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हिमालयी क्षेत्र में टिकाऊ पर्यटन की ओर कदम: केंद्र की रिपोर्ट पर राज्यों ने शुरू किया अमल

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नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) के अधिकांश राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ‘पर्यटन के पर्यावरणीय मूल्यांकन’ (EATIHR) रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य पर्यटन गतिविधियों को पर्यावरण के अनुकूल बनाते हुए प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मंत्रालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा और नागालैंड ने रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न कदम उठाए हैं। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश ने अब तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है, जबकि केंद्र की ओर से कई बार स्मरण कराया जा चुका है।

पर्यटन के बढ़ते दबाव से बढ़ी पर्यावरणीय चुनौतियां
हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से जहां स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है, वहीं कई पर्यावरणीय समस्याएं भी उभरकर सामने आई हैं। ठोस कचरा प्रबंधन, वायु और जल प्रदूषण, जल स्रोतों का क्षरण, प्लास्टिक कचरे का बढ़ता प्रभाव और जैव विविधता पर खतरा प्रमुख चिंताएं बनकर उभरी हैं।

NGT के निर्देश पर तैयार हुई रिपोर्ट
EATIHR रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में दायर एक याचिका के बाद तैयार की गई थी, जिसमें अनियंत्रित पर्यटन के कारण हिमालयी पारिस्थितिकी को हो रहे नुकसान की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था। मंत्रालय ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में बताया कि विभिन्न राज्यों ने नीतिगत सुधार, आधारभूत संरचना विकास और पर्यावरण प्रबंधन के जरिए इन सिफारिशों को लागू करना शुरू कर दिया है।

राज्यों द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम

  • लद्दाख: कचरा पृथक्करण प्रणाली, ‘प्रोजेक्ट सांगदा’ के तहत ठोस कचरा प्रबंधन, वॉटर एटीएम की स्थापना और प्लास्टिक रिसाइक्लिंग जैसे उपाय किए गए हैं।
  • जम्मू-कश्मीर: तीर्थ स्थलों पर यात्रियों की संख्या का प्रबंधन, वायु और जल गुणवत्ता की निगरानी, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और कचरा निपटान की वैज्ञानिक व्यवस्था लागू की गई है।
  • हिमाचल प्रदेश: ‘पर्यटन नीति 2019’ और ‘इको-टूरिज्म नीति 2024’ के तहत इको-टूरिज्म, कचरा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और वहन क्षमता अध्ययन पर जोर दिया जा रहा है।
  • उत्तराखंड: स्वच्छ परिवहन, कचरा प्रबंधन, जल स्रोतों की निगरानी, ‘ट्रैकिंग नियम 2025’ और सतत विकास कार्यक्रमों के जरिए पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मंत्रालय ने कहा कि इन प्रयासों से हिमालयी क्षेत्रों में टिकाऊ पर्यटन की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाले समय में इन उपायों को और मजबूत किया जाएगा, ताकि पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।

फॉरेस्ट गार्ड भर्ती मामला: हाईकोर्ट ने UKSSSC सचिव को किया तलब

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2018 में हुई फॉरेस्ट गार्ड भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (uksssc) के सचिव को 6 मई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। मामला उन नौ अभ्यर्थियों से जुड़ा है, जिनका परीक्षाफल आयोग ने कथित नकल के आरोपों के चलते रोक दिया था।

इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका दायर की थी। एकलपीठ ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आयोग को उनका परिणाम घोषित करने के निर्देश दिए थे। एकलपीठ में याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनके खिलाफ नकल का कोई ठोस प्रमाण नहीं है और बिना आधार के उनका परीक्षाफल रोका गया है। इस पर न्यायालय ने उनके पक्ष में निर्णय दिया था।

एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए uksssc ने वर्ष 2022 में खंडपीठ में अपील दाखिल की थी। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से कहा गया कि अभ्यर्थियों के खिलाफ साक्ष्य और अन्य जरूरी दस्तावेज पेश करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है, क्योंकि अब तक रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत नहीं किए जा सके हैं। इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से कड़ा विरोध जताते हुए कहा गया कि आयोग पिछले कई वर्षों से लगातार समय मांग रहा है, लेकिन अब तक कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने आयोग के रवैये पर नाराजगी जताई और uksssc के सचिव को 6 मई को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 मई को होगी, जिसमें आयोग को अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।

चारधाम यात्रा 2026: श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब, एक सप्ताह में दो लाख से अधिक भक्त पहुंचे केदारनाथ

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रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 इस वर्ष भी गहरी आस्था और उत्साह के साथ जारी है। 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही देश-विदेश से श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा है। अब तक चारों धामों में कुल 4,07,961 से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

