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25 साल बाद राज्य निर्वाचन आयुक्तों का राष्ट्रीय सम्मेलन, निकाय और पंचायत चुनावों में मतदाता सूची और ईवीएम पर होगी चर्चा

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देहरादून: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 24 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्तों (एसईसी) का राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया है। यह सम्मेलन 1999 के बाद 25 वर्षों से अधिक अंतराल के बाद आयोजित हो रहा है, जो चुनावी प्रक्रियाओं में समन्वय और सुधार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे। इसमें निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी शामिल होंगे। सभी 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्तों के अलावा उनके कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञ भी भाग लेंगे।

इस एक दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन आयोगों के बीच चुनावी प्रक्रियाओं, मतदाता सूची तैयार करने, रसद प्रबंधन और तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाना है। विशेष रूप से स्थानीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत) और पंचायत चुनावों में मतदाता सूची की तैयारी, संशोधन और मतदान प्रक्रिया पर विस्तृत मंथन होगा।

ईसीआई हाल ही में लॉन्च किए गए ईसीआई नेट डिजिटल प्लेटफॉर्म और ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के प्रभावी उपयोग पर राज्य आयुक्तों को जानकारी देगा तथा उनके सुझाव भी लेगा। भविष्य में पंचायत व निकाय चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। केंद्रीय आयोग अपनी लंबे अनुभव वाली विशेषज्ञता मतदाता सूची निर्माण और चुनाव संचालन में साझा करेगा।

उत्तराखंड के संदर्भ में यह सम्मेलन खासतौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य में निकाय और पंचायत चुनावों की मतदाता सूची तथा मतदान प्रक्रिया पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग को बुलावा मिलने से भविष्य के चुनावों में बेहतर तैयारी और तकनीकी अपग्रेडेशन की उम्मीद जगी है।

बड़ा हादसा : कंटेनर ने 15 लोगों को कुचला, हादसे में छह की मौत, कई घायल

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मथुरा: यमुना एक्सप्रेसवे पर शनिवार तड़के एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें तेज रफ्तार कंटेनर ने बस से उतरकर सड़क किनारे खड़े यात्रियों को कुचल दिया। इस भीषण दुर्घटना में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गया है।

हादसा सुरीर थाना क्षेत्र के माइलस्टोन 88 के पास करीब 2:45 बजे हुआ। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से कानपुर (या नोएडा से फर्रुखाबाद/आगरा की ओर जा रही) एक प्राइवेट स्लीपर बस कुछ यात्रियों की मांग पर सड़क किनारे रुकी। बस चालक ने यात्रियों को सुरक्षित ‘ग्रीन जोन’ में उतारने के बजाय एक्सप्रेसवे के किनारे ही बस रोक दी। यात्री लघुशंका के लिए नीचे उतरे और सड़क पर खड़े हो गए।

इसी दौरान पीछे से तेज गति से आ रहे एक कंटेनर ने पहले बस को जोरदार टक्कर मारी, फिर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े यात्रियों को रौंदते हुए आगे निकल गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि छह यात्री मौके पर ही दम तोड़ गए, जबकि एक अन्य की हालत नाजुक बनी हुई है। मृतकों में सोनू (औरैया के सरवा कटरा निवासी), देवेश (बस्ती के अलेवल निवासी), अस्लम (कन्नौज के गणेश का पुरवा निवासी) और संतोष (दिल्ली के प्रेम नगर निवासी) शामिल हैं। दो अन्य मृतकों की शिनाख्त अभी होनी बाकी है।

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हादसे के कारण एक्सप्रेसवे पर कुछ समय तक यातायात बाधित रहा, जिसे बाद में सुचारू करा दिया गया। प्रारंभिक जांच में बस चालक की लापरवाही सामने आई है, क्योंकि एक्सप्रेसवे नियमों के अनुसार वाहनों को केवल निर्धारित ग्रीन जोन में ही रोका जा सकता है। कंटेनर चालक की तलाश जारी है और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों को घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने तथा राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

