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औलावृष्टि का कहर: बंगाण क्षेत्र में सेब की फसल तबाह, 15–20 गांव प्रभावित

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उत्तरकाशी/मोरी: जनपद के बंगाण (अरकोट) क्षेत्र में अचानक हुई भीषण औलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। जानकारी के अनुसार इस आपदा से क्षेत्र के लगभग 15 से 20 गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

प्रभावित गांवों में माकुड़ी, डागोली, गोकुल, बरनाली, झोटाड़ीधारा, मौड़ा, बलावट, चिंवा, किरानू, दुचानू, दामठी, थुनारा, भूटाणु, कलीच, किरोली, मैजानी सहित दर्जनों गांव शामिल हैं, जहां सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।

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स्थानीय किसान कुलदीप रावत ने बताया कि औलावृष्टि इतनी तीव्र थी कि सेब के पेड़ों पर आए फूल पूरी तरह झड़ गए। फूल नष्ट होने से इस बार फलों की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

विशेष रूप से माकुड़ी गांव, जिसे क्षेत्र में सेब उत्पादन का “हब” माना जाता है, वहां भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। किसानों का कहना है कि इस बार की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

किसानों की बढ़ी चिंता

सेब की खेती पर निर्भर इस क्षेत्र के किसानों के लिए यह नुकसान किसी बड़े झटके से कम नहीं है। कई किसानों की सालभर की आय इसी फसल पर टिकी होती है।

मुआवजे की मांग

स्थानीय लोगों और किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि उन्हें इस भारी नुकसान से राहत मिल सके।

भारत-पाक के बीच बढ़ी तल्ख़ी: ख्वाजा आसिफ के बयान से गरमाया माहौल

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ईरान-इजरायल युद्ध के बीच एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाज़ी तेज होती नजर आ रही है। इस बार पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif के एक बयान ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है।

शनिवार को सियालकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान आसिफ ने कहा कि अगर भारत किसी तरह की सैन्य कार्रवाई करता है, तो पाकिस्तान उसका कड़ा जवाब देगा। उन्होंने सीधे तौर पर कोलकाता का जिक्र करते हुए निशाना साधने की बात कही, जिसे एक सख्त चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

“हमला हुआ तो जवाब बड़ा होगा”

आसिफ ने दावा किया कि पाकिस्तान को संकेत मिल रहे हैं कि भारत कोई “फर्जी अभियान” तैयार कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत शवों को आतंकवादी बताकर साजिश रच सकता है, हालांकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने दोहराया कि अगर पाकिस्तान पर हमला होता है, तो जवाब “तुरंत, योजनाबद्ध और निर्णायक” होगा।

भारत की प्रतिक्रिया का संदर्भ

दरअसल, आसिफ का यह बयान भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh की हालिया टिप्पणी के जवाब में आया है। राजनाथ सिंह ने केरल में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर पाकिस्तान कोई दुस्साहस करता है, तो भारत की प्रतिक्रिया “अभूतपूर्व और निर्णायक” होगी।

उन्होंने अप्रैल 2025 में हुए Pahalgam attack का जिक्र करते हुए बताया कि भारत ने उस घटना के बाद कड़ी कार्रवाई की थी। उनके अनुसार, भारतीय सेना ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचों को निशाना बनाकर कम समय में बड़ा नुकसान पहुंचाया।

बढ़ती बयानबाज़ी से चिंता

दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के इस तरह के तीखे बयानों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय हालात पहले से ही संवेदनशील हैं, ऐसे में भारत-पाक के बीच बढ़ती बयानबाज़ी पर सबकी नजर बनी हुई है।

पोखड़ा ब्लॉक के भटकोट में आदमखोर बाघ ने 4 वर्षीय बच्ची को बनाया, मौके पर पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल

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पौड़ी: पौड़ी जनपद के पोखड़ा विकास खंड के भटकोट गांव में गुरुवार शाम को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। एक आदमखोर बाघ ने घर के अंदर घुसकर चार वर्षीय मासूम बच्ची दृष्टि को उठा लिया और लगभग 200 मीटर दूर ले जाकर उसे मार डाला। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

घटना की जानकारी देते हुए बताया गया कि हरेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ घर में भोजन कर रहे थे। उनकी छोटी बेटी दृष्टि दरवाजे के पास खेल रही थी। तभी अचानक बाघ ने झपट्टा मारा और बच्ची को उठाकर जंगल की ओर भाग निकला। पिता ने पीछा किया, लेकिन बाघ ने बच्ची का सिर और गर्दन का बड़ा हिस्सा खाकर उसकी जान ले ली।

