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उत्तराखंड : हनीट्रैप में फंसा सेना का अकाउंटेंट, रुड़की से गिरफ्तार

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रुड़की: पाकिंस्तानी हसीनाओं के जाल में सेना के जवानों के फंसने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इन मामलों में तेजी से बढ़ोतरी भी हो रही है। ऐसा ही एक और केस रुड़की में सामने आया है। सेना के अकाउंटेंट पर लगातार रक्षा मंत्रालय की टीम नजर बनाए हुए थी। टीम ने उसे रुड़की से गिरफ्तार कर लिया।

पाकिस्तानी हसीना ने सेना के अकाउंटेंट को हनीट्रैप और पैसों के लालच में फंसकर सेना की गोपनीय जानकारी हासिल कर ली थी। रुड़की बीईजी में तैनात एक अकाउंटेंट को गिरफ्तार किया है। टीम ने उसका मोबाइल कब्जे में लिया है। वहीं, सिविल लाइन्स कोतवाली में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। टीम उसके मोबाइल को अपने साथ ले गई है।

बताया जा रहा है कि उसके मोबाइल में टीम को कई अहम जानकारी मिली है। वहीं, आरोपी को आज पुलिस कोर्ट में पेश करेगी। सोमवार की देर रात दिल्ली रक्षा मंत्रालय की एक टीम रुड़की बीईजी परिसर पहुंची और सेना के अधिकारियों से वार्ता की। इसके बाद टीम ने वहां से अकाउंटेंट के पद पर तैनात इमामी खान निवासी सिकंदरपुर, बरेली को गिफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि टीम ने उसका मोबाइल कब्जे में लेकर जांच की। साथ ही देर रात तक टीम ने उससे घंटों तक पूछताछ की।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि कुछ माह पूर्व उसके मोबाइल पर एक नंबर से महिला की कॉल आई थी। जिसने खुद को पकिस्तानी सेना में बड़े पद पर होना बताया था। जिसके बाद उसकी महिला से मोबाइल पर लंबी बातचीत होना शुरू हो गई। इसके बाद महिला ने पैसों का लालच देकर सेना से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज मांगे।

पैसों के लालच में आकर उसने इंटरनेट के माध्यम से सेना से जुड़े कई दस्तावेज महिला को भेजे थे। महिला एजेंट ने इसके बाद उसके खाते में कुछ पैसे भी भेजे थे। बताया कि उसकी महिला से मोबाइल पर करीब 200 बार बातचीत हुई है। घंटों पूछताछ करने के बाद टीम आरोपी को लेकर रात में ही सिविल लाइन्स कोतवाली लेकर पहुंची। यहां बीईजी में ही अकाउंटेंट के पद पर तैनात दीपक गुप्ता की ओर से तहरीर दी गई। कोतवाली प्रभारी देवेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि तहरीर के आधार पर इमामी खान के खिलाफ शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923 के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है।

रात में ही रक्षा मंत्रालय की टीम आरोपी का मोबाइल अपने साथ दिल्ली ले गई। जबकि आरोपी अभी भी बीईजी में है, जिससे सेना के अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी इमाम खान रक्षा मंत्रालय के रडार पर पिछले कई महीनों से था। बताया जा रहा है कि मोबाइल की तकनीकी विश्लेषण में तथ्यों की पुष्टि होने के बाद टीम ने सोमवार की देर शाम रुड़की पहुंचकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की है।

रुड़की से हनीट्रैप से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी हनीट्रैप का मामला सामने आ चुका है। हालांकि, यह मामला रुड़की बीईजी से जुड़ा हुआ है। जबकि करीब चार साल पहले हनीट्रैप के तार भी रुड़की से जुड़े थे। दरअसल, हनीट्रैप के मामले में नागपुर डीआरडीओ में कार्यरत नेहरू नगर, रुड़की निवासी सीनियर इंजीनियर निशांत अग्रवाल को पाकिस्तान महिला को गोपनीय दस्तावेज भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय उत्तर प्रदेश एटीएस और मिलिट्री इंटेलीजेंस ने आरोपी के घर से एक लेपटाप बरामद किया था।

