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उत्तराखंड: बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल शुरू, विपक्ष ने की कानून व्यवस्था पर चर्चा की मांग

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उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन (10 मार्च 2026) की कार्यवाही शुरू हो गई है। सदन की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, जहां विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों से सवाल पूछे जाएंगे।

विधानसभा अध्यक्ष को पक्ष और विपक्ष के विधायकों से कुल 600 से अधिक सवाल प्राप्त हुए हैं। इन सवालों पर आज प्रश्नकाल के दौरान विस्तृत चर्चा और जवाब मांगे जाएंगे, जिससे सदन में गरमागरम बहस की उम्मीद है।

कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तत्काल चर्चा की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने नियम 58 के तहत इस मांग को सुनने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

सदन के पटल पर कई महत्वपूर्ण अध्यादेश रखेंगे

  • उत्तराखंड दुकान और स्थापना (रोजगार विनियमन और सेवा शर्त) (संशोधन) अध्यादेश, 2025
  • उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश, 2025
  • उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2025
  • उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 – यह UCC में हालिया संशोधनों को वैधानिक रूप देने के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और दंडात्मक सुधार शामिल हैं।

बता दें कि सत्र का पहला दिन (9 मार्च) ऐतिहासिक रहा, जब मुख्यमंत्री धामी ने 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो पिछले बजट से लगभग 10-11% अधिक है। आज का दिन प्रश्नकाल और अध्यादेशों के कारण और भी महत्वपूर्ण होने वाला है।

आज लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर होगी बहस, हंगामे के आसार

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नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आज (10 मार्च 2026) दूसरा दिन है। कल (9 मार्च) पहले दिन विपक्ष की ओर से ईरान-इज़राइल संघर्ष (पश्चिम एशिया युद्ध) पर चर्चा की मांग को लेकर दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ, जिससे कार्यवाही बाधित रही और सदन स्थगित हो गए।

आज लोकसभा में हंगामे की आशंका बनी हुई है, क्योंकि विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) लाने के लिए संकल्प प्रस्ताव पेश कर सकता है। विपक्ष के 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें आरोप है कि स्पीकर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति न देकर “खुला पक्षपात” किया। यह मामला मुख्य रूप से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान उठा था, जब राहुल गांधी को बोलने से रोका गया था।

सूत्रों के अनुसार, सदन की अनुमति मिलने पर प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू चर्चा की शुरुआत करेंगे। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर, निशिकांत दुबे, रविशंकर प्रसाद और भर्तृहरि महताब सरकार पक्ष से अपनी दलीलें रखेंगे। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान भी सदन को संबोधित कर सकते हैं।

विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, मनीष तिवारी, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और जोथिमणि स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी बात रखेंगे। इसके अलावा, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज दोनों सदनों में 2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों (सेकंड बैच) पर बयान पेश करेंगी।

लोकसभा में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी स्टैंडिंग कमेटी की चौथी रिपोर्ट में सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति पर बयान देंगे, जो 2024-25 की अनुदान मांगों से जुड़ा है।

राज्यसभा में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा फिर शुरू होगी, जिसमें मंत्री कल भाजपा सांसद घनश्याम तिवारी द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देंगे। कार्यसूची के मुताबिक, ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर भी चर्चा प्रस्तावित है।

बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हुआ था। इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चला, जबकि दूसरा चरण 2 अप्रैल तक चलेगा। संसद में जारी तनाव से विधायी कार्य प्रभावित होने की आशंका है, जबकि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।

NCERT ने कक्षा 8 की विवादित सामाजिक विज्ञान पुस्तक ली वापस, न्यायपालिका अध्याय पर मांगी सार्वजनिक माफी

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक ‘Exploring Society: India and Beyond’ (भाग-2) को पूरी तरह वापस लेने का फैसला किया है। साथ ही, पुस्तक में शामिल विवादास्पद अध्याय ‘The Role of Judiciary in Our Society’ (हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका) के लिए एनसीईआरटी ने बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगी है।

यह कदम सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और स्वत: संज्ञान के बाद उठाया गया है। पुस्तक के अध्याय-IV में न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे मामलों का भारी बैकलॉग, जजों की कमी और भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील मुद्दों का जिक्र किया गया था, जिसे कोर्ट ने संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला माना।

