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हरिद्वार अर्ध कुंभ 2027 की तैयारियों की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, काम पूरे करने की डेट लाइन तय

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कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों की समीक्षा

कुंभ से संबंधित सभी तैयारियां, अक्टूबर माह तक पूरी हो : मुख्यमंत्री

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देहरादून 11 फरवरी ।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुंभ से संबंधित सभी तैयारियों को अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जाए। साथ ही कुंभ की आवश्यकताओं को देखते हुए सभी प्रकार के निर्माण कार्य तय समय के अंदर पूरे हों। सभी निर्माण कार्य की गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रखा जाए। शासन स्तर पर कुंभ से संबंधित कोई भी कार्य/फाइल लंबित न रहे। किसी भी कार्य को लंबित रखने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बीते दिनों सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में अधिकारियों को निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने सचिव, पीडब्ल्यूडी को अति शीघ्र कुंभ मेले के लिए टेक्निकल पद के अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ क्षेत्र में बने सभी पुलों का ऑडिट किया जाए। साथ ही कुंभ क्षेत्र में स्थित सभी घाटो का सौंदर्यकरण और आवश्यकता अनुसार पुनर्निर्माण कार्य भी किया जाए। उन्होंने कहा श्रद्धालुओं के लिए हर की पैड़ी के साथ ही अन्य सभी घाटों में भी स्नान की व्यवस्था की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेला क्षेत्र की स्वच्छता के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाए। सभी प्रमुख स्थानों पर शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था हो। पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा बलों, जल पुलिस की तैनाती हो। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर ड्रोन, सीसीटीवी , एवं अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग भी हो। उन्होंने कहा मेले के दौरान कानून व्यवस्था, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन की विस्तृत कार्य योजना अलग से बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेला क्षेत्र में विभिन्न अखाड़ों को भूमि आवंटन तय समय पर किया जाए। इसकी मेलाधिकारी स्वयं मॉनिटरिंग करें। साथ ही सभी अखाड़ों, मठों ,संत समाज, संस्थाओं, समितियां एवं स्थानीय लोगों से परस्पर्म समन्वय किया जाए। साथ ही उनके सुझावों के अनुरूप मेले की तैयारी हो। मुख्यमंत्री ने कहा कुंभ के दौरान लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसके लिए कुंभ क्षेत्र में व्यापक स्तर पर अतिक्रमण की खिलाफ अभियान चलाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन संबंधित मामलों पर जल्द अनुमति ली जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अन्य प्रदेशों से भी परस्पर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिया। उन्होंने कहा मेले से संबंधित सभी विकास कार्य कागजों के साथ धरातल में भी दिखाई देने चाहिए। मुख्यमंत्री ने आवास व टेंट सिटी की तैयारी समय से पूरी करने एवं मेला क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल, एम्बुलेंस व मोबाइल चिकित्सा दल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कुंभ मेला हमारी संस्कृति, आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा धार्मिक आयोजन है। इस आयोजन को सफल बनाना हम सभी का कर्तव्य है। जो भी श्रद्धालु राज्य में आए वह अच्छा अनुभव यहां से लेकर जाएं।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक मदन कौशिक, विधायक आदेश चौहान, विधायक रेनू बिष्ट, विधायक अनुपमा रावत, विधायक रवि बहादुर, उत्तराखण्ड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख सचिव एल. फैनई, आरके सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, सचिव नितेश झा, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका सिंह एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

केंद्रीय मंत्री रिजिजू के गंभीर आरोप, ओम बिरला के चैंबर में जबरन घुसकर दीं गालियां

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नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र में जारी हंगामे और राजनीतिक तनाव के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में जबरन घुसकर उन्हें गालियां दीं और अभद्र व्यवहार किया। रिजिजू ने कहा कि स्पीकर इस घटना से बहुत आहत हैं और उन्होंने खुद उनसे बात की है।

यह आरोप ऐसे समय में लगाए गए हैं जब विपक्षी दलों ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) का नोटिस सौंपा था। नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद, डीएमके और अन्य विपक्षी दल शामिल हैं। हालांकि, कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही पक्षपातपूर्ण ढंग से संचालित कर रहे हैं और विपक्षी नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है।

