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एक महीने में दूसरी बार डाउन हुई IRCTC की साइट

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इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) की साइट और ऐप गुरुवार को डाउन हो गई। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की कि वे टिकट बुक नहीं कर पा रहे हैं। ऑनलाइन आउटेज को ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म डाउनडिटेक्टर ने भी साइट डाउन होने की रिपोर्ट में उछाल दिखाया है।
IRCTC ने अभी तक इस बड़े आउटेज पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। IRCTC ऐप खोलने पर ‘unable to perform action due to maintainance activity’ का एरर पॉप-अप दिखाई दे रहा है। वहीं, आईआरसीटीसी साइट पर ‘Sorry!!! Please Try again!!’ का मैसेज आ रहा है।
सोशल मीडिया पर कई यूजर इस आउटेज पर कड़ी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। एक यूजर ने रेल मंत्री और रेल मंत्री को टैग करके कहा, ‘सुबह 10 बजे IRCTC की साइट क्रैश हो जाती है और जब यह खुलती है, तो सभी तत्काल टिकट बुक जाते हैं। यह स्कैम नहीं तो क्या है।
एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘भारत चांद पर पहुंच गया, लेकिन भारतीय रेलवे टिकट बुकिंग ऐप क्रैश हुए बिना तत्काल बुकिंग को संभाल नहीं सकता। यह 2024 है, और एक स्टेबल सर्वर रखना कोई रॉकेट साइंस नहीं होना चाहिए!’
IRCTC की साइट इससे पहले 9 दिसंबर को भी एक घंटे के लिए बंद रही थी।
उसकी वजह भी ई-टिकटिंग प्लेटफॉर्म ने मेंटिनेंस बतया था। आज की समस्या से वे यात्री काफी नाराज हैं, जो तत्काल टिकट बुक करने की कोशिश कर रहे थे। यह ट्रेन के प्रारंभिक स्टेशन से छूटने से एक दिन पहले बुक किए जा सकते हैं। एसी क्लास की बुकिंग सुबह 10 बजे से शुरू होती है और नॉन-एसी क्लास बुकिंग सुबह 11 बजे से शुरू होती है।

GYM के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग, दो युवकों की मौत, एक की हालत गंभीर

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यमुनानगर में एक दिल दिखाने वाली घटना सामने आई है। यहां जिम से बाहर निकलते वक्त युवकों पर फायरिंग कर दी, जससे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार खंड रादौर के खेड़ी लक्खा सिंह में तीन युवकों पर बाइक सवार नकाबपोशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जिसमें यूपी के मखमूलपुर निवासी पंकज मलिक, गांव गोलनी निवासी वीरेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उन्हेड़ी गांव के अर्जुन की गंभीर हालत है।

घायल युवक को गाबा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, पुलिस बदमाशों की तलाश में जुट गई है। आसपास मौजूद लोगों के अनुसार नकाबपोश करीब पांच लोग थे, जो दो बाइकों पर थे। नकाबपोशों ने उस दौरान तीनों युवकों पर फायरिंग की, जब तीनों पॉवर जीएम से बाहर निकलकर कार में बैठ रहे थे।

एसपी राजीव देशवाल ने गाबा अस्पताल में पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। उनका कहना है कि नकाबपोशों की धरपकड़ के लिए टीमें तुरंत गठित कर दी गई है। मामला गैंगवार से भी जुड़ा लग रहा है।

 

प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा, भाजपा आज लगा सकती है मुहर

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देहरादूनः उत्तराखंड में नगर निकाय के चुनावों का ऐलान हो चुका है। भाजपा, कांग्रेस प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा कर रही है। दावेदारों के पैनलों पर दो दिन मंथन करने के बाद भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति प्रत्याशियों के नामों पर आज मुहर लगाएगी। माना जा रहा है कि सहमति बनने की स्थिति में आज ही नामों की पहली लिस्ट भी जारी की जा सकती है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि नगर निगम के मेयर पद को छोड़कर दो-तीन दिन में पार्टी अपने सभी प्रत्याशियों की घोषणा कर देगी। चुनाव संचालन समिति में मेयर पद के तैयार पैनलों में शामिल नामों पर विचार तो होगा, लेकिन निर्णय केंद्रीय चुनाव संचालन समिति करेगी।