एनसीईआरटी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अध्याय में ‘अनुचित टेक्स्टुअल सामग्री’ और ‘निर्णय में त्रुटि’ अनजाने में शामिल हो गई थी। परिषद ने स्पष्ट किया कि किसी भी संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा को कम करने का उनका कोई इरादा नहीं था। एनसीईआरटी के निदेशक और सदस्यों ने इस गलती के लिए “बिना शर्त और अयोग्य माफी” मांगी है। पुस्तक अब उपलब्ध नहीं है और सभी प्रतियां वापस ली जा रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि न्यायपालिका जैसी महत्वपूर्ण संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कंटेंट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने पुस्तक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए सभी भौतिक और डिजिटल प्रतियों को जब्त करने का आदेश दिया था। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित है।

एनसीईआरटी ने प्रभावित छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है तथा सभी हितधारकों की समझदारी की सराहना की है। परिषद ने आगे कहा कि अध्याय की समीक्षा और पुनर्लेखन उचित विशेषज्ञों के साथ किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां न हों।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एनसीईआरटी की पुस्तकें देश भर के केंद्रीय और राज्य बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं, इसलिए ऐसे बदलावों का व्यापक प्रभाव पड़ता है। आने वाले शैक्षणिक सत्र के लिए अद्यतन पाठ्यक्रम और पुस्तकों पर परिषद से स्पष्ट निर्देश जारी होने की उम्मीद है।

उत्तराखंड बजट 2026-27: सरकार का दावा ‘संतुलन’ के इन आठ मूल मंत्रों से होगा विकास

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गैरसैंण: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में पेश 1,11,703.21 करोड़ रुपये के बजट को ‘संतुलन’ (SANTULAN) के आठ अक्षरों पर आधारित अनूठे मॉडल से सजाया है। प्रत्येक अक्षर एक मूल मंत्र का प्रतिनिधित्व करता है, जो राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित, समावेशी और तीव्र विकास की दिशा तय करता है। यह बजट न केवल आंकड़ों का संग्रह है, बल्कि 2047 तक विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव रखने वाली दूरदर्शी सोच है।

