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बड़ी खबर: उत्तरकाशी में लगातार भूकंप के दो झटके, इतनी थी तीव्रता

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उत्तरकाशी, 24 जनवरी 2025 – उत्तरकाशी में आज सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 3.5 दर्ज की गई है। भूकंप के झटके सुबह 8:19 बजे महसूस किए गए।

 

जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा भूकंप के बारे में सभी तहसीलों से जानकारी मांगी जा रही है। अभी तक किसी भी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है।

 

भूकंप के झटके उत्तरकाशी के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी महसूस किए गए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

 

Earthquake of Magnitude: 3.5, Occured on: 24/01/2025 08:19:28 IST, Lat: 30.85 N, Long: 78.60 E, Depth: 5 Km, Region: Uttarkashi, Uttarakhand. More details at www.seismo.gov.i.

देहरादून में यहां चुनाव का किया बहिष्कार, 400 में से पड़े केवल इतने वोट!

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देहरादून: नगर निकाय चुनाव को लेकर जहां लोग वोट डालने के लिए लाइनों में हैं, वहीं, दूसरी और चुनाव का बहिष्कार भी किया जा रहा है. ऐसा ही एक मामला देहरादून नगर निगम के केसरवाला में सामने आया है. यहां पर 400 करीब वोटर हैं, जिनमें से सिर्फ एक ही वोट पड़ा है.

जानकारी के अनुसार देहरादून के मालदेवता क्षेत्र के केसरवाला में लोगों ने चुनाव का बहिष्कार किया है. लोगों का कहना है कि मुनकी मर्जी के बिना केसरवाला को नगर निगम में जोड़ दिया गया. नगर निगम के शामिल होने के बाद केसरवाला को कोई सुविधा भी नहीं मिली. क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की लंबे समय से मांग है, लेकिन, नगर निगम का कोई भी अधिकारी यहां देखने तक नहीं आया.

उन्होंने कहा कि वैसे भी यह ग्रामीण क्षेत्र है. इसे नगर निगम में जोड़ने की कोई जरूरत नहीं थी.  एक और मुद्दा केसरवाला क्षेत्र के से होकर जाने वाली सड़क है, जो कैंट एरिया में पड़ती है. पिछले चुनावों में नेताओं ने बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन किसीने भी दोबारा यहाँ आने की जहमत नहीं उठाई. इसके अलावा भी कई अन्य मसले भी हैं.

इसके चलते लोगों ने फैसला लिया कि निकाय चुनाव में मतदान का बहिष्कार किया जाएगा. यहां करीब 400 लोगों के नाम वोटर लिस्ट में हैं. उनमें से केवल एक-दो लोगों ने ही वोट डाले हैं. जिन्होंने मतदान किया है जो कि अब यहां से बाहर रहते हैं. केवल मतदान करने यहां आए थे.

मुंबई के स्कूल को मिली बम से उड़ाने की धमकी

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मुंबई के जोगेश्वरी-ओशिवारा क्षेत्र में एक स्कूल को बम की धमकी भरे ईमेल प्राप्त हुए। इस घटना के तुरंत बाद स्कूल की सुरक्षा बढ़ा दी गई। इसके साथ ही स्थानीय कानून प्रवर्तन और विस्फोटक जांच कर्मियों को स्कूल परिसर की जांच करने के लिए भेजा गया है। इस मामले की जानकारी मुंबई पुलिस के हवाले से सामने आई है।

ईमेल मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ते की टीम स्कूल पहुंची है। घटनास्थल पर जांच शुरू हो गई है। अधिकारी धमकी की पुष्टि करने के लिए काम कर रहे हैं। अभी तक स्कूल में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है। हालांकि, अधिकारी अपनी तलाशी जारी रखे हुए हैं।

वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम गायब, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी नहीं डाल पाए वोट

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देहरादून: उत्तराखंड में 100 नगर निकायों के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं। लोगों में वोटिंग को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। वोटर सुबह से ही लाइनों में लग गए थे। लेकिन, बड़ी संख्या में वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से गायब मिले। इससे लोगों में निराशा भी देखी गई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तक का नाम वोटर लिस्ट से गायब मिला। नगर निकाय चुनाव में 2 बजे तक 42.19 फीसदी वोटिंग हो चुकी है।

