दिल्ली पुलिस हेड कॉन्स्टेबल सीमा ढाका ने की 76 गुमशुदा बच्चों की मदद

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भारत में कई राज्य ऐसे हैं जहां काफी तादाद में बच्चे गुमशुदा (Missing) हो जाते हैं। ऐसे में पुलिस प्रशासन के लिए काफी मुश्किल होता है ऐसे बच्चों की तलाश करना और बहुत से अधिकारी फील्ड वर्क से खुद पीछे हट जाते हैं। लेकिन बहुत से ऑफिसर्स ऐसे भी होते हैं जो अपनी पूरी मेहनत करते हैं काम को पूरी तरह से अंजाम देने के लिए। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की हेड कॉन्स्टेबल सीमा ढाका (Seema Dhaka) ने भी कुछ ऐसे ही मेहनत कर अपने काम को अंजाम दिया।

बता दें कि गुमशुदा (Missing) की तलाश में वो अपने थाने के साथ साथ दूसरे थाने के केस (Case) भी सॉल्व करती हैं। सीमा ढाका यूपी के बड़ौत की रहने वाली हैं। न्यूज़ एजेंसी से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि “मैं अपने गांव की पहली लड़की थी जो अकेले साइकिल से कॉलेज जाती थी। गांव से कॉलेज की दूरी करीब 6 किमी थी। कभी ऐसा भी वक्त आता था कि खेतों में एक भी इंसान नहीं दिखाई देता था। चारों ओर सुनसान रहता था। ऐसे में अगर किसी एक आदमी की निगाह भी मेरे पर पड़ जाती थी, तो जब तक मैं सेफ जगह नहीं पहुंच जाती थी वो मेरी हिफाज़त करता था। गांव की यह बात मुझे बहुत अच्छी लगती थी। लेकिन दिल्ली आकर मुझे यह सब देखने को नहीं मिला। यहां हर कोई अपने काम से काम रखता है।”

अपनी शुरुआती ज़िन्दगी के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि “उनके ताऊ और बुआ के परिवार में बहुत सारे लोग टीचर हैं। इसी के चलते मैंने भी ऐसे सब्जेक्ट लिए कि मैं टीचर बन सकूं। लेकिन मजे ही मजे में दिल्ली पुलिस की भर्ती का फार्म भर दिया। पूरे कॉलेज से सिर्फ मेरा ही नंबर आया। तो मुझे लगा कि शायद मुझमें कुछ खास है और मैं कुछ अच्छा कर सकती हूं। इसीलिए पुलिस में आ गई और 2006 में वर्दी पहन ली। फिर शादी भी एक पुलिसमैन अनिक ढाका से हो गई। अब और हिम्मत आ गई। पड़ोस के ही शहर शामली में सीमा की ससुराल है।”

उन्होंने बताया कि एक साल में 50 गुमशुदा बच्चों को बचाने का मेरा टारगेट था। लेकिन मेरी मंज़िल टारगेट हासिल करना नहीं थी। मुझे तो कम से कम समय में ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को बचाना था। उन्होंने कहा कि “मैं खुद 8 साल के बच्चे की मां हूं। जब मैं किसी के बच्चे के गुम होने की बात सुनती हूं तो बहुत ही अजीब लगता है। मैं बर्दाश्त नहीं कर पाती हूं कि किसी का बच्चा उससे बिछड़े। इसलिए एक मीटिंग के दौरान मैंने अपने अफसरों से गुमशुदा बच्चों को तलाशने वाली सेल में काम करने की इच्छा जाहिर की। अच्छी बात यह है कि सभी अफसरों का मुझे पूरा सपोर्ट मिलता है।”