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दानिश अली को अपशब्द कहने का मामला पहुंचा मानवाधिकार आयोग

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मरोहा से बहुजन समाज पार्टी के सांसद दानिश अली के साथ संसद में अभद्रता का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। इस मामले में रामपुर निवासी आरटीआइ कार्यकर्ता दानिश खान ने शिकायत की थी।

दानिश खान डीके फाउंडेशन आफ फ्रीडम एंड जस्टिस नाम से संस्था चलाते हैं। उन्होंने अपनी संस्था के माध्यम से शिकायत की थी। उनका कहना था कि संसद में भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी द्वारा अमरोहा के सांसद के साथ अभद्र व्यवहार किया था। इस मामले में अमरोहा के सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से भी लिखित शिकायत की थी।

RTI कार्यकर्ता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में इसे अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभाव का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि उनकी शिकायत को आयोग ने पंजीकृत कर लिया है। अब देखना भी होगा कि इस मामले में क्या एक्शन लिया जाता है।

बीते दिनों संसद के विशेष सत्र के दौरान चंद्रयान 3 की सफलता को लेकर हुई चर्चा पर दोनों सांसदों में जुबानी जंग छिड़ गई थी। इस बीच भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी को दानिश अली को गाली और कई गलत टिप्पणियां करते हुए सुना गया। बिधूड़ी ने अली को संसद में आतंकी तक कह दिया था। इस टिप्पणी के बाद पूरा विपक्ष भाजपा पर हमलावर हो गया था।

एशियन गेम्स : निशानेबाजी में भारत ने पुरुष ट्रैप टीम में हासिल किया गोल्ड मेडल

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भारत ने पुरुष ट्रैप टीम में स्वर्ण पदक जीता है। किनान चेनाई, जोरावर सिंह और पृथ्वीराज टोंडिमान ने कुवैत और चीन से काफी आगे रहते हुए 361 का स्कोर किया और स्वर्ण पदक जीता। यह एशियाई खेलों में ट्रैप शूटिंग में किसी टीम का सबसे बड़ा स्कोर है। कीनान और जोरावर भारतीय समयानुसार दोपहर 1.30 बजे पुरुष व्यक्तिगत फाइनल में भाग लेंगे।

शूटिंग में देश को एक और पदक मिला है। महिला ट्रैप टीम ने रजत पदक जीता है। मनीषा कीर, राजेश्वरी कुमारी और प्रीति रजक ने 337 का स्कोर किया। चीन की टीम ने 355 का स्कोर कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

आज देश को पहला पदक गोल्फ में मिला है। अदिति अशोक ने रजत पदक अपने नाम किया है। थाईलैंड की अपिरचाया युबोल ने आखिरी दिन शानदार खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीता। वहीं, अदिति अशोक ने आखिरी दिन काफी साधारण प्रदर्शन किया। सात स्ट्रोक की लीड लेने के बाद वह मुकाबला खत्म होने तक दो स्ट्रोक पीछे हो गईं और स्वर्ण पदक से चूक गईं।

RBI ने 2,000 रुपये के नोट बदलने की बढ़ाई समय सीमा, मिले इतने दिन

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RBI ने 2,000 रुपये के नोट बदलने की समय सीमा बढ़ा दी है। अब आप 7 अक्टूबर 2023 तक बैंक और आरबीआई में जाकर नोट को बदल या जमा कर सकते हैं। इसकी जानकारी आरबीआई ने एक सर्कुलर जारी करके दिया है। इस साल मई में आरबीआई ने घोषणा की थी कि 2,000 रुपये के नोट को सर्कुलर में वापस लिया जाएगा।

बैंक ने नोट को वापस लेने के लिए 4 महीने का समय दिया था। इसका मतलब है कि 30 सितंबर 2023 तक इस नोट को बदला जा सकता था। अब इस डेडलाइन को बढ़ाकर 7 अक्टूबर 2023 कर दिया है। इसकी वजह यह है कि अभी भी सर्कुलर में लगभग 93 फीसदी ही नोट वापस आए हैं। इसका मतलब है कि कई लोगों ने अभी तक नोट को जमा या एक्सचेंज नहीं किया है।

RBI ने नोट को एक्सचेंज करने की लिमिट 20,000 तय की थी।  आपको बता दें कि 2,000 के नोट 30 सितंबर 2023 तक ही वैध है। इसका मतलब है कि केवल आज ही आप इस नोट का लेनदेन कर सकते हैं। 19 मई 2023 को RBI ने 2,000 रुपये के नोट को वापस लेना की घोषणा की थी।

