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कोर्ट के फैसले के बाद भावुक हुए केजरीवाल, मीडिया से बातचीत में रो पड़े

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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े सीबीआई मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त (discharged) कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष (सीबीआई) द्वारा पेश किए गए सबूत पर्याप्त नहीं हैं और आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।

कोर्ट का फैसला और टिप्पणियां

27 फरवरी 2026 को विशेष जज जितेंद्र सिंह ने आदेश जारी करते हुए कहा कि मामले में कोई ठोस सबूत नहीं है जो किसी षड्यंत्र या भ्रष्टाचार को साबित कर सके। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “गंभीर आपराधिक आरोपों को केवल अनुमान या कथानक पर नहीं, बल्कि ठोस सामग्री पर आधारित होना चाहिए।” अदालत ने सीबीआई की जांच में खामियों पर कड़ी फटकार लगाई और कहा कि चार्जशीट में कई कमियां हैं, जो किसी गवाह या बयान से समर्थित नहीं हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आबकारी नीति में कोई “ओवरआर्किंग षड्यंत्र” या “आपराधिक इरादा” नहीं पाया गया।

फैसले के बाद प्रतिक्रियाएं

फैसले के तुरंत बाद अरविंद केजरीवाल भावुक हो गए और मीडिया से बातचीत में रो पड़े। उन्होंने कहा, “मैं भ्रष्ट नहीं हूं। अदालत ने कहा है कि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ईमानदार हैं।” उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “सच की हमेशा जीत होती है।” आम आदमी पार्टी ने इसे “न्याय की जीत” और “राजनीतिक प्रतिशोध की हार” करार दिया।

ये है पूरा मामला 

दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 से जुड़े इस मामले में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि नीति में संशोधन कर कुछ निजी शराब कंपनियों (“साउथ लॉबी”) को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और बदले में रिश्वत ली गई। आरोप में 100 करोड़ रुपये की रिश्वत का दावा शामिल था, जो कथित तौर पर आप के चुनावी खर्च में इस्तेमाल हुई। सीबीआई ने 2022 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी और बाद में कई सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश कीं। इसमें केजरीवाल, सिसोदिया सहित 23 लोग आरोपी थे। यह मामला लंबे समय से राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा, जिसमें दोनों नेताओं ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया था। अदालत ने चार्ज फ्रेमिंग पर सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया, जिससे ट्रायल की प्रक्रिया समाप्त हो गई।

आगे क्या?

सीबीआई की ओर से उच्च न्यायालय में अपील करने की संभावना बनी हुई है, लेकिन फिलहाल यह फैसला आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक राहत माना जा रहा है। विस्तृत आदेश की प्रति अभी सार्वजनिक हो रही है, और यह दिल्ली की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया बरी, कोर्ट ने कहा- ठोस सबूत नहीं

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राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सभी आरोपों से बरी (discharged) कर दिया है।

कोर्ट का फैसला

27 फरवरी 2026 को विशेष सीबीआई अदालत (राउज एवेन्यू कोर्ट) ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष (सीबीआई) द्वारा आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ कोई ठोस, विश्वसनीय या पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किया गया। किसी आपराधिक षड्यंत्र या भ्रष्टाचार का कोई प्रमाण सामने नहीं आया। कोर्ट ने कहा, “अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में असफल रहा है। निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है, लेकिन यहां जांच में गंभीर खामियां पाई गईं।”

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

  • सुनवाई के दौरान जज ने चार्जशीट में कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया।
  • गवाह संख्या 5 और 6 के बयान आपस में मेल नहीं खाते और सीबीआई द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज चार्जशीट से सामंजस्य नहीं रखते।
  • अदालत ने “साउथ ग्रुप” और “साउथ लॉबी” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। जज ने पूछा कि इन शब्दों की उत्पत्ति क्या है और जांच में ऐसी सामूहिक, अस्पष्ट शब्दावली का प्रयोग उचित है या नहीं? कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे शब्द जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं।
  • कोर्ट ने नाराजगी जताई कि कन्फेशनल स्टेटमेंट की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि शुरुआत से इसकी मांग की जा रही थी। सीबीआई ने बताया कि बयान सील कवर में जमा किया गया था, जिस पर अदालत ने असंतोष व्यक्त किया।
  • जज ने कहा, “कभी-कभी फाइल को अधिक पढ़ने पर वही फाइल कई सवाल खड़े कर देती है।”

