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80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, देश में 12.9 करोड़ लोग अति गरीब

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भारत सबसे तेज विकास कर रही अर्थ व्यवस्था है। फिर भी देश में अब तेरह करोड़ लोग अत्यधिक गरीब हैं। विश्वबैंक की ताजा रपट में यह दावा किया गया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि 1990 की तुलना में 2024 में ज्यादा ग्रीन हैं भारत में।आर्थिक विकास दर को देखें तो जनसंख्या वृद्धि अत्यधिक गरीबी की वजह नहीं है।

क्या अर्थव्यवस्था के तेज विकास से गरीबी दूर हो सकती है? अगर है तो करीब 12.9 करोड़ भारतीय वर्ष 2024 में अत्यधिक गरीबी में जीवन बसर कर रहे हैं। रपट में जनसंख्या वृद्धि को गरीबों की संख्या से जोड़ा गया है। गरीबी अगर कम नहीं होती तो अर्थव्यवस्था के तेज विकास से किसका विकास हुआ या हो रहा है?

तेज आर्थिक विकास खाद्य सुरक्षा की गारंटी क्यों नहीं है? क्यों आज भी अस्सी करोड़ लोग मुफ्त राशन पर जी रहे हैं,जबकि अत्यधिक गरीब सिर्फ तेरह करोड़ हैं? जो गरीब नहीं हैं, उनकी खाद्य सुरक्षा क्यों संकट में हैं।

संसाधनों के बंटवारे को या बेरोजगारी या कृषि संकट की कोई चर्चा इस रपट में नहीं है। इसी साल की आर्थिक समीक्षा में कृषि विकास दर 4.2 बताया गया है।जबकि देश के ज्यादातर लोग अब भी कृषि पर निर्भर है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, इन भारतीयों की प्रतिदिन की आमदनी 181 रुपये (2.15 डॉलर) से भी कम है। वर्ष 1990 में यह संख्या 43.1 करोड़ थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार से दुनिया में गरीबी खत्म करने में एक सदी से भी अधिक समय लग सकता है। विश्व बैंक की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च गरीबी मानक के साथ मध्य आय वाले देशों के लिए गरीबी की तय सीमा प्रतिदिन 576 रुपये (6.85 डॉलर) है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि के चलते 1990 की तुलना में 2024 में अधिक भारतीय गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। इससे पहले विश्व बैंक ने कहा था कि भारत में अत्यधिक गरीबी पिछले दो वर्षों में बढ़ने के बाद 2021 में 3.8 करोड़ घटकर 16.74 करोड़ रह गई।

विश्व बैंक के मुताबिक, अगले दशक में वैश्विक अत्यधिक गरीबी में भारत का योगदान काफी कम होने का अनुमान है। यह अनुमान अगले दशक में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के साथ-साथ ऐतिहासिक विकास दरों पर आधारित है। भारत में 2030 में चरम गरीबी दर शून्य करने पर भी इस अवधि में दुनियाभर में अत्यधिक गरीबी दर 7.31 फीसदी से गिरकर 6.72 फीसदी ही रहेगी जो अभी भी तीन फीसदी के लक्ष्य से काफी ऊपर है।

आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि भारतीय कृषि क्षेत्र 42.3 प्रतिशत आबादी को आजीविका प्रदान करता है और मौजूदा कीमतों पर देश की जीडीपी में इसकी 18.2 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी है। कृषि क्षेत्र हमेशा उछाल पर रहा है, इसका पता इस तथ्‍य से चलता है कि इसने पिछले पांच वर्षों के दौरान 4.18 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है और 2023-24 के लिए अतंतिम अनुमान के अनुसार कृषि क्षेत्र की विकास दर 1.4 प्रतिशत रही।

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि कृषि अनुसंधान में निवेश और सक्षम नीतियों ने खाद्य सुरक्षा में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है। कृषि अनुसंधान (शिक्षण सहित) में निवेश किए गए प्रत्‍येक रुपए के लिए 13.85 रुपए भुगतान किए जाने का अनुमान है। वर्ष 2022-23 में कृषि अनुसंधान पर 19.65 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए।

बिहार में शराब से हाहाकार, अब तक 28 लोगों की मौत

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बिहार में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. बुधवार से अबतक 28 लोगों की जान जा चुकी है. इसके अलावे दर्जनों लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है. वहीं कई लोगों को गंभीर हालत में पटना रेफर किया गया है. सिवान में 20 और छपरा में 4 लोगों की मौत की प्रशासनिक पुष्टि हुई है.