मतदान के दिन कई वोटर अपना वोट ढूंढने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं. इसमें न केवल आम आदमी बल्कि बड़े ओहदे पर बैठ चुके पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी शामिल हैं। कई लोगों के परिवार के किसी भी सदस्य का नाम लिस्ट में नहीं है। लोग बूथों के चक्कर काटते रहे। लेकिन, उनका नाम नहीं मिल पाया।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का नाम वोटर लिस्ट में खोजा गया। अलग-अलग बूथों पर उन्होंने भी चक्कर लगाए, लेकिन कहीं भी उनका नमा नहीं था। यही स्थिति पहाड़ से लेकर मैदान तक देखने को मिली। इससे चुनाव आयोग के दावों की भी पोल खुल गई।

चुनाव आयोग बार-बार दावे कर रहा था कि सभी तरह से वोटर लिस्टों की जांच कर ली गई है। कई लोग ऐसे भी हैं, जो सालों से अपने बूथ पर बोट देते आ रहे है। लोकसभा चुनाव में भी मतदान किया था। लेकिन, अब पंचायत चुनावों के उनको नाम वोटर लिस्ट से गायब है। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर ऐसे कैसे हो सकता ह?

कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि उनके नाम वोटर लिस्ट से किसी आधार पर हटाए गए। एक तरफ वोटिंग के लिए जागरूक किया जा रहा है और जब मतदाता पोलिंग बूथ पर पहुंच रहा है, तो उसके वोट गायब है। इस स्थिति के लिए कोई जिम्मेदार है, इसकी जांच की जानी चाहिए।

हरक पर ईडी का एक्शन, 70 करोड़ की 101 बीघा जमीन अटैच

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ईडी ने एक बार फिर से अपना चाबुक चलाया। ईडी ने त्रिवेंद्र सरकार में वन मंत्री रहे हरक सिंह रावत पर बड़ी कार्रवाई की है जो वर्तमान मे़ कांग्रेस में हैं। ईडी ने हरक सिंह की सहसपुर स्थित 70 करोड़ रुपए की करीब 101 बीघा भूमि को प्रारंभिक रूप से अटैच कर लिया है। इस भूमि पर दून इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस का संचालन किया जाता है। जिसके प्रबंधन हरक सिंह के पुत्र तुषित संभालते हैं। दिसंबर 2024 में जब ईडी ने दोनों प्रकरण में जांच और पूछताछ तेज की थी, तभी से माना जा रहा था कि ईडी कुछ बड़ा करने वाली है।

ईडी के सूत्रों के अनुसार पूर्व वन मंत्री हरक सिंह रावत के करीबी बीरेंद्र सिंह कंडारी और नरेंद्र कुमार वालिया ने हरक सिंह रावत के साथ आपराधिक साजिश करते हुए एक जमीन की 02 पवार ऑफ अटॉर्नी पंजीकृत कराई। हालांकि, कोर्ट ने संबंधित भूमि के विक्रय विलेख रद्द कर दिए थे। बावजूद इसके भूमि को अवैध रूप से हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत और उनकी करीबी लक्ष्मी राणा को बेचा जाना दिखाया गया। दिसंबर 2024 में ईडी प्रकरण में हरक सिंह की पत्नी दीप्ति रावत, करीबी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी राणा के साथ ही पुत्र तुषित रावत को पूछताछ के लिए बुला चुकी है। उस दौरान ईडी ने सहसपुर की भूमि को लेकर भी तमाम सवाल किए थे। अब यह कार्रवाई बताती है कि भूमि खरीद को ईडी अधिकारियों ने मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा माना है।

ईडी ने हरक सिंह रावत से जुड़े कार्बेट टाइगर सफारी के घपले के साथ भूमि खरीद प्रकरण पर भी जांच शुरू की थी। जबकि ईडी फरवरी 2024 में दोनों मामलों में उत्तराखंड समेत हरियाणा व दिल्ली में 17 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी भी कर चुकी है। जिसमें ईडी की 17 टीमों ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के देहरादून में डिफेंस कालोनी स्थित आवास, उनके बेटे के सहसपुर के शंकरपुर स्थित दून इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज समेत उनसे जुड़े करीबी अधिकारियों उत्तराखंड के वरिष्ठ आइएफएस अधिकारी सुशांत पटनायक व पेड़ कटान में आरोपित सेवानिवृत्त प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) किशन चंद के हरिद्वार के आवास पर जांच की थी।