ये था पूरा आमला

दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 से जुड़े इस मामले में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि नीति में संशोधन कर कुछ निजी शराब कंपनियों (कथित “साउथ लॉबी”) को फायदा पहुंचाया गया और बदले में रिश्वत ली गई। आरोपों में 100 करोड़ रुपये की रिश्वत का दावा शामिल था, जो कथित तौर पर आम आदमी पार्टी (आप) के चुनावी खर्च के लिए इस्तेमाल हुई।

सीबीआई ने 2022 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी और बाद में कई सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश कीं। इसमें केजरीवाल, सिसोदिया सहित 23 लोग आरोपी थे। यह मामला लंबे समय से राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा है। दोनों नेताओं ने आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था। अदालत ने चार्ज फ्रेमिंग पर सुनवाई पूरी करने के बाद 27 फरवरी को यह आदेश जारी किया।

तालिबान का दावा, पाकिस्तानी F-16 फाइटर जेट अफगान बॉर्डर पर गिराया

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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अफगानिस्तान के प्रमुख मीडिया संस्थान टोलो न्यूज के अनुसार, अफगान बलों ने पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट को उनके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने पर मार गिराया है। अफगान पक्ष का दावा है कि यह एक F-16 फाइटर जेट था, जो अमेरिका निर्मित है और पाकिस्तान वायु सेना का प्रमुख विमान है।

घटना की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के कई शहरों—काबुल, कंधार और पक्तिया—पर हवाई हमले शामिल हैं, जिन्हें पाकिस्तान ने “ऑपरेशन घज़ब लिल हक” के तहत आतंकवादी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई बताया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे “ओपन वॉर” करार दिया है। इन हमलों के जवाब में अफगानिस्तान ने सीमा पर जवाबी हमले किए, जिसमें अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, कई पोस्ट नष्ट हुए और कुछ सैनिकों को कैद किया गया।

टोलो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पाकिस्तानी विमान अफगान हवाई क्षेत्र में घुसा, जिसके बाद अफगान बलों ने इसे मार गिराया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें जलते हुए विमान के मलबे दिखाए गए हैं। वीडियो में कथित तौर पर सीरियल नंबर (जैसे 85610 या 85510) और पाकिस्तानी झंडा दिख रहा है, और दावा किया जा रहा है कि यह F-16 है। एक X अकाउंट (@AFGDefense) ने इसे अफगान रक्षात्मक बलों द्वारा गिराए गए पाकिस्तानी F-16 के रूप में शेयर किया है।

हालांकि, इस वीडियो और दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कई रिपोर्ट्स में इसे फेक या AI-जनरेटेड बताया गया है, क्योंकि मलबे का आकार और संरचना F-16 से मेल नहीं खाती (F-16 एक छोटा, कॉम्पैक्ट फाइटर जेट है)। कुछ फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह पुराना फुटेज हो सकता है या प्रोपगैंडा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पाकिस्तान की ओर से अभी तक किसी विमान के नुकसान की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है, और उन्होंने किसी भी हानि से इनकार किया है।

यह घटना दुर्दांत लाइन पर लंबे समय से चल रहे विवाद का हिस्सा है, जहां दोनों देश एक-दूसरे पर आतंकवादियों को शेल्टर देने का आरोप लगाते हैं। कतर-मध्यस्थता वाली पिछले समझौते के बावजूद तनाव बढ़ता जा रहा है, और अब दोनों पक्ष पूर्ण सैन्य अभियानों की बात कर रहे हैं।

उत्तराखंड: बारात से लौट रही कार खाई में गिरी, तीन लोगों की मौत

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अल्मोड़ा: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में आज एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ। ताकुला क्षेत्र के बसौली के पास बागेश्वर रोड पर एक कार (मारुति ब्रेजा, नंबर DL9CBH8402) अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। इस भीषण दुर्घटना में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाकी घायलों को एसडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई से बचाया गया।

जानकारी के अनुसार, कार में कुल 8 लोग सवार थे, जो एक बारात से लौटकर अल्मोड़ा की ओर जा रहे थे। अचानक वाहन का नियंत्रण खो गया और यह गहरी खाई में जा गिरा। हादसे की सूचना मिलते ही डीसीआर अल्मोड़ा से एसडीआरएफ की टीम सरियापानी पोस्ट से उप निरीक्षक पंकज डंगवाल के नेतृत्व में तुरंत घटनास्थल पर पहुंची।

एसडीआरएफ टीम ने जिला पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सभी घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उन्हें 108 एम्बुलेंस के जरिए ताकुला अस्पताल पहुंचाया गया। दुर्भाग्य से, तीन लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई। मृतकों के शवों को पुलिस और ग्रामीणों की सहायता से मुख्य सड़क तक लाया गया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के लिए पुलिस के हवाले किया गया।

