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बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पर मिले शुभ संकेत, जानें क्या है वह संकेत?

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बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद परंपरानुसार भगवान बद्रीविशाल की शालिग्राम मूर्ति पर शीतकाल में लपेटे गए घृत कंबल को विधि-विधान के साथ निकाला गया। इस दौरान प्राप्त संकेतों को तीर्थ पुरोहितों और रावल ने बेहद शुभ माना है।

जानकारी के अनुसार, जब मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाते हैं, तब भगवान की मूर्ति पर घी में डूबा विशेष कंबल ओढ़ाया जाता है। कपाट खुलने पर इसी घृत कंबल को हटाकर उसकी स्थिति देखी जाती है, जिसे वर्षभर के संकेतों से जोड़कर देखा जाता है।

इस बार भी घृत कंबल की स्थिति संतोषजनक पाई गई, जिसे अनुकूल मौसम और देश में सुख-समृद्धि का संकेत माना जा रहा है। मान्यता है कि यदि कंबल पर लगा घी सूखा न हो और सामान्य अवस्था में मिले, तो यह वर्ष भर अच्छी बारिश और खुशहाली का संकेत देता है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार, यह घृत कंबल माणा गांव की महिलाओं द्वारा विशेष विधि से तैयार किया जाता है और इसे अत्यंत पवित्र प्रसाद माना जाता है। कपाट खुलने के बाद इसे श्रद्धालुओं में वितरित भी किया जाता है।

चारधाम यात्रा की शुरुआत के साथ ही बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और इस शुभ संकेत से भक्तों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

शहर में ब्लैकआउट मॉकड्रिल, 30 मिनट तक बंद रहेंगी लाइटें

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शहर में नागरिक सुरक्षा तंत्र की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार रात ब्लैकआउट मॉकड्रिल आयोजित की जाएगी। प्रशासन के अनुसार रात 10 बजे से करीब 30 मिनट के लिए शहर के कई इलाकों में बिजली बंद रखी जाएगी और आपातकालीन सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया जाएगा।

इस संबंध में बृहस्पतिवार को प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों ने बताया कि यह अभ्यास भारत सरकार के निर्देशों के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आपदा या आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

मॉकड्रिल के तहत आईएसबीटी, रायपुर, घंटाघर और आराघर क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। इन इलाकों में रात 10 बजे सायरन बजने के साथ ही ब्लैकआउट लागू होगा। इस दौरान स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य सार्वजनिक स्थानों की रोशनी अस्थायी रूप से बंद रखी जाएगी।

प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे इस दौरान घबराएं नहीं और सहयोग बनाए रखें, ताकि आपातकालीन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता का सही आकलन किया जा सके।

23 अप्रैल 1930 पेशावर : जब रॉयल गढ़वाल राइफल्स सैनिकों ने कहा-“हम अपने भाइयों पर गोली नहीं चलाएंगे

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  • प्रशांत सी. बाजपेयी 

ब्रिटिश शासन के खिलाफ चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 23 अप्रैल 1930 को पेशावर के क़िस्सा ख्वानी बाज़ार में एक बड़ा और दर्दनाक नरसंहार हुआ। यह घटना महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय की है, जब देशभर में अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध तेज़ हो रहा था।

उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (अब पाकिस्तान में) में खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार खान, जिन्हें ‘सीमांत गांधी’ के नाम से जाना जाता है, ने खुदाई ख़िदमतगार संगठन के माध्यम से अहिंसा का संदेश फैलाया। उनकी और अन्य नेताओं की गिरफ़्तारी के विरोध में 23 अप्रैल को क़िस्सा ख्वानी बाज़ार में एक शांतिपूर्ण जुलूस निकाला गया।

सुबह से ही बड़ी संख्या में निहत्थे लोग—पठान, व्यापारी और आम नागरिक—बाज़ार में एकत्र हो गए थे। इस आंदोलन में सभी धर्मों के लोगों ने भाग लिया और पूरी तरह अहिंसक तरीके से विरोध जताया।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अंग्रेज़ों ने बख्तरबंद गाड़ियां भेजीं, जो भीड़ में घुस गईं। इस दौरान एक गाड़ी में आग लगने से हालात और बिगड़ गए। इसके बाद ‘रॉयल गढ़वाल राइफल्स’ की 2/18 बटालियन समेत अन्य ब्रिटिश सैनिकों को बुलाया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिना किसी चेतावनी के सैनिकों को गोली चलाने का आदेश दिया गया और निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई। इस गोलीबारी में लगभग 400 से 600 लोग मारे गए, जबकि 1200 से अधिक लोग घायल हुए। यह घटना 1919 के जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के बाद एक और बड़ी त्रासदी के रूप में सामने आई।

