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मुंबई में कम होते हरित क्षेत्र पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी…

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सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई व नवी मुंबई जैसे शहरों में सिर्फ वर्टिकल विकास हो रहा है। ऐसे शहरों में कुछ ही हरित क्षेत्र बचे हैं, जिन्हें संरक्षित करने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने यह टिप्पणी शहर एवं औद्योगिक विकास निगम (SIDCO), नवी मुंबई की ओर से बांबे हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध दाखिल अपील पर सुनवाई के दौरान की।

हाई कोर्ट ने नवी मुंबई में एक सरकारी खेल परिसर के लिए 20 एकड़ जमीन छोड़ने और फिर इसे मौजूदा स्थल से 115 किलोमीटर दूर रायगढ़ जिले के मानगांव में एक दूरस्थ स्थान पर स्थानांतरित करने के महाराष्ट्र सरकार के 2021 के फैसले को रद कर दिया था।

यह जमीन 2003 में खेल परिसर के लिए चिह्नित की गई थी और 2016 में योजना प्राधिकरण ने इसका एक हिस्सा आवासीय व वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए एक निजी डेवलपर को आवंटित कर दिया था। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह एक बहुत ही प्रचलित चलन है, जो भी हरित क्षेत्र बचा है, सरकार उसका अतिक्रमण करके बिल्डरों को दे देती है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आपको उन्हें संरक्षित करना होगा और बिल्डरों को निर्माण, निर्माण और निर्माण करने के लिए मत दीजिए।’ पीठ सवाल किया कि खेल परिसर की सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए 115 किलोमीटर की यात्रा कौन करेगा, कुछ वर्षों के बाद उस जमीन का भी यही हश्र होगा। पीठ ने हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा कि ऐसे हालात में स्वर्ण पदक विजेता कैसे उभरेंगे? मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

उत्तराखंड : जल्द आएगा अब तक का सबसे कड़ा भू-कानून, मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भू-कानून को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार अगले बजट सत्र तक देश का सबसे कड़ा भू-कानून लाने जा रही है। इसके अलावा भी उन्होंने कई अन्य बातें भी कही। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकारों को संबोधित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में उत्तराखण्ड में नगर निकाय क्षेत्र से बाहर ढाई सौ वर्ग मीटर भूमि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति खरीद सकता है, परंतु ऐसा संज्ञान में आया है कि एक ही परिवार में अलग-अलग नामों से भूमि क्रय करके उक्त प्राविधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम इसकी जांच करायेंगे और जिन भी व्यक्तियों ने ऐसा किया है उनकी भूमि राज्य सरकार में निहित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जिन भी व्यक्तियों ने पर्यटन, उद्योग आदि व्यवसायिक गतिविधियों के लिए अनुमति लेकर भूमि क्रय की है, परंतु उस भूमि का उपयोग इस प्रयोजन हेतु नहीं किया, ऐसी जमीनों का विवरण तैयार करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के विरुद्ध भी सख्त कार्यवाही की जायेगी और उनकी जमीनें राज्य सरकार में निहित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी संज्ञान में आया है कि भूमि क्रय संबंधी नियमों में वर्ष 2017 में जो बदलाव किए गए थे, उनका परिणाम सकारात्मक नहीं रहा है। (जैसे 12.5 एकड़ की अधिकतम सीमा को खत्म कर देना, जो अनुमति शासन स्तर पर मिलती थी उसके लिए जिले के अधिकारियों को अधिकृत कर देना आदि)। उन्होंने कहा कि ऐसे प्राविधानों की समीक्षा की जायेगी और आवश्यक हुआ तो इन प्राविधानों को समाप्त कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बचाने के उद्देश्य से उठाए जा रहे इन कदमों से किसी भी ऐसे व्यक्ति या संस्थाओं को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, जिनके निवेश से उत्तराखंड में पर्यटन, शिक्षा, उद्योग, व्यापार आदि विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन होता है तथा अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार भू कानून एवं मूल निवास के मुद्दे को लेकर संवदेनशील है और हम अगले बजट सत्र में उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप एक वृहद भू कानून लाने हेतु प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मार्च 2021 से अब तक लंबे समय से चले आ रहे विभिन्न मामलों का निस्तारण हमारी सरकार ने ही किया है, उसी प्रकार मैं, उत्तराखंड की जनता को यह विश्वास दिलाता हूं कि भू कानून के मुद्दे का समाधान भी हमारी सरकार ही करेगी।

