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उत्तरकाशी में फिर महसूस किए गए भूकंप के झटके

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उत्तरकाशी जिले में मंगलवार दोपहर 3:28 बजे हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 2.07 मापी गई, जिसका केंद्र तहसील भटवाड़ी के ग्राम साल्ड उपरिकोट और निसमोर के मध्य वन क्षेत्र में था।

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भूकंप की गहराई 5 किमी दर्ज की गई। जिला मुख्यालय और संगमचट्टी क्षेत्र में झटके महसूस किए गए, जबकि अन्य तहसीलों में इसका प्रभाव नगण्य रहा।

फिलहाल किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जिले में स्थिति सामान्य बनी हुई है।

 

महाकुंभ भगदड़ में उत्तराखंड की एक महिला की भी मौत

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प्रयागराज/किच्छा: महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच प्रयागराज के संगम पर मची भगदड़ में उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा निवासी एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई। मृतका की पहचान गुड्डी देवी (57), निवासी वार्ड 3, किशोर अस्पताल के पास, किच्छा के रूप में हुई है।

तीन बसों से रवाना हुए थे श्रद्धालु

जानकारी के मुताबिक, किच्छा से सोमवार रात को श्रद्धालुओं का एक दल महाकुंभ स्नान के लिए तीन बसों से प्रयागराज रवाना हुआ था। इसी दल में गुड्डी देवी भी अपने बेटे और बहू के साथ शामिल थीं। लेकिन, संगम क्षेत्र में जबरदस्त भीड़ के चलते भगदड़ मच गई, जिसमें गुड्डी देवी अपने परिवार से बिछड़ गईं और भीड़ में कुचलकर उनकी दर्दनाक मौत हो गई।

सुबह बरामद हुआ शव

परिजनों के अनुसार, भगदड़ के दौरान गुड्डी देवी अपने बेटे और बहू से अलग हो गई थीं, जिसके बाद उनका कोई पता नहीं चल पाया। काफी खोजबीन के बाद मंगलवार सुबह करीब छह बजे उनका शव बरामद हुआ। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने अभी तक शव को परिजनों को नहीं सौंपा है। इस दर्दनाक घटना से मृतका के परिवार में कोहराम मच गया है। वहीं, प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही शव कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

प्रशासन अलर्ट

महाकुंभ में उमड़ती भारी भीड़ के कारण प्रशासन अलर्ट पर है और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया।

महाकुंभ के लिए उत्तराखंड सरकार ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार प्रदेश से प्रयागराज महाकुंभ स्नान के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की सहायता हेतु टोल फ्री नंबर जारी किए हैं। महाकुंभ में शामिल होने वाले उत्तराखंडवासियों को किसी भी प्रकार की सहायता या आपातकालीन स्थिति में मदद के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए हैं।

प्रदेश के श्रद्धालु 1070, 8218867005, 90584 41404 पर कॉल कर किसी भी प्रकार की सहायता प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का यह कदम महाकुंभ में जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सरकार ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि यदि उन्हें यात्रा के दौरान किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वे तुरंत इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। प्रशासन हरसंभव मदद के लिए तत्पर रहेगा।

सुरक्षा और सुविधा के व्यापक इंतजाम

महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने प्रयागराज प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया है। कुंभ स्थल पर उत्तराखंड से आए श्रद्धालुओं के लिए विशेष सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं, जहां उन्हें जरूरी जानकारी और सहायता प्रदान की जाएगी।

सरकार ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे यात्रा के दौरान सतर्क रहें, आवश्यक दस्तावेज साथ रखें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।

श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

यात्रा के दौरान जरूरी कागजात और आईडी प्रूफ अपने पास रखें।

हेल्पलाइन नंबरों को सेव करके रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता ली जा सके।

प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सतर्क रहें।

उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास महाकुंभ में जाने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

दूल्हे की बरात पहुंची, लेकिन…न दुल्हन मिली, न उसका घर

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शिमला: हिमाचल प्रदेश के हरोली क्षेत्र के सिंगा गांव में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई, जिसने सभी को हैरान कर दिया। मंगलवार को एक युवक पूरी शान-ओ-शौकत से सज-धजकर, सेहरा बांधकर अपनी बरात के साथ दुल्हन के घर पहुंचा, लेकिन वहां न तो दुल्हन मिली और न ही कोई शादी का घर।

