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NEET-UG 2026 कल : OMR शीट में छोटी गलती पड़ सकती है भारी, NTA ने जारी की एडवाइजरी

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नई दिल्ली: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (UG) 2026 के लिए काउंटडाउन शुरू हो चुका है। 3 मई को आयोजित होने वाली इस परीक्षा में देशभर से रिकॉर्ड 22,79,743 अभ्यर्थी शामिल होंगे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने उम्मीदवारों के लिए अहम दिशा-निर्देश जारी करते हुए OMR शीट भरने में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

NTA के अनुसार, परीक्षा में सफलता केवल सही उत्तर देने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि OMR शीट को सही तरीके से भरना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। OMR (ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन) शीट पूरी तरह मशीन द्वारा स्कैन की जाती है, जिसमें किसी भी प्रकार की मानवीय जांच नहीं होती। ऐसे में अधूरा गोला भरना, गलत प्रश्न संख्या पर मार्किंग करना या एक से अधिक विकल्प भरना सही उत्तर को भी गलत बना सकता है।

रिकॉर्ड पंजीकरण, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
इस वर्ष परीक्षा के लिए 13,32,928 महिला और 9,46,815 पुरुष उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। कुल अभ्यर्थियों में लगभग 58 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है, जो मेडिकल क्षेत्र में उनकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

OMR भरते समय इन बातों का रखें ध्यान
परीक्षार्थियों को सलाह दी गई है कि प्रत्येक उत्तर भरने से पहले प्रश्न संख्या का मिलान अवश्य करें। गोले को पूरी तरह काला करें, किसी भी प्रकार की कटिंग, ओवरराइटिंग या ✔/✖ जैसे चिन्हों का प्रयोग न करें। एक प्रश्न के लिए दो विकल्प भरने पर उत्तर स्वतः निरस्त हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि OMR शीट में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं होती, इसलिए परीक्षा से पहले सैंपल शीट पर अभ्यास करना लाभकारी रहता है। साथ ही, समय प्रबंधन भी बेहद जरूरी है—अंतिम 10-15 मिनट केवल OMR भरने के लिए सुरक्षित रखें।

मौसम को लेकर भी अलर्ट
NTA ने मौसम को देखते हुए भी एडवाइजरी जारी की है। कई राज्यों में 3 मई को बारिश और आंधी-तूफान की संभावना जताई गई है। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे समय से पहले घर से निकलें और ट्रैफिक या जलभराव जैसी संभावित बाधाओं को ध्यान में रखें। परीक्षा केंद्रों के गेट दोपहर 1:30 बजे सख्ती से बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

सावधानी ही सफलता की कुंजी
विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी तैयारी के साथ-साथ OMR शीट भरने में सतर्कता ही सफलता सुनिश्चित कर सकती है। छोटी-सी लापरवाही भी पूरे साल की मेहनत पर भारी पड़ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट से टीएमसी को झटका, चुनाव आयोग मामले में दखल से इनकार

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नई दिल्ली: चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिका को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार के कर्मचारी निष्पक्ष नहीं रहेंगे और उनके खिलाफ काम कर सकते हैं। कोर्ट ने इस तर्क को गलत ठहराते हुए कहा कि ऐसी धारणा ही मूल समस्या है।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों पर इस तरह का अविश्वास उचित नहीं है और राजनीतिक दलों को संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए। कोर्ट ने संकेत दिया कि केवल आशंकाओं के आधार पर न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बनती।

हरिद्वार में आस्था से खिलवाड़, गंगा नहलाया कुत्ता, डंडे से मारी मछलियां, लोगों भारी में रोष

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हरिद्वार: कुंभ मेले के नजदीक आते ही धर्मनगरी हरिद्वार में व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हाल के दिनों में गंगा घाटों पर धार्मिक मर्यादाओं के उल्लंघन के कुछ मामले सामने आए हैं, जिनसे स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, हर की पैड़ी घाट के पास एक महिला द्वारा अपने पालतू कुत्ते को गंगा में नहलाने का मामला सामने आया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महिला को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन उसने चेतावनी देते हुए कुत्ते को गंगा में नहला दिया। इस दौरान व्यवस्थापकों के साथ उसकी कहासुनी भी हुई। बताया जा रहा है कि महिला हरियाणा और दिल्ली से आई थी।

वहीं दूसरी ओर, गंग नहर के एक हिस्से में कुछ युवकों द्वारा डंडों से मछलियां मारने की घटना भी सामने आई है। बताया गया कि निर्माणाधीन क्षेत्र के पास झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले कई युवक खुलेआम इस गतिविधि में शामिल थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन युवकों ने उन्हें डांटकर भगा दिया।

