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उत्तराखंड : गुलदार ने 5 साल के बच्चे को बनाया निवाला, स्कूलों और आंगनबाड़ियों में छुट्टी घोषित

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रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के सिंद्रवाणी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। एक पांच साल के मासूम बच्चे को गुलदार (तेंदुआ) ने उसकी मां के हाथ से खींचकर जंगल में ले गया। बच्चे की तलाश जारी है, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। इस घटना के बाद प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बुधवार और गुरुवार (4-5 फरवरी) को क्षेत्र के 8 स्कूलों और सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया है।

ये स्कूल रहेंगे बंद 

  1. राजकीय प्राथमिक विद्यालय चमसील।
  2. राजकीय प्राथमिक विद्यालय सारी।
  3. राजकीय प्राथमिक विद्यालय सिंद्रवाणी।
  4. राजकीय प्राथमिक विद्यालय झालीमठ।
  5. राजकीय प्राथमिक विद्यालय छिनका।
  6. राजकीय प्राथमिक विद्यालय हिलोरीधार।
  7. राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय छिनका।
  8. जनता हाई स्कूल ककोड़ाखाल।

स्कूलों के आसपास संचालित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में भी दो दिन का अवकाश रहेगा। घटना के बारे में जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा रुद्रप्रयाग तहसील के न्याय पंचायत सारी अंतर्गत सिंद्रवाणी गांव में मंगलवार दोपहर को हुआ। बच्चा अपनी मां के साथ घर के बाहर खेल रहा था, तभी अचानक गुलदार ने बच्चे को पकड़कर जंगल की ओर खींच लिया। मां के चीखने-चिल्लाने पर आसपास के ग्रामीण दौड़े, लेकिन गुलदार बच्चे को लेकर जंगल में गायब हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने तुरंत बच्चे की तलाश शुरू कर दी। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन, वन विभाग की टीम, एसडीआरएफ और स्थानीय निवासियों ने मिलकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। अभी तक बच्चे का कोई पता नहीं चला है। पूरा गांव भय और चिंता में डूबा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में गुलदारों के हमले पहले भी हो चुके हैं, लेकिन इस बार बच्चे को उठा ले जाना बेहद दुखद है।

जिला पंचायत सदस्य जयवर्धन काण्डपाल ने कहा, “जंगली जानवरों और मानव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। गांवों में बच्चे और महिलाएं डर के मारे घर से बाहर नहीं निकल पा रहे। प्रशासन को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए, जैसे गुलदारों को पकड़कर जंगल में छोड़ना या स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में गुलदारों की संख्या बढ़ने के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं। विभाग ने ट्रैप कैमरे लगाए हैं और रेस्क्यू टीम को सक्रिय किया है। सर्च ऑपरेशन में ड्रोन का भी उपयोग किया जा रहा है। प्रशासन ने स्कूलों और आंगनबाड़ियों में अवकाश घोषित कर बच्चों को घर पर रखने की अपील की है। साथ ही ग्रामीणों से सतर्क रहने और अकेले बच्चों को बाहर न भेजने की सलाह दी है।

उत्तराखंड : PWD ने PTCUL के अधिशासी अभियंता और ठेकेदार पर दर्ज कराया मुकदमा

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देहरादून: उत्तराखंड पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (PTCUL) द्वारा देहरादून के आराघर में निर्माणाधीन 132 केवी सबस्टेशन के लिए 132 केवी माजरा-लालतप्पड़ लाइन के LILO कार्य के तहत की जा रही सड़क खुदाई में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अस्थाई खंड, ऋषिकेश ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें ठेकेदार, कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। विभाग का आरोप है कि अनुमति की शर्तों का घोर उल्लंघन किया जा रहा है, जिससे यातायात बाधित हो रहा है, प्रदूषण फैल रहा है और सड़क सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