 

कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के एक गांव से बरात गाड़ियों में सवार होकर जब सिंगा गांव पहुंची, तो वहां के ग्रामीण भी हैरान रह गए। जब बरातियों ने शादी वाले घर के बारे में पूछा, तो गांव वालों ने साफ कह दिया कि यहां ऐसी कोई शादी नहीं हो रही। दूल्हा पक्ष को यकीन नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने दुल्हन की फोटो दिखाकर पूछताछ की। ग्रामीणों ने जब फोटो देखी, तो साफ कहा कि यह लड़की उनके गांव की नहीं है। यह सुनते ही बरातियों के होश उड़ गए।

 

बरात में मौजूद वह महिला, जिसने यह रिश्ता तय करवाया था, गाड़ी से उतरी और कहा कि शादी इसी गांव में है। उसने बताया कि गांव में किसी की मौत हो गई है, इसलिए टेंट कहीं और लगाया गया है। उसने यह भी कहा कि वह लड़की के घर जाकर पता करके आती है और फिर अपने पति के साथ गाड़ी में बैठकर वहां से चली गई।

 

समय बीतता गया, लेकिन वह महिला वापस नहीं आई। जब बरातियों और ग्रामीणों को शक हुआ, तो उन्होंने महिला को फोन किया। महिला ने फोन पर बताया कि लड़की ने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया है और उसे पंजाब के नवांशहर अस्पताल ले जाया जा रहा है। इस पर संदेह और बढ़ गया।

 

कुछ लोगों ने दूसरी गाड़ी लेकर महिला का पीछा किया और उसे पकड़कर वापस सिंगा गांव ले आए। इसके बाद बरातियों और महिला के बीच विवाद बढ़ने लगा। मामला गंभीर होता देख पंचायत के प्रतिनिधि और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।

 

पुलिस ने दोनों पक्षों को पंचायत घर में बैठाकर मामला शांत करवाने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों ने बताया कि यह मामला थाना सदर क्षेत्र के तहत आता है, क्योंकि रिश्ता करवाने वाली महिला और दूल्हा पक्ष दोनों एक ही गांव से हैं। पुलिस ने कहा कि यदि उन्हें कोई शिकायत करनी है, तो थाना सदर में दर्ज करवाएं।

 

शाम करीब पांच बजे दोनों पक्ष सिंगा गांव से रवाना हो गए, लेकिन कोई भी थाना सदर नहीं पहुंचा। अब इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि वे बुधवार को शिकायत दर्ज करवाएंगे या नहीं।

 

डीएसपी हरोली मोहन रावत ने बताया कि पुलिस टीम ने पूरे मामले की जानकारी जुटाई है। जांच में यह मामला थाना सदर के अंतर्गत आने वाले गांव से जुड़ा पाया गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाना सदर जाकर मामला दर्ज करवाने के लिए कहा है। यदि वे शिकायत दर्ज करवाते हैं, तो आगे की कार्रवाई वहीं से होगी।

 

इस पूरी घटना से यह संदेह गहरा गया है कि कहीं यह शादी के नाम पर ठगी की साजिश तो नहीं थी। रिश्ता करवाने वाली महिला का फरार होना, दुल्हन और उसके घर का अस्तित्व ही न होना, और फिर लड़की के जहरीला पदार्थ खाने की झूठी कहानी गढ़ना—इन सभी पहलुओं पर पुलिस गहराई से जांच कर रही है।

Pryagraj Mhakumbh : मुख्यमंत्री योगी की श्रद्धालुओं से अपील, जो जहां है, उसी घाट पर करें स्नान, अफवाहों से बचें

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प्रयागराज : मौनी अमावस्या के पावन स्नान पर्व पर प्रयागराज में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। कुंभ नगरी में आस्था की लहरें चरम पर हैं, जहां संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिए लाखों भक्तों का जनसागर उमड़ पड़ा है।

सीएम योगी की अपील – निकटतम घाटों पर करें स्नान

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे संगम नोज की ओर जाने के बजाय अपने नजदीकी घाटों पर ही स्नान करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने विभिन्न घाटों पर पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, जिससे सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सुविधाजनक ढंग से स्नान कर सकें। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने और मेला प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की भी अपील की।