रिजिजू के आरोप

  • संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रिजिजू ने कहा, “कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसद स्पीकर के चैंबर में घुस गए और उन्हें गालियां दीं। मैं भी वहां मौजूद था। स्पीकर बहुत नरम और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति हैं, अन्यथा सख्त कार्रवाई हो सकती थी।”
  • उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल भी मौके पर मौजूद थे और वे सांसदों को उकसा रहे थे, न कि रोक रहे थे।
  • रिजिजू ने इसे संसदीय परंपराओं का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह घटना “अभूतपूर्व” है और स्पीकर की गरिमा का अपमान है। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने इस घटना से गहरा आघात महसूस किया है।

विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव नियम 94(सी) के तहत सौंपा है। लोकसभा सचिवालय ने नोटिस प्राप्त होने की पुष्टि की है और प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर चर्चा 9 मार्च को हो सकती है। स्पीकर ओम बिरला ने फैसला किया है कि अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने तक वे सदन की कार्यवाही से दूर रहेंगे।

उत्तराखंड : धामी कैबिनेट बैठक खत्म, इन बड़े फैसलों पर लगी मुहर

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक समाप्त हो गई। बैठक में कुल 6 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार एवं सचिव शीलेश बगौली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन फैसलों की विस्तृत जानकारी दी। ये निर्णय मुख्य रूप से कर्मचारी कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, नशा विरोधी अभियान, कानून व्यवस्था और किसानों के हित में लिए गए हैं।

कैबिनेट के प्रमुख फैसले

  1. पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 की बहाली श्रम विभाग में कोविड काल के दौरान संशोधित नियमों को वापस लेते हुए पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 को पुनः लागू करने का निर्णय लिया गया। इससे राज्य के हजारों कर्मचारियों को दिवाली बोनस जैसी सुविधा फिर से मिल सकेगी।
  2. ईएसआई (कर्मचारी राज्य बीमा) में डॉक्टरों के पद सृजन ईएसआई डॉक्टरों की भर्ती के लिए उत्तराखंड 2006 की नियमावली में संशोधन किया गया। नए नियमों के तहत कुल 94 पद सृजित किए जाएंगे, जिसमें ग्रेड A के 11 पद, सीनियर मेडिकल ऑफिसर के 6 पद और असिस्टेंट डायरेक्टर का 1 पद शामिल है। इन पदों पर मेडिकल सिलेक्शन बोर्ड के माध्यम से चयन होगा। इससे ईएसआई अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
  3. नारकोटिक ड्रग्स एक्ट 1985 के तहत नई भर्तियां गृह विभाग में नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान को तेज करने के लिए DSP रैंक सहित कुल 22 पद सृजित करने की मंजूरी दी गई। इससे राज्य में ड्रग्स तस्करी और नशा विरोधी कार्रवाई अधिक प्रभावी होगी।
  4. उत्तराखंड कारागार 2024 में हैबिटुअल ऑफेंडर प्रावधान केंद्र सरकार के एक्ट के अनुरूप उत्तराखंड में भी बार-बार अपराध करने वाले अपराधियों को हैबिटुअल ऑफेंडर घोषित करने का प्रावधान लागू किया जाएगा। इससे दोषियों पर सख्त नजर रखी जा सकेगी और पुनरावृत्ति अपराधों पर अंकुश लगेगा।
  5. दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये राज्य में दैनिक श्रमिकों के 893 पदों में से पहले केवल 304 श्रमिकों को न्यूनतम वेतन मिल रहा था। अब शेष श्रमिकों को भी 18,000 रुपये का न्यूनतम वेतन देने का फैसला लिया गया। इससे हजारों दैनिक श्रमिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
  6. कृषि विभाग में मुख्यमंत्री खाद्य योजना केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सुषम खाद्य योजना के साथ राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री खाद्य योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत किसानों को खाद पर 25 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की लागत कम करने में मदद मिलेगी।

उत्तर प्रदेश : 9.12 लाख करोड़ का बजट प्रस्तुत, AI, स्वास्थ्य, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया। कुल बजट का आकार 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ रुपये (9.12 लाख करोड़ रुपये) निर्धारित किया गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के बजट की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक है। यह योगी आदित्यनाथ सरकार का दूसरा कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट है, जिसमें निवेश आकर्षण, रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे के विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष फोकस किया गया है।

