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देहरादून के नए मेयर सौरभ थपलियाल ने संभाला कार्यभार

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देहरादून के नवनिर्वाचित मेयर सौरभ थपलियाल ने अपना कार्यभार संभालते ही शहर के विकास को लेकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने कहा कि संकल्प पत्र में किए गए सभी वादों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। शहर की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, जिसमें हरित दून, जलभराव की समस्या, यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।

मेयर थपलियाल ने कहा कि देहरादून को और अधिक हरा-भरा बनाने के लिए पार्कों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस पहल के तहत पार्कों का पुनर्विकास होगा और नए हरे भरे स्थान तैयार किए जाएंगे।

मेयर ने बताया कि शहर में 73 स्थानों पर जलभराव की समस्या चिह्नित की गई है। जल्द ही इन जगहों पर सुधार कार्य शुरू किया जाएगा ताकि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को रोका जा सके। इसके लिए ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा।

शहर में जाम और पार्किंग की समस्या को हल करने के लिए मेयर ने एक ठोस योजना तैयार की है। उन्होंने कहा कि नई पार्किंग स्थलों की पहचान की जा रही है और यातायात पुलिस के साथ समन्वय बनाकर जाम की समस्या के स्थायी समाधान पर काम किया जाएगा।

इसके अलावा, साइकिलिंग ट्रैक विकसित करने की भी योजना बनाई गई है, जिससे शहर में पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा दिया जा सके। शहर की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए सार्वजनिक स्थलों, पार्कों और प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इससे अपराध पर अंकुश लगाने के साथ-साथ शहरवासियों को अधिक सुरक्षित माहौल प्रदान किया जा सकेगा।

मेयर ने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता होगी। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में कैंप लगाकर नागरिकों की समस्याओं को सुना जाएगा और उनका त्वरित समाधान किया जाएगा। मेयर सौरभ थपलियाल ने स्पष्ट किया कि शहर को सुंदर, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और जल्द ही जमीनी स्तर पर बदलाव दिखने शुरू हो जाएंगे।

पंजाब के AAP विधायकों को केजरीवाल ने क्यों बुलाया था दिल्ली?

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आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के पंजाब के विधायकों को एकजुट रहने और जनता के हित में काम करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अब उनके पास राज्य पर विशेष ध्यान देने के लिए अधिक समय रहेगा।

पंजाब को जीतना प्राथमिकता
दिल्ली में पार्टी की हार के बावजूद, केजरीवाल ने पंजाब के विधायकों को उत्साहित करते हुए कहा कि पंजाब को मजबूत बनाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार जनता से किए गए सभी वादों को हर हाल में पूरा करेगी।

विधायकों के साथ बैठक में क्या बोले केजरीवाल?
दिल्ली में पंजाब के विधायकों के साथ बैठक के दौरान, केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि सरकार को जनता की सेवा पर विशेष ध्यान देना होगा। यदि किसी भी अधिकारी द्वारा काम में बाधा डाली जाती है, तो विधायक इसकी जानकारी उन तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में चुनाव परिणाम से हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि पार्टी ने पूरी मेहनत से चुनाव लड़ा है।

सीएम भगवंत मान का संदेश
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी विधायकों से कहा कि दिल्ली में मिली हार से निराश होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने अपने पहले चुनाव की हार को याद करते हुए कहा कि हार के बावजूद उन्होंने संघर्ष जारी रखा और जनता ने उन्हें दो बार संसद भेजा और फिर मुख्यमंत्री बनाया।

कांग्रेस पर पलटवार
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में भगवंत मान ने कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बाजवा पिछले तीन सालों से यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आम आदमी पार्टी के विधायक टूटकर कांग्रेस में शामिल होंगे, लेकिन AAP के नेताओं का ऐसा कोई इरादा नहीं है।