भीषण हादसा : बारातियों की बस खाई में गिरी, 13 की मौत, 34 गंभीर घायल

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नेपाल बॉर्डर : भारत-नेपाल सीमा से लगे नेपाल के बैतड़ी जिले में गुरुवार देर रात एक भीषण सड़क हादसा हो गया। झूलाघाट कस्बे के सामने नेपाली क्षेत्र में हुई इस दुर्घटना में बारातियों से भरी बस करीब 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी, जिससे 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 34 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कई घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस गुरुवार रात बैतड़ी जिले की पुरचूंणी नगरपालिका क्षेत्र के भवने गांव से दुल्हन को लेकर बजांग जिले के सुनकुड़ा जा रही थी। इसी दौरान पुरचूंणी के बड़गांव मोड़ के पास बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। हादसा इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़ गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

दुर्घटना की सूचना मिलते ही नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APF), नेपाल प्रहरी और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और रात के अंधेरे में रेस्क्यू अभियान चलाया गया। घायलों को कड़ी मशक्कत के बाद खाई से निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। जिला प्रहरी कार्यालय बैतड़ी के प्रवक्ता निरीक्षक बलदेव बडू ने बताया कि हादसे में छह बारातियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि पांच घायलों ने डडेलधुरा अस्पताल में और दो ने कोटिला अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

दुर्घटना में जान गंवाने वालों की पहचान केशव राज जोशी (40), अशोक राज जोशी (13), बसंत राज जोशी, बिष्णु दत्त जोशी (41), नरेश राज जोशी (42), बिशन दत्त जोशी (17), दीपक जोशी (28), किशन जोशी (46) — सभी निवासी बजांग जिले के बित्थडचीर गांव पालिका क्षेत्र — के रूप में हुई है। इसके अलावा मोहन देव भट्ट (60) और केशव भट्ट (27) निवासी केदारस्यु गांव पालिका, बसंत राज रतला (40) निवासी जय पृथ्वी नगर पालिका-7, पुष्पा अवस्थी (40) निवासी बैतड़ी पुरचूंणी नगरपालिका-7 और सुशील जोशी, पुरचूंणी नगरपालिका निवासी भी हादसे में मारे गए।

घायलों का इलाज डडेलधुरा अस्पताल में चल रहा है, जबकि गंभीर रूप से घायल कुछ बारातियों को बेहतर उपचार के लिए धनगढ़ी रेफर किया गया है। हादसे में बस चालक विरेंद्र बुढा, निवासी भीमदत्त नगरपालिका-7, कंचनपुर, को सामान्य चोटें आई हैं। उसे उपचार के बाद प्रहरी ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। प्रहरी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में हादसे का मुख्य कारण बस का ओवरलोड होना बताया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि अत्यधिक भार के कारण बस चढ़ाई पर संतुलन खो बैठी और खाई में गिर गई। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

उत्तराखंड: खटीमा में शराब पीने के दौरान दो लोगों की मौत, एक गंभीर!

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खटीमा: उत्तराखंड के खटीमा में दो लोगों की शराब पीने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि तीन लोगों ने शराब में पानी की जगह गलती से कुछ जहरीला पदार्थ मिला लिया, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। जानकारी के अनुसार ढिल्लू सिंह राणा और अधिवक्ता मलकीत सिंह राणा की मौत हो गई।

एक अन्य अधिवक्ता प्रवेश मौर्य की हालत गंभीर है। बताया जा रहा है कि तीनों एक विवाह समारोह से लौट रहे थे और शराब पीने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। पुलिस ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों का पता चलेगा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीनों ने शराब की बोतल खरीदी थी और एक स्थान पर बैठकर पीने लगे। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। घटनास्थल से एक जहरीले पदार्थ की बोतल भी बरामद हुई है, जिससे साजिश की आशंका जताई जा रही है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

पंजाब में आप नेता की हत्या: गुरुद्वारे के बाहर लक्की ओबरोय की गोली मारकर हत्या

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जालंधर: पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ से सटे जालंधर में शुक्रवार सुबह एक चौंकाने वाली घटना में आम आदमी पार्टी (आप) के स्थानीय नेता लक्की ओबरोय की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात मॉडल टाउन स्थित गुरुद्वारा साहिब के बाहर हुई, जहां ओबरोय प्रार्थना के बाद अपनी थार कार में बैठे थे।