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1.20 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। पिछले कुछ वर्षों में 6 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने का दावा किया गया है। बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया गया है, साथ ही युवाओं, महिलाओं, किसानों और पिछड़े वर्गों के लिए कई नई योजनाओं और बढ़ोतरी की घोषणाएं की गई हैं।

बजट के प्रमुख फोकस क्षेत्र

  • शिक्षा और स्वास्थ्य: इन क्षेत्रों में आवंटन बढ़ाया गया है ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित हो सकें।
  • रोजगार सृजन: युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर, जिसमें कौशल विकास और उद्यमिता को प्रोत्साहन शामिल है।
  • बुनियादी विकास (इंफ्रास्ट्रक्चर): सड़क, बिजली, जल संसाधन और शहरी विकास पर बड़े निवेश का प्रावधान।
  • कल्याणकारी योजनाएं: किसानों, महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए विभिन्न लाभकारी स्कीमों में वृद्धि।

यह बजट राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने में भी सहायक साबित होगा।

उत्तराखंड में भालू का आतंक जारी: पशुपालक पर जानलेवा हमला, गंभीर रूप से घायल

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विकासनगर: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य में भालू के हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला देहरादून जिले के जौनसार बावर क्षेत्र के त्यूणी ब्लॉक अंतर्गत निमगा गांव से सामने आया है, जहां एक पशुपालक पर भालू ने प्राणघातक हमला कर दिया। हमले में पीड़ित गंभीर रूप से घायल हो गया है और उसे उच्चतर चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया गया है।

घटना के अनुसार, निमगा गांव निवासी जगत सिंह रावत मंगलवार शाम को अपनी बकरियों को जंगल में चराने ले गए थे। सामान्य दिनचर्या के दौरान अचानक भालू ने उन पर हमला बोल दिया। हमले के समय उनके साथी आकाश ने शोर मचाकर आसपास के ग्रामीणों को मदद के लिए पुकारा। भारी शोर सुनकर भालू जंगल की ओर भाग गया। ग्रामीणों ने तुरंत घायल जगत सिंह को त्यूणी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. नरेंद्र सिंह राणा ने बताया, “भालू के नाखूनों से जगत सिंह के मुंह, सिर और गर्दन पर गहरे घाव आए हैं। काफी खून बहने के कारण उनकी हालत गंभीर है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उच्चतर चिकित्सा सुविधा वाले केंद्र रेफर किया गया है।”

यह घटना जौनसार बावर क्षेत्र में भालू के हमलों की बढ़ती श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले नवंबर 2025 में इसी इलाके के खरोड़ा गांव में फकीरी देवी नामक महिला पर भालू ने हमला किया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुई थीं। राज्य के विभिन्न जिलों में पिछले कुछ महीनों में भालू के हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है और दर्जनों घायल हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, देर से होने वाली बर्फबारी और जंगलों में भोजन की कमी के कारण भालू गांवों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष तेज हो गया है।

उत्तराखंड बिग ब्रेकिंग : तिब्बती मार्केट के सामने युवक की गोली मारकर हत्या

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देहरादून के तिब्बती मार्केट के सामने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रारंभिक जांच में आपसी विवाद को वारदात की वजह बताया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।

वंदे मातरम पर नए दिशा-निर्देश, गृह मंत्रालय ने कहा- जन-गण-मन से पहले गाना होगा राष्ट्रगीत

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और प्रस्तुति को लेकर महत्वपूर्ण नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब सरकारी कार्यक्रमों, सरकारी स्कूलों तथा अन्य आधिकारिक आयोजनों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का पूर्ण संस्करण बजाया या गाया जाएगा, जो राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले प्रस्तुत किया जाएगा।

नए नियमों के तहत ‘वंदे मातरम’ का आधिकारिक संस्करण छह छंदों (अंतरों) वाला होगा, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है। यह संस्करण बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित मूल गीत पर आधारित है। गृह मंत्रालय के निर्देश स्पष्ट करते हैं कि जब किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ बजाया जाएगा।

इस दौरान उपस्थित सभी व्यक्तियों को सावधान मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य होगा, ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान के समय होता है। हालांकि, सिनेमा हॉल में फिल्मों या न्यूज रील के दौरान गीत बजने पर खड़े होने की अनिवार्यता नहीं होगी, क्योंकि इससे दर्शकों को असुविधा हो सकती है।

