इस राज्य में टिकटों का बँटवारा शुरू होते ही मची दल-बदल “भगदड़”

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झारखंड विधानसभा चुनावों की घोषणा होने के बाद अब टिकटों का बंटवारा भी शुरू हो गया है। और टिकटों के बंटवारे के साथ असंतुष्ट विधायकों ने बागी होकर दल-बदल की राजनीति भी शुरू कर दी है। भवनापुर सीट से हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए भानु प्रताप शाही को टिकट दिए जाने से नाराज़ पूर्व विधायक अनंत प्रताप देव ने बीजेपी पर टिकट बेचने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है। और अब वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। बीजेपी के पाकुड़ ज़िला अध्यक्ष देवीधन टुडू ने भी अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है।

साथ ही जरमुंडी सीट से टिकट नहीं मिलने पर नाराज़ सीताराम पाठक ने भी बीजेपी को अलविदा कह दिया तो वहीं टिकट कटने से नाराज़ बीजेपी विधायक राधाकृष्ण किशोर ने भी बीजेपी का साथ छोड़ दिया है। और आजसू में शामिल हो गए हैं। बीजेपी के ही बैजनाथ राम झामुमो में शामिल हो गए हैं।बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस भी दल बदल से अछूती नहीं रही है। और कांग्रेस में भी दल बदल की राजनीति चल पड़ी है। बिहार में जेडीयू एनडीए में है, पर झारखंड में जदयू ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है।

झारखंड विधानसभा के लिए अब तक हुए तीन चुनावों में कुछ नेताओं ने दल बदल किए थे। लेकिन, जिस अनुपात में इस बार दल-बदल हो रहा है, वह अपने आप में एक रिकॉर्ड बना रहा है। जबकि, माना जा रहा है कि आखिरी चरण के चुनाव के लिए नामांकन पूरा होने से पहले अभी और नेता दल बदल करेंगे। जिनका भी टिकट कटेगा, वह दल-बदल का खेल खेलने में ज़रा भी देर नहीं करेंगे। वहीं सत्तारूढ़ दल बीजेपी और आजसू के सबसे पुराने गठबंधन के टूटने के बाद दल-बदल की राजनीति को और बल मिला है।