पूर्व CM हरीश रावत ने सोशल मीडिया में लिखा : थोड़ा विश्राम अच्छा है…

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देहरादून: EX सीएम हरीश रावत उत्तराखंड ही नहीं देश की राजनीति के ऐसे मंझे हुए खिलाड़ी रहे और हैं भी, जिनके बारे में शायद ही कोई ना जानता हो। हरदा राजनीति से दूरी बनाना तो चाहते हैं। लेकिन, बना नहीं पाते हैं। एक बार फिर हरदा ने राजनीति से दूरी बनाने के लिए थोड़ा विश्राम जरूरी है कि थ्योरी को अपनाया है।

आर्थिक, सांस्कृतिक व सामाजिक रूप से उत्तराखंड की क्षमता के संदर्भ में अपने मस्तिष्क में एक परिपक्व सोच पर आने के बाद ही मैं राज्य निर्माण के पक्ष में आया और पार्टी को भी लाने में लग गया। वर्ष 2000 से लगातार इस संदर्भ में मंथन किया। अवसर मिलने पर मैंने इस मंथन को 2014 से धरती पर उकेरना प्रारंभ किया। एक स्पष्ट कार्यक्रम आधारित सोच का परिणाम था कि जब हमने भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन व सचिवालय पर कार्य प्रारंभ किया और विधानसभा सत्र वहां आयोजित किए तो एक सर्वपक्षीय स्वीकारोक्ति उभर कर सामने आई। पहाड़ मैदान की बातें, आर्थिक व संस्कृतिक आधार पर विकसित सामाजिक सोच के आगे मिट गई। सभी सामाजिक क्षेत्रीय समूहों को गैरसैंण में अपना भविष्य दिखाई देने लगा।

चुनाव के पहले कांग्रेस पार्टी से बड़ा दल-बदल भी भाजपा को सत्ता में नहीं ला सकता था, यदि भाजपा के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद+मोदी जी के व्यक्तित्व को पुलवामा एवं बालाकोट से उत्पन्न प्रचंड आंधी और उत्तर प्रदेश में समाज को हिंदू व मुसलमान के रूप में बटने का लाभ नहीं मिला होता। यह प्रचंड अंधड़ भी कांग्रेस को वर्ष 2012 के चुनाव में प्राप्त वोटो को नहीं घटा पाया। परन्तु निर्दलीयों व दूसरे दलों को प्राप्त वोट भाजपा में जुड़ गये और भाजपा बहुत बड़े बहुमत से सत्ता में आ गई। चुनाव में कांग्रेस पार्टी के वोटों का यथावत बने रहना एक बड़ा संदेश था।

मैंने बड़ी हार के बावजूद इस संदेश को सहारा बनाया। मोदी+ संघ+भाजपा के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से चुनावी मुकाबले के लिए स्थानीय संस्कृति, परिवेश, पहचानों व विभिन्नताओं को राज्य की आर्थिकी का आधार बनाकर एक भावनात्मक आकार दिया “उत्तराखंडियत”। चुनाव में हार के बाद भी मैंने बड़ी श्रम साध्यता से इसे एक चुनावी हथियार के रूप में खड़ा किया। ताकि हम मोदी+ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का मुकाबला कर सकें। भाजपा के रणनीतिकारों ने इस रणनीति को समझा। प्रधानमंत्री जी ने मन की बात में मडुवा, बेड़ू, उत्तराखंडी टोपी आदि प्रतीकों के माध्यम से “हम भी हैं” का भाव पैदा किया।

कोई भी अस्त्र या कवच आधे अधूरे प्रयासों से निर्णायक असर पैदा नहीं करता है। मैं पार्टी को इस अस्त्र के साथ खड़ा नहीं कर पाया। यह मेरी विफलता थी। उत्तराखंडियत को लेकर पार्टी से एकजुटता के बजाए अन्यथा संदेश गया। अंततः जीतते-जीतते कांग्रेस हार गई। उत्तराखंड कांग्रेस अभी नहीं लगता अपने को बदलेगी! व्यक्ति को अपने को बदलना चाहिए। मैं इस निष्कर्ष पूर्ण सोच को आगे बढ़ाने के लिए आशीर्वाद मांगने भगवान बद्रीनाथ के पास गया था। भगवान के दरबार में मेरे मन ने मुझसे स्पष्ट कहा है कि हरीश आप उत्तराखंड के प्रति अपना कर्तव्य पूरा कर चुके हो। उत्तराखंडियत के एजेंडे को अपनाने व न अपनाने के प्रश्न को उत्तराखंड वासियों व कांग्रेस पार्टी पर छोड़ो! सक्रियता बहुधा ईर्ष्या व अनावश्यक प्रतिद्वंदिता पैदा करती है।