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उत्तराखंड: रेलवे स्टेशन मामले में नहीं थमा विवाद, पुलिस हिरासत में हिंदूवादी संगठन का नेता, बढ़ा तनाव

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देहरादून: कल देर रात को मुस्लिम लड़की के अपने दोस्त से देहरादून मिलने पहुंचने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में पुलिस ने रात को ही 30 से अधिक नामजद और करीब 150 लोगों के खिलाफ अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया था।

इस मामले में हिंदूवादी संगठन के नेता को हिरासत में लेने के बाद तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। लोगों ने हिरासत के विरोध में पलटन बाजार को बंद कराने के बाद घंटाघर पर जाम लगा दिया। व्यापारियों ने यहां घंटाघट पर हनुमान चालीसा पाठ शुरू कर दिया।

रेलवे स्टेशन के बाहर हुए हंगामे और तोड़फोड़ में विकास वर्मा सहित 30 से 35 नामज़द और 150 अज्ञात के ख़िलाफ़ कोतवाली मुकदमा दर्ज कराया गया है। हिंदू लड़के से मिलने पहुंची मुस्लिम किशोरी के दून पहुंचने पर रेलवे स्टेशन में रात को बवाल हो गया था।

दो समुदाय के लोग आपस में भिड़ गए। इससे पूर्व एक पक्ष ने जमकर हंगामा किया था। पथराव में पुलिस की गाड़ी समेत आम लोगों की भी कई गाड़ियां टूट गईं। घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है और कई लोगों को चोटें आई हैं। पुलिस ने लाठियां फटकार कर स्थिति को संभाला।

CM धामी कार गार्बेज इको फ्रेंडली बैग वितरण अभियान का शुभारंभ

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर स्वच्छता ही सेवा के तहत कार गार्बेज इको फ्रेंडली बैग वितरण अभियान का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत यह एक अच्छी मुहिम चलाई गई है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के प्रति जन जागरण का काम निरंतर चलते रहना चाहिए। उन्होंने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इससे लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता आएगी।

उन्होंने कहा कि यह देखने में आता है कि लोग कार में बैठने के बाद खानपान की वस्तुओं के रैपर, प्लाटिक वेस्ट इत्यादि को सड़क पर यूं ही फेंक देते हैं। उन्होंने कहा कि कार में गारबेज बैग रखकर कूड़ा एकत्र करने से लोगों में इसे कूडेदान में ही डालने की अच्छी आदत पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य में हर क्षेत्र में तेजी से कार्य किये जा रहे हैं। इस दशक को उत्तराखण्ड का दशक बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं।

स्वच्छता के क्षेत्र में भी उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं। आज बहुत से क्षेत्रों में उत्तराखण्ड अग्रणी राज्यों की श्रेणी में है। नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्यों की रैंकिंग में राज्य को प्रथम स्थान मिला है। राज्य में बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत घटी है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। पर्यटन देवभूमि उत्तराखण्ड की आर्थिकी को बढ़ावा देने के लिए मजबूत आधार है। पर्यटन प्रदेश के रूप में उत्तराखण्ड की देश और दुनिया में एक अलग पहचान है।