कांग्रेस अध्यक्ष का दौरा

इस घटना के बाद शनिवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल कांग्रेसी नेताओं के साथ भटकोट पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और गहरी संवेदना व्यक्त की। गोदियाल ने मौके पर ही क्षेत्रीय डीएफओ से फोन पर बात की और नाराजगी जताई कि सितंबर 2025 से ही इस इलाके में आदमखोर बाघ सक्रिय है, फिर भी वन विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।

गोदियाल ने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग शीघ्र बाघ को पकड़ने या मारने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाता है, तो कांग्रेस आंदोलन करने को मजबूर होगी।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि गणेश गोदियाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही वन मंत्री से मिलकर पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते वन्य जीव-मानव संघर्ष पर ठोस कार्रवाई की मांग करेगा।

दौरे के दौरान गणेश गोदियाल के साथ कवींद्र इष्टवाल, संजय गुसाईं (प्रमुख, पोखड़ा), संजय जोशी (कनिष्ठ प्रमुख), कुलदीप नेगी (ज्येष्ठ प्रमुख, बीरोंखाल), जितेंद्र सिंह बिष्ट, सुमित रावत, प्रदीप रावत, पूनम कैंतुरा (जिला पंचायत सदस्य), हर्षवर्धन सिंह बिष्ट, रश्मि देवी (प्रधान, गडरी), अनुसूया प्रसाद ध्यानी (पूर्व बीडीसी) तथा बलबीर सिंह रावत (प्रधान, ऐरोली) आदि मौजूद रहे।

दून बुक फेस्टिवल-2026 का शुभारंभ, साहित्य और संस्कृति का संगम बना देहरादून

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को “दून बुक फेस्टिवल-2026” का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न प्रकाशकों के स्टॉल का अवलोकन किया और गढ़वाली व कुमाऊंनी भाषाओं की पुस्तकों का विमोचन भी किया।

शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार और राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित इस नौ दिवसीय महोत्सव में देशभर से साहित्यकार, कलाकार और पुस्तक प्रेमी शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम बताते हुए कहा कि यह आयोजन ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान को नई दिशा देगा।

उन्होंने बताया कि महोत्सव के दौरान विभिन्न सत्र, संवाद कार्यक्रम, पुस्तक परिचर्चाएं और “लेखक से मिलिए” जैसे आयोजन किए जाएंगे। साथ ही बच्चों के लिए बनाए गए “चिल्ड्रेन पवेलियन” को उन्होंने सराहनीय पहल बताया, जो नई पीढ़ी में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देगा।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देवभूमि हमेशा से ज्ञान और सृजन की भूमि रही है। राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान” और “साहित्य भूषण” जैसे पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को प्रोत्साहित कर रही है, साथ ही विभिन्न भाषाओं में ग्रंथ प्रकाशन के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में साहित्य ग्रामों की स्थापना की जा रही है, जिससे लेखकों को सृजन के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा और उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकेगा। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पुस्तकों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पुस्तकें केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान का स्थायी स्रोत हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे उपहार के रूप में पुस्तकों और पौधों को प्रोत्साहित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को नई पहचान मिलने की बात भी कही और महोत्सव के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं।

हरदा ने क्यों कहा…हां आंशिक रूप से हूं मैं ‘उज्याड़ू बल्द’

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर पुराने फैसलों की चर्चा हो रही है। कांग्रेस छोड़ने वाले जिन नेताओं को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उज्याडू़ बल्द कहा था। आज वही नेता उनको उनके बयानों के जरिए घेरने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसा ही एक बयान कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल जो अब भाजपा में है, ने भी दिया है। उनके बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उनको आज लगता है कि उन्होंने 2012 में जो फैसला लिया था, उसके अनुसार वे खुद को आंशिक रूप से उज्याडू़ बल्द स्वीकार करते हैं।

2012 का फैसला और बदले समीकरण

दरअसल, वर्ष 2012 में जब कांग्रेस सरकार के गठन के दौरान मंत्रिमंडल पर मंथन चल रहा था, तब पिथौरागढ़ से विधायक मयूख महर का नाम प्रमुख दावेदारों में था। हालांकि, उस समय पार्टी के भीतर हुए सुझाव के आधार पर समीकरण बदले गए। मयूख महर को योजना आयोग का अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने और उनकी जगह दिनेश अग्रवाल को कैबिनेट में शामिल करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

