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पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत, जांच में सहयोग की शर्त

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान खेड़ा को निर्देश दिया कि वे जांच में पूरा सहयोग करें और जांच एजेंसियों द्वारा बुलाए जाने पर अनिवार्य रूप से पेश हों। अदालत ने स्पष्ट किया कि खेड़ा किसी भी तरह से सबूतों को प्रभावित या उनसे छेड़छाड़ नहीं करेंगे। साथ ही उन्हें बिना न्यायालय की अनुमति के देश छोड़ने की इजाजत नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को यह भी अधिकार दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर जमानत की शर्तों में और प्रावधान जोड़े जा सकते हैं। गौरतलब है कि पवन खेड़ा पर हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे हैं। इस मामले में उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था।

इससे पहले गुरुवार को दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह मामला असाधारण है और इसमें गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि आरोप मानहानि से जुड़े हैं, जिनमें हिरासत में पूछताछ जरूरी नहीं है।

वहीं, केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि मामले की जांच के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है, ताकि प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों के स्रोत का पता लगाया जा सके।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपी के देश छोड़ने का खतरा है और उन पर धोखाधड़ी व जालसाजी जैसे गंभीर आरोप हैं। अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद खेड़ा को जांच में सहयोग करते हुए कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।

घर और बाहर दोनों मोर्चों पर सक्रिय महिलाएं, काम का बोझ अब भी तीन गुना, पुरुष केवल इतने मिनट करते हैं काम

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नई दिल्ली: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ‘महिला और पुरुष 2025’ रिपोर्ट में देश में लैंगिक श्रम असमानता की तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं आज भी घरेलू कामकाज में पुरुषों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक समय व्यतीत करती हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, महिलाएं रोजाना औसतन 289 मिनट घरेलू कार्यों में लगाती हैं, जबकि पुरुष केवल 88 मिनट ही इस कार्य में देते हैं। हालांकि, सकारात्मक पक्ष यह है कि अब महिलाएं वेतन वाले कार्यों में भी पहले की तुलना में अधिक समय दे रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक भागीदारी में लगातार वृद्धि हो रही है।

रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच पुरुषों द्वारा बिना वेतन वाले कार्यों में बिताए जाने वाले समय में कुछ वृद्धि हुई है, जबकि महिलाओं का वेतन वाले कार्यों में समय बढ़ा है। इसका मतलब है कि महिलाएं अब घर और बाहर दोनों जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में भी सुधार दर्ज किया गया है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2022 से 2025 के बीच ग्रामीण महिलाओं की LFPR 37.5 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत हो गई है।

इसके अलावा, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में कार्यबल जनसंख्या अनुपात पुरुषों के लिए 76.6 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 38.8 प्रतिशत दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यबल भागीदारी अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी देश के विकास के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन घरेलू कार्यों का असमान बंटवारा अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

मौसम दिखे के तीखे तेवर, कभी भारी गर्मी फिर अचानक भारी बारिश

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देहरादून: कुमाऊं समेत प्रदेशभर में इस बार अप्रैल माह ने मौसम के कई रंग दिखाए। जहां एक ओर तापमान ने बीते दशक के रिकॉर्ड तोड़ते हुए गर्मी का अहसास कराया, वहीं दूसरी ओर सामान्य से अधिक वर्षा भी दर्ज की गई।

मौसम विभाग के अनुसार, इस बार अप्रैल में कुमाऊं क्षेत्र में तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है। इससे मई और जून में भीषण गर्मी के संकेत मिल रहे हैं। इससे पहले तराई क्षेत्र में अप्रैल का सर्वाधिक तापमान वर्ष 2009 में 41.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

हालांकि, गर्मी के साथ-साथ इस बार अप्रैल में वर्षा भी सामान्य से अधिक रही। प्रदेश में औसतन 39.3 मिमी वर्षा होती है, जबकि इस बार 46.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 18 प्रतिशत अधिक है। चंपावत, ऊधम सिंह नगर, बागेश्वर, अल्मोड़ा और नैनीताल समेत अधिकांश जिलों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

गुरुवार को काशीपुर और पंतनगर में गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा हुई। सुबह 8:30 बजे तक काशीपुर में 2.5 मिमी और पंतनगर में 3.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। दिन में धूप निकलने के बाद शाम को एक बार फिर मौसम बदला और हल्की बारिश हुई।

