देहरादून: IPS और PPS अधिकारियों के ट्रांसफर के बाद अब शासन ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। शासन ने IAS और PCS अधिकारियों के तबादले किए हैं।



देहरादून : कांग्रेस निकाय चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत पार्टी ने मास्टर स्ट्रोक खेलकर अपने बड़े नेताओं को जिलों का प्रभारी नियुक्त किया है। ऐसा पहली बार है, जब कांग्रेस ने सीनियर लीडर्स को मैदान में उतारा है। उत्तराखण्ड प्रदेश में होने वाले आगामी नगर निकाय चुनावों की तैयारी हेतु पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जिला प्रभारी का दायित्व सौंपा गया है।
उपरोक्त जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष संगठन एवं प्रशासन मथुरादत्त जोशी ने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस प्रभारी, सांसद एवं राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा द्वारा प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा की संस्तुति पर निकाय चुनावों की तैयारी एवं चुनाव संचालन हेतु प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को जिला प्रभारी का दायित्व सौंपा गया है।
देहरादून में पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी, हरिद्वार में पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, उत्तरकाशी में प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, चमोली में विधायक मदन सिंह बिष्ट, टिहरी में पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी, रुद्रप्रयाग पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, पौड़ी में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, पिथौरागढ़ प्रदेश महामंत्री भागीरथ भट्ट, चम्पावत में पूर्व सांसद महेन्द्र सिंह पाल, अल्मोडा में विधायक हरीश धामी, बागेश्वर पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, नैनीताल में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल एवं उद्यमसिंह नगर मे पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत को प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा सभी प्रभारीगणों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने प्रभार वाले जनपदों में निकाय चुनावों की तैयारी एवं चुनावों में पार्टी प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने हेतु जनपद के सभी वरिष्ठ कांग्रेसजनों से समन्वय स्थापित करते हुए एक सप्ताह के अन्दर अपनी आख्या प्रदेश कार्यालय को देंगे।

केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के शीतकालीन प्रवास स्थलों के लिए यात्रा शुरू की जाय – मुख्यमंत्री।

देहरादून 29 नवंबर।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के शीतकालीन प्रवास स्थलों के लिए यात्रा शुरू की जाय और इसका व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया जाए। इन शीतकालीन प्रवास स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम के होटलों में रूकने पर किराये में 10 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री अगले सप्ताह शीतकालीन प्रवास स्थलों की यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा भी करेंगे।
मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखण्ड के रजत उत्सव वर्ष में सशक्त उत्तराखण्ड की कार्ययोजना के लिए सभी विभागों को अल्पकालीन और दीर्घकालीन योजनाओं पर कार्य करने के निर्देश दिये थे। इसकी समीक्षा भी मुख्यमंत्री अगले सप्ताह करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोगों की अपेक्षाओं और आशाओं के अनुरूप राज्य को आगे बढ़ाने में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश की देवतुल्य जनता के सहयोग से उत्तराखण्ड को हर क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने कि लिए राज्य सरकार द्वारा सभी क्षेत्रों में तेजी से कार्य किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़क दुर्घटना सुरक्षा नियमावली जल्द बनाई जाए। पुलिस महानिदेशक को मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये हैं कि रात्रिकालीन गश्त बढ़ाई जाए और सड़क सुरक्षा की दृष्टि से सड़कों में पुलिस बल भी बढ़ाया जाए। देवभूमि उत्तराखण्ड को 2025 तक ड्रग्स फ्री राज्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को गहन अभियान चलाने के निर्देश दिये हैं। नशीले पदार्थों को बेचने वालों पर नियमित निगरानी रखने और इसमें संलिप्त पाये जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। किराये पर रह रहे बाहरी लोगों का नियमित सत्यापन करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जल्द ही जनपदों का भ्रमण और रात्रि प्रवास करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री जन सुनवाई के साथ की विकास कार्यों का निरीक्षण और नगर निकायों और सरकारी कार्यालयों में विभिन्न व्यवस्थाओं और स्वच्छता कार्यों का निरीक्षण भी करेंगे। इसके लिए उन्होंने रोस्टर जारी करने के निर्देश दिये हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, विनय शंकर पाण्डेय, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी अंशुमान एवं उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।
जब भी भारत और पाकिस्तान का नाम सामने आता है, दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात सामने आ जाते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि कई मामलों में भारत पाकिस्तान से कहीं आगे है। वहीं कुछ चीजें ऐसी भी जिनमें पाकिस्तान नंबर वन बना हुआ है। ऐसी ही स्थिति डायबिटीज के मरीजों की संख्या को लेकर है।
इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में डायबिटीज की दर सबसे ज्यादा है। इस मामले में भारत की स्थिति पड़ोसी मुल्कों से बेहतर है। इस लिस्ट में बांग्लादेश 27वें स्थान पर है। वहीं श्रीलंका 48वें और चीन 57वें नंबर पर है। इस रिपोर्ट में 20 से 79 साल के लोगों को शामिल किया गया। रिपोर्ट में टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज की दर बताई गई है।
1. 🇵🇰Pakistan: 30.8%
2. 🇰🇼Kuwait: 24.9%
8. 🇪🇬Egypt: 20.9%
10. 🇶🇦Qatar: 19.5%
12. 🇲🇾Malaysia: 19%
14. 🇸🇦Saudi Arabia: 18.7%
17. 🇲🇽Mexico: 16.9%
26. 🇹🇷Turkey: 14.5%
27. 🇧🇩Bangladesh: 14.2%
48. 🇱🇰Sri Lanka: 11.3%
53. 🇿🇦South Africa: 10.8%
54. 🇮🇶Iraq: 10.7%
55. 🇺🇸United States: 10.7%
56. 🇮🇩Indonesia: 10.6%
57. 🇨🇳China: 10.6%
60. 🇪🇸Spain: 10.3%
63. 🇹🇭Thailand: 9.7%
64. 🇮🇳India: 9.6%
71. 🇮🇷Iran: 9.1%
74. 🇵🇹Portugal: 9.1%
78. 🇧🇷Brazil: 8.8%
83. 🇳🇵Nepal: 8.7%
86. 🇰🇵North Korea: 8.6%
96. 🇨🇦Canada: 7.7%
107. 🇵🇭Philippines: 7.1%
113. 🇰🇷South Korea: 6.8%
116. 🇯🇵Japan: 6.6%
127. 🇦🇺Australia: 6.4%
129. 🇮🇹Italy: 6.4%
132. 🇬🇧United Kingdom: 6.3%
135. 🇳🇿New Zealand: 6.2%
139. 🇻🇳Vietnam: 6.1%
153. 🇷🇺Russia: 5.6%
162. 🇦🇷Argentina: 5.4%
165. 🇫🇷France: 5.3%
169. 🇪🇹Ethiopia: 5%
183. 🇰🇪Kenya: 4%
186. 🇳🇬Nigeria: 3.6%
इस लिस्ट में भारत की स्थिति न केवल पड़ोसी मुल्कों से बल्कि अमेरिका और सऊदी अरब से भी बेहतर है। इस लिस्ट में भारत का स्थान 64वां है। लिस्ट के मुताबिक पाकिस्तान में डायबिटीज की दर 30.8 फीसदी है। इस दर के साथ पाकिस्तान दुनिया में नंबर एक पर है। वहीं बांग्लादेश में डायबिटीज दर 14.2%, अमेरिका में 10.7% और चीन में यह दर 10.6% है। 9.6% की दर के साथ इस लिस्ट में भारत 64वें स्थान पर है।
इस लिस्ट में सबसे नीचे नाइजीरिया है। नाइजीरिया में डायबिटीज दर 3.6% है। यानी इस देश में डायबिटीज के मरीज काफी कम हैं। इसके बाद केन्या (4%) और इथोपिया (5%) का नाम है। इस लिस्ट में रूस 153वें स्थान पर है। रूस में डायबिटीज दर 5.6% है।
ED ने राज कुंद्रा के घर एवं उनके करीबियों के यहां छापेमारी की है. राज कुंद्रा बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति हैं. ED ये कार्रवाई पोर्नोग्राफी मामले में की है. यह छापेमारी उनके घर, दफ्तर और अन्य ठिकानों पर हुई है. पोर्नोग्राफी का यह मामला कई साल पुराना है.