अरुणाचल में चोटी को दलाई लामा का नाम देने पर बौखलाया चीन

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नई दिल्ली: चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश पर अधिकार जमाने की कोशिश की है। भारतीय पवर्ताराहियों ने  अरुणाचल प्रदेश के एक पर्वत का नाम छठे दलाई लामा के नाम पर रखा तो चीन आग बबूला हो उठा। चीन ने इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स (NIMAS) की एक टीम ने अरुणाचल प्रदेश में 20,942 फीट ऊंची एक अनाम चोटी पर चढ़ाई की थी और इसे छठे दलाई लामा त्सांगयांग ग्यात्सो के नाम पर रखने का फैसला लिया। NIMAS रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है।

रक्षा मंत्रालय के एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा,”छठे दलाई लामा के नाम पर पहाड़ी का नाम रखना उनकी अमर बुद्धिमत्ता और मोनपा समुदाय के प्रति उनके गहरे योगदान को सम्मानित करने के लिए है।

त्सांग ग्यात्सो का जन्म 1682 में मोन तवांग क्षेत्र में हुआ था। दलाई लामा रिग्जेन त्सांगयांग ग्यात्सो ने अरुणाचल प्रदेश के मोनपा समुदाय (Monpa community) के लिए काफी योगदान दिया है, जो पूर्वोत्तर भारत की एकमात्र खानाबदोश जनजाति है।

जब इस मामले पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, आप किस बारे में बात कर रहे मुझे इसकी जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा,”मुझे कहना चाहिए कि जंगनान (भारत का अरुणाचल प्रदेश) चीनी क्षेत्र है और भारत के लिए चीनी क्षेत्र में ‘अरुणाचल प्रदेश’ स्थापित करना अवैध है। वहीं, भारत लगातार चीन के दावों को निराधार बताता आया है। भारत ने कई बार साफ लफ्जों में कहा है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न अंग है। इससे पहले पीएम मोदी के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर चीन ने आपत्ति जाहिर की थी। अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों का चीन ने नाम बदला है।

सरकार ने बढ़ाया Minimum Wages, पढ़ें किसके हाथ आएगी कितनी सैलरी

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केंद्र सरकार ने परिवर्तनीय महंगाई भत्ते (वीडीए) में संशोधन करके असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की मजदूरी में बढ़ोतरी की गई है। श्रमिकों के जीवन-यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए सरकार ने यह फैसला किया है। नई मजदूरी दरें एक अक्टूबर, 2024 से प्रभावी होंगी।

केंद्रीय क्षेत्र के प्रतिष्ठानों के अंतर्गत भवन-निर्माण, लोडिंग-अनलोडिंग, स्वीपिंग, क्लीनिंग, हाउसकीपिंग, खनन और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को इसका लाभ मिलेगा।

न्यूनतम मजदूरी दरों को कौशल स्तर – अकुशल, अर्ध-कुशल, कुशल और उच्च कुशल – के साथ-साथ भौगोलिक लेवल – ए, बी और सी के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।

निर्माण, झाड़ू लगाने, सफाई, लोडिंग एवं अनलोडिंग में अकुशल कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर 783 रुपये प्रतिदिन (20,358 रुपये प्रतिमाह) किए गए।

अर्ध-कुशल, लेवल ‘बी’

अर्द्धकुशल के लिए 868 रुपये प्रतिदिन (22,568 रुपये प्रतिमाह), कुशल, लिपिकीय एवं शस्त्र रहित चौकीदारों के लिए 954 रुपये प्रतिदिन (24,804 रुपये प्रतिमाह) किए गए।

उच्च कुशल, लेवल ‘सी’

शस्त्र सहित चौकीदारों के लिए 1,035 रुपये प्रतिदिन (26,910 रुपये प्रतिमाह) होगी।

अकुशल,  लेवल ‘ए’

निर्माण, झाड़ू लगाने, सफाई, लोडिंग एवं अनलोडिंग में अकुशल कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर 783 रुपये प्रतिदिन (20,358 रुपये प्रतिमाह) किए गए।

अर्ध-कुशल, लेवल ‘बी’

अर्द्धकुशल के लिए 868 रुपये प्रतिदिन (22,568 रुपये प्रतिमाह), कुशल, लिपिकीय एवं शस्त्र रहित चौकीदारों के लिए 954 रुपये प्रतिदिन (24,804 रुपये प्रतिमाह) किए गए।

