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दुःखद खबर : दिल का दौरा पड़ने से दिग्गज निशानेबाज और कोच जशपाल राणा का निधन

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देहरादून/दिल्ली: भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। एशियाई खेलों के पदक विजेता, द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच और पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज जशपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

जानकारी के अनुसार, हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप में भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन के बाद स्वदेश लौटते समय उड़ान के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें तत्काल दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच के बाद हृदय में ब्लॉकेज पाए जाने पर स्टेंट डाला गया। उपचार के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

जशपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों में गिने जाते थे। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने देश को कई अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाए, वहीं कोच के रूप में भारतीय पिस्टल निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

फरवरी 2025 में राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उनके मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने म्यूनिख विश्व कप में दो स्वर्ण और दो रजत पदक सहित कुल चार पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया।

जशपाल राणा ने सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे कई प्रतिभाशाली निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। भारतीय स्टार शूटर मनु भाकर की सफलता में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके प्रशिक्षण और मार्गदर्शन में मनु भाकर ने 2024 पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था।

खेल और खिलाड़ियों के विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। उनके निधन से भारतीय खेल जगत में शोक की लहर है।

नीति आयोग की बैठक में विकसित भारत विकसित उत्तराखंड पर मंथन

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IMG 20260611 WA0066नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने प्रस्तुत किया उत्तराखंड के विकास का रोडमैप

हिमालयी राज्यों के लिए जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी संरक्षण और आपदा प्रबंधन पर विशेष नीति समर्थन की पैरवी

दिल्ली/ देहरादून: 11 जून।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की बैठक में राज्य के विकास का रोड मैप प्रस्तुत किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने हिमालयी राज्यों के लिए जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी संरक्षण और आपदा प्रबंधन से जुड़े विषयों पर विशेष नीति समर्थन और दीर्घकालिक वित्तीय व्यवस्था पर भी जोर दिया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प का आधार हमारी मानव पूंजी है। इसी सोच के अनुरूप उत्तराखंड सरकार मानव संसाधन विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और युवा सशक्तिकरण पर विशेष बल दे रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने प्रारंभिक बाल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक अनेक सुधार किए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए अपार संभावनाएं हैं। इसी उद्देश्य से प्रदेश में देवभूमि उद्यमिता विकास योजना, स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा आईटीआई संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने जैसी पहल लागू की गई हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती, बागवानी, औषधीय पौधों, योग एवं वेलनेस, पर्यटन और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों को भविष्य के विकास इंजन के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। साथ ही उत्तराखंड को नॉलेज बेस्ड इकोनॉमी, वेलनेस इकोनॉमी तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री सहित नीति आयोग के सभी सदस्यों को उत्तराखंड में अगले वर्ष आयोजित होने वाले कुम्भ मेला और नन्दा राजजात यात्रा का निमंत्रण दिया।

चमोली में दर्दनाक सड़क हादसा, घेस मार्ग पर टैक्सी खाई में गिरी, चार की मौत, तीन गंभीर

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चमोली। जनपद चमोली के देवाल विकासखंड अंतर्गत घेस मोटर मार्ग पर गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। सात यात्रियों को लेकर जा रही एक टैक्सी अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, टैक्सी घेस मार्ग पर एक खतरनाक मोड़ से गुजर रही थी, तभी चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद वाहन सैकड़ों मीटर गहरी खाई में जा गिरा। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को खाई से निकालकर उपचार के लिए देवाल अस्पताल भेजा गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।

सूचना पर प्रशासन, पुलिस एवं राहत-बचाव दल भी घटनास्थल पर पहुंच गए। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

इस हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों ने मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

उत्तराखंड में 11 और 12 जून को मौसम का ऑरेंज अलर्ट, कई जिलों में ओलावृष्टि और तेज हवाओं की चेतावनी

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देहरादून। उत्तराखंड में आगामी दिनों के दौरान मौसम का मिजाज बिगड़ा रहने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 11 और 12 जून के लिए राज्य के कई जनपदों में गर्जन, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि, भारी वर्षा तथा तेज हवाओं को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार 11 जून को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, ऊधम सिंह नगर और चम्पावत जनपदों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने, ओलावृष्टि होने, वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर चलने तथा 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। राज्य के शेष जनपदों में भी गर्जन, बिजली चमकने, तेज बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

12 जून को भी देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर तथा चम्पावत जिलों में इसी प्रकार का मौसम बने रहने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में ओलावृष्टि, तेज से अति तेज वर्षा और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। अन्य जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाओं के साथ गर्जन और वर्षा की संभावना बनी हुई है।

