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उत्तराखंड के ‘गांधी’ इंद्रमणि बडोनी की 100वीं जयंती पर बन रही डॉक्यूमेंट्री

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मसूरी। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के जननायक और ‘पहाड़ के गांधी’ कहे जाने वाले इंद्रमणि बडोनी की 100वीं जयंती (24 दिसंबर 2025) के अवसर पर बनाई जा रही विशेष डॉक्यूमेंट्री ‘उत्तराखंड के जननायक इन्द्रमणि बडोनी’ का गुरुवार को मसूरी के ऐतिहासिक शहीद स्थल पर फिल्मांकन हुआ। इस दौरान प्रसिद्ध गढ़वाली लोकगीत ‘कु होलु’ सहित कई महत्वपूर्ण दृश्य कैमरे में कैद किए गए।

फिल्म का मुहूर्त शॉट पूर्व मसूरी पालिका अध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल और सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश ढौंडियाल ने क्लैप देकर किया। डॉक्यूमेंट्री आगामी मसूरी विंटर लाइन कार्निवाल में प्रदर्शित की जाएगी और 24 दिसंबर को बडोनी की जन्म शताब्दी पर इसका भव्य प्रीमियर प्रस्तावित है।

“नई पीढ़ी तक पहुंचाना चाहते हैं बडोनी का संघर्ष”

फिल्म के निर्देशक प्रदीप भंडारी ने बताया, “इंद्रमणि बडोनी उत्तराखंड राज्य के सच्चे जननायक थे। आज कई बच्चे-युवा नहीं जानते कि राज्य बनने में उनका कितना बड़ा योगदान था। हमारी डॉक्यूमेंट्री उनके जीवन संघर्ष, गांधीवादी विचारधारा और अलग राज्य आंदोलन में भूमिका को सामने लाएगी।”

उन्होंने शिक्षा विभाग पर भी सवाल उठाया कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में बडोनी या अन्य राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को शामिल नहीं किया गया है। प्रदीप भंडारी इससे पहले गढ़वाली संस्कृति पर आधारित चर्चित फिल्म ‘पितृ कूड़ा’ बना चुके हैं।

क्यों चुना गया ‘कु होलु’ गीत?

निर्देशक ने बताया कि पुराने समय में पहाड़ों में मीडिया नहीं था। जनसंदेश का काम घड़िया और लोकगीत ही करते थे। ‘कु होलु’ गीत में बडोनी के जीवन और संघर्ष की झलक मिलती है, इसलिए इसे फिल्म का मुख्य हिस्सा बनाया गया है।

कौन थे इंद्रमणि बडोनी?

  • जन्म: 24 दिसंबर 1925, अखोड़ी (तत्कालीन टिहरी रियासत)
  • गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित, अमेरिकी अखबार ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने उन्हें ‘माउंटेन गांधी’ की उपाधि दी
  • 1967, 1969 और 1977 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए
  • 1977 में जनता पार्टी की लहर में भी निर्दलीय जीतकर कांग्रेस-जनता पार्टी उम्मीदवारों की जमानत जब्त कराई
  • उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सबसे बड़े जननेता, हालांकि राज्य बनता देखने से पहले 1999 में निधन हो गया

शहीद स्थल पर फिल्मांकन के दौरान मौजूद लोगों में बडोनी के परिजन, उत्तराखंड आंदोलनकारी और स्थानीय नागरिक शामिल थे। सभी ने इसे बडोनी को सच्ची श्रद्धांजलि बताया। निर्देशक प्रदीप भंडारी का कहना है, “हम चाहते हैं कि उत्तराखंड का बच्चा-बच्चा इंद्रमणि बडोनी को जाने, उनके संघर्ष से प्रेरणा ले और अपनी संस्कृति-इतिहास से जुड़े।”

इंडिगो संकट के बीच DGCA का एक्शन, चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर को किया सस्पेंड