उच्च कुशल, लेवल ‘सी’

शस्त्र सहित चौकीदारों के लिए 1,035 रुपये प्रतिदिन (26,910 रुपये प्रतिमाह) होगी।

अब मैसेज में नहीं आएंगे अनचाहे और गलत लिंक, इस दिन से हो जाएंगे बंद

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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) 1 अक्टूबर से फोन मैसेज में यूआरएल से संबंधित अपने निर्देशों को लागू करने जा रहा है। इसका मतलब है कि अब मैसेज में केवल अनुमति प्राप्त प्रेषक ही यूआरएल, एपीके (एंड्रॉइड पैकेज किट), या ओटीटी (ओवर द टॉप) लिंक भेज पाएंगे। ट्राई की इस पहल का उद्देश्य सुरक्षित संचार प्रणाली को बढ़ावा देना है ताकि उपभोक्ताओं को गलत और अनचाहे लिंक संदेशों से बचाया जा सके।

ट्राई ने 20 अगस्त को सभी एक्सेस प्रदाताओं को इटलिस्टेड के बाहर यूआरएल, एपीके (एंड्रॉइड पैकेज किट) या ओटीटी (ओवर द टॉप) लिंक वाले किसी भी ट्रैफ़िक को ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया था।

ट्राई ने ट्राई पंजीकृत प्रेषकों को यूआरएल वाले एसएमएस ट्रैफिक के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए अपने श्वेतसूची वाले लिंक को संबंधित एक्सेस प्रदाताओं के पोर्टल पर तुरंत अपलोड करने की सलाह दी है। अब तक 3 हजार से अधिक पंजीकृत प्रेषकों ने 70 हजार से अधिक लिंक को श्वेतसूची में डालकर निर्देश का अनुपालन किया है।

वहीं, जो प्रेषक नियत तिथि तक अपने लिंक को श्वेत सूची में डालने में विफल रहेगा वे लिंक वाले किसी भी मैसेज को प्रसारित नहीं कर पायेगा। ट्राई की यह पहल उपभोक्ताओं को दुर्भावनापूर्ण लिंक वाले अनचाहे संदेशों से बचाने के लिए बनाई गई है, साथ ही एक पारदर्शी और सुरक्षित संचार प्रणाली को प्रोत्साहन देती है। इन नए नियमों का पालन करके, एक्सेस प्रदाता और पंजीकृत प्रेषक दोनों ही अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित संदेश वातावरण बनाने में सहायता कर सकते हैं।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद बना रही फिल्म रिसोर्स की डायरेक्ट्री, ये होगा फायदा

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उत्तराखंड फ़िल्म विकास परिषद द्वारा फ़िल्म जगत के लिए एक महत्त्वपूर्ण पहल के तहत फ़िल्म रिसोर्स डायरेक्ट्री का निर्माण किया जा रहा है। इस संबंध में परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि यह डायरेक्ट्री उत्तराखंड फ़िल्म नीति 2024 के अंतर्गत तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य राज्य के फ़िल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न प्रतिभाशाली व्यक्तियों और संस्थानों की जानकारी को एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है।

