उत्तराखंड : बगैर मुआवजे के कैसे खाली करें होटल और माकन, सरकार से लोगों के सवाल

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चमोली: जोशीमठ भू-धंसाव के कारण लगातार दरक रहा है। 723 भवनों को खतरनाक घोषित किया जा चुका है। लोगों को राहत शिविरों में रखा जा रहा है। सरकार एक तरफ कहती है कि लोगों को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। वहीं, दूसरी ओर सरकार जिन होटलों और मकानों को तोड़ने जा रही है। उनको लेकर अब तक ना तो किसी तरह का सरकारी नोटिस लोगों को दिया गया है और ना ही मुआवजे की ऐलान किया गया है। सवाल यह है कि जिन लोगों ने होटल बनाने और मकान बनाने में अपने पूरे जीवन की कमाई खफा दी हो, वो कैसे खाली हाथ यहां से चले जाएं।

ऐसा नहीं है कि लोग अपने घर और होटल खाली नहीं करना चाहते हैं। लोगों का कहना है कि वो खाली करने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले सरकार उनकी संपत्ति का वन टाइम सेटलमेंट कर दे। उनको लिखित में यह आश्वासन दिया जाना चाहिए कि ध्वस्तीकरण के बाद उनको उनके होटल और जमीन के बदले एक धनराशि दी जाएगी। लेकिन, सरकार धनराशि देना तो दूर, लोगों होटल खाली कराने और ध्वस्त करने के लिए नोटिस तक नहीं दिया गया है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकार क्या करना चाहती है?

भू-धंसाव की चपेट में आए जोशीमठ में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आज शुरू होगी। शासन के आदेश के बावजूद मंगलवार को भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई थी। जिला प्रशासन की टीम लाव-लश्कर के साथ भवन तोड़ने पहुंची तो प्रभावित लोग विरोध में उतर आए। ऐसे में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई बुधवार तक के लिए टाल दी गई। इसे लेकर दिनभर अफरातफरी का माहौल रहा।

जोशीमठ में मंगलवार को होटल माउंट व्यू और मलारी इन को ध्वस्त किया जाना था, लेकिन होटल स्वामियों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि आर्थिक मूल्यांकन नहीं किया गया, साथ ही नोटिस तक नहीं दिए गए। विरोध बढ़ने पर प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े। हालांकि अधिकारियों का कहना कुछ और ही है। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ.रंजीत सिन्हा ने कहा कि ऊंचे भवनों को तोड़ने के लिए क्रेन की आवश्यकता है, जो वहां नहीं मिल पाई। इसलिए देहरादून से क्रेन भेजी गई है, जो बुधवार को वहां पहुंच जाएगी।

गृह मंत्रालय की टीम सचिव सीमा प्रबंधन की अध्यक्षता में जोशीमठ पहुंची और स्थिति का आकलन किया। इसके अलावा केंद्रीय एजेंसियां एनजीआरआई, एनआईएच, सीबीआरआई, एनआईडीएम की टीम पहले से ही जोशीमठ में डेरा जमाए हुए हैं। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ.रंजीत सिन्हा ने बताया कि आईआईटी रुड़की की टीम को भी मौके पर भेजा रहा है।

723 पहुंची दरार वाले भवनों की संख्या, 86 असुरक्षित
जोशीमठ में असुरक्षित भवनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मंगलवार को 45 भवन और चिन्हित किए गए। इस तरह से अब तक कुल 723 भवन चिन्हित किए जा चुके हैं। इनमें से 86 भवनों को पूरी तरह से असुरक्षित घोषित कर लाल निशान लगा दिए गए हैं। जल्द ही इन भवनों को ढहाने की कार्रवाई शुरू होगी।

अब तक 462 परिवारों को अस्थायी रूप से विस्थापित किया जा चुका है। मंगलवार को 381 लोगों को उनके घरों से सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट किया गया। जबकि इससे पहले 81 परिवारों को शिफ्ट किया गया था। प्रशासन की ओर से अब तक विभिन्न संस्थाओं-भवनों में कुल 344 कमरों का अधिग्रहण किया गया है। इनमें 1425 लोगों को ठहराने की व्यवस्था की गई है।