PWD के अधिशासी अभियंता इंजीनियर भृगुनाथ द्विवेदी ने नेहरू कॉलोनी थाने में LF-1 (एकीकृत जांच फॉर्म-1) के तहत दर्ज कराई गई शिकायत में कहा है कि जिला समन्वय समिति, देहरादून ने 1 जनवरी 2026 को PTCUL को सशर्त सड़क कटिंग की अनुमति दी थी। अनुमति के अनुसार, खुदाई कार्य यातायात को प्रभावित किए बिना, किनारे से की जानी थी और खुदाई के बाद उचित कॉम्पैक्शन व समतलीकरण किया जाना था। लेकिन मौके पर स्थिति बिल्कुल उलट पाई गई है।

शिकायत में उल्लिखित प्रमुख अनियमितताएं इस प्रकार हैं:

  1. अव्यवस्थित खुदाई और यातायात बाधा: खुदाई के बाद मिट्टी का उचित कॉम्पैक्शन नहीं किया गया, जिससे सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इससे यातायात एक तरफ शिफ्ट हो रहा है, जाम लग रहा है और आवागमन प्रभावित हो रहा है।
  2. गलत जगह पर खुदाई: अनुमति के मुताबिक खुदाई सड़क के किनारे से होनी थी, लेकिन सेंटर लाइन के पास की गई है। इससे मिट्टी दब गई है और सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह बंद हो गया है। साथ ही, सड़क पर प्रस्तावित रोड ओवर ब्रिज (ROB) के पिलर्स मध्य में होने के कारण बीच में कोई यूटिलिटी लाइन डालना वर्जित है, लेकिन PTCUL ने निर्धारित Alignment से हटकर कार्य किया है।
  3. सुरक्षा और सूचना की कमी: कार्य स्थल पर कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। धूल नियंत्रण के लिए कोई उपाय नहीं किए गए, जिससे प्रदूषण फैल रहा है और स्थानीय व्यापारियों व आम नागरिकों से फोन पर शिकायतें आ रही हैं।
  4. अधिक चौड़ाई में खुदाई: अनुमति के समय 1.30 मीटर चौड़ाई बताई गई थी, लेकिन मौके पर 2.50 मीटर से अधिक चौड़ाई में खुदाई की गई है। इससे सड़क अधिक क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क सुरक्षा के प्रावधान जैसे कैट आई और थर्मोप्लास्ट पेंट मार्किंग को नुकसान पहुंचा है।

शिकायत में फोटोग्राफ्स भी संलग्न किए गए हैं, जो इन अनियमितताओं को साबित करते हैं। अधिशासी अभियंता ने बताया कि स्थानीय समाचार पत्रों में इस अव्यवस्थित कार्य की खबरें प्रकाशित होने के बाद क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) ने स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद उप जिलाधिकारी (न्यायिक) और प्रभारी अधिकारी, परियोजना समन्वय समिति, देहरादून ने 2 फरवरी 2026 को पत्र जारी कर कार्य पर रोक लगा दी। जिलाधिकारी ने भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

द्विवेदी ने कहा, “इस लापरवाही से लोक मार्ग को भारी नुकसान पहुंचा है, आवागमन सुचारू नहीं है और क्षेत्रीय निवासियों में रोष व्याप्त है। हमने संबंधितों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में कार्रवाई की मांग की है।” शिकायत की प्रतिलिपि जिलाधिकारी देहरादून, अधीक्षण अभियंता नवम वृत्त PWD देहरादून और अन्य अधिकारियों को भेजी गई है।

PTCUL के प्रवक्ता से संपर्क करने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन सूत्रों का कहना है कि विभाग अनुमति की शर्तों का पालन करने का दावा कर रहा है। यह घटना सड़क खुदाई कार्यों में सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी को उजागर करती है। पुलिस ने शिकायत पर जांच शुरू कर दी है और जल्द ही FIR दर्ज होने की संभावना है। इस मामले से देहरादून-ऋषिकेश मार्ग पर यातायात प्रभावित होने से हजारों यात्रियों को परेशानी हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट में SIR पर सुनवाई थोड़ी देर में, कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी, CM रहते केस लड़ने पहली महिला नेता

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। उन्होंने चुनाव आयोग के इस अभियान को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है और कोर्ट से अनुरोध किया है कि 2026 के विधानसभा चुनाव पुरानी मतदाता सूची (2025 वाली) के आधार पर ही कराए जाएं।

ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास से सुबह सुप्रीम कोर्ट के लिए रवाना हुईं। कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ आज इस मामले की सुनवाई कर रही है। ममता बनर्जी ने खुद कोर्ट में पेश होने के साथ-साथ मामले की बहस खुद करने की अनुमति मांगी है। यदि अनुमति मिलती है, तो वे किसी बैठे मुख्यमंत्री के रूप में सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से बहस करने वाली पहली व्यक्ति बन सकती हैं।

ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया मनमानी, अपर्याप्त तैयारी वाली और लाखों योग्य मतदाताओं को वंचित करने वाली है। उन्होंने दावा किया है कि यह अभियान चुनाव आयोग द्वारा समय से पहले और बिना उचित वैधानिक आधार के चलाया जा रहा है, जो लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। याचिका में प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, चुनाव आचरण नियम 1961 और संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला दिया गया है।

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची दिसंबर 2025 में जारी की गई थी, जिसमें 58 लाख से अधिक नामों को हटाया गया है। इनमें मृत्यु, प्रवासन या गैर-उपस्थिति जैसे कारण बताए गए हैं। तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है और कहा है कि इससे विशेष रूप से आम लोगों, अल्पसंख्यकों और TMC समर्थकों को नुकसान पहुंच रहा है।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर चुका है। जनवरी 2026 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए थे कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाली सूची में आए मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं, प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और आम लोगों पर अनावश्यक तनाव न डाला जाए। कोर्ट ने सुनवाई केंद्रों को विकेंद्रीकृत करने, लिखित रसीद देने और अधिकृत प्रतिनिधियों की अनुमति जैसे निर्देश जारी किए थे।

ममता बनर्जी ने पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर SIR रोकने की मांग की थी और इसे “अमानवीय” बताया था। उन्होंने कहा था कि इस प्रक्रिया से लोगों में डर का माहौल है और कुछ मामलों में मौतें भी हुई हैं। TMC सांसदों और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं के साथ यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। चुनाव आयोग ने SIR को मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने की जरूरी प्रक्रिया बताया है। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 तक प्रकाशित होने वाली है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अप्रैल-मई 2026 में संभावित हैं।

ऑनलाइन गेमिंग की लत, तीन सगी नाबालिग बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर दी जान

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गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के टीला मोड़ थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। भारत सिटी सोसायटी के बी-1 टावर की नौवीं मंजिल से तीन सगी नाबालिग बहनों ने मंगलवार देर रात करीब 2 बजे छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। तीनों बहनों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे परिवार में कोहराम मच गया।

मृतक बहनों की पहचान निशिका (16 वर्ष), प्राची (14 वर्ष) और पाखी (12 वर्ष) के रूप में हुई है। ये तीनों चेतन कुमार की बेटियां थीं, जो ऑनलाइन ट्रेडिंग का काम करते हैं। परिवार तीन वर्ष से भारत सिटी सोसायटी में किराए के मकान (फ्लैट नंबर 907) में रह रहा था और मूल रूप से दिल्ली का निवासी है।

पुलिस के अनुसार, सूचना मिलते ही टीला मोड़ पुलिस और एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। शवों को कब्जे में लेकर लोनी के जॉइंट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने मोबाइल फोन सहित अन्य सामग्री जब्त कर जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें कोरोना महामारी के बाद से स्कूल नियमित रूप से नहीं जा रही थीं और पढ़ाई छोड़ चुकी थीं। वे पिछले कुछ महीनों से ऑनलाइन गेम की आदी हो गई थीं, खासकर एक टास्क-बेस्ड कोरियन लवर गेम (Korean Lover गेम) खेलने की लत लग गई थी। परिवार द्वारा बार-बार गेम खेलने से मना करने पर वे नाराज रहती थीं। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि घटनास्थल पर एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें बहनों ने माता-पिता से माफी मांगी है और गेम का जिक्र किया है। पुलिस इस नोट और मोबाइल की जांच कर रही है कि क्या गेम में कोई टास्क पूरा करने के लिए यह कदम उठाया गया।