संघर्ष से निकली हुई पार्टी

मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी संघर्ष से निकली हुई पार्टी है, जो जनता के मुद्दों को समझकर उन्हें हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को दिल्ली में हार से ज्यादा खुशी उन लोगों को हो रही है, जिन्हें वहां बार-बार जनता ने नकार दिया है। AAP नेतृत्व ने इस बैठक के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी पंजाब में मजबूती से डटी हुई है और राज्य की जनता के लिए अपने वादों को पूरा करने के लिए पूरी तरह समर्पित है।

नहीं रहे उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक और हास्य कलाकार घनानंद ‘घन्ना भाई’

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देहरादून: उत्तराखंड के प्रसिद्ध हास्य कलाकार घनानंद उर्फ घन्ना भाई अब हमारे बीच नहीं रहे। गंभीर हालत में उन्हें देहरादून स्थित श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे पिछले चार दिनों से वेंटिलेटर पर थे। डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बावजूद, उन्होंने 11 फरवरी 2025 को अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर है।

लंबे समय से चल रहा था इलाज

लोक कला मंच से जुड़े “आवाज सुनो पहाड़ों की” कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक बलबीर सिंह पंवार और संयोजक नरेंद्र रौथाण ने बताया कि घन्ना भाई को पहले पेसमेकर लगाया गया था। वे नियमित रूप से हृदय संबंधी जांच कराते थे। कुछ दिन पहले उन्हें यूरिन में ब्लड आने की समस्या हुई थी, जिसके बाद वे अस्पताल पहुंचे। सामान्य जांच के दौरान रक्त चढ़ाने के बाद उनकी हालत और बिगड़ गई।

लोक मंच, रेडियो और सिनेमा में छोड़ी अमिट छाप

घन्ना भाई उत्तराखंड के रंगमंच, रेडियो और फिल्म जगत का बड़ा नाम थे। 1970 में रामलीला और लोक नाटकों से अपने करियर की शुरुआत करने वाले घन्ना भाई ने 1974 में रेडियो पर भी कई हास्य कार्यक्रम किए। इसके बाद वे दूरदर्शन तक पहुंचे और अपनी अनोखी संवाद शैली व हास्य प्रस्तुति से दर्शकों को खूब हंसाया। उन्होंने कई गढ़वाली फिल्मों और म्यूजिक एल्बमों में भी काम किया।

 

राजनीति में भी आजमाया था हाथ

 

लोकप्रियता के चलते घन्ना भाई ने 2012 में भाजपा के टिकट पर पौड़ी से विधानसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि वे चुनाव हार गए थे। 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने टिकट के लिए दावेदारी की थी।

 

उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति

 

घन्ना भाई के निधन से उत्तराखंड की लोक संस्कृति और हास्य मंच को बड़ी क्षति हुई है। उन्हें याद करते हुए कलाकारों और प्रशंसकों ने कहा कि उन्होंने पहाड़ी समाज की भावनाओं को अपने हास्य के माध्यम से जीवंत किया और अपनी कला के जरिए समाज को संदेश भी दिए।

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिवार को इस कठिन समय में संबल दे। उत्तराखंड कला जगत हमेशा उन्हें याद रखेगा।

विवादों में रणवीर अल्लाहबादिया और समय रैना, संसद में उठने वाल है मुद्दा, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

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सोशल मीडिया पर इस समय यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ की जमकर चर्चा हो रही है। शो के कई वीडियो वायरल हो चुके हैं, जिनमें यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया और समय रैना को अभद्र भाषा और विवादित टिप्पणियां करते हुए देखा गया है। इन वीडियोज को लेकर जनता में आक्रोश फैल गया है, और कई लोगों ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। मामले ने इतना तूल पकड़ लिया है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इसका संज्ञान लिया है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।

संसद में गूंजेगा मुद्दा, सख्त कार्रवाई की मांग

अब यह विवाद केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंच गया है। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि वे इस मुद्दे को आईटी और संचार स्थायी समिति के सामने उठाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि शो में अश्लील और ईशनिंदा वाली सामग्री को कॉमेडी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “मैं इस मुद्दे को आईटी और संचार की स्थायी समिति में उठाऊंगी। यह शो युवाओं के दिमाग को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है, और हमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कुछ सीमाएं तय करनी होंगी।”