यह फैसला बैंक द्वारा इसलिए लिया गया था क्योंकि बाजार में इस नोट का चलन बाकी नोट की तुलना में कम था। बैंक ने 29 सितंबर 2023 को जानकारी दी की अभी तक 3.42 लाख रुपये वैल्यू के नोट वापस आ गए हैं। इसका मतलब है कि बाजार में अभी भी 0.14 लाख रुपये के नोट मौजूद है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सुरक्षा में बड़ी चूक, ये है पूरा मामला

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बन्नु स्कूल स्थित कार्यक्रम में सीएम धामी का जोरदार स्वागत किया गया। लेकिन इस दौरान स्वागत समारोह में भारी अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। मुख्यमंत्री धामी का हेलीकॉप्टर आज जैसे बन्नू स्कूल के मैदान में उतरा,पार्टी कार्यकर्ताओं का हुजूम मंत्री और विधायक के साथ सीधे मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर तक पहुंच गया।

चूक इतनी बड़ी थी की हेलीकॉप्टर के पंखे (पंखुड़ी) बंद भी नही हुए थे कि मंत्री के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता वहां तक पहुंच गए। इसमें साफ तौर पर अनुशासनहीनता देखने को मिली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लंदन दौरे के बाद देहरादून पहुंचने पर रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल के मैदान में मंत्रीगणों, विधायकगणों एवं पार्टी पदाधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया।

इस दौरान तमाम पुलिस फोर्स गेट के अंदर और बाहर तैनात रही। एसएसपी, एसपी सिटी ने खुद मोर्चा संभाला। स्तिथि को संभाला गया, लेकिन‌ कार्यकर्ताओं में इतना जोश था कि वो नहीं माने और ना ही अनुशासन वाली पार्टी का अनुशासन दिखा।‌

वहीं, एसएसपी ने भी मामले की जांच के आदेश दे दिये हैं। एसएसपी कार्यालय की ओर से कहा गया कि लंदन के सफल दौरे से लौटे मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के स्वागत के लिए आज बन्नू स्कूल रेसकोर्स में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई अव्यवस्थाओं के सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक नगर द्वारा दी गयी रिपोर्ट के आधार पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा सम्पूर्ण प्रकरण की जांच के आदेश दिये गये हैं।

कुपवाड़ा में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, ढेर किए दो आतंकी

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जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। उन्होंने उत्तरी कश्मीर के मच्छल कुपवाड़ा सेक्टर में घुसपैठ के प्रयास को विफल कर दिया है। दहशतगर्दों के नापक मंसूबों को विफल करते हुए सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। वहीं, उसके अन्य साथियों की धरपकड़ के लिए सैन्य अभियान जारी है। जानकारी के मुताबिक, कुपवाड़ा में मारे गए घुसपैठियों के पास से दो एसाल्ट राइफल, चार मैगजीन, 90 कारतूस, एक पिस्टल और पाकिस्तान मुद्रा में 2100 रुपए मिले हैं।

यहां मिली जानकारी अनुसार, जिला कु़पवाड़ा के अंतर्गत मच्छल सेक्टर में एलओसी के साथ सटे कुमकारी हयहामा इलाके में गश्त रहे जवानों ने आज तड़के गुलाम जम्मू कश्मीर (POK) की तरफ से घुसपैठियों के एक दल को भारतीय इलाके की तरफ आते देखा। जवानों ने उसी समय आस पास की चौकियों व नाका पार्टियों को सचेत करते हुए अपनी पोजीश ली। स्वचालित हथियारों से लैस घुसपैठिए आगे आए।

जवानों ने उन्हें ललकारते हुए आत्मसमर्पण के लिए कहा। जवानों की ललकार सुनते ही घुसपैठियों ने फायरिंग शुरू कर दी और वापस गुलाम जम्मू कश्मीर की तरफ भागने लगे। जवानों ने भी जवाबी फायर किया। इसके साथ ही वहां मुठभेड़  शुरू हो गई। सूत्रों ने बताया कि दो घुसपैठिए मारे गए हैं। मुठभेड़स्थल से भारी मात्रा में हथियार व गोला बारूद व अन्य सामान जब्त किया गया है।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि मच्छल में आतंकरोधी अभियान जारी है। दो आतंकियों के मारे जाने की सूचना है। अभियान के समाप्त होने के बाद ही मारे गए आतंकियों की सही संख्या और उनकी पहचान का पता चल सकेगा.  सुरक्षाबलों ने दक्षिण कश्मीर में पुलवामा के त्राल में दो आतंकी ठिकानों  को नष्ट कर दिया।