मेरा मन कह रहा है कि जिनके हाथों में बागडोर है उन्हें रास्ता बनाने दो। “भारत जोड़ो यात्रा” की समाप्ति के 1 माह बाद स्थानीय और राष्ट्रीय परिस्थितियों का विहंगम विवेचन कर मैं कर्म क्षेत्र व कार्यप्रणाली का निर्धारण करूंगा। थोड़ा विश्राम अच्छा है। फिर भारत जोड़ो यात्रा का इतना महानतम् कार्यक्रम है। हरिद्वार के प्रति मेरा कृतज्ञ मन अपने सामाजिक, सांस्कृतिक व वैयक्तिक संबंधों व निष्ठा को बनाए रखने की अनुमति देता है। मैं अपने घर गांव व कांग्रेसजनों को हमेशा उपलब्ध रहूंगा। पार्टी की सेवा हेतु मैं दिल्ली में एक छोटे से उत्तराखंडी बाहुल्य क्षेत्र में भी अपनी सेवाएं दूंगा। पार्टी जब पुकारेगी मैं, उत्तराखंड में भी सेवाएं देने के लिए उत्सुक बना रहूंगा।

खड़गे-थरूर के बीच रोचक मुकाबला, जानें कौन-कितना मजबूत

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कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर के बीच 17 अक्टूबर को चुनाव होना है। थरूर के खड़गे को वाद विवाद के लिए चुनौती और खड़गे का यह बयान कि वो चुनाव के ही पक्ष में नहीं थे, इस बीच कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को चुनाव संबंधी गाइडलाइन जारी किए हैं। पार्टी ने सभी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि किसी भी उम्मीदवार के खिलाफ कोई दुर्भावनापूर्ण अभियान न किया जाए, क्योंकि इससे पार्टी की छवि को नुकसान होगा।

मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार मन जा रहा है। पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि उन्हें गांधी परिवार का समर्थन है। इस बात को बढ़ावा और भी मिलता है, क्योंकि हाल ही में खड़गे ने राज्यसभा में नेता प्रतिविपक्ष के पद से इस्तीफा दिया था। दूसरी ओर शशि थरूर ने पार्टी नेताओं से आह्वान किया कि अगर पुरानी वाली कांग्रेस चाहिए तो खड़गे नहीं तो बदलाव के लिए उन्हें ही वोट दें।

इस बीच कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण द्वारा अध्यक्ष पद के लिए दिशा-निर्देशों जारी किए गए हैं। प्रदेश रिटर्निंग ऑफिसर (PRO) उनके संबंधित पीसीसी के मतदान अधिकारी होंगे, और वह मतदान केंद्रों पर व्यवस्था बनाए रखने और चुनाव को निष्पक्ष रूप से देखने के लिए जिम्मेदार होंगे।

दिशा निर्देशों में यह साफ तौर पर कहा गया है कि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर में से जिसे वो चाहते हैं वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं। AICC महासचिव या प्रभारी, सचिव या संयुक्त सचिव, PCC अध्यक्ष, CLP नेता, विभाग प्रमुख और सभी प्रवक्ताओं को उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने की अनुमति नहीं है।

नहीं बुला सकते बैठक
खड़गे और थरूर चुनाव में मतदान करने वाले प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल करने के लिए राज्यों का दौरा करेंगे। राज्य इकाई के अध्यक्ष उम्मीदवार के लिए कोई बैठक नहीं बुला सकते हैं, लेकिन उन्हें पीसीसी प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एक बैठक हॉल, कुर्सियों और अन्य उपकरण उपलब्ध करा सकते हैं।

उत्तराखंड: जबरन रिटायर होंगे रोडवेज के 70 कर्मचारी, पढ़ें रिपोर्ट

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देहरादून: उत्तराखंड परिवहन निगम से कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने की चर्चाएं जोरों पर थी। लेकिन, अब 70 कर्मचारियों को नौकरी से जबरन रिटायर करने का आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश के अनुसार इन सभी कर्मचारियों को 90 दिन के बाद रिटायर मान लिया जाएगा।