 प्रमुख प्रावधान

  1. S – समावेशी विकास (Inclusive Development) समाज के हर वर्ग, विशेषकर कमजोर तबकों को मुख्यधारा में लाने पर फोकस। सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं को मजबूत किया गया।
    • सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं: ~1,327.73 करोड़ रुपये.
    • अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना: 600 करोड़ रुपये.
    • सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0: ~598.33 करोड़ रुपये.
    • ईडब्ल्यूएस आवास अनुदान: 25 करोड़ रुपये.
    • मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट, आंचल अमृत, वात्सल्य योजना, महिला पोषण योजना आदि: कुल कई सौ करोड़ों में प्रावधान.
    • प्रसूता के लिए ईजा-बोई शगुन योजना: ~14.13 करोड़ रुपये.
  2. A – आत्मनिर्भर उत्तराखंड (Self-Reliant Uttarakhand) स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार, कृषि, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा।
    • पशुपालन स्वरोजगार योजनाएं: ~42.02 करोड़ रुपये.
    • मिशन एप्पल: 42 करोड़ रुपये.
    • ट्राउट प्रोत्साहन योजना: ~39.90 करोड़ रुपये.
    • उच्च मूल्य फल (कीवी, ड्रैगन फ्रूट): ~30.70 करोड़ रुपये.
    • चाय विकास, सगंध पौधा केंद्र: 25-24 करोड़ रुपये.
    • मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना: 60 करोड़ रुपये.
    • स्टार्टअप वेंचर फंड: 25 करोड़ रुपये.
    • सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम सहायता: 75 करोड़ रुपये.
    • इको-टूरिज्म: ~18.50 करोड़ रुपये.
  3. N – नई सोच (New Thinking) नवाचार, तकनीक, शिक्षा और आधुनिकता को अपनाने पर जोर।
    • संस्कृत पाठशालाएं: 28 करोड़ रुपये.
    • खनन सर्विलांस: 24.50 करोड़ रुपये.
    • छात्रवृत्तियां (विद्यालयी/उच्च शिक्षा/खेल): 15-13.50 करोड़ रुपये.
    • राज्य डाटा सेंटर सुदृढ़ीकरण: 65 करोड़ रुपये.
    • सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना: ~47.50 करोड़ रुपये.
    • साइबर सिक्योरिटी: 15 करोड़ रुपये.
    • एआई एवं इमर्जिंग टेक्नोलॉजी: ~11.50 करोड़ रुपये.
    • यूनीफॉर्म सिविल कोड: 5 करोड़ रुपये.
  4. T – तीव्र विकास (Rapid Development) बुनियादी ढांचे में तेजी से निवेश।
    • पीएमजीएसवाई (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना): 1,050 करोड़ रुपये.
    • गड्ढा मुक्त सड़क अभियान: 400 करोड़ रुपये.
    • नागरिक उड्डयन विभाग: ~52.50 करोड़ रुपये.
    • नंदा देवी राजजात यात्रा: 25 करोड़ रुपये.
  5. U – उन्नत शहर एवं गांव (Advanced Cities & Villages) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का संतुलित उन्नयन।
    • विकसित भारत @2047: ~705.25 करोड़ रुपये.
    • ग्रामीण विकास विभाग पूंजीगत: 1,642.20 करोड़ रुपये.
    • वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: 40 करोड़ रुपये.
    • शहरी निकाय: 1,814 करोड़ रुपये.
    • पंचायती राज संस्थाएं: 1,491 करोड़ रुपये.
    • आवास विकास अवसंरचना: 130 करोड़ रुपये.
  6. L – लोक सहभागिता (Public Participation) जनता की भागीदारी से योजनाओं का क्रियान्वयन।
    • आईटीडीए अनुदान/सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ीकरण: 25 करोड़ रुपये.
    • राज्य डाटा सेंटर: 40 करोड़ रुपये.
    • एआई मिशन एसपीवी: 25 करोड़ रुपये.
    • विज्ञान केंद्र चंपावत: 10 करोड़ रुपये.
  7. A – आर्थिक शक्ति (Economic Strength) आर्थिक मजबूती के लिए निवेश और उद्योग प्रोत्साहन।
    • रिस्पना बिंदाल एलिवेटेड यूटिलिटी: 350 करोड़ रुपये.
    • टिहरी रिंग रोड: 10 करोड़ रुपये.
    • स्टार्टअप, एमएसएमई, मेगा इंडस्ट्रियल नीति: 25-75 करोड़ रुपये.
    • इको-टूरिज्म और निवेश प्रोत्साहन: 18.50-30 करोड़ रुपये.
  8. N – न्यायपूर्ण व्यवस्था (Just System) कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और न्याय पहुंच को मजबूत करना।
    • पुलिस आवास: 100 करोड़ रुपये.
    • इंडिया रिजर्व वाहिनी: 10 करोड़ रुपये.
    • स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स: 10 करोड़ रुपये.
    • जेल निर्माण/भूमि क्रय: 25 करोड़ रुपये.
    • फास्ट ट्रैक विशेष कोर्ट (रेप एवं पॉक्सो): 3.42 करोड़ रुपये.
    • उत्तराखंड न्यायिक अकादमी: 6.96 करोड़ रुपये.

ज्ञान मॉडल से समग्र विकास का रोडमैप, गरीब-युवा-किसान-महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प GYAN मॉडल के माध्यम से राज्य के समग्र विकास को आगे बढ़ाना है। इस मॉडल में गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान) और नारी सशक्तिकरण को विकास के चार प्रमुख स्तंभ के रूप में रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। इसी दृष्टि से बजट में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

गरीब कल्याण पर विशेष ध्यान
गरीब वर्ग के जीवन स्तर को सुधारने के लिए कई योजनाओं में बजट बढ़ाया गया है। अन्नपूर्ति योजना के लिए ₹1300 करोड़, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए ₹298.35 करोड़ और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए ₹56.12 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आवास के लिए ₹25 करोड़, परिवहन निगम की बसों में निर्धारित श्रेणी के यात्रियों को निःशुल्क यात्रा सुविधा के लिए ₹42 करोड़ तथा रसोई गैस पर अनुदान के लिए ₹43.03 करोड़ रखे गए हैं। साथ ही दिव्यांग, तीलू रौतेली और अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए ₹167.05 करोड़ तथा आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ₹25 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास
प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी कई योजनाओं को मजबूती दी गई है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए ₹60 करोड़, पलायन रोकथाम योजना के लिए ₹10 करोड़ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए ₹62.29 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गैर सरकारी महाविद्यालयों को सहायता के लिए ₹155.38 करोड़, शिक्षा मित्रों के मानदेय के लिए ₹10 करोड़ तथा मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के लिए ₹10 करोड़ निर्धारित किए गए हैं।

किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई योजनाओं को बजट में शामिल किया गया है। ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए ₹39.90 करोड़, मिशन एप्पल के लिए ₹42 करोड़, दुग्ध उत्पादकों के प्रोत्साहन के लिए ₹32 करोड़ तथा दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए ₹42.50 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए ₹160.13 करोड़, मिलेट मिशन के लिए ₹12 करोड़ तथा किसान पेंशन योजना के लिए ₹12.06 करोड़ भी निर्धारित किए गए हैं।

महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता
महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। नंदा गौरा योजना के लिए ₹220 करोड़, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए ₹47.78 करोड़ और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के लिए ₹30 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना, महिला पोषण योजना, आंचल अमृत योजना और स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण जैसी योजनाओं के लिए भी बजट रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान मॉडल के माध्यम से गरीबों के उत्थान, युवाओं के सशक्तिकरण, किसानों की समृद्धि और महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी तथा उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेश किया 1.11 लाख करोड़ से ज्यादा का बजट

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गैरसैंण (चमोली): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज (9 मार्च 2026) विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया। यह बजट पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 10.41 प्रतिशत अधिक है और राज्य के समग्र विकास को तेज करने के साथ मजबूत वित्तीय प्रबंधन पर केंद्रित है।

यह ऐतिहासिक बजट प्रस्तुति है, क्योंकि पहली बार राज्यपाल के अभिभाषण के ही दिन मुख्यमंत्री (जो वित्त मंत्री का प्रभार भी संभाल रहे हैं) ने बजट सदन में रखा। बजट में एफआरबीएम अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया गया है, जिससे वित्तीय जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनी रहे।

मुख्य वित्तीय संकेतक

  • राजस्व अधिशेष: 2,536.33 करोड़ रुपये–राज्य की आय राजस्व व्यय से अधिक होने से मजबूत वित्तीय स्थिति का प्रमाण।
  • राजकोषीय घाटा: जीएसडीपी के 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर रखा गया।
  • लोक ऋण: जीएसडीपी के 32.50 प्रतिशत की तय सीमा के अंदर नियंत्रित।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार विकास परियोजनाओं को गति देते हुए भी ऋण प्रबंधन, राजकोषीय अनुशासन और वित्तीय संतुलन पर विशेष ध्यान दे रही है। राजस्व अधिशेष, सीमित घाटा और नियंत्रित ऋण से भविष्य की विकास योजनाओं को स्थिर और मजबूत आधार मिलेगा।

बजट सत्र गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में 13 मार्च तक चलेगा। बजट में राज्य के विकास, पर्यटन, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, कृषि, आधारभूत ढांचा और 2047 तक विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री धामी ने इसे ‘सभी वर्गों के लिए समावेशी बजट’ बताया है।

उत्तराखंड बजट सत्र 2026 की शुरुआत: राज्यपाल के अभिभाषण में 2047 तक विकसित राज्य का संकल्प

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गैरसैंण (चमोली): उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र 2026 आज (9 मार्च, सोमवार) ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में शुरू हुआ। सत्र की शुरुआत राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह के अभिभाषण से हुई, जिसमें सरकार ने विकास, रोजगार सृजन, पर्यटन, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा सुधार और 2047 तक विकसित उत्तराखंड बनाने के लक्ष्य को प्रमुखता दी।

राज्यपाल ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को वर्ष 2047 तक एक विकसित राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्यरत है। इसके लिए आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत ढांचे के मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों में संतुलित विकास सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

शिक्षा क्षेत्र में नकल मुक्त परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए राज्यपाल ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के लिए कड़े कानून लागू किए गए हैं। युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार अवसर प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता बताते हुए अभिभाषण में ‘लखपति दीदी’ योजना का जिक्र किया गया, जिसके माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। महिलाओं को बैंक ऋण, स्वरोजगार और आय वृद्धि के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। रोजगार सृजन के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस योजना से हजारों युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में आर्थिक सहायता मिली है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं।

पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बताते हुए चारधाम यात्रा के साथ शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाओं पर प्रकाश डाला गया। विंटर टूरिज्म, धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन को प्रोत्साहन देकर साल भर पर्यटन गतिविधियां सुनिश्चित करने और स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करने का प्रयास जारी है।

ग्रामीण विकास, सड़क, बिजली, पानी और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकारी योजनाओं और सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में काम हो रहा है। कृषि, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और बेहतर विपणन के प्रयास जारी हैं। राज्यपाल ने पारदर्शी, जवाबदेह और जन-भागीदारी वाले प्रशासन की प्रतिबद्धता जताई। विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।

यह बजट सत्र ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार राज्यपाल के अभिभाषण के साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दोपहर में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर रहे हैं, जिसकी अनुमानित राशि लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये है। सत्र 13 मार्च तक चलेगा, जिसमें विकास, रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।

ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच तेल $110 के पार जाने से शेयर बाजार में हाहाकार, डूबे ₹12 लाख करोड़

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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के तेज़ होने से सोमवार (9 मार्च 2026) को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी में 3% से अधिक की जोरदार टूट देखी गई, जिससे निफ्टी 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया।

सुबह के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 2,300 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 76,750 के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 23,700 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक रहा कि निफ्टी50 के 48 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल कोल इंडिया और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे कुछ ही शेयर हल्की तेजी दिखा रहे थे। आईटी, बैंकिंग, एफएमसीजी, इंफ्रा, फार्मा और रेलवे सेक्टर समेत सभी प्रमुख सेक्टरों में भारी बिकवाली देखी गई।

इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जहां ईरान-अमेरिका संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 25% से अधिक चढ़कर 115-119 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 113 डॉलर के पार चला गया। यह जुलाई 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। सप्लाई चेन में रुकावट की आशंका, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल परिवहन प्रभावित होने से, वैश्विक बाजारों में दहशत फैल गई।

एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट आई—दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7% से अधिक टूटा, जबकि जापान का निक्केई 6.5% नीचे आ गया। गिफ्ट निफ्टी ने भी सुबह 3% से अधिक की गिरावट का संकेत दिया था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली जारी रही—शुक्रवार को उन्होंने 6,030 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। रुपये में भी कमजोरी आई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.28 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इंडिया VIX में 21% से अधिक की तेजी आई, जो बाजार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत दे रही है।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे IOC, BPCL और HPCL के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई, क्योंकि उच्च कच्चे तेल की कीमतों से उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ा। हालांकि, सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाने का भरोसा दिया है। ऊपरी तेल कंपनियां जैसे ONGC फिलहाल गेनर्स रहीं।

जियोपॉलिटिकल इन्वेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट आनंद जेम्स ने चेतावनी दी कि निफ्टी 23,535 के स्तर को तोड़ने पर गिरावट और गहरा सकती है, जो 22,000 या इससे भी नीचे 19,000 तक जा सकती है। तेजी की संभावना 24,000 से ऊपर टिके रहने पर निर्भर है। घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार में सपोर्ट देने की कोशिश कर रहे हैं और हाल के सत्रों में 58,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया है।

यूकॉस्ट ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 27 महिलाओं को किया सम्मानित

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देहरादून: उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूकॉस्ट) ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 7 महिलाओं को पांचवें “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान-2026” 20 महिलाओं को आठवें “हिमालयी नारी शक्ति सम्मान-2026” से नवाजा गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “स्टार्टअप्स, नवाचार एवं उद्यमिता में महिलाओं की भागीदारी” रहा।

यह आयोजन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के सभागार में दिव्य हिमगिरि और सरादस्ता के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। महिला उद्यमियों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका उद्घाटन एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) भानु दुग्गल ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अध्यक्षा न्यायाधीश सुश्री कुमकुम रानी ने भाग लिया। प्रो. दुग्गल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में महिलाओं की उद्यमिता की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर का उदाहरण देते हुए बताया कि 18वीं शताब्दी में उन्होंने माहेश्वरी साड़ियों का ब्रांड स्थापित कर आज लाखों महिलाओं के लिए उद्यमिता का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने नई पीढ़ी से अपील की कि समानता का मतलब पुरुषों की नकल या व्यसनों की ओर मुड़ना नहीं है।