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नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के परिचालन में हाल के दिनों में मची खलबली के बीच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सख्त कार्रवाई की है। DGCA ने शुक्रवार को चार फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर्स (FOIs) को सस्पेंड कर दिया, जो इंडिगो की सुरक्षा और संचालन अनुपालन की निगरानी के जिम्मेदार थे। यह कदम प्रारंभिक जांच में सामने आए लापरवाही के आरोपों के बाद उठाया गया है, जिसने विमानन सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

12 दिनों से गंभीर संकट

पिछले 12 दिनों से इंडिगो को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (FDTL) नियमों का पालन न कर पाने के कारण एयरलाइन ने हजारों उड़ानें रद्द कीं, जिससे लाखों यात्री हवाई अड्डों पर फंस गए। दिल्ली और बेंगलुरु जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर गुरुवार को ही 200 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं। सामान्यतः 2,300 दैनिक उड़ानों का संचालन करने वाली इंडिगो अब केवल 1,950 उड़ानों तक सीमित हो गई है, जो लगभग 3 लाख यात्रियों को ले जाने वाली हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन को विंटर शेड्यूल में 10 प्रतिशत की कटौती करने का निर्देश दिया है।

DGCA ने गुरुवार को इंडिगो के गुरुग्राम स्थित मुख्यालय में अपनी टीमें तैनात कर दीं, जो क्रू तैनाती, रद्दीकरण, रिफंड प्रक्रिया और प्रभावित रूट्स की निगरानी कर रही हैं। एक चार सदस्यीय जांच पैनल ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स से कई घंटों तक पूछताछ की और शुक्रवार दोपहर 2 बजे फिर से उपस्थिति दर्ज करने का आदेश दिया। COO Isidre Porqueras भी पैनल के समक्ष पेश होंगे। पैनल में जॉइंट डायरेक्टर जनरल संजय ब्रह्मणे, डेप्युटी डायरेक्टर जनरल अमित गुप्ता, सीनियर FOI कपिल मंगलिक और FOI लोकेश रामपाल शामिल हैं।

सस्पेंड इंस्पेक्टर्स पर कार्रवाई

सस्पेंड किए गए चार FOIs— रिशि राज चटर्जी, सीमा झामनानी, अनिल कुमार पोखरियाल और प्रियम कौशिक— DGCA के कॉन्ट्रैक्ट आधार पर तैनात थे। ये अधिकारी इंडिगो के पायलट, डिस्पैचर और केबिन क्रू की ट्रेनिंग, फ्लाइट स्टैंडर्ड्स और दुर्घटना रोकथाम उपायों की जांच के जिम्मेदार थे। आंतरिक आदेश के अनुसार, इन्हें तत्काल प्रभाव से DGCA से रिलीव कर दिया गया है और मूल संगठनों में वापस भेज दिया गया। DGCA ने इनसे स्पष्टीकरण मांगा है और मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं।

स्रोतों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पाया गया कि इन अधिकारियों की निगरानी में लापरवाही बरती गई, जिससे इंडिगो के संचालन में व्यवधान हुआ। FOIs विमानन सुरक्षा के लिए एयरलाइनों का ऑडिट, सर्टिफिकेशन और अनुपालन सुनिश्चित करते हैं, लेकिन इस मामले में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई।

ट्रैवल वाउचर की घोषणा

इंडिगो ने प्रभावित यात्रियों के लिए 10,000 रुपये के ट्रैवल वाउचर की घोषणा की है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि 3-5 दिसंबर को कुछ हवाई अड्डों पर यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। साथ ही, DGCA के निर्देश पर इंडिगो ने अगले एक वर्ष में 900 पायलटों की भर्ती अभियान तेज कर दिया है, ताकि फरवरी 2026 तक नए FDTL नियमों का पूर्ण पालन हो सके। संसदीय पैनल ने भी DGCA, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के शीर्ष अधिकारियों को तलब करने की तैयारी की है, ताकि विमानन क्षेत्र के इस संकट पर चर्चा हो सके।