यह हादसा होली से ठीक पहले हुआ है, जिसने इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है। प्रारंभिक जानकारी में चालक के वाहन पर नियंत्रण खोने को मुख्य कारण बताया जा रहा है। पुलिस जांच कर रही है कि क्या तेज रफ्तार या अन्य कोई वजह इसके पीछे थी।

हमारे रिश्ते समय की हर कसौटी पर खरे उतरे; आतंकवाद को दिया सख्त संदेश : PM मोदी

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नई दिल्ली/यरुशलम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रिश्तों को नई मजबूती मिली। पीएम मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदगी में कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए, जिससे रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में सहभागिता बढ़ने की उम्मीद है।

संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘शालोम’ कहकर अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें गर्मजोशी से स्वागत किया, जिसके लिए वे आभारी हैं। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि नौ साल पहले उन्हें पहली बार इजराइल आने का अवसर मिला था और अब नौ साल बाद दोबारा यहां पहुंचना उनके लिए गर्व का क्षण है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेस्सेट मेडल’ से सम्मानित किया गया है। उन्होंने इस सम्मान को 140 करोड़ भारतीयों और भारत-इजराइल की स्थायी दोस्ती को समर्पित करते हुए कहा कि यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मजबूत संबंधों का प्रतीक है।

दूसरी ओर, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी के दौरे को ‘अद्भुत’ और ‘भावुक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह छोटा लेकिन बेहद सफल दौरा रहा। नेतन्याहू ने विशेष रूप से केनेस्सेट में पीएम मोदी के संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके भावुक भाषण के बाद शायद ही किसी इजराइली की आंखें सूखी रही हों। उन्होंने इस दौरे को दोनों देशों के दिलों और दिमागों को और करीब लाने वाला बताया।

दोनों नेताओं ने इस दौरान क्षेत्रीय शांति, आतंकवाद विरोधी सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने पर भी जोर दिया। यह दौरा भारत-इजराइल संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ने वाला माना जा रहा है।

DGCA के नए नियम: अब 48 घंटे के भीतर बिना जुर्माने के टिकट रद्द या बदल सकेंगे नाम

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नई दिल्ली: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने यात्रियों के हित में एयरलाइन टिकट रिफंड और संशोधन नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नए नियमों के तहत अब यात्री टिकट बुकिंग के 48 घंटे के भीतर बिना किसी कैंसिलेशन चार्ज के टिकट रद्द या बदल सकते हैं। यह सुविधा ‘लुक-इन ऑप्शन’ के रूप में उपलब्ध होगी, जिसमें संशोधित उड़ान के लिए केवल सामान्य किराया देना होगा।

डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि यदि टिकट सीधे एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट से बुक की गई हो और प्रस्थान तिथि बुकिंग से कम से कम 7 दिन (घरेलू उड़ान) या 15 दिन (अंतरराष्ट्रीय उड़ान) दूर हो, तो यह 48 घंटे का विकल्प लागू होगा। 48 घंटे की अवधि बीत जाने के बाद सामान्य कैंसिलेशन या संशोधन शुल्क लागू हो जाएगा।

एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, यदि टिकट बुकिंग के 24 घंटे के भीतर यात्री नाम में कोई गलती (जैसे स्पेलिंग मिस्टेक) बताता है और टिकट एयरलाइन की वेबसाइट से बुक किया गया हो, तो एयरलाइन नाम सुधारने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेगी। यदि टिकट ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बुक किया गया हो, तो रिफंड और सुधार की जिम्मेदारी एयरलाइन की होगी, क्योंकि एजेंट उनके अधिकृत प्रतिनिधि माने जाते हैं।

रिफंड प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए डीजीसीए ने निर्देश दिया है कि सभी रिफंड 14 कार्यदिवसों के भीतर यात्री के खाते में जमा कर दिए जाएं। साथ ही, यात्री या उसके परिवार के किसी सदस्य की गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति में टिकट रद्द करने पर विशेष छूट और आसान प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।

ये संशोधन पिछले कुछ समय में यात्रियों की बढ़ती शिकायतों के बाद किए गए हैं, खासकर दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानों में व्यवधान के दौरान रिफंड में देरी के मामलों के बाद। विमानन मंत्रालय के निर्देशों के बाद डीजीसीए ने 24 फरवरी 2026 को ये संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं।

डीजीसीए ने सभी एयरलाइनों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने और यात्रियों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यात्रियों से अपील की गई है कि वे टिकट बुकिंग के तुरंत बाद विवरण जांच लें ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।

बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा से लेकर रोजगार तक के लिए संकल्पबद्ध है सरकार–मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रदेश सरकार बेटियों के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को नंदा गौरा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश की 33,251 बालिकाओं के खाते में डीबीटी के माध्यम से 1,45,93.00 (एक अरब पैंतालीस करोड़ तिरान्नबे लाख रुपए) की धनराशि हस्तांतरित की।

मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जन्म के समय बेटा- बेटी के बीच होने वाले भेदभाव को समाप्त करते हुए, कन्या जन्म को प्रोत्साहन देने के लिए प्रदेश सरकार नंदा गौरा योजना संचालित कर रही है। इसके तहत राज्य सरकार द्वारा बालिका के जन्म पर 11 हजार रुपए और बेटी के 12वीं पास करने पर उच्च शिक्षा के लिए 51 हजार रुपए की धनराशि प्रदान की जा रही है।

उन्होंने कहा कि योजना के तहत अब तक 3,77,784 (तीन लाख सत्तर हजार सात सौ चौरासी) बालिकाओं को कुल 11,68,49.00 रुपए (ग्यारह अरब अडसठ करोड़ उनपचास लाख) की धनराशि जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बेटियों की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन दे रही है, साथ ही शिक्षित होने के बाद रोजगार के लिए भी बेटियों को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जा रहा है। जिसके बाद अब सरकारी सेवाओं में उत्तराखंड की महिलाओं की स्थिति मजबूत हुई है, इससे सरकारी कार्यालयों की कार्य संस्कृति ज्यादा बेहतर हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लखपति दीदी योजना के जरिए भी प्रदेश की आम महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि नंदा गौरा योजना कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने, संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन देने, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देते हुए, समाज में लैंगिक असमानता को दूर करने के लक्य्द प्राप्त करने में सफल रही है। इस मौके पर विभागीय मंत्री श्रीमती रेखा आर्य ने कहा कि, इस वर्ष लाभांवित होने वाली बालिकाओं में 5913, नवजात हैं, जबकि शेष 27338 को 12वीं पास करने पर यह धनराशि मिली है। उन्होंने सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं प्रेषित की।

फिल्म ‘बूंग’ ने सर्वश्रेष्ठ चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म का पुरस्कार जीता

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लक्ष्मीप्रिया देवी की फिल्म ‘बूंग’ ने बीएफटीए फिल्म अवार्ड्स 2026 में सर्वश्रेष्ठ चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म का पुरस्कार जीताह है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने फिल्मनिर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी और ‘बूंग’ की पूरी टीम को बीएएफटीए फिल्म अवार्ड्स 2026 में सर्वश्रेष्ठ चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म का पुरस्कार जीतने पर बधाई दी है।

यह बड़ी कामयाबी भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल है और भारत की विविधतापूर्ण और सार्थक कहानी कहने की परंपराओं के लिए दुनिया भर में बढ़ती सराहना को दिखाता है। फिल्म के सफर को भारत के फिल्म विकास और महोत्सव इकोसिस्टम ने समर्थन दिया है।

आपको बता दें, बूंग को 2023 में वर्क इन प्रोग्रेस लैब और फिल्म बाजार रिकमेंड्स के तहत फिल्म बाजार में बनाया गया था। ये पहल होनहार फिल्म निर्माताओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक उद्योग से जुड़ाव को मुमकिन बनाने के लिए की गई हैं। इसके बाद फिल्म को 2024 में 55वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखाया गया, जहां इसे सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर कैटेगरी में चुना गया, जिससे इसकी समालोचक प्रशंसा और पक्की हो गई।

भारत सरकार और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम, फिल्म बाजार और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जैसे प्लेटफॉर्म को मजबूत करने के अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराते हैं, जो फिल्म निर्माताओं को मजबूत बनाते हैं, रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हैं। इससे भारतीय सिनेमा को अंतर्राष्ट्रीय श्रोताओं तक पहुंचने के रास्ते बनाते हैं।

नैनीताल हाईकोर्ट ने सेना जवान के खिलाफ दुष्कर्म-अपहरण का मुकदमा किया रद्द, कहा- सहमति से बने संबंध में शादी से इनकार दुष्कर्म नहीं

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नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सेना में तैनात एक जवान के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म और अपहरण के मुकदमे को पूरी तरह रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बने यौन संबंध में बाद में शादी से इनकार करना स्वतः ही दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रतिशोध लेने या असफल रिश्तों के निपटारे के लिए नहीं किया जा सकता।