एसीपी अतुल कुमार सिंह ने बताया, “रात करीब 2:15 बजे सूचना मिली कि भारत सिटी टावर बी-1 की नौवीं मंजिल की बालकनी से तीन बच्चियां कूद गई हैं। मौके पर निशिका, प्राची और पाखी की मौत हो चुकी थी। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है।”

यह घटना ऑनलाइन गेमिंग की लत और बच्चों की मानसिक सेहत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के बाद बच्चों में डिजिटल एडिक्शन बढ़ा है, जिस पर परिवार और समाज को सतर्क रहने की जरूरत है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और अभी तक अन्य कोई कारण सामने नहीं आया है।

लोकसभा में राहुल गांधी का हमला, ‘ट्रेड डील से किसानों को नुकसान, एपस्टीन फाइल्स और अडाणी केस से PM पर दबाव

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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका-भारत ट्रेड डील के पीछे PM पर भारी दबाव है, जिसकी वजह से उन्होंने देश के हितों को बेच दिया है। राहुल ने आरोप लगाया कि एपस्टीन फाइल्स और अमेरिका में अडाणी पर चल रहे केस के कारण मोदी ‘कंपरोमाइज्ड’ हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हर बात मान रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में पहली बार विपक्ष के नेता को सदन में बोलने नहीं दिया गया, जो लोकतंत्र पर हमला है।

राहुल गांधी ने सदन में कहा, “मोदी जी घबराए हुए हैं। पिछले कुछ महीनों से रुका हुआ अमेरिका-भारत व्यापार समझौता कल रात नरेंद्र मोदी ने साइन कर दिया। उन पर बहुत दबाव है। नरेंद्र मोदी की छवि खराब हो सकती है। मुख्य बात यह है कि हमारे प्रधानमंत्री की छवि खराब हो गई है। जनता को इस बारे में सोचना चाहिए। पहली बार राष्ट्रपति के भाषण में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया गया। नरेंद्र मोदी जी ने इस व्यापार समझौते में आपकी मेहनत बेच दी है क्योंकि उनकी छवि खराब हो गई है।

उन्होंने देश को बेच दिया है। नरेंद्र मोदी जी डरे हुए हैं क्योंकि जिन्होंने उनकी छवि बनाई, वही अब उसे बिगाड़ रहे हैं… अमेरिका में अडाणी पर केस चल रहा है, असल में यह मोदी जी पर ही केस है… एपस्टीन फाइल्स में और भी बहुत कुछ है जो अमेरिका ने अभी तक जारी नहीं किया है। इसकी वजह से भी दबाव है। ये दो मुख्य दबाव बिंदु हैं। देश को यह समझना चाहिए।” राहुल ने जोर देकर कहा कि इस ट्रेड डील से भारत के किसानों और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान होगा, क्योंकि मोदी ने अमेरिका के दबाव में आकर इसे स्वीकार किया। उन्होंने दावा किया कि PM की छवि को बचाने के लिए देश के हितों का सौदा किया गया है।

इससे पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि सरकार को संसद को विश्वास में लेना चाहिए और ट्रेड डील के पूरे मसौदे दोनों सदनों में रखकर व्यापक चर्चा करानी चाहिए। रमेश ने कहा, “एक साल पहले, प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति ट्रंप के दोबारा चुने जाने पर उन्हें बधाई देने के लिए व्हाइट हाउस पहुंचे थे। वहां उन्होंने अपनी मशहूर झप्पी कूटनीति का पूरा प्रदर्शन किया। भारत-अमेरिका संबंध इससे पहले कभी इतने संभावनाओं से भरे नहीं लगे थे।”

उन्होंने आगे कहा, “इसके तुरंत बाद एक ट्रेड डील के लिए बातचीत शुरू हुई। लेकिन 10 मई, 2025 की शाम को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की पहली घोषणा किए जाने के बाद से हालात बिगड़ने लगे। इसके बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ निकटता दिखाते हुए फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की गर्मजोशी से मेजबानी की, जिससे प्रधानमंत्री मोदी की खोखली झप्पी कूटनीति की पोल खुल गई। रमेश ने दावा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय समयानुसार सोमवार देर रात व्यापार समझौते की घोषणा की और इससे स्पष्ट है कि मोदी ने पूरी तरह समर्पण कर दिया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप को खुश करने की नीति से भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।