धर्मगुरुओं की अपील – अफवाहों से बचें, संयम बरतें

मुख्यमंत्री योगी के अलावा विभिन्न संतों और धर्मगुरुओं ने भी श्रद्धालुओं से संयम बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि श्रद्धालुओं को संगम में स्नान करने की जिद छोड़कर अपने नजदीकी घाटों पर ही स्नान करना चाहिए। उन्होंने वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख संत के रूप में सभी अखाड़ों और श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अफवाहों से बचें और सुरक्षित रहें।

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बाबा रामदेव और महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी का संदेश

योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि मौनी अमावस्या के इस पावन पर्व पर भारी भीड़ को देखते हुए उन्होंने केवल सांकेतिक स्नान किया है और राष्ट्र एवं विश्व कल्याण की कामना की है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भक्ति के अतिरेक में न बहने और आत्म अनुशासन का पालन करने की सलाह दी। इसी तरह, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने भी कहा कि उन्होंने सांकेतिक स्नान किया है और श्रद्धालुओं को संयम बरतने की सलाह दी।

अखाड़ा परिषद की चिंता – श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने बताया कि इस बार प्रयागराज में 12 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं, जिससे मेला प्रशासन के लिए भीड़ को नियंत्रित करना एक चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। अखाड़ों और संत समाज की प्राथमिकता भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मौनी अमावस्या पर उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस बल, स्वयंसेवक और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें। मौनी अमावस्या पर संगम में आस्था की डुबकी लगाने के लिए करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे हैं। हालांकि, भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और धर्मगुरु संयम बरतने और निकटतम घाटों पर स्नान करने की अपील कर रहे हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच यह पर्व पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।

महाकुंभ में मची भगदड़, 17 श्रद्धालुओं की मौत की आशंका!

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प्रयागराज : महाकुंभ में मंगलवार देर रात संगम तट पर भीषण भगदड़ मच गई, जिसमें 17 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने के कारण लोग घबरा गए और भगदड़ मच गई। इस हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया।

कैसे हुआ हादसा?

रात करीब दो बजे संगम तट पर स्नान के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हो गए। भीड़ इतनी बढ़ गई कि प्रशासन के लिए इसे नियंत्रित कर पाना मुश्किल हो गया। अचानक बैरिकेडिंग टूटने के कारण अफरा-तफरी मच गई और लोग एक-दूसरे को धक्का देने लगे। इस भगदड़ में कई श्रद्धालु गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए।

प्रशासन की कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की और राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने संतों से अपने शिविर में रहने की अपील की है ताकि और कोई अनहोनी न हो।

घायलों के लिए ग्रीन कॉरिडोर और एयर एंबुलेंस की व्यवस्था

प्रशासन ने घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया। कई घायलों को एयर एंबुलेंस से बड़े अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। महाकुंभ नगर के केंद्रीय अस्पताल में घायलों का इलाज जारी है।

क्राउड मैनेजमेंट प्लान लागू

भगदड़ की घटना के बाद प्रशासन ने क्राउड डायवर्जन प्लान लागू कर दिया। शहर के बाहर ही श्रद्धालुओं के जत्थों को रोक दिया गया है। 10 से ज्यादा जिलाधिकारियों को भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है। संगम जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग लगाई गई और श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई आपबीती

घटना के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सुरक्षा इंतजामों में बड़ी लापरवाही थी। श्रद्धालु त्रिभुवन ने बताया कि उनके आठ-नौ साथियों में से पांच लापता हैं। उन्होंने मेला प्रशासन को पूरी तरह से हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

अमृत स्नान स्थगित

इस हादसे के बाद प्रशासन ने अमृत स्नान स्थगित करने की अपील की, जिसे अखाड़ों ने स्वीकार कर लिया। सुबह 5 बजे श्री महानिर्वाणी और अटल अखाड़ा को स्नान करना था, लेकिन अब इसे आगे टाल दिया गया है।