उन्होंने रणवीर अल्लाहबादिया की भाषा पर भी कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह “पूरी तरह से बकवास और अनैतिक सामग्री है, जिसे कॉमेडी के नाम पर बढ़ावा दिया जा रहा है”।

राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं

प्रियंका चतुर्वेदी के अलावा एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा,
“रणवीर अल्लाहबादिया द्वारा की गई टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक है। वेस्टर्न कल्चर में भी इस तरह की बातें नहीं होतीं, लेकिन यहां फ्रीडम ऑफ स्पीच की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। माता-पिता के बारे में इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना बेहद शर्मनाक है।”

बढ़ सकती हैं मुश्किलें

बढ़ते विरोध को देखते हुए यह मामला और गंभीर होता जा रहा है। राजनीतिक दबाव के चलते इस पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल, सोशल मीडिया पर #BoycottIGL जैसे ट्रेंड्स चल रहे हैं और जनता रणवीर व समय के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रही है।

पंजाब के AAP विधायकों से मिलेंगे केजरीवाल, अटकलों का दौर जारी, कांग्रेस का बड़ा दावा

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नई दिल्ली : दिल्ली में आम आदमी पार्टी की करारी हार के बाद पंजाब की सियासत का रुख बदलना शुरू हो गया है। इस बीच AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के विधायकों के साथ आज दिल्ली में बैठक बुलाई है। इस बैठक को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। वहीं, कांग्रेस ने दावा किया है कि पंजाब के AAP विधायक उनके संपर्क में हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि AAP के कई विधायक पार्टी से नाराज हैं और उनके संपर्क में हैं। उनका दावा है कि AAP के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, और दिल्ली चुनाव में हार के बाद अरविंद केजरीवाल की स्थिति कमजोर होने के कारण वह अब पंजाब में खुद को स्थापित करना चाहते हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली में बढ़ते राजनीतिक दबाव और चुनौतियों के कारण अब पंजाब में अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहते हैं। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की स्थिति कमजोर होती जा रही है, इसलिए केजरीवाल अब पंजाब में खुद को मुख्यमंत्री के रूप में पेश करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, AAP की ओर से इस दावे को खारिज कर दिया गया है।

AAP नेताओं ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि विधायकों से मुलाकात नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। आम आदमी पार्टी के सूत्रों के मुताबिक अमृतसर, जालंधर, लुधियाना के अलावा बॉर्डर बेल्ट के कई ऐसे विधायक हैं जो मुख्यमंत्री भगवंत मान से लंबे अरसे से नाराज चल रहे हैं।

सीएम से नाराज विधायकों की संख्या लगभग 17-18 है। ये नाराज विधायक अरविंद केजरीवाल के साथ अलग से मुलाकात कर सकते हैं। जिसकी वजह से पंजाब की सियासत गरमाई हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक मौजूदा समय में पंजाब में आम आदमी पार्टी के 94 विधायक है।

रायपुर और डोईवाला फ्रीज जोन को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला, बड़े आंदोलन की चेतावनी

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देहरादून: रायपुर और डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों को फ्रीज जोन से मुक्त करने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता ने आज जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को ज्ञापन भेजकर इस क्षेत्र से फ्रीज जोन हटाने की अपील की।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रांझावाला, नथुवावाला, नकरौंदा, बालावाला, तुनवाला, मियांवाला, रायपुर, सौडासरोली, भोपालपानी, कालीमाटी, बढ़ासी, हर्रावाला और कुआंवाला जैसे इलाकों को 22 मार्च 2023 को विधानसभा परिसर और सरकारी कार्यालय भवनों के निर्माण के लिए फ्रीज जोन घोषित किया गया था। हालांकि, दो साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद न तो इस क्षेत्र को फ्रीज जोन से मुक्त किया गया और न ही कोई महायोजना तैयार की गई।

