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वक्फ बिल पर JPC रिपोर्ट को लेकर संसद में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट

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नई दिल्ली : संसद के बजट सत्र के पहले चरण के आखिरी दिन वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया। बीजेपी सांसद मेधा कुलकर्णी ने जेपीसी की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रिपोर्ट को “फर्जी और असंवैधानिक” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट से विपक्ष की असहमति को डिलीट कर दिया गया। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी नाराजगी जताते हुए कहा, “हमारी राय पर असहमति हो सकती है, लेकिन उसे कूड़ेदान में कैसे फेंका जा सकता है?”

जेपीसी रिपोर्ट पर उठे सवाल

विपक्षी सांसदों का दावा है कि जेपीसी की रिपोर्ट से महत्वपूर्ण आपत्तियों को हटा दिया गया। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने 2 फरवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ पेज साझा कर आरोप लगाया था कि उनके असहमति नोट के कुछ हिस्सों को बिना जानकारी के हटा दिया गया।

जेपीसी ने 30 जनवरी को यह 655 पन्नों की रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपी थी। इसमें 16 सदस्यों ने समर्थन दिया, जबकि 11 ने विरोध किया।

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विपक्ष पर “देश तोड़ने की साजिश” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का मकसद सिर्फ हंगामा करना है। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, “जेपीसी अध्यक्ष को रिपोर्ट में बदलाव करने का अधिकार है, और कुछ भी डिलीट नहीं किया गया।”

अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा, “जेपीसी चेयरमैन से बात की गई है, रिपोर्ट से कुछ नहीं हटाया गया है।”

लोकसभा की कार्यवाही स्थगित

हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही सिर्फ पांच मिनट चल सकी और दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। इस बीच, कांग्रेस सांसदों की एक आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हुईं।

विपक्ष की मांग

मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में मांग की कि “रिपोर्ट को दोबारा पेश किया जाए और विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को शामिल किया जाए।” उन्होंने इसे संसदीय प्रक्रिया का उल्लंघन बताया।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल: दोषी सांसद-विधायक कैसे लड़ सकते हैं चुनाव?

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Supreme Court

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि यदि एक सरकारी कर्मचारी दोषी पाए जाने पर आजीवन सेवा से बाहर हो सकता है, तो फिर दोषी व्यक्ति संसद में कैसे लौट सकता है? कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून तोड़ने वाले व्यक्ति कानून बनाने का कार्य कैसे कर सकते हैं?

चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध की मांग

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की विस्तृत सुनवाई करने को तैयार हो गया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से तीन हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि तय समय में जवाब नहीं मिलता है तो भी मामले की सुनवाई जारी रखी जाएगी। अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों उठाया सवाल?

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनमोहन और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने टिप्पणी की कि दोषी नेताओं पर केवल छह वर्षों तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत का कहना है कि जब एक सरकारी कर्मचारी को दोषी पाए जाने पर वह जीवनभर के लिए सेवा से बाहर हो सकता है, तो फिर एक अपराधी नेता संसद में लौटकर कानून कैसे बना सकता है?

निचली अदालतों में धीमी सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों और MP/MLA कोर्ट में मामलों की धीमी प्रगति को लेकर चिंता जताई। जस्टिस मनमोहन ने कहा कि दिल्ली की निचली अदालतों में उन्होंने देखा है कि जज सिर्फ एक-दो मामलों को सूचीबद्ध कराते हैं और फिर 11 बजे तक अपने चेंबर में चले जाते हैं। एमिकस क्यूरे विजय हंसारिया ने बताया कि देश के कई राज्यों में बार-बार सुनवाई टाली जा रही है और कोई स्पष्ट कारण भी नहीं दिया जाता।

कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि अभी तक कई राज्यों में MP/MLA कोर्ट गठित नहीं किए गए हैं। साथ ही हंसारिया ने सुझाव दिया कि क्या चुनाव आयोग ऐसा नियम बना सकता है जिससे किसी राजनीतिक पार्टी को गंभीर अपराधों में सजा पाए व्यक्ति को पार्टी पदाधिकारी नियुक्त करने से रोका जा सके?