साथ ही हरक सिंह रावत के निजी सचिव रहे बीरेंद्र कंडारी के दून स्थित आवास, उनके करीबी नरेंद्र वालिया के ऋषिकेश में गंगानगर स्थित अपार्टमेंट, हरिद्वार रोड पर छिद्दरवाला स्थित लक्ष्मी राणा के अमरावती पेट्रोल पंप, काशीपुर में भाजपा के जिला मंत्री अमित सिंह के आलू फार्म स्थित आवास पर भी जांच की गई। इसके अलावा हरक सिंह रावत के श्रीनगर गढ़वाल में श्रीकोट स्थित गहड़ के पैतृक आवास और उनके करीबियों के अन्य ठिकानों को कवर किया गया था।

छापेमारी में ईडी ने 1.10 करोड़ रुपये, 80 लाख रुपये का 1.3 किलो सोना, 10 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा जब्त की थी। साथ ही उल्लेख किया गया था कि कार्रवाई में कई बैंक लॉकर्स, डिजिटल डिवाइस को सीज किया गया है और अचल संपत्ति के बड़ी संख्या में दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इसके बाद ईडी जरूरत पड़ने पर समन भेजकर हरक सिंह रावत समेत उनकी पत्नी दीप्ति रावत, पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं, लक्ष्मी राणा और अन्य को बुलाती आ रही है।

बड़ी खबर : ईंट भट्ठे से पकड़े गए 17 बांग्लादेशी नागरिक

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रेवाड़ी: हरियाणा के रेवाड़ी से बड़ी खबर है। पुलिस ने 17 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है। रामपुरा थाना पुलिस और गुप्तचर विभाग को सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम ने मिलकर एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।

जानकारी के अनुसार सहारणवास गांव के पास स्थित एक ईंट भट्ठे से में 17 बांग्लादेशी नागरिक मिले हैं। पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने रेड की और इन नागरिकों को हिरासत में लिया।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये सभी बांग्लादेशी नागरिक बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे थे। अब पुलिस पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ये यहां कब से रहे थे। माना जा रहा है कि पुलिस को अहम जानकारी हाथ लग सकती है।

राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली में सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के झांकी के कलाकारों को मिला द्वितीय पुरस्कार।

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नई दिल्ली 22 जनवरी 2024। राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली में आयोजित प्रतियोगिता में विभिन्न प्रदेशों एवं मंत्रालयों की झांकी कलाकारों द्वारा अपने-अपने प्रदेशों की संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं नृत्य प्रस्तुत किये गए।

प्रतियोगिता में बेस्ट 3 राज्यो में उत्तराखंड राज्य को बेस्ट द्वितीय स्थान में पुरस्कार प्राप्त हुआ। उत्तराखंड गठन के बाद उत्तराखंड की झांकी के कलाकारों को यह पुरस्कार दूसरी बार प्राप्त हुआ है। इससे पूर्व, वर्ष 2018 में उत्तराखण्ड के झांकी के कलाकारों को तृतीय स्थान पर पुरस्कार प्राप्त हुआ था। उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस परेड के लिए उत्तराखंड की झांकी में सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक एवं टीम लीडर के0एस0 चौहान के नेतृत्व में उत्तराखंड राज्य से 16 कलाकार गणतंत्र दिवस परेड में उत्तराखंड झांकी में भाग ले रहे हैं।
उत्तराखंड राज्य के सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक एवं टीम लीडर के0एस0 चौहान ने बताया कि गणतंत्र दिवस परेड में देश के विभिन्न राज्यों से कलाकार आते हैं इन कलाकारों से भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रतियोगिता कराई जाती है जिसमे एक दल को केवल 3ः30 मिनट का समय दिया जाता है। निर्धारित समय मे अपने अपने लोक संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत करने होते हैं। जिसमें, उत्तराखंड राज्य के कलाकारों ने “प्रसिद्ध जागर गायन एवं लोकनृत्य छपेली” इस प्रतियोगिता में प्रस्तुत की गयी। जिसको भारत सरकार द्वारा गठित समिति ने पुरस्कार के लिए चयनित किया इस “प्रसिद्ध जागर गायन एवं लोकनृत्य छपेली” में उत्तराखंड राज्य की लोक संस्कृति की झलक को समिति द्वारा बहुत पसंद किया गया जिसके कारण उत्तराखंड राज्य को यह पुरस्कार प्राप्त हो सका। श्री चौहान ने कहा कि झांकी के कलाकरों ने 14 जनवरी, 2025 से प्रतिदिन कठोर अभ्यास कर इस उपलब्धि को प्राप्त किया है। देश में दूसरे स्थान पर पहुंचकर यह पुरस्कार पाना उत्तराखंड राज्य के लिए गौरव की बात है। इस पुरस्कार के मिलने से राज्य की झांकी में प्रतिभाग कर रहे कलाकार बहुत प्रफुल्लित है।
इस प्रतियोगिता में पुरस्कार प्राप्त होने से उत्तराखंड राज्य के कलाकार अब 26 जनवरी के बाद राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास एवं उपराष्ट्रपति ,रक्षामंत्री तथा जनजातीय मंत्री के समक्ष भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।
उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस परेड में इस वर्ष उत्तराखंड राज्य द्वारा “सांस्कृतिक विरासत एवं साहसिक खेल” की थीम पर झांकी का प्रदर्शन कर्तव्य पथ पर किया जाएगा।

