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अंकिता भंडारी हत्याकांड: VIP विवाद पर BJP का पक्ष रखने आए राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, सवालों को छोड़कर भागे

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देहरादून : उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर VIP कंट्रोवर्सी गरमाई हुई है। खुद को पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताने वाली उर्मिला सनावर के वीडियो और ऑडियो क्लिप्स से शुरू हुआ यह विवाद भाजपा सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस समेत कई संगठन सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं और सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

सोमवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में राज्यसभा सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेश बंसल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और पार्टी का पक्ष रखने की कोशिश की। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह बिना आधार के इस भावनात्मक मुद्दे को उछाल रही है और प्रदेश की जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है। नरेश बंसल ने कहा, “बीजेपी किसी भी प्रकार की जांच से पीछे नहीं हटती। यदि ठोस तथ्य सामने आएंगे तो उस पर भी जांच होगी। अफवाहें फैलाकर राजनीतिक रोटियां सेंकना निंदनीय है।”

उन्होंने उर्मिला सनावर के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) का जिक्र करते हुए कहा कि सुरेश राठौर पर भी दबिश डाली जा रही है। दोनों के बयान दर्ज करने के बाद जांच आगे बढ़ेगी। यदि कोई और नाम सामने आता है तो सरकार उसे सलाखों के पीछे भेजने में कोई कोताही नहीं बरतेगी।

हालांकि, जब पत्रकारों ने VIP की पहचान और अंकिता की चैट में उल्लेखित VIP एंगल के जांच से गायब होने पर सवाल किए, तो नरेश बंसल संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने कहा, “एसआईटी ने पूरी जांच की है और कोर्ट ने माना है कि कोई VIP शामिल नहीं है। एसआईटी सदस्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी VIP का सच बताया था। जांच में कोई VIP नहीं मिला। हो सकता है अंकिता और पुलकित अपनी भविष्य की योजनाओं के लिए कुछ बात कर रहे हों।इसके बाद कई और सवालों पर उन्होंने जवाब टाल दिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त कर चले गए।

पूरा मामला क्या है?

अंकिता भंडारी (19 वर्ष) की हत्या सितंबर 2022 में ऋषिकेश के पास वनंत्रा रिजॉर्ट में हुई थी। रिसेप्शनिस्ट अंकिता को कथित तौर पर ‘VIP गेस्ट’ को विशेष सेवा देने से इनकार करने पर मार डाला गया था। एसआईटी जांच के बाद रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य सहित तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा हुई।

हाल ही में उर्मिला सनावर ने वीडियो जारी कर दावा किया कि अंकिता की चैट में उल्लेखित VIP एक भाजपा नेता है, जिसे ‘गट्टू’ कहा जाता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में कोई VIP नहीं मिला और चैट में उल्लेखित व्यक्ति नोएडा का धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान था, जो हत्या से दो दिन पहले रिजॉर्ट में सिर्फ खाना खाने आया था। विपक्ष का आरोप है कि जांच में VIP एंगल को दबाया गया। 4 जनवरी को देहरादून में बड़े प्रदर्शन हुए और सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई है। भाजपा का कहना है कि ठोस सबूत आए तो जांच से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन कांग्रेस इसे राजनीतिक हथियार बना रही है।

IRCTC टिकट बुकिंग नियमों में नया बदलाव : आधार लिंक यूजर्स को मिलेगी प्राथमिकता, दलालों पर लगाम

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नई दिल्ली : भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग नियमों में बड़ा बदलाव किया है। आज से लागू दूसरे चरण के तहत, अगर आपका IRCTC अकाउंट आधार कार्ड से लिंक नहीं है, तो रिजर्व्ड टिकट बुकिंग खुलने के पहले दिन (एडवांस रिजर्वेशन पीरियड – ARP ओपनिंग डे) सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक ऑनलाइन टिकट बुक नहीं कर पाएंगे।

यह नियम सिर्फ ऑनलाइन बुकिंग (IRCTC वेबसाइट या ऐप) पर लागू होता है और केवल रिजर्व्ड ट्रेन टिकटों के लिए, जब बुकिंग ट्रेन की यात्रा तिथि से 60 दिन पहले खुलती है। काउंटर से टिकट बुकिंग पर कोई बदलाव नहीं है।