‘उज्याड़ू बल्द’ टिप्पणी और आत्मस्वीकार

हालिया बयान में ‘उज्याड़ू बल्द’ कहे जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत नेता ने उस फैसले को आंशिक रूप से अपनी भूल माना है। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय लिया गया निर्णय अब राजनीतिक रूप से अलग नजर आता है और उसके दूरगामी परिणाम सामने आए हैं।

 बदला राजनीतिक ठिकाना

इस फैसले के असर तब स्पष्ट हुए, जब दिनेश अग्रवाल ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी। लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया, जिससे राज्य की सियासत में नए समीकरण बने।

क्षेत्रीय और संगठनात्मक प्रभाव

इस निर्णय का असर पिथौरागढ़ में भी देखने को मिला, जहां संगठनात्मक संतुलन प्रभावित हुआ। साथ ही स्थानीय स्तर पर भी गुटबाजी बढ़ने की बात सामने आई।

सियासी तंज और वर्तमान परिदृश्य

हरीश रावत ने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि उनके कुछ पुराने साथी अब भाजपा में प्रासंगिक भूमिका में हैं और समय-समय पर राजनीतिक बयानबाजी में उनका उपयोग किया जाता है।

दिनेश अग्रवाल ने क्यों छोड़ी कॉंग्रेस

साथ ही पूर्व सीएम हरीश रावत ने मोथरोवाला का भी जिक्र किया है। दरअसल, मोथरोवाला में दिनेश अग्रवाल की प्रॉपर्टी है। जिनमें कुछ सरकारी जमीनों पर कब्जा कर बनाई बताई जाती हैं। इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी रहे, जिन पर कार्रवाई के डर से उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा ज्वाइन कर ली थी।

उत्तराखंड : पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल, 2 इंस्पेक्टर समेत 20 दरोगाओं के तबादले

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हरिद्वार जिले में कानून व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पुलिस महकमे में एक बार फिर बड़ा फेरबदल किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने शुक्रवार देर रात 2 इंस्पेक्टर और 20 दरोगाओं के तबादले कर दिए।

जारी आदेश के अनुसार, इंस्पेक्टर मनोहर भंडारी को श्यामपुर कोतवाली से हटाकर रानीपुर कोतवाली प्रभारी बनाया गया है, जबकि सिडकुल थाना प्रभारी नितेश शर्मा को श्यामपुर कोतवाली की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं इंस्पेक्टर आशुतोष राणा को रानीपुर कोतवाली से हटाकर पुलिस कार्यालय भेजा गया है। गौरतलब है कि हाल ही में इन अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई थीं, लेकिन कुछ ही दिनों में पुनः तबादले कर दिए गए।

इसके अलावा कई उपनिरीक्षकों (एसआई) के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव किया गया है। अजय शाह को सिडकुल का एसओ बनाया गया है, जबकि नवीन सिंह को रोड़ीबेलवाला चौकी प्रभारी नियुक्त किया गया है। चरण सिंह को गैस प्लांट चौकी भेजा गया है और विकास रावत को सिडकुल कोतवाली में एसएसआई की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रवीण बिष्ट को बहादराबाद कस्बा बाजार चौकी प्रभारी बनाया गया है, जबकि अमित नौटियाल को पुलिस लाइन भेजा गया है। विक्रम बिष्ट को सप्तऋषि चौकी प्रभारी बनाया गया है और बलवीर डोभाल को पुलिस लाइन भेजा गया है। संतोष सेमवाल को चंडी घाट चौकी प्रभारी और नवीन चौहान को पथरी थाने में तैनात किया गया है।

अन्य तबादलों में ब्रह्मदत्त बिजलवाण, आशीष नेगी, विनय मोहन, नितिन बिष्ट, देवेंद्र चौहान, मनोज कुमार, नवीन नेगी, सूरत शर्मा और बालम सिंह समेत कई अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है।