केदारनाथ में सबसे अधिक भीड़
चारधाम यात्रा में केदारनाथ धाम श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है। बीते एक सप्ताह में ही यहां 2,07,452 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। 28 अप्रैल को अकेले 21,134 श्रद्धालु धाम पहुंचे, जिनमें 13,422 पुरुष, 7,640 महिलाएं और 72 बच्चे शामिल रहे।

यमुनोत्री और गंगोत्री में भी बढ़ी संख्या
यमुनोत्री धाम में 28 अप्रैल को 6,812 श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन किए। अब तक यहां कुल 57,704 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। वहीं, गंगोत्री धाम में इसी दिन 7,110 श्रद्धालुओं ने मां गंगा के दर्शन किए, जिससे कुल संख्या 57,863 तक पहुंच गई है। इस प्रकार दोनों धामों में अब तक 1,15,567 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

बदरीनाथ धाम में भी उमड़ी आस्था
बदरीनाथ धाम में 28 अप्रैल को 15,898 श्रद्धालुओं ने भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए। अब तक यहां कुल 84,942 श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं।

व्यवस्थाओं से संतुष्ट दिखे यात्री
केदारनाथ धाम में बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। पैदल मार्ग से लेकर धाम तक भोजन, पेयजल, आवास, स्वच्छता और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

प्रबंधों की सराहना

श्रद्धालुओं ने प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की है। मध्य प्रदेश से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि भारी भीड़ के बावजूद दर्शन की व्यवस्था सुचारू है और ठहरने-खाने की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है। वहीं हरियाणा से आई महिला श्रद्धालुओं ने पैदल मार्ग पर स्वच्छता, शौचालय और वाटर एटीएम जैसी सुविधाओं को सराहनीय बताया।

दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार कार की टक्कर से दो सगी बहनों की मौत, पांच घायल

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उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के सितारगंज क्षेत्र में मंगलवार को एक भीषण सड़क हादसा सामने आया, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। तेज रफ्तार कार ने ओवरटेक करते समय सड़क किनारे खड़े एक ई-रिक्शा को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में दो सगी बहनों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार, सितारगंज के नयागांव निवासी 22 वर्षीय हिना और 25 वर्षीय निशा अपनी ममेरी बहन रूबी के साथ भाई के निकाह के लिए खरीदारी करने बाजार गई थीं। खरीदारी के बाद तीनों बहनें ई-रिक्शा से घर लौट रही थीं। नयागांव के पास हाईवे किनारे जब वे ई-रिक्शा से उतरकर किराया दे रही थीं, तभी तेज गति से आ रही एक कार ने नियंत्रण खो दिया और ई-रिक्शा को टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई और ई-रिक्शा में सवार लोग दूर जा गिरे। हादसे में तीनों बहनों सहित अन्य यात्री भी गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

घायलों में रामकुमार गुप्ता, राजेश्वरी गुप्ता, डालचंद कश्यप और प्रेमपाल गंगवार को सितारगंज के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, तीनों बहनों को उप जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान हिना की मौत हो गई, जबकि निशा ने रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। रूबी का इलाज जारी है।

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतक बहनों के घर में जहां निकाह की तैयारियां चल रही थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बुधवार को भाई की बारात जानी थी, लेकिन उससे पहले ही यह हादसा परिवार पर दुखों का पहाड़ बनकर टूट पड़ा। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना में शामिल वाहनों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

विशेष सत्र पर कांग्रेस का हमला, बताया जनता के पैसे की बर्बादी

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देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर आयोजित एकदिवसीय विशेष सत्र पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे औचित्यहीन बताते हुए जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी करार दिया है।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक शर्मा और प्रदेश मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पहले ही वर्ष 2023 में संसद से पारित हो चुका है, ऐसे में राज्य स्तर पर विशेष सत्र बुलाने का कोई औचित्य नहीं बनता। उनका आरोप है कि भाजपा इस मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रही है और असल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।

आलोक शर्मा ने कहा कि इस सत्र पर लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि राज्य में महिला सुरक्षा, बेरोजगारी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं जैसे गंभीर मुद्दे अनदेखे हैं। उन्होंने NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड में महिला अपराध के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार इस पर चर्चा से बच रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इतने बड़े मामले पर भी सत्र में कोई चर्चा नहीं हुई।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ना इसे टालने की रणनीति है। उन्होंने केंद्र सरकार पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाए।

प्रदेश मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि सरकार जनता के पैसे का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज भी कई जगहों पर महिलाओं को प्रसव के दौरान मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

दसौनी ने चारधाम यात्रा प्रबंधन और हाल ही में एक महिला पत्रकार के साथ कथित अभद्रता के मामले को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।

कांग्रेस ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा वास्तव में महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है, तो वह 2027 के विधानसभा चुनाव में 33 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दे या सरकारी नौकरियों में इतना ही आरक्षण लागू करे।