देहरादून गुंजन हत्याकांड: लापरवाही पर SSP की कार्रवाई, चौकी प्रभारी सस्पेंड

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देहरादून: राजधानी देहरादून के व्यस्त मच्छी बाजार (दूल्हा बाजार/पलटन बाजार क्षेत्र) में सोमवार सुबह करीब 10-11 बजे दिनदहाड़े 23 वर्षीय युवती गुंजन श्रीवास्तव की निर्मम हत्या ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। आरोपी आकाश कुमार (27) ने धारदार हथियार (चापड़) से गुंजन का गला रेत दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद बाजार में अफरा-तफरी मच गई, व्यापारियों ने विरोध में बाजार बंद कर दिया और गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर नारेबाजी की, जिसके कारण अतिरिक्त फोर्स बुलानी पड़ी।

एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया जांच में खुड़बुड़ा चौकी स्तर पर गंभीर लापरवाही सामने आई। गुंजन ने 31 जनवरी को ही आरोपी के खिलाफ जान का खतरा बताते हुए खुड़बुड़ा चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आकाश द्वारा धमकी देने का जिक्र था। लेकिन पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और आरोपी से संपर्क या गिरफ्तारी की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। एसएसपी ने पूरे मामले की प्राथमिक जांच सीओ सिटी को सौंपी, जिनकी रिपोर्ट में चौकी प्रभारी की लापरवाही साबित होने पर उपनिरीक्षक प्रद्युमन नेगी (चौकी प्रभारी खुड़बुड़ा) को तत्काल निलंबित कर दिया गया है।

परिजनों के अनुसार, गुंजन और आकाश तीन साल से एक-दूसरे को जानते थे। गुंजन दूल्हा बाजार में कपड़ों की दुकान में काम करती थी, जबकि आकाश भी उसी बाजार की एक अन्य दुकान (जूतों की) में कार्यरत था। दोनों के बीच दोस्ती थी, लेकिन आकाश शादीशुदा होने और घर में गृहक्लेश के कारण गुंजन को लगातार परेशान करता था। वह उसे फोन छीन लेता, काम पर जाते समय पीछा करता और धमकियां देता था। गुंजन ने कई बार पुलिस में शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तीन दिन पहले आकाश ने एक अन्य व्यक्ति से कहा था कि वह गुंजन को जान से मार देगा, जिसके बाद फिर से शिकायत दर्ज हुई।

पुलिस पूछताछ में आकाश ने कबूल किया कि गुंजन से बातचीत बंद होने और शिकायत के बाद वह आवेश में आ गया। वह पहले चोरी के मामले में जेल जा चुका है (डेढ़ महीने रहा) और कुछ महीने पहले एक दुकान से निकाला गया था, लेकिन बाद में उसी बाजार में दूसरी दुकान में काम करने लगा। घटना के बाद आकाश ने खुड़बुड़ा चौकी जाकर आत्मसमर्पण किया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। हथियार भी बरामद हो गया है।
जांच और सावधानियां

सुप्रीम कोर्ट की फटकार: व्हाट्सएप-मेटा की ‘टेक इट ऑर लीव इट’ प्राइवेसी पॉलिसी पर सवाल, कहा- नागरिकों की निजता के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि डेटा शेयरिंग के नाम पर भारतीय नागरिकों की निजता के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने स्पष्ट कहा कि ‘टेक इट ऑर लीव इट’ (मानो या छोड़ो) वाली प्राइवेसी पॉलिसी यूजर्स की निजी जानकारी की चोरी का एक सभ्य तरीका है और आम आदमी इसे समझ भी नहीं पाता।

कोर्ट ने मेटा और व्हाट्सएप की दलीलों को सुनते हुए कहा, “हम आपको एक भी जानकारी शेयर करने की इजाजत नहीं देंगे। आप हमारे देश की निजता के साथ खेल नहीं सकते।” मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की, “गरीब फल-सब्जी बेचने वाली महिला या घरेलू सहायिका आपकी जटिल पॉलिसी कैसे समझेगी? यह संवैधानिक मूल्यों का मजाक है। उपभोक्ता के पास कोई सार्थक विकल्प नहीं है, आपने एकाधिकार स्थापित कर लिया है।”

कोर्ट ने क्या पूछा और कहा?