जनप्रतिनिधित्व कानून की जांच करेगा कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 8 और 9 की जांच करने की बात कही है। कोर्ट भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

दोषी नेताओं के चुनाव लड़ने पर बैन की मांग

भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने 2016 में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 और 9 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि राजनीतिक दलों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे स्वच्छ छवि वाले प्रत्याशी क्यों नहीं खोज पा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी आरोपी को सामाजिक कार्यकर्ता कहकर झूठे मामलों में फंसाने का दावा किया जाता है, तो क्या यह सही है कि वे चुनाव लड़ सकें? वर्तमान में, यदि किसी नेता को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो वह सजा पूरी होने के छह साल बाद तक चुनाव नहीं लड़ सकता।

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करते हुए दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने और उनके खिलाफ लंबित मामलों के तेजी से निपटारे की मांग की।

क्या बदल सकता है भविष्य में?

यदि सुप्रीम कोर्ट दोषी नेताओं के चुनाव लड़ने पर स्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय करता है, तो यह भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा। इससे अपराधियों के राजनीति में प्रवेश पर रोक लगेगी और एक स्वच्छ और पारदर्शी लोकतंत्र को बढ़ावा मिलेगा।

श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति हेतु जोर आजमाइश

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*श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति*
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*नयी कार्यकारिणी के लिए जोर आजमाइश कई दिग्गजों के नामों पर लग सकती है मुहर।*

रूद्रप्रयाग/गोपेश्वर/ देहरादून: 13 फरवरी। श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति का कार्यकाल जनवरी के प्रथम सप्ताह में समाप्त हो चुका है नगर निकाय की आचार संहिता के चलते नयी समिति का गठन अभी नही हो पाया है। अब जबकि 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू है वहीं मार्च में संवैधानिक व स्ववित्त पोषित संस्था होने के कारण मंदिर समिति के स्तर पर बजट का भी अनुमोदन भी होना है।
अत: इसी कारण अभी मंदिर समिति को प्रशासक के हवाले भी नही किया गया है। इन सब के बीच श्री बदरीनाथ -केदारनाथ मंदिर समिति के गठन हेतु जोर आजमाइश शुरू हो चुकी है।

सूत्रों की माने तो श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष पद पर भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता, पार्टी प्रवक्ता पूर्व दायित्वधारी हेमंत द्विवेदी के नाम चर्चाओं में बताया जा रहा है। वहीं पिछली समिति में अध्यक्ष रहे अजेंद्र अजय का नाम भी अध्यक्ष पद हेतु चल रहा है।

साथ ही केदारनाथ क्षेत्र से मंदिर समिति सदस्य रह चुके भाजपा नेता दिनेश बगवाड़ी भी अध्यक्ष पद की जुगत में है।

नगर पालिका जोशीमठ के पूर्व अध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती का नाम भी चर्चा में है।‌ वह मंदिर समिति के सदस्य रह चुके है।

श्री केदारनाथ क्षेत्र में लोकप्रिय कुलदीप रावत का नाम भी मंदिर समिति अध्यक्ष के लिए चर्चा में है वह केदारनाथ क्षेत्र में लोकप्रिय है।

वहीं चारधाम यात्रा परिषद उपाध्यक्ष रह चुके कथावाचक आचार्य शिव प्रसाद ममगाई भी अध्यक्ष पद की जुगत में है वहीं यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी विधायकों की श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति का अध्यक्ष बनने में कोई दिलचस्पी नही दिख रही है।

उपाध्यक्ष पर हेतु सबसे प्रभावशाली नाम श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी रह चुके वर्तमान में मुख्य मंत्री के सलाहकार डा. बी.डी. सिंह का है उनका श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति उपाध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है।