भाजपा ने गढ़वाल क्षेत्र के नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के अध्यक्ष, सभासद व पार्षद पदों के लिए तैयार किए गए पैनलों पर बारी-बारी से विचार-विमर्श कर लिया है।

प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार ने जिला टोली कमेटियों में शामिल जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों, क्षेत्रीय विधायकों, पर्यवेक्षकों और 2022 में चुनाव हारे प्रत्याशियों के साथ एक-एक नाम पर चर्चा कर ली गई है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मिला बांग्लादेशी हिंदुओं का प्रतिनिधिमंडल, शंकराचार्य ने कहा-उनकी पीड़ा सुना भी भयावह था

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ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि  बांग्लादेश की वर्तमान परिस्थितियों के बारे में सब पता है। वहां 5 अगस्त 2024 के बाद उत्पन्न हुए राजनीतिक संकट के कारण  व्याप्त अराजकता के बारे में रोज नई-नई खबरें सामने आ रही हैं। हालात भयावह हैं, जो खबरें आ रही हैं वह किसी भी सभ्य समाज को दहलाने के लिए काफी हैं।

शंकराचार्य ने कहा कि बांग्लादेश के अतीत और इतिहास के बारे में विस्तार से वर्णन करने की जरूरत नहीं है। लेकिन, बांग्लादेश से 12 सदस्यों का प्रतिनिधिमण्डल दिल्ली से विदुषी मधु किश्वर जी के साथ मुझसे मिला, उसके बाद चर्चा करनी जरूरी है। मधु जी ने मुझसे पहले बात की थी कि बांग्लादेश के कुछ हिन्दू आपसे मिलकर अपनी व्यथा बताना चाहते हैं।

शंकराचार्य ने कहा कि मैं पिछले दिनों शीतकालीन चारधाम की यात्रा कर रहा था, जिसमे मेरे साथ भारत के विभिन्न प्रान्तों से आए करीब 100 लोगों का एक बड़ा समूह भी था, यह बेहद सफल यात्रा थी, जिसमे मुझे भगवान के दर्शन-पूजन के साथ-साथ समाज के विभिन्न लोगों के साथ सुखद सान्निध्य का अवसर भी प्राप्त हुआ। इस यात्रा की समाप्ति पर मुझे पहले से तय आगे की यात्रा और कार्यक्रमों में जाना था पर बीच में समय निकाल कर मैं काशी आया, क्योंकि मुझे लगा कि काशी इसके लिए उचित और सबके लिए सुविधाजनक स्थान था। कल सायं मधु जी के साथ आए बांग्लादेशी हिन्दुओं के इस प्रतिनिधिमण्डल से मैं मिला।

यह बैठक कल भगवान केदारेश्वर के सान्निध्य में गंगा के मध्यधार में रखी गई, क्योंकि मां गंगा हम सबके सन्तापों को हरने वाली और भारत को बांग्लादेश को जोड़ने वाली सभी सनातनधर्मियों की धात्री माता हैं और मन की पीड़ा को सुनने-सुनाने के लिए इससे उचित स्थान और क्या हो सकता था? मैंने बांग्लादेश से आए हुए सभी हिन्दुओं से बारी-बारी से बात की, सबने अपनी-अपनी पीड़ा और अनुभव बताए।

इस प्रतिनिधिमण्डल में आए हुए लोग समाज के अलग-अलग क्षेत्रों, व्यवसायों से आए हुए लोग थे, जिनमें से कइयों को बहुत मजबूर हालात में बांग्लादेश छोड़कर अन्य देशों में शरणार्थी बनकर जीना पड़ रहा है। इन सब लोगों के बीच जो एक बात समान थी वह थी हिन्दू होने के नाते उनका उत्पीड़न, उनकी सम्पत्ति की लूट, हत्या, आगजनी और उनकी बहन-बेटियों के साथ होने वाला पाशविक व्यवहार।

