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दर्दनाक हादसा: कुएं में गिरी कार, एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत

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नासिक (महाराष्ट्र): नासिक जिले में शुक्रवार देर रात एक भीषण हादसे में एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हो गई। मृतकों में छह मासूम बच्चे भी शामिल हैं। घटना के बाद इलाके में शोक की लहर है।

पुलिस के अनुसार, हादसा रात करीब 10 बजे डिंडोरी कस्बे के शिवाजी नगर क्षेत्र में हुआ। दरगुड़े परिवार के सदस्य एक पारिवारिक समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे, तभी उनकी कार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित एक कुएं में जा गिरी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचा। बचाव कार्य के लिए क्रेन और तैराकों की मदद ली गई। काफी मशक्कत के बाद आधी रात को कार को कुएं से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक कार में सवार सभी लोगों की मौत हो चुकी थी।

पुलिस ने बताया कि मृतक Dindori तालुका के इंदोरे गांव निवासी दरगुड़े परिवार के सदस्य थे। मृतकों में सुनील दत्तू दरगुड़े (32), उनकी पत्नी रेशमा, आशा अनिल दरगुड़े (32) और परिवार के छह बच्चे शामिल हैं। बच्चों में पांच लड़कियां (उम्र 7 से 14 वर्ष) और एक 11 वर्षीय लड़का शामिल है।

सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में वाहन के नियंत्रण खोने को दुर्घटना की वजह माना जा रहा है।

उत्तराखंड दौरे पर रहेंगी कुमारी शैलजा, 8 से 12 अप्रैल तक कार्यकर्ताओं संग करेंगी मंथन

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देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा आगामी 8 अप्रैल से 12 अप्रैल तक पांच दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह विभिन्न जिलों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करेंगी।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, कुमारी शैलजा 8 अप्रैल को सुबह नई दिल्ली से रवाना होकर रुद्रपुर पहुंचेंगी, जहां वह जनपद उधमसिंह नगर में वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी। इसके बाद वह हल्द्वानी में रात्रि विश्राम करेंगी।

9 अप्रैल को हल्द्वानी स्थित स्वराज आश्रम में नैनीताल जनपद के सभी विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक आयोजित होगी। इसके पश्चात वह कोटद्वार पहुंचकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और जिला व महानगर पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगी तथा यहीं रात्रि विश्राम करेंगी।

10 अप्रैल को कोटद्वार में जिला और महानगर कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद वह हरिद्वार के जयराम आश्रम में हरिद्वार महानगर, हरिद्वार ग्रामीण, रुड़की महानगर और रुड़की ग्रामीण के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगी। शाम को हरिद्वार में गंगा आरती में भी शामिल होंगी। इसके बाद देहरादून में रात्रि विश्राम करेंगी।

11 अप्रैल को वह देहरादून से मसूरी के लिए प्रस्थान करेंगी और नगर कांग्रेस कमेटी मसूरी के कार्यक्रम में भाग लेंगी। इसके बाद देहरादून में महानगर कांग्रेस, परवादून और पछुआदून जिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी। साथ ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय राजीव भवन में युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, अल्पसंख्यक विभाग, अनुसूचित जाति विभाग और पूर्व सैनिक विभाग के पदाधिकारियों के साथ भी बैठक करेंगी। रात्रि विश्राम देहरादून में ही होगा।

दौरे के अंतिम दिन 12 अप्रैल को देहरादून में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) द्वारा आयोजित “जय भीम, जय हिंद” कार्यक्रम में भाग लेने के बाद कुमारी शैलजा दोपहर 3 बजे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगी।

उत्तराखंड: धामी सरकार ने जारी की दायित्वधारियों की एक और सूची, इनको मिली जिम्मेदारी

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देहरादून: उत्तराखंड की धामी सरकार में इन दिनों नए दायित्वों की घोषणाओं का सिलसिला तेज हो गया है। विभिन्न समितियों और परिषदों में लगातार नियुक्तियां की जा रही हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है।

सरकार द्वारा जारी ताजा नियुक्तियों में कई भाजपा नेताओं और वरिष्ठ व्यक्तियों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। नैनीताल निवासी वरिष्ठ पत्रकार ध्रुव रौतैला को मीडिया सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं टिहरी के विनोद सुयाल को युवा कल्याण सलाहकार समिति में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।

इसी क्रम में चंपावत से मुकेश महराना को चाय विकास सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। कुलदीप सिंह बुटोला को उत्तराखंड राज्य स्तरीय खेल परिषद का अध्यक्ष बनाया गया है।

इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रमुख खेम सिंह चौहान को उत्तराखंड ओबीसी आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है। टिहरी गढ़वाल की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सोना सजवाण को जड़ी-बूटी सलाहकार समिति में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सरकार ने चारु कोठारी को राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि चंपावत निवासी सुश्री हरिप्रिया जोशी को उत्तराखंड राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष बनाया गया है।

लगातार हो रही इन नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। विपक्ष जहां इसे राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश बता रहा है, वहीं सरकार इसे अनुभव और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देने वाला कदम बता रही है।

उपनल कर्मचारियों के लिए नए अनुबंध प्रावधान पर सियासत तेज, कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

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देहरादून: उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने राज्य सरकार पर कर्मचारियों के साथ “विश्वासघात” करने का आरोप लगाया है।

देहरादून में पत्रकारों से बातचीत करते हुए धस्माना ने कहा कि सरकार ने नियमितीकरण और समान वेतन देने के बजाय कर्मचारियों के लिए नया अनुबंध लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे उनकी नौकरी और अधिक असुरक्षित हो जाएगी। उन्होंने इसे कर्मचारियों के अधिकारों के खिलाफ बताया और कहा कि यह कदम न्यायपालिका के निर्देशों की अनदेखी जैसा है।

धस्माना के अनुसार, 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके उपनल कर्मचारियों के लिए जारी अनुबंध में कई ऐसी शर्तें हैं, जो उनके हितों के विपरीत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को स्थायी लाभों से वंचित रखा जा रहा है, जबकि सेवा समाप्ति और तबादले जैसे मामलों में प्रबंधन को अधिक अधिकार दिए गए हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार द्वारा पूर्व में किए गए नियमितीकरण के वादे पूरे नहीं हुए हैं, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों में निराशा है। उन्होंने इस मुद्दे को हजारों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा बताते हुए इसे “अधिकार और सम्मान की लड़ाई” करार दिया।

साथ ही, धस्माना ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी उपनल कर्मचारियों के समर्थन में खड़ी है और इस मुद्दे को लेकर आगे भी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

UCC के बाद उत्तराखंड में जनसंख्या नियंत्रण कानून की तैयारी, 2027 चुनाव से पहले बड़ा फैसला संभव

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देहरादून। Uttarakhand देश का पहला राज्य बन चुका है जहां Uniform Civil Code (यूसीसी) लागू किया गया है। अब राज्य सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दे रही है।

सरकार का कहना है कि प्रदेश में डेमोग्राफिक बदलाव को संतुलित रखना, सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना और अवैध घुसपैठ पर रोक लगाना उसकी प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या नियंत्रण कानून पर मंथन तेज हो गया है।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा

राज्य में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। Bharatiya Janata Party जहां लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की रणनीति बना रही है, वहीं Indian National Congress भी वापसी के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। ऐसे में चुनाव से पहले इस कानून पर ठोस निर्णय लिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि राज्य की जनसांख्यिकी और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू करने के बाद अब अन्य महत्वपूर्ण कानूनों पर भी विचार किया जा रहा है और व्यापक चर्चा के बाद ही आगे कदम बढ़ाया जाएगा।

‘ऑपरेशन प्रहार’ से अपराधियों पर सख्ती

प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर चलाए जा रहे Operation Prahar पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान से अपराधियों में डर का माहौल बना है। पुलिस द्वारा चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत गैंगस्टर और गंभीर मामलों में शामिल आरोपियों की लगातार धरपकड़ की जा रही है।

पौड़ी गढ़वाल में गुलदार आतंक, ग्रामीणों में आक्रोश, मौके पर पहुंचे कवींद्र इष्टवाल

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चौबट्टाखाल (पौड़ी गढ़वाल): जनपद पौड़ी गढ़वाल में गुलदारों के हमलों का सिलसिला एक बार फिर से बढ़ गया है। इस बार चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के तिमलीखाल अंतर्गत ग्राम भतकोट में एक चार वर्षीय मासूम बच्ची गुलदार का शिकार बन गई। इस दर्दनाक घटना से पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल छा गया है।

घटना बुधवार रात करीब 9 बजे की बताई जा रही है। भतकोट निवासी हरेंद्र सिंह की पुत्री श्रष्टि घर में खाना खाने के बाद आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक हमला कर बच्ची को अपने जबड़ों में दबोच लिया और खेतों की ओर ले गया। परिजनों के शोर मचाने पर ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्ची की तलाश शुरू की। काफी देर की खोजबीन के बाद बच्ची का शव घर से कुछ दूरी पर झाड़ियों में बरामद किया गया।

