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जनता की अदालत में केजरीवाल, PM मोदी पर तीखे हमले, RSS प्रमुख से पूछे ये सवाल?

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मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद आज आम आदमी पार्टी (AA) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर ‘जनता की अदालत’ को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में दिल्ली सरकार की पूरी कैबिनेट शामिल हुई। इस दौरान केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला

केजरीवाल ने कहा कि पिछले दस साल से हम ईमानदारी से सरकार चला रहे थे। बिजली-पानी मुफ्त किया, लोगों के लिए इलाज मुफ्त किया, शिक्षा को अअच्छा बनाया। इससे मोदी जी को लगा कि अगर उन्हें हमसे जीतना है तो हमारी ईमानदारी पर हमला करना होगा और फिर उन्होंने केजरीवाल, सिसोदिया और आम आदमी पार्टी को बेईमान साबित करने की साजिश रची और नेताओं को जेल में डाल दिया। इस दौरान उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भगवत से 5 सवाल पूछे।
  • जिस तरह मोदी जी देश भर में लालच देकर या ED-CBI का डर दिखाकर दूसरी पार्टी के नेताओं को तोड़ रहे हैं, सरकारें गिरा रहे हैं- क्या ये देश के लोकतंत्र के लिए सही है? क्या आप नहीं मानते ये भारतीय जनतंत्र के लिए हानिकारक है?
  • देश भर में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचारी नेताओं को मोदी ने अपनी पार्टी में शामिल करवाया। जिन नेताओं को कुछ दिन पहले उन्होंने खुद सबसे भ्रष्टाचारी बोला। जिन नेताओं को अमित शाह जी ने भ्रष्टाचारी बोला। कुछ दिन बाद उन्हें बीजेपी में शामिल करवा लिया? क्या आपने ऐसी बीजेपी की कल्पना की थी? क्या इस प्रकार की राजनीति पर आपकी सहमति है?
  • बीजेपी RSS की कोख से पैदा हुई है। कहा जाता है कि ये देखना RSS की जिम्मेदारी है कि BJP पथभ्रष्ट न हो। क्या आप आज की बीजेपी के कदमों से सहमत हैं। क्या आपने कभी मोदी जी से ये सब न करने के लिए कहा ?
  • जेपी नड्डा ने चुनाव के दौरान कहा कि BJP को RSS की जरूरत नहीं है। RSS बीजेपी की मां समान है। क्या बेटा इतना बड़ा हो गया है कि मां को आंखें दिखाने लगा है? जिस बेटे को पालपोष के बड़ा किया ,प्रधानमंत्री बनाया, आज वो अपनी माता तुल्य संस्था को आंखें दिखा रहा है। जब नड्डा जी ने ये कहा तो आपको दुख नहीं हुआ? क्या RSS के हर कार्यकर्ता को दुख नहीं हुआ?
  • RSS बीजेपी ने मिलकर ये नियम बनाया था कि 75 वर्ष का होने पर किसी भी व्यक्ति को रिटायर होना पड़ेगा। इस कानून के तहत आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी जी जैसे बड़े नेताओं को भी रिटायर कर दिया गया। अब अमित शाह कह रहे हैं कि वो रूल मोदी जी पर लागू नहीं होगा। क्या आप इससे सहमत हैं कि जो रूल आडवाणी जी पर लागू हुआ वो मोदी जी पर लागू नहीं होगा?

स्पोर्ट्स डेस्क : भारत ने पहले टेस्ट में बांग्लादेश को हराया, जडेजा-अश्विन ने समेटा

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भारत और बांग्लादेश के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला टेस्ट टीम इंडिया ने 280 रनों से अपने नाम किया। इस मुकाबले का नतीजा चौथे दिन ही निकला। लंच से पहले बांग्लादेश की टीम 234 रनों पर ढेर हो गई। भारत की तरफ से जीत के नायक रहे आर अश्विन, जिन्होंने दूसरी पारी में 6 विकेट लिए और इस मैच बल्ले से शतक भी लगाया।