इन घटनाओं को लेकर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हरिद्वार को पवित्र धार्मिक नगरी के रूप में विशेष नियमों के तहत संरक्षित रखा गया है, जहां मांस, शराब और अन्य आपत्तिजनक गतिविधियों पर प्रतिबंध है। ऐसे में गंगा घाटों पर इस तरह की घटनाएं आस्था को ठेस पहुंचाने वाली हैं।

श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष अधीर कौशिक ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगा घाटों की धार्मिक महत्ता को देखते हुए इस प्रकार के कृत्य अस्वीकार्य हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई, तो कुंभ के दौरान इन मुद्दों को लेकर व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर पुनर्मतदान, सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के तहत दक्षिण 24 परगना जिले की डायमंड हार्बर और मगरहाट पश्चिम सीटों पर शनिवार को 15 बूथों पर पुनर्मतदान कराया जा रहा है। चुनाव आयोग ने पिछले चरण में गड़बड़ी और शिकायतों के आधार पर यह फैसला लिया था। मतदान सुबह 7 बजे से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से जारी है।

जानकारी के मुताबिक, मगरहाट पश्चिम के 11 और डायमंड हार्बर के 4 बूथों पर दोबारा वोटिंग हो रही है। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और लोग उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। प्रशासन ने हर बूथ पर केंद्रीय बल और पुलिस की तैनाती कर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

पुनर्मतदान के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर साजिश रचने का आरोप लगाया है। टीएमसी नेता शशि पांजा ने कहा कि पुनर्मतदान का माहौल बनाने के पीछे भाजपा की रणनीति थी, हालांकि उनकी पार्टी ने किसी उकसावे में आकर प्रतिक्रिया नहीं दी।

वहीं भाजपा ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए इसे अपर्याप्त बताया है। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कई अन्य बूथों पर भी गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं, इसलिए वहां भी पुनर्मतदान कराया जाना चाहिए था।

इसी बीच कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग और भाजपा पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और एग्जिट पोल के जरिए माहौल प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

पुनर्मतदान के दौरान कुछ मानवीय तस्वीरें भी सामने आईं, जहां एक सीआरपीएफ जवान ने लाठी के सहारे चल रहे एक मतदाता की मदद कर उसे मतदान केंद्र तक पहुंचाया। चुनाव आयोग का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। जहां भी गड़बड़ी की शिकायतें मिलेंगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड में साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस का छापा, पांच युवक गिरफ्तार

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रुद्रपुर: दिनेशपुर थाना क्षेत्र में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने पांच युवकों को गिरफ्तार किया है, जो अपने बैंक खातों के जरिए साइबर अपराधियों को अवैध लेनदेन में सहयोग कर रहे थे। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

पुलिस के अनुसार, देशभर में बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ऐसे नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई थी, जो ठगी की रकम को इधर-उधर करने में मदद करते हैं। जांच के दौरान दिनेशपुर क्षेत्र के कुछ युवकों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से क्षेत्र में छापेमारी की।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने समीर बाछाड़, राज बाछाड़, रोहित राय, रोहित मिस्त्री और हरीश सरकार को गिरफ्तार किया। सभी आरोपी अलग-अलग स्थानों के निवासी हैं, लेकिन एक ही नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी मामूली पैसों के लालच में अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का उपयोग देशभर में ठगी से प्राप्त धनराशि के ट्रांसफर के लिए किया जाता था। इस प्रकार ये युवक ‘मनी म्यूल’ के रूप में काम कर रहे थे, जिससे असली अपराधी आसानी से बच निकलते थे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधी अब सीधे सामने आने के बजाय बेरोजगार या लालच में आने वाले युवाओं को निशाना बनाकर उनका दुरुपयोग कर रहे हैं। उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम उन्हीं खातों में जमा कराई जाती है।

दिल्ली पुलिस साइबर सेल के सब-इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने बताया कि साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और इसी क्रम में यह कार्रवाई की गई। वहीं, दिनेशपुर थाना प्रभारी निरीक्षक रविंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि इस ऑपरेशन में स्थानीय पुलिस ने पूरा सहयोग किया।

प्रेमनगर में युवक की पिटाई का वीडियो वायरल, एक दरोगा व एएसआई लाइन हाजिर

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देहरादून: थाना प्रेमनगर क्षेत्र स्थित उत्तरांचल यूनिवर्सिटी में आयोजित युवा फेस्ट कार्यक्रम के दौरान पुलिस और एक युवक के बीच हुई झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले का संज्ञान लेते हुए एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक दरोगा और एक एएसआई को लाइन हाजिर कर दिया है, साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, रविवार को यूनिवर्सिटी में एक गायक के कार्यक्रम की प्रस्तावित तैयारी के बीच पुलिस ने बड़े आयोजन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद शुक्रवार से ही संस्थान के बाहर छात्रों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई, जिससे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई और लंबा जाम लग गया। जाम की सूचना पर प्रेमनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों व अन्य युवकों को अपने वाहन हटाने के निर्देश दिए।