वहीं 13 और 14 जून को राज्य के पर्वतीय जनपदों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है।

मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी, विज्ञान आधारित विकास को मिलेगा नया आधार

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देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग ने उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी कर दी है। नई नीति का उद्देश्य राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित विकास को गति देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और उत्तराखंड को विज्ञान, तकनीक तथा सूचना प्रौद्योगिकी के अग्रणी केंद्र के रूप में विकसित करना है।

नीति में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देते हुए स्थानीय समस्याओं और चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान एवं तकनीक के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संतुलन के साथ सतत विकास सुनिश्चित करना है।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक सलाहकार निकाय का गठन किया जाएगा, जो इसके कार्यान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभालेगा। साथ ही अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विकेंद्रीकृत संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाएगी।

स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान
नई नीति के तहत राज्य की भौगोलिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे। पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार शिक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा तथा विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

एआई, ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों को बढ़ावा
नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, ड्रोन, संवर्धित वास्तविकता (AR), आभासी वास्तविकता (VR) और मिश्रित वास्तविकता (MR) जैसी उभरती तकनीकों को विशेष महत्व दिया गया है। इसके अलावा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक, खाद्य-जल-ऊर्जा सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

विज्ञान नगरी, तारामंडल और एआई लैब स्थापित होंगी
राज्य में विज्ञान संचार और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान नगरी, विज्ञान केंद्र, तारामंडल, अटल टिंकरिंग लैब, एआई प्रयोगशालाएं, खगोल अवलोकन संघ तथा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। शिक्षकों के कौशल विकास के लिए अत्याधुनिक शिक्षण-अधिगम केंद्र भी विकसित किए जाएंगे।

वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों के लिए विशेष मंच
नीति के तहत जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाएं, संयुक्त शोध परियोजनाएं, फेलोशिप और छात्रवृत्ति कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके साथ ही राज्य के वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक विशेष सहभागिता पोर्टल भी विकसित किया जाएगा।

बनेगी विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार वेधशाला
राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार वेधशाला की स्थापना की जाएगी, जो योजनाओं, कार्यक्रमों, अनुदानों और प्रोत्साहनों से संबंधित जानकारी का केंद्रीकृत डिजिटल भंडार होगी। शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे तथा नवप्रवर्तकों को पेटेंट, कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान की जाएगी।

आपदा और जलवायु चुनौतियों के समाधान पर फोकस
उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि उत्तराखंड वर्तमान में प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। नई नीति विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों, शोध संस्थाओं, शिक्षाविदों, उद्योगों और नवप्रवर्तकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर इन चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि नीति महिलाओं, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों, सीमांत समुदायों और दिव्यांगजनों की विज्ञान एवं नवाचार क्षेत्र में समान और समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 राज्य को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विज्ञान और तकनीक को आम जनजीवन, सुशासन, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन से जोड़ना है। यह नीति युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को एक साझा मंच प्रदान करेगी तथा आत्मनिर्भर और विकसित उत्तराखंड के निर्माण को नई गति देगी।
यह संस्करण समाचार पत्र/वेब पोर्टल प्रकाशन के लिए तैयार किया गया है।

मसूरी में बड़ा सड़क हादसा : गहरी खाई में गिरी कार, चार लोग बताएं जा रहे सवार

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मसूरी। पर्यटन नगरी मसूरी में बुधवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। झड़ीपानी शॉर्टकट मार्ग पर एक कार अनियंत्रित होकर सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के समय वाहन में चार लोगों के सवार होने की जानकारी सामने आ रही है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ और 108 एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दुर्घटनास्थल दुर्गम और घनी झाड़ियों से घिरा होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन के अनुसार कार खाई में काफी नीचे जा गिरी है, जिसके चलते रेस्क्यू टीमों को वाहन तक पहुंचने के लिए चुनौतीपूर्ण अभियान चलाना पड़ रहा है। एसडीआरएफ के जवान रस्सियों और विशेष उपकरणों की मदद से खाई में उतरकर बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

हादसे के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कार में चार लोग सवार थे, हालांकि उनकी पहचान और स्थिति के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

मसूरी-कोलूखेत मार्ग से जुड़े झड़ीपानी क्षेत्र में हुए इस हादसे के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। पुलिस और राहत एजेंसियां प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

फिलहाल रेस्क्यू अभियान जारी है और प्रशासन की ओर से लोगों से दुर्घटनास्थल के आसपास भीड़ न लगाने की अपील की गई है। हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है।

उत्तराखंड: जब संपत्ति का ब्योरा वेबसाइट पर डालना अनिवार्य है तो RTI में क्यों नहीं? सूचना आयोग के फैसले पर उठे सवाल