इस फ़िल्म रिसोर्स डायरेक्ट्री में फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, अभिनेत्री, संगीतकार, कोरियोग्राफर, गीतकार, लेखक, कैमरामैन, फोटोग्राफर, तकनीशियन, स्पॉट बॉय, फ़िल्म प्रोडक्शन हाउस, स्टूडियो मालिक और लाइन प्रोड्यूसर जैसी हस्तियों और संस्थानों की विस्तृत जानकारी को संकलित किया जा रहा है। इस उद्देश्य के लिए एक गूगल फॉर्म भी तैयार किया गया है, जिसमें फ़िल्म से जुड़ी सभी प्रतिभाओं से उनकी आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा रही है। इच्छुक व्यक्तियों और संस्थानों से अनुरोध है कि वे 31 अक्टूबर 2024 तक नीचे दिए गए  QR कोड या इस लिंक  https%@@tinyurl-com@UFDC&Resource&Directory  के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण करें।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड की नई फ़िल्म नीति से आकर्षित होकर देश-विदेश के कई फ़िल्म निर्माता और निर्देशक यहाँ आ रहे हैं। इस फ़िल्म रिसोर्स डायरेक्ट्री के निर्माण से स्थानीय फ़िल्म विधा से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यह डायरेक्ट्री उत्तराखंड फ़िल्म विकास परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि देश-विदेश से आने वाले फ़िल्म निर्माता और निर्देशक स्थानीय प्रतिभाओं की जानकारी प्राप्त कर उन्हें अपनी आगामी फ़िल्मों में अवसर प्रदान कर सकें।

तिवारी ने जानकारी दी कि अब तक 118 व्यक्तियों और संस्थाओं ने इस फ़ार्म के माध्यम से अपनी जानकारी पंजीकृत कराई है। यह लिंक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। फ़िल्म उद्योग से जुड़े सभी लोगों से तिवारी ने आग्रह किया है कि वे इस महत्त्वपूर्ण फ़िल्म रिसोर्स डायरेक्ट्री में अपनी जानकारी अवश्य पंजीकृत कराएँ। अधिक जानकारी के लिए उत्तराखंड सूचना विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.uttarainformation.gov.in या ईमेल  ufdcfilm@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

’फ़िल्म विधा से जुड़े सभी लोगों से अपील’ 
बंशीधर तिवारी ने फ़िल्म जगत से जुड़े सभी लोगों से अपील की है कि वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएँ और उत्तराखंड की समृद्ध फ़िल्म संस्कृति को बढ़ावा देने में अपना सहयोग दें।

देहरादून रेलवे स्टेशन पर रात को हुआ बवाल, जमकर पथराव, कई वाहनों में तोड़फोड़

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देहरादून रेलवे स्टेशन पर हिन्दू व मुस्लिम संगठन आमने सामने आ गए। मामला इतना बढ़ गया कि पथराव शुरू हो गया। बदायूं उत्तर प्रदेश से आई मुस्लिम समुदाय की लड़की हिंदू लड़के के साथ आई थी। दोनों शादी करना चाहते थे। लेकिन, रेलवे पुलिस ने दोनों से पूछताछ करने पर जब सही जवाब नहीं दिया गया, तो दोनों को अपने पास बिठा लिया।

इस बीच हिंदूवादी और मुस्लिम संगठनों के लोग भी वहां पहुंच गए। विवाद के साथ ही कुछ देर बाद पथराव शुरू हो गया। मामला इतना बढ़ा कि पुलिस को लाठियां फटकारनी पड़ी। इसके बाद स्टेशन पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

पुलिस के अनुसार अजय निवासी मोहल्ला अरेला, वार्ड नंबर 6 दातागंज जिला बदायूं उत्तर प्रदेश और दातागंज बदायूं की ही 16 वर्षीय लड़की रेलवे स्टेशन देहरादून पर घूम रहे थे। RPF को संदिग्ध प्रतीत होने पर उनके द्वारा की गई। पूछताछ में युवक व युवती ने सही से जवाब न देने के कारण दोनों को RPF कार्यालय में बैठाया गया।

लड़की के घर वालों से संपर्क करने पर ज्ञात हुआ की लड़की अपने घर से एक दिन पूर्व बिना बताए देहरादून आई है, जिसकी गुमशुदगी बदायूं थाने में दर्ज है। लड़की के परिवार जनों को सूचना मिलने पर लड़की के परिवारजन और यूपी पुलिस देहरादून के लिए रवाना हो चुकी थी।

घटना अलग-अलग संप्रदाय से संबंधित होने के कारण कुछ व्यक्तियों ने साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास किया गया, पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। SSP खुद पुलिस बल के साथ इलाके में गश्त की। अराजकता फैलाने का प्रयास करने वाले लोगो को पुलिस द्वारा चिन्हित किया जा रहा है।