जानकरी के अनुसार, ED पोर्न रैकेट केस में सिर्फ राज कुंद्रा ही नहीं कई अन्य लोगों के घरों की भी तलाशी कर रही है. ये कार्रवाई मोबाइल ऐप के जरिये पोर्न कॉन्टेंट बनाने और सर्कुलेशन से जुड़ी है.यह जांच मुंबई पुलिस के 2021 वाले केस पर आधारित है.
जानकारी के अनुसार, ED की टीम ने इस मामले में कुल 15 जगहों पर छापेमारी की है. दरअसल इस मामले में पैसे जो देश मे इकट्ठा हुए थे, इन वीडियो के माध्यम से उसका ट्रांसजेक्शन विदेश में हुआ था. इस तरह से एक जगह से दूसरी जगह के बार और बड़ी मात्रा में पैसे गए थे जिसकी जांच अब ED ने शुरू की है.
2021 में क्राइम ब्रांच ने राज कुंद्रा को गिफ्तार किया था. इस मामले में सिटी कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी. राज कुंद्रा अपने आप पर लगे सभी आरोपों को गलत बता चुके हैं. इस मामले में वो दो महीने जेल में भी रहे थे. वो अजय भारद्वाज से जुड़े बिटकॉइन धोखाधड़ी से संबंधित एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में हैं. ED ने शिल्पा शेट्टी के जुहू वाले बंगले को जांच करने के लिए कब्जे में ले रखा है.
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत के बाद अब मुख्यमंत्री चेहरे पर फाइनल फैसला लिया जाना है. हालांकि, यह लगभग तय हो गया है कि एकनाथ शिंदे दोबारा सीएम नहीं बनने वाले. इसकी जगह अब एकनाथ शिंदे ने बीजेपी आलाकमान से बड़ी डिमांड की है. केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर एकनाथ शिंदे ने शिवसेना का पक्ष रखा और विधान परिषद के अध्यक्ष पद की मांग के साथ 12 मंत्री पद की मांग की.
बताया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे ने कई अहम विभागों की डिमांड रखी है. वहीं, शिंदे ने अमित शाह से अनुरोध किया है कि वह पालक मंत्री की जिम्मेदारी का आवंटन करते समय शिवसेना का उचित सम्मान बनाए रखें।
अमित शाह के साथ हुई बैठक में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है. हालांकि, ऐसा लग रहा है कि बीजेपी ने एकनाथ शिंदे को मना लिया है, क्योंकि कार्यकारी सीएम ने अमित शाह पर भरोसा जताते हुए कहा है कि शिवसेना महायुति के साथ ही है.
शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे, बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस, एनसीपी चीफ अजित पवार और अन्य महायुति नेताओं ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की. मीटिंग के बाद शिंदे, फडणवीस और अजित पवार दिल्ली से रवाना हो गए.
ANI से बातचीत करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा, “मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी थी कि महायुति के मुख्यमंत्री को लेकर कोई बाधा नहीं है. यह ‘लाडला भाई’ दिल्ली आ गया है और ‘लाडला भाई’ मेरे लिए किसी भी अन्य पद से ऊंचा पद है.” बता दें, बीते बुधवार एकनाथ शिंदे ने कहा था कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिया जाने वाला हर फैसला मानने को तैयार हैं. इसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद को लेकर निर्णय भी शामिल है.
एकनाथ शिंदे ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था, “मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा है कि अगर मेरी मौजूदगी से महाराष्ट्र में सरकार बनाने में कोई बाधा आती है, तो निर्णय लेने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए. आप जो भी निर्णय लेंगे, वह मुझे स्वीकार्य होगा.”