फ्रीज जोन घोषित होने से रुका विकास

गौरतलब है कि 13 मार्च 2023 को गैरसैंण कैबिनेट के फैसले के तहत अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने 22 मार्च 2023 को इस क्षेत्र को फ्रीज जोन घोषित करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत इस क्षेत्र में कोई भी निर्माण या विकास कार्य तब तक प्रतिबंधित रहेगा जब तक महायोजना तैयार नहीं हो जाती।

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इसके लिए ग्लोबल मैकेंजी एजेंसी को 06 माह के भीतर मास्टर प्लान तैयार करने का कार्य सौंपा गया था। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी महायोजना पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

महायोजना का उद्देश्य और प्रशासनिक असफलता

रायपुर में स्पोर्ट्स कॉलेज से सटी 850 बीघा भूमि को विधानसभा परिसर के लिए चिन्हित किया गया था, लेकिन अभी तक आवासीय भवनों और सरकारी कार्यालयों के लिए भूमि चिह्नित नहीं हो सकी।

रायपुर क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, राज्य स्तरीय स्पोर्ट्स कॉलेज, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री, ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स, आईआरडी, डीएएल, डीआरडीओ जैसे प्रमुख रक्षा संस्थान, मालदेवता पर्यटन स्थल और जौलीग्रांट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मार्ग स्थित हैं। इसके बावजूद, देहरादून शहर से जोड़ने वाली मुख्य सड़कें तंग और जर्जर हालत में हैं, जिन्हें इस महायोजना में शामिल किया जाना चाहिए।

2012 में मिली थी केंद्र की सैद्धांतिक स्वीकृति

महायोजना के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की थी। इस योजना के लिए 75 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था, और 59.90 हेक्टेयर भूमि को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिली थी।

उत्तराखंड सरकार ने 24 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केंद्र सरकार को जमा कराई थी। साथ ही, एलीफेंट कॉरिडोर के तहत 15.37 करोड़ रुपये कैम्पा फंड में जमा कराए गए थे।

हालांकि, राजस्व विभाग, वन विभाग, सचिवालय प्रशासन, आवास विभाग, विधानसभा और टाउन प्लानिंग विभागों के आपसी समन्वय की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण इस योजना की स्वीकृति केंद्र सरकार ने वापस ले ली। अब राज्य सरकार को इस योजना के लिए नया प्रस्ताव भेजना होगा।

क्षेत्रवासियों की बढ़ती मुश्किलें

  • भवन निर्माण पर रोक: इस क्षेत्र में मकान बनाने के लिए नक्शे पास नहीं हो रहे, जिससे लोग अपने घर नहीं बना पा रहे हैं।
  • निजी संपत्ति की बिक्री पर प्रतिबंध: गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग अपनी संपत्ति नहीं बेच पा रहे, जिससे उनके इलाज में आर्थिक दिक्कतें आ रही हैं।
  • व्यावसायिक और विकास कार्य ठप: आवासीय और व्यावसायिक भवनों के निर्माण पर रोक की वजह से लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है, और विकास कार्य ठप पड़े हैं।

कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही इस क्षेत्र को फ्रीज जोन से मुक्त नहीं किया गया, तो जनता के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य सरकार को पहले सघन होमवर्क करना चाहिए था, फिर इस क्षेत्र को फ्रीज जोन घोषित करना चाहिए था। अब सरकार के इस फैसले की वजह से दो साल से लोग परेशान हैं, और यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो क्षेत्रीय जनता उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेती है और इसे हल करने के लिए क्या कदम उठाती है।

Mahakumbh 2025: महाकुंभ के दौरान भीषण जाम, श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी, संगम स्टेशन बंद

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प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण शहर के प्रमुख मार्गों पर भीषण जाम की स्थिति बनी हुई है। संगम में स्नान के लिए हजारों की संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं के कारण प्रयागराज आने और जाने वाले रास्तों पर वाहनों की गति थम गई है। सड़कों पर वाहनों और पैदल यात्रियों को मिनटों की दूरी तय करने में घंटों लग रहे हैं। माघ पूर्णिमा से पहले महाकुंभ में यह स्थिति देखी जा रही है।

प्रयागराज में कहां-कहां है जाम?