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देहरादून। राज्य सूचना आयोग के एक हालिया फैसले ने पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आयोग ने एक मामले में सरकारी अधिकारी की संपत्ति का ब्योरा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत देने से इनकार करने के विभागीय फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने से अधिकारी और उसके परिवार की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

आयोग ने यह भी माना कि संपत्ति का विवरण अधिकारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) का हिस्सा है।
हालांकि, इस फैसले के बाद कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि राज्य सरकार के 26 मार्च 2012 के शासनादेश के तहत सभी लोक अधिकारियों को अपनी संपत्तियों का विवरण हर वर्ष विभागीय वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य है, तो वही जानकारी RTI के माध्यम से मांगने पर गोपनीय कैसे हो सकती है?

पारदर्शिता बनाम गोपनीयता की बहस
मामला देहरादून निवासी विनय जायसवाल द्वारा सिंचाई विभाग के एक अधिकारी की संपत्ति का ब्योरा मांगे जाने से जुड़ा है। लोक सूचना अधिकारी ने सुरक्षा और निजता का हवाला देकर सूचना देने से इनकार कर दिया था। बाद में राज्य सूचना आयोग ने भी इस तर्क को स्वीकार कर लिया।

लेकिन, सूचना के अधिकार के जानकारों का मानना है कि जो जानकारी पहले से ही “स्व-प्रकटन” (Suo Moto Disclosure) की श्रेणी में आती है, उसे गोपनीय बताना RTI कानून की मूल भावना के विपरीत है। उनका कहना है कि सरकारी अधिकारियों की संपत्ति का सार्वजनिक खुलासा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

शासनादेश और फैसले में विरोधाभास?
सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि शासनादेश के अनुसार संपत्ति विवरण विभागीय वेबसाइटों पर प्रकाशित किया जाना अनिवार्य है, तो क्या संबंधित विभाग इस नियम का पालन कर रहे हैं? और यदि पालन नहीं हो रहा है, तो क्या सूचना आयोग को पहले इस पहलू की जांच नहीं करनी चाहिए थी?

आलोचकों का कहना है कि एक तरफ सरकार अधिकारियों की संपत्ति को सार्वजनिक करने का नियम बनाती है, वहीं दूसरी तरफ उसी जानकारी को RTI के तहत देने से इनकार किया जाता है। इससे व्यवस्था में विरोधाभास दिखाई देता है।

क्या सुरक्षा का तर्क पर्याप्त है?
आयोग ने अपने निर्णय में अधिकारी और उसके परिवार की सुरक्षा को प्राथमिक आधार माना है। लेकिन सवाल यह है कि यदि संपत्ति का विवरण सार्वजनिक होने से सुरक्षा खतरे में पड़ती है, तो फिर उसे वेबसाइट पर प्रकाशित करने की व्यवस्था क्यों बनाई गई?

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा और निजता महत्वपूर्ण अधिकार हैं, लेकिन सार्वजनिक पद पर बैठे अधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखने से पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

बहस का विषय बना फैसला
राज्य सूचना आयोग का यह फैसला अब पारदर्शिता, निजता और जनहित के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता और पारदर्शिता के पक्षधर इसे RTI कानून की भावना के विपरीत बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे अधिकारियों की सुरक्षा के लिहाज से उचित ठहरा रहे हैं।
फिलहाल यह मामला एक बड़े प्रश्न के रूप में सामने है—जब कानून और शासनादेश संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करने की बात करते हैं, तो फिर वही जानकारी आम नागरिक को सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध क्यों नहीं कराई जा सकती?
यह संस्करण खबर के साथ-साथ फैसले पर उठ रहे तार्किक सवालों को भी सामने रखता है, जिससे यह एक मजबूत विश्लेषणात्मक समाचार बन जाता है।

UKSSSC की स्नातक स्तरीय पुनर्परीक्षा में सभी 1.54 लाख अभ्यर्थियों को मिलेगा मौका

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देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) ने स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा की पुनर्परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 14 जून को आयोजित होने वाली पुनर्परीक्षा में सभी 1.54 लाख पंजीकृत अभ्यर्थियों को शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। इसमें वे अभ्यर्थी भी शामिल हैं जो प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से पिछली परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे।

आयोग की ओर से 416 पदों के लिए यह महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा आयोजित की जा रही है। युवाओं और अभ्यर्थियों की मांग को देखते हुए आयोग ने सभी पंजीकृत उम्मीदवारों को पुनर्परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का निर्णय लिया है।

परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार हाईटेक निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। प्रदेशभर के 445 परीक्षा केंद्रों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी। प्रत्येक केंद्र पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे किसी भी प्रकार की नकल या अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