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि हालिया पश्चिमी विक्षोभ और 2 मई को आने वाले नए सिस्टम के प्रभाव से मई के पहले सप्ताह में भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, इसके बाद तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।

मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि अगले तीन दिनों तक तराई क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में वृद्धि दर्ज की जाएगी, जबकि 3 मई से एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है और बादल छाने के आसार हैं।

केदारनाथ धाम पहुंचे गौतम अदाणी, बाबा केदार के दर्शन कर लिया आशीर्वाद

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रुद्रप्रयाग/देहरादून: गौतम अदाणी, अदाणी समूह के संस्थापक एवं चेयरमैन, शुक्रवार को केदारनाथ धाम पहुंचे और बाबा केदार के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौतम अदाणी सुबह नई दिल्ली से देहरादून पहुंचे, जहां से वह निजी हेलिकॉप्टर के माध्यम से सीधे केदारनाथ धाम रवाना हुए। धाम पहुंचने पर उन्होंने विधि-विधान से पूजा कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

बताया जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने सोनप्रयाग से केदारनाथ तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना के एरियल सर्वे का भी जायजा लिया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य अदाणी समूह को सौंपा गया है, जिससे यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

वीआईपी दौरे को देखते हुए केदारनाथ धाम क्षेत्र में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा के मद्देनजर विशेष इंतजाम किए।

गौरतलब है कि केदारनाथ धाम में इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और यात्रा अपने चरम पर है। ऐसे में रोपवे परियोजना को भविष्य में यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देहरादून नगर निगम बोर्ड बैठक में हंगामा, अतिक्रमण पर सख्ती, 715 पदों पर भर्ती को मंजूरी

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देहरादून। नगर निगम देहरादून की बोर्ड बैठक दूसरे दिन भी हंगामे और तीखी नोंकझोंक के बीच जारी रही। बैठक के दौरान भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच कई मुद्दों को लेकर बहस देखने को मिली। देर शाम तक कुल 65 प्रस्तावों में से केवल 26 पर ही चर्चा हो सकी, जबकि शेष 39 प्रस्तावों पर अब शनिवार को विचार किया जाएगा।

बैठक में सबसे अहम फैसला शहर में बढ़ते अतिक्रमण पर सख्ती को लेकर लिया गया। नगर निगम ने तय किया है कि अब अवैध निर्माण या अतिक्रमण पाए जाने पर एक सप्ताह के भीतर नोटिस जारी किया जाएगा और एक महीने के अंदर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

पार्षदों ने बैठक में आरोप लगाया कि शहर में अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि निगम की कार्रवाई के बावजूद कुछ ही घंटों में दोबारा रेहड़ी-पटरी लग जाती है, ऐसे में स्थायी समाधान के लिए ठोस नीति बनाने की जरूरत है।

इसके अलावा सिंगल यूज प्लास्टिक के मुद्दे पर भी पार्षदों ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को घेरा। आरोप लगाया गया कि छोटे व्यापारियों पर तो कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े थोक विक्रेताओं पर कोई सख्ती नहीं दिखती।

बैठक में बल्लूपुर फ्लाईओवर के नीचे शौचालय निर्माण में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई गई। फिलहाल यहां अस्थायी रूप से मोबाइल टॉयलेट लगाने का निर्णय लिया गया है।

इस बीच, नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 715 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। नगर आयुक्त नमामि बंसल ने बताया कि इन भर्तियों से सफाई, जल निकासी और अन्य नागरिक सेवाओं में सुधार आएगा।

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई और नई भर्तियों के जरिए नगर निगम शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

₹1000 महंगा गैस सिलेंडर: शादी-ब्याह से होटल तक हर जगह बढ़ेगा खर्च

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देहरादून: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में करीब ₹1000 की एकमुश्त बढ़ोतरी मामूली बदलाव नहीं है। यह सीधे लागत संरचना (cost structure) को झटका देता है, खासकर उन सेक्टरों में जहां ऊर्जा लागत कुल खर्च का बड़ा हिस्सा होती है। नीचे इसका सेक्टर-वाइज विश्लेषण दिया गया है।

कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में ₹1000 की बढ़ोतरी केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव शादी उद्योग, होटल-रेस्तरां, स्ट्रीट फूड, बेकरी और संस्थागत भोजन सेवाओं तक व्यापक रूप से फैलेगा। अंततः इसका बोझ उपभोक्ता पर ही पड़ेगा, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी और महंगी हो जाएगी।

₹1000 महंगे हुए कमर्शियल गैस सिलेंडर का असर

1. शादी-ब्याह और कैटरिंग इंडस्ट्री

  • शादी समारोहों में बड़े पैमाने पर खाना बनता है, जहां एक इवेंट में 10–50 सिलेंडर तक खपत हो सकती है।

लागत प्रभाव:

  • प्रति सिलेंडर ₹1000 बढ़ने से एक शादी में ₹10,000 से ₹50,000 तक अतिरिक्त खर्च।

कुल बजट पर असर:

  • 5–10% तक कैटरिंग कॉस्ट बढ़ सकती है।

संभावित परिणाम:

  • प्रति प्लेट कीमत ₹50–₹150 तक बढ़ सकती है।
  • छोटे बजट की शादियों पर ज्यादा असर।

2. होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर

  • यह सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित होगा क्योंकि गैस रोजमर्रा की जरूरत है।

लागत प्रभाव:

  • एक मध्यम रेस्टोरेंट 15–25 सिलेंडर/महीना उपयोग करता है।
  • ₹15,000–₹25,000 अतिरिक्त मासिक खर्च।

प्राइस पास-थ्रू:

  • खाने की कीमतों में 5–12% तक बढ़ोतरी संभव।

संभावित असर:

  • थाली ₹10–₹30 महंगी।
  • फास्ट फूड ₹5–₹20 महंगा।

3. स्ट्रीट फूड और ढाबा सेक्टर

  • यह सबसे संवेदनशील वर्ग है, जहां मार्जिन पहले से कम होता है।

लागत प्रभाव:

  • 5–10 सिलेंडर/महीना → ₹5,000–₹10,000 अतिरिक्त बोझ।

असर:

  • ₹20 की चाय ₹25 तक जा सकती है।
  • ₹50 की प्लेट ₹60–₹70 तक।

जोखिम:

  • ग्राहक संख्या घट सकती है।
  • छोटे विक्रेताओं का मुनाफा खत्म होने का खतरा।

4. बेकरी और फूड प्रोसेसिंग यूनिट

  • ओवन और बड़े पैमाने की कुकिंग गैस आधारित होती है।

लागत प्रभाव:

  • 20–40 सिलेंडर/महीना → ₹20,000–₹40,000 अतिरिक्त खर्च।

असर:

  1. ब्रेड, बिस्किट, केक की कीमतों में 5–8% बढ़ोतरी।

दीर्घकालिक असर:

  • थोक बाजार में भी महंगाई ट्रांसफर होगी।

5. हॉस्टल, कैंटीन और मेस

  • कॉलेज, फैक्ट्री और ऑफिस कैंटीन भी प्रभावित होंगे।

लागत प्रभाव:

  • 10–20 सिलेंडर/महीना → ₹10,000–₹20,000 अतिरिक्त।

असर:

  • मासिक मेस चार्ज ₹200–₹500 तक बढ़ सकते हैं।

6. धार्मिक/सामाजिक आयोजन

  • भंडारा, लंगर, सामूहिक भोजन कार्यक्रमों में भी लागत बढ़ेगी।

असर:

  • आयोजनों की संख्या कम हो सकती है।
  • प्रति व्यक्ति भोजन लागत बढ़ेगी।
  • कुल आर्थिक प्रभाव (Macro Impact)।
  • फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation): 1–2% तक अतिरिक्त दबाव।
  • सर्विस सेक्टर महंगाई: 3–5% तक वृद्धि।

डोमिनो इफेक्ट:

  • बाहर खाना महंगा → घरेलू बजट पर असर।
  • मजदूर/नौकरीपेशा वर्ग पर सीधा दबाव।

 

बरगी डैम में बड़ा हादसा: तूफान के बीच पर्यटकों से भरा क्रूज डूबा, 9 की मौत, रेस्क्यू जारी

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मध्यप्रदेश : मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब पर्यटकों से भरा एक क्रूज तेज आंधी-तूफान के बीच डूब गया। शुक्रवार सुबह तक इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है, जबकि 18 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। कई अन्य लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

