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उत्तराखंड: सीमेंट मिक्सर से टकराई सेना की स्कॉर्पियो, चार सैन्यकर्मी गंभीर घायल

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रायवाला (देहरादून) : हरिद्वार से देहरादून की ओर जा रही सेना की एक लग्जरी स्कॉर्पियो गाड़ी शनिवार रात्रि करीब सवा दस बजे सत्यनारायण मंदिर के पास सड़क किनारे खड़े एक सीमेंट मिक्सर वाहन (कैप्सूल ट्रक) से पीछे से टकरा गई। इस भीषण दुर्घटना में वाहन में सवार चार सैन्यकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली रायवाला की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने घायलों को तत्काल राहत प्रदान करते हुए एम्बुलेंस 108 की मदद से उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। साथ ही, पुलिस ने रायवाला कैंटोनमेंट स्थित मिलिट्री पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद सेना के जवान भी घटनास्थल पर पहुंच गए और आवश्यक कार्रवाई में सहयोग किया।

दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो एक लग्जरी वाहन है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इसमें सेना के अधिकारी स्तर के कर्मी सवार हो सकते हैं। हालांकि, घायलों की गंभीर स्थिति के कारण वे अपने बारे में कोई जानकारी नहीं दे पाए। कोतवाली रायवाला के प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र सिंह खोलिया ने बताया कि घायलों को प्राथमिकता के आधार पर अस्पताल भिजवाया गया है। उनकी पहचान और अन्य विवरण सेना के सहयोग से जल्द स्पष्ट किए जाएंगे।

कोलकाता में लियोनेल मेसी के कार्यक्रम में भड़का बवाल: फैंस ने की तोड़फोड़, टीएमसी-बीजेपी ने आयोजकों पर साधा निशाना

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कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (साल्ट लेक स्टेडियम) में 13 दिसंबर को अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के ‘GOAT इंडिया टूर 2025’ के पहले चरण में भारी अव्यवस्था और अराजकता देखने को मिली। मेसी महज 10-20 मिनट मैदान पर रहे और जल्दी चले गए, जिससे हजारों टिकट खरीदकर आए फैंस भड़क उठे। नाराज दर्शकों ने बोतलें फेंकीं, कुर्सियां तोड़ीं, बैनर फाड़े और मैदान पर घुसने की कोशिश की। स्थिति बेकाबू होने पर पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।

मुख्य कारण कुप्रबंधन बताया जा रहा है। फैंस का आरोप है कि आयोजकों और कुछ लोगों की सेल्फी लेने की होड़ में मेसी को घेर लिया गया, जिससे गैलरी से ठीक से नजर नहीं आई। टिकट की कीमत 3500 से 14000 रुपये तक थी, फिर भी फैंस निराश लौटे। आयोजन में तय कई कार्यक्रम जैसे बच्चों के साथ मास्टरक्लास और सम्मान समारोह रद्द हो गए। मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

इस घटना पर राजनीतिक बवाल मच गया। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने आयोजकों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आयोजकों और उनके करीबियों की अत्यधिक उत्सुकता व सेल्फी की कोशिशों से दर्शक मेसी को ठीक से नहीं देख पाए, जिससे गुस्सा भड़का। घोष ने आयोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और इसे शर्मनाक बताया।

विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य सरकार और टीएमसी पर सीधा हमला बोला। बीजेपी ने इसे बंगाल व फुटबॉल दोनों का अपमान करार दिया। अमित मालवीय, सुवेंदु अधिकारी और शहजाद पूनावाला जैसे नेताओं ने आरोप लगाया कि टीएमसी नेताओं ने मेसी को घेरकर फैंस को वंचित किया, सुरक्षा व्यवस्था जीरो थी और ब्लैक मार्केटिंग हुई। बीजेपी ने खेल मंत्री के इस्तीफे और जांच की मांग की।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना पर गहरा दुख जताया और मेसी तथा फैंस से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि वह खुद कार्यक्रम में जा रही थीं, लेकिन कुप्रबंधन से स्तब्ध हूं। सीएम ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का ऐलान किया।

आईएमए पासिंग आउट परेड: थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने युवा अधिकारियों के साथ लगाए पुश-अप्स

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देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 13 दिसंबर 2025 को आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद एक ऐसा पल देखने को मिला, जो हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नव-कमीशंड युवा अधिकारियों के साथ जमीन पर उतरकर पुश-अप्स लगाए, जिसने पूरे माहौल को जोश और उत्साह से भर दिया।

