बीदर में देशद्रो’ह मामले पर कर्नाटक की अदालत ने किया फ़ैस’ला..

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कर्नाटक के बीदर में देशद्रो’ह मामले में निचली अदालत ने स्कूल प्रबंधक को अग्रि’म जमानत दे दी है। साथ ही अदालत ने स्कूल टीचर, छात्रा की मां और स्कूल प्रबं’धक के खि’लाफ देशद्रो’ह का मामला दर्ज करने पर आपत्ति जताई है। न्यायालय ने साफ कहा कि यह मामला देशद्रो’ह का नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खरा’ब हुई है तो खुद प्रधानमंत्री की तरफ से यह मामला दर्ज होना चाहिए था। बीदर की अदालत ने स्कूल के प्रबं’धक के साथ साथ इसके प्राचार्य और उस पत्रकार को भी अग्रिम जमानत दे दी जिनके खि’लाफ देशद्रो’ह का मामला बीदर पुलिस ने दर्ज किया था। अदालत ने जमानत देते हुए देशद्रो’ह का मामला दर्ज करने पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने साफ कहा कि पहली नज़र में यह देशद्रो’ह का मामला नहीं लगता।

जिला न्यायाधीश प्रेमवती ने कहा कि “जानकारी और अन्य अभिलेखों के सावधानीपू’र्वक अवलोकन पर यह पाया गया है कि कलाकारों ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के खि’लाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है और उन्होने पीएम के खि’लाफ चप्प’ल का इस्तेमाल किया है। यह पाया गया कि नाटक के माध्यम से उन्होंने सीएए और एनआरसी के खि’लाफ विरो’ध किया था और नाटक स्कूल के समारोह में आयोजित किया गया था। लेकिन संवाद, अगर पूरी तरह से पढ़ा जाए, तो कहीं भी सरकार के खि’लाफ देशद्रो’ह का कोई मुक’दमा नहीं बनता।”

बता दें कि कर्नाटक के बीदर में एक स्कूल के खि’लाफ देशद्रो’ह का मामला दर्ज किया गया था। देशद्रो’ह का यह मामला बीदर के शाहीन शिक्षा संस्थान के खि’लाफ दर्ज किया गया था। आरोप था कि इस स्कूल में सीएए एनआरसी के खि’लाफ एक नाटक का मंचन किया गया और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपमानित किया गया। यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता नीलेश रक्ष्याल की शिकायत पर दर्ज किया गया था।

स्कूल प्रबं’धन के वकील बीटी वेंकटेश ने कहा कि “कोर्ट ने साफ कर दिया है कि स्कूल के मैनेजमेंट के खि’लाफ देशद्रो’ह का मामला नहीं बनता। यही कानून और सोच स्कूल की महिला शिक्षक और छात्रा की मां पर भी लागू होगा।” उन्होंने कहा कि “अमूल्य के केस में भी देशद्रो’ह का मामला नहीं बनता क्योंकि इस कानून के मुताबिक देशद्रो’ह का मामला तभी हो सकता है जब देश की एकता और अखं’डता के खि’लाफ कोई बात की जाए या फिर कुछ ऐसा कहा जाए या किया जाए जिससे देश के स्वरूप को खत’रा हो। इन दोनों में से कुछ भी अमूल्य ने नहीं किया था।”