पुलिस के अनुसार, घटना सुबह करीब 7:50 से 8:00 बजे के बीच हुई। दो अज्ञात हमलावर बाइक (या स्कूटर) पर सवार होकर आए और ओबरोय की कार पर 8-10 राउंड फायरिंग की। कम से कम पांच गोलियां उन्हें लगीं, जिनमें से कुछ छाती और सिर में थीं। गंभीर रूप से घायल ओबरोय को तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

लक्की ओबरोय एक स्थानीय आप नेता थे और जालंधर कैंट क्षेत्र के पार्टी इंचार्ज राजविंदर थियारा के करीबी माने जाते थे। वे फाइनेंशियर और प्रॉपर्टी बिजनेस से जुड़े हुए थे तथा गुरु तेग बहादुर नगर के निवासी थे। उनकी पत्नी सिमरजोत कौर ने पिछले साल नगर निगम चुनाव में आप के टिकट पर हिस्सा लिया था। ओबरोय पार्षद चुनाव भी लड़ चुके थे।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। जालंधर पुलिस कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि हमलावरों की पहचान हो सके। अभी तक किसी ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है और मकसद स्पष्ट नहीं हुआ है।

यह घटना पंजाब में बढ़ती हिंसा की एक और कड़ी है। इससे ठीक एक दिन पहले तरनतारन जिले के चीमा खुर्द गांव में आप के सरपंच गुरभेज सिंह की तेजधार हथियारों से हत्या कर दी गई थी। उस मामले में पूर्व सरपंच शरणजीत सिंह (जो पहले कांग्रेस से जुड़े थे और बाद में आप में शामिल हुए) को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच जारी रखी है।

विपक्ष का हमला इस हत्या के बाद विपक्षी दलों ने आप सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि भगवंत मान सरकार में पंजाब की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। “अगर सत्ताधारी पार्टी के नेता भी सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिकों का क्या होगा?” उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब मांगा। शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इसे “नया नॉर्म” बताते हुए कहा कि पंजाब में दिनदहाड़े हत्याएं आम हो गई हैं और आप सरकार ने राज्य को बर्बाद कर दिया है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत किया

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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर के अपने अनुमान को संशोधित कर 7.4 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले दिसंबर में केंद्रीय बैंक ने इस वित्त वर्ष के लिए विकास दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। यह ऊपर की ओर संशोधन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार और सकारात्मक गति को दर्शाता है, भले ही वैश्विक चुनौतियां बनी हुई हैं।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज यहां मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और सुधार की राह पर है। उन्होंने बताया कि वास्तविक जीडीपी इस वर्ष पिछले साल की तुलना में काफी अधिक 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने की स्थिति में है। सेवा क्षेत्र के मजबूत योगदान और विनिर्माण में आई रिकवरी के कारण वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वृद्धि 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

मल्होत्रा ने आगे कहा कि हाल ही में केंद्रीय बजट 2026 में घोषित कई उपाय आर्थिक वृद्धि को मजबूती प्रदान करेंगे। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद सेवा क्षेत्र का निर्यात मजबूत बना रहेगा, जो अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण समर्थन बनेगा।

यह संशोधन आरबीआई के आकलन में आए सकारात्मक बदलाव को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों में सुधार और सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूती का परिणाम है। हालांकि, वैश्विक व्यापार संबंधी अनिश्चितताएं और अन्य बाहरी जोखिम बने हुए हैं।

एमपीसी ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है, जिससे ऋणों की ईएमआई में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। नीति की दिशा ‘न्यूट्रल’ बनी हुई है, जो विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाने पर जोर देती है।

यह बढ़ोतरी आरबीआई के रुख में संभावित पुनर्मूल्यांकन का संकेत है, जहां मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को और समर्थन दिया जा सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आने वाले महीनों में डेटा के आधार पर आगे की नीतियां तय होंगी।