परेड के बाद की पीपिंग सेरेमनी में युवा अफसरों ने अपना उत्साह दिखाते हुए पुश-अप्स शुरू किए। तभी सेना प्रमुख खुद आगे आए और उनके साथ शामिल हो गए। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने मात्र 12 सेकंड में 18 पुश-अप्स लगाए, जो उनकी शारीरिक फिटनेस और युवा जोश का बेहतरीन उदाहरण था। यह दृश्य न केवल कैडेट्स बल्कि मौजूद सभी लोगों के लिए अविस्मरणीय बन गया।

जनरल द्विवेदी का यह कदम भारतीय सेना के नेतृत्व की असली मिसाल पेश करता है – जहां नेता सिर्फ आदेश नहीं देते, बल्कि खुद आगे बढ़कर उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इससे उन्होंने यह संदेश दिया कि अनुशासन, शारीरिक दक्षता और टीम स्पिरिट हर रैंक के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। युवा अधिकारियों में यह पल आत्मविश्वास, समर्पण और बॉन्डिंग की भावना को और मजबूत करने वाला साबित हुआ।

आईएमए की 157वीं पासिंग आउट परेड में भारतीय सेना को मिले 491 युवा अधिकारी

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देहरादूनः देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) का ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर शनिवार को एक बार फिर सैन्य गौरव, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का साक्षी बना। अवसर था आईएमए की 157वीं पासिंग आउट परेड का, जहां वर्षों की कठोर ट्रेनिंग, त्याग और संकल्प के बाद अधिकारी कैडेट्स भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त कर राष्ट्रसेवा के पथ पर अग्रसर हुए।

इस भव्य समारोह में भारतीय थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने बतौर रिव्यूइंग ऑफिसर परेड की समीक्षा की। सधे कदमों से मार्च करते अधिकारी कैडेट्स, अनुशासित ड्रिल और गूंजते सैन्य बैंड ने पूरे वातावरण को गर्व और भावुकता से भर दिया।

491 युवा अधिकारी बने भारतीय सेना की नई ताकत

157वीं पासिंग आउट परेड के साथ कुल 525 अधिकारी कैडेट्स सेना में शामिल हुए। इनमें से 491 युवा सैन्य अधिकारी भारतीय थल सेना को मिले, जो देश की सीमाओं की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही 14 मित्र देशों के 34 कैडेट्स भी अपने-अपने देशों की सेनाओं में कमीशन प्राप्त कर अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग की मजबूत मिसाल बने।

निष्कल द्विवेदी को मिला स्वॉर्ड ऑफ ऑनर

परेड के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन और सर्वांगीण प्रतिभा के लिए अधिकारी कैडेट निष्कल द्विवेदी को प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। यह सम्मान अकादमी के सर्वश्रेष्ठ कैडेट को दिया जाता है और इसे सैन्य प्रशिक्षण की सर्वोच्च उपलब्धियों में माना जाता है।

पीपिंग और ओथ सेरेमनी में ली राष्ट्रसेवा की शपथ

पीपिंग और ओथ सेरेमनी के दौरान कैडेट्स ने भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं का निर्वहन करने और राष्ट्र की सेवा करने की शपथ ली। यह क्षण न केवल कैडेट्स के लिए, बल्कि उनके परिजनों के लिए भी गर्व और भावुकता से भरा रहा।

‘सेना में कमीशन एक जिम्मेदारी भरे जीवन की शुरुआत’

समारोह को संबोधित करते हुए थलसेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि सेना में कमीशन मिलना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भरे जीवन की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि सैन्य सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि ऐसा दायित्व है जो सर्वोच्च त्याग और अनुशासन की अपेक्षा करता है।

उन्होंने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि अकादमी से पास आउट होने के बाद हर कदम पर कोई मार्गदर्शक साथ नहीं होगा, लेकिन तब एक अधिकारी के कंधों पर कहीं अधिक बड़ी जिम्मेदारी होगी। एक अधिकारी के निर्णय, आचरण और नेतृत्व क्षमता अधीनस्थों के साथ-साथ पूरे समाज के लिए उदाहरण बनते हैं।