उत्तराखंड : दुल्हन की विदाई में बेजुबान भी हुए भावुक, VIDEO देख भर आएंगी आंखें

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देहरादून। भारतीय शादी में विदाई का पल हमेशा भावुक होता है, लेकिन देहरादून से सामने आया एक वीडियो इस भावनात्मक क्षण को और भी खास बना रहा है। यहां एक दुल्हन की विदाई के दौरान उसके पालतू कुत्तों का अनोखा प्यार देखने को मिला, जिसने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों को भावुक कर दिया।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही दुल्हन विदा होकर जाने लगती है, उसके तीन पालतू कुत्ते स्नोई (लैब्राडोर), मिशकु (गोल्डन रिट्रीवर) और लैला (जर्मन शेफर्ड)—बालकनी से उसे देखकर भौंकने लगते हैं। अपने पालतू साथियों की यह प्रतिक्रिया देख दुल्हन खुद को रोक नहीं पाती और वापस उनके पास चली जाती है।

https://www.instagram.com/p/DWjCC2ckwNy/?utm_source=ig_embed&utm_campaign=embed_video_watch_again

दुल्हन कुत्तों को प्यार से सहलाते हुए उन्हें दिलासा देती है और कहती है, “मम्मा यहीं हैं”, मानो उन्हें भरोसा दिला रही हो कि वह उनसे दूर नहीं जा रही। दुल्हन और कुत्तों के बीच यह भावनात्मक जुड़ाव वीडियो को बेहद खास बना देता है। इस वीडियो को Instagram पर शेयर किया गया है, जहां इसे अब तक 5 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है, जबकि 30 लाख से अधिक लोग इसे लाइक कर चुके हैं।

वीडियो पर यूजर्स भी जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “इसे सिर्फ वही समझ सकते हैं जिनके पास पालतू जानवर हैं”, जबकि दूसरे ने कहा, “जानवर इंसानों से ज्यादा वफादार होते हैं।” यह वीडियो एक बार फिर साबित करता है कि बेजुबान जानवर भी इंसानों की तरह गहरी भावनाएं रखते हैं और अपने मालिकों के साथ उनका रिश्ता बेहद खास और मजबूत होता है।

उत्तराखंड में अगले चार दिन ऐसा रहेगा मौसम, कई जिलों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट

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देहरादून। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तराखंड में आगामी दिनों के लिए खराब मौसम की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार राज्य के कई जिलों में गरज-चमक, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है।

मौसम विभाग के मुताबिक 4 अप्रैल को देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने, ओलावृष्टि और 40 से 50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवाएं 60 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है। शेष जिलों में भी गरज-चमक और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।

5 अप्रैल को राज्य के पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं गरज के साथ बिजली चमकने और 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान है।

6 अप्रैल को मौसम सामान्य रहने की संभावना जताई गई है और किसी भी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की गई है।

7 अप्रैल को एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा, झोंकों में 60 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है।

8 अप्रैल को भी पहाड़ी जिलों में आंशिक रूप से मौसम बिगड़ा रह सकता है। कहीं-कहीं गरज-चमक और 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।

मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है, विशेषकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

केदारनाथ में अप्रैल में भी बर्फबारी जारी, यात्रा तैयारियों पर असर, मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट

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केदारनाथ धाम में अप्रैल माह की शुरुआत के साथ ही मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। बीती रात से धाम में लगातार बर्फबारी हो रही है, जिससे पूरा क्षेत्र फिर से बर्फ की मोटी चादर में ढक गया है। हाल ही में जिन रास्तों से बर्फ हटाई गई थी, वे दोबारा पूरी तरह बर्फ से पट गए हैं, वहीं मंदिर परिसर भी बर्फ से आच्छादित हो गया है। लगातार हो रही बर्फबारी के कारण यात्रा तैयारियों पर सीधा असर पड़ा है। बर्फ हटाने में जुटे मजदूरों की मेहनत पर मौसम ने पानी फेर दिया है और व्यवस्थाओं को फिर से पटरी पर लाने की चुनौती सामने खड़ी हो गई है।

बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सदस्य विनीत पोस्ती के अनुसार, धाम में बीती शाम से ही बर्फबारी जारी है। जिन स्थानों को पहले साफ किया गया था, वहां फिर से बर्फ जम गई है, जिससे यात्रा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में कठिनाई आ रही है। उन्होंने बताया कि यदि समय रहते व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो पाईं, तो आगामी यात्रा के दौरान तीर्थ यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उल्लेखनीय है कि केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खुलने प्रस्तावित हैं। ऐसे में लगातार खराब मौसम ने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। धाम में तैनात जवान सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बर्फ हटाने के कार्य में भी जुटे हुए हैं। माइनस तापमान में काम करना चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद जवान पूरी निष्ठा से डटे हुए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि मौसम साफ होते ही व्यवस्थाओं को तेजी से दुरुस्त किया जाएगा।

इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के कई जिलों में मौसम खराब रहने की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं गरज के साथ बारिश की संभावना है। 3300 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बर्फबारी भी हो सकती है।

विभाग ने देहरादून, टिहरी समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश, ओलावृष्टि और 40 से 50 किमी प्रति घंटा (कुछ स्थानों पर 60 किमी प्रति घंटा तक) की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए कई जिलों के लिए ऑरेंज और अन्य स्थानों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

हरदा का ‘अर्जित अवकाश’-मैं जा भी रहा हूं और यहीं भी हूं…5G के जमाने में 2G नेटवर्क

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  • प्रदीप रावत ‘रंवाल्टा’ 

उत्तराखंड की सियासत में हरीश रावत एक ऐसे किरदार बन चुके हैं, जो राजनीति से “अर्जित अवकाश” लेने की घोषणा तो करते हैं, लेकिन अवकाश पर जाने से पहले ही अगली पारी की रणनीति भी तैयार रखते हैं। मानो यह अवकाश कम और “पॉलिटिकल टी-ब्रेक” ज्यादा हो, जहां चाय की चुस्की के साथ अगली चाल की बिसात बिछाई जाती है।

हरदा की महत्वाकांक्षा का हाल कुछ ऐसा है कि राजनीति उनके लिए शतरंज का खेल नहीं, बल्कि “अनंत टेस्ट मैच” है, जहां रिटायरमेंट का सवाल ही नहीं उठता। उम्र भले ही अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही हो, लेकिन उनकी राजनीतिक ऊर्जा ऐसी है जैसे घड़ी की सुइयों को भी पीछे घुमा दें। फर्क बस इतना है कि कभी-कभी चालें इतनी पुरानी हो जाती हैं कि नई पीढ़ी उन्हें “रेट्रो स्टाइल” समझने लगती है।

आज हालात यह हैं कि कांग्रेस के भीतर नई पीढ़ी “अपडेटेड सॉफ्टवेयर” बनने की कोशिश कर रही है, जबकि हरदा अभी भी “क्लासिक वर्जन” को ही सबसे भरोसेमंद मानते हैं। समस्या यह नहीं कि उनका अनुभव कम हो रहा है, बल्कि यह है कि वह अनुभव अब हर स्थिति में “डिफॉल्ट सेटिंग” की तरह लागू किया जा रहा है, चाहे सिस्टम उसे सपोर्ट करे या नहीं।

इधर गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत की “त्रिमूर्ति” मैदान में उतर चुकी है। यह नई तिकड़ी राजनीति को 5G स्पीड से चलाना चाहती है, जबकि हरदा अभी भी 2G नेटवर्क पर भरोसा जता रहे हैं, जहां कॉल तो जुड़ जाती है, पर कभी-कभी आवाज साफ नहीं आती।

हरदा की दुविधा भी कम दिलचस्प नहीं है, एक तरफ वह “अवकाश” की बात करते हैं, दूसरी तरफ पार्टी के हर छोटे-बड़े फैसले में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना भी जरूरी समझते हैं। मानो संदेश साफ हो: “मैं जा भी रहा हूं और यहीं भी हूं।”

उनकी उम्र को लेकर उठते सवालों पर भी हरदा का अंदाज निराला है। राजनीति में जहां लोग 60 के बाद सलाहकार बन जाते हैं, वहां हरदा अब भी खुद को “ओपनिंग बैट्समैन” मानते हैं, भले ही टीम के बाकी खिलाड़ी उन्हें “मेंटॉर” की भूमिका में देखना चाहते हों।

कुल मिलाकर, हरदा की राजनीति एक ऐसी फिल्म बन चुकी है, जिसका इंटरवल कई बार हो चुका है, लेकिन क्लाइमेक्स आने का नाम नहीं ले रहा। दर्शक (यानी कार्यकर्ता) कभी ताली बजाते हैं, कभी सिर पकड़ लेते हैं और निर्देशक (पार्टी हाईकमान) अब भी सोच रहा है कि आखिर इस कहानी का अंत कैसे लिखा जाए।