भारत ने पहली पारी में अश्विन की शतकीय (113) रन की पारी और रवींद्र जडेजा (86) रन की बदौलत 376 रन का स्कोर बनाया। इसके जवाब में बांग्लादेश की टीम पहली पारी में महज 149 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत की तरफ से पहली पारी में जसप्रीत बुमराह ने सबसे ज्यादा चार विकेट लिए। इस तरह टीम इंडिया को पहली पारी में 149 रनों की लीड मिली थी। दूसरी पारी में भारत ने 287/4 रन पर पारी घोषित कर दी। फिर बांग्लादेश को 515 रन का टारगेट मिला, जिसका पीछा करने में बांग्लादेश की टीम नाकाम रही। चौथे दिन 234 रन बनाकर सिमट गई।

दरअसल, भारत की तरफ से पहली पारी में रविचंद्रन अश्विन ने शतक जमाया। पहले दिन पहली पारी में भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही थी। भारत के तीन विकेट (रोहित, गिल, कोहली) तो 34 रन के स्कोर पर गिर गए थे। पंत ने फिर मैदान पर कदम रखते ही टीम की पारी को संभालने की कोशिश की थी, लेकिन वह भी 39 रन बनाकर चलते बने। इन सभी बैटर्स को हसन महमूद ने अपना शिकार बनाया।

यशस्वी क्रीज पर डटे रहे और उन्होंने आउट होने से पहले 56 रनों की पारी खेली। फिर केएल राहुल 16 रन बनाकर आउट हुए। भारत की ओर से अश्विन और जडेजा ने टीम की पारी को संभाला। अश्विन ने 133 गेंदों का सामना करते हुए 11 चौके और 2 छक्कों की मदद से 113 रन की पारी खेली। वहीं, जडेजा के बल्ले से 86 रन निकले।

377 रन का पीछा करते हुए बांग्लादेश की टीम पहली पारी में महज 149 रन पर ऑलआउट हो गई। बांग्लादेश की तरफ से सबसे ज्यादा शाकिब अल हसन (32) रन बनाए। वहीं, भारत की तरफ से जसप्रीत बुमराह ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। बुमराह के अलावा आकाश दीप, जडेजा, मोहम्मद सिराज को दो-दो सफलता मिली।

भारत की तरफ से दूसरी पारी में रोहित शर्मा के रूप में पहला विकेट गिरा। रोहित 5 रन बनाकर जाकिर हसन को कैच थमा बैठे। यशस्वी भी इसके बाद आउट हो गए। भारत को 67 रन के स्कोर पर तीन झटके लग चुके थे। कोहली 17 रन बनाकर चलते बने।

इसके बाद शुभमन गिल और ऋषभ पंत की जोड़ी ने पारी को संभाला। दोनों के बीच चौथे विकेट के विए 167 रनों की साझेदारी हुई। पंत ने 128 गेंदों पर 109 रन बनाए, जिसमें 13 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। यह पंत के टेस्ट करियर का छठा शतक रहा। पंत के आउट होने के बाद गिल ने अपना शतक पूरा किया। गिल ने 119 रन की नाबाद पारी खेली। इसके बाद भारत ने अपनी पारी 287 रन पर घोषित कर दी। इसके बाद 555 रन का टारगेट का पीछा करते हुए बांग्लादेश की टीम दूसरी पारी में 234 रन पर सिमट गई। नजमुल हुसैन शांतो ने 82 रन बनाए। भारत की तरफ से अश्विन ने 6 विकेट लिए, जबकि जडेजा को तीन सफलता मिली।

ट्रेन को फिर डीरेल करने का प्रयास, ट्रैक पर रखा था सिलेंडर

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 एक के बाद एक ट्रेनों को पलटाने की साजिश के मामले सामने आ रहे हैं। शनिवार सुबह कानपुर में मालगाड़ी को पलटाने का प्रयास किया गया। मालगाड़ी कानपुर से प्रयागरात की ओर जा रही थी। जैसे ही प्रेमपुर स्टेशन पर लूप लाइन पर पहुंची थी कि गाड़ी के लोको पायल देव आनंद गुप्ता और सहायक लोको पायलट सीसीब सिंह ने ट्रैक पर सिलेंडर रखा देखा।

ट्रैक पर सिग्नल से कुछ पहले सिलेंडर को रखा गया था। उन्होंने आनन फानन इमरजेंसी ब्रेक लगाकर गाड़ी को सिलेंडर से पहले ही रोक लिया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। सूचना पर रेलवे आईओडब्लू, सुरक्षा बलों सहित अन्य टीमें मौके पर पहुंची हैं। सिलेंडर की जांचकर ट्रैक से हटाया गया है।