रोल मॉडल बनने की जिम्मेदारी

जनरल द्विवेदी ने कहा कि देश और समाज एक सैन्य अधिकारी को रोल मॉडल के रूप में देखता है। ऐसे में हर अधिकारी के आचरण में मूल्य, कर्तव्य और राष्ट्र के प्रति निष्ठा स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने नव-नियुक्त अधिकारियों से सेवा, समर्पण और नेतृत्व के मूल्यों को जीवन भर अपनाए रखने का आह्वान किया।

परिजनों की आंखों में गर्व और भावुकता

परेड के दौरान स्टैंड्स में मौजूद कैडेट्स के परिजनों की आंखों में गर्व और भावनाएं साफ झलक रही थीं। वर्षों की कठिन ट्रेनिंग और संघर्ष के बाद जब उनके बेटे और बेटियां अधिकारी बनकर परेड मैदान से गुजरे, तो यह पल उनके लिए जीवनभर की स्मृति बन गया।

नेतृत्व निर्माण की जीवंत मिसाल

आईएमए की 157वीं पासिंग आउट परेड ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि भारतीय सैन्य अकादमी केवल सैन्य प्रशिक्षण का संस्थान नहीं, बल्कि ऐसा केंद्र है जहां अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के मूल्यों के साथ भविष्य के सेनानी तैयार किए जाते हैं। 491 नए अधिकारियों के जुड़ने से भारतीय सेना की शक्ति और प्रतिबद्धता को नई ऊर्जा मिली।

भारतीय सेना अधिकारियों की देहरादून में पासिंग आउट परेड हुई संपन्न

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थल सेना प्रमुख, जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने भारतीय सैन्य अकादमी में 157वीं पासिंग आउट परेड की समीक्षा की

देहरादून: 13 दिसंबर । स्थित भारतीय सैन्य अकादमीGallery 20251213 142827 (आईएमए) के ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर में आज 157वीं पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन किया गया। गौरव, परंपरा और सैन्य गरिमा से परिपूर्ण इस अवसर पर अधिकारी कैडेट्स को भारतीय सेना में कमीशन प्रदान किया गया। यह समारोह अकादमी के आदर्श वाक्य “वीरता और विवेक” तथा कैडेट्स के कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और अदम्य साहस का सशक्त प्रतीक रहा।

थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने परेड की समीक्षा की और नव-नियुक्त अधिकारियों को प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर बधाई दी। उन्होंने युवा अधिकारियों के उच्च स्तर के अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सहनशक्ति की प्रशंसा करते हुए उन्हें भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं का निर्वहन करने तथा निष्ठा, प्रतिबद्धता और सम्मान के साथ राष्ट्र सेवा करने का आह्वान किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सेना में कमीशन प्राप्त करना केवल प्रशिक्षण की समाप्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति आजीवन कर्तव्य और निस्वार्थ सेवा की शुरुआत है।

157वें रेगुलर कोर्स, 46वें टेक्निकल एंट्री स्कीम, 140वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स, 55वें स्पेशल कमीशंड ऑफिसर्स कोर्स और टेरिटोरियल आर्मी ऑनलाइन एंट्रेंस एग्ज़ाम 2023 कोर्स के कुल 525 अधिकारी कैडेट्स के साथ-साथ 14 मित्र राष्ट्रों के 34 विदेशी अधिकारी कैडेट्स को कमीशन प्रदान किया गया। यह कमीशनिंग न केवल भारत के रक्षा नेतृत्व को सुदृढ़ करती है, बल्कि मित्र देशों के साथ दीर्घकालिक सैन्य सहयोग को भी सशक्त बनाती है।

इस गरिमामय समारोह के साक्षी गर्वित अभिभावक, परिजन, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी तथा अनेक विशिष्ट अतिथि बने। परेड का समापन पारंपरिक ‘अंतिम पग’ के साथ हुआ, जब युवा अधिकारी राष्ट्र की संप्रभुता, सम्मान और मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ आगे बढ़े।

प्रमुख पुरस्कार:

स्वॉर्ड ऑफ ऑनर एवं स्वर्ण पदक (मेरिट में प्रथम) एसीए निश्कल द्विवेदी को प्रदान किया गया। रजत पदक (द्वितीय स्थान) बीयूओ बादल यादव तथा कांस्य पदक (तृतीय स्थान) एसयूओ कमलजीत सिंह को मिला। टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स में मेरिट में प्रथम स्थान के लिए ऑफिसर कैडेट जाधव सुजीत संपत और टेक्निकल एंट्री स्कीम–46 में प्रथम स्थान के लिए डब्ल्यूसीसी अभिनव मेहरोत्रा को रजत पदक प्रदान किया गया। स्पेशल कमीशन ऑफिसर कोर्स का रजत पदक ऑफिसर कैडेट सुनील कुमार छेत्री को दिया गया। विदेशी कैडेट्स में मेरिट में प्रथम स्थान का पदक बांग्लादेश के जेयूओ मोहम्मद सफ़ीन अशरफ को मिला। ऑटम टर्म 2025 में समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए इम्फाल कंपनी को थल सेना प्रमुख बैनर प्रदान किया गया।