सिवान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है. जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र के माघर गांव में पॉलीथिन वाली जहरीली शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी थी. उल्टी, पेट दर्द और आंखों से नहीं दिखने की शिकायत के बाद कई लोगों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जिनमें से 24 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, 4 लोगों को पीएमसीएच रेफर किया गया है, इनकी आंखों की रोशनी चली गई है.

एक तरफ जहां पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, वहीं जानकारी मिल रही है कि परिजनों ने प्रशासन के डर से कई शवों का अंतिम संस्कार भी कर दिया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक जहरीली शराब सिवान जिले के गहर कौड़िया गांव से मंगवाई गई थी. जिस गांव में ये हादसा हुआ है, वह सिवान और छपरा की सीमा पर स्थित है.

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सत्ता संरक्षण में जहरीली शराब के कारण 27 लोगों की हत्या कर दी गयी है. दर्जनों की आंखों की रोशनी चली गयी. बिहार में कथित शराबबंदी है लेकिन सत्ताधारी नेताओं-पुलिस और माफिया के गठजोड़ के कारण हर चौक-चौराहों पर शराब उपलब्ध है.

BIHAR HOOCH TRAGEDYनेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि  इतने लोग मारे गए लेकिन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक-संवेदना तक व्यक्त नहीं की. जहरीली शराब से, अपराध से प्रतिदिन सैकड़ों बिहारवासी मारे जाते हैं लेकिन अनैतिक और सिद्धांतहीन राजनीति के पुरोधा मुख्यमंत्री और उनकी किचन कैबिनेट के लिए यह सामान्य बात है. कितने भी लोग मारे जाए लेकिन मजाल है कि किसी वरीय अधिकारी पर कोई कार्रवाई हो? इसके विपरीत उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा? क्या सीएम ऐसी घटनाओं पर एक्शन लेने व सोचने में सक्षम और समर्थ है? इन हत्याओं का दोषी कौन?

वाल्मीकि मंदिर पहुंचे राहुल गांधी, पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद

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लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर दिल्ली के वाल्मीकि मंदिर में पूजा-अर्चना की। पार्टी ने मंदिर में पूजा कर रहे राहुल गांधी की तस्वीरें साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भगवान वाल्मीकि मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं! आदिकवि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण महाकाव्य ने मानव समाज को प्रभु श्री राम की अलौकिक कथा का उपहार दिया है। रामायण में मानवीय आदर्शों का अनुपम चित्रण मिलता है। आदिकवि द्वारा वर्णित आदर्शों के मार्ग पर चलने का प्रयास सभी को करना चाहिए। मैं महर्षि वाल्मीकि की पावन स्मृति को नमन करती हूं!

वहीँ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, ‘आप सभी को वाल्मीकि जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

वाल्मीकि जयंती को महर्षि वाल्मीकि की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो अब तक के सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय महाकाव्यों में से एक रामायण के रचयिता हैं। महर्षि वाल्मीकि की जयंती हर साल हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार अश्विन पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस साल वाल्मीकि जयंती 17 अक्तूबर को मनाई जा रही है।

नेहा कक्कड़ और रोहनप्रीत सिंह को मिली धमकी, कहा- सबक सिखा देंगे

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जालंधर कुल्हड़ पिज्जा कपल के रेस्तरां के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के बाद बुड्ढा दल के निहंग मान सिंह ने बॉलीवुड गायिका नेहा कक्कड़ और उनके पति रोहनप्रीत सिंह को चेतावनी जारी की है। निहंग मान सिंह हाल ही में अपने फेसबुक हैंडल पर लाइव आकर नेहा कक्कड़ से अपने सोशल मीडिया से सभी अश्लील सामग्री हटाने के लिए कहा। मान सिंह ने कहा कि नेहा कक्कड़ के पति को अपने रिश्ते को पर्दे में रखना चाहिए (पर्दा)। लोगों के सामने आपत्तिजनक हरकत कर आप क्या जताना चाहते हैं?