घटना प्रेमपुर स्टेशन पर सुबह 5:50 की है। इस सिलेंडर की जांच करने पर पता चला कि यह एक पांच लीटर का खाली सिलेंडर है, जोकि ट्रैक पर सिग्नल के थोड़ा पहले रखा हुआ था। इस घटना की जांच के निर्देश दिए गए हैं। मौके पर कई आलाअधिकारी मौजूद हैं।a

उत्तराखंड : यहां सुबह-सुबह गंगा में बह गए दो युवक

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ऋषिकेश: ऋषिकेश से सुबह-सुबह फिर बुरी खबर आई है। पिछले कुछ दिनों से लगातार गंगा में बहने की खबरें सामने आ रही हैं। दिल्ली से आए दो युवक गंगा के तेज बहाव में बह गए। SDRF की टीम ने सर्च अभियान चलाया, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लगा है।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली के पांच दोस्त आकाश, संदीप, सचिन निवासी कल्याण कैम्प दिल्ली, राजीव चौधरी निवासी साकेत दिल्ली और महेश निवासी शक्ति विहार मीठापुर दिल्ली ऋषिकेश घूमने आए थे। सुबह सभी युवक शिवपुरी में गंगा में नहाने गए थे।

इस दौरान आकाश (23) और संदीप (23) नहाते समय अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गए और बह गए। इससे पहले युवक कुछ समझ पाते वह आंखों से ओझल हा गए। युवकों ने तुरंत SDRF और पुलिस को इसकी सूचना दी। SDRF ने युवकों की तलाश शुरू की। हालांकि, उनका अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है।

नंदकिशोर नौटियाल जी जैसे व्यक्तित्व कभी मरते नहीं, बल्कि सदा अमर रहते हैं : किशन शर्मा

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कुछ ऐसे लोग भी संसार में हुए हैं, जिनका जन्मदिन चार वर्ष में केवल एक बार ही मनाया जाता रहा है, परंतु पंडित नंदकिशोर नौटियाल जी एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनका जन्मदिन कम से कम मुझ जैसे कुछ लोग तो हर वर्ष दो बार मनाया करते थे। 15 जून को स्कूल के प्रमाण पत्र में लिखी जन्मतिथि के अनुसार और 21 सितम्बर को उनकी वास्तविक जन्मतिथि के अनुसार। 2019 की 21 सितम्बर ऐसी तिथि आई है, जब पंडित नंदकिशोर नौटियाल जी का जन्मदिवस उनकी शारीरिक अनुपस्थिति में प्रणाम करते हुए मनाना पड़ा।

यह पहला अवसर था जब 21 सितम्बर को सुबह सवेरे फ़ोन पर उनको जन्मदिन की बधाई नहीं दे पाया। तब से उनको उनके दूसरे जन्मदिन पर याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करा हूं। 30 अगस्त 2019 को देहरादून में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया था। 89 वर्ष की आयु में भी युवाओं जैसा उत्साह रखते थे नौटियाल साहब। पहाडी व्यक्तित्व में बहुत जोश भरा रहता थ। हमेशा मुस्कुराते हुए मिलते थे।

आंखों में स्नेह की चमक दिखाई देती थी। मैं उन्हें, और वो मुझे नाम से तो जानते थे, परंतु हमारी पहली भेंट मुम्बई में मुख्मंत्री निवास ”वर्षा” में तब हुई थी, जब वे मुख्यमंत्री से मिलकर बाहर निकले और मुझे भीतर बुलाया गया। एक लम्बे साक्षात्कार के लिये। वे मुख्यमंत्री कक्ष से बाहर आकर मेरी तरफ़ देख कर बोले, “अच्छा, तो तुम किशन शर्मा हो।

तुम्हारी लोकप्रियता से तो मुझे लगा था कि मेरी जैसी उम्र के व्यक्ति होगे, परंतु तुम तो मेरे बेटे की उम्र के हो। मिलो बाद में मुझसे”। और मेरे सिर पर हाथ रखकर उन्होंने आशीर्वाद दिया। मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि बाद में मुझे उनके साथ ही महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी में सेवा करने का अवसर मिल जायेगा। सरकार ने मुझे अकादमी के सदस्य के रूप में नियुक्त कर दिया था।