यात्रियों के लिए चेतावनी

DGCA ने सभी एयरलाइनों से सख्ती से सुरक्षा मानकों का पालन करने और पारदर्शिता बनाए रखने को कहा है। यात्रियों से अपील की गई है कि उड़ान रद्द होने की स्थिति में तुरंत रिफंड या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग करें। यह घटना भारतीय विमानन क्षेत्र की कमजोरियों को उजागर करती है, जहां सुरक्षा पहले आती है, लेकिन परिचालन दबाव अक्सर इसे प्रभावित करता है।

गोवा के बाद अब ओडिशा के नाइट क्लब में भीषण आग

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File Photo

भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के सत्य विहार इलाके में शुक्रवार सुबह एक नाइटक्लब में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि यह पड़ोस के एक फर्नीचर शोरूम तक पहुंच गई। घटनास्थल से उठते घने काले धुएं ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। हालांकि, फायरब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से आग पर काबू पा लिया गया और आसपास के अन्य भवनों तक आग नहीं फैल सकी। अधिकारियों ने बताया कि इस हादसे में अब तक कोई हताहत नहीं हुआ है।

जानकारी के मुताबिक, आग की शुरुआत इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट से हुई। भुवनेश्वर फायर सर्विसेज ने सात फायर टेंडर तैनात कर आग बुझाने का काम शुरू किया। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया गया। पुलिस और फायर अधिकारी जांच में जुटे हैं, जिसमें यह पुष्टि हो चुकी है कि शॉर्ट सर्किट ही मुख्य कारण था।

गोवा हादसे के बाद बढ़ी सतर्कता

यह घटना गोवा के आर्पोरा स्थित बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 7 दिसंबर को हुई भयावह आग के महज कुछ दिनों बाद घटी है, जिसमें 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। गोवा हादसे में आग की शुरुआत क्लब के अंदर इस्तेमाल हुए इलेक्ट्रिकल फायरवर्क्स से हुई थी, जिसमें ज्यादातर स्टाफ और कुछ पर्यटक शिकार हुए। इस घटना के बाद ओडिशा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज ने राज्यभर के सभी रेस्तरां, बार और 100 से अधिक सीट वाले प्रतिष्ठानों का व्यापक ऑडिट कराने का आदेश जारी किया था।

गोवा हादसे ने फायर सेफ्टी नियमों की पोल खोल दी थी, जहां क्लब में कई सुरक्षा उल्लंघन पाए गए थे। ओडिशा में भी अब फायर सेफ्टी क्लियरेंस के बिना चल रहे 80 से अधिक बार और पब्स पर नजर रखी जा रही है। अधिकारी इस घटना को भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए एक सबक मान रहे हैं।

छत्रधारी चालदा महासू महाराज हिमाचल के पश्मी गांव में होंगे विराजमान, 2020 में ही मिल गया था संकेत

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देहरादून। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में इस दिसंबर एक ऐतिहासिक धार्मिक घटना होने जा रही है। उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में न्याय के देवता और आस्था के सबसे बड़े प्रतीक माने जाने वाले छत्रधारी चालदा महासू महाराज पहली बार हिमाचल की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। देवता 14 दिसंबर को शिलाई क्षेत्र के पश्मी गांव में नवनिर्मित भव्य मंदिर में विराजमान होंगे।

देवयात्रा का सबसे अनोखा हिस्सा यह है कि महासू महाराज उत्तराखंड के दसऊ गांव से लगभग 70 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करते हुए टौंस नदी पार कर हिमाचल में प्रवेश करेंगे। 13 दिसंबर को मीनस पुल के रास्ते हिमाचल सीमा में पहुंचकर द्राबिल गांव में रात्रि विश्राम करेंगे और अगले दिन 14 दिसंबर को पश्मी गांव पहुंचकर मंदिर में विधिवत विराजमान होंगे।