157वें कोर्स के साथ भारतीय सैन्य अकादमी ने एक बार फिर राष्ट्र के लिए साहस, पेशेवर दक्षता और अटूट समर्पण से नेतृत्व करने वाले अधिकारियों के निर्माण की अपनी गौरवशाली परंपरा को सुदृढ़ किया है।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में व्यय वित्त समिति की बैठक, विभिन्न विभागों के प्रस्तावों की संस्तुति

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मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में व्यय वित्त समिति की बैठक हुई, जिसमें विभिन्न विभागों के प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें संस्तुति प्रदान की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि परियोजना प्रस्तावों की मंजूरी से लेकर कार्य पूरा होने तक हर चरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विभाग अपनी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करें, ताकि सभी कार्य निर्धारित समय में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे हो सकें। विशेष रूप से नंदा राजजात यात्रा से जुड़े सभी कार्यों को यात्रा शुरू होने से पहले अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए गए।

समिति ने प्रमुख रूप से निम्नलिखित प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की:

  • पेयजल विभाग की लोहाघाट टाउन पंपिंग पेयजल योजना (कुल लागत ₹84.45 करोड़)।
  • रामनगर (नैनीताल) में मल्टीस्टोरी पार्किंग निर्माण (कुल लागत ₹38.58 करोड़)।
  • लोक निर्माण विभाग के नंदप्रयाग-घाट-सुतोल-कनोल मोटर मार्ग का सुदृढ़ीकरण एवं डामरीकरण (लागत ₹12.89 करोड़)।
  • टनकपुर (चंपावत) में मीडिया सेंटर, गेस्ट हाउस एवं कम्युनिटी हॉल निर्माण (कुल लागत ₹14.25 करोड़)।
  • पीएसी बटालियन रुद्रपुर के लिए आरटीसी एवं 188 बेडेड बैरक निर्माण (कुल लागत ₹19.92 करोड़)।
  • देहरादून में साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण (कुल लागत ₹30.35 करोड़)।

इसके अलावा, AMRUT 2.0 योजना के अंतर्गत विभिन्न स्थानीय निकायों में पेयजल परियोजनाओं, पार्क विकास तथा जलाशयों के कायाकल्प संबंधी प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। मुख्य सचिव ने पार्कों और जलाशयों के सौंदर्यीकरण एवं पुनरुद्धार कार्यों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

बैठक में सचिव शैलेश बगौली, श्रीधर बाबू अद्दांकी, विनोद कुमार सुमन, एस.एन. पाण्डेय, युगल किशोर पंत तथा अपर सचिव विनीत कुमार, निवेदिता कुकरेती, विम्मी सचदेव सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

राजमार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर फैले कूड़े को लेकर जिलाधिकारी की सख्ती, संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी

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देहरादून: राष्ट्रीय राजमार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर फैले कूड़े-कचरे की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने कड़ी कार्रवाई की है। संबंधित विभागीय अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 152 (पूर्व में सीआरपीसी धारा 133) के तहत आपराधिक नोटिस जारी किए गए हैं। अनुपालन न होने पर स्वत: आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा, जिसमें 6 महीने तक की कैद का प्रावधान है।

रिस्पना पुल से लच्छीवाला, भानियावाला टोल प्लाजा, एयरपोर्ट रोड तथा लालतप्पड़ क्षेत्र तक हरिद्वार बाइपास रोड के दोनों ओर बड़ी मात्रा में कूड़ा-करकट पाए जाने पर परियोजना निदेशक एनएचएआई, प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून तथा अधिशासी अभियंता एनएच खंड डोईवाला को नोटिस जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों को 7 दिनों के अंदर पूरी गंदगी हटाने और स्थायी स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, 19 दिसंबर 2025 को एसडीएम न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। अनुपस्थिति या अनुपालन न होने पर एकपक्षीय आदेश पारित किया जाएगा और आगे कार्रवाई होगी।