मशहूर बॉलीवुड सिंगर नेहा कक्कड और उनके पति रोहनप्रीत सिंह की शादी 2020 में हुई थी। बता दें कि नेहा कक्कड़ अपने पति के साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अक्सर रोमांटिक तस्वीरें साझा करती रहती हैं। कई बार नेहा कक्कड़ को ऐसी तस्वीरों की वजह से ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ता है। अब निहंग मान सिंह ने गायिका नेहा कक्कड़ और उनके पति को चेतावनी दी है।

बुढ्ढा दल के निहंग मान सिंह ने सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो में कहा कि नेहा कक्कड़ के पति को अपने रिश्ते को पर्दे में रखना चाहिए। लोगों के सामने ऐसी हरकतें करके क्या जताना चाहते हो? मान सिंह ने नेहा कक्कड़ को धमकाते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे कंटेंट डालने वालों को पहले प्यार से समझाएंगे अगर वो नहीं समझे तो हम उनको सबक सिखाएंगे। उन्होंने कहा कि तुम लोगों ने पंजाब का बेड़ा गर्क कर दिया है, थोड़ी शर्म कर लो।

उत्तराखंड की 7 मसाला कंपनियों के 14 सैंपल जांच में फेल

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हल्द्वानी: मसालों के नाम कंपनियां लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है, जिसका खुलासा उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा विभाग (FDA) ने किया. उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में मसाले बनाने वाली कई नामी कंपनियों के सैंपल NFL यानी राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला में फेल मिले हैं. मसालों में हैवी मेटल व पेस्टिसाइड पाया गया है. कंपनियों के सैंपल फेल होने के बाद विभाग ने अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है.

उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा विभाग के डिप्टी कमिश्नर अनुज थपलियाल ने बताया कि पिछले दिनों कुमाऊं मंडल के सभी 6 जिलों के मसाला निर्माण करने वाली 40 कंपनियों के नमूने लिए गए थे. जांच में 14 नमूने असुरक्षित पाए गए. जांच में मसालों के अंदर हैवी मेटल और पेस्टिसाइड का प्रयोग होना पाया गया था. जिन कंपनियों को नमूने जांच में पास नहीं हुए थे, उन्हें अपील का मौका दिया गया था. इसके बाद दोबारा से इन नमूनों को राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला गाजियाबाद भेजा गया.

डिप्टी कमिश्नर अनुज थपलियाल के मुताबिक राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला गाजियाबाद की जांच में भी सात कंपनियों के मसाले असुरक्षित पाए गए, जो सेहत के लिए सही नहीं है. अनुज थपलियाल ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला ने जिन सात कंपनियों के मसाले फेल किए हैं, अब उन निर्माताओं कंपनियों के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

इसके अलावा तीन कंपनियों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में कार्रवाई की गई है जहां इन कंपनियों द्वारा डिब्बे के ऊपर लेबल कंडीशन को ठीक से नहीं दर्शाया गया था जिनके खिलाफ कार्रवाई होने जा रही है. डिप्टी कमिश्नर अनुज थपलियाल बताया कि विभाग की ओर से लगातार अभियान चलाकर सैंपलिंग की कार्रवाई की जा रही है, जिसका नतीजा है कि मसाला बनाने वाली सात कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई होने जा रही है. लोगों के सेहत से जो भी कंपनियां खिलवाड़ करेंगी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

बोर्ड पर लिखना होगा मीट हलाल का या झटका, एक लाख तक जुर्माना, SOP बनाई

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देहरादून: उत्तराखंड में खाद्य पदार्थाें में थूक व गंदगी मिलाने की घटनाओं पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कड़ा रूख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में इस तरह की घटनाओं को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएम ने दोषी व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सीएम धामी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों की सघन जांच हो और दोषियों को सजा मिले। वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि त्योहारों का सीजन आ रहा है, जिसमें सुरक्षा और शुद्धता उनकी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा त्योहारों के दौरान किसी भी प्रकार की अशुद्धता या असामाजिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

25 हजार से लेकर 1 लाख रूपये तक का जुर्माना

मख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य सचिव व खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त डॉ.आर राजेश कुमार ने विस्तृत SOP जारी कर दी है।

जिसमें दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के साथ 25 हजार से लेकर 1 लाख रूपये तक का जुर्माना के प्रावधान किया गया है। आयुक्त डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जूस एवं अन्य खानपान की वस्तुओं में मानव अपशिष्ट एवं अन्य गन्दी चीजों की मिलावट के प्रकरण प्रकाश में आये हैं।

यह खाद्य सुरक्षा एव मानक अधिनियम 2006 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा सभी खाद्य कारोबारियों को लाइसेंस लेना व उसकी शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों में स्वच्छता एवं सफाई सम्बंधी अपेक्षायें का अनुपालन करना भी अनिवार्य है।