पश्मी और घासन गांव के ग्रामीणों ने पिछले कई वर्षों की मेहनत से करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर भव्य महासू मंदिर का निर्माण और जीर्णोद्धार पूरा किया है। पश्मी के 45 और घासन के 15 परिवारों ने चंदा और श्रमदान से यह पुनीत कार्य संपन्न किया। मंदिर की ध्वजा पहले ही स्थापित हो चुकी है, लेकिन कपाट महासू महाराज के आगमन के बाद ही खोले जाएंगे।

इस देव-प्रवास की नींव 2020 में उस समय पड़ी जब लॉकडाउन के दौरान दसऊ गांव से एक विशाल बकरा (घांडुवा) अचानक पश्मी गांव में आकर रुक गया। दो साल तक ग्रामीण इसे सामान्य पशु समझते रहे, लेकिन 2022 में देव वक्ता ने बताया कि यह चालदा महासू का दिव्य दूत है, जो देव-प्रवास से पहले भेजा जाता है। इसके बाद बकरे को पूर्ण सम्मान मिलने लगा और वह आज भी गांव में देव प्रतीक के रूप में मौजूद है।

देवयात्रा के सुचारु संचालन के लिए श्री महासू महाराज सेवा समिति गठित की गई है, जिसमें दिनेश चौहान (बजीर), रघुवीर सिंह (भंडारी) और पंडित आत्माराम शर्मा (मुख्य पुजारी) प्रमुख जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पश्मी गांव में इन दिनों त्योहार सा माहौल है। घर-घर दीपमाला, देव ध्वज और रंग-बिरंगी सजावट की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सदियों बाद मिल रहे इस पुण्य अवसर से पूरा क्षेत्र धन्य हो गया। रोजाना हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। हिमाचल और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को एक सूत्र में बांधने वाला यह दुर्लभ आयोजन दोनों राज्यों के लिए ऐतिहासिक क्षण साबित होगा।

उत्तराखंड: इस सिरप की ओवर डोज से कोमा में गई बच्ची, दून अस्पताल के डॉक्टारों ने बचाई जान

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देहरादून। भगवानपुर निवासी तीन वर्षीय बच्ची गर्विका को खांसी-जुकाम और बुखार होने पर स्थानीय डॉक्टर ने जो सिरप लिख दिया, उसकी ओवरडोज ने उसे मौत के मुंह में पहुंचा दिया। डॉक्टर ने डेक्सामिथार्पन युक्त सिरप लिखा, जो चार साल से कम उम्र के बच्चों को देना पूरी तरह वर्जित है। परिजनों ने एक बार में ही 40-50 एमएल सिरप पिला दिया।

नतीजा यह हुआ कि बच्ची का पूरा नर्वस सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुआ और वह कोमा में चली गई। तीन दिन श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल और उसके बाद नौ दिन दून अस्पताल के पीकू (PICU) में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद आखिरकार बच्ची ने नई जिंदगी पाई। दून अस्पताल में उसे चार दिन तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

दून अस्पताल के एमएस डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया कि 29 नवंबर को बच्ची को गलत दवा देने के बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ी। पहले रुड़की के निजी अस्पताल और फिर श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ले जाया गया। तीन दिन वहां भर्ती रहने के बाद दो दिसंबर को बच्ची को दून अस्पताल लाया गया। यहां बाल रोग विभाग की डॉ. तन्वी सिंह, डॉ. आयशा इमरान, डॉ. आस्था भंडारी और डॉ. कुलदीप की टीम ने दिन-रात एक कर बच्ची की जान बचाई। दस दिसंबर को हालत पूरी तरह स्थिर होने पर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।

डॉ. बिष्ट ने चेतावनी दी है कि डेक्सामिथार्पन (Dexamethasone) युक्त कोई भी दवा चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को नहीं दी जानी चाहिए। यह दवा नर्वस सिस्टम को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है और ओवरडोज जानलेवा भी साबित हो सकती है।