इसी दौरान एक युवक पुलिसकर्मियों से उलझ गया और बहस करने लगा। पुलिस द्वारा समझाने के बावजूद युवक नहीं माना। स्थिति बिगड़ने पर जब पुलिस ने उसे पकड़ने का प्रयास किया तो वह मौके से भागने लगा। कुछ दूरी पर पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया और जमीन पर गिराकर लाठीचार्ज कर दिया, जिससे युवक बेहोश हो गया।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, एसपी सिटी प्रमोद कुमार का बयान भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने इसे “हल्का बल प्रयोग” बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो सामने आने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

एसपी सिटी के मुताबिक, निजी संस्थान में हो रहे कार्यक्रम के चलते यातायात बाधित हो रहा था, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस मौके पर पहुंची थी। लोगों को समझाने के दौरान कुछ युवक वहां से चले गए, लेकिन एक-दो युवकों ने पुलिस से बहस की, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया गया। फिलहाल, एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एक राजपत्रित अधिकारी को सौंप दी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भाजपा विधायक के वायरल पत्र से सियासत गरमाई, गणेश गोदियाल ने की SIT जांच की मांग, कहा-मामला बहुत गंभीर 

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब भाजपा विधायक अरविंद पाण्डेय से जुड़ा एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने देहरादून स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर गंभीर सवाल खड़े किए।

गोदियाल ने कहा कि प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने दो बार राज्यपाल से मिलने का समय मांगा, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। उनका कहना था कि वे राज्यपाल के समक्ष सत्ता के दुरुपयोग और सरकार में बैठे लोगों के कथित कारनामों को रखना चाहते थे।

देहरादून बार प्रकरण पर भी उठाए सवाल

प्रेस वार्ता के दौरान गोदियाल ने देहरादून के एक बार से जुड़े हालिया प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना के बाद पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों—एसपी, एसएसपी और आईजी—की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, तो आम जनता शिकायत किससे करे।

वायरल पत्र बना चर्चा का केंद्र

गोदियाल ने भाजपा विधायक अरविंद पाण्डेय से जुड़े वायरल पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पत्र की सत्यता की पुष्टि आवश्यक है, लेकिन यदि इसमें लिखी बातें सही हैं तो मामला अत्यंत गंभीर है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, पत्र में दावा किया गया है कि विधायक पिछले चार वर्षों से मुख्यमंत्री द्वारा कथित उपेक्षा और षड्यंत्र से परेशान हैं। साथ ही आरोप है कि 8 जनवरी को एसएसपी के माध्यम से उनके पुत्र को धमकाया गया और सामाजिक जीवन खत्म करने तक की बात कही गई।

सरकार और पुलिस पर साधा निशाना

गोदियाल ने कहा कि वे पहले भी आरोप लगाते रहे हैं कि पुलिस विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री के हितों की रक्षा में लगे हैं। अब जब सत्ता पक्ष के विधायक से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, तो उनके आरोपों को बल मिलता है।

उन्होंने एक अन्य पत्र का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री के कथित संबंधों और राजनीतिक दबाव की बात भी उठाई, जिसमें कुछ स्थानीय नेताओं के जरिए उनके खिलाफ कार्रवाई कराने के आरोप लगाए गए हैं।

SIT जांच की मांग

गोदियाल ने कहा कि यदि सत्ताधारी दल का विधायक ही अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की। साथ ही सुझाव दिया कि जांच हाईकोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनता का भरोसा कायम रहे।

बीकेटीसी में विवादों का सिलसिला जारी, हेमंत द्विवेदी के कार्यकाल में विवादों ने बढ़ाई मुश्किलें

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देहरादून: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष के रूप में हेमंत द्विवेदी की नियुक्ति के बाद समिति का कार्यकाल लगातार विवादों के घेरे में रहा है। मौजूदा मुद्दों के साथ-साथ पूर्व अध्यक्ष के समय से जुड़े मामलों के उभरने से स्थिति और जटिल बनी रही है।

1. पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल से जुड़े विवाद भी बने मुद्दा

पूर्व कार्यकाल में ठेकों, नियुक्तियों और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मामलों पर उठे सवाल हेमंत द्विवेदी के कार्यकाल में भी गूंजते रहे। इन मामलों में कार्रवाई की गति और पारदर्शिता को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए।

2. वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर विवाद

चारधाम यात्रा के दौरान वीआईपी दर्शन को लेकर आम श्रद्धालुओं की उपेक्षा के आरोप लगे, जिससे असंतोष बढ़ा।

3. ठेकों और खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता पर सवाल

भोजन, आवास और अन्य व्यवस्थाओं के ठेकों में पारदर्शिता की कमी और निविदा प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां सामने आईं।