स्वच्छता के मानकों का कड़ाई से हो पालन

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा नियमों का पालन न करने वाले खाद्य करोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के प्राविधानों के तहत दण्डित किये जाने का प्राविधान है। उन्होंने कहा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अन्तर्गत आम जनता को शुद्ध, स्वच्छ एवं सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित कराये जाने के दृष्टिगत राज्य में संचालित होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैण्टीन, फूड वेन्डिंग एजेन्सीज, फूड स्टॉल, स्ट्रीट फूड वेण्डर्स इत्यादि द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता के मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किये जाने हेतु प्राविधान हैं। जिसको लेकर टीमें लगातार छापेमारी अभियान चला रही हैं। सैंपलिंग भरी जा रही हैं जांच में दोषी पाये जाने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई भी की जा रही है।

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जारी की गई SOP पर एक नजर..

(1) एसओपी के बारे में जारकारी देते हुए आयुक्त डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा राज्य में स्वच्छता और सफाई की अनिवार्यता के दृष्टिगत खाद्य कारोबारकर्ताओं द्वारा भोजन बनाने एवं परोसने वाले कार्मिकों को अनिवार्य रूप से फेस मास्क/ ग्लब्स/हेड गियर का उपयोग करना होगा।

(2) खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों को हेन्डल करते समय धूम्रपान, थूकना आदि व डेयरी (दुग्ध एवं दुग्ध पदार्थ) उत्पादों को प्रयोग में लाये जाने से पूर्व व छूने से पूर्व नाक खुजाना बालों में हाथ फेरना, शरीर के अंगों को खुजाना आदि हैण्ड हैबिट पर नियंत्रण रखें। इन आदतों से खाद्य पदार्थों में बैक्टीरियल संक्रमण के दृष्टिगत यह नियमों के विरूद्ध है।

(3)-संक्रामक रोग से ग्रसित व्यक्तियों को खाद्य निर्माण/संग्रहण / वितरण स्थलों पर कदापि नियोजित न करें। खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य कारोबारकर्ताओं का अनुज्ञप्ति एवं पंजीकरण) विनियम, 2011 के अंतर्गत खाद्य प्रतिष्ठान में कार्यरत कार्मिको की सूची चिकित्सकीयप्रमाण-पत्र सहित उपलब्ध कराने का प्राविधान है। अतः सभी अनुज्ञप्तिधारकों / पंजीकरणधारकों द्वारा तदनुसार विनियम के अनुपालन में अपने समस्त खाद्य कार्मिकों की सूची उनके चिकित्सकीय प्रमाण-पत्रों के साथ कार्यस्थल/प्रतिष्ठान में सदैव रक्षित करना अनिवार्य होगा।

(4)-विगत दिनों हुई उपरोक्त घटनाओं के दृष्टिगत यह निर्देशित किया जाता है कि सभी खाद्य कारोबारकर्ताओं द्वारा खाद्य प्रतिष्ठान में कार्यरत कार्मिकों को अनिवार्यरूप से फोटोयुक्त पहचान पत्र निर्गत किया जायेगा, जिसे कार्यस्थल पर प्रतिष्ठान के कार्मिकों द्वारा अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करना सुनिश्चित किया जायेगा।

(5)-स्वच्छता और सफाई की अनिवार्यता के दृष्टिगत खाद्य पदार्थ निर्माण करने वाले कार्मिकों/परोसने वाले कार्मिकों/खाद्य पदार्थ विक्रय करने वाले कार्मिकों कोकार्यस्थल पर थूकने एवं अन्य किसी भी प्रकार की गन्दगी फैलाने को प्रतिबन्धित किया जाता है। उक्त विनियम में वर्णित प्रावधानों का उल्लंघन किये जाने पर खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अधीन रू0 25,000 से रू0 1,00,000 तक अर्थदण्ड से दण्डित किया जायेगा।

(6)- उपरोक्त विनियम में वर्णित अनुज्ञप्ति की शर्तों के अनुसार खाद्य कारोबारकर्ताओं द्वारा खाद्य परिसर में उत्पादित अथवा तैयार की गयी किसी खाद्य सामग्री को मल, मूत्र, थूक अथवा किसी अन्य दूषित पदार्थ से प्रभावित युक्त नहीं किया जायेगा। खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य कारोबार के लिये अनुज्ञप्ति एवं पंजीकरण) विनियम 2011 का विनियम-2.1.2 (5) अनुसूची, 3

