होगा। बता दें कि प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा ने कांग्रेस के अयोग्य विधायक महेश कुमातल्ली को अठानी से अपना उम्मीदवार बनाया है। और कुमातल्ली ने 2018 के विधानसभा चुनावों में सवाडी को हराया था।















