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नैनीताल–ऊधमसिंहनगर की योजनाओं की समीक्षा, मुख्यमंत्री धामी ने दिए सख्त निर्देश

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देहरादून: पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में नैनीताल और ऊधमसिंहनगर जनपद की विभिन्न विधानसभाओं से जुड़ी मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए उनका त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाते हैं, इसलिए उन पर गंभीरता से कार्यवाही करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने अल्पकालिक कार्यों को शीघ्र पूरा करने और दीर्घकालिक योजनाओं को तय समयसीमा में चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि बहु-विभागीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विभागों के बीच समन्वय मजबूत किया जाए और इनकी नियमित समीक्षा की जाए, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो।

उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया, जिससे समस्याओं की सही जानकारी मिल सके और उनके समाधान में तेजी आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर तालमेल से विकास कार्यों की गुणवत्ता और गति दोनों सुनिश्चित होंगी।

आगामी वर्षाकाल को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बरसाती नालों की समय से सफाई, सिल्ट हटाने और जल निकासी के प्रबंध पूरे करने के निर्देश दिए, ताकि जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से निपटा जा सके। इसके साथ ही ग्रीष्मकाल में संभावित वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए विभागों के बीच समन्वय और जनजागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने पेयजल और बिजली आपूर्ति को लेकर भी अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित की जाएं, जिससे जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बैठक में विधायकगणों ने अपने क्षेत्रों की विभिन्न समस्याएं रखीं, जिनमें सड़क निर्माण व मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, मिनी खेल मैदानों का निर्माण, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा, बाढ़ सुरक्षा और जलभराव जैसे मुद्दे शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने सभी समस्याओं के समयबद्ध और प्रभावी समाधान के निर्देश देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

हाई कोर्ट का RBI को आदेश: जब्त की गई ₹14.15 लाख की पुरानी करेंसी बदलें

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चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को निर्देश दिया है कि वह एक याचिकाकर्ता की 14.15 लाख रुपये की पुरानी करेंसी (विमुद्रित नोट) को चार सप्ताह के भीतर वैध नए नोटों में बदले। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकारी एजेंसियां किसी राशि की वैधता की पुष्टि कर देती हैं, तो उसे केवल “पुरानी करेंसी” होने के आधार पर रद्दी नहीं माना जा सकता।

मुख्य बिंदु और कोर्ट की टिप्पणी

  • वैधता सर्वोपरि: जस्टिस विकास बहल की पीठ ने कहा कि जब जांच एजेंसियों और आयकर विभाग ने जांच के बाद राशि को वैध (Legitimate) मानकर याचिकाकर्ता को लौटा दिया है, तो RBI इसे बदलने से इनकार नहीं कर सकता।

  • अधिकारों का संरक्षण: कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को उनकी वैध संपत्ति से केवल तकनीकी आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब देरी का कारण अदालती कार्यवाही या जब्ती रही हो।

  • समय सीमा: कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने और नई करेंसी जारी करने के लिए RBI को 4 सप्ताह का समय दिया है।

मामला क्या था?

यह मामला एक व्यक्ति से जुड़ी नकदी की जब्ती का था। नोटबंदी (2016) के दौरान या उससे पहले पुलिस या अन्य एजेंसियों द्वारा यह राशि जब्त की गई थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद जब ट्रायल कोर्ट या जांच एजेंसियों ने उस पैसे को “क्लीन चिट” दी और याचिकाकर्ता को वापस लौटाया, तब तक पुराने नोट (500 और 1000 रुपये) चलन से बाहर हो चुके थे।

जब याचिकाकर्ता ने इसे बदलने के लिए RBI का दरवाजा खटखटाया, तो नियमों का हवाला देकर इसे बदलने से मना कर दिया गया था, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुँचा।

इस फैसले का महत्व

यह फैसला उन सभी लंबित मामलों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा जहाँ लोगों की नकदी पुलिस केस या अदालती जब्ती के कारण नोटबंदी की समय-सीमा के भीतर नहीं बदली जा सकी थी।

पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से राहत, असम केस में एक हफ्ते की अग्रिम जमानत

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हैदराबाद: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ असम में दर्ज मामले में उन्हें एक सप्ताह की अग्रिम जमानत प्रदान की है। साथ ही निर्देश दिया है कि वे एक हफ्ते के भीतर संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन करें।