प्रशासन के अनुसार, क्रूज में करीब 40 से 45 पर्यटक सवार थे। हादसा डैम किनारे से लगभग 300 मीटर अंदर हुआ, जहां अचानक मौसम खराब होने के चलते तेज हवाओं और बारिश में क्रूज अनियंत्रित होकर पलट गया और डूब गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, सेना भी जुटी

घटना के बाद राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया। शुरुआती दौर में SDRF टीम ने कई लोगों को सुरक्षित निकाला, लेकिन अंधेरा और खराब मौसम के कारण अभियान में बाधा आई। शुक्रवार सुबह दोबारा रेस्क्यू ऑपरेशन तेज किया गया।

फिलहाल भारतीय सेना की टीम भी बचाव कार्य में जुट गई है। हैदराबाद से विशेष टीम और हेलीकॉप्टर रवाना किया गया है, जबकि कोलकाता से पैरामिलिट्री बल भी जबलपुर पहुंच चुका है। भारी मशीनों और हाइड्रोलिक उपकरणों की मदद से फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

20 फीट गहराई में फंसा क्रूज

स्थानीय लोगों के अनुसार, डूबा हुआ क्रूज करीब 20 फीट गहरे पानी में फंसा हुआ है। उसे बाहर निकालने के लिए जेसीबी और नाव की मदद से करीब 30 मीटर तक खींचा गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब पोकलेन मशीन समेत भारी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

सुरक्षा पर उठे सवाल

हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ पर्यटकों का आरोप है कि उन्हें लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई गई थी। हालांकि, क्रूज चालक महेश का कहना है कि सभी सुरक्षा उपकरण मौजूद थे, लेकिन तूफान अचानक और तेजी से आया, जिससे यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनने का मौका नहीं मिल सका।

इस दर्दनाक हादसे ने पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, जबकि लापता लोगों की तलाश जारी है।

चुनाव खत्म होते ही महंगाई का झटका: कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 1000 रुपये तक महंगा, आज से लागू नई दरें

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नई दिल्ली। देश में विधानसभा चुनाव खत्म होते ही आम जनता को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने 1 मई 2026 से कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एकमुश्त करीब 1000 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें आज से लागू हो गई हैं, जिसके बाद कई शहरों में सिलेंडर की कीमत 3 हजार रुपये के पार पहुंच गई है।

बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े हालात और सप्लाई संकट का असर अब घरेलू बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

तेल कंपनियों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 993 रुपये बढ़कर 3,071.50 रुपये हो गई है। वहीं मुंबई में यह 2,031 रुपये से बढ़कर 3,024 रुपये प्रति सिलेंडर हो गया है। कोलकाता में कीमत 2,208 रुपये से बढ़कर 3,202 रुपये और चेन्नई में 2,246.50 रुपये से बढ़कर 3,237 रुपये प्रति सिलेंडर पहुंच गई है।

अन्य शहरों में भी कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पटना में कॉमर्शियल सिलेंडर 2,365 रुपये से बढ़कर 3,361 रुपये हो गया है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में इसकी कीमत 2,201 रुपये से बढ़कर 3,194 रुपये और गोरखपुर में 3,255.50 रुपये तक पहुंच गई है। आगरा में भी सिलेंडर का दाम बढ़कर 3,125.50 रुपये हो गया है।

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने से होटल-रेस्तरां कारोबार, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर सीधा असर पड़ेगा। साथ ही शादी-विवाह के सीजन में भी लोगों का खर्च बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर बाहर खाने-पीने की कीमतों पर भी जल्द दिख सकता है।

सरकार और तेल कंपनियों की ओर से फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी गई है, लेकिन कॉमर्शियल गैस की कीमतों में यह बढ़ोतरी बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है।

1 मई से बदले कई नियम: एलपीजी महंगा, ATM और क्रेडिट कार्ड चार्ज बढ़े, UPI में नया सिस्टम लागू

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नई दिल्ली/देहरादून। मई महीने की शुरुआत के साथ ही आम आदमी की जेब पर असर डालने वाले कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। 1 मई से एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, एटीएम और क्रेडिट कार्ड शुल्क में बदलाव सहित डिजिटल लेनदेन के नियमों में भी संशोधन किया गया है। इन नए नियमों का सीधा असर लोगों के रोजमर्रा के खर्च और बजट पर पड़ेगा।