SSP अजय सिंह ने बताया कि रेलवे स्टेशन देहरादून में गैर प्रांत की नाबालिग बालिका के प्रकरण में विभिन्न समुदाय द्वारा कानून एव शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की गई। उक्त प्रकरण में कोतवाली नगर देहरादून में संगीन धाराओं के साथ 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस घटना के संबंध में CCTV फुटेज प्राप्त कर रही है।

उत्तराखंड: कांग्रेस का स्मार्ट सिटी निर्माण में घोटाले का आरोप, धस्माना के नेतृत्व में DM से मिला प्रतिनिधिमंडल

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देहरादून : कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में जिलाधिकारी और मांग पत्र दिया। सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने का जो प्रोजेक्ट पांच वर्ष पहले शुरू किया गया था। वह आज भी अधूरा है।

उन्होंने कहा कि हमने देहरादून कैसा स्मार्ट बना उसका एक अभियान चलाया। पूरे देहरादून की जनता को स्मार्ट सिटी दिखाने के लिए सबसे पहले हमने गड्ढ़ों में सड़क और सड़क में गड्ढे ये अभियान चला करके देहरादून के विभिन्न जो मुख्य मार्गों की बदहाली को हमने दिखाया।

चाहे वो सहस्त्र धारा रोड हो, चाहे वो कैनाल रोड हो। चाहे वो राजपुर रोड में ओल्ड मसूरी रोड से लेकर के डाक पट्टी तक की सड़क हो। चाहे वो धर्मपुर विधानसभा के विभिन्न मार्ग जो बदरी चौक से लेकर और दून विश्वविद्यालय की सड़क हो। इसके अलावा हरिद्वार बाईपास की सड़क हो, सबकी हालत इतनी खराब है कि उन पर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है।

बंजारा वाला की सड़कों का नजारा देहरादून की जनता को हमने फेसबुक लाइव के माध्यम से, चैनल्स के माध्यम से, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, माध्यम से प्रिंट मीडिया के माध्यम से दिखाया और आज हम जिलाधिकारी को यह ज्ञापन देने आए हैं कि बहुत बड़ा घोटाला स्मार्ट सिटी के नाम पर हुआ है।

सैकड़ों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। देहरादून स्मार्ट नहीं बना, ना सड़कें स्मार्ट बनी, न सीवर सिस्टम स्मार्ट बना, न पीने के पानी का सिस्टम स्मार्ट हुआ, न बिजली का सिस्टम स्मार्ट हुआ, न ट्रैफिक स्मार्ट हुआ न अस्पताल स्मार्ट हुए। स्कूल स्मार्ट हुए और न कॉलेज स्मार्ट बने। देहरादून जीस हालत में था, उससे भी बदतर हालत में पहुँच गया।

हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बाद इसलिए हमने मांग की है कि उच्च स्तरीय जांच स्मार्ट सिटी में जो हुआ है, घोटाला उसकी कराई जाए। इसके अलावा देहरादून में जो टूटी हुई सड़कें हैं, उनको तत्काल दुरुस्त किया जाए, जो सीवर का हाल है। पूरे शहर के अंदर पीने के पानी की जो व्यवस्था खराब है, ट्रैफिक की जो व्यवस्था खराब है, उसको ठीक किया जाए।

जिला अस्पताल को और मेडिकल कॉलेज दून अस्पताल है, उनकी व्यवस्थाएं ठीक की जाएं। इसके अलावा सरकारी स्कूलों को ठीक किया जाए। धस्माना ने कहा कि ये हमने आज मांग पत्र दिया है। इसके अलावा कालिदास रोड में जो मुख्यमंत्री आवास न्यू कैंट रोड से लगता है। कुछ दूरी पर राजभवन है, वहां सड़क पर सीवर बह रहा है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि देहरादून शहर किस तरह बदहाल हो गया है।