हालांकि, इस घटना में एक महत्वपूर्ण और साहसिक पहलू भी सामने आया। रॉयल गढ़वाल राइफल्स की दो प्लाटून ने निहत्थे लोगों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया। हवलदार चंद्र सिंह गढ़वाली के नेतृत्व में सैनिकों ने अपने हथियार नीचे रख दिए और कहा कि वे अपने ही देशवासियों पर गोली नहीं चलाएंगे।

इस अवज्ञा के चलते उन्हें कोर्ट-मार्शल का सामना करना पड़ा और कठोर सज़ाएं दी गईं, लेकिन उनका यह कदम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नैतिक साहस और देशभक्ति की मिसाल बन गया।

क़िस्सा ख्वानी बाज़ार का यह नरसंहार भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और मार्मिक अध्याय के रूप में दर्ज है। इस घटना में शहीद हुए सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है, जिन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

चंबा-कोटीकॉलोनी मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, 8 की मौत, 2 घायल

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चंबा-कोटीकॉलोनी मार्ग पर नैल के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहां एक वाहन गहरी खाई में गिर गया। हादसे के समय वाहन में कुल आठ लोग सवार थे, जिनमें से सभी की मौके पर ही मौत हो गई।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने आठ लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं, हादसे में दो अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार सभी मृतक घनसाली क्षेत्र के चांजी, ठेला और चकरेड़ा गांव के निवासी थे। वे हरिद्वार में एक अंतिम संस्कार में शामिल होकर वापस लौट रहे थे, तभी यह हादसा हो गया।

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान में जुट गए। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

चारधाम यात्रा पर फेक न्यूज फैलाने वालों पर कार्रवाई, भ्रामक वीडियो पर FIR दर्ज

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उत्तराखंड में संचालित चारधाम यात्रा को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। जनपद रुद्रप्रयाग में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक भ्रामक वीडियो के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्रशासन के अनुसार, वायरल वीडियो में केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं को दर्शन से वंचित किए जाने की गलत जानकारी दी जा रही थी, जिससे लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए सोनप्रयाग थाने में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि चारधाम यात्रा पूरी तरह सुचारू, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है। यात्रियों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य सेवाएं, ट्रैफिक प्रबंधन, आपदा सुरक्षा और डिजिटल मॉनिटरिंग को मजबूत किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन सुनिश्चित हो सके। प्रशासन ने बताया कि ऐसे 4-5 अन्य संदिग्ध वीडियो भी चिन्हित किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की 24×7 निगरानी की जा रही है।

पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि चारधाम यात्रा की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने आम जनता और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी को साझा करने से बचें।

उत्तराखंड : महिला आरक्षण की मांग को लेकर कांग्रेस का धरना, सरकार पर लगाया गुमराह करने का आरोप

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उत्तराखंड में विधानसभा और संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किए जाने की मांग को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गुरुवार को विशाल धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में विधानसभा भवन के निकट आयोजित किया गया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को जानबूझकर उलझा रही है और जनता को गुमराह किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पार्टी महिला आरक्षण बिल के समर्थन में पहले भी खड़ी थी और आगे भी मजबूती से खड़ी रहेगी।

उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मांग की कि परिसीमन की जटिलता को जल्द सुलझाकर संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए और महिला आरक्षण विधेयक को पारित किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि 2027 से मौजूदा लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा की संरचना के आधार पर 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है और यदि इसे लागू करना है तो 543 लोकसभा सीटों के आधार पर तुरंत 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी चाहिए। धरने में नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पंचायत स्तर पर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत की थी, जिससे देशभर में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिला।

ट्रंप ने शेयर की भड़काऊ एंटी इंडिया पोस्ट, ‘चीन और भारत नरक जैसी जगह…

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डोनल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के एक पत्र को रीपोस्ट किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस पत्र में भारत और चीन सहित कई देशों के लिए आपत्तिजनक और नस्लवादी टिप्पणियां की गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पत्र में अमेरिकी जन्मसिद्ध नागरिकता कानून पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया कि कुछ देशों के लोग “बर्थ टूरिज्म” के जरिए अमेरिका आकर बच्चों को जन्म देते हैं, जिससे उन्हें स्वतः नागरिकता मिल जाती है। पत्र में इस प्रक्रिया को लेकर सख्त नियमों और जनमत संग्रह की मांग की गई है।

माइकल सैवेज ने अपने बयान में भारतीय और चीनी प्रवासियों को लेकर आपत्तिजनक भाषा का उपयोग करते हुए उन्हें “लैपटॉप गैंगस्टर” और “माफिया जैसी प्रवृत्ति वाले लोग” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रवासन व्यवस्था के कारण अमेरिकी संसाधनों और पहचान पर असर पड़ रहा है।