मामला पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग थाने क्षेत्र का है। वर्ष 2022 में एक युवती ने सेना जवान गुरपाल सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर युवती को घर से बाहर बुलाया, होटल में ले जाकर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इनकार कर दिया। इसके आधार पर अपहरण और दुष्कर्म के आरोप लगाए गए थे।

हाईकोर्ट ने मामले के दस्तावेजों, पीड़िता के बयानों और अन्य साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया। कोर्ट ने पाया कि दोनों पक्ष 2019 से एक-दूसरे को जानते थे और सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क में थे। पीड़िता ने अपनी मर्जी से घर छोड़कर आरोपी के साथ जाने का फैसला किया था। चूंकि युवती बालिग थी और उसकी सहमति स्वतंत्र थी, इसलिए अपहरण के किसी भी आवश्यक तत्व की मौजूदगी नहीं पाई गई।

न्यायमूर्ति नैथानी ने निर्णय में टिप्पणी की कि शादी के वादे पर बने यौन संबंध तभी दुष्कर्म माने जा सकते हैं, जब साबित हो कि आरोपी की नीयत शुरू से ही धोखा देने की थी। वर्तमान मामले में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला कि आरोपी ने शुरू से शादी न करने के इरादे से सहमति हासिल की थी। कोर्ट ने माना कि असफल रिश्ते और धोखाधड़ी के बीच स्पष्ट फर्क होता है।

सुनवाई के दौरान 23 फरवरी 2022 की मेडिकल रिपोर्ट का भी जिक्र हुआ, जिसमें जबरन यौन शोषण या बल प्रयोग की कोई पुष्टि नहीं हुई थी। अभियोजन पक्ष के पास दुष्कर्म को प्रथमदृष्टया साबित करने वाला कोई मजबूत आधार नहीं था। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह दो वयस्कों के बीच सहमतिजन्य रिश्ता था, जिसे गलत तरीके से आपराधिक रंग दिया गया।

एकल पीठ ने धारा 482 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए मुकदमा रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि जहां आरोप पूरी तरह निराधार हों, वहां आरोपी को लंबी और कष्टदायक आपराधिक प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर करना कानून का दुरुपयोग होगा। न्याय सुनिश्चित करने और अनावश्यक उत्पीड़न रोकने के लिए यह कदम जरूरी था।

उत्तराखंड : मुस्लिम फेरीवाले का नाम पूछकर भगाया, दोबारा आने पर धमकी, पुलिस ने शुरू की जांच

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हरिद्वार:  धर्मनगरी हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में एक मुस्लिम फेरीवाले के साथ कथित रूप से धार्मिक आधार पर अभद्रता और धमकी देने का मामला सामने आया है। पीड़ित फेरीवाले ने आरोप लगाया है कि एक युवक ने उसका नाम पूछकर धर्म विशेष का हवाला देते हुए गाली-गलौच की, क्षेत्र से भगाया और दोबारा आने पर धमकी भी दी। युवक ने खुद मोबाइल से इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया, जिसके बाद इंटरनेट मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित ज्वालापुर के मोहल्ला कस्साबान निवासी शान मोहम्मद है, जो करीब 40 वर्षों से कनखल सहित पूरे पंचपुरी क्षेत्र में फेरी लगाकर पुराना कचरा खरीदते और परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे हैं। शान मोहम्मद ने कनखल थाने में तहरीर देकर बताया कि घटना के दौरान एक युवक ने उन्हें रोक लिया, नाम पूछा और उसके बाद खुद को हिंदूवादी संगठन का नेता बताते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। युवक ने उन्हें क्षेत्र से तुरंत चले जाने को कहा और दोबारा आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें युवक फेरीवाले को धमकाते और अपशब्द कहते नजर आ रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद ज्वालापुर क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय के कई लोगों ने नाराजगी जताई। पीड़ित के समर्थन में कुछ युवा कनखल थाने पहुंचे और तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

इंस्पेक्टर कनखल देवेंद्र रावत ने बताया कि पीड़ित की तहरीर प्राप्त हो गई है और मामले की गहन जांच की जा रही है। वीडियो की भी जांच की जा रही है ताकि आरोपित की पहचान और घटना के पूरे विवरण का पता लगाया जा सके। पुलिस ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि जांच के बाद दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना पिछले कुछ समय से हरिद्वार में धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आई है। हाल ही में हरकी पैड़ी पर ‘अहिंदुओं के प्रवेश निषेध’ से संबंधित पोस्टर भी सुर्खियों में रहे थे। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की जा रही हैं, जिसमें कुछ लोग इसे धार्मिक असहिष्णुता का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे व्यक्तिगत विवाद करार दे रहे हैं।