(1) प्रत्येक खाद्य कारोबारकर्ता प्रारूप-ग में जारी अनुज्ञप्ति की एक साफ, प्रमुख स्थान पर पठनीय प्रति चस्पा करेगा।

(2) प्रत्येक अनुज्ञप्ति धारी यह सुनिष्चित करेगा कि विनिर्दिष्ट उत्पादन से भिन्न अन्य किसी उत्पाद का उत्पादन नही किया जायेगा।

(3) प्रत्येक खाद्य कारोबारकर्ता उत्पादन, कच्ची सामग्री का उपयोग और विक्रय का अलग-अलग दैनिक रिकार्ड रखेगा।

अन्य दिशा-निर्देश-

(1)- अनुज्ञप्ति एवं पंजीकरण प्राप्त किये बिना कारोबार कर रहे खाद्य कारोबारकर्ताओं के विरूद्ध कार्यवाही कर उन्हें तत्काल अनुज्ञप्ति एवं पंजीकरण से आच्छादित किया जाए। (एफ०एस०एस०एक्ट, 2006 की धारा-58 एवं 63)

(2)- समस्त खाद्य प्रतिष्ठानों यथा ढाबों / होटलों / रेस्टोरेंट्स आदि में सी०सी०टी०वी० कैमरों की व्यवस्था की जाए।

(3) राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पत्र दिनांक 26.12.2022 के अनुपालन में प्रत्येक मीट विक्रेता, मीट कारोबारकर्ता, होटल एवं रेस्टोरैन्ट विक्रय/प्रस्तुत किये जा रहे मीट एवं मीट उत्पाद के प्रकार यथा हलाल अथवा झटका, का अनिवार्य रूप से प्रकटीकरण करेगें।

उपरोक्त निर्देशों का अनुपालन खाद्य कारोबारकर्ता का स्वयं का तथा अपने प्रतिष्ठान के कार्मिकों द्वारा कराये जाने का दायित्व खाद्य कारोबारकर्ता का होगा। उपर्युक्त निर्देशों का प्रदेश के समस्त खाद्य कारोबारकर्ताओं द्वारा कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया एवं कराया जायेगा। अनुपालन न किये जाने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 एवं तत्सम्बन्धी विनियमों के सुसंगत प्राविधानों के अंतर्गत विधिक कार्यवाही की जायेगी।

सरकार ने पांच बैंकों के साथ किया अनुबंध, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा ये लाभ

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देहरादून: सीएम पुष्कर सिंह धामी एवं वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की उपस्थिति में बुधवार को सचिवालय में सरकारी कार्मिकों के लिए कॉरपोरेट सैलेरी पैकेज और अन्य लाभों के लिए उत्तराखण्ड सरकार के साथ भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और जिला सहकारी बैंक ने एम.ओ.यू किया। अभी राज्य के लगभग 64 प्रतिशत सरकारी कार्मिक जिनका सैलरी खाता इन बैंकों में है, वे इस अनुबंध से लाभान्वित होंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सरकारी कार्मिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस अनुबंध का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि ये सभी बैंक कॉरपोरेट सैलेरी पैकेज को कर्मचारियों के लिए और लाभकारी बनाने के लिये निरंतर कार्य करते रहेंगें। हमारा प्रयास होगा कि भविष्य में शत-प्रतिशत कर्मचारी इस लाभकारी पैकेज का फायदा उठा सकें।

इन बैंकों की शाखाओं में वेतन खातों में वेतन बचत खाते के खाताधारकों को व्यक्तिगत बीमा कवर के साथ-साथ अन्य वित्तीय लाभों की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। इसके अंतर्गत कार्मिकों को दुर्घटनास्वरूप मृत्यु, पूर्ण अपंगता तथा आंशिक अपंगता की स्थिति में उनके आश्रितों को क्षतिपूर्ति के रूप में क्लेम का लाभ तथा अन्य लाभ बिना कोई प्रीमियम किये प्रदान किये जायेंगे।

राज्य सरकार और इन 05 बैंको के मध्य हुए अनुबंध के अनुसार किसी कार्मिक की मृत्यु की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में यह कवरेज उनके परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, जो 30 लाख से 100 लाख रुपये के, मध्य होगी। पूर्ण अपंगता की स्थिति में  30 लाख से 50 लाख, तथा आंशिक अपंगता की स्थिति में रू. 10 लाख से रुपये 40 लाख तक की वित्तीय सहायता बैंक द्वारा पैकेज के अन्तर्गत प्रदान की जाएगी।