डॉक्टरों की सख्त हिदायत

  • बच्चों की छोटी-मोटी बीमारी में भी सिर्फ बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) को दिखाएं।
  • झोलाछाप डॉक्टरों, इंटरनेट की सलाह या मेडिकल स्टोर की दवा पर भरोसा न करें।
  • बिना डॉक्टरी परामर्श के कभी भी बच्चों को कोई सिरप या दवा न दें, खासकर स्टेरॉयड युक्त दवाएं।

डॉ. बिष्ट ने कहा, “यह मामला उन सभी अभिभावकों के लिए सबक है जो बच्चों को खुद दवा देते हैं या गैर-जिम्मेदार लोगों के भरोसे इलाज कराते हैं। एक गलती पूरे परिवार को हमेशा के लिए रुला सकती है।”

कालाढूंगी के पास गड़प्पू में भयानक सड़क हादसा, दो युवकों की मौत

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नैनीताल जिले के कालाढूंगी क्षेत्र में बाजपुर मार्ग पर स्थित गड़प्पू के पास शुक्रवार तड़के सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े एक पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार में सवार दो युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही कालाढूंगी पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को तत्काल उपचार के लिए बाजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिजवाया गया।

हादसे में क्षत-विक्षत हुई कार पर गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) की नंबर प्लेट लगी हुई है। पुलिस मृतकों और कार में सवार अन्य लोगों की शिनाख्त करने में जुटी हुई है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और चालक का नियंत्रण खोना हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन

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महाराष्ट्र के लातूर में आज सुबह वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज विश्वनाथ पाटिल का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और घर पर ही उनका इलाज चल रहा था। सुबह करीब 6:30 बजे लातूर स्थित उनके निवास “देवगिरि” में उन्होंने अंतिम सांस ली। कांग्रेस पार्टी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें अनुशासित, शालीन और सिद्धांतवादी नेता बताया।

शिवराज पाटिल (पूर्ण नाम: शिवराज विश्वनाथ पाटिल चाकुरकर) कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष (1991-1996), केंद्रीय गृह मंत्री (2004-2008), रक्षा मंत्री, नागरिक उड्डयन मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे लातूर लोकसभा क्षेत्र से सात बार (1980 से 2004 तक लगातार) सांसद चुने गए थे। इससे पहले 1972 से 1980 तक लातूर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रहे।

2008 मुंबई आतंकी हमले और इस्तीफा

26/11 मुंबई आतंकी हमले के समय शिवराज पाटिल देश के गृह मंत्री थे। हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था में चूक को लेकर तीव्र आलोचना हुई। नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में वे 2010 से 2015 तक पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक भी रहे।

पारिवारिक जानकारी

उनके परिवार में पुत्र शैलेश पाटिल, पुत्रवधू अर्चना पाटिल (जो पिछले साल लातूर शहर विधानसभा सीट से BJP उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस के अमित देशमुख के खिलाफ चुनाव लड़ चुकी हैं) तथा दो पोतियां हैं।

अंतिम संस्कार

अंतिम संस्कार शनिवार को लातूर में होने की संभावना है। निधन की खबर फैलते ही उनके निवास “देवगिरि” पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम लोगों की भारी भीड़ जुटने लगी। पुलिस व्यवस्था बनाए हुए है।

राजनीतिक जीवन की मुख्य उपलब्धियां

  • जन्म: महाराष्ट्र के लातूर जिले में
  • 1972-1980: महाराष्ट्र विधानसभा में लातूर ग्रामीण से विधायक
  • 1980-2004: लातूर लोकसभा क्षेत्र से सात बार सांसद
  • इंदिरा गांधी सरकार में राज्य मंत्री (रक्षा)
  • राजीव गांधी सरकार में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री
  • 10वीं लोकसभा के अध्यक्ष (1991-96); संसद में आधुनिक तकनीक एवं कंप्यूटरीकरण की शुरुआत का श्रेय
  • यूपीए-1 सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री (2004-2008)
  • पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक (2010-2015)