उत्तराखंड में अगले 7 दिनों के लिए वनाग्नि को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी, 13 जिलों में आग लगने का उच्च खतरा

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देहरादून : उत्तराखंड में वनाग्नि का खतरा बढ़ते हुए मौसम विभाग और वन विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। यह अलर्ट आज दोपहर 3:01 बजे से शुरू होकर 12 फरवरी को दोपहर 3:01 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान प्रदेश के 13 जिलों के कई क्षेत्रों में जंगलों में आग लगने की संभावना बहुत अधिक बताई गई है।

अलर्ट वाले जिले
अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, उधम सिंह नगर और उत्तरकाशी।

अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र
वन विभाग ने विशेष रूप से पीपलकोटी, दसवां, तरतोली, सांजी, गौहाना और अंगथला जैसे क्षेत्रों को अति संवेदनशील घोषित किया है, जहां आग फैलने का जोखिम सबसे ज्यादा है।

कारण और चेतावनी
हाल के सूखे मौसम, कम नमी और पिछले कुछ महीनों में असामान्य रूप से जंगल आग की घटनाओं के मद्देनजर यह अलर्ट जारी किया गया है। वन विभाग के अनुसार, सर्दियों में ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं, जो आने वाले समय में और गंभीर स्थिति पैदा कर सकती हैं।

जनता से अपील

  • जंगलों के आसपास आग न जलाएं।
  • जलती बीड़ी, सिगरेट या माचिस का इस्तेमाल न करें।
  • किसी भी तरह की आग या संदिग्ध धुंआ दिखाई देने पर तुरंत निकटतम वन कार्यालय, पुलिस या आपातकालीन नंबर (112) पर सूचना दें।

सुरक्षा उपाय
वन विभाग ने फायर लाइन तैयार करने, कंट्रोल बर्निंग और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। राज्य में पहले से ही वनाग्नि प्रबंधन के लिए विशेष टीमें तैनात हैं। यह अलर्ट उत्तराखंड के पर्यावरण और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वनाग्नि न केवल वन संपदा को नष्ट करती है बल्कि वन्यजीवों, स्थानीय निवासियों और पर्यावरण को भी गंभीर खतरा पैदा करती है। लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें और सहयोग करें।

अमित शाह ने लॉन्च की देश की पहली सहकारी टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी ऐप’, ओला-उबर को टक्कर

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज विज्ञान भवन में देश की पहली सहकारी आधारित राइड-हेलिंग सेवा ‘भारत टैक्सी ऐप’ का आधिकारिक शुभारंभ किया। यह ऐप ओला, उबर और रैपिडो जैसी निजी कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने के साथ-साथ ड्राइवरों को मालिक बनाने का दावा करता है।

‘सारथी ही मालिक’ का मंत्र अमित शाह ने लॉन्च के दौरान कहा कि “सहकार, न कि सरकार” अब टैक्सी सेक्टर में कदम रख रही है। इस प्लेटफॉर्म पर ड्राइवरों को ‘सारथी’ कहा जाएगा और वे मालिक की भूमिका में होंगे। सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा संचालित यह सेवा ड्राइवर-ओनरशिप मॉडल पर आधारित है, जहां ड्राइवरों से कोई कमीशन नहीं लिया जाता। फिलहाल जीरो सर्विस चार्ज है, भविष्य में मामूली दैनिक शुल्क लिया जा सकता है।

यात्रियों के लिए प्रमुख खासियतें

  • नो सर्ज प्राइसिंग: बारिश, ट्रैफिक या पीक आवर्स में किराया नहीं बढ़ेगा।
  • पारदर्शी किराया: पहले से तय और कोई छिपा चार्ज नहीं।
  • विविध विकल्प: ऑटो, कार और बाइक टैक्सी बुकिंग की सुविधा।
  • सुरक्षा पर फोकस: रियल-टाइम ट्रैकिंग, वेरिफाइड ड्राइवर, मल्टीलिंगुअल सपोर्ट और 24×7 कस्टमर केयर। दिल्ली पुलिस और गुजरात पुलिस के साथ साझेदारी।