थोडे ही समय में वे मेरे कार्य, विचारों, और अनुशासनात्मक कार्य पद्धति से बहुत प्रभावित हो गए और मुझे अपने निकटतम व्यक्तियों की सूची में उन्होंने शामिल कर लिया। फ़िर अक्सर ही चर्चगेट स्टेशन के पास “टी सेंटर” में, या खार के “क्लब” में चाय-नाश्ते पर नौटियाल साहब, विश्वनाथ सचदेव जी, डॉ. कन्हैया लाल नंदन जी, राजू भाई पटेल जी जैसे विख्यात व्यक्तित्वों से भेंट होने लगी।

अकादमी के अगले सत्र में मुझे पुरस्कार समिति का प्रमुख बना दिया गया और अकादमी का कार्यालयीन सचिव भी बना दिया गया। अकादमी के कार्यालय में उस दौरान भीड लगी रहती थी। स्वयं मुख्यमंत्री जी भी आ जाया करते थे। माननीय विलास राव देशमुख साहब, माननीय सुशील कुमार शिंदे साहब और माननीय अशोक चव्हाण साहब मुख्यमंत्री होते हुए, अकादमी के अध्यक्ष भी रहे। मंत्रालय से विभाग के प्रधान सचिव भी समय-समय पर आते रहते थे। उप सचिव तो अकादमी के कार्यालय में ही बैठा करती थीं। हर समय चहल-पहल बनी रहती थी।

साढे तीन-चार बजे के आसपास नौटियाल साहब मुझसे कहते थे, “अरे भाई, कुछ खिलाओ-पिलाओ”; और फ़िर सभी के लिये कुछ खाद्य पदार्थ और चाय पास के ही उपहार गृह से मंगवा लिये जाते थे। यह नौटियाल जी का ही असर था कि किसी भी मुख्यमंत्री महोदय ने कभी अकादमी के किसी प्रस्ताव को अस्वीकार नहीं किया और केवल कुछ हज़ार रुपयों से बढकर पुरस्कारों की राशि लाखों रुपयों तक हो गई।

नौटियाल जी छोटे पैमाने का कोई कार्य नहीं करते थे। इसलिये अकादमी के बडे-बडे सम्मेलन महाराष्ट्र के अनेक नगरों में आयोजित करवा दिये। विश्व भाषा सम्मेलन का प्रस्ताव उस समय के सदस्य सचिव डॉ. केशव फ़ालके जी ने रखा था, और नौटियाल जी ने उसे भव्य स्तर पर पुणे में आयोजित करवा दिया।

विश्व हिंदी सम्मेलन के लिये अकादमी की ओर से नौटियाल जी के नेतृत्व में पांच सदस्यों का दल हर सम्मेलन में विश्व के उन उन राष्ट्रों में भेजा गया, जहां जहां सम्मेलन आयोजित हुए। मुझे हर बार कहा गया, परंतु मैं कभी ऐसे सम्मेलनों में नहीं गया। मेरा निवेदन रहता था कि मैं तो अपने मंच कार्यक्रमों के सिलसिले में विश्व भर में घूमता ही रहता हूं, इसलिये मेरे स्थान पर ऐसे हिंदी सेवियों-विद्वानों को भेजा जाये जो कभी विदेश नहीं गये, या बहुत अधिक बार विदेश नहीं गये। मैंने नौटियाल जी के मार्गदर्शन में पुरस्कार वितरण समारोह का स्वरूप ही बदल डाला ।

विशाल सभागृह में आयोजन, शाम पांच बजे स्वादिष्ट नाश्ता और गर्म चाय, शाम ठीक छः बजे से रात नौ बजे तक पुरस्कार वितरण, और साढे नौ बजे स्वादिष्ट भोजन। पूरा सभागार लोगों से भरा रहता था। पुरस्कृत विद्वानों को वातानुकूलित स्वतंत्र कक्षों में सुविधापूर्वक ठहराना, आने-जाने का वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी का रेल किराया, महिला पुरस्कार विजेताओं को दो व्यक्तियों का किराया, अखिल भारतीय पुरस्कार विजेताओं को दो व्यक्तियों का हवाई यात्रा का किराया, सभी को टैक्सी आदि का तथा रास्ते का खर्च, पुरस्कार स्थल पर ही नकद प्रदान कर दिया जाता था। पुरस्कारों की राशि भी लाखों रुपये कर दी गई। देश भर से विद्वानों को इन पुरस्कारों के लिये चुना जाता था।