बांग्लादेश से आए इन हिन्दुओं से मैंने पूछा कि आप लोग अपना धर्म क्यों नहीं बदल लेते, जिससे आपकी सभी विपत्तियां एक साथ समाप्त हो सकती हैं? इस पर उनका उत्तर था कि जिसने मुस्लिम धर्म के बारे में जान लिया वह मरते दम तक इस्लाम स्वीकार करने के बारे में सोच भी नहीं सकते। उनके इस उत्तर से मेरा मन भर आया।

मैंने सोचा कि बांग्लादेश के ये बहादुर हिन्दू भारत के उन कुछ हिन्दुओं से तो बहुत बेहतर हैं जो थोड़े से लालच में अपने पूर्वजों का मान बेच देते हैं, अपना धर्म बदल लेते हैं। बांग्लादेश में जैसा कल मुझे बांग्लादेशी हिन्दुओं ने बताया जो कुछ हो रहा है, वह भयावह, शर्मनाक और हृदय को द्रवित करने वाला है। वहां भारत के राष्ट्रीय ध्वज को जूते से रौन्दते हुए हिन्दुओं से कहा जा रहा है कि तुम सब अपने देश भारत चले जाओ, बांग्लादेश में तुम्हारी जगह नहीं है।

सरकारी नौकरियों में काम करने वाले हिन्दुओं को जबरदस्ती नौकरी से त्यागपत्र देने के लिए मजबूर किया जा रहा है और ऐसी अपमानजनक स्थिति बनाई जा रही है कि हिन्दू नौकरी से स्वयं त्यागपत्र दे दें। मन्दिरों की मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है, चढ़ावे के पैसे को लूटा जा रहा है, पुजारियों की हत्याएं की जा रही हैं। रात के अँधेरे और दिन के उजाले में दरवाजों को खुलवाकर जबरदस्ती बहन-बेटियों का अपहरण किया जा रहा है, उनके साथ दुराचार कर उन्हें मार दिया जा रहा है और यहाँ तक कि मर जाने के बाद भी उनके साथ दुराचार किया जा रहा है।

धर्मान्तरण के लिए उन पर भारी दबाव है और मना करने पर जान से मार देने के खतरे भी हैं। इन लोगों ने बताया कि यह स्थिति अनायास ही एक दिन में नहीं बनी, वर्षों से हिन्दुओ के साथ बांग्लादेश में यह सब चल रहा है। पहले भी चुनाव हारने पर या फिर किसी भी छोटे बड़े कारणों से हिन्दुओ की हत्या और उनके सम्पत्तियों की लूट पहले भी होती रही और कठमुल्ले उन्हें धर्म बदलने का दबाव पहले भी लगातार डालते रहे।

मन्दिरों को तोड़ना, उनकी सम्पत्तियों की लूट की घटनाएँ पहले भी होती थी पर जब से मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश में सरकार के सलाहकार बन कर सत्ता में आए हैं तब से इन घटनाओं में कई गुना वृद्धि हुई है जो अब दिन प्रतिदिन और ज्यादा भयावह होती जा रही है। एक घटना बताते हुए एक सदस्य ने कहा कि हिन्दू की राइस मिल जला कर उसमे मौजूद 26,000 बोरी चावल भीड़ लूट ले गई और बाद में मिल में आग लगा दिया।

निराशा, अपमान, आर्थिक रूप से विपन्न होने और अवसाद की स्थिति में हिन्दुओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। जो हिन्दू बांग्लादेश से बाहर जाना चाहते हैं उन्हें बांग्लादेश छोड़ने की अनुमति नहीं मिल रही हैं। ऐसे में जरूरी काम, शिक्षा, व्यवसाय और बीमारियों के इलाज के लिए बांग्लादेशी हिन्दू कहाँ जाएँ? हिन्दुओं से उनकी खेती की जमीन छीन ली जा रही है।

