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मोदी सरकार को अर्थव्यवस्था की मंदी से उबरने को दी इस शख़्स ने ऐसी सलाह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण फँसी दोनों ओर से

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NIrmala Sitaraman

विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान घटाते हुए इसे 6% कर दिया है। जबकि साल 2018-19 में भारत की आर्थिक विकास की दर 6.9% थी। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ सालाना बैठक के बाद विश्व बैंक ने यह ऐलान किया है। बता दें कि भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर ने ‘द हिंदू’ के लिए एक कॉलम लिखते हुए कहा है कि मौजूदा मोदी सरकार को ‘राव-सिंह आर्थिक नीति’ से सीख लेनी चाहिए।

यहाँ हम बता दें कि 1991 में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी। जिसमें पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे, और मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे। बता दें कि प्रभाकर ने लिखा है कि, “गांधीवादी और समाजवाद के साथ बीजेपी की छेड़खानी इसकी स्थापना के बाद कुछ महीनों से अधिक नहीं चली। अगर आर्थिक नीति की बात करें, तो पार्टी ने मुख्य रूप से ‘नेति-नेति’ (यहनहीं-यह नहीं) को अपनाया है। बिना यह बताए कि उसकी अपनी नीति क्या है।”

प्रभाकर ने सुझाव देते हुए कहा है कि, मोदी सरकार ने ‘आर्थिक मोर्चे’ पर अपने प्रदर्शन के बजाय, एक बाहुबल, राजनीतिक राष्ट्रवाद और सुरक्षा को चुनावी मुद्दा बनाया है। उल्लेखनीय है कि अपने कॉलम में प्रभाकर ने यह सुझाव भी दिया है कि आज बीजेपी आर्थिक मोर्चे पर नरसिम्हा राव को रोल मॉडल के तौर पर ले सकती है। जैसा कि राजनीतिक मोर्चे पर बीजेपी ने सरदार पटेल के लिए किया है। ग़ौरतलब है कि बीजेपी ने रॉव के आर्थिक मॉडल को ना तो चुनौती दी है, और ना ही अस्वीकार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए ‘रॉव-सिंह का आर्थिक मॉडल’ काम आ सकता है। उसी दौरान देश में आर्थिक उदारीकरण शुरू हुआ था।