ये दिशा-निर्देश होंगे लागू 

  • राष्ट्रीय ध्वज फहराने के समय।
  • राष्ट्रपति या राज्यपाल के किसी कार्यक्रम में आगमन-प्रस्थान पर।
  • उनके भाषणों या राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में।
  • पैडमा पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों में।

यह कदम ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उठाया गया है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति एकसमान सम्मान और प्रोटोकॉल सुनिश्चित करना है। गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी 2026 को जारी 10 पन्नों के विस्तृत आदेश में इन नियमों को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजा है।

उत्तराखंड में भीषण हादसा: वाहन गहरी खाई में गिरा, तीन महिलाओं की मौत की खबर

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विकासनगर : उत्तराखंड के देहरादून जिले में एक बार फिर सड़क हादसे ने तीन परिवारों को सूना कर दिया। कालसी तहसील के बैराटखाई-गागंरोऊ मोटर मार्ग पर वायाधार नामक स्थान के निकट एक यूटिलिटी वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 50 मीटर गहरी खाई में गिर गया। इस भीषण दुर्घटना में तीन महिलाओं की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए हैं।

हादसे में मृतक महिलाओं की पहचान लूसो देवी (65 वर्ष), पत्नी नंदूदास, निवासी गागंरोऊ; गीता देवी (35 वर्ष), पत्नी प्रकाश खन्ना, निवासी कुस्यौ (या खुसियो); और धनौ देवी (53 वर्ष), पत्नी संतू दास, निवासी चिटाड़ के रूप में हुई है। लूसो देवी की मौत मौके पर ही हो गई, जबकि गीता देवी रास्ते में और धनौ देवी अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।

घटना मंगलवार को हुई, जब गागंरोऊ गांव से विकासनगर की ओर जा रहा यूटिलिटी वाहन (संख्या यूके-07-टीबी-2455) वायाधार के पास पहुंचा। चालक रमेश के अनुसार, वाहन के पिछले टायर के निकल जाने से वाहन अनियंत्रित हो गया और सीधे खाई में जा गिरा।

वाहन में चालक समेत कुल आठ लोग सवार थे। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम, पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर रेस्क्यू अभियान चलाया। घायलों को खाई से बाहर निकालकर उप जिला अस्पताल विकासनगर पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

एसडीएम प्रेमलाल ने घटना की पुष्टि करते हुए तीन मौतों और पांच घायलों की जानकारी दी है। इस इलाके में पहाड़ी मार्गों पर अक्सर ऐसे हादसे होते रहते हैं, जिससे स्थानीय लोग सतर्क रहने की अपील करते हैं। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने दोनों मंडलों में अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए बहुउद्देशीय भवनों के निर्माण को दी मंजूरी

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों मंडलों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कल्याण के लिए बहुउद्देशीय भवनों के निर्माण को मंजूरी दे दी है। देहरादून में मंगलवार को सचिवालय में उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गढ़वाल मंडल (देहरादून क्षेत्र) और कुमाऊं मंडल (हल्द्वानी-नैनीताल क्षेत्र) में इन बहुउद्देशीय/सामुदायिक भवनों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र शुरू किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भवनों में बैंक्वेट हॉल, गेस्ट हाउस, सभागार, प्रशिक्षण कक्ष, बैठक कक्ष सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे ओबीसी समुदाय के सदस्यों को सामाजिक, शैक्षिक, प्रशिक्षण और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए बेहतर मंच मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को इन भवनों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जल्द तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने ओबीसी बहुल क्षेत्रों में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं। विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाए तथा लाभार्थियों के फीडबैक के आधार पर योजनाओं में आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से आमजन तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ओबीसी वर्ग के उत्थान के लिए शिक्षा, कौशल विकास, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव, 118 सांसदों ने दिया नोटिस, पक्षपात और दमन का आरोप

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नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के बीच विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के करीब 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर पक्षपाती रवैया अपनाते हुए उनकी आवाज को दबा रहे हैं, बहस की अनुमति नहीं दे रहे और सत्तापक्ष के इशारे पर काम कर रहे हैं। प्रस्ताव को लोकसभा सचिवालय के महासचिव उत्पल कुमार सिंह को सौंपा गया है।