इसके साथ-साथ इस पैकेज में दुर्घटना के कारण चिकित्सा, एम्बुलेंस की सुविधा, बच्चों की शिक्षा, पुत्री के विवाह जैसी आने वाली आवश्यकताओं के लिए भी वित्तीय सहायता की व्यवस्था है। कार्मिकों की प्राकृतिक मृत्यु की स्थिति में भी उनके आश्रितों को आने वाली चुनौतियों से बचने में भी बैंक 3 लाख से 10 लाख रुपये तक योगदान प्रदान करेगा।

48 लाख कर्मियों और 67 लाख पेंशनरों को मिला 3% महंगाई भत्ता

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केंद्र सरकार में लगभग एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते ‘डीए’ एवं महंगाई राहत ‘डीआर’ में तीन फीसदी वृद्धि की सौगात मिली है। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने डीए की दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर मुहर लगाई है। पहली जुलाई से देय महंगाई भत्ते की दर अब 50 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक के बाद हुई प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी है।

इससे पहले कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने 30 सितंबर को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर डीए की दरों में बिना कोई देरी किए वृद्धि करने की मांग की थी। पत्र में कहा गया कि सामान्य तौर पर महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत में बढ़ोतरी का भुगतान, अक्तूबर के पहले सप्ताह में हो जाता था। इस बार केंद्र सरकार ने दशहरे पर भी ऐसी कोई घोषणा नहीं की।

’53’% डीए से होगा इतना फायदा 

  • किसी कर्मचारी का मूल वेतन 18 हजार रुपये है तो 53 प्रतिशत महंगाई भत्ते के हिसाब से उसके वेतन में हर माह लगभग 540 रुपये बढ़ जाएंगे।
  • कर्मचारी का मूल वेतन 25 हजार रुपये है तो उसे प्रतिमाह 750 रुपये का फायदा होगा।
  • जिस कर्मी की बेसिक सेलरी 35 हजार रुपये है तो उसे प्रतिमाह 1050 रुपये ज्यादा मिलेंगे।
  • 45 हजार रुपये की बेसिक सेलरी वाले कर्मी के लगभग 1350 रुपये बढ़ेंगे।
  • ऐसे कर्मी, जिन्हें 52 हजार रुपये बेसिक सेलरी मिलती है तो डीए बढ़ोतरी पर उन्हें हर माह 1560 रुपये का फायदा होगा।
  • 70 हजार रुपये की बेसिक सेलरी वाले कर्मचारी को लगभग 2100 रुपये का फायदा होगा।
  • 85,500 रुपये की बेसिक सेलरी पर लगभग 2565 रुपये का इजाफा होगा।
  • एक लाख रुपये बेसिक सेलरी वाले कर्मियों के खाते में हर माह 3000 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी होगी।

DA/DR के दरों की घोषणा
बता दें कि डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी की घोषणा, सितंबर माह में कर दी जाती थी। कई बार अक्तूबर के प्रारंभ में भी डीए/डीआर का एलान हुआ है। तीन अक्टूबर को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई थी। उसमें रेल कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस देने की घोषणा की गई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि रेल कर्मचारियों के लिए 2029 करोड़ रुपए के बोनस को मंजूरी मिल गई है।

इसके बाद केंद्रीय कर्मचारियों को यह आस बंध गई थी कि 9 अक्तूबर की केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में डीए की घोषणा कर दी जाएगी। ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स’ के महासचिव एसबी यादव ने 30 सितंबर को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर डीए की दरों में बिना कोई देरी किए वृद्धि करने की मांग की थी। उन्होंने लिखा, अक्तूबर माह में केंद्र सरकार, भत्तों व बोनस देने की घोषणा करती है तो उनका भुगतान नवंबर में हो सकेगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त के हेलिकॉप्टर की उत्तराखंड में इमरजेंसी लैडिंग

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पिथौरागढ़: मुन्स्यारी में हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैडिंग कराई गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के हेलिकॉप्टर की मुन्स्यारी में इमरजेंसी लैंडिंग हुई है। इमजेंसी लैडिंग के पीछे खराब मौसम वजह बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार हेलिकॉप्टर में केंद्रीय चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और प्रदेश के उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे शामिल थे, उसकी इमरजेंसी लैडिंग करानी पड़ी। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक बुधवार को केंद्रीय चुनाव आयुक्त और प्रदेश के उप मुख्य निर्वाचन देहरादून से हेलिकॉप्टर से ट्रेकिंग के लिए मुनस्यारी के मिलम के लिए निकले।