देहरादून : कांग्रेस भवन राजपुर रोड देहरादून में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि आईएमपीसीएल मोहन अल्मोड़ा आयुष मंत्रालय का एकमात्र सरकारी संस्थान है ,जो प्राचीन शास्त्रीय विधि से आयुर्वेदिक यूनानी औषधि निर्माण का कार्य करती है। उस सरकारी संस्थान को वर्तमान मोदी सरकार अपने पूंजीपति मित्रों को बेचने की हर संभव कोशिश में लगी हुई है।
आईएमपीसीएल को रणनीतिक निवेश के तहत सूचीबद्ध किया गया है और इसकी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन चल रहा है, जबकि यह कंपनी लगातार मुनाफे में चल रही है और हजारों कर्मचारियों के परिवार इससे पल रहे हैं। इसके बावजूद कंपनी को बेचने का षड्यंत्र चल रहा है।
करन माहरा ने कहा कि कंपनी के कर्मचारियों और स्थानीय हित धारकों ने इस प्रक्रिया का कड़ा विरोध दर्ज कराया है। आईएमपीसीएल के वर्तमान एमडी मुकेश कुमार ने निजीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संजय गुप्ता और अन्य निजी संस्थाओं के साथ साथ गांठ की है।
आईएमपीसीएल के निजीकरण को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है कि आईएमपीसीएल के प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार भाजपा के बहुत बड़े नेता रामलाल अग्रवाल के भांजे संजय गुप्ता के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दे रहे हैं, इसके अलावा मौजूदा भाजपा सरकार भी इस साजिश को सफल बनाने में सहयोग कर रही है। इस संस्थान के निजीकरण प्रक्रिया में संजय गुप्ता की कंपनी एक प्रमुख बोली दाता के रूप में सामने आई है।
यही नहीं इसके अलावा संजय गुप्ता लगभग 20 सेल कंपनियों के निदेशक के रूप में काम कर रहे हैं, बताया जा रहा है कि इन सेल कंपनियों में बड़े राजनेताओं की हिस्सेदारी है उनका सीधा निवेश इन सेल कंपनियों में है इससे बड़ा संदेह , यह है कि इन सेल कंपनियों का उपयोग संपत्ति को छुपाने और निजीकरण प्रक्रिया में अनियमितता को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है l
कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि आईएमपीसीएल कर्मचारी संघ लगातार इसका विरोध दर्ज कर रहा है लेकिन इस विरोध को लगातार नजरअंदाज कर कंपनी के निजीकरण की प्रक्रिया धड़ल्ले से चल रही है जो हजारों कर्मचारियों और हमारी प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा के लिए भी बिल्कुल ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि हम सरकार से मांग करते हैं कि आईएमपीसीएल की निजीकरण प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए संजय गुप्ता और उनकी सेल कंपनियों की इसमें क्या भूमिका है इसकी स्वतंत्र रूप से जांच की जाए निजीकरण में शामिल सेल कंपनियों और उनसे जुड़े नेताओं की भूमिका का खुलासा किया जाए वरना हमें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा l
इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने खाद्यान्न परिवहन बिलों के लंबे समय से भुगतान न होने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया और कहा कि कोरोना काल से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत गेहूं चावल व दाल के परिवहन बिलों का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है।
यही नहीं इसके अलावा अन्य खाद्य योजनाओं के बिलों का भुगतान भी लंबे समय से नहीं हो रहा है खाद्य विभाग के अंतर्गत डोर स्टेप डिलीवरी के अंतर्गत जब से यह योजना चली है तब से लेकर आज तक चावल TOA, दाल, नमक ,चावल,MDM सहित कई योजनाओं का परिवहन भुगतान नहीं हो रहा है।
खाद्यान्न योजना में बिलों का भुगतान न होने से ठेकेदार और इससे जुड़े हुए अन्य लोग प्रभावित हो रहे हैं जिससे आम जनमानस को भी इन योजनाओं का लाभ मिलने में कठिनाई सामने आ रही है सरकार को तत्काल इन बिलों के भुगतान की व्यवस्था करनी चाहिए जिससे इन सभी योजनाओं का लाभ आम जनमानस को समय पर मिल सके।
पत्रकार वार्ता में मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसोनी , प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट प्रदेश महामंत्री नवीन जोशी मीडिया सलाहकार सरदार अमरजीत सिंह और राजकुमार जायसवाल उपस्थित रहे ।
देहरादून: उत्तराखंड में नगर निकायों के चुनाव बार-बार टाले जा रहे हैं। मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। हाईकोर्ट ने भी सरकार को समय से चुनाव कराने को कहा, लेकिन सरकार ने अपनी मजबूरियां गिनाकर चुनाव को टाल दिया।
नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगमों में प्रशासकों का कार्यकाल बार-बार बढ़ाया जा रहा है। लेकिन, अब तक सरकार चुनाव कराने की तैयारियों को अंतिम रूप नहीं दे पाई है।
इस बीच राज्य में पंचायतों का कार्यकाल भी समाप्त हो गया। सरकार ने पंचायतों में भी प्रशासक नियुक्त कर दिए। पहले एक ही सवाल था कि निकाय चुनाव कब होंगे? अब एक और सवाल यह खड़ा गया है कि ग्राम पंचायतों के चुनाव कब होंगे?