बांग्लादेशी मुस्लिम विद्वान् प्रो. का. अब्दुल बरकत के अनुसार हिन्दुओं से उनकी करीब 26 लाख एकड़ जमीन 2008 तक छीन ली गई। हिन्दुओं को जो बांग्लादेश के बराबर के हकदार और वहां के नागरिक हैं उन्हें काफिर कहकर अपमानित किया जाता है। हत्या और लूट की शिकायत करने पर पुलिस कोई करवाई नहीं करती, उल्टे शिकायतकर्ता हिन्दुओं को ही धमकाती है। इस प्रकार हिन्दुओं पर दो तरफा मार है।

हिन्दुओं के पास ऐसी स्थिति में अपनी दुर्दशा पर सिवाय आँसू बहाने के क्या उपाय है? यही कारण है कि बांग्लादेश में पिछले 25 सालों में कम से कम 30 लाख बांग्लादेशी हिन्दुओं को कत्ल-ए-आम किया गया और करीब करोड़ों हिन्दू पुरुष, स्त्री, बच्चे गायब हो चुके हैं। निर्माण के समय वहाॅ जहाँ हिन्दुओं की कुल आबादी लगभग 23 फीसदी थी वह अब घट कर शायद 7 फीसदी गई है। बाकी की आबादी कहाँ गई? मार दी गई, पलायन कर गई या फिर जोर जबरदस्ती से उसका धर्म बदल दिया गया।

इसके उलट भारत में मुसलमानों की आबादी लगातार बढ़ी, वक्फ की सम्पति के नाम पर जमीनों पर बेजा कब्जे के कारण अकूत जमीन मुसलमानों के पास आई। भारत में हर राजनीतिक दल को मुसलमानों की चिन्ता है क्योंकि उनके पास वोट की ताकत है पर बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ कोई खड़ा होने के लिए तैयार नहीं है।

भारत में कोई राजनैतिक दल बांग्लादेश के हिन्दुओं की दुर्दशा पर बोलने के लिए तैयार नहीं है जबकि फिलिस्तीन और यूक्रेन पर सभी काफी मुखर है। उन्हें पश्चिम एशिया और यूरोप की चिंता है पर अपने पड़ोस में 80 साल पहले तक भारत का अंग रहे बांग्लादेशी हिन्दुओं की फिक्र करने में भय लगता है। इसका कारण आप सबको पता है इस पर विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है।

बांग्लादेश का हिन्दू अपनी बहन की शादी किसी मुसलमान से करने के लिए तैयार नहीं है, वह उनकी शिक्षाओं और आज के बांग्लादेश के अराजक व्यवहार को अपनाने के लिए भी तैयार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश के हिन्दू अपनी मेहनत का खाते हैं पर किसके सामने हाथ नहीं फैलाते। मुझसे भी इन हिन्दुओं ने पैसे की मदद जुटाने के लिए मदद की गुहार नहीं की बल्कि कहा कि वह अपने हितों और सम्मान के लिए लड़ते हुए मरना पसन्द करेंगे किन्तु किसी के सामने अपमानित और हाथ फैलाना पसन्द नहीं करेंगे।

उनकी बातों में दर्द के साथ हिन्दू होने का गौरव भी झलक रहा था पर उनका मन भारी था, हृदय में पीड़ा थी क्योंकि अपमान और बेबसी का एहसास उनके मन को विदीर्ण कर रहा था। बांग्लादेश में चिन्मय iskon के सन्त जिन्हें अब iskon ने अपने संगठन से निकाल दिया है कि जेल भेजे जाने की बात भी उठी जिनके कैस की अगली सुनवाई की तारीख 2 जनवरी 2025 है।

मैने पूरे ध्यान से बांग्लादेशी हिन्दू प्रनिधिमण्डल की बातें गंगाजी की धार के मध्य गंगाजी की गोद में क्योंकि मां से बड़ा रक्षक कोई और नहीं होता; पूरे मनोयोग से शान्तिपूर्वक सुना और उनसे ही इस परिस्थिति से निकलने का उपाय पूछा तब उन्होंने कहा कि वह लोग शंकराचार्य पीठ के शरणागत हैं। क्योंकि हम हिन्दू धार्मिक होने के कारण ही सताए जा रहे हैं और हिन्दू धर्म के आप शंकराचार्य सर्वोच्च धर्माचार्य हैं। हमारे धार्मिक अभिभावक हैं। आपका जो भी निर्देश होगा वह लोग उसका पालन करेंगे।