प्रेस वार्ता में संगठन महामंत्री राजेंद्र भंडारी, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र, सदन के बाहर और भीतर गरमाया माहौल

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देहरादून: लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने वाले संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने के बाद उत्तराखंड में इस मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। मंगलवार को राज्य विधानसभा में इसी विषय पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया गया, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में कहा कि सरकार देश की महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि “आधी आबादी” को उनका पूरा हक जरूर मिलेगा, ताकि मातृशक्ति विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे सके।

वहीं, विपक्षी कांग्रेस ने सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बनाई। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2023 में पारित कानून को लागू करने में देरी क्यों की जा रही है। उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और आगामी विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।

सदन के भीतर बहस के साथ-साथ बाहर भी माहौल गरम रहा। विधानसभा कूच कर रही महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस दौरान महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला सहित कई कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए। सड़कों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन जारी रहा।

उधर, भाजपा ने इस मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की व्यापक रणनीति बनाई है। पार्टी विधानसभा सत्र के बाद नगर निगमों, जिला पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों की बैठकों में निंदा प्रस्ताव लाकर कांग्रेस पर दबाव बनाने की तैयारी में है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि मातृशक्ति के अपमान को लेकर पार्टी चुप नहीं बैठेगी।

कुल मिलाकर, महिला आरक्षण के मुद्दे पर उत्तराखंड की राजनीति में टकराव तेज हो गया है और आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गर्माने के संकेत दे रहा

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा विशेष सत्र में सर्वसम्मति का प्रस्ताव, महिला सशक्तिकरण पर राजनीति न हो: धामी

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति को अधिकार देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री धामी विधानसभा के विशेष सत्र ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित कर रहे थे, जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक के शीघ्र क्रियान्वयन के समर्थन में सर्वसम्मत संकल्प प्रस्ताव रखा।

उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत उत्तराखंड की महान महिलाओं और राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए की और कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को देवी स्वरूप माना गया है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं केवल सहभागिता ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं और देश के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।

मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2023 में लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को युगांतकारी कदम बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल महिलाओं की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि नीति निर्माण में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

धामी ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने संसद में इस महत्वपूर्ण बिल को पारित नहीं होने दिया और अब जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद विपक्ष ने महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “सुकन्या समृद्धि योजना” और “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना” जैसी पहल से महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में जेंडर बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा व सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रदेश स्तर पर भी सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने, ब्याज-मुक्त ऋण और स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं को कई कुरीतियों से मुक्ति दिलाई गई है और यह कदम पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार जरूर मिलेगा और महिला आरक्षण का सपना एक दिन अवश्य साकार होगा।

ऑटिज्म से जूझते बच्चों को नया जीवन दे रहा राधका फाउंडेशन

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  • मानेसर स्थित संस्था समग्र देखभाल, थेरेपी और कौशल प्रशिक्षण के जरिए बना रही आत्मनिर्भर.
  • रजत कुलदीप तलवार

हरियाणा के मानेसर में स्थित राधका फाउंडेशन फॉर असिस्टेड लिविंग ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों और विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है। यह संस्था न केवल विशेष बच्चों को देखभाल प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

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7 जुलाई 2019 को स्थापित इस फाउंडेशन की नींव भाई-बहन लक्ष्य चंदना और दिव्या चंदना ने रखी। दरअसल, दिव्या चंदना की बेटी राधका के ऑटिज्म से प्रभावित होने के बाद उन्होंने इस चुनौती को करीब से समझा। इसी अनुभव ने उन्हें प्रेरित किया कि वे अपनी बेटी के साथ-साथ अन्य बच्चों के जीवन को भी बेहतर और सम्मानजनक बना सकें। इस संकल्प को साकार करने में उनके भाई लक्ष्य चंदना ने पूरा सहयोग दिया।

फाउंडेशन की शुरुआत वर्ष 2016 में मात्र एक बच्चे के साथ हुई थी, जो आज बढ़कर 50 से अधिक ऑटिस्टिक व्यक्तियों तक पहुंच चुकी है। इनमें देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से जुड़े लोग भी शामिल हैं।

संस्था की संचालिका दिव्या चंदना बताती हैं कि यहां का पूरा स्टाफ विशेष रूप से प्रशिक्षित है, ताकि वे ऑटिज्म से ग्रसित लोगों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर सकें और उनकी संचार क्षमता को विकसित कर सकें। संस्था का उद्देश्य है कि सभी जरूरी थेरेपी एक ही छत के नीचे उपलब्ध हों, जिससे बच्चों और उनके परिवारों को भटकना न पड़े।