पीठ (मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली) ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि ऑप्ट-आउट (बाहर निकलने) का विकल्प कहां है? कोर्ट ने माना कि निजता का अधिकार भारत में सख्ती से संरक्षित है और टेक जायंट्स यूजर्स की कमजोरी का फायदा उठा रहे हैं। व्हाट्सएप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि बाहर निकलने का विकल्प है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह असमान एग्रीमेंट है और गरीब/कम पढ़े लोग इसे समझ ही नहीं पाते।

कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसी पॉलिसी से प्राइवेट डेटा की चोरी हो रही है और इसे तुरंत खारिज किया जा सकता है। सुनवाई में कोर्ट ने मेटा को यूजर्स के डेटा को विज्ञापन के लिए शेयर करने से रोकने का सख्त संकेत दिया और कहा कि असफल होने पर मामला खारिज हो सकता है।

पूरा मामला क्या है?

यह मामला व्हाट्सएप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है, जिसमें यूजर्स को डेटा मेटा की अन्य कंपनियों के साथ शेयर करने के लिए मजबूर किया गया था। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने नवंबर 2024 में इसे बाजार में दबदबे के दुरुपयोग का मामला मानते हुए मेटा पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और डेटा शेयरिंग पर रोक लगाई।

जनवरी 2025 में मेटा ने एनसीएलएटी में अपील की, जहां नवंबर 2025 में जुर्माना बरकरार रखा गया लेकिन विज्ञापन से जुड़े डेटा शेयरिंग पर 5 साल की रोक हटा दी गई। इसके बाद मेटा और CCI दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। कोर्ट ने 9 फरवरी को अंतरिम आदेश देने का संकेत दिया और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए हिंसा को बढ़ावा दे रही BJP, कोटद्वार प्रकरण पर महेंद्र भट्ट का राहुल गांधी पर आरोप हास्यास्पद – धस्माना

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देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने आरोप लगाया है कि राज्य की भाजपा सरकार और पार्टी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए अराजक तत्वों को संरक्षण दे रही है। उन्होंने कोटद्वार में गणतंत्र दिवस पर हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मुस्लिम दुकानदार को धार्मिक आधार पर धमकाने वाले मामले में पीड़ित की मदद करने वाले दीपक कुमार और विजय रावत पर उल्टा मुकदमा दर्ज किया गया, जबकि अराजक तत्वों के खिलाफ सिर्फ अज्ञात मुकदमा कायम किया गया।

यह स्पष्ट दर्शाता है कि भाजपा सरकार धार्मिक आधार पर हिंसा को बढ़ावा देना चाहती है। धस्माना ने अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कोटद्वार ‘बाबा ड्रेस’ प्रकरण पर राहुल गांधी पर उत्तराखंड का माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाना पूरी तरह हास्यास्पद है। यह ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली कहावत को चरितार्थ करता है।

उन्होंने बताया कि दीपक कुमार ने इस घटना में जो भूमिका निभाई, उसकी राज्य ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया में प्रशंसा हो रही है। राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जो पोस्ट किया, वह दीपक की बहादुरी की सराहना के लिए था, क्योंकि उन्होंने संविधान और देश की एकता की रक्षा के लिए अराजक तत्वों को रोका।

धस्माना ने आगे कहा कि भाजपा सरकार के कारण राज्य में अराजक तत्व सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने हाल की घटनाओं का जिक्र किया, जैसे त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की नस्लीय टिप्पणियों के बाद हत्या, विकासनगर में कश्मीरी मुस्लिम युवाओं पर जानलेवा हमला और अब कोटद्वार का ‘बाबा’ नाम विवाद। ये सभी घटनाएं साबित करती हैं कि सत्ताधारी दल कुर्सी बचाने के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहा है और अराजक तत्वों को खुली छूट दे रखी है।