 

 

 

 

रोडवेज में 70 ड्राइवर-कंडक्टरों का नौकरी से हटना तय हो गया है। प्रबंधन ने सभी को जबरन रिटायर का नोटिस थमा दिया है। कर्मचारियों को 90 को दिन बाद सेवानिवृत्त समझा जाएगा।

 

दरअसल, यह कार्रवाई कर्मचारियों के रोडवेज प्रबंधन को दिए हलफनामे के बाद ही की गई है। निगम के 84 कर्मचारियों ने खुद को अक्षम करार देकर निगम कार्यालय में अटैच करा रखा था। अब इनमें से 14 कर्मचारियों को निगम ने बरकरार रखा है। जबकि, 70 कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने का फैसला लिया है।

 

जिन्हें 90 दिन बाद रिटायर समझा जाएगा। इससे रोडवेज के कर्मचारी संगठनों में आक्रोश है। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महामंत्री अशोक चौधरी का कहना है कि अक्षम कर्मचारियों को जबरन रिटायर करना उचित नहीं है। कहा कि रोडवेज में 500 ऐसे कर्मचारी हैं, जो अपने पद के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं।

शिंदे गुट के निशाने पर आदित्य ठाकरे, ऐसे कर रहे कमजोर

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शिवसेना के दोनों गुटों के बीच लगातार तेज हो रही है। अब एकनाथ शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे गुक को एक और झटका दिया है। पूर्व मंत्री और वर्ली विधानसभा सीट से विधायक आदित्य ठाकरे के क्षेत्र के 100 शिवसेना नेता और कार्यकर्ता एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। एक तरफ शिवसेना की ओर से दशहरा रैली की तैयारी की जा रही है, जिसके लिए हाई कोर्ट से उसने परमिशन हासिल की है।

वहीं, दूसरी तरफ नेताओं के टूटने से उसे करारा झटका लगा है। इस बीच उद्धव ठाकरे गुट ने एकनाथ शिंदे ग्रुप पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी ओर से जो दशहरा रैली की जानी है, वह चोरों की सभा है।

सामना के साप्ताहिक कॉलम रोक-टोक में शिवसेना ने एकनाथ शिंदे गुट की ओर से पार्टी पर दावे को लेकर कहा कि यह भाजपा की साजिश है। शिवसेना ने कहा कि खुद को पार्टी का दावेदार बताने के पीछे एकनाथ शिंदे का दिमाग नहीं है। इसके अलावा शिवसेना ने एकनाथ शिंदे पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि आप में हिम्मत है तो अलग पार्टी बनाकर दिखाओ। उद्धव ठाकरे गुट ने कहा कि ईडी के डर से एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को छोड़कर भाजपा के पास जाने का फैसला लिया।

 

बता दें कि बीएमसी की ओर से शिवसेना को शिवाजी पार्क में रैली की इजाजत नहीं मिल रही थी। इस पर शिवसेना ने हाई कोर्ट में अर्जी डाली थी और एकनाथ शिंदे ने भी अदालत का रुख किया था। यहां कोर्ट ने उद्धव ठाकरे गुट के पक्ष में फैसला दिया और बीएमसी को आदेश दिया कि नियमों के मुताबिक उन्हें रैली करने की इजाजत दी जाए।

एक दिन पहले ही यानी संडे को शिवसेना के 100 कार्यकर्ताओं के अलावा एकनाथ शिंदे गुट ने शरद पवार की पार्टी एनसीपी और राज ठाकरे की एमएनएस के लोगों को तोड़ने का भी दावा किया है। शिंदे गुट के नेताओं ने कहा कि तीनों दलों को मिलाकर कुल 1,000 नेताओं ने उनके साथ आने का फैसला लिया है।

 

ईरान से चीन जा रही फ्लाइट में बम! भारत ने सुखोई-30 किया तैनात

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ईरान से चीन की ओर जा रहे यात्री विमान में बम की खबर मिलने से हड़कंप मच गया। खबर है कि भारतीय हवाई क्षेत्र से उड़ान के वक्त बम का पता चला। हालांकि, अभी तक यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि जहाज में विस्फोटक मौजूद है या नहीं।

फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं और विमान की गतिविधियों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान से उड़ान भरने वाले महान एयरलाइन्स के विमान में लाहौल एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी ATC ने बम की जानकारी साझा की।

 

कहा जा रहा है कि विमान को भारत में दिल्ली या जयपुर में लैंड कराए जाने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिलहाल, विमान चीन के क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है।

कहा जा रहा है कि विमान में बम की खबर गलत हो सकती है। लाहौर एटीसी की तरफ से जानकारी मिलने के बाद ही भारतीय वायुसेना भी अलर्ट हो गई थी। खास बात है कि यह घटना ऐसे समय पर हुई जब राजस्थान के जोधपुर में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर यानी LCH के वायुसेना में शामिल होने की प्रक्रिया चल रही थी। जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद थे।

फ्लाइट रेडार 24 का डेटा बताता है कि दिल्ली-जयपुर हवाई क्षेत्र में आने के बाद प्लेन की ऊंचाई कम हुई थी। इधर, भारतीय पक्ष ने भी कार्रवाई करते हुए सुखोई विमान को तैनात कर दिया था।

अंकिता हत्याकांड : क्या सामने आएंगे रिसॉर्ट में एक्स्ट्रा सर्विस मांगने वाले नेताओं के नाम?

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देहरादून : अंकिता भंडारी हत्याकांड के दोषियों को फांसी की सजा दिलाने को लेकर जहां आज विभिन्न संगठनों ने उत्तराखंड बंद का आह्वान किया था, तो वहीं इस मामले में गठित स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) ने जांच को काफी हद तक पूरा कर लिया है। पुलिस रिमांड में आरोपियों से घटनास्थल की तस्दीक SIT करा चुकी है। पूछताछ में अब टीम की जांच VIP एंगल की ओर आगे बढ़ रही है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि क्या अंकिता मर्डर केस में एक्स्ट्रा सर्विस लेने रिसॉर्ट आने वाले VIP नेताओं के नाम कभी सामने भी आ पाएंगे या उनको यूं ही दफन कर दिया जाएगा।

SIT प्रभारी DIG (लॉ एंड ऑर्डर) पी रेणुका देवी ने हत्याकांड में तफ्तीश को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने हत्याकांड से जुड़े हर सवाल का जवाब दिया। अंकिता हत्याकांड में गठित SIT प्रभारी DIG पी रेणुका देवी ने कहा कि, इस मामले में पटवारी वैभव प्रताप सहित अन्य राजस्व अधिकारी से गहन पूछताछ की गई है। किसी की भी अभी गिरफ्तारी नहीं की गई है।

घटना से पहले रिसार्ट में VIP के आने की जानकारी अभी तक जांच में सामने नहीं आई है, लेकिन जांच जारी है। अभी तक पड़ताल में काली गाड़ी का कोई जिक्र या फिर तथ्य सामने नहीं आया है। वहां के विशेष कमरों में अगर कोई ठहरता है तो उसकी भी हम जानकारी जुटा रहे है।

DIG पी रेणुका देवी ने कहा कि, तीन दिन तक पुलकित और उसके साथियों को एसआईटी ने रिमांड पर रखकर गहन पूछताछ की है। इन तीन दिन में काफी गहन साक्ष्य जुटाए गए हैं। तीनों को ही घटनास्थल पर ले जाया गया है। इस वारदात की कैसे प्लानिंग की गई, कैसे घटना की गई इन तमाम बिंदुओं की जांच कर ली गई है। सीसीटीवी फुटेज में काफी साक्ष्य मिले हैं। DIG ने बताया कि रिजॉर्ट में ज्यादा मारपीट नहीं हुई, लेकिन वहां कुछ घटना जरूर हुई है। यह भी उसी रात का हिस्सा है, जिस रात को कत्ल हुआ।

मौके पर बुलडोजर की मौजूदगी को लेकर उन्होंने कहा कि SIT का गठन 24 सितंबर को हुआ था यह उससे पहले की घटना है। इस पर भी जांच चल रही है, काफी साक्ष्य हमें मिले हैं। हत्या का मकसद क्या है, इस पर भी काफी काम किया जा चुका है।