पुलिस और सेना की 42 आरआर के एक संयुक्त कार्यदल ने दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में दो आतंकी ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया है। संबधित अधिकारियों ने बताया कि यह दोनों ठिकाने त्राल के ऊपरी हिस्से में गुलशपोना के साथ सटे नागबल जंगल में थे।

यह दोनों ठिकाने जंगल में जमीन खोदकर तैयार किए गए थे और इनके ऊपर लकड़ियां व घासफूस बिछाई गई थी, ताकि किसी को इनके बारे में पता न चले। इन ठिकानों से कंबल, कुछ खाने पाने का सामान मिला है। सूत्रों ने बताया कि यह दोनों ठिकाने काफी पुराने हैं और इन्हें कथित तौर पर हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने तैयार किया था।

इस बार चाय ना पिलाऊंगा और ना पोस्टर लगाऊंगा, पिछली बार मटन खाकर भी वोट नहीं दिया

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकर ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पिछली बार लोगों ने मटन खाने के बाद भी वोट नहीं दिया। गडकरी अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। नितिन गडकरी ने कहा है कि वह चुनाव प्रचार के दौरान अपने लोकसभा क्षेत्र नागपुर में कोई बैनर या पोस्टर नहीं लगवाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि लोगों को चाय तक नहीं पिलाएंगे।

महाराष्ट्र के वाशिम में तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के उद्घाटन के दौरान नितिवन गडकरी ने ये बातें कही हैं। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस घोष वाक्य को भी दोहराया जिसमें वह कहते हैं, श्ना खाऊंगा और ना किसी को खाने दूंगा। उन्होंने कहा कि इस बाद के लिए मैंने फैसला किया है कि कोई बैनर या पोस्टर नहीं लगाया जाएगा। लोगों को चाय नहीं दी जाएगी। जिन्हें वोट देना है वे वोट देंगे और जिन्हें नहीं देना है वे नहीं देंगे। न ही मैं रिश्वत लूंगा और न ही मैं किसी को लेने दूंगा। मुझे विश्वास है कि मैं ईमानदारी से आप सभी की सेवा कर सकूंगा।

इससे पहले जुलाई में नितिन गडकरी ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा था कि उन्होंने एक बार चुनाव के दौरान मतदाताओं को मटन उपलब्ध कराया था, लेकिन फिर भी वह हार गए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदाताओं के प्रति विश्वास और प्यार पैदा करके चुनाव जीता जा सकता है।

गडकरी ने कहा कि मतदाता बहुत होशियार हैं और उन्हें हर उम्मीदवार से चुनावी सौगात मिली है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोग उसी उम्मीदवार को वोट देते हैं जो उन्हें लगता है कि उनके लिए सही है। गडकरी ने कहा, ष्लोग अक्सर पोस्टर लगाकर और चुनावी उपहार देकर चुनाव जीतते हैं। हालांकि मैं ऐसी रणनीतियों में विश्वास नहीं करता हूं। मैंने एक बार एक प्रयोग किया था और मतदाताओं को एक किलो मटन दिया था, लेकिन हम चुनाव हार गए। मतदाता बहुत स्मार्ट हैं।ष्

शहनाज गिल ने क्यों कहा : इससे अच्छा तो मैं मर जाऊं…

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शहनाज गिल किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। शहनाज आज कई अच्छे प्रोजेक्ट्स और ब्रांड का हिस्सा हैं, लेकिन यहां तक पहुंचाने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी। इन दोनों शहनाज अपकमिंग फिल्म ‘थैंक यू फॉर कमिंग’ को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। हाल ही में एक्ट्रेस इस फिल्म के प्रमोशनल इवेंट में पहुंचीं, जहां उन्होंने कई चीजों पर बात की।

इस दौरान शहनाज ने इंडस्ट्री में अपने स्ट्रगल पर बात करते हुए एक हैरान करने वाली सच्चाई बताई। एक्ट्रेस ने बताया कि अगर इस इंडस्ट्री में टिके रहना है, तो अपने फिगर को मेंटेन करना जरूरी होता है। वह आगे कहती हैं ”अगर मैं यहां काम नहीं कर रही होती, तो मोटी वाली शहनाज गिल होती।