अकादमी ने कभी-कभी कुछ करोड रुपये भी सम्मेलनों पर खर्च कर दिये। नौटियाल जी के प्रभाव के कारण कभी भी किसी ने भी कोई आनाकानी नहीं की, विरोध नहीं किया, और अस्वीकृत भी नहीं किया। मैं, डॉ. केशव फ़ालके जी, अनुराग त्रिपाठी जी, तथा अन्य सभी मित्रवर्ग एकजुट होकर सेवा करते थे। जब नौटियाल जी ने “नूतन सवेरा” का प्रकाशन शुरू किया, तब मुझे हर अंक में एक लेख लिखने के लिये प्रोत्साहित किया। मैं नूतन सवेरा के लिये लगातार लिख रहा। मुझे नौटियाल जी ने पिता तुल्य स्नेह प्रदान किया। परिवार के हर समारोह में मुझे विशिष्ट कार्य सौंप दिये जाते थे। यहां तक कि जब राजीव नौटियाल को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ, तो नौटियाल जी के साथ मैं कहीं यात्रा कर रहा था ।

नौटियाल जी ने मुझसे ही पूछा कि उसका नाम क्या रखा जाये। मैंने “प्रवेश” नाम सुझाया और उन्होंने तुरंत वही नाम दे दिया अपने पौत्र को। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष चुने जाने पर नौटियाल जी ने मुझे वहां का सांस्कृतिक सचिव बना दिया और मैं उनके साथ अनेक बार चार धाम की महत्वपूर्ण यात्राएं कर आया। बडे-बडे पत्रकारों और साहित्यकारों के अलावा बडे-बडे नेताओं, अधिकारियों और उद्योगपतियों से भी अपने साथ मुझे मिलने का अवसर प्रदान करते रहे नौटियाल जी। द्वारका और ज्योतिष्मठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती महाराज से मेरी बहुत अधिक निकटता नौटियाल जी के ही कारण हो सकी।

नौटियाल जी के छोटे पुत्र भरत के विवाह समारोह में भी मुझे विशेष महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में शामिल किया गया। नौटियाल जी को मैंने कभी भी नाराज़ होते या अशोभनीय भाषा का प्रयोग करते हुए नहीं देखा। वे स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कह देते थे और फ़िर मुस्कुरा देते थे। मैं जब भी किसी बात पर किसी व्यक्ति से क्रोधित हो जाता था तो वे मुझे समझाया करते थे और शांत कर दिया करते थे। बुद्धिनाथ मिश्र जी, प्रोफ़ेसर डी. तंकप्पन नायर जी, सुशीला गुप्ता जी, डॉ. बाल शौरी रैड्डी जी, डॉ. राजम पिल्लै, डॉ. महावीर अधिकारी जी जैसे व्यक्तित्वों से मेरी विशेष भेंट नौटियाल जी ने ही करवाई थी ।

डॉ. धर्मवीर भारती जी, पुष्पा भारती जी, मनोहर श्याम जोशी जी, खुशवंत सिंह जी, डॉ. कर्णसिंह जी और डॉ. हरिकृष्ण देवसरे जी आदि से मेरी पहचान पहले से ही थी, क्योंकि मेरे लेख इनके द्वारा संपादित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते थे। मुझे एक बात का दुख हमेशा रहेगा। नौटियाल साहब ने अपने जीवन में अनेक व्यक्तित्वों को अनेक पुरस्कार प्रदान किये और करवाए, परंतु महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी सहित किसी भी संस्था या विभिन्न पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्थाओं और उनसे जुडे व्यक्तियों ने कभी नौटियाल साहब को सम्मानित करने के बारे में सोचा भी नहीं। अब इस बारे में सोचना भी ठीक नहीं लगता। नौटियाल साहब भले ही शारीरिक रूप से मुझसे बिछुड गये हैं, परंतु मेरे मन-मस्तिष्क में वे सदा विराजमान रहेंगे, क्योंकि ऐसे व्यक्तित्व कभी मरते नहीं, बल्कि सदा अमर रहते हैं।