स्कूल परिसर में शिक्षा मित्र-बीएलओ ने खाया जहर, जेब से मिला उत्पीड़न का पत्र

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मुजफ्फरनगर : मुजफ्फरनगर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव किनोनी में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां तैनात शिक्षा मित्र एवं ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अनुजवीर ने स्कूल परिसर में ही कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। घटना के बाद पूरे स्कूल में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद शिक्षकों और ग्रामीणों ने तुरंत अनुजवीर को शाहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया। जहां से स्थिति गंभीर होने पर उन्हें मेरठ मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया है। फिलहाल उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है और डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा है।

उत्पीड़न का पत्र मिलने से जांच का दायरा बढ़ा

पुलिस जांच के दौरान अनुजवीर की जेब से एक पत्र बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने तीन व्यक्तियों पर मानसिक उत्पीड़न (मेंटल हैरासमेंट) का गंभीर आरोप लगाया है। इस पत्र के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है।

घटना उस समय हुई जब स्कूल में एसआईआर (संभवतः सर्वे या रिपोर्टिंग संबंधी कार्य) की प्रक्रिया चल रही थी। अभी तक आत्महत्या के प्रयास के पीछे की सटीक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं – व्यक्तिगत परेशानी, कार्यस्थल पर दबाव या अन्य कारणों – की जांच कर रही है।

पुलिस का बयान

एसपी देहात आदित्य बंसल ने घटना की आधिकारिक पुष्टि से इनकार करते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस सक्रिय रूप से पूरे मामले की जांच में जुटी है। सभी तथ्यों और सबूतों की पड़ताल के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने मौके से संबंधित दस्तावेज और गवाहों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं।

अंकिता भंडारी हत्याकांड: VIP एंगल पर दिल्ली में दर्ज मुकदमा, जांच टीम देहरादून-ऋषिकेश पहुंची

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देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया मोड़ आया है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की दिल्ली स्पेशल क्राइम ब्रांच ने कथित VIP व्यक्ति के खिलाफ दिल्ली में मुकदमा दर्ज कर लिया है। CBI की जांच टीम सोमवार को देहरादून और ऋषिकेश पहुंच चुकी है, जहां वह सबूत इकट्ठा करने, गवाहों से पूछताछ और अन्य जरूरी जांच के लिए सक्रिय हो गई है।

यह मामला 2022 में तब सुर्खियों में आया था जब ऋषिकेश के वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई। रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और कर्मचारी अंकित गुप्ता पर हत्या का आरोप लगा। अंकिता का शव 24 सितंबर 2022 को चीला नहर से बरामद हुआ था। तीनों आरोपियों को अदालत ने हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

जांच के प्रमुख बिंदु

  • वायरल आडियो-वीडियो की फॉरेंसिक जांच।
  • डिजिटल और बैंकिंग रिकॉर्ड्स की छानबीन।
  • गवाहों से विस्तृत पूछताछ।
  • पुरानी SIT जांच के रिकॉर्ड्स का पुनर्मूल्यांकन।

हालांकि, मामले में VIP एंगल की चर्चा लगातार जारी रही। हाल ही में वायरल हुए आडियो-वीडियो में ज्वालापुर के पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर की और से एक VIP का नाम लिया गया, जिसमें अंकिता से विशेष सेवाएं प्रदान करने का दबाव बनाने के आरोप लगे। इन वायरल सामग्री और राज्यव्यापी आंदोलनों के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी 2026 को CBI जांच की सिफारिश की थी।

CBI ने उत्तराखंड पुलिस से सभी दस्तावेज और सबूत अपने कब्जे में ले लिए हैं। जांच में डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग/संपर्क विवरण, वायरल आडियो-वीडियो, गवाह बयान और अन्य दस्तावेजों की गहन समीक्षा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, यह FIR मुख्य रूप से कथित VIP की भूमिका की जांच के लिए दर्ज की गई है, जबकि मूल हत्यारों की सजा पहले से ही हो चुकी है। अंकिता के माता-पिता और विभिन्न संगठनों ने लंबे समय से श्टप्च्श् एंगल की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। CBI की इस कार्रवाई से राज्य में न्याय की उम्मीद जगी है, लेकिन कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब तक छिपा सच सामने आएगा।