शहनाज ने कहा कि हाल ही में उन्हें एक ऐसे किरदार का ऑफर आया था, जिसके लिए उन्हें वेट गेन करना था। लेकिन ऐसा करने से उन्होंने हाथ जोड़ लिए। मैंने उनसे कहा कि आप मुझसे कुछ भी करवा लो, लेकिन दोबारा मोटी होने के लिए मत कहना। मुझे पता है मैंने अपना मोटापा कैसे कम किया है। अब मुझसे ये नहीं होगा। उन्होंने ये भी कहा कि जो लोग इस इंडस्ट्री में नहीं हैं, वह अच्छी लाइफ जी रहे हैं। क्या फायदा ऐसी लाइफ का जहां आप खुलकर खाना भी नहीं खा सकते। इ
ससे अच्छा तो मैं मर ही जाऊं…मोटा-पतला कुछ नहीं होता। आपके अंदर कॉन्फिडेंस होना चाहिए। ‘थैंक्यू फॉर कमिंग’ शहनाज गिल की दूसरी बॉलीवुड मूवी है। फिल्म में उनके अलावा भूमि पेडनेकर, कुशा कपिला और डॉली सिंह भी हैं। करण भूलानी के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में शोभा कपूर, अनिल कपूर, एकता कपूर और रिया कपूर ने इसे प्रोड्यूस किया है। फिल्म 6 अक्टूबर को रिलीज हो रही है।

सरकार ने किए ताबड़तोड़ तबादले, कई जिलों के DM और CDO बदले, देखें लिस्ट

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योगी सरकार ने ताबड़तोड़ तबादले करते हुए कई जिलों के जिलाधिकारी और सीडीओ के तबादले किए गए हैं। फतेहपुर, सुल्तानपुर, महाराजगंज, बाराबंकी, झांसी व बरेली के जिलाधिकारी बदले गए हैं। बताया जा रहा है कि सुल्तानपुर में चिकित्सक हत्याकांड के बाद जिले के जिलाधिकारी का तबादला कर दिया गया है।

2013 बैच के आईएएस सत्येन्द्र कुमार को महाराजगंज से हटाकर बाराबंकी का जिलाधिकारी बनाया गया है। इनके अलावा 2015 बैच के आईएएस अनुनय झा, जो कि नगर आयुक्त मथुरा थे, उन्हें महराजगंज का जिलाधिकारी बनाया गया है। बलिया के सीडीओ आईएएस प्रवीण वर्मा को बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण का सीईओ बनाया गया है।
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2011 बैच के आईएएस रवींद्र कुमार-II को झांसी के डीएम पद से हटाकर बरेली  के जिलाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। 2013 बैच के अविनाश कुमार को बाराबंकी डीएम के पद से हटाकर झांसी का जिलाधिकारी बनाया गया है। आईएएस सी इंदुमती को फतेहपुर और आईएएस कृतिका ज्योत्सना को सुल्तानपुर का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।

क्लर्क की परीक्षा दे रहे MBA और इंजीनियर, देश में 25 से कम उम्र के 42 फीसदी स्नातक बेरोजगार

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देश में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। बेरोजगारों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। बेरोजगारी की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आंकड़े जजारी कर सरकार के रोजगार के दावों के झूठा करार दिया। उनका कहना है कि अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 में 25 साल से कम उम्र के 42 फीसदी ग्रेजुएट बेरोजगार थे। जनवरी 2023 में, 8,000 उम्मीदवारों ने गुजरात विश्वविद्यालय में क्लर्क के 92 पदों के लिए आवेदन किया। इनमें एमएससी और एमटेक वाले भी शामिल थे। जून 2023 में महाराष्ट्र में क्लर्क के 4,600 पदों के लिए 10.5 लाख लोगों ने आवेदन किया। इनमें एमबीए, इंजीनियर और पीएचडी होल्डर्स भी शामिल थे।

जयराम रमेश के अनुसार, औपचारिक क्षेत्र में पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने में मोदी सरकार की घोर विफलता के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के 2021-22 के आंकड़ों से पता चलता है कि औपचारिक क्षेत्र में रोजगार, 2019-20 की तुलना में 5.3 फीसदी कम हैं। इसके अलावा 2019-20 से 2021-22 तक औपचारिक क्षेत्र में रोजगार देने वालों की संख्या में भी 10.5 फीसदी की भारी गिरावट आई है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी के आंकड़ों के मुताबिक, 2016-17 और मार्च 2023 के बीच मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की नौकरियों में 31 फीसदी की गिरावट आई है।

जनवरी-मार्च 2023 के नवीनतम आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में भी 50 फीसदी से कम श्रमिक वेतनभोगी हैं। नवीनतम अखिल भारतीय पीएलएफएस डाटा, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल है, बहुत चिंताजनक है। इसके मुताबिक 2021-22 में केवल 21 फीसदी श्रमिकों के पास ही औपचारिक नौकरियां थी, जो अभी भी 23 फीसदी की महामारी-पूर्व अवधि से कम है। इसके बजाय, स्व-रोजगार और अनौपचारिक रोजगार में वृद्धि हुई है।जयराम रमेश के मुताबिक, ये आंकड़े बताते हैं कि मोदी सरकार की विनाशकारी आर्थिक नीतियों और बिना किसी प्लानिंग के किए गए लॉकडाउन ने वास्तव में शिक्षित युवाओं के लिए औपचारिक रोजगार के अवसरों को कम कर दिया है।