तीन चरणों में लागू हो रहा नियम:

  • पहला चरण (29 दिसंबर 2025 से): सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक केवल आधार-वेरिफाइड यूजर्स ही टिकट बुक कर सकते थे।
  • दूसरा चरण (5 जनवरी 2026 से – आज से): यह विंडो बढ़ाकर सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक कर दी गई है। आधार लिंक न होने पर इस दौरान बुकिंग बंद।
  • तीसरा चरण (12 जनवरी 2026 से): पूरे ओपनिंग डे (सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक) केवल आधार-वेरिफाइड अकाउंट से ही ऑनलाइन बुकिंग संभव होगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

रेलवे का उद्देश्य टिकट दलालों और फर्जी अकाउंट्स से होने वाली बल्क बुकिंग को रोकना है। इससे वास्तविक यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। रेलवे ने पहले ही करोड़ों फर्जी IRCTC अकाउंट्स बंद किए हैं। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और आम यात्रियों को लाभ पहुंचाने के लिए उठाया गया है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे जल्द से जल्द अपना IRCTC अकाउंट आधार से लिंक कर लें, ताकि पीक सीजन में कोई असुविधा न हो। आधार लिंक करने की प्रक्रिया IRCTC ऐप या वेबसाइट पर आसान है।

उत्तराखंड: गांव वालों का बड़ा फैसला, महंगे होटल और फार्म हाउसों में नहीं होंगी शादियां, उल्लंघन पर जुर्माना और बहिष्कार

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विकासनगर: उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में बढ़ती फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के लिए एक अनूठा कदम उठाया गया है। खत शिलगांव के पंचरा-भंजरा स्थित महासू देवता मंदिर में ग्रामीणों की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से कई सख्त नियम लागू करने का निर्णय लिया गया।

खत स्याणा तुलसी राम शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ग्रामीणों ने तय किया कि अब शादी-विवाह के सभी आयोजन केवल गांव या घरों में ही होंगे। महंगे होटल, पार्क, फार्म हाउस या विवाह स्थलों में आयोजन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। महिलाओं के लिए विवाह में अधिकतम तीन गहने पहनने की अनुमति दी गई है, जबकि अत्यधिक आभूषणों पर रोक लगा दी गई।

इसके अलावा, आयोजनों में डीजे, फास्ट फूड और बीयर पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। न्यौते के रूप में पहली शादी में अधिकतम 100 रुपये दिए जा सकेंगे, जबकि कन्यादान में राशि दानदाता की इच्छा पर निर्भर रहेगी। बैठक में सबसे सख्त प्रावधान उल्लंघन करने वालों के लिए किया गया। यदि कोई ग्रामीण इन नियमों का पालन नहीं करता, तो उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, साथ ही सामाजिक बहिष्कार भी किया जाएगा।

ग्रामीणों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और दिखावे की होड़ में आयोजन बोझ बन रहे हैं, जिससे कई परिवार कर्ज में डूब रहे हैं। यह फैसला सामुदायिक स्तर पर फिजूलखर्ची रोकने और पारंपरिक सादगी को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अन्य गांवों में भी ऐसे प्रयासों की चर्चा शुरू हो गई है।

हल्द्वानी में सनसनीखेज गोलीकांड: भाजपा पार्षद ने गोली मारकर की युवक हत्या, गिरफ्तार!

