उत्तराखंड: याचिका खारिज, संकट में पुरोला नगर पंचायत अध्यक्ष

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पुरोला: नगर पंचायत पुराला में में मुख्यमंत्री घोषणाओं को निरस्त करने और निर्माण कार्यों की जांच को लेकर मामला काफी चर्चाओं में रहा था। अब एक बार फिर मामला चर्चा में है। दरअसल, इस मामले में हाईकोर्ट पुरोला नगर पंचायत अध्यक्ष की याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। हालांकि, यह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर करता है कि सरकार क्या एक्शन लेती है। लेकिन, जिस तरह से सीएम धामी भ्रष्टाचार पर सख्त हैं, उससे नगर पांचायत अध्यक्ष की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है!

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफतौर पर कहा है कि मुख्यमंत्री घोषणा के तहत जो विकास कार्य कराए जाने का दावा किया गया और उनके लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई। उससे यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार से धन प्राप्त किए बगैर काम कैसे पूरे कराए गए।

पुरोला नगर पंचायत अध्यक्ष हाईकोर्ट में याचिका खारिज 

याचिकाकर्ता यह बताने में विफल रहा है कि व्यक्तिगत क्षमता में या नगर पंचायत के अध्यक्ष के रूप में, जिन कार्यों के लिए घोषणाएं की गई थीं, उनके संबंध में राज्य को धन जारी करने का आदेश देने के लिए याचिकाकर्ता का निहित अधिकार क्या है। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघवी और न्यायाधीश राकेश थपलियाल की बेंच ने कहा कि हम कोई निर्देश जारी करने के इच्छुक नहीं हैं, जैसा कि इस रिट याचिका में मांग की गई है। याचिका निराधार है और इसलिए इसे खारिज किया जाता है।

सभासदों का आरोप था कि योजना संख्या 1 वार्ड नं. 02 विकास खण्ड पुरोला को जाने वाले रास्ते का समतलीकरण और योजना नं-02 वार्ड नं. 02 से इंटर कालेज जाने वाले सोनाली, जिसकी स्वीकृत लागत 4.59 और 4.59 लाख थी। योजना नं. 01 जो कि लोनिवि अतिथि गृह के पास से प्रारम्भ हो कर थाना पुरोला के मुख्य द्वार डोकाणा तक जाती है।

दूसरी योजना वार्ड सं. 02 श्रीकुल मन्दिर व बालिका इण्टर कालेज से मोटर रोड का निकट थाना पुरोला तक जाती है। दोनों योजनाएं भिन्न-भिन्न स्थानों से प्रारम्भ होकर और भिन्न-भिन्न स्थानों पर समाप्त होती है। आरेप था कि यह पहले से बनाई गई थी, जिनका केवल कागजों में निर्माण दिखाया। नगर पंचायत पुरोला योजना के दस्तावेज भी नहीं दिखा पाई।