  • किशन शर्मा

आतिशी बनीं दिल्ली की 8वीं मुख्यमंत्री, LG ने 5 मंत्रियों को भी दिलाई शपथ

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दिल्ली को नया मुख्यमत्री मिल गया है। अरविन्द केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आए आदमी पार्टी नेता आतिशी (Atishi) नें सीम पड़ की शपथ की। आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने आज राज्य के तीसरे महिला सीएम के रूप में शपथ ली। उनके साथ गोपाल राय, कैलाश गहलोत, सौरभ भारद्वाज और इमरान हुसैन के अलावा कैबिनेट के नए चेहरे के रूप में सुल्तानपुर माजरा के विधायक मुकेश कुमार अहावलत ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।

दिल्ली में गोपाल राय, कैलाश गहलोत, सौरभ भारद्वाज और इमरान हुसैन कैबिनेट मंत्री की शपथ ली। मुकेश अहलावत भी कैबिनेट मंत्री की शपथ ली। मुकेश अहलावत सुल्तानपुरी से विधायक हैं। यह अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। यह राजकुमार आनंद की जगह लेंगे। बता दें कि दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री सहित कुल छह मंत्री होते हैं। अभी मुख्यमंत्री के साथ पांच मंत्री शपथ ली है।

आतिशी का राजनीतिक सफर

  1. साल 2013 में उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली।
  2. साल 2015 में उन्होंने मध्य प्रदेश में चलाए गए जल सत्याग्रह में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
  3. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी नेता गौतम गंभीर से चार लाख वोटों से हार गईं।
  4. 2020 में विधानसभा चुनाव में कालकाजी से बीजेपी नेता को 11 हजार से अधिक मतों के साथ हराया।

दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले मनोनीत सीएम और आम आदमी पार्टी (आप) नेता आतिशी ने प्रस्तावित मंत्रियों के साथ अरविंद केजरीवाल से मिलने उनके घर पहुंची। यहां वह उनसे मुलाकात की। बैठक के बाद आतिशी और अन्य मंत्री पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ ‘राजनिवास’ के लिए निकल गए। आतिशी अन्य मंत्रियों के साथ आज राजनिवास में शपथ लेंगी।

शपथ ग्रहण से पहले आप नेता गोपाल राय ने कहा कि जनता के लिए काम करना हमारी प्राथमिकता है और दिल्ली की जनता ने हमें काम करने के लिए चुना है। सरकार में बदलाव विशेष परिस्थितियों के कारण हुआ है और उसे देखते हुए हमारा लक्ष्य इन बचे हुए महीनों में लंबित कामों को आगे बढ़ाना है।

आप नेता दिलीप पांडे ने कहा- पूरी दिल्ली और देश ने देखा कि कैसे भाजपा ने आम आदमी पार्टी को तोड़ने के इरादे से ईडी, सीबीआई जैसी संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करके आम आदमी पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार किया। भाजपा ने दिल्ली की जनता से बदला लेने का फैसला किया था, क्योंकि उन्होंने तीन बार उन्हें नकार दिया था। भाजपा को आप और आप नेताओं से दुश्मनी थी। अदालतों और देश के संविधान का शुक्रिया कि हमें राहत मिली और भाजपा को करारा तमाचा मिला।

मुख्यमंत्री ने पूर्व DGP अनिल रतूड़ी की पुस्तक ‘‘खाकी में स्थितप्रज्ञ’’ का किया विमोचन