लोकप्रियता श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति में मुख्य कार्याधिकारी रहते हुए बी. डी. सिंह ने कर्मचारियों के कल्याण हेतु कार्य किये तथा हक- हकूकधारियों तथा तीर्थ पुरोहितों से समन्वयकर कार्य किये , केदारनाथ तथा बदरीनाथ क्षेत्र में वह खासे लोकप्रिय है।
मुख्य मंत्री के सलाहकार बी. डी. सिंह के नाम कई उपलब्धियां है इस आधार पर कहा जा रहा है कि बी. डी. सिंह के लंबे कार्य अनुभव तथा योगदान को देखते हुए लोक हित में श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति का उपाध्यक्ष बनाया जाना लगभग तय है।वही पूर्व सदस्य भास्कर डिमरी, आशुतोष डिमरी, का नाम भी उपाध्यक्ष पद को लेकर चर्चा में हैश्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम के तहत मंदिर समिति बोर्ड का गठन यथा समय जरूरी भी है संवैधानिक संस्था होने के कारण प्रत्येक वर्ष का वित्तीय बजट भी पारित होता है फिर चार धाम यात्रा सामने है 4 मई को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने है।संभावना है कि शीघ्र ही नयी श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति का गठन हो सकता है।दिर समिति अध्यक्ष उपाध्यक्ष सहित सदस्यों के नाम पर मुहर लग सकती है।

प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर 2 मार्च को टिहरी में होगी प्रदेश स्तरीय चिंतन गोष्ठी

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टिहरी। उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों पर मंथन करने और आगामी रणनीति तय करने के लिए भू भूम्याल जागृति मंच के तत्वावधान में प्रदेश स्तरीय चिंतन गोष्ठी आयोजित की जाएगी। यह गोष्ठी आगामी 2 मार्च को बौराड़ी स्थित ओपन एयर थिएटर में होगी, जिसमें प्रदेश के समाजसेवी, चिंतक एवं विभिन्न मुद्दों पर संघर्षरत लोग शामिल होंगे।

गोष्ठी में प्रदेश के 11 प्रमुख मुद्दों पर होगी चर्चा

बौराड़ी में हुई एक बैठक में प्रदेश के 11 प्रमुख मुद्दों को चिन्हित किया गया, जिनमें मूल निवास, भू-कानून, परिसीमन, आपदाएं, जंगली जानवरों का आतंक आदि शामिल हैं। वक्ताओं ने कहा कि इन मुद्दों पर जनता को जागरूक कर सरकार को घेरने की जरूरत है। बैठक में तय हुआ कि चिंतन गोष्ठी में इन सभी विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा और जो निष्कर्ष निकलकर आएगा, उसका ड्राफ्ट तैयार कर सरकार को भेजा जाएगा।

जनजागरूकता के लिए पदयात्राओं का आयोजन

चिंतन गोष्ठी के बाद पूरे राज्य में जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत गांवों और ब्लॉकों में पदयात्राएं और गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि जनता को इन मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके।

गोष्ठी के लिए आयोजन समिति गठित

गोष्ठी के सफल आयोजन के लिए एक आयोजन समिति का गठन किया गया। बैठक में प्रमुख रूप से मंच के संयोजक देवेंद्र नौडियाल, सह संयोजक अमित पंत, संरक्षक महिपाल सिंह नेगी, भू-कानून मूल निवास संघर्ष समिति के सह संयोजक लुसुन तोडरिया, सभासद नवीन सेमवाल, कमल सिंह महर, भगवान चंद रमोला, महावीर उनियाल, गंगा भगत सिंह नेगी, राजीव रावत, विस्थापित नेता सोहन सिंह राणा और हिमांशु रावत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

यह चिंतन गोष्ठी प्रदेश के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जिसमें उत्तराखंड के बुनियादी मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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कैबिनेट बैठक में 33 प्रस्तावों पर मुहर, यहां पढ़ें हर अपडेट

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को उत्तराखंड कैबिनेट की अहम बैठक आयोजित