4. कर्मचारियों और पुजारियों के साथ मतभेद

कर्मचारियों और तीर्थ पुरोहितों के साथ वेतन, अधिकार और कार्यशैली को लेकर असहमति की स्थिति बनी रही।

5. यात्रा व्यवस्थाओं में अव्यवस्था के आरोप

आवास, साफ-सफाई, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन को लेकर यात्रा सीजन में शिकायतें सामने आईं।

6. धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप के आरोप

कुछ निर्णयों को लेकर परंपराओं में हस्तक्षेप के आरोप लगे, जिस पर धार्मिक संगठनों ने विरोध जताया।

7. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

मौजूदा और पुराने विवादों को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बयानबाजी जारी रही।

राजनीतिक करियर पर संभावित प्रभाव 

लगातार विवादों के चलते हेमंत द्विवेदी की प्रशासनिक छवि पर असर पड़ सकता है। यदि इन मुद्दों का समाधान समय पर और प्रभावी तरीके से नहीं होता, तो भविष्य में उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता और जिम्मेदार पदों पर दावेदारी कमजोर हो सकती है। वहीं, यदि वे पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन के जरिए स्थिति सुधारने में सफल रहते हैं, तो यह उनके लिए एक मजबूत प्रशासनिक अनुभव के रूप में भी सामने आ सकता है।

नेतृत्व की विश्वसनीयता पर सवाल 

बीकेटीसी में जारी विवाद न केवल संस्थागत छवि को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि इसका सीधा असर नेतृत्व की विश्वसनीयता पर भी पड़ रहा है। आने वाले समय में सुधारात्मक कदम ही स्थिति को तय करेंगे।

मुंबई में 1,745 करोड़ की कोकीन बरामद, अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट का भंडाफोड़

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मुंबई: अमित शाह ने शुक्रवार को बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट का पर्दाफाश करते हुए मुंबई में 1,745 करोड़ रुपये मूल्य की 349 किलोग्राम हाई-ग्रेड कोकीन जब्त की है।

गृह मंत्री ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार ड्रग माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस ऑपरेशन को एजेंसियों के “नीचे से ऊपर” (bottom-up) दृष्टिकोण का बेहतरीन उदाहरण बताया, जिसमें एक छोटी खेप के सुराग से बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।

अमित शाह ने इस बड़ी सफलता के लिए NCB टीम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर प्रभावी चोट पहुंची है।

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई हाल ही में कुख्यात ड्रग तस्कर सलीम डोला को तुर्की से भारत लाए जाने के बाद की गई है। सलीम डोला का नाम अंतरराष्ट्रीय अपराध सरगना दाऊद इब्राहिम के सहयोगी के रूप में भी सामने आता रहा है।

जांच एजेंसियां अब इस मामले में जुड़े अन्य आरोपियों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

घंटाघर में श्रमिक सम्मान कार्यक्रम, महिला श्रमिकों को सूट और पुरुषों को गमछा भेंट

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देहरादून: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर राजधानी में उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ द्वारा घंटाघर पर “श्रमिक सम्मान कार्यक्रम” आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने महिला श्रमिकों को सूट और पुरुष श्रमिकों को गमछा पहनाकर सम्मानित किया।

इस मौके पर श्रमिकों को संबोधित करते हुए सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्ग के हितों के लिए कार्य करती रही है। उन्होंने कहा कि भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और स्थानीय निकायों में महिला आरक्षण जैसी व्यवस्थाएं कांग्रेस सरकारों की प्राथमिकताओं का प्रमाण हैं।

धस्माना ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान में केंद्र और राज्य की सरकारें गरीब और मजदूर विरोधी नीतियां अपना रही हैं, जिससे श्रमिक वर्ग को रोजगार और आवास जैसी मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में मजदूरों को भारी कठिनाइयों से गुजरना पड़ा और आज महंगाई व गैस संकट के कारण उनकी स्थिति और भी दयनीय हो गई है।

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि किसी भी बस्ती को हटाने से पहले वहां रहने वाले लोगों के पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनने पर प्रदेश में किसी भी गरीब की झोपड़ी नहीं टूटने दी जाएगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कौशल ने कहा कि कांग्रेस श्रमिकों को एकजुट कर उनके अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में महंगाई के कारण मजदूरों के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया है।

कार्यक्रम में श्रम प्रकोष्ठ की मुख्य महासचिव पूनम कंडारी, कांग्रेस नेता विनोद कुमार (एडवोकेट), राम गोपाल वर्मा, फरजान अंसारी, आजाद अंसारी, चंद्रपाल, लक्की राणा, बच्चन सिंह नेगी, मनीष गर्ग, कमल किशोर शर्मा, मानसिंह देशराज, विलियम सहित बड़ी संख्या में श्रमिक मौजूद रहे।