परिवार व ग्रामीणों में शोक, सरकार-वन विभाग पर सवाल

इस घटना से पूरे गांव में कोहराम मच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले कई महीनों से जंगली जानवरों, खासकर गुलदारों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन न वन विभाग और न ही प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते उचित उपाय किए जाते तो इस दुर्घटना को रोका जा सकता था।

सामाजिक कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश सचिव कवींद्र इस्टवाल घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और हृदयविदारक घटना है। क्षेत्र में लंबे समय से मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है, लेकिन इसे न तो विधानसभा सत्र में मजबूती से उठाया गया और न ही इसके समाधान के लिए कोई प्रभावी कार्ययोजना बनाई गई।”

विधायक पर भी नाराजगी

स्थानीय लोगों में चौबट्टाखाल क्षेत्र के विधायक के प्रति भी काफी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक ने इस गंभीर मुद्दे को विधानसभा में प्रभावी ढंग से नहीं उठाया। उन्होंने मांग की है कि अब देर न की जाए और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल गश्त बढ़ाई जाए, जाल लगाए जाएं और दीर्घकालिक समाधान निकाला जाए।

कवींद्र इस्टवाल ने वन विभाग और जिला प्रशासन से अपील की है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और प्रभावित क्षेत्रों में वन्यजीवों के हमलों को रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई करें।

पौड़ी गढ़वाल में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष

बता दें कि पौड़ी गढ़वाल जिले के कई इलाकों में पिछले कुछ वर्षों से गुलदार, भालू और अन्य वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं लगातार हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वनों के लगातार सिकुड़ने और जंगली जानवरों के आवास क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों के बढ़ने से यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।

प्रशासन से ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित गांवों में सौर ऊर्जा से चलने वाली बाड़बंदी, नियमित गश्त, जागरूकता कार्यक्रम और जरूरत पड़ने पर समस्या पैदा करने वाले जानवरों को पकड़कर अन्यत्र स्थानांतरित करने की कार्यवाही तेज की जाए।

पीड़ित परिवार को सहायता और मुआवजे की मांग

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने शव का कब्जा लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।

 

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: NCERT को मिला ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने University Grants Commission (यूजीसी) की सिफारिश पर National Council of Educational Research and Training (एनसीईआरटी) को “डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी” का दर्जा दे दिया है। इस फैसले के बाद अब एनसीईआरटी को विश्वविद्यालय की तरह शैक्षणिक और शोध गतिविधियां संचालित करने की स्वायत्तता मिलेगी, हालांकि इसके साथ कई महत्वपूर्ण शर्तें भी लागू की गई हैं।

प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिला दर्जा

एनसीईआरटी ने वर्ष 2025 में सभी निर्धारित शर्तों को पूरा करने की रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके बाद यूजीसी की विशेषज्ञ समिति ने जांच कर इसे सही पाया। जनवरी 2026 में हुई यूजीसी की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिली, जिसके बाद केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसे लागू कर दिया।

छह प्रमुख संस्थान शामिल

इस विशेष दर्जे के तहत एनसीईआरटी के छह प्रमुख क्षेत्रीय संस्थानों को शामिल किया गया है। ये संस्थान Ajmer, Bhopal, Bhubaneswar, Mysuru, Shillong और भोपाल स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान हैं। इन सभी को मिलाकर एनसीईआरटी को एक विशिष्ट श्रेणी में विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है।

सख्त शर्तों के साथ मिली स्वायत्तता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि एनसीईआरटी अपनी संपत्ति या फंड बिना अनुमति के ट्रांसफर नहीं कर सकेगा और न ही किसी लाभ कमाने वाली गतिविधि में शामिल होगा। सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक फैसले यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही होंगे।

कोर्स और एडमिशन पर नियम लागू

एनसीईआरटी को नए कोर्स, ऑफ-कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस शुरू करने के लिए तय नियमों का पालन करना होगा। साथ ही, एडमिशन प्रक्रिया, सीटों की संख्या और फीस संरचना भी नियामक संस्थाओं के दिशा-निर्देशों के अनुसार तय की जाएगी।

रिसर्च और गुणवत्ता पर फोकस

नई व्यवस्था के तहत एनसीईआरटी को शोध कार्य, पीएचडी कार्यक्रम और शैक्षणिक नवाचार को बढ़ावा देना होगा। इसके साथ ही NAAC और NBA से मान्यता लेना अनिवार्य होगा। संस्थान को हर साल National Institutional Ranking Framework (NIRF) रैंकिंग में भी भाग लेना होगा, ताकि उसकी गुणवत्ता और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा सके।