SAIF ALI KHAN CASE : शिवसेना नेता ने उठाए सवाल, क्या इतनी जल्दी ठीक होना संभव है?

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शिवसेना नेता संजय निरुपम ने फिल्म अभिनेता सैफ अली खान (SAIF ALI KHAN CASE) पर हुए हमले को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। संजय निरुपम (SANJAY NIRUPAM) ने मामले को संदिग्ध बताया और गंभीर हमले के बाद इतनी जल्दी सैफ अली खान की रिकवरी पर हैरानी जताई। सैफ अली खान मंगलवार को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अपने घर लौट आए। शिव सेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि ‘एक ढाई इंच का चाकू उन्हें मारा गया था और उनकी सर्जरी हुई थी, लेकिन चार दिन बाद ही सैफ अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए और लगभग उछलते हुए अपने घर वापस आए।

ऐसा लगा जैसे मानो कुछ हुआ ही नहीं था। क्या इतनी जल्दी रिकवरी होना संभव है?’ एक मीडिया चैनल से बातचीत में संजय निरुपम ने कहा कि ‘हम सभी चाहते हैं कि सैफ जल्दी ठीक हो। जब हमला हुआ तो इसने पूरे मुंबई शहर पर असर डाला। सरकार की कार्यक्षमता पर सवाल उठे। शिवसेना नेता ने अस्पताल का सीसीटीवी फुटेज न होने पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि अस्पताल का दावा है कि सैफ जब अस्पताल में भर्ती हुए तो वे खून से लथपथ थे, लेकिन जब वे अस्पताल पहुंचे तो उसका सीसीटीवी फुटेज कहां है? क्या कोई छोटा बच्चा अपने पिता को ऐसी हालत में अस्पताल लेकर जा सकता है? सैफ के घर में काम करने वाले आठ कर्मचारी हैं, तो ऐसे में सैफ पर इतना बड़ा हमला कैसे हुआ? संजय निरुपम ने पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाए और पूरे मामले को ही संदिग्ध बता दिया।

संजय निरुपम ने कहा कि ‘पुलिस की जांच भी सवालों के घेरे में है। पुलिस ने तीन दिनों में तीन अलग-अलग आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी के बांग्लादेशी होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस की जांच से भी शक हो रहा है। इस मामले में स्पष्टता से जांच होनी चाहिए ताकि पता चल सके कि असल में क्या हुआ था।
सैफ अली खान पर हुए हमले के बाद देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ गए थे। विपक्षी नेताओं ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर महायुति सरकार को घेरने की कोशिश की। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था और कहा था कि एक घटना से पूरे महाराष्ट्र या मुंबई को असुरक्षित कहना सही नहीं है।

30 लाख से अधिक मतदाता करेंगे 5405 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