भयानक सड़क हादसे में 9 लोगों की मौत, कई घायल

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अल्लूरी सीताराम राजू जिले में देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। चित्तूर जिले से भद्राचलम मंदिर के दर्शन करके अन्नावरम जा रही एक निजी यात्रियों से खचाखच भरी बस अनियंत्रित होकर चित्तूर-मारेदुमिल्ली घाट रोड पर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

जानकारी के अनुसार हादसे के समय बस में सवार अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे, जिस कारण उनकी प्रतिक्रिया देने का मौका ही नहीं मिला। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंची और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। घायलों को तत्काल भद्राचलम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है।

जिला कलेक्टर दिनेश कुमार ने बताया, “चित्तूर-भद्राचलम घाट सेक्शन पर बस खाई में गिर गई। प्राथमिक जानकारी में 9 लोगों की मौत हुई है। बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है और घायलों का इलाज चल रहा है।”

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के सही कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तीखे मोड़ और संभवतः ड्राइवर की लापरवाही को कारण माना जा रहा है।

मानव अधिकार दिवस पर 13 संस्थाओं को मिला सम्मान, नए कानून को बताया मानवाधिकार संरक्षण में मील का पत्थर

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देहरादून। मानव अधिकार संरक्षण केंद्र के तत्वावधान में राजपुर रोड स्थित एक निजी होटल में मानव अधिकार संरक्षण दिवस धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विचार गोष्ठी “नए बीएस कानून और मानवाधिकारों का संरक्षण” से हुई। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में मानव अधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली 13 संस्थाओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नैनीताल उच्च न्यायालय की दैनिक लोक अदालत के पीठासीन न्यायमूर्ति डॉ. राजेश टंडन ने कहा कि नए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएस) में किए गए संशोधन मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं। उन्होंने बताया कि मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम-1993 में स्वयंसेवी संस्थाओं को संरक्षण और प्रोत्साहन देने का स्पष्ट प्रावधान है।

मुख्य अतिथि अपर पुलिस महानिदेशक (कारागार, सुरक्षा एवं अभिसूचना) अभिनव कुमार, आईपीएस ने कहा कि उत्तराखंड राज्य शुरू से ही मानव अधिकारों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने अपने 30 वर्ष के सेवा अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि 1990 के दशक में देश में हिरासत में यातना (कस्टोडियल टॉर्चर) के मामले हजारों में दर्ज होते थे, लेकिन मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, न्यायपालिका, राष्ट्रीय एवं राज्य मानवाधिकार आयोगों की सक्रियता तथा पुलिस-प्रशासन के सुधारों के कारण आज ये मामले घटकर मात्र ढाई सौ के आसपास रह गए हैं। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य इसे शून्य करना है और यह प्रयास तब तक जारी रहेगा।”

श्री कुमार ने दहेज उन्मूलन कानून का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी कानून तभी सफल होता है जब उसका धरातल पर ईमानदारी से क्रियान्वयन हो और समाज में जागरूकता आए। इसमें स्वयंसेवी संस्थाएं, मानवाधिकार आयोग, प्रशासन और पुलिस की साझा भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है।

कार्यक्रम में निम्नलिखित 13 संस्थाओं एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया गया:

उदयन केयर ट्रस्ट

प्रथम स्वास्थ्य फाउंडेशन

श्री जय राम मेमोरियल शिक्षा एवं नारी उत्थान समिति

श्री महाकाल सेवा समिति

समर्पण सेवा समिति

जानकी देवी एजुकेशनल वेलफेयर सोसाइटी

भारतीय ग्रामोत्थान संस्थान

भारतीय भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ

प्रोग्रेसिव कम्युनिटी

काजमी मानव सेवा ट्रस्ट

एमजेएफ लॉयन् चरणजीत सोई (व्यक्ति) को “नौवें मानव अधिकार संरक्षण रत्न सम्मान” से नवाजा गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुंवर राज अस्थाना ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रेम कश्यप ने किया।

इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. आरके जैन, अशोक वर्मा, अनिल वर्मा, राजकुमार पुरोहित, आरपी गुप्ता, डॉ. अजय सक्सेना, डॉ. सुनील अग्रवाल, राजीव वर्मा, एडवोकेट पीयूष अग्रवाल, एसपी सिंह, अकबर सिद्दीकी, संजय जोशी, विमल डबराल, संजीव शर्मा, राजीव थपलियाल, वीडी शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इंडिगो ने किया मुआवजा राशि का एलान, इन यात्रियों को 10-10 हजार देगी एयरलाइन कंपनी

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इंडिगो एयरलाइंस ने दिसंबर 2025 में हुई व्यापक उड़ान रद्दीकरण और देरी की घटनाओं से बुरी तरह प्रभावित यात्रियों को मुआवजे के रूप में 10,000 रुपये के ट्रैवल वाउचर देने की घोषणा की है। यह फैसला उन यात्रियों के लिए है जिनकी उड़ानें 3 से 5 दिसंबर के बीच रद्द हुईं या लंबी देरी का सामना करना पड़ा। यह वाउचर अगले 12 महीनों में इंडिगो की किसी भी उड़ान के लिए इस्तेमाल किए जा सकेंगे। कंपनी ने कहा कि यह मुआवजा सरकारी दिशानिर्देशों के तहत मिलने वाले अतिरिक्त लाभ के अलावा है।

दिसंबर संकट का पृष्ठभूमि

दिसंबर 2025 की शुरुआत में इंडिगो को गंभीर संचालन संबंधी समस्या का सामना करना पड़ा। पायलटों की कमी, तकनीकी खराबी, मौसम की मार और नई क्रू रोटेशन नियमों के कारण 2 दिसंबर से लगभग 5,000 उड़ानें रद्द हो गईं। मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और दिल्ली जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंस गए। डीजीसीए ने कंपनी के गुरुग्राम मुख्यालय पर निगरानी टीम तैनात की।

किसे मिलेगा 10,000 रुपये का वाउचर?

  • गंभीर रूप से प्रभावित यात्री: जो 3-5 दिसंबर को हवाई अड्डों पर घंटों फंसे रहे या कई उड़ानें मिस कर चुके हों।
  • यह वाउचर अतिरिक्त है, यानी सरकारी नियमों के मुआवजे के ऊपर।
  • रद्द उड़ानों के लिए रिफंड पहले ही प्रोसेस हो चुके हैं, ज्यादातर यात्रियों के खाते में पहुंच गए हैं।

सरकारी नियमों के तहत अतिरिक्त मुआवजा

डीजीसीए के दिशानिर्देशों के अनुसार, 24 घंटे से कम समय पहले रद्द हुई उड़ानों के लिए:

  • 1 घंटे तक की उड़ान: 5,000 रुपये.
  • 1-2 घंटे की उड़ान: 7,500 रुपये.
  • 2 घंटे से अधिक: 10,000 रुपये.

कुछ यात्रियों को कुल मिलाकर दोहरी मुआवजा मिल सकता है—सरकारी राशि + 10,000 रुपये का वाउचर। देरी पर भी भोजन, होटल और वैकल्पिक उड़ान की सुविधा अनिवार्य है।

कंपनी की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजना

इंडिगो ने कहा कि वह यात्रियों की असुविधा को स्वीकार करता है और ऑपरेशन सामान्य करने के लिए कदम उठा रहा है। 11 दिसंबर को 1,950 से अधिक उड़ानें निर्धारित हैं, जिसमें 3 लाख यात्री सवार होंगे। कंपनी ने कैंसिलेशन/रीशेड्यूलिंग फीस भी माफ कर दी हैं (5-15 दिसंबर तक)। पायलट यूनियनों ने इसे सरकारी आराम नियमों की अनदेखी बताया, जबकि कंपनी ने आंतरिक और बाहरी कारकों को जिम्मेदार ठहराया।