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हल्द्वानी (नैनीताल): नैनीताल जिले के हल्द्वानी में रामपुर रोड क्षेत्र में देर रात हुई फायरिंग की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। भाजपा समर्थित नगर निगम पार्षद अमित बिष्ट उर्फ चिंटू पर एक युवक नितिन लोहनी की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पार्षद को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया है।

प्रत्यक्षदर्शी कमल भंडारी के अनुसार, घटना बीती देर रात की है। नितिन लोहनी और वह गौलापार से लौट रहे थे, तभी नितिन ने पार्षद अमित बिष्ट से मिलने की इच्छा जताई। दोनों पार्षद के घर पहुंचे और गेट पर घंटी बजाई। कुछ देर बाद अमित बिष्ट लाइसेंसी असलहे के साथ गेट पर आए और दोनों पर बंदूक तान दी।

भंडारी ने बताया कि पार्षद ने पहला फायर जमीन पर किया। डर से नितिन मौके से भागने लगा, तभी आरोपी ने उस पर गोली चला दी। गोली लगने से नितिन नाली में जा गिरा। जब भंडारी उसे उठाने पहुंचा, तो पार्षद के साथ कुछ और लोग हथियारों सहित वहां आ गए। जान बचाकर भंडारी मौके से भाग निकला।

घायल नितिन को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है, और कोतवाली के बाहर लोगों का जमावड़ा लगा रहा।

एसपी सिटी मनोज कत्याल घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे और आवश्यक निर्देश दिए। एएसपी दीपशिखा अग्रवाल ने बताया, ष्घटना बीती रात की है। गोली लगने से युवक की मौत हो गई। आरोपी पार्षद को हिरासत में लिया गया है और पूछताछ जारी है। पीड़ित परिवार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि पार्षद और मृतक के बीच कुछ दिन पहले किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जो संभवतः हत्या की वजह बना। पुलिस हत्या के सटीक कारणों की जांच कर रही है। आरोपी के पास लाइसेंसी असलहा होने की बात सामने आई है।

यह घटना हल्द्वानी जैसे शांत इलाके में अपराध की बढ़ती घटनाओं पर सवाल खड़े कर रही है। राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज है, क्योंकि आरोपी एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।

पुरोला विधानसभा : 2026 में ही टिकट के लिए घमासान, दायित्वधारी ने मंच से दिखाया गुटबाजी का ट्रेलर

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  • प्रदीप रावत ‘रवांल्टा’ 

उत्तराखंड की राजनीति में हमेशा से ही पहाड़ी इलाकों की विधानसभा सीटें दिलचस्प लड़ाइयों का गवाह रही हैं, और अब उत्तरकाशी जिले की पुरोला विधानसभा सीट पर भाजपा के भीतर 2027 के चुनाव से पहले ही तलवारें खिंच गई हैं। वर्तमान विधायक दुर्गेश्वर लाल के नेतृत्व वाली इस सीट पर टिकट की दावेदारी को लेकर घमासान मचा हुआ है। पूर्व विधायक और वर्तमान दायित्वधारी राजकुमार ने नौगांव में आयोजित एक कार्यक्रम में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। यह घटना भाजपा की उस छवि को चुनौती देती है, जो खुद को अनुशासित और एकजुट पार्टी के रूप में पेश करती है।

भाजपा के लिए पुरोला सीट महत्वपूर्ण है, जहां 2022 के चुनाव में पार्टी ने जीत दर्ज की थी। लेकिन अब, 2027 के चुनाव से पहले ही आंतरिक कलह सतह पर आ गई है। नौगांव के कार्यक्रम में मंच से बोलते हुए राजकुमार ने तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा, कोई पुरोला में भोंक रहा है, कोई मोरी में भोंक रहा है। उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं पर आरोप लगाया कि वे लोगों को गुटों में बांट रहे हैं। कोई अमीचंद शाह का आदमी, कोई शमी का और कोई किसी और का। राजकुमार ने जोर देकर कहा कि प्रतिनिधि जनता का होता है, न कि किसी गुट का। इस तरह का भेदभाव अस्वीकार्य है।

यह बयानबाजी सिर्फ आलोचना तक सीमित नहीं रही। राजकुमार ने इशारों में चुनावी समर्थन का जिक्र किया और वर्तमान व्यवस्था से असंतोष जताया। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या राजकुमार कांग्रेस में वापसी की सोच रहे हैं? हालांकि, यह अभी अटकलें ही हैं, लेकिन उनकी नाराजगी दुर्गेश्वर लाल से साफ झलक रही है। बड़ी बात यह है कि भाजपा जैसी पार्टी में, जहां अनुशासन की दुहाई दी जाती है, ऐसी खुली गुटबाजी कम ही देखने को मिलती है।