पत्र में यह भी कहा गया कि मौजूदा अमेरिकी संविधान आधुनिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है, क्योंकि यह उस समय लिखा गया था जब हवाई यात्रा, इंटरनेट और आधुनिक वैश्विक प्रवासन व्यवस्था मौजूद नहीं थी।

इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों ने इस बयान को भड़काऊ और विभाजनकारी बताया है, जबकि कुछ ने इसे अमेरिकी आव्रजन नीति पर बहस का हिस्सा बताया है।

उत्तराखंड पहुंचे उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत

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जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर आज सी.पी. राधाकृष्णन के देवभूमि उत्तराखंड आगमन पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस अवसर पर गुरमीत सिंह, पुष्कर सिंह धामी सहित राज्य सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

उपराष्ट्रपति के आगमन को लेकर एयरपोर्ट पर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। उनके स्वागत के दौरान प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क नजर आईं। उपराष्ट्रपति के इस दौरे को राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें वे विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

उत्तराखंड: स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर नकेल कसने कि तैयारी, बनेगा राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण

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देहरादून : उत्तराखंड में सरकारी और निजी स्कूलों के लिए जल्द ही राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। यह प्राधिकरण प्रदेश के सभी विद्यालयों के लिए न्यूनतम मानक तय करेगा, जिससे फीस की मनमानी और अन्य शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

प्रस्तावित प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य निजी स्कूलों में फीस वृद्धि, सुविधाओं की कमी और अभिभावकों की शिकायतों का समाधान करना होगा। यह राज्य के करीब 16,501 सरकारी और 5,396 निजी विद्यालयों के लिए बुनियादी मानक निर्धारित करेगा। साथ ही, स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले विषय, फीस संरचना और अन्य आवश्यक जानकारी को सार्वजनिक करना भी अनिवार्य होगा।

प्राधिकरण को अर्धन्यायिक आयोग का दर्जा दिया जाएगा, जिसके पास विद्यालयों की मान्यता की शर्तें तय करने, उनके पालन की निगरानी करने और शिकायतों की जांच करने का अधिकार होगा। नियमों के उल्लंघन पर स्कूलों को दंडित करने या उनकी मान्यता समाप्त करने की भी शक्ति प्राधिकरण के पास होगी।

इसके अलावा, निजी विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतनमान को भी तय किया जाएगा। बुनियादी ढांचा, सुरक्षा मानक और शिक्षकों की संख्या जैसे पहलुओं पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, जिनका पालन सभी सरकारी और निजी स्कूलों को करना होगा। प्राधिकरण एक स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करेगा। इसके गठन को लेकर वित्त विभाग अपनी राय दे चुका है और जल्द ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस पर अहम बैठक आयोजित की जाएगी।

प्राधिकरण में एक अध्यक्ष और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ सदस्य शामिल होंगे। अध्यक्ष पद के लिए शिक्षाविद, सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी या सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नामित किया जाएगा। वहीं, सदस्यों में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, एससीईआरटी के निदेशक, सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध स्कूलों के प्रधानाचार्य तथा गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। अपर शिक्षा निदेशक पद्मेंद्र सकलानी के अनुसार, प्राधिकरण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए सिरे से ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, जिसमें शिक्षा विभाग के अलावा अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी शामिल करने पर जोर दिया गया है।

उत्तराखंड में भीषण हादसा, खाई में गिरी कार, तीन युवकों की मौत

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रुद्रप्रयाग : जिले में भीरी-ककोला मोटर मार्ग पर गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। भीरी से औरिंग की ओर जा रहा एक वाहन अनियंत्रित होकर सड़क से करीब 250 मीटर नीचे गहरी खाई में जा गिरा, जिससे उसमें सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही उत्तराखंड पुलिस की कोतवाली ऊखीमठ टीम और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। प्रभारी निरीक्षक मनोज नेगी और एसडीआरएफ पोस्ट अगस्तमुनि से उपनिरीक्षक धर्मेंद्र पंवार के नेतृत्व में राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

रात के अंधेरे और दुर्गम परिस्थितियों के बीच जवानों ने खाई में उतरकर संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। कड़ी मशक्कत के बाद दो शवों को बाहर निकाल लिया गया, जबकि तीसरे शव को निकालने का प्रयास जारी रहा। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान नवीन सिंह (30 वर्ष), अंशुल (28 वर्ष) और अमित सिंह (35 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों मृतक रुद्रप्रयाग जिले के निवासी बताए जा रहे हैं।