हिमालयी क्षेत्र मिलम में मौसम में खराबी के चलते पॉयलट के लिए हेलिकॉप्टर को आगे ले जाना मुश्किल हुआ। ऐसे में हेलिकॉप्टर की मिलम से पहले रालम में इमरजेंसी लैडिंग करानी पड़ी। एक खेत में हेलिकॉप्टर को सफलतापूर्वक उतारा गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने कहा कि दोनों अधिकारी सुरक्षित हैं। मामले की पूरी जानकारी ली जा रही है।

SCO की बैठक में पाकिस्‍तान और चीन पर बरसे भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर

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विदेश मंत्री डॉक्‍टर एस- जयशंकर ने पाकिस्तान की धरती से चीन और पाकिस्‍तान दोनों को ही कड़ा संदेश दिया है। जयशंकर ने जहां सीमापार आतंकवाद को लेकर पाकिस्‍तान को कड़ी फटकार लगाई है, वहीं संप्रभुता का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाकर चीन को साफ कर दिया कि भारत सीपीईसी को स्‍वीकार नहीं करता है। करीब 1 दशक के बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री की पाकिस्‍तान की पहली यात्रा थी। एससीओ शिखर सम्मेलन में जयशंकर ने पाकिस्तान और चीन का बिना नाम लिए जमकर खरीखोटी सुनाई।

भारतीय चाणक्‍य ने कहा कि एससीओ में सहयोग आपसी सम्म्मान और संप्रभु समानता पर आधारित होना चाहिए। इसे क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को मान्यता देनी चाहिए। इसे वास्तविक साझेदारियों पर बनाया जाना चाहिए न कि एकतरफा एजेंडे पर। डॉ. जयशंकर जब भाषण दे रहे थे तब पाकिस्तान के टेलीविजन ने समिट का लाइव बंद कर दिया। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब चीन ने कश्‍मीर के मुद्दे को पाकिस्‍तान में उठाया है।

डॉ. जयशंकर ने एससीओ के सदस्यों से कहा, ‘मैं आपसे अनुच्छेद 1 पर ध्यान देने का अनुरोध करता हूं, जो एससीओ के उद्देश्यों और काम को समझाता है। इसका मुख्य मकसद आपसी भरोसा, दोस्ती और अच्छे पड़ोसियों के संबंधों को मजबूत करना है। इसका एक और उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है, खासकर क्षेत्रीय स्तर पर। इसका लक्ष्य संतुलित विकास को बढ़ावा देना और संघर्ष को रोकने के लिए एक सकारात्मक ताकत बनना है। चार्टर ने साफ-साफ बताया था कि हमारी तीन मुख्य चुनौतियां हैं – आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद, जिनसे निपटने के लिए एससीओ पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

डॉ. जयशंकर ने कहा, ‘अगर हम आज की स्थिति देखें तो इन लक्ष्यों पर काम और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसलिए हमारे लिए एक ईमानदार बातचीत करना जरूरी है।’ पाकिस्तान को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर विश्वास की कमी है, सहयोग पर्याप्त नहीं या दोस्ती कमजोर है या अच्छे पड़ोसी जैसे संबंध कहीं गायब हो गए हैं तो हमें साफ तौर पर आत्मनिरीक्षण करने और इन समस्याओं के समाधान खोजने की जरूरत है।

डॉ. जयशंकर ने कहा, ‘हमारे प्रयास तभी आगे बढ़ेंगे जब चार्टर के प्रति हमारा समर्पण होगा। यह साफ है कि विकास और प्रगति के लिए शांति और स्थिरता जरूरी है।’ पाकिस्तान को उन्होंने साफ कह दिया कि आतंक और बिजनेस साथ नहीं हो सकते। उन्होंने कहा, ‘हमें तीनों बुराइयों के खिलाफ सख्त और बिना समझौते के खड़ा होना चाहिए। अगर सीमाओं के पार आतंकवाद, कट्टरवाद और अलगाववाद जैसी गतिविधियां होती हैं तो ये व्यापार, ऊर्जा के आदान-प्रदान, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा नहीं दे सकतीं।