वहीं, आरोपी का मोबाइल पुलिस ने पहले ही बरामद कर लिया गया था। एक-दो मोबाइल और हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। DIG ने बताया कि प्रकरण की जांच-पड़ताल अंतिम चरण के आसपास है, तो जाहिर है कि जल्द ही इस मामले की चार्जशीट अदालत में दाखिल की जाएगी।

अंकिता हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए आरोपित रिसार्ट के मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भाष्कर व सहायक प्रबंधक अंकित (पुलकित) गुप्ता से पूछताछ की। SIT ने पुष्प व तीनों आरोपितों को आमने-सामने बैठाकर घंटों पूछताछ की। इसके बाद पुष्प को छोड़ दिया गया, जबकि आरोपितों को अलग-अलग जगह ले जाया गया।

सुरक्षा के बीच SIT तीनों आरोपितों को रात के समय घटनास्थल पर लेकर आई और सीन रीक्रिएट किया। बताया जा रहा है कि पुलकित ने फोन नहर में फेंकने की बात भी झूठी कही थी। रात भर फोन पुलकित के पास रिसार्ट में था, जब उसे एहसास हुआ कि फोन से वह फंस सकता है तो सुबह उसने फोन नहर में फेंक दिया।

 

अंकिता व पुष्प के बीच हुई Whatsapp चैट में जिस VIP गेस्ट का जिक्र किया गया है, उसके बारे में भी SIT ने पूछताछ की। हालांकि इस पूरे मामले को SIT ने गुप्त रखा हुआ है, क्योंकि इसमें कुछ नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में पूरी तरह से संलिप्तता सामने के बाद ही SIT किसी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

नकली दवाओं की सप्लाई पर रोक लगाने की कोशिशों में लगी सरकार, अब हर दवा पर होगा…

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मार्केट में आज कल नकली दवाओं की सप्लाई कुछ ज्यादा ही हो गई है। कंज्यूमर्स को पता भी नहीं चलता और उनको नकली दवा दे दी जाती है। ऐसे में इसकी बिक्री कम करने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। हाल ही में कुछ जगहों पर नकली दवाएं बेचने वालों का पर्दा फाश हुआ है। जिसको देखते हुए भारत सरकार ने फैसला लिया है कि अब से दवाओं की क्वालिटी सुनिश्चित करने के लिए सबसे अधिक बिकने वाली दवाओं को ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ योजना को अपनाना पड़ेगा।

इस योजना के अनुसार पहले तो कंपनी इन दवाओं की प्राथमिक उत्पाद पैकेजिंग करेगी। प्राथमिक उत्पाद पैकेजिंग यानी बोतल, कैन, जार या ट्यूब में पैकेजिंग। इसके बाद इन सभी प्राथमिक उत्पाद पैकेजिंग पर बारकोड या क्यूआर प्रिंट करेंगी। ताकि कोई भी कंज्यूमर आसानी से दावा की पूरी जानकारी हासिल कर सके। ऐसे में कंज्यूमर के दो फायदे होंगे। पहला ये कि उसको सही दावा मिलेगी और दूसरा ये कि इन दवाओं की उनको सही कीमत पता चलेगी। सूत्रों के अनुसार इन दवाओं में 100 रुपये प्रति स्ट्रिप से अधिक की एमआरपी वाली दवाओं को शामिल किया जाएगा।

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मिली जानकारी के अनुसार हाल ही में तेलंगाना ड्रग्स अथॉरिटी ने एक नकली दवा का पर्दा फाश किया है और जनता से इस दावा का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। बता दें कि ये दवा थायरॉयड को कंट्रोल करने की है। इसका नाम थायरोनॉर्म है, ये मार्केट में काफी बिकती है। ड्रग्स अथॉरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक ये दवा नकली पाई गई है। गौरतलब हैं कि इस दवा को बनाने वाली कंपनी ने भी कुबूल है कि थायरोनॉर्म नकली है।

दुर्गा पंडाल में भीषण त्रासदी: अपनों को ढूंढती दिखीं आंखें, मची चीख-पुकार

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भदोही के औराई कोतवाली से कुछ दूर स्थित एकता दुर्गा पूजा पंडाल में रविवार रात करीब आठ बजे आरती के समय आग लग गई। हादसे में एक बालक अंकुश सोनी (12) व महिला जयादेवी (45) समेत 5 की मौत हो गई और 64 से अधिक लोग झुलस गए। झुलसने वालों में महिलाएं और बच्चे ज्यादा हैं।