क्या है मामला

यह पूरा विवाद उस बयान से जुड़ा है, जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर एक से अधिक पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था। इस पर मुख्यमंत्री की पत्नी की शिकायत के आधार पर गुवाहाटी में खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

अदालत में क्या हुआ

खेड़ा ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पक्ष रखते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।

वहीं असम सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि मामला राजनीतिक नहीं है और यह याचिका तेलंगाना हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।

किन धाराओं में दर्ज है केस

गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिनमें झूठा बयान देने, धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराएं शामिल हैं।

आगे की कार्रवाई

अदालत से मिली अंतरिम राहत के बाद अब पवन खेड़ा को एक सप्ताह के भीतर संबंधित कोर्ट में नियमित जमानत याचिका दाखिल करनी होगी।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर बिना तथ्यों की पुष्टि के आरोप लगाने का आरोप लगाया है और सख्त कार्रवाई की बात कही है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, नकदी विवाद के बाद उठाया कदम

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प्रयागराज: यशवंत वर्मा, जो इलाहाबाद हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश थे, ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को भेज दिया है। जस्टिस वर्मा पिछले साल मार्च 2025 में अपने आवास से कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी मिलने के बाद से विवादों में घिरे हुए थे। इस मामले ने न्यायपालिका में भी हलचल पैदा कर दी थी।

दिल्ली से इलाहाबाद तक विवाद का असर

समाचार एजेंसी के अनुसार, जस्टिस वर्मा को हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय से उनके मूल कैडर इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में दोबारा शपथ ली थी, लेकिन उनके खिलाफ चल रही जांच जारी रही।

आग के बाद मिला था कैश

घटना 14 मार्च 2025 की है, जब दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे अग्निशमन कर्मियों को घर के स्टोर रूम में जले हुए नोटों की गड्डियां मिली थीं। उस समय जस्टिस वर्मा घर पर मौजूद नहीं थे और मध्य प्रदेश में थे।

जांच और कार्रवाई

मामले के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजिव खन्ना ने तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति गठित की थी। प्रारंभिक जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना गया था। इसके बाद जस्टिस वर्मा से इस्तीफा देने को कहा गया, लेकिन उन्होंने उस समय इस्तीफा नहीं दिया। हालांकि उनका न्यायिक कार्यभार वापस ले लिया गया और उनका तबादला कर दिया गया।

संसद में भी उठा मामला

जांच रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजे जाने के बाद लोकसभा के 146 सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने का प्रस्ताव दिया था। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने जांच समिति गठित की थी।

जनगणना कार्य में लापरवाही पर सख्ती: मसूरी के ओक ग्रोव स्कूल के प्रधानाचार्य को कारण बताओ नोटिस

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मसूरी: जनगणना 2027 के तहत निर्धारित कार्यों में अनुपस्थिति को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपजिलाधिकारी एवं उपखण्ड जनगणना अधिकारी कार्यालय की ओर से नरेश कुमार, प्रधानाचार्य, ओक ग्रोव स्कूल, झड़ीपानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

नोटिस में बताया गया है कि जनगणना कार्य के लिए प्रगणक और सुपरवाइजर की नियुक्ति के तहत संबंधित शिक्षकों को 6 अप्रैल 2026 को नगर पालिका परिषद, मसूरी में उपस्थित होकर एचएलबी आवंटन और तीन दिवसीय प्रशिक्षण में भाग लेने के निर्देश दिए गए थे। यह प्रशिक्षण 7 अप्रैल से शुरू होना था।

इसके बावजूद 9 अप्रैल तक, यानी चार दिन बीत जाने के बाद भी विद्यालय से कोई भी शिक्षक प्रशिक्षण में शामिल नहीं हुआ। प्रशासन ने इसे जनगणना अधिनियम 1948 के प्रावधानों की अवहेलना माना है, जिससे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम में अनावश्यक देरी हुई है।

उपखण्ड जनगणना अधिकारी राहुल आनन्द ने नोटिस में 24 घंटे के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक उत्तर न मिलने पर जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 222 और 223 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा सकती है।

इस संबंध में उच्च अधिकारियों ने भी नाराजगी जताई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण और समयबद्ध कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की

CM धामी का रिपोर्ट कार्ड: 3980 घोषणाओं में कितनी हुई पूरी, कितनी अभी बाकी?