मेरी सीमाएं हैं और पीठ की मर्यादायें भी हैं जिस कारण मैं एक सीमा में ही कुछ कह सकता हूँ पर मेरे मन में इनकी पीड़ा से उपजी अकथ व्यथा है, जिसको बता पाना मुश्किल है। मैं इनके लिए कुछ करना चाहता था पर क्या करूँ? इस प्रश्न का समाधान मिल नही रहा था। मैने एक बार फिर उनसे ही पूछा कि वह क्या चाहते है? उन्होंने कुछ मांगे रखीं जो मैं आप लोगों से साझा कर रहा हूं।

1. हिन्दुओं के लिए बांगलादेश में एक अलग राष्ट्र जो भारत की सीमा से लगते हुए क्षेत्र के पास हो या फिर हिन्दुओं के लिए स्वायत्त सेफ जोन जिसमें बांग्लादेश सरकार का ज्यादा दखल न हो।

2. भारत और बांग्लादेश के बीच आबादी की अदला बदली जिसने बांग्लादेश की हिन्दू आबादी भारत में और उसी के अनुपात में सुविधाजनक रूप में मुस्लिम आबादी का बांग्लादेश को भेजा जाय।

3. नागरिकता संशोधन कानून के अधीन नियत तारीख के पूर्व तक भारत में निवास करते रहने की बाध्यता को समाप्त करके इसे सदा के लिए खोल दिया जाए जिससे नियत देशों से कभी भी भारत आने वाला हिन्दू जो भारत की नागरिकता की मंशा जाहिर करे, वह भारत का नागरिक बन सके।

4. दुनिया में कहीं भी जन्म लेने वाले हिन्दू को स्वाभाविक रूप से भारत का नागरिक माना जाए जैसा कि इजरायल में होता है।

5. बांग्लादेश के वह हिन्दू जो 5 अगस्त 2024 के पहले भारत में वीजा पर आए थे और वीजा अवधि खत्म होने के बाद वापस बांग्लादेश लौटने पर विवश हों, उनकी वीजा अवधि को तब तक बढ़ाया जाए जब तक बांग्लादेश में स्थिति सामान्य न हो जाय।

6. जबरदस्ती रोजगार और नौकरी से निकाले गए हिन्दुओं के लिए रोजगार की व्यवस्था जिससे की हिन्दू सम्मानपूर्ण तरीके से अपनी जीविका कमा सकें।

7. बांग्लादेश में हिन्दुओं के समर्थन और सहयोग के लिए, वस्तुस्थिति के मूल्यांकन के लिए शंकराचार्य पीठ की तरफ से एक प्रतिनिधिमण्डल का भेजा जाना जो बांग्लादेश के हिन्दुओं का मनोबल बढ़ा सके।

इन मांगों और इनके अतिरिक्त उन्होंने जो अपील हमें दी है, उसमें की गयी उनकी मांगों को भी हम समर्थन देते हैं।मुझे लगता है कि यह मांगें उचित हैं और हमें इनके लिए प्रयास करना चाहिए। यद्यपि की इन प्रयासों का परिणाम आने में समय लगेगा और यह भी कि इतने प्रयासों मात्र से हिन्दुओं के हृदय का क्षोभ और पीड़ा कम होने वाली नहीं है पर प्रयासों को कहीं से तो शुरू करना होगा।

इसलिए हम कम से कम इतने से शुरू तो करें और आगे के रास्ते अपने आप बनेंगे और ईश्वर ने चाहा तो परिस्थितियां जल्दी ही बदलेंगी और भगवान हिन्दुओं के पीड़ा की जल्दी ही सुध लेंगे क्योंकि भगवान के घर देर है अंधेर नहीं।