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उत्तराखंड की 100 नगर निकायों के लिए कल 23 जनवरी को होने वाले मतदान के लिए 30 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार के मुताबिक, मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार बंद कर दिया गया है। यह नियम चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए लागू किया गया है।

उन्होंने बताया कि चुनाव में कुल 5405 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें 11 नगर निगमों में मेयर पद के लिए 72 प्रत्याशी, 89 नगर पालिका और नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए 445 प्रत्याशी और पार्षद व वार्ड सदस्य पदों के लिए 4888 प्रत्याशी शामिल हैं। राज्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनावों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने व्यापक तैयारियां की हैं।

कुल 30,29,000 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान के लिए 1515 मतदान केंद्र और 3394 मतदेय स्थल बनाए गए हैं। चुनाव प्रक्रिया के लिए 16,284 चुनाव कर्मी और 25,800 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। साथ ही पोलिंग पार्टियों के आवागमन के लिए 846 हल्के और 572 भारी वाहनों की व्यवस्था की गई है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। संवेदनशील एवंअति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ सीसीटीवी कैमरों और वेबकास्टिंग के जरिए भी निगरानी की जाएगी।

जनपद देहरादून की अगर बार करे तो जनपद में 438 मतदान केन्द्र हैं तथा 1071 पोलिंग बूथ हैं, जिनमें 25 पिंक बूथ (20 देहरादून व 05 ऋषिकेश) शामिल हैं। जनपद में 141 संवेदनशील केन्द्र व 380 संवेदनशील स्थल हैं तथा 114 अति संवेदनशील केन्द्र तथा 302 अति संवेदनशील स्थल है। जनपद में निर्वाचन हेतु 27 जोनल अधिकारी तथा 63 सेक्टर अधिकारी नियुक्त हैं, कुल 4704 मतदान कर्मिक तथा 1454 मतगणना कार्मिकों की तैनाती की गई है।

महायुति में तनाव, डिप्टी CM शिंदे क्यों नाराज?

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महाराष्ट्र : महायुति गठबंधन ने साथ में चुनाव लड़कर बंपर बहुमत हासिल किया है। हालांकि, कई अंदरूनी मुद्दों पर भाजपा, शिवसेना और राकांपा का यह गठबंधन अंदरूनी कलह से जूझता दिखा है। फिर चाहे वह महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री पद को लेकर उभरा तनाव हो या मंत्री पद के बंटवारे पर सामने आए मतभेद।

तीनों ही दलों को इन मुद्दों पर आमने-सामने देखा गया। हालांकि, इन पार्टियों के नेतृत्व ने बाद में आपसी सामंजस्य से विवादों को दूर कर लिया। हालांकि, अब एक बार फिर महायुति में जिलों के प्रभारी मत्रियों की नियुक्ति को लेकर मतभेद बताया जा रहा है।

महाराष्ट्र में एक साधारण मंत्री परिषद के अलावा जिलों के प्रभारी मंत्रियों (जिन्हें प्रभारी मंत्री भी कहते हैं) की भी नियुक्ति की जाती है। यह प्रभारी मंत्री अलग-अलग जिलों के कामकाज की निगरानी के लिए नियुक्त किए जाते हैं और इनकी अपने जिलों के प्रति अलग से जिम्मेदारी तय होती है।

यानी अगर किसी नेता को किसी जिले का प्रभारी मंत्री बनाया जाता है, तो उसकी यह जिम्मेदारी मंत्री परिषद में उसको दी गई जिम्मेदारी से अलग और अतिरिक्त होती है। महाराष्ट्र में जिलों के प्रभारी मंत्रियों का पद कैबिनेट स्तर के बराबर का पद होता है और इनकी नियुक्ति भी सत्तासीन सरकार ही करती है।

महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस ने नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली के लिए खुद को प्रभारी मंत्री घोषित किया है, जबकि शिवसेना के आशीष जायसवाल को इसी जिले का संयुक्त प्रभारी मंत्री बनाया। बताया जाता है कि जब एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, तत वह गढ़चिरौली का प्रभार चाहते थे, हालांकि उन्हें यह पद नहीं दिया गया था। ऐसे में इस जिले को लेकर भी महायुति में नाराजगी की बातें सामने आई हैं। इसके अलावा अन्य जिलों की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।