पुलिस और प्रशासन अलर्ट

रामबाग रेलवे स्टेशन पर पुलिसकर्मियों को अलर्ट कर दिया गया।

संगम मार्गों पर सीसीटीवी फुटेज खंगालने का काम जारी है।

जौनपुर और अन्य जिलों में प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालुओं को रोका गया है।

पीडीडीयू जंक्शन (मुगलसराय) से प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों को रोक दिया गया है।

अफवाह के कारण मची भगदड़: मेलाधिकारी

महाकुंभ मेलाधिकारी विजय किरण आनंद ने बताया कि अफवाह के कारण भगदड़ हुई। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, इस हादसे में 17 लोगों की मौत हुई है और 50 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

श्रद्धालुओं से अपील

अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि संगम की ओर न जाएं और अन्य घाटों पर स्नान करें। प्रशासन पूरी तरह से राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।

यह हादसा महाकुंभ जैसे भव्य आयोजन में सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन को अब भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और मजबूत उपाय करने होंगे।

राष्ट्रीय खेलों का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया शुभारंभ

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उत्तराखंड में 38वें राष्ट्रीय खेलों का रंगारंग शुभारंभ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले खेलों से बढ़ती है देश की साख

भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में स्पोर्ट़स इकोनॉमी की भी रहेगी अहम भूमिकाIMG 20250128 WA0110

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक संबोधन और अधिकारिक उद्घोषणा के साथ ही मंगलवार शाम से उत्तराखंड में 38वें राष्ट्रीय खेलों का रंगारंग शुभारंभ हो गया है।
मंगलवार शाम को देहरादून में राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड आज युवा ऊर्जा से और भी दिव्य हो उठा है, बाबा केदार, बद्ररीनाथ जी, मां गंगा के शुभाशीष के साथ आज यहां नेशनल गेम्स शुरू हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये वर्ष उत्तराखंड के निर्माण का 25वां वर्ष भी है, इस खास अवसर पर इस युवा राज्य में देश के अलग- अलग हिस्सों से आए, हजारों युवा अपना सामर्थ्य दिखाने वाले हैं। इससे यहां एक भारत, श्रेष्ठ भारत की सुंदर तस्वीर नजर आ रही है। प्रधानमंत्री ने शानदार आयोजन के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी टीम को बधाई दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अब देश में सालभर कई खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, खेलो इंडिया सीरीज में कई सारे नए टूर्नामेंट जोड़े गए हैं। खेलो इंडिया यूथ गेम्स की वजह से युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिला है। इसी तरह यूनिवर्सिटी गेम्स और पैरा ओलंपिक गेम्स से भी मौके बढ़े हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले लद्दाख में खेलो इंडिया विंटर गेम्स का पांचवां संस्करण शुरु हुआ है। पिछले साल ही बीच गेम्स का भी आयोजन किया। सरकार के साथ ही भाजपा सांसद भी सांसद निधि से खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि अकेले काशी संसदीय क्षेत्र में आयोजित हो रही खेल प्रतियोगिता में हर साल करीब ढाई लाख युवाओं को खेलने का मौका मिल रहा है।

*खेल से बढ़ती है देश की प्रोफाइल*
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई देश खेल में आगे बढ़ता है तो, देश की साख और प्रोफाइल भी बढ़ती है। इसलिए सरकार खेल को विकास से जोड़कर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की तीसरी बडी आर्थिक शक्ति बन रहा है तो इसमें स्पोर्ट्स इकोनॉमी का भी अहम योगदान होने जा रहा है। इससे खिलाड़ी ही नहीं बल्कि सहायक स्टॉफ से लेकर मैन्यूफैक्चर तक जुड़े होते हैं। उन्होने कहा कि भारत खेल सामग्री उत्पादन का हब बनता जा रहा है। अकेले मेरठ में खेल सामग्री निर्माण की 35 हजार से अधिक यूनिट हैं, जहां तीन लाख लोग काम कर रहे हैं।

