उत्तराखंड: त्रिवेंद्र की सिलसिलेवार मुलाकातें, क्या हैं मायने?

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देहरादून: पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत इन दिनों चर्चाओं में हैं। नकल माफिया हाकम सिंह के साथ उनकी एक-दो नहीं। बल्कि, कई-कई तस्वीरें वायरल हुई। उनके कार्यकाल में हाकम की मां को इलाज के लिए देहरादून पहुंचाने तक हेलीकॉप्टर का इंतजाम किया गया। उत्तराखंड अधीनस्त सेवा चयन आयोग (UKSSSC) भर्ती घोटाले को लेकर उन पर भी सवाल खड़े हुए।

लेकिन, त्रिवेंद्र सिंह रावत इस मामले में पार्टी लाइन से अलग ही चलते नजर आए। उन्होंने हाकम सिंह को अपना करीबी तो नहीं माना, लेकिन यह जरूर कहा कि हां वो पार्टी का कार्यकर्ता था और उनसे मिलता था। साथ ही उन्होंने ने ही यह बात सबसे पहले कही थी कि अगर इस मामले में दो राज्यों के अपराधियों के पकड़े जाने या शामिल होने की बात आती है, तो वो CBI जांच की मांग करेंगें

यहां तक तो ठीक था। लेकिन, इस बीच फिर विधानसभा बैकडोर भर्ती घोटाले का जिन्न बाहर निकल आया। इस भर्ती घोटाले में त्रिवेंद्र ने सीधेतौर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल पर निशाना साधा। अग्रवाल ने भी देर किए बगैर त्रिवेंद्र को निशाने पर ले लिया। यहीं से पूरे मामले ने तूल पकड़ा और भाजपा बैकफुट पर आ गई। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई है, जो जांच में जुटी है।

फिर अचानक पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहले राज्यपाल गुरमीत सिंह से मुलाकात की। उनसे राज्य के समसामयिक विषयों पर चर्चा की बात कही। चर्चा क्या हुई होगी। इसके बारे में वही सही बता सकते हैं। राज्यपाल से अचानक मुलाकात के मायने भी निकाले जा रहे हैं।

दो दिन बाद त्रिवेंद्र दिल्ली पहुंच गए और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान भी तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई। आज उन्होंनें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। मुलाकातों के इस सिलसिले को लोग अलग-अलग रूप में देख रहे हैं।

सोशल मीडिया में भी कई तरह की चर्चाएं हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत सीएम की कुर्सी जाने के बाद से ही पार्टी से अलग-थलग जैसी स्थिति में नजर आ रहे थे। विधानसभा चुनाव में भी बहुत अधिक सक्रिय नजर नहीं आए या यूं कहिये कि पार्टी ने उनको थोडा दूर रखा। उनके करीबियों पर पार्टी ने जरूर भरोसा जताया। अब अचानक बढ़ी सक्रियता के पीछे उनकी राजनीतिक रणनीति को माना जा रहा है।

राजनीति जानकारों की मानें तो इसके पीछे 2024 लोकसभा चुनाव में ताल ठोकने की रणनीति भी हो सकती है। सबसे बड़ा कारण यह है कि त्रिवेंद्र को अब तक संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई। वहीं, एक धड़ा ऐसा भी है, जो यह मानकर चल रहा है कि त्रिवेंद्र की दिल्ली दौड़ मौजूदा स्थितियों को लेकर ही है।

कुछ का मानना है कि उनको दिल्ली तलब किया गया। जबकि, कुछ का मानना है कि उनके खिलाफ हो रही बातों का जवाब देने दिल्ली गए हैं। चाहे जो भी हो। त्रिवेंद्र के समर्थक इतना जरूर चाहेंगे कि उनको कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाए, जिसका वो लंबे वक्त से इंतजार कर रहे हैं।