जहरीली स्प्रिट से मौतों का सिलसिला जारी, चार की गई जान, कई बीमार

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मोतिहारी । जिले के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र स्थित बालगंगा गांव में जहरीली स्प्रिट (शराब) पीने से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक, अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि गुरुवार को एक व्यक्ति की मौत के बाद शुक्रवार सुबह तुरकौलिया थाना क्षेत्र के शंकर सरैया परसौना निवासी प्रमोद यादव, परीक्षण मांझी और हीरालाल महतो ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सभी का उपचार शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था।

स्प्रिट को शराब समझकर पीने से बिगड़ी हालत
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गांव के कुछ लोगों ने स्प्रिट को शराब समझकर उसका सेवन कर लिया। सेवन के कुछ ही समय बाद सभी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। परिजनों ने आनन-फानन में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन कई लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। वहीं, कुछ पीड़ित अभी भी चोरी-छिपे इलाज करा रहे हैं।

आंखों की रोशनी पर असर, बढ़ी चिंता
डॉक्टरों के मुताबिक, जहरीली स्प्रिट के सेवन से सबसे पहले आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। इस घटना में एक व्यक्ति की आंखों की रोशनी जाने की भी खबर है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अन्य मरीजों का इलाज चिकित्सकों की निगरानी में जारी है।

गांव में दहशत और आक्रोश
घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब और स्प्रिट का कारोबार चल रहा है, लेकिन प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

पुलिस जांच शुरू, छापेमारी जारी
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के सही कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। साथ ही अवैध शराब के धंधे में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं, राघव चड्ढा का मैसेज

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नई दिल्ली। Raghav Chadha को Aam Aadmi Party द्वारा राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार (3 अप्रैल) को उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। सुबह करीब 10 बजे जारी किए गए एक वीडियो संदेश में चड्ढा ने कहा, “मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या उनसे कोई गलती हुई है।

दरअसल, पार्टी ने हाल ही में बड़ा फैसला लेते हुए राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटा दिया और उनकी जगह सांसद Ashok Mittal को जिम्मेदारी सौंपी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी कहा है कि अब चड्ढा को सदन में बोलने के लिए पार्टी कोटे से समय न दिया जाए।

इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर मतभेद और राजनीतिक रणनीति में बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर हटाने की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। चड्ढा का यह वीडियो संदेश ऐसे समय आया है जब उनके राजनीतिक भविष्य और पार्टी में भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

उत्तराखंड : घर के आंगन में खेल रही 4 साल की बच्ची को गुलदार ने बना लिया निवाला

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चौबट्टाखाल (पौड़ी): उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में गुलदार (तेंदुआ) का आतंक एक बार फिर सिर उठा गया है। चौबट्टाखाल क्षेत्र के ग्राम सभा तिमली के भतकोट गांव में गुरुवार रात करीब 9 बजे एक दिल दहला देने वाली घटना हुई, जिसमें घर के आंगन में खेल रही 4 वर्षीय दृष्टि नाम की बच्ची को गुलदार ने जबड़े में जकड़कर खींच ले गया। बाद में बच्ची का शव घर से कुछ दूरी पर झाड़ियों में बुरी तरह क्षत-विक्षत हालत में बरामद किया गया।

मृतका दृष्टि ग्राम भतकोट निवासी हरेंद्र सिंह की बेटी थी। परिजनों ने बताया कि बच्ची रात का खाना खाने के बाद घर के आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक हमला कर दिया और उसे जबड़े में दबोच लिया। गुलदार बच्ची को आंगन से खींचकर नीचे खेतों की ओर ले गया। परिजनों के शोर मचाने और चीख-पुकार पर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बच्ची की तलाश शुरू कर दी। काफी मशक्कत के बाद घर से थोड़ी दूरी पर झाड़ियों में दृष्टि का शव मिला।

ग्रामीणों में दहशत

इस घटना से पूरे गांव में कोहराम मच गया है। ग्रामीणों ने बताया कि भतकोट और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार का आतंक पहले भी देखा गया है, लेकिन इतने छोटी बच्ची पर घर के आंगन में हमला होना अत्यंत चिंताजनक है। लोग अब रात में घर से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वन अधिकारी ने बताया कि गुलदार को पकड़ने या खदेड़ने के लिए जाल बिछाए जा रहे हैं और ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं।

पहाड़ों में बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष

यह घटना पौड़ी गढ़वाल में हाल के दिनों में गुलदार के हमलों की कड़ी में नई है। इससे पहले भी चौबट्टाखाल और आसपास के इलाकों में तेंदुए के हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें बच्चे और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन से ग्रामीणों ने मांग की है कि गुलदार के आतंक को तुरंत नियंत्रित किया जाए, अन्यथा ऐसे हादसे और बढ़ सकते हैं।