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को सर्वे चौक, देहरादून स्थित आई.आर.डी.टी सभागार में उत्तराखण्ड के पूर्व पुलिस महानिदेशक  अनिल रतूड़ी द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘खाकी में स्थितप्रज्ञ’’ का विमोचन किया। अनिल रतूड़ी ने यह पुस्तक एक आईपीएस अधिकारी के रूप में अपने संस्मरण एवं अनुभव के आधार पर लिखी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्री अनिल रतूड़ी द्वारा इस पुस्तक के माध्यम से एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने सेवाकाल के संस्मरणो, अनुभवों और चुनौतियों को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता दोनों में एक समान रहना स्थितप्रज्ञ है। यह पुस्तक सेवा में आ रहे लोगों को निर्णय लेने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हमें एहसास होता है कि धरा पर कोई हमारा साथ देने वाला नहीं, तब हम धरातल से ऊपर उठकर सीधे प्रभु से संबंध वाली स्थिति में आते हैं, यह भी स्थितप्रज्ञ है। ऐसा प्रभु की कृपा से ही संभव है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिल रतूड़ी ने एक सफल और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्य किया। रतूड़ी दंपति ने अपने कार्यों और व्यवहार से उत्तराखण्ड में ही नहीं बल्कि देश में अपना एक विशेष स्थान बनाया। दोनों ने साधारण रहते हुए जनहित में असाधारण कार्य कर अपनी अलग साख बनाई। अपने सेवाकाल के दौरान श्री अनिल रतूड़ी ने अनेक बार कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर समस्याओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य में कर्म करते हुए अपने मन को शांत रखते हुए लक्ष्य प्राप्त करने का गुण होना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस के पास शांति और कानून व्यवस्था को बनाए रखने की बड़ी चुनौती होती है। हर चुनौती का सामना करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ संयम का होना भी जरूरी होता है। यह एक ऐसी यात्रा है जिसमें अनेक उतार-चढ़ाव और चुनौतियां आती हैं, इसमें विपरीत परिस्थितयों में नैतिकता और धैर्य बनाये रखना जरूरी है। आज पुलिस के पास आधुनिक तकनीक है। पहले सीमित संसाधन होते हुए भी पुलिस को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।

‘‘खाकी में स्थितप्रज्ञ’’ पुस्तक के लेखक अनिल रतूड़ी ने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने पुलिस अधिकारी के रूप में साढ़े तीन दशक के अनुभव के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण संस्मरणों, अनुभवों और चुनौतियों का वर्णन करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि शांति और कानून व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस को जो शक्तियां दी गई हैं, मानव कल्याण के लिए उनका सदुपयोग करना आवश्यक है।

इस पुस्तक के माध्यम से यह प्रयास किया गया है कि हमारे नये अधिकारी कैसे चुनौतियों का सामना कर धैर्य से अपने कार्यपथ पर आगे बढ़ें और अपनी जिम्मेदारियों का पूरी कर्तव्यनिष्ठा और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर पूरा कर सकें। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य कि सफलता में केवल एक व्यक्ति की भूमिका नहीं होती है, उसमें अनेक लोगों का योगदान होता है।

कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि ऐसी धारणा होती है कि अगर वर्दी है तो स्थितप्रज्ञ नहीं हो सकता है और अगर स्थितप्रज्ञ जो है वो वर्दी नहीं पहन सकता है। अनिल रतूड़ी ने इस मिथक को अपने जीवन के प्रेरणादायी यात्रा से तोड़ा है कि वर्दी में स्थितप्रज्ञ रहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि श्री अनिल रतूड़ी के लेखन शैली में में टी.एस. इलियट का प्रभाव दिखता है। सुख, दुःख, जोश में और अपने उतार-चढ़ाव वाले जीवन में एक तरह व्यवहार करने वाला व्यक्ति स्थितप्रज्ञ है।

उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने बताया है कि एक पुलिस अधिकारी की जिंदगी तलवार की धार की तरह है। चक्रव्यूह के अन्दर आ गये और उसे तोड़ दिया तो भी विजित कहलायेंगे वो जरूरी नहीं है, नहीं तोड़ा तो असफल तो आप कहलायेंगे ही। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मांगलगीत गाया।

 

 

तिरुपति प्रसादम् के लड्डू में मिलावट पर भड़के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, कहा : मंदिरों से हटे सरकारी नियंत्रण

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मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश के जब्बलपुर में पहुंचे ज्योतिर्मण के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तिरुपति मंदिर में प्रसादम् के रूप में दिए जाने वाले लड्डुओं के मिलावट कड़ी प्रतिक्रया दी है। उन्होंने मंदिरों से सरकारी नियंत्रण हटाने की मांग की है। तिरुपति मंदिर के प्रसाद में फिश ऑयल व पशु चर्बी होने के दावे के बाद शंकराचार्य सरकार पर जमकर बरसे।

उन्होंने कहा कि 5 सालों तक अशुद्ध वस्तु से बना प्रसाद मंदिर में जाता रहा, तब सरकार और उसका इंटेलिंजेंस कहां था? उन्होंने कहा कि मंदिरों से सरकारी नियंत्रण नहीं हटाया गया, तो वे कोर्ट जाएंगे. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि सरकार की जगह अगर बड़े मंदिरों का नियंत्रण धर्माचार्यों के पास रहेगा तो इस तरह की गलती नहीं होगी।