ड्राइवरों को मिलेंगे बड़े फायदे

  • कमाई का पूरा हिस्सा ड्राइवरों को।
  • सरकारी लोन सुविधा से खुद की टैक्सी खरीदने का मौका।
  • अब तक 4 लाख से अधिक ड्राइवर जुड़ चुके हैं, और 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान हो चुका है।
  • महिला सशक्तिकरण: ‘बाइक दीदी’ पहल के तहत 150+ महिला ड्राइवर जुड़ीं। महिला यात्री ‘फीमेल राइडर’ विकल्प चुन सकती हैं।

आठ प्रमुख सहकारी संस्थाओं का समर्थन इस पहल को अमूल, इफको, कृभको, नाफेड, एनडीडीबी, एनसीईएल, एनसीडीसी और नाबार्ड जैसी बड़ी सहकारी संस्थाएं सपोर्ट कर रही हैं। बोर्ड में ड्राइवरों के दो निर्वाचित प्रतिनिधि भी शामिल हैं, ताकि उनकी आवाज सीधे पहुंचे।

ऐप डाउनलोड की सलाह यात्रियों और ड्राइवरों से अपील है कि वे केवल आधिकारिक ऐप “Bharat Taxi – Cab, Auto & Bike” (डेवलपर: Sahakar Taxi Cooperative Limited या Inspiron Technologies) ही डाउनलोड करें। गूगल प्ले स्टोर और ऐप स्टोर पर इसी नाम के अन्य ऐप्स भी हैं, इसलिए सावधानी बरतें।

पायलट सफल, अब पूरे देश में विस्तार दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में दो महीने के सफल पायलट के बाद आज आधिकारिक लॉन्च हुआ। सरकार का लक्ष्य तीन वर्षों में इसे पूरे देश में फैलाना है। यह सेवा न केवल सस्ती और सुरक्षित यात्रा देगी, बल्कि लाखों ड्राइवरों के लिए स्वरोजगार और सम्मानजनक आय का नया रास्ता खोलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं, प्रियंका गांधी का तीखा पलटवार

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नई दिल्ली: लोकसभा में जारी हंगामे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सदन में न आने के बीच विवाद तेज हो गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को सदन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पुख्ता जानकारी मिली थी कि कांग्रेस के कुछ सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचकर कोई “अप्रत्याशित हरकत” कर सकते थे। इसी कारण उन्होंने मोदी से सदन में भाषण देने न आने का अनुरोध किया था।

स्पीकर ने विपक्षी सांसदों के व्यवहार को “अभूतपूर्व” और “संसद की गरिमा के खिलाफ” बताते हुए इसे “काला धब्बा” करार दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा के इतिहास में पहली बार अध्यक्ष के कार्यालय में भी ऐसा अनुचित आचरण देखा गया, जो संसदीय परंपराओं के विपरीत है। बिरला ने सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की।

इस बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं और सरकार स्पीकर से यह सब कहलवा रही है। उन्होंने मोदी पर हमला या नुकसान पहुंचाने की किसी भी योजना के दावे को “पूरी तरह झूठ” और “बकवास” बताया।

प्रियंका ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह सरासर झूठ है। प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाने या ऐसी किसी योजना का सवाल ही नहीं उठता। ऐसी कोई योजना थी ही नहीं।” उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं। कल उनमें सदन में आने की हिम्मत नहीं थी, सिर्फ इसलिए कि तीन महिलाएं उनकी बेंच के सामने खड़ी थीं… यह क्या बकवास है?”

कांग्रेस नेता ने सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) को बोलने क्यों नहीं दिया गया? उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या किसी सार्वजनिक स्रोत या किताब को उद्धृत करने से रोकने का कोई वैध आधार सरकार के पास है?