नगर निकाय चुनाव को लेकर बार-बार अटकलें लगाई जा रही हैं कि चुनाव कब होंगे? यह सवाल अब भी बना हुआ है। पहले माना जा रहा था कि चुनाव लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद कराए जा सकते हैं। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। सरकार ने लोकसभा चुनाव में व्यस्तता का हवाला देकर निकाय चुनाव को टाल दिया।
लोकसभा चुनाव निपटते ही फिर चर्चाओं का दौर शुरू हुए कि चुनाव अब जल्द हो सकते हैं। इस बीच बद्रीनाथ और मंगलौर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। अटकलें लगाई जा रही थी कि भाजपा चुनाव जीत जाएगी और चुनाव परिणाम के बाद निकाय चुनाव हो सकते हैं। लेकिन, दोनों ही सीटें भाजपा हार गई। ऐसे में चुनाव की चर्चा फिर ठंडे बस्ते में चली गई।
इस दौरान सरकार बार-बार तैयारियों का हवाला देकर चुनाव को टालती रही। फिर कहा जाने लगा कि केदारनाथ चुनाव परिणाम आने के बाद निकाय चुनाव कराए जा सकते हैं।
अब फिर से चर्चा शुरू हो गई है कि सरकार नगर निकायों के चुनाव दिसंबर माह में ही करा सकती है। लेकिन, चुनाव होंगे या नहीं, यह तभी साफ हो पाएगा, जब तारीखों को ऐलान हो जाएगा।
शहरी विकास विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारी तेज कर दी हैं। इस सप्ताह ओबीसी आरक्षण संबंधी अध्यादेश को राजभवन से मंजूरी भी मिल सकती है।
नगर निकाय चुनावों के लिए कुछ प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं। इनमें पहली है अध्यादेश पर फैसला। शासन ने ओबीसी आरक्षण लागू करने संबंधी अध्यादेश राजभवन को भेजा है, जिस पर इस सप्ताह राजभवन मंजूरी दे सकता है।
अध्यादेश को मंजूरी मिलने के बाद ओबीसी आरक्षण की नियमावली पर निर्णय होगा। मुख्यमंत्री को इस पर अनुमोदन देना है। नियमावली आने के बाद आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया जिलाधिकारियों के स्तर से होगी।
इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग अधिसूचना जारी करेगा। बताया जा रहा है कि 15 दिसंबर के आसपास अधिसूचना जारी हो सकती है। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में चुनाव कराने की योजना पर काम चल रहा है।
इस बात के संकेत BJP की तैयारियों से मिलते है। उपचुनाव में जीत के बाद अब भाजपा ने शहरी निकायों के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। अगले महीने निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना के चलते पार्टी ने अपने संगठन चुनाव भी टाल दिए हैं। जिला व मंडल समितियों के चुनाव जनवरी के दूसरे पखवाड़े में हो सकते हैं।
केदारनाथ उपचुनाव से पहले पार्टी की दिसंबर महीने तक जिला व मंडल अध्यक्षों के चुनाव कराने की तैयारी थी। 30 नवंबर तक पार्टी ने सभी बूथों पर कमेटियों का गठन करना था। लेकिन, अब पार्टी ने शहरी निकायों के चुनाव पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है।