प्रयागराज पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहर के चारों तरफ से श्रद्धालु आ रहे हैं, जिसके कारण फाफामऊ, झूंसी, नैनी, वाराणसी-प्रयागराज रोड (जीटी रोड) और सुलेम सराय जैसे प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह जाम लगा हुआ है। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई है, जबकि पैदल चलने वाले यात्रियों को घाटों तक पहुंचने में घंटों लग रहे हैं।

श्रद्धालुओं की कहानी

नागवासुकि मार्ग पर फैजाबाद से आए श्रद्धालु पीतांबर शुक्ला ने बताया कि उन्हें फैजाबाद से प्रयागराज तक का सफर तय करने में 17 घंटे लग गए, जबकि सामान्यतः यह दूरी पांच घंटे में तय होती है। इसी तरह, कानपुर से आए अखिलेश्वर प्रसाद ने बताया कि उन्हें बालसन से गीता निकेतन तक पहुंचने में ही एक घंटे का समय लग गया। नोएडा से आए अजय कुमार ने बताया कि उन्हें झूंसी स्थित अपने घर तक पहुंचने में 24 घंटे लग गए।

एक किलोमीटर का सफर तय करने में लग रहे घंटे

रविवार को प्रयागराज में एक किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को दो से तीन घंटे लगे। इस दौरान लखनऊ रूट पर बेला कछार इलाके में 12 घंटे के भीतर तीन गाड़ियां ओवरहीट होने के कारण जल गईं। फायर ब्रिगेड की टीम को एक गाड़ी का शीशा तोड़कर यात्रियों को बाहर निकालना पड़ा। इस घटना में दो लोग बुरी तरह से झुलस गए।

पांच किलोमीटर तक लगी वाहनों की कतारें

जनपदीय सीमा पर स्थित सभी सात प्रमुख मार्गों पर भी जाम की स्थिति बनी हुई है। लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर श्रृंग्वेरपुर धाम से मलाक हरहर तक का 23 किलोमीटर का सफर तय करने में चार घंटे से ज्यादा का समय लगा। इसी तरह, प्रयागराज-मिर्जापुर हाईवे पर करछना से जाम की स्थिति रही। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गुजरात और महाराष्ट्र से आने वाले वाहनों को करछना की ओर डायवर्ट किया गया, जिससे हालात और बिगड़ गए।

व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

वसंत पंचमी के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है, जिसके कारण ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है। चौखंडी निवासी अधिवक्ता शांतनु सिंह ने कहा कि मुख्य स्नान पर्वों पर यातायात की दिक्कत समझी जा सकती है, लेकिन आम दिनों में भीषण जाम की स्थिति चिंताजनक है। बैरहना निवासी संजय सिंह ने कहा कि शहर के साथ-साथ जिले की सीमाओं पर भी वाहनों का तांता लगा हुआ है।

महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन भीड़ और यातायात की समस्या अभी भी बनी हुई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से धैर्य बनाए रखने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है।

इमरान प्रतापगढ़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, अगली बार दिमाग लगाकर आना

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नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुजरात पुलिस ने उनके खिलाफ एक गाने को लेकर एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि गाने के बोल भड़काऊ, राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गुजरात पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए प्रतापगढ़ी को राहत दी है।

क्या था मामला?

इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें वे हाथ हिलाते हुए चल रहे थे और उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई जा रही थीं। इस 46 सेकंड के वीडियो में बैकग्राउंड में एक गाना बज रहा था। गुजरात पुलिस ने इसी गाने को लेकर प्रतापगढ़ी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस का आरोप था कि गाने के बोल भड़काऊ हैं और यह राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गुजरात पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय ने एफआईआर को रद्द करने के लिए प्रतापगढ़ी की याचिका को खारिज कर दिया था, लेकिन कविता के अर्थ की सही तरीके से व्याख्या नहीं की। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जवल भूइयां की पीठ ने कहा, “अंतत: यह एक कविता है। यह किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। यह कविता परोक्ष रूप से कहती है कि भले ही कोई हिंसा में शामिल हो, हम हिंसा में शामिल नहीं होंगे। कविता यही संदेश देती है। यह किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है।”

अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद

राज्य के वकील द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह के लिए टाल दी है। शीर्ष अदालत ने राज्य के वकील से कहा है कि, ‘अगली बार दिमाग लगाकर अदालत में वापस आना’। इससे पहले, 21 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने प्रतापगढ़ी के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और उनकी अपील पर गुजरात सरकार और शिकायतकर्ता किशनभाई दीपकभाई नंदा को नोटिस जारी किया था।

गुजरात हाईकोर्ट का फैसला

कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने गुजरात उच्च न्यायालय के 17 जनवरी के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उनके खिलाफ दायर एफआईआर को रद्द करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। प्रतापगढ़ी पर 3 जनवरी को गुजरात के जामनगर में एक सामूहिक विवाह समारोह के दौरान कथित उत्तेजक गीत के लिए मामला दर्ज किया गया था।

क्या है कांग्रेस का रुख?

कांग्रेस ने इस मामले में इमरान प्रतापगढ़ी का समर्थन किया है और गुजरात पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

क्या BMC चुनाव साथ लड़ेगी भाजपा और MNS?

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मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने सोमवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे से उनके मुंबई स्थित आवास पर मुलाकात की। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। भाजपा एमएलसी प्रसाद लाड ने पुष्टि की कि मनसे प्रमुख ने सीएम फडणवीस को दादर स्थित अपने आवास पर आमंत्रित किया था, लेकिन मुलाकात की पूरी वजह पर उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी।

इस बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मुलाकात आगामी बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव को लेकर हो सकती है, जिसमें मनसे और भाजपा के बीच संभावित तालमेल पर बातचीत हुई हो। बीएमसी चुनाव के अलावा, यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मुलाकात के दौरान महाराष्ट्र की राजनीति और सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ राज ठाकरे के हालिया बयानों पर भी चर्चा हुई हो सकती है।

पिछले महीने राज ठाकरे ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि भाजपा ने पहले कहा था कि घोटालों में शामिल नेताओं को सलाखों के पीछे डाला जाएगा, लेकिन इसके बजाय उन्हीं नेताओं को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। ठाकरे के इस बयान के बाद भाजपा ने पलटवार करते हुए मनसे प्रमुख पर पार्टी को बदनाम करने का आरोप लगाया।

इसके अलावा, ठाकरे ने पिछले साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों पर भी सवाल उठाए थे, जिसके बाद भाजपा ने ठाकरे पर चुनावी राजनीति में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में मनसे ने भाजपा का समर्थन किया था, लेकिन इसके बाद पार्टी ने राज्य विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ा।

दुर्भाग्यवश, मनसे विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। इसके बावजूद, इस मुलाकात को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज ठाकरे और देवेन्द्र फडणवीस के बीच इस मुलाकात के बाद यह सवाल उठता है कि क्या मनसे और भाजपा के बीच रिश्तों में कुछ बदलाव आ रहा है, खासकर बीएमसी चुनाव के मद्देनजर।

हरिद्वार में कई झोपड़ियों में लगी भीषण आग

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हरिद्वार: पंतद्वीप मैदान क्षेत्र में झुग्गी झोपड़ियों में भीषण आग लगने से कई झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। घटना में सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन झोपड़ियों में रखा सामान पूरी तरह से नष्ट हो गया। आग लगने का प्रारंभिक कारण विद्युत शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।

घटना के समय आसपास मौजूद लोगों ने पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें तेजी से फैलती गईं। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि, तब तक अधिकांश झोपड़ियां जल चुकी थीं।

हरिद्वार कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि झोपड़ियां एक-दूसरे से सटी हुई थीं, जिसके कारण एक झोपड़ी में लगी आग हवा के चलते तेजी से अन्य झोपड़ियों में फैल गई। इस वजह से आग बुझाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।