यह विवाद बुधवार को लोकसभा में हुए हंगामे के बाद और गहरा गया, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया और सदन बार-बार स्थगित होना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी को अपना जवाब देने का मौका नहीं मिल सका। विपक्ष का कहना है कि सरकार बहस से बच रही है, जबकि सत्तापक्ष का दावा है कि विपक्ष ने संसद की मर्यादा तोड़ी। इस घटना ने संसद में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

कोटद्वार में बाहर से आने वाले नेताओं और मीडिया पर बैन, पुलिस अलर्ट, यूपी की सीमा से लौटाए जा रहे वाहन

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कोटद्वार। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार में दीपक कुमार उर्फ मोहम्मद दीपक के नाम को लेकर उपजे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। सांसद चंद्रशेखर आजाद समेत कुछ प्रमुख राजनीतिक शख्सियतों के यहां पहुंचने की खबरों के बीच पौड़ी पुलिस प्रशासन हाई अलर्ट मोड पर आ गया है। सीमाओं पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश से आने वाले वाहनों को जांच के बाद लौटाया जा रहा है। मीडिया को भी रोका जा रहा है। एसएसपी पौड़ी ने मोर्चा संभालते हुए पुलिस अधिकारियों को ब्रीफ किया है। शहर में पुलिस बल पैदल मार्च कर रहा है और सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

नाम बदलने से शुरू हुआ घमासान

कोटद्वार में दीपक कुमार द्वारा खुद को मोहम्मद दीपक कहने के बाद से माहौल तनावपूर्ण हो गया है। इस मुद्दे पर मुस्लिम समाज के लोग और उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के विपक्षी दलों के नेता दीपक का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेताओं के सोशल मीडिया पर ट्वीट करने से मामला और गरमा गया है। राहुल गांधी ने इस घटना को धार्मिक भेदभाव का उदाहरण बताते हुए सवाल उठाए हैं, जिससे राजनीतिक सरगर्मियां और बढ़ गई हैं।

तीन मुकदमे दर्ज, दोनों पक्षों पर कार्रवाई

  • पहला मुकदमा: दुकानदार वकील अहमद की शिकायत पर बजरंग दल के अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज किया गया। इसमें दावा किया गया कि बजरंग दल के लोगों ने विवाद को भड़काया।
  • दूसरा मुकदमा: बजरंग दल कार्यकर्ता कमलपाल की ओर से दीपक उर्फ अक्की (मोहम्मद दीपक), कांग्रेस नेता विजय रावत समेत अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज। इसमें आरोप है कि दीपक और उसके समर्थकों ने उकसावा दिया।
  • तीसरा मुकदमा: बाजार चौकी इंचार्ज विनोद कुमार की ओर से देहरादून और हरिद्वार से हंगामा करने आए बजरंग दल कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज। पुलिस का कहना है कि ये लोग शांति भंग करने की कोशिश कर रहे थे।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये मुकदमे दोनों पक्षों पर निष्पक्ष कार्रवाई दर्शाते हैं, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा।

समर्थकों के आने से बिगड़ सकता है माहौल

पुलिस को आशंका है कि यदि बजरंग दल की तर्ज पर दीपक के समर्थक भी कोटद्वार पहुंचे, तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। इसी वजह से यूपी बॉर्डर पर सख्ती बरती जा रही है। हरिद्वार पुलिस भी कोटद्वार प्रकरण पर नजर रखे हुए है और सीमावर्ती इलाकों में चौकसी बढ़ा दी गई है। भीम आर्मी संगठन ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है। हाल ही में हरिद्वार में मोहम्मद दीपक के समर्थन में उतरे भीम आर्मी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच बहस हुई, जिसके बाद कुछ को हिरासत में लिया गया। वहीं, हल्द्वानी में भीम आर्मी ने फर्जी मुकदमे के विरोध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है।

जांच और अफवाहों पर सख्ती

पौड़ी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। एसएसपी पौड़ी ने कहा, “हमारी प्राथमिकता शांति बनाए रखना है। किसी भी तरह की अफवाह या उकसावे पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” देहरादून से स्पेशल रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘बाबा’ के नाम पर राजनीतिक मंच तैयार हो रहा है, जो विवाद को और बढ़ा सकता है।

यह विवाद उत्तराखंड की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे अक्सर उभरते रहते हैं। पुलिस प्रशासन की सतर्कता से फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन आने वाले दिनों में राजनीतिक हस्तियों के दखल से माहौल और गर्माने की आशंका बनी हुई है।