सबसे बड़ा झटका कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में देखने को मिला है। सरकार ने एकमुश्त करीब 1000 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे होटल-रेस्तरां कारोबार के साथ-साथ शादी समारोह और बाहर खाना खाने वाले लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

डिजिटल भुगतान प्रणाली में भी बदलाव किया गया है। यूपीआई के जरिए बड़े लेनदेन पर अब अतिरिक्त सुरक्षा प्रक्रिया लागू की गई है। इसके तहत भुगतान करते समय यूजर्स को अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन स्टेप से गुजरना होगा, जिससे लेनदेन थोड़ा जटिल हो सकता है, लेकिन सुरक्षा बढ़ेगी।

बैंकिंग सेक्टर में भी बदलाव लागू हुए हैं। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने क्रेडिट कार्ड के लेट पेमेंट चार्ज में संशोधन किया है। अब 100 से 500 रुपये तक के बकाया पर 100 रुपये और 500 से 1000 रुपये तक के बकाया पर 500 रुपये का शुल्क लगेगा। वहीं, कुछ कार्ड्स पर वार्षिक शुल्क छूट पाने के लिए खर्च की सीमा भी बढ़ा दी गई है।

एटीएम से नकदी निकासी भी महंगी हो गई है। मुफ्त ट्रांजेक्शन की सीमा पार करने के बाद अब प्रति निकासी शुल्क 21 रुपये से बढ़ाकर 23 रुपये कर दिया गया है। यह नियम शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू होगा।

ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में भी सरकार ने सख्ती बढ़ाई है। अब इस क्षेत्र को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा और जिन गेम्स में पैसों का लेनदेन होता है, उनके लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। इसके साथ ही एक निगरानी तंत्र भी विकसित किया जा रहा है।

इसके अलावा एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी प्रणाली में भी बदलाव किया गया है। अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर प्राप्त करने के लिए ओटीपी आधारित सिस्टम से गुजरना होगा। साथ ही ई-केवाईसी और ट्रैकिंग व्यवस्था भी लागू की जा रही है, ताकि गलत इस्तेमाल और जमाखोरी पर रोक लगाई जा सके।

हालांकि, एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे हवाई यात्रियों को फिलहाल राहत मिली है।

इन सभी बदलावों को देखते हुए साफ है कि मई महीने की शुरुआत आम आदमी के लिए महंगाई और नियमों के लिहाज से कई नए बदलाव लेकर आई है, जिनका असर सीधे दैनिक जीवन पर पड़ेगा।

अनुरोध पर होंगे शिक्षकों के तबादले, स्कूलों के 150 मीटर में दायरे से हटेंगी तंबाकू-शराब की दुकानें

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देहरादून : प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा विभाग में अब पात्र शिक्षकों के स्थानांतरण अनुरोध के आधार पर किए जाएंगे। इसके लिए सभी जिलों से निर्धारित समय में प्रस्ताव मांगे गए हैं। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने स्पष्ट किया कि एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष व्यवस्था की जाए। ऐसे स्कूलों में यदि शिक्षक अवकाश पर जाता है तो निकटतम विद्यालय से वैकल्पिक शिक्षक की तैनाती अनिवार्य होगी। इस संबंध में लापरवाही पाए जाने पर खंड या उपखंड शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

बैठक में अनुशासन को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। बिना अनुमति अनुपस्थित रहने, बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज न करने, नशे की हालत में पाए जाने या छात्राओं से छेड़छाड़ जैसे मामलों में संबंधित शिक्षकों को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा सरकार ने शिक्षण संस्थानों के आसपास 150 मीटर के दायरे में शराब, पान-गुटका, बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू की दुकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है।

मंत्री ने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से दो-दो विद्यालयों के उच्चीकरण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा। साथ ही स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं—बिजली, पानी, फर्नीचर, शौचालय, खेल मैदान और खेल सामग्री—की उपलब्धता और आवश्यकता पर भी रिपोर्ट तलब की गई है।

प्राथमिक शिक्षा में पात्र शिक्षकों को प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक (जूनियर) पदों पर पदोन्नति देने के निर्देश भी दिए गए हैं। निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने तरीके से फीस वृद्धि और किताबें थोपने की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। बैठक में बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों की समीक्षा करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधार के निर्देश दिए गए।