अमेरिका ने करेंसी मॉनीटरिंग लिस्ट से किया भारत को बाहर, दो सालों से था लिस्ट में शामिल…

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पिछले दो सालों से अमेरिका की मुद्रा निगरानी सूची में शामिल रहने के बाद अब भारत इस लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। पिछले दो सालों से भारत इस सूची में आता था। लेकिन अब अचानक से भारत को इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। आखिर ऐसा क्या हुआ किस्से अमेरिका के टेजरी विभाग ने इतना बड़ा फैसला लिया है। लोग सोच रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ.? और अगर ऐसा हुआ है तो इससे भारत को कोई नुकसान पहुंच सकता है? या इसके क्या फायदे हैं.? तो चलिए जानते हैं।

पहले आपको बता दें कि मुद्रा निगरानी सूची में किन देशों को रखा जाता है। बताते चलें कि करेंसी मॉनिटरिंग लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है, जिनके फॉरेन एक्सचेंज रेट पर उसे शक होता है। अमेरिका अपने प्रमुख भागीदारों की करेंसी पर निगरानी के लिए यह लिस्ट तैयार करता है। इस व्यवस्था के तहत प्रमुख व्यापार भागीदारों की मुद्रा को लेकर गतिविधियों और वृहत आर्थिक नीतियों पर करीबी नजर रखी जाती है। इन देशों को निगरानी सूची में रखा जाता है।

मौजूदा समय में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, मलेशिया, सिंगापुर और ताइवान इस लिस्ट में शामिल हैं।पिछली लिस्ट में इन देशों के साथ भारत, इटली, मेक्सिको, थाईलैंड और वियतनाम भी सूची में शामिल थे। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन ने अपनी भारत यात्रा के दौरान शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक की। इसी दिन अमेरिका के वित्त विभाग ने यह कदम उठाया है।

सामने आई रिपोर्ट में कहा गया है कि “जिन देशों को सूची से हटाया गया है उन्होंने लगातार दो रिपोर्ट में तीन में से सिर्फ एक मानदंड पूरा किया है। चीन अपने विदेशी विनिमय हस्तक्षेप को प्रकाशित करने में विफल रहने और अपनी विनिमय दर तंत्र में पारदर्शिता की कमी के चलते वित्त विभाग की नजदीकी निगरानी में है।”