आर्थिक संकट के कारण निजी क्षेत्र में नौकरियां कम हो रही हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को बहुत कम संख्या में मौजूद सरकारी पदों के लिए प्रतिस्पर्धा करने को मजबूर होना पड़ रहा है। मोदी सरकार में सार्वजनिक क्षेत्र के सिकुड़ने के कारण यह स्थिति और भी बदतर होती जा रही है। अगस्त 2022 तक केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 9.8 लाख पद खाली थे। सीएमआईई के डाटा से पता चलता है कि 2015-16 और 2022-23 के बीच सरकारी नौकरियों में 20 फीसदी की कमी आई है। भारत में अब प्रति 1000 जनसंख्या पर सार्वजनिक कर्मचारियों की संख्या सबसे कम है। यह संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील और यहां तक कि चीन से भी कम है।

कांग्रेस पार्टी के महासचिव ने कहा, मोदी सरकार रोजगार संकट से निपटने के बजाय आंकड़ों को छिपाने, तोड़-मरोड़ कर पेश करने और तरह-तरह की नौटंकी करने में व्यस्त है। ईपीएफओ डाटा से सामने आ रहे स्थिर वार्षिक अनुमानों पर भरोसा करने के बजाय, वे गैर भरोसेमंद मासिक डाटा का प्रचार-प्रसार करने में लगे हैं। वे जानबूझकर इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहे हैं कि मासिक डाटा को कई बार 50 फीसदी से भी अधिक तक संशोधित किया जाता है। इसमें बड़ी खामियां होती हैं।

सरकारी नौकरी देने में अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से रोजगार मेलों का आयोजन कर रहे हैं। इन मेलों ने नियमित सरकारी कामकाज का पूरी तरह से मजाक बना दिया है। सार्वजनिक क्षेत्र में लगभग 10 लाख रिक्तियों के बावजूद, मोदी सरकार पहले से ही स्वीकृत पदों के लिए 50,000 जॉब लेटर को इस तरह पेश करती है जैसे कोई बड़ा काम कर दिया हो। यह हास्यास्पद है कि वे इसी आधार पर दावा करते हैं कि रोजगार पैदा कर रहे हैं। एक आरटीआई डाटा से पता चलता है कि रोजगार मेलों में सभी जॉब लेटर्स को ‘नई भर्तियों’ के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन इनमें एक बड़ी संख्या वास्तव में सिर्फ पदोन्नति है।

सबसे निराशाजनक राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की अप्रैल 2023 की रिपोर्ट का एक आंकड़ा है। भारत के कुल 33 फीसदी युवाओं के पास न तो नौकरी है, न ही वे शैक्षिक या प्रशिक्षण पाठ्यक्रम ले रहे हैं। महिलाओं के मामले में यह संख्या 50 फीसदी से अधिक है। मोदी सरकार ने भारत के युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं को इस हद तक कुचल दिया है कि उनके पास नौकरी तो नहीं ही है, उन्होंने भविष्य में भी इसकी उम्मीद छोड़ दी है। वे इस हद तक हताश हैं कि शिक्षा या प्रशिक्षण में निवेश करना ही नहीं चाहते।

इसका दुखद परिणाम यह है कि युवा आत्महत्या दर (30 वर्ष से कम आयु) 2016 के बाद से तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2021 में यह 4.9 प्रति लाख जनसंख्या तक पहुंच गई है, जो 25 वर्षों में सबसे अधिक है। जयराम रमेश ने कहा, जनसांख्यिकीय लाभांश के जनसांख्यिकीय आपदा में बदलने के संकट से निपटने के बजाय यदि मोदी सरकार युवाओं में आत्महत्या दर को छिपाने के लिए 2022 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों में हेरफेर करने का अगला कदम उठाए तो हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

महिला आरक्षण बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी, सरकार ने जारी की अधिसूचना

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राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून में बदल गया है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की। महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था।

इसे संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित कराया गया था। इससे लोकसभा और राज्यों के विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मिलेगा। राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून में बदल गया है।

केंद्र सरकार ने इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी की। महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। इसे संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित कराया गया था। इससे लोकसभा और राज्यों के विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मिलेगा।