इसी तरह, रायवाला अंडरपास, ग्राम प्रतीतनगर, पुराना रायवाला रेलवे स्टेशन तथा नेशनल हाईवे सर्विस रोड के किनारे फैले कूड़े पर प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई, सहायक वन संरक्षक, अधिशासी अभियंता लोनिवि ऋषिकेश, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत तथा रेलवे अधीक्षक रायवाला को नोटिस जारी हुए हैं। इन स्थानों पर प्लास्टिक बोतलें, पॉलीथीन, खाद्य पैकेट आदि का ढेर लगा होने से पर्यावरण प्रदूषण, भूमिगत जल संदूषण, संक्रामक रोगों का खतरा और वन्यजीवों (बंदर एवं हाथी) की आवाजाही से जनसुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

तहसील डोईवाला और ऋषिकेश की टीमों ने स्थलीय निरीक्षण में इन तथ्यों की पुष्टि की। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को 19-20 दिसंबर 2025 तक न्यायालय में अनुपालन रिपोर्ट और फोटोग्राफ सहित पक्ष प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा नियमित निरीक्षण जारी रहेगा।

उत्तराखंड पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल, 15 IPS अधिकारियों के ट्रांसफर

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उत्तराखंड शासन ने पुलिस विभाग में व्यापक स्तर पर बदलाव करते हुए 15 भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के दायित्वों में फेरबदल किया है। पुष्कर सिंह धामी सरकार के इस फैसले से राज्य के पुलिस महकमे में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। तबादला आदेश में उच्च पदस्थ अधिकारियों समेत कई वरिष्ठ IPS शामिल हैं, जिनमें 6 आईजी रैंक, एक डीआईजी रैंक और तीन पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी शामिल हैं।

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उत्तराखंड में तेजी से गिर रहा तापमान, अगले कुछ दिन ऐसा रहेगा मौसम

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देहरादून। उत्तराखंड में सर्दी का असर बढ़ रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि अगले 2-3 दिनों में न्यूनतम तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज होगी, जिससे ठंड और कड़ाके की मार झेलनी पड़ेगी। साथ ही, 14-15 दिसंबर को उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश या बर्फबारी होने की संभावना है। बर्फबारी खासतौर पर 3,500 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर हो सकती है, जो यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

बर्फबारी का खतरा: ऊंचाई वाले इलाकों में सतर्क रहें

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 14 दिसंबर को उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी संभव है। इससे सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाएगा। केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री जैसे तीर्थस्थलों के आसपास रहने वाले या घूमने वालों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। विभाग ने सलाह दी है कि बिना तैयारी के ऊंचाई वाले इलाकों में न जाएं, क्योंकि ठंड और बर्फ से हाइपोथर्मिया जैसी जानलेवा स्थिति हो सकती है।

कोहरा और ठंड की लहर: सप्ताह भर बरकरार

सप्ताह के दौरान राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की घाटियों में कहीं-कहीं हल्के से मध्यम कोहरा छाए रहने की संभावना है। सुबह-शाम समय दृश्यता कम हो सकती है, जिससे वाहन चालकों को परेशानी हो सकती है। मैदानी इलाकों (देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर) में भी हल्का कोहरा देखा जा सकता है। न्यूनतम तापमान में गिरावट से 10-12 दिसंबर के आसपास ठंड की लहर तेज हो सकती है, जहां रात का तापमान 5-7 डिग्री तक गिर सकता है।

जिला-वार पूर्वानुमान (12-17 दिसंबर)

जिला 12-13 दिसंबर 14-15 दिसंबर न्यूनतम तापमान (अनुमानित)
उत्तरकाशी शुष्क, ठंडा हल्की बारिश/बर्फबारी संभव 2-5°C
चमोली शुष्क, कोहरा संभव हल्की बारिश/बर्फबारी संभव 1-4°C
पिथौरागढ़ शुष्क, ठंडा हल्की बारिश/बर्फबारी संभव 3-6°C
देहरादून शुष्क, हल्का कोहरा शुष्क 8-10°C
नैनीताल शुष्क, ठंडी हवा शुष्क 4-7°C