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देहरादून: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखने की तैयारी में जुट गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणाओं का रिपोर्ट कार्ड सामने आया है, जिसमें उनके कार्यकाल की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया है।

कुल घोषणाएं और उनकी स्थिति

4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से 9 अप्रैल 2026 तक सीएम धामी ने कुल 3980 घोषणाएं की हैं। 

  • 2535 घोषणाओं के शासनादेश जारी हो चुके हैं.
  • 982 घोषणाओं पर कार्य प्रगति पर है.
  • 399 घोषणाएं अभी तक अधूरी हैं.
  • 64 घोषणाएं आंशिक रूप से पूरी हुई हैं.

यानी कुल मिलाकर लगभग 63.69% घोषणाओं पर ही शासनादेश जारी हो पाया है।

विभागवार प्रदर्शन

सबसे ज्यादा घोषणाएं लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़ी रही हैं।

  • PWD: 816 घोषणाएं, जिनमें से 679 पर शासनादेश जारी.
  • सिंचाई विभाग: 412 घोषणाएं, 266 पूरी, 135 पर काम जारी.
  • शहरी विकास विभाग: 303 घोषणाएं, 220 पूरी, 43 अब भी अधूरी.

किन विभागों पर रहा ज्यादा फोकस

सीएम धामी ने सबसे अधिक घोषणाएं कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के अधीन विभागों से संबंधित की हैं। इनमें लोक निर्माण, सिंचाई, पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति और पंचायती राज विभाग शामिल हैं। इन विभागों से जुड़ी कुल 1913 घोषणाओं में से 1291 पर शासनादेश जारी हो चुका है।

समीक्षा बैठक और निर्देश

हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लंबित घोषणाओं की समीक्षा के लिए बैठक की। इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जन समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों या अन्य प्रस्तावों में अनावश्यक देरी होने पर संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

चुनाव से पहले बढ़ेगी रफ्तार

राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार अब लंबित घोषणाओं को जल्द से जल्द पूरा करने पर जोर दे रही है, ताकि जनता के सामने मजबूत रिपोर्ट कार्ड पेश किया जा सके।

उत्तराखंड में आज से ऑनलाइन जनगणना की शुरुआत, 33 सवालों के जवाब देकर करें स्वगणना

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देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना के पहले चरण के तहत आज शुक्रवार से भवनों की ऑनलाइन स्वगणना प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य के नागरिक अब घर बैठे जनगणना पोर्टल के माध्यम से 33 आसान सवालों के जवाब देकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत सुबह 10:45 बजे राज्यपाल गुरमीत सिंह (सेनि.) द्वारा की गई, जबकि शाम 5 बजे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी अपने आवास से स्वगणना करेंगे।

जनगणना निदेशालय के अनुसार, 10 अप्रैल से 25 अप्रैल तक भवन स्वगणना का अवसर दिया गया है। नागरिक se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। स्वगणना पूरी करने के बाद एक विशेष एसई (Self Enumeration) आईडी जारी की जाएगी।

जब 25 अप्रैल से 24 मई के बीच प्रगणक घर-घर सर्वे के लिए पहुंचेंगे, तब नागरिकों को यह एसई आईडी दिखानी होगी। इसके आधार पर प्रगणक डाटा को अपने सिस्टम में सत्यापित कर अंतिम एंट्री करेंगे।

निदेशक जनगणना इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि इस बार जनगणना प्रक्रिया को अधिक सटीक और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।

इन 33 सवालों के देने होंगे जवाब:
स्वगणना के दौरान नागरिकों को मकान और परिवार से जुड़ी जानकारी देनी होगी, जिसमें मकान की संरचना, उपयोग, स्वामित्व, कमरों की संख्या, पेयजल, बिजली, शौचालय, इंटरनेट, वाहन, मोबाइल नंबर समेत कई अन्य बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों से जुड़े प्रश्न शामिल हैं।