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड के बाहर आपस में भिड़े खालिस्तानी और भारतीय समर्थक

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के तहत पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है। इस टेस्ट सीरीज का चौथा टेस्ट मैच मेलबर्न में खेला जा रहा है। इस टेस्ट मैच की शुरुआत से पहले मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) के बाहर खालिस्तानी और भारतीय समर्थक भिड़ गए।
एक दर्जन खालिस्तानी झंडा लेकर भारत विरोधी नारे लगा रहे जिसका भारतीय लोगों ने जमकर विरोध किया। भारतीय समर्थकों ने भारत जिंदाबाद के नारे लगाकर उनका मुंह चुप करा दिया। वहीं इस भिड़ंत को लेकर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है।
दरअसल, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का चौथा टेस्ट मैच आज यानी 26 दिसंबर से मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जा रहा है। इस टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया।
इस टेस्ट मैच से पहले मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड के बाहर खालिस्तानी और भारतीय समथर्क के बीच झड़प देखने को मिली। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे खालिस्तान समर्थकों और भारतीय फैंस हाथ में झंडा लेकर आपस में लगातार नारे लगाकर आपस में भिड़ रहे हैं।
यह घटना आज सुबह की है, जब भारतीय प्रशंसकों का खालिस्तानी समर्थकों से टकराव हुआ, जिन्हें विक्टोरिया पुलिस ने बाद में वहां से हटाया। मेलबर्न टेस्ट मैच की टिकट नहीं होने के बावजूद खालिस्तानी समर्थक केवल हंगामा मचाने के लिए सुबह पहुंचे थे। हालांकि, स्थिति को जल्दी ही नियंत्रित कर लिया गया। इस पूरी घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है।

संसद भवन के पास सुसाइड की कोशिश, शख्स ने खुद को लगाई आग

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नई दिल्ली। नए संसद भवन स्थित रेल भवन के सामने गोल चक्कर पर एक व्यक्ति ने खुद को आग लगाकर आत्मदाह की कोशिश की। बताया जा रहा कि जितेंद्र नाम का व्यक्ति उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।

युवक की इस हरकत के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल को आरएमएल अस्पताल ले जाया गया है। उसका इलाज जारी है।

एसएसबी के स्थापना दिवस पर कमांडेंट सुवर्णा सजवाण सम्मानित

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महिला सशक्तिकरण की मिसाल

सशत्र सेवा बल के स्थापना दिवस पर सुवर्णा सजवाण को गृहमंत्री ने पुलिस पदक प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया।

• इसी वर्ष गणतंत्र दिवस पर
राष्ट्रपति द्रोपदी मूर्म ने पुलिस पदक प्रशस्ति पत्र से किया सम्मानित

• क्षेत्रीय लोगों तथा पारिवारिक सदस्यों ने की सराहना

• महिला सशक्तिकरण हेतु कर रही कार्य।

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देहरादून: सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी)के 61 वें स्थापना दिवस पर सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल )में इसी माह 20 दिसंबर शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में देश के गृह मंत्री अमित शाह ने देहरादून निवासी एसएसबी कमांडेंट सुवर्णा सजवाण को उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए भारतीय पुलिस पदक एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। इससे पहले उन्हें राष्टपति ने पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

वर्तमान में सुवर्णा सजवाण पटना में 40 वीं बटालियन एसएसबी की कमांडेंट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 2002 में सहायक कमांडेंट के पद पर एसएसबी में प्रथम कंबेटाइज्ड महिला अधिकारी के तौर पर शामिल होकर अपने करियर की शुरुआत की थी।
सुभाष नगर देहरादून की निवासी सुवर्णा सजवाण को देश के गृह मंत्री अमित शाह ने सराहनीय सेवाओं के लिए विगत बीस दिसंबर को शुक्रवार को भारतीय पुलिस पदक समेत प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भी इसी वर्ष गणतंत्र दिवस पर उन्हें पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