कॉनक्लेव की मुख्य पैनलिस्ट डॉ. हरिका आर. राजेश कुमार ने कहा कि महिलाएं घर और बाहर दोनों जगह बेहतरीन प्रबंधक साबित होती हैं, इसलिए उनसे बेहतर उद्यमी कोई नहीं। अनुराधा डोवल, ममता रावत, श्रद्धा नेगी और गीता चंदोला ने भी अपनी सफलता की प्रेरक कहानियां साझा कीं।

यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. डॉ. दुर्गेश पंत ने बताया कि “शी फॉर स्टेम” कार्यक्रम के तहत राज्य के सभी 13 जिलों में महिलाओं और छात्राओं को विज्ञान-प्रौद्योगिकी के माध्यम से उद्यमिता की ओर प्रेरित किया जा रहा है। न्यायाधीश कुमकुम रानी ने पुरस्कृत महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि सुशिक्षित और उद्यमशील महिलाएं राष्ट्र और समाज के विकास के लिए आवश्यक हैं।

इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के चेयरमैन इंजी. सीपी शर्मा ने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व की सराहना की। कार्यक्रम का स्वागत डॉ. कुँवर राज अस्थाना ने किया, संचालन डॉ. मंजू सुंदरियाल ने तथा धन्यवाद डॉ. ओ.पी. नौटियाल ने दिया।

विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान-2026 प्राप्तकर्ता:

  • सुषमा बहुगुणा
  • रंजना कुकरेती शर्मा
  • डॉ. रीमा पंत (शिक्षाविद्)
  • राजुली भट्ट
  • सोनिया देवी
  • डॉ. विजेता बिष्ट
  • मोनिका बोहरा

हिमालयी नारी शक्ति सम्मान-2026 प्राप्तकर्ता:

  • अनुराधा डोवल
  • मधु गुप्ता
  • डॉ. रमा गोयल
  • डॉ. ममता कुंवर
  • डॉ. वीना अस्थाना
  • ममता रावत
  • श्रुति जोशी
  • श्वेता ध्यानी
  • वंदना श्रीवास्तव
  • श्रद्धा नेगी
  • गीता चंदोला
  • अर्चना थपलियाल
  • प्रीति मनराल
  • इंजी. बबीता कोहली
  • डॉ. मंजू ओ. पाई
  • डॉ. हरिका आर. राजेश कुमार
  • डॉ. शेफाली अग्रवाल
  • डॉ. बबीता बेहेरा
  • सुरभि माथुर
  • अमिता गर्ग

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, छात्राएं और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें पूर्व तकनीकी शिक्षा निदेशक आरपी गुप्ता, हिमांशु अवस्थी आदि शामिल थे। यह आयोजन महिलाओं की वैज्ञानिक, उद्यमी और सामाजिक भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

उत्तराखंड में फ्लाईओवर पर टकराई गाड़ियां, दो में लगी आग, महिला की मौत की आशंका

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देहरादून: देहरादून से एक धार्मिक कार्यक्रम से वापस लौट रही श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली का एक ट्रक और बस से जोरदार टकराव हो गया। इस भीषण दुर्घटना में ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर (ट्रक) में आग लग गई, जिससे इलाका दहशत में आ गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में एक महिला की मौत होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि कई अन्य लोग घायल हो सकते हैं।

हादसा देहरादून के आसपास के किसी प्रमुख मार्ग पर हुआ, जहां ट्रैक्टर-ट्रॉली धार्मिक आयोजन से लौट रहे लोगों को लेकर जा रही थी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहनों में तुरंत आग भड़क उठी। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसपास के लोग भी सहम गए।

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाने के लिए तेजी से प्रयास शुरू किए। राहत एवं बचाव कार्य जारी है। पुलिस ने आसपास के इलाके को सील कर दिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। घायलों को निकालकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। मृतक महिला की पहचान और अन्य घायलों की स्थिति की पुष्टि होने के बाद ही अधिक जानकारी दी जाएगी।