कार्यक्रम में एक और चौंकाने वाला वाकया हुआ, जब मंच संचालन कर रहे एक युवक ने दायित्वधारी राजकुमार से माइक छीन लिया और वर्तमान विधायक के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। उसने विधायक दुर्गेश्वर लाल की आलोचना की और राजकुमार की तारीफों के पुल बांधे। दायित्वधारी के सामने अपनी ही पार्टी के विधायक पर इस तरह का हमला राजनीतिक परिपक्वता की कमी दर्शाता है और पार्टी की एकता पर सवाल खड़े करता है।

2027 के चुनाव में पुरोला सीट पर समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भाजपा में दुर्गेश्वर लाल के खिलाफ लामबंदी हो रही है, जिससे पार्टी के अन्य दावेदारों को मौका मिल सकता है। वहीं, कांग्रेस के टिकट दावेदारों की टेंशन भी बढ़ गई है। अगर राजकुमार कांग्रेस में लौटे, तो उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। हालांकि, अभी समय है, लेकिन यह घटनाक्रम राजनीतिक करवटों का संकेत दे रहा है।

इस दौरान पूर्व विधायक ने पुरोला अस्पताल के उच्चीकरण का श्रेय लेते भी नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मसले को विधानसभा में कई बार उठाया था। उसीका नजीता है कि आज अस्पताल के लिए पैसा है। साथ ही कहा कि पुरोला-यमुनोत्री को जिला बनाने की मांग को भी लगातार विधानसभा और विधानसभा के बाहर उठाते आए हैं। राजकुमार ने यह भी दावा किया कि 2027 में नौगांव में ऐतिहासिक मेले का आयोजन कराया जाएगा।

उत्तराखंड में ठंड का कहर: मैदानों में घना कोहरा, पर्वतीय क्षेत्रों में पाला, इस दिन होगी बारिश

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देहरादून : उत्तराखंड में सर्दी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। मैदानी इलाकों में घने कोहरे की चादर छाई हुई है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में पाला गिरने से ठंड और कष्टदायक हो गई है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, चंपावत और पौड़ी जिलों में घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।

इस कोहरे के कारण इन जिलों के कई हिस्सों में शीत दिवस (कोल्ड डे) जैसी स्थिति बनी हुई है, जहां दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोहरा छाए रहने से सूरज की रोशनी नहीं पहुंच पा रही, जिससे ठंड और बढ़ गई है। आने वाले दिनों का पूर्वानुमान शुष्क मौसम का है। प्रदेशभर में बारिश की कोई संभावना नहीं है, लेकिन 6 जनवरी को पर्वतीय इलाकों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। इसके बाद 7 से 10 जनवरी तक पूरे राज्य में मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा।

पर्यटन नगरी मसूरी में पिछले दो दिनों से मौसम का मिजाज बेहद सख्त है। रविवार सुबह हल्की धूप निकली, लेकिन दोपहर बाद घने कोहरे ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले लिया। ठंडी हवाओं ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया। अधिकतम तापमान तीन डिग्री तक गिर गया। चौक-चौराहों पर पर्यटक और स्थानीय लोग ठंड से बचने के लिए अलाव जलाते नजर आए।

नगर पालिका अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि ठंड में इजाफे को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। शहर के विभिन्न स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि कोहरे और ठंड को देखते हुए सावधानी बरतें, खासकर वाहन चलाते समय और बाहर निकलते हुए गर्म कपड़े पहनें।

उत्तराखंड : घर के बाहर भालू का अचानक हमला, दरवाजा बंद कर बचाई जान, ग्रामीणों में दहशत

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कर्णप्रयाग (चमोली) : चमोली जिले में वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार सुबह आदिबदरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत बुंगा के कंड तोक में एक व्यक्ति घर के बाहर खड़ा था, तभी अचानक भालू ने उस पर हमला करने की कोशिश की। सतर्कता और तेजी से प्रतिक्रिया के चलते व्यक्ति घर के अंदर घुस गया और दरवाजा बंद कर अपनी जान बचा ली।