शंकराचार्य ने कहा कि तिरुपति में जो घटना घटी है, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। स्वतंत्रता के 77 साल बाद भी हिंदुओं को उनके मंदिरों का नियंत्रण नहीं मिल पाया है। इस घटना के बाद अब विधि विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी और जरुरत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और बड़े मंदिरों से सरकारी नियंत्रण को खत्म करने की मांग की जाएगी।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरनंद का आरोप है कि इस मामले में आंध्र प्रदेश की पूर्व सरकार की साजिश है। वे जानबूझकर हिंदुओं का धर्म भ्रष्ट करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने ऐसा किया। शंकराचार्य ने कहा कि वे इसी घटना के बाद गौ हत्या को खत्म करने के लिए देश भर में एक यात्रा निकाल रहे हैं। जिससे गाय की हत्या करने वाले उसकी चर्बी का इस्तेमाल न करें और न ही उससे नकली घी बनाया जा सकें।

शंकराचार्य ने कहा कि जिस तरीके से तिरुपति देवस्थानम में गड़बड़ी हुई, वही आशंका बद्रीनाथ और केदारनाथ में भी होने की है। क्योंकि यहां पर भी सरकार अपने नियंत्रण के जरिए भर्तियां करने जा रही है। भविष्य में किसकी भर्ती होती है, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता और वह धार्मिक स्थान को कितना समझता है इस पर भी सवाल है।

तिरुपति में लड्डुओं की पवित्रता बहाल, तिरुमाला बोर्ड ने जारी किया बयान

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 तिरुपति बालाजी में श्रीवारी लड्डू प्रसादम यानी प्रसाद में लड्डू फिर से मिलने लगा है. मंदिर ट्रस्ट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिये बताया कि यहां श्रीवारी लड्डू प्रसादम की पवित्रता फिर से बहाल हो गई है.

https://x.com/TTDevasthanams/status/1837179407636836651?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1837179407636836651%7Ctwgr%5E1a504c17b007a7467a0ae532408d4a6e3d561a49%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.abplive.com%2Fnews%2Findia%2Fandhra-pradesh-tirupati-balaji-the-sanctity-of-srivari-laddu-prasadam-is-restored-again-2788095

बता दें कि तिरुपति मंदिर के लड्डू में जानवरों की चर्बी वाले तेल का इस्तेमाल होने का पता चलने के बाद से आंध्र प्रदेश में बवाल मचा हुआ है. यहां टीडीपी और बीजेपी इस अपराध के लिए लगातार जगन मोहन रेड्डी सरकार पर हमले कर रही है.  विवाद बढ़ने के बाद लड्डू के प्रसाद के रूप में वितरण पर रोक लगा दी गई थी.

खतरे की घंटी : मणिपुर में घुसे 900 आतंकवादी, खुफिया रिपोर्ट में बड़ा दावा

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मणिपुर में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। राज्य सरकार से साथ ही केंद्र सरकार भे हिसा से निपटने में अब तक पूरी तरह से असफल रहे हैं। अब खबर है की म्यांमार के करीब 900 आतंकवादी मणिपुर में दाखिल हो गए हैं। वहीं, ये आतंकी राज्य में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं।

खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। मणिपुर सरकार के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह ने भी खुफिया विभाग के दावे पर सहमति जाहिर की है। आतंकवादियों के खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

म्यांमार से सटे पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यह कुकी बहुल इलाका है। जानकारी के मुताबिक, जो आतंकी म्यांमार में दाखिल हुए हैं वो ड्रोन चलाने में भी माहिर हैं। खुफिया विभाग की रिपोर्ट राज्य के सभी SP और पुलिस अधिकारियों को भेज दिया गया है।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि ये आतंकी 30-30 के गुट में राज्यभर में फैलना चाहते हैं। ये आतंकी मैतेई बहुल इलाकों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। रिपोर्ट को लेकर कुलदीप सिंह ने कहा कि यह शत प्रतिशत सही है। उन्होंने कहा कि खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर हमें भरोसा करना चाहिए। मणिपुर में कुछ दिनों की शान्ति के बाद 1 सितंबर के बाद से एक बार फिर हिंसा बढ़ चुकी है।