सुवर्णा सजवाण को सम्मान मिलने से उनके निवास सुभाष नगर ,देहरादून और ससुराल कांसखेत,पौड़ी गढ़वाल में खुशी की लहर है।उनको यह सम्मान मिलने पर पिता हरीश चंद्र सिंह रावत तथा माता सुरेशी रावत एवं पारिवारिक लोगों, सगे संबंधियों सहित क्षेत्र के लोगो ने प्रसन्नता जतायी है।

उल्लेखनीय है कि सशस्त्र सीमा बल में अपने 22 वर्ष के कार्यकाल के दौरान सुवर्णा सजवाण ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया जिसमे मुख्यतः भारत नेपाल बॉर्डर ड्यूटी, ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण देना , बल मुख्यालय में कमांडेंट रिक्रूटमेंट के पद पर रहते हुए कई भर्तियों में अपना अमूल्य योगदान शामिल है।

इन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम पर विभिन्न कार्यशालाओं का आयोजन किया है।इन्होंने एसएसबी में महिलाओं को मुख्य धारा में जोड़ने हेतु कई महत्वपूर्ण कदम उठाये।वर्तमान में एसएसबी मुख्यतः भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा करती है।

बड़ा बस हादसा, तीन की मौत, 27 लोग थे सवार

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नैनीताल: भीमताल में बड़ा हादसा हो गया है। अल्मोड़ा से हल्द्वानी आ रही रोडवेज बस भीमताल-रानीबाग मोटर मार्ग के आमडाली के पास 1500 फिट गहरी खाई में जा गिरी। बस में 27 लोग सवार थे। अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कई यात्री घायल हैं।

पुलिस और अन्य राहत-बचाव दलों ने घायलों को रस्सी और कंधों पर रखकर पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से सड़क पर लाया गया है। सड़क से सीएचसी भीमताल ले जाया गया है। रेस्क्यू अभियान जारी है।
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15 एम्बुलेंस हल्द्वानी भेजी गई है। बड़े स्तर पर बचाव दल चल रहा है। खड़ी चढ़ाई होने से मरीजों को लाने में परेशानी हो रही है। एसपी एसपी सिटी, नैनीताल डॉ. जगदीश चन्द्र ने बताया कि घायलों को इलाज के लिए हायर सेंटर हल्द्वानी भेजा जा रहा।

सड़क दुर्घटना में नैनीताल पुलिस व राहत बचाव दल का रेस्क्यू अभियान जारी है। अब तक 24 घायल यात्रियों का सकुशल रेस्क्यू किया गया है।

राष्ट्रीय खेलः  35 दिनों में 3823 किलोमीटर का रास्ता नापेगी मशाल रैली

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Dehradun : 38 वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए माहौल बनता जा रहा है। राष्ट्रीय खेलों की मशाल (टार्च) अब उत्तराखंड के कोने-कोने में घूमकर रोशनी फैलाने के लिए तैयार है। हल्द्वानी से गुरूवार 26 दिसंबर को मशाल रैली का आयोजन किया जा रहा है। इसके बाद, सभी 13 जिलों के 99 स्थानों पर यह मशाल घूमेगी और राष्ट्रीय खेलों के लिए जागरूकता फैलाएगी।

मशाल रैली का जो 35 दिन का रूट प्लान तैयार किया गया है, उसमें यह रैली 3823 किलोमीटर का सफर तय करेगी। 26 दिसंबर 2024 से 27 जनवरी 2025 तक मशाल रैली का कार्यक्रम तय किया गया है। मशाल रैली जिस दिन समाप्त होगी, उसके अगले दिन यानी 28 जनवरी 2025 को राष्ट्रीय खेलों का विधिवत शुभारंभ हो जाएगा।

मशाल रैली के रूट प्लान में सभी 13 जिलों को कवर किया गया है। सबसे ज्यादा 14-14 स्थान अल्मोड़ा व पौड़ी जैसे जिले में हैं, जहां पर मशाल घूमेेगी। जिस तरह का कार्यक्रम तय किया गया है, उसमेें मशाल किसी भी जिले में दो से तीन दिन तक ही रहेगी।

