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CAA और NRC के ख़िलाफ़ प्रशांत किशोर के हैं ये दो प्लान..

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नागरिकता संशोधन विधेयक जबसे संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ है, तभी से इस पर घमासान जारी है। दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में विरोध प्रदर्शन के बाद भड़की हिंसा ने दिल्ली को सकते में ला दिया। असम से चलती हुई विरोध प्रदर्शन कि ये आग भारत के अधिकांश राज्यों को अपने क़ब्ज़े में ले चुकी है। देश में अभी जिस तरह के हालात नज़र आ रहे हैं, उससे तो यही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि, विरोध की आग जिस तरह से धधक रही है, वह जल्द ठंडी पड़ने वाली नहीं है। बल्कि अपनी चिंगारी से अभी बहुत कुछ जला देने की क्षमता रखती है। यह देश के लिए बहुत ही ख़तरनाक स्थिति है।

आज अधिकांश जनता इस नागरिकता क़ानून के विरोध में अपनी आवाज़ बुलंद कर रही है। और किसी ना किसी तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रही है। जनता के साथ लगभग पूरा विपक्ष सरकार के ख़िलाफ़ उठ खड़ा हुआ है। सभी राजनीतिक पार्टियां पूरे ज़ोर-शोर के साथ इस नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

नागरिकता क़ानून के विरोध में सबसे बढ़ चढ़कर विरोध जताने वालों में एक नाम आता है, जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर का, प्रशांत किशोर ने पहले भी ट्विटर के माध्यम से इस बिल के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद CAA के मुद्दे पर पहले केंद्र सरकार का समर्थन करने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी अपने समर्थन से क़दम वापस खींचते हुए कहना पड़ गया था कि, ‘काहे का एनआरसी?’ जिसका साफ संकेत था कि, वह एनआरसी को बिहार में लागू नहीं होने देंगे और बिहार के गया में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस बात की गारंटी भी दी थी कि अल्पसंख्यकों के हितों का पूरा ध्यान रखा जायेगा।

अब एक बार फिर से जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर सुर्खियों में हैं, कारण है उनके द्वारा किया गया एक ट्वीट, जिसमें उन्होंने CAA और NRC को लागू होने से रोकने के तरीके बताए हैं। JDU के प्रशांत किशोर ने अपने ट्वीट में लिखा है कि, CAA-NRC के क्रियान्वयन को रोकने के दो प्रभावी तरीके हैं। पहला, सभी प्लेटफॉर्म्स पर अपनी आवाज़ उठाकर शांतिपूर्वक विरोध जारी रखें। दूसरा, यह सुनिश्चित करें कि सभी 16 ग़ैर-बीजेपी शासित राज्यों या इनमें से अधिकांश प्रदेशों के सीएम एनआरसी को अपने राज्यों में ना लागू होने देने पर सहमत हों। बाकी की जो भी महत्वपूर्ण चीज़ें हैं, वह प्रतीकात्मक हैं।’ प्रशांत किशोर ने विरोध प्रदर्शनों से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति पर अपनी नाराज़गी भी जताई थी। प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के नेताओं को नसीहत दी थी कि वह विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लें, नहीं तो इस संबंध में सोनिया गांधी द्वारा वीडियो जारी करने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।