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फाउंडेशन का 5 एकड़ में फैला हरित और शांत परिसर बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण प्रदान करता है। यहां अनुभवी डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम बच्चों के समग्र विकास पर काम करती है। संस्था में शिक्षा, खेल व फिटनेस, प्री-वोकेशनल और वोकेशनल ट्रेनिंग, कला एवं शिल्प के साथ-साथ एक्वा थेरेपी, म्यूजिक थेरेपी, स्पीच थेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

दिव्या चंदना के अनुसार, संस्था का लक्ष्य केवल देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑटिज्म के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना भी है। इसके लिए समय-समय पर सार्वजनिक कार्यक्रम और अभियान चलाए जाते हैं, ताकि लोग इस विषय को बेहतर ढंग से समझ सकें।

वे कहती हैं कि राधका फाउंडेशन एक ऐसा स्थान बनाना चाहता है, जहां ऑटिज्म से ग्रसित लोग शांति, प्रेम और आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सकें। यहां प्राकृतिक जीवनशैली और समग्र वातावरण को उपचार और विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

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राधका फाउंडेशन आज उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है, जो अपने विशेष बच्चों के बेहतर भविष्य की तलाश में हैं। संस्था का प्रयास है कि हर व्यक्ति को उसकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिले और वह आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी पहचान बना सके।

भारत का रक्षा खर्च 92.1 अरब डॉलर पहुंचा, दुनिया में 5वें स्थान पर बरकरार: SIPRI रिपोर्ट

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नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते सैन्य खर्च के बीच भारत ने रक्षा क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत की है। Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2025 में सैन्य खर्च के मामले में दुनिया में पांचवें स्थान पर बना हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने वर्ष 2025 में रक्षा पर 92.1 बिलियन डॉलर खर्च किए, जो पिछले साल की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है। यह वैश्विक सैन्य खर्च का 3.2 फीसदी हिस्सा है। इस सूची में United States, China, Russia और Germany जैसे देश भारत से आगे हैं।

SIPRI ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत का रक्षा खर्च मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, खासकर China और Pakistan के साथ तनाव से प्रभावित है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने के लिए आपातकालीन हथियार खरीद भी की।

हालांकि भारत ने हाल के वर्षों में हथियारों के आयात में कुछ कमी की है, फिर भी वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भारत अब Russia पर निर्भरता धीरे-धीरे कम कर रहा है और France, Israel तथा United States से खरीद बढ़ा रहा है। इसके बावजूद रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

वहीं, केंद्र सरकार ने 1 फरवरी 2026 को पेश बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।

अगर पड़ोसी देशों की बात करें तो चीन 336 बिलियन डॉलर के साथ दुनिया में दूसरे स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान ने अपना रक्षा खर्च बढ़ाकर 11.9 बिलियन डॉलर कर लिया है, लेकिन वह अभी भी 31वें स्थान पर है।

वैश्विक परिदृश्य में यूरोप के देशों ने भी रक्षा खर्च में तेजी से वृद्धि की है। रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप का कुल सैन्य खर्च 14 प्रतिशत बढ़कर 864 बिलियन डॉलर पहुंच गया है, जिसमें कई NATO देशों ने उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।

केजरीवाल के बाद सिसोदिया का भी अदालत पर सवाल, जस्टिस स्वर्णकांता को लिखी चिट्ठी, बोले-“न्याय की उम्मीद नहीं”

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नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता Manish Sisodia ने दिल्ली हाईकोर्ट की जज Justice Swarn Kanta Sharma को एक चिट्ठी लिखकर बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। इससे पहले पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal भी इसी तरह की चिट्ठी लिख चुके हैं।

सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में साफ कहा कि आबकारी नीति मामले में उनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं होगा। उन्होंने अदालत पर भरोसा न जताते हुए लिखा कि “मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है। मेरे पास अब सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी में उन्होंने सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta का भी उल्लेख करते हुए न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

केजरीवाल भी जता चुके हैं अविश्वास

इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर सुनवाई पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें निष्पक्ष न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही, इसलिए उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग को अपनाने का फैसला किया है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील का अधिकार सुरक्षित रखने की बात भी कही थी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला दिल्ली की आबकारी नीति 2021-22 से जुड़ा है, जिसमें अनियमितताओं और कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। इस केस की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) कर रही हैं।

हालांकि, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पहले इस मामले में सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इस फैसले को CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जहां फिलहाल सुनवाई चल रही है।

बढ़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद

केजरीवाल और सिसोदिया द्वारा न्यायाधीश पर अविश्वास जताने और सत्याग्रह की बात कहने से मामला अब कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है। विपक्षी दल जहां इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बता रहे हैं, वहीं AAP इसे न्याय की मांग का हिस्सा बता रही है।