इस तरह का है मशाल रैली का रूट

  • नैनीताल(26-27 दिसंबर 2024)

हल्द्वानी, भीमताल, धारी, ओखलकांडा, बेतालघाट, भवाली, नैनीताल, कालाढूंगी, रामनगर।

  • उधमसिंहनगर(28-29 दिसंबर 2024)
    काशीपुर, जसपुर, बाजपुर, गदरपुर, रूद्रपुर, सितारगंज, खटीमा।
  • चंपावत(30-31 दिसंबर 2024)

बनबसा, टनकपुर, चंपावत, लोहाघाट, पाटी, बाराकोट।

  • पिथौरागढ़(01-02 जनवरी 2025)

पिथौरागढ़, मूनाकोेट, कनालीछीना, धारचूला, जौैलजीबी, मदकोट, मुनस्यारी, थल, डीडीहाट, बेरीनाग, गंगोलीहाट।

  • अल्मोड़ा-(03 से 05 जनवरी 2025)

दन्या, लमगड़ा, अल्मोड़ा, ताकुला, हवालबाग, तारीखेत, तिपोला, भिकियासैंण, सल्ट, स्याल्दे, चैखुटिया, द्वाराहाट, सोमेश्वर, कौसानी।

  • बागेश्वर(06 से 08 जनवरी 2025)

गरूड़, बागेश्वर, कपकोट, ग्वालदम।

  • चमोली-(09 से 11 जनवरी 2025)

देवाल, थराली, नारायणबगड़, गैरसैंण, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग, चमोली, ज्योर्तिमठ, गोपेश्वर, पोखरी।

  • रूद्रप्रयाग(12 से 14 जनवरी 2025)

पोखरी, ऊखीमठ, अगस्त्यमुनि, जखोली।

  • टिहरी-(15 से 16 जनवरी 2025)

घनसाली, नई टिहरी, कीर्तिनगर, देवप्रयाग, नरेंद्रनगर, चंबा।

  • उत्तरकाशी-(17 से 19 जनवरी 2025)

चिन्यालीसौड़, डुंडा, उत्तरकाशी, भटवाड़ी, बड़कोट, पुरोला, मोरी, नौगांव, मसूरी।

  • हरिद्वार-(20-21 जनवरी 2025)

हरिद्वार, भगवानपुर, रूड़की, खानपुर, लक्सर, हरिद्वार।

  • पौड़ी-(22 से 24 जनवरी 2025)

पौड़ी, कोटद्वार, लैंसडौन, रिखणीखाल, बीरोंखाल, धुमाकोट, थलीसैंण, पाबौ, पौड़ी, कल्जीखाल, सतपुली, गुमखाल, यमकेेश्वर,

  • लक्ष्मणझूला, ऋषिकेश।

देहरादून-(25 से 27 जनवरी 2025)

राष्ट्रीय खेलों के लिए जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मशाल रैली का हल्द्वानी से शुभारंभ किया जा रहा है। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। मशाल रैली पूरे उत्तराखंड मेें घूमेगी। साथ ही साथ प्रचार केे लिए अन्य तमाम कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

  • अमित सिन्हा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय खेल सचिवालय।

कांग्रेस प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि ने मेयर पद के लिए पेश की दावेदारी

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देहरादून : राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निकाय चुनाव की तिथि घोषित करने के बाद से भाजपा और कांग्रेस पार्टी में दावेदारों का सिलसिला लगातार जारी है।

इसी कड़ी में राजधानी देहरादून के कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में देहरादून के मेयर पद के लिए कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि ने अपनी दावेदारी पेश की।

इस बीच राजीव महर्षि ने कहा कि आज देहरादून की जो स्थिति है, उससे जनता बहुत ही ज्यादा त्रस्त है और स्मार्ट सिटी के नाम पर देहरादून की भोली भाली जनता के साथ छल किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमने देहरादून के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार किया है और अगर पार्टी हमें अवसर देती है तो हम उसे धरातल पर उतारने का प्रयास करेंगे।