क्षेत्र पंचायत सदस्य भूपेंद्र कुंवर ने बताया कि घटना सुबह करीब 7:30 बजे की है। शोर मचाने पर भालू मौके से भाग निकला। इस घटना से पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग की है।

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर रूप ले रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, जंगलों में भोजन की कमी और मानवीय अतिक्रमण के कारण हिमालयन ब्लैक बियर जैसे वन्यजीव गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। 2025 में राज्य में वन्यजीव हमलों से दर्जनों मौतें और सैकड़ों घायल होने की खबरें सामने आईं, जिसमें भालू के हमले प्रमुख रहे। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह-शाम जंगलों के करीब काम करने में अब खतरा बढ़ गया है। वन विभाग को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।

उत्तराखंड: जन-जन की सरकार जनता के द्वार

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उत्तराखंड सरकार पहुँची जनता के द्वार: 18,360 शिकायतों में 13,068 का निस्तारण

देहरादून 4 जनवरी।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और त्वरित समाधान का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है। 03 जनवरी 2026 तक की दैनिक प्रगति रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि सरकार योजनाओं और सेवाओं को काग़ज़ों से निकालकर सीधे जनता के द्वार तक पहुँचाने में निरंतर सफलता प्राप्त कर रही है।

प्रदेश के 13 जनपदों में अब तक कुल 216 जनसेवा कैम्प आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 1,44,134 नागरिकों ने प्रत्यक्ष सहभागिता की है। केवल आज के दिन ही 12 कैम्पों में 8,940 लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि जनता का विश्वास इस कार्यक्रम के प्रति लगातार बढ़ रहा है। इन कैम्पों के माध्यम से ग्रामीण, पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को पहली बार एक ही मंच पर अपनी समस्याओं के समाधान और सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।

कार्यक्रम के दौरान अब तक कुल 18,360 शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 13,068 मामलों का मौके पर अथवा त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से निस्तारण किया जा चुका है। केवल आज के दिन 613 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 292 मामलों का समाधान तुरंत किया गया। यह आंकड़े प्रशासन की निर्णय क्षमता, जवाबदेही और समाधान-केंद्रित कार्यशैली को दर्शाते हैं। शेष प्रकरणों को भी समयबद्ध कार्ययोजना के तहत संबंधित विभागों को प्रेषित कर निरंतर मॉनिटरिंग में रखा गया है। इसी क्रम में आय, जाति, निवास, सामाजिक श्रेणी सहित विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों के लिए अब तक कुल 24,081 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 1,808 आवेदन आज दर्ज किए गए। इससे स्पष्ट है कि आम नागरिकों को आवश्यक दस्तावेज़ों के लिए अब अनावश्यक देरी और कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। सरकार द्वारा सेवाओं को नागरिकों के निकट लाने की यह पहल विशेष रूप से गरीब, वंचित और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत अब तक 80,712 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्रदान किया जा चुका है, जिनमें 3,509 लाभार्थी आज शामिल हुए। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार की योजनाएँ अब केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर पात्र लाभार्थियों तक वास्तविक रूप से पहुँच रही हैं। सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही मंच पर उपलब्ध कराकर सरकार ने जनसुविधा और पारदर्शिता दोनों को मजबूत किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम उत्तराखण्ड में शासन की सोच को बदलने वाला अभियान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य है कि जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, बल्कि प्रशासन स्वयं जनता के बीच जाकर समाधान सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक शिकायत का प्राथमिक स्तर पर निस्तारण हो, निर्णय लेने में सक्षम अधिकारी कैम्पों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें, कमजोर वर्गों, दिव्यांगों, बुज़ुर्गों और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को प्राथमिकता दी जाए तथा लंबित मामलों की जिला और राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए।

#justiceforAnkitaBhandari :अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग तेज, उत्तराखंड में कांग्रेस का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन

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देहरादून/रुद्रपुर/श्रीनगर/गदरपुर/कोटद्वार: उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड में निष्पक्ष जांच और पूर्ण न्याय की मांग को लेकर शुक्रवार को पूरे प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। पार्टी की एकमात्र मांग है कि मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में सीबीआई से कराई जाए तथा सभी संदिग्धों का नार्को टेस्ट किया जाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब तक अंकिता को पूरा न्याय नहीं मिल जाता, यह संघर्ष जारी रहेगा।

श्रीनगर में उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में विशाल पदयात्रा निकाली गई, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। पदयात्रा के बाद गोला बाजार में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए गोदियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण में पूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने बीजेपी सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाने तक कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा।

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रुद्रपुर में किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, जसपुर विधायक आदेश चौहान और युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुमित भुल्लर की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता ने विशाल जनाक्रोश मार्च निकाला तथा कलेक्ट्रेट का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने अन्याय के खिलाफ न्याय की आवाज बुलंद की।

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गदरपुर तहसील में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कपरि, नानकमत्ता विधायक गोपाल राणा, जसपुर विधायक आदेश चौहान, जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा और मीना शर्मा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं व नागरिकों ने जुलूस निकालकर धरना-प्रदर्शन किया। आर्य ने बीजेपी सरकार की जवाबदेही तय करने का स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि विरोध की यह आवाज तब तक उठती रहेगी जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिल जाता।

देहरादून में कांग्रेस के राष्ट्रीय संचार सचिव वैभव वालिया के नेतृत्व में विशाल कैंडल मार्च निकाला गया। वहीं, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला और ऋषिकेश विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी जयेंद्र चंद रमोला के संयुक्त नेतृत्व में महिला कार्यकर्ताओं ने यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट के आवास का घेराव किया।

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प्रदर्शनकारियों ने वीआईपी का नाम उजागर होने के बावजूद सरकार की चुप्पी का विरोध किया और कहा कि दोषियों को सजा मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी।

कोटद्वार में आम जनता ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को काले झंडे दिखाए, जिससे प्रदेश में न्याय की मांग का व्यापक जनआक्रोश झलका। कांग्रेस नेताओं ने इसे जनता का बीजेपी सरकार के खिलाफ सीधा विरोध बताया।

उत्तराखंड से बिहार तक हंगामा, मंत्री रेखा आर्य के पति के बयान पर सियासी बवाल

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देहरादून/पटना: उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के बिहार की महिलाओं पर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। एक वायरल वीडियो में साहू को यह कहते सुना जा रहा है कि “बिहार में 20-25 हजार रुपये में लड़कियां मिल जाती हैं” और कुंवारे युवाओं की शादी कराने के लिए बिहार से लड़कियां लाई जा सकती हैं।

इस बयान की चारों तरफ निंदा हो रही है। बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक महीने बाद सक्रिय होते हुए सोशल मीडिया पर इसकी कड़ी आलोचना की। तेजस्वी ने लिखा कि भाजपाइयों की सोच हमेशा से विषैली रही है – पहले महिलाओं के वोट 10 हजार में खरीदे, अब बिहार से 20-25 हजार में लड़कियां लाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसे भाजपा की महिलाओं और बिहार के प्रति अपमानजनक मानसिकता करार दिया।

बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए साहू को नोटिस जारी करने और उत्तराखंड सीएम को कार्रवाई की मांग वाली चिट्ठी लिखी है। आयोग अध्यक्ष अप्सरा ने इसे बिहार की महिलाओं का घोर अपमान बताया। विपक्षी दलों राजद और कांग्रेस के साथ-साथ सत्ता पक्ष के जदयू और भाजपा के बिहार इकाई ने भी बयान की निंदा की है।

विवाद बढ़ने पर गिरधारी लाल साहू ने सफाई दी कि उनका बयान तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और यह किसी दोस्त की शादी के संदर्भ में था। उन्होंने माफी भी मांगी। उत्तराखंड भाजपा ने खुद को बयान से अलग करते हुए कहा कि साहू का पार्टी से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है और ऐसे बयानों की निंदा करती है। यह मामला उत्तराखंड से बिहार तक राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा रहा है, जहां महिलाओं की गरिमा और सम्मान पर सवाल उठ रहे हैं।