प्रस्ताव जमा करने का तरीका और समर्थन

कांग्रेस के चीफ व्हिप कोडिकुन्निल सुरेश, सांसद मोहम्मद जावेद और गौरव गोगोई ने दोपहर करीब 1:14 बजे नियम 94सी के तहत नोटिस जमा किया। सूत्रों के मुताबिक, प्रस्ताव पर 118 से 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (एसपी), डीएमके और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य शामिल हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “यह प्रस्ताव विपक्ष की एकजुटता का प्रतीक है। स्पीकर की पूर्वाग्रहपूर्ण कार्रवाई से संसद की गरिमा प्रभावित हो रही है।”

विपक्ष के आरोप: पक्षपात और आवाज दबाना

विपक्ष का मुख्य आरोप है कि स्पीकर ओम बिरला सत्तापक्ष की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। हाल के सत्रों में विपक्षी सांसदों को बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों को लंबा समय मिलता है। विशेष रूप से, पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के अंशों पर चर्चा की अनुमति न देने, चीन सीमा विवाद और अन्य मुद्दों पर बहस रोकने का हवाला दिया गया है। पिछले हफ्ते हुए हंगामे में स्पीकर ने कहा था कि उन्हें ‘कंक्रीट जानकारी’ मिली थी कि कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट को घेरकर ‘अप्रत्याशित कार्रवाई’ कर सकते हैं, जिसके चलते पीएम ने सदन में भाषण रद्द कर दिया। विपक्ष इसे ‘झूठा और निराधार’ बता रहा है।

स्पीकर सरकार के दबाव में झुक गए

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने स्पीकर पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “स्पीकर सरकार के दबाव में झुक गए हैं और हम महिलाओं पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। यह पूर्णतः असत्य है। हम शांति और संवैधानिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं, हिंसा में नहीं। पीएम की अनुपस्थिति खतरे की वजह से नहीं, बल्कि विपक्ष के सवालों से डर की वजह से थी।” प्रियंका समेत कांग्रेस की महिला सांसदों (ज्योतिमणि, आर सुधा, वर्षा गायकवाड़ और ज्योत्सना महंत) ने स्पीकर को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि वे सत्तापक्ष के इशारे पर विपक्ष को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम बहादुर महिला प्रतिनिधि हैं, जो धमकियों से नहीं डरेंगी। पारदर्शिता ही सदन की गरिमा बहाल कर सकती है।”

सरकार और स्पीकर की प्रतिक्रिया

iभाजपा ने विपक्ष के कदम को ‘हास्यास्पद’ बताते हुए खारिज किया है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, “यह विपक्ष की हताशा है। स्पीकर निष्पक्ष हैं और सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं।” स्पीकर ओम बिरला ने अभी तक प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उन्होंने विपक्षी नेताओं से मिलकर सत्र सुचारू चलाने की अपील की है। सदन में हंगामे के चलते आज लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।

स्पीकर हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत स्पीकर को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। नियम 198 के अनुसार, प्रस्ताव पर कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। नोटिस देने के बाद 14 दिनों का ‘कूलिंग पीरियड’ होता है, उसके बाद सदन में चर्चा और मतदान होता है। प्रस्ताव पास होने के लिए साधारण बहुमत (सदन में मौजूद सदस्यों का आधा से ज्यादा) जरूरी है। यदि पास हो जाता है, तो स्पीकर को पद छोड़ना पड़ता है।

इतिहास में ऐसे प्रस्ताव: ज्यादातर असफल

भारत के संसदीय इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दुर्लभ हैं और कोई भी सफल नहीं हुआ है। पहला प्रस्ताव 1963 में स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ आया था, लेकिन वापस ले लिया गया। 1973 में स्पीकर जीएस ढिल्लन, 1989 में बलराम जाखड़, 2002 में जीएमसी बालयोगी और 2018 में सुमित्रा महाजन के खिलाफ भी ऐसे प्रस्ताव आए, लेकिन सभी असफल रहे या चर्चा तक नहीं पहुंचे। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भाजपा बहुमत (एनडीए के करीब 293 सांसद) के चलते यह प्रस्ताव भी पास होने की संभावना कम है, लेकिन यह विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है जो स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।