1-भवन नंबर (प्रगणक भरेंगे)
2-मकान नंबर (प्रगणक भरेंगे)
3-मकान के फर्श में प्रयुक्त सामग्री
4-मकान की दीवार में प्रयुक्त सामग्री
5-मकान की छत में प्रयुक्त सामग्री
6-मकान का उपयोग
7-मकान की हालत
8-परिवार क्रमांक
9-परिवार के सदस्यों की संख्या
10-परिवार के मुखिया का नाम
11-परिवार के मुखिया का लिंग
12-अनु.जाति, अनु.जनजाति या अन्य
13-मकान के स्वामित्व की स्थिति
14-मकान में कमरों की संख्या
15-परिवार में विवाहित दंपती संख्या
16-पेयजल का मुख्य स्रोत
17-पेयज स्रोत की उपलब्धता
18-लाइट का मुख्य स्रोत
19-शौचालय की उपलब्धता
20-शौचालय का प्रकार
21-गंदे पानी की निकासी
22-स्नानघर की उपलब्धता
23-रसोईघर, एलपीजी या पीएनजी
24-खाना पकाने का मुख्य ईंधन
25-रेडियो या ट्रांजिस्टर
26-टेलीविजन
27-इंटरनेट सुविधा
28-लैपटॉप या कंप्यूटर
29-टेलीफोन, मोबाइल, स्मार्ट फोन
30-साइकिल, स्कूटर, बाइक
31-कार, जीप, वैन
32-मुख्य अनाज
33-मोबाइल नंबर

NH-30 पर भीषण सड़क हादसा: एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत, 3 घायल

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नई दिल्ली/कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नेशनल हाईवे-30 पर एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत NH-30 पर दो कारों के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक कार में सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दूसरी कार में सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

बताया जा रहा है कि मृतक सभी लोग कांकेर के उड़कुडा गांव के निवासी थे। वे चीवरांज में एक शादी समारोह में शामिल होकर अपने गांव लौट रहे थे, तभी नाथिया नवागांव के पास यह हादसा हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। एसपी निखिल राखेचा ने घटनास्थल का जायजा लिया और बताया कि हादसे में छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि तीन लोग घायल हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और मृतकों की पहचान सहित अन्य आवश्यक जानकारी एकत्र की जा रही है।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी की माता के निधन पर कर्मचारी संघ, पत्रकार संगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों ने शोक जताया

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देहरादून : श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ की माता धूमा देवी गौड़ (83 वर्ष) के निधन से शोक की लहर है। उनका 8 अप्रैल बुधवार अपराह्न देहरादून में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं और उनका उपचार कैलाश अस्पताल में चल रहा था।

गुरुवार को हरिद्वार स्थित खड़खड़ी श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके बड़े पुत्र एनपी गौड़, डॉ. हरीश गौड़, छोटे पुत्र मोहन गौड़ सहित परिजन, बीकेटीसी के अधिकारी-कर्मचारी, पत्रकार और बड़ी संख्या में परिचित मौजूद रहे।

बीकेटीसी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विजेंद्र बिष्ट ने बताया कि धूमा देवी गौड़ एक कर्मठ, धर्मपरायण और सादगीपूर्ण जीवन जीने वाली महिला थीं। वे अपने पैतृक गांव पाली (चमोली) में पर्यावरण संरक्षण, कृषि, बागवानी और वृक्षारोपण जैसे कार्यों में आजीवन सक्रिय रहीं। पिछले कुछ वर्षों से वे देहरादून के अपर तुनवाला क्षेत्र में अपने छोटे पुत्र मोहन गौड़ (शिक्षा विभाग में कार्यरत) के साथ रह रही थीं।

उनके निधन पर बदरीनाथ धाम के रावल अमरनाथ नंबूदरी, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, धर्माधिकारी आचार्य स्वयंबर सेमवाल सहित बीकेटीसी के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों और पत्रकारों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि देशभर से पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और परिचितों ने शोक संदेश भेजकर संवेदना व्यक्त की है, जिसके लिए उन्होंने सभी का आभार प्रकट किया

नैनीताल हाईकोर्ट में NIM अनियमितता मामले पर सुनवाई, केंद्र-राज्य सरकार से मांगा जवाब

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नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) में वर्ष 2018 से 2022 के बीच कथित अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस प्रकरण पर सुनवाई की। अदालत ने पाया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद संबंधित पक्षकारों द्वारा अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है। इस पर पक्षकारों ने अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।

क्या है मामला?

यह जनहित याचिका दिनेश चंद्र उनियाल द्वारा दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तरकाशी स्थित NIM में वर्ष 2018 से 2022 के दौरान विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं हुईं। याचिका में यह भी कहा गया है कि रोजगार देने के नाम पर गड़बड़ियां की गईं, जिसकी निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई है।

सरकार का पक्ष

मामले में राज्य और केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों का खंडन किया गया है। उनका कहना है कि संस्थान में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा इस प्रकरण की जांच पहले ही की जा चुकी है, जिसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई।

कोर्ट का रुख

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को आरोपों के संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई तक पक्षकारों को अपना पक्ष स्पष्ट करने का समय दिया है।