इन्हें सीएचसी व निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। यहां से 37 लोगों को वाराणसी रेफर कर दिया गया। इनमें 20 की हालत चिंताजनक है। हादसे की सूचना मिलते ही डीएम-एसपी व अन्य अधिकारी और दमकल टीम मौके पर पहुंच गई। डीएम गौरांग राठी और एसपी डॉ. अनिल कुमार मौके पर बचाव कार्य की निगरानी करते और जरूरी निर्देश देते रहे।

बाद में एडीजी जोन रामकुमार और विंध्याचल कमिश्नर योगेश्वर राम मिश्र भी पहुंचे। डीएम के मुताबिक, आशंका है कि शार्ट सर्किट से आग लगी है। दमकल टीम ने एक घंटे में आग पर काबू पाया। 150 से अधिक लोग मौजूद थे।

 

 

विराट से मिलने के लिए इस फैन ने पार की सभी हदें, एक सेल्फी के लिए दिए 23 हजार…

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फैंस अपने पसंदीदा सेलेब के मिलने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। अपने कई बार देखा होगा कि फैंस सिक्योरिटी को भी मात देते हुए अपने फेवरेट सेलेब से मिलने पहुंच जाते हैं। लेकिन विराट कोहली के इस फैन ने कुछ अलग किया। दरअसल, रविवार को गुवाहाटी में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच 20 का मैच खेला गया। इस बीच राहुल नाम के एक विराट के फैन ने उनसे मिलने के लिए और एक सेल्फी लेने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया।

मैच से पहले 29 सितंबर में टीम इंडिया बोरझार के लोकप्रिय गोपीनाथ एयरपोर्ट पहुंची थी। वहीं राहुल भी विराट से मिलने के लिए एयरपोर्ट पर पहुंचे थे, लेकिन कड़ी सुरक्षा के कारण वह विराट के नजदीक नहीं जा सके। जिसके बाद उन्होंने दूसरी कोशिश अब कि जब विराट प्रैक्टिस सेशन के लिए स्टेडियम गए थे। राहुल बताते हैं कि “मैं वहां हवाई अड्डे पर था, मैंने विराट को बाहर आते हुए देखा और शटल बस के पास पहुंचा।”

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वह बताते है कि “सिक्युरिटी ने मुझे एक बार भी उनके पास जाने या उनसे मिलने नहीं दिया। मुझे पता था, वो अगले चार दिनों के लिए शहर में रहेंगे। लिहाजा मुझे लगा कि प्रैक्टिस सेशन के दौरान बरसापारा स्टेडियम में उनसे मिलने का मौका मिल सकता है। लेकिन कड़ी सुरक्षा के चलते मुझे ये मौका नहीं मिला।” प्लान फ्लॉप होने के बाद उन्होंने कोई और तरकीब सोची जिससे वह विराट कोहली से मिल सकें। राहुल ने आखिर में दिमाग चलाया और उस ही होटल में एक रूम बुक किया जिसमें टीम इंडिया के खिलाड़ी मौजूद थे।

हालांकि ये उनको काफी भारी पड़ गया क्योंकि उनको इसके लिए 23,400 रुपए चुकाने पड़े। राहुल कहते हैं कि “मुझे लगता है कि मैं भाग्यशाली था कि मुझे एक खाली कमरा मिला। सुबह मैंने उन्हें ब्रेकफास्ट टेबल पर देखा। लेकिन सिक्युरिटी वाले वहां मुझे जाने नहीं दे रहे थे। मैं ये आखिरी मौका नहीं छोड़ना चाहता था। लिहाजा मैंने होटल वालों से कहा कि मुझे भूख लगी है और मेरी तबीयत ठीक नहीं है। उन्होंने मुझे नाश्ते के एरिया में जाने की अनुमति दी। खाने में मेरी सबसे कम दिलचस्पी थी। इसके बाद विराट से मुलाकात हो गई। उन्होंने मुझे ऑटोग्राफ दिया और एक सेल्फी क्लिक की।”