*पीएम यानि परम मित्र*
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दिनों उनसे मिलने ओलंपिक टीम के सदस्य आए थे, उस दौरान एक खिलाड़ी ने पीएम की नई परिभाषा बताई, जिसके अनुसार खिलाड़ी पीएम को प्राइम मिनिस्टर नहीं बल्कि परम मित्र कह कर बुलाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि दस साल में खेल का बजट तीन गुना बढ़ गया है, टॉप स्कीम के तहत दर्जनों खिलाड़ियों पर सैकडों करोड़ रुपए का निवेश हो रहा है। देशभर में आधुनिक खेल सुविधाओं का विकास हो रहा है। देश की पहली खेल यूनिवर्सिटी मणिपुर में है। सरकार के प्रयासों का असर पदक तालिका के रूप में नजर आ रहा है। देश के साथ ही उत्तराखंड के खिलाड़ी भी मैडल जीत रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हॉकी के गौरवशाली दिन वापस लौट रहे हैं। कुछ दिन पहले ही खो – खो टीम ने वर्ल्ड कप जीता है। अब युवा खेल को प्रमुख कैरियर के रूप में अपना रहे हैं।

*2036 में ओलंपिक आयोजन का प्रयास*
प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे हमारे खिलाड़ी हमेशा बड़े लक्ष्य लेकर चलते हैं, वैसे ही हमारा देश भी बडे संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। इसलिए भारत 2036 में ओलंपिक की मेजबानी का प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां भी ओलंपिक होते हैं वहां अनेक सेक्टर को गति मिलती है। खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाए बनती हैं। ठीक ऐसे ही नेशनल गेम्स से यहां देवभूमि उत्तराखंड को अनेक लाभ मिलेंगे।

*यूसीसी समानता के लिए*
प्रधानमंत्री ने कहा कि बाबा केदार के दर्शन के बाद उनके मुंह से अचानक ही निकला था, कि 21वीं सदी का ये दशक, उत्तराखंड के नाम होने जा रहा है। अब उन्हें खुशी है कि राज्य तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कल ही उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला राज्य बन गया है। यूसीसी सही मायने में सेक्युलर सिविल कोड है, जो हमारी बेटियों, माताओं और बहनों के गरिमापूर्ण जीवन का आधार बनेगा। इससे लोकतंत्र की भावना भी मजबूत होगी। कहा कि जैसे हर मैडल के पीछे सबको साथ लेकर चलने की भावना छुपी होती है, यही भावना यूसीसी में भी है।

*शीतकालीन यात्रा पर सरकार के प्रयासों को सराहा*
उन्होंने राज्य सरकार की पीठ थपथपाते हुए कहा कि उत्तराखंड में पहली बार इतने बडे पैमाने पर नेशनल ईवेंट हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था सिर्फ चारधाम यात्रा पर ही निर्भर नहीं रह सकती है। इसी दिशा में उत्तराखंड ने अब शीतकालीन यात्रा को भी प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड उनका दूसरा घर है, इसलिए उनकी भी शीतकालीन यात्रा का हिस्सा बनने की इच्छा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शीतकाल के दौरान उत्तराखंड में युवाओं के लिए एडवेंचर टूरिज्म के लिए भी कई अवसर होते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से भी शीतकालीन टूरिज्म का आनंद उठाने की अपील की। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से फिटनेस पर ध्यान देने की अपील करते हुए मोटापे की समस्या के प्रति सचेत रहते हुए खान पान पर ध्यान देने की भी अपील की है। खासकर अपने खान पान में तेल की खपत कम करनी होगी।

दर्शकों की मोबाइल फ्लैश लाइट करवाई ऑन
प्रधानमंत्री ने नेशनल गेम्स की विधिवत शुरुआत करते हुए कहा कि वैसे तो ये उनका दायित्व है लेकिन वो चाहते हैं कि स्टेडियम में मौजूद सभी लोग मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर, उनका साथ दें, जिस पर उपस्थित जन समुदाय ने मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर प्रधानमंत्री का साथ दिया।

देहरादून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया 38वें राष्ट्रीय खेलों का शुभारंभ

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देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों का भव्य उद्घाटन किया। यह प्रतिष्ठित आयोजन 28 जनवरी से 14 फरवरी 2025 तक चलेगा, जिसमें देशभर से 9,545 खिलाड़ी विभिन्न 34 खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

उद्घाटन समारोह का भव्य आयोजन

यह ऐतिहासिक उद्घाटन समारोह देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में आयोजित किया गया। इस मौके पर देश के प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल, इंडियन आइडल विजेता पवनदीप राजन और पहाड़ी बैंड ‘पांडवाज’ ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