गौरतलब है कि पूर्व में आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा पेपर लीक प्रकरण के बाद निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद आयोग के सामने निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पुनर्परीक्षा आयोजित करने की बड़ी चुनौती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने आधुनिक तकनीक और कड़े सुरक्षा प्रबंधों के साथ परीक्षा संपन्न कराने की तैयारी की है।

आयोग का दावा है कि 14 जून को होने वाली परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण में आयोजित की जाएगी, ताकि अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल किया जा सके और भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष रूप से पूरा किया जा सके।

देश के 16 राज्यों तक पहुंचा मानसून, उत्तर भारत को 11 जून से राहत के आसार

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नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और अब तक देश के 16 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में दस्तक दे चुका है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 4 जून को केरल पहुंचने के बाद मानसून तेजी से आगे बढ़ा है और आगामी तीन-चार दिनों में इसके उत्तरी बंगाल तक पहुंचने की संभावना है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि 11 जून से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसके प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर-पश्चिम भारत, बिहार तथा पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

आईएमडी के मुताबिक मानसून फिलहाल केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा पूर्वोत्तर भारत के सभी सात राज्यों तक पहुंच चुका है। अगले तीन दिनों के दौरान इसके छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम तथा उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

पिछले 24 घंटों के दौरान असम, मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कई स्थानों पर 12 से 20 सेंटीमीटर तक वर्षा दर्ज की गई। वहीं कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के विभिन्न क्षेत्रों में 7 से 11 सेंटीमीटर तक बारिश हुई।

उत्तर भारत में जारी है गर्मी का प्रकोप

मानसून की प्रगति के बावजूद उत्तर भारत में फिलहाल भीषण गर्मी का दौर जारी है। राजस्थान का श्रीगंगानगर सोमवार को देश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हरियाणा के रोहतक में पारा 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ में 44.8 और वाराणसी में 43.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। पंजाब के पटियाला में 42.6 डिग्री और झारखंड के डाल्टनगंज में 43.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

मौसम विभाग का कहना है कि 11 जून के बाद उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे तापमान में गिरावट आने और गर्मी से राहत मिलने की संभावना है।

उत्तराखंड : आयुर्वेदिक चिकित्सकों का सांकेतिक विरोध, काली पट्टी बांधकर जताया रोष

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उत्तरकाशी। प्रदेशभर के साथ ही जनपद उत्तरकाशी में सरकारी आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सकों ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों के समर्थन में कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। चिकित्सकों ने नियमित रूप से मरीजों का उपचार जारी रखते हुए सरकार और विभागीय अधिकारियों तक अपनी समस्याएं पहुंचाने का प्रयास किया।

राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ शाखा उत्तरकाशी की ओर से आयोजित ऑनलाइन बैठक में चिकित्सकों ने विभागीय नीतियों और लंबित मांगों को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त किया। बैठक में निदेशालय द्वारा 30 मई 2026 को जारी उस आदेश पर भी नाराजगी जताई गई, जिसमें जून माह से वेतन आहरण को बायोमेट्रिक एवं मोबाइल एप आधारित उपस्थिति प्रणाली से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

चिकित्सकों ने कहा कि विभाग में कई महत्वपूर्ण मुद्दे वर्षों से लंबित पड़े हैं। इनमें आयुर्वेदिक संवर्ग के लिए निदेशक पद पर नियुक्ति न होना, डीएसीपी एवं एसीपी संबंधी मांगों का समाधान न होना, वर्ष 2024 बैच के चिकित्साधिकारियों का स्थायीकरण लंबित रहना, चिकित्सालयों में निम्न गुणवत्ता की औषधियों की आपूर्ति, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत चिकित्सकों से एक ही प्रकार की सूचनाएं बार-बार ऑनलाइन मांगे जाना तथा प्रशिक्षण मद में कई वर्षों से टीए/डीए बिलों का भुगतान न होना प्रमुख हैं।

इसके अतिरिक्त चिकित्सकों ने आउटरिच कैंप संचालन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध न कराने और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत चिकित्साधिकारियों को सीएचओ जैसे पदनाम दिए जाने पर भी आपत्ति जताई।

चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना महामारी से लेकर चारधाम यात्रा तक हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन उनकी जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

बैठक में जिला उत्तरकाशी के सभी चिकित्साधिकारियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि मांगों के समाधान तक वे प्रदेशव्यापी सामूहिक एवं चरणबद्ध आंदोलनात्मक कार्यक्रमों में राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ उत्तराखंड का पूर्ण समर्थन करेंगे।

हालांकि विरोध प्रदर्शन के दौरान जिले के सभी आयुर्वेदिक चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। चिकित्सकों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।