विशेषज्ञ सलाह: सतर्क रहें, बचाव के उपाय अपनाएं

  • यात्रियों के लिए: ऊंचाई वाले रास्तों पर गर्म कपड़े, चेन और इमरजेंसी किट साथ रखें। कोहरे में धीमी गति से ड्राइव करें।
  • स्थानीय लोगों के लिए: ठंड से बचाव के लिए घरों में गर्माहट बनाए रखें, बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
  • कृषि प्रभाव: बर्फबारी से फसलें प्रभावित हो सकती हैं, किसानों को सतर्क रहने की सलाह।

मौसम विभाग ने कहा कि वर्तमान में कोई ऑरेंज या रेड अलर्ट नहीं है, लेकिन स्थिति तेजी से बदल सकती है। अधिक जानकारी के लिए IMD की वेबसाइट (mausam.imd.gov.in) चेक करें। सर्दी के इस मौसम में सावधानी ही सुरक्षा है।

उत्तराखंड के ‘गांधी’ इंद्रमणि बडोनी की 100वीं जयंती पर बन रही डॉक्यूमेंट्री

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मसूरी। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के जननायक और ‘पहाड़ के गांधी’ कहे जाने वाले इंद्रमणि बडोनी की 100वीं जयंती (24 दिसंबर 2025) के अवसर पर बनाई जा रही विशेष डॉक्यूमेंट्री ‘उत्तराखंड के जननायक इन्द्रमणि बडोनी’ का गुरुवार को मसूरी के ऐतिहासिक शहीद स्थल पर फिल्मांकन हुआ। इस दौरान प्रसिद्ध गढ़वाली लोकगीत ‘कु होलु’ सहित कई महत्वपूर्ण दृश्य कैमरे में कैद किए गए।

फिल्म का मुहूर्त शॉट पूर्व मसूरी पालिका अध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल और सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश ढौंडियाल ने क्लैप देकर किया। डॉक्यूमेंट्री आगामी मसूरी विंटर लाइन कार्निवाल में प्रदर्शित की जाएगी और 24 दिसंबर को बडोनी की जन्म शताब्दी पर इसका भव्य प्रीमियर प्रस्तावित है।

“नई पीढ़ी तक पहुंचाना चाहते हैं बडोनी का संघर्ष”

फिल्म के निर्देशक प्रदीप भंडारी ने बताया, “इंद्रमणि बडोनी उत्तराखंड राज्य के सच्चे जननायक थे। आज कई बच्चे-युवा नहीं जानते कि राज्य बनने में उनका कितना बड़ा योगदान था। हमारी डॉक्यूमेंट्री उनके जीवन संघर्ष, गांधीवादी विचारधारा और अलग राज्य आंदोलन में भूमिका को सामने लाएगी।”

उन्होंने शिक्षा विभाग पर भी सवाल उठाया कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में बडोनी या अन्य राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को शामिल नहीं किया गया है। प्रदीप भंडारी इससे पहले गढ़वाली संस्कृति पर आधारित चर्चित फिल्म ‘पितृ कूड़ा’ बना चुके हैं।

क्यों चुना गया ‘कु होलु’ गीत?

निर्देशक ने बताया कि पुराने समय में पहाड़ों में मीडिया नहीं था। जनसंदेश का काम घड़िया और लोकगीत ही करते थे। ‘कु होलु’ गीत में बडोनी के जीवन और संघर्ष की झलक मिलती है, इसलिए इसे फिल्म का मुख्य हिस्सा बनाया गया है।

कौन थे इंद्रमणि बडोनी?

  • जन्म: 24 दिसंबर 1925, अखोड़ी (तत्कालीन टिहरी रियासत)
  • गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित, अमेरिकी अखबार ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने उन्हें ‘माउंटेन गांधी’ की उपाधि दी
  • 1967, 1969 और 1977 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए
  • 1977 में जनता पार्टी की लहर में भी निर्दलीय जीतकर कांग्रेस-जनता पार्टी उम्मीदवारों की जमानत जब्त कराई
  • उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सबसे बड़े जननेता, हालांकि राज्य बनता देखने से पहले 1999 में निधन हो गया

शहीद स्थल पर फिल्मांकन के दौरान मौजूद लोगों में बडोनी के परिजन, उत्तराखंड आंदोलनकारी और स्थानीय नागरिक शामिल थे। सभी ने इसे बडोनी को सच्ची श्रद्धांजलि बताया। निर्देशक प्रदीप भंडारी का कहना है, “हम चाहते हैं कि उत्तराखंड का बच्चा-बच्चा इंद्रमणि बडोनी को जाने, उनके संघर्ष से प्रेरणा ले और अपनी संस्कृति-इतिहास से जुड़े।”