समारोह की एक और खास बात रही शांतिकुंज के 2,500 वॉलंटियर्स द्वारा सामूहिक शंखनाद, जिसने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया और माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “यह आयोजन भारत की खेल संस्कृति को और अधिक सशक्त करेगा। उत्तराखंड की भूमि से राष्ट्रीय खेलों का आयोजन एक ऐतिहासिक अवसर है, जो देश के युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करेगा।”

उन्होंने उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने इस आयोजन के लिए शानदार तैयारियां की हैं, जिससे खिलाड़ियों को बेहतरीन सुविधाएं मिलेंगी।

खेल प्रतियोगिताओं की शुरुआत और समापन समारोह

प्रधानमंत्री मोदी के उद्घाटन के बाद, 29 जनवरी से विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं की शुरुआत होगी। ये प्रतियोगिताएं सुबह 6 बजे से देर रात तक चलेंगी, जहां देशभर के बेहतरीन खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

इस भव्य आयोजन का समापन समारोह 14 फरवरी को हल्द्वानी में आयोजित किया जाएगा, जिसमें विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा और राष्ट्रीय खेलों की सफलता का जश्न मनाया जाएगा।

भारत और श्रीलंका के बीच बढ़ा तनाव, मछुआरों पर श्रीलंकाई नौसेना की गोलीबारी

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नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच एक बार फिर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मंगलवार को श्रीलंकाई नौसेना द्वारा डेल्फ़्ट द्वीप के पास 13 भारतीय मछुआरों को पकड़ने के दौरान गोलीबारी की घटना सामने आई। इस घटना के दौरान मछली पकड़ने वाले मछुआरे नाव पर सवार थे।

घटना का विवरण मंगलवार सुबह भारतीय मछुआरे डेल्फ़्ट द्वीप के पास समुद्र में मछली पकड़ रहे थे, तभी श्रीलंकाई नौसेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया और उन पर गोलीबारी की। इस हमले में 5 मछुआरे गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत जाफना टीचिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।

भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध इस घटना पर भारत सरकार ने सख्त प्रतिक्रिया दी। गुरुवार को नई दिल्ली में श्रीलंका के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब कर कड़ा विरोध जताया गया। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी इस मामले को श्रीलंका सरकार के विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाया है।

बयान में यह भी कहा गया कि भारत सरकार हमेशा मछुआरों से जुड़े मुद्दों को मानवीय और संवेदनशील तरीके से हल करने पर बल देती रही है। इसमें मछुआरों की आजीविका संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखने की जरूरत बताई गई। भारत ने साफ तौर पर कहा कि किसी भी परिस्थिति में बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं है और दोनों सरकारों के बीच इस संबंध में मौजूदा सहमति का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

घायलों की स्थिति और सहायता भारत सरकार की ओर से जाफना स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों ने अस्पताल में भर्ती घायल मछुआरों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। भारतीय अधिकारी मछुआरों और उनके परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।

मछुआरों की गिरफ्तारी और नाव जब्त बताया जा रहा है कि 13 भारतीय मछुआरों को श्रीलंकाई नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा को पार करने और श्रीलंका के जल क्षेत्र में मछली पकड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया। इसके साथ ही उनकी नावों को भी जब्त कर लिया गया है।

भारत-श्रीलंका के बीच तनाव बढ़ने की आशंका यह पहली बार नहीं है जब भारतीय मछुआरों को श्रीलंकाई नौसेना द्वारा निशाना बनाया गया हो। पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता रहा है। भारत सरकार की सख्त प्रतिक्रिया से यह संकेत मिलता है कि इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए राजनयिक प्रयास तेज किए जाएंगे।

स्थिति पर नजर बनाए रखते हुए भारत सरकार ने इस घटना की पूरी जांच की मांग की है और श्रीलंकाई अधिकारियों से इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने का अनुरोध किया है।

 

चाइनीज AI टूल DeepSeek-R1 ने मचाया तहलका, OpenAI को दी कड़ी टक्कर

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक नई क्रांति आ गई है। चाइनीज स्टार्टअप DeepSeek द्वारा पेश किया गया नया एआई टूल DeepSeek-R1 ने दुनिया भर में तहलका मचा दिया है। इस टूल के लॉन्च होते ही टेक्नोलॉजी जगत में हड़कंप मच गया, यहां तक कि अमेरिका और यूरोप के बड़े तकनीकी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।

DeepSeek-R1: एक गेमचेंजर एआई टूल

चीन की कंपनी DeepSeek ने हाल ही में अपना नया लॉन्ग लैंग्वेज मॉडल (LLM) DeepSeek-R1 पेश किया है। यह मॉडल Mixture-of-Experts आर्किटेक्चर पर आधारित है और यह गणित, कोडिंग और सामान्य ज्ञान जैसे कार्यों में OpenAI के मॉडल o1 को कड़ी टक्कर दे रहा है।

सबसे खास बात यह है कि DeepSeek-R1, OpenAI के मॉडल की तुलना में 90-95% अधिक किफायती है, जिससे यह व्यापक रूप से उपयोग के लिए बेहद आकर्षक बन गया है। इसके अलावा, DeepSeek-R1 ओपन-सोर्स है, यानी इसे कोई भी मुफ्त में इस्तेमाल कर सकता है और डेवलपर्स इसके एपीआई को भी मुफ्त में एक्सेस कर सकते हैं।

शेयर मार्केट में आया भूचाल

DeepSeek-R1 के लॉन्च के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में हलचल मच गई। सोमवार को AI चिप्स के प्रमुख आपूर्तिकर्ता Nvidia के शेयरों में 14% की गिरावट देखी गई, जिससे कंपनी को 500 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ।

अमेरिका और यूरोप की अन्य तकनीकी कंपनियों ने भी गिरावट का सामना किया क्योंकि निवेशकों ने DeepSeek के कम लागत वाले दृष्टिकोण पर प्रतिक्रिया दी। OpenAI, गूगल और सिलिकॉन वैली की अन्य कंपनियां DeepSeek के इस कदम से परेशान नजर आ रही हैं।

DeepSeek-R1 की धुआंधार लोकप्रियता

DeepSeek-R1 के लॉन्च के बाद, यह पूरी दुनिया में तेजी से वायरल हो गया। महज 24 घंटे में Apple के App Store पर DeepSeek ऐप सबसे अधिक डाउनलोड किए जाने वाले फ्री ऐप्स की लिस्ट में शीर्ष पर पहुंच गया।

हालांकि, इसकी लोकप्रियता के बीच कंपनी पर एक बड़े साइबर अटैक की खबर भी सामने आई, जिसके चलते कंपनी ने नए रजिस्ट्रेशन पर अस्थायी रोक लगा दी। अब नए यूजर्स फिलहाल साइनअप नहीं कर पा रहे हैं, जिससे यूजर्स की बेसब्री बढ़ गई है।

OpenAI और DeepSeek की टक्कर

अब तक AI चैट टूल के मार्केट में OpenAI का ChatGPT एकछत्र राज कर रहा था, लेकिन DeepSeek के आने से यह बादशाहत खतरे में पड़ती दिख रही है।

  • OpenAI में करीब 4,000 कर्मचारी काम करते हैं, जबकि DeepSeek की टीम सिर्फ 200 लोगों की है। इसके बावजूद DeepSeek ने बेहद कम समय में दुनिया का ध्यान आकर्षित कर लिया है।
  • DeepSeek-R1, OpenAI के GPT मॉडल की तुलना में कम लागत में बेहतर परफॉर्मेंस देने का दावा कर रहा है।
  • DeepSeek-R1 फिलहाल फोटो और वीडियो जनरेशन में सक्षम नहीं है, लेकिन हिंदी, अंग्रेजी, चाइनीज, हिंग्लिश समेत कई भाषाओं में जवाब देने में सक्षम है।

DeepSeek की अगली रणनीति

DeepSeek का यह नया AI टूल न केवल OpenAI को चुनौती दे रहा है, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या OpenAI और अन्य टेक दिग्गज इस नई प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए कोई नया कदम उठाते हैं।

DeepSeek-R1 की सफलता के साथ, एआई स्पेस में प्रतिस्पर्धा नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है। क्या DeepSeek AI के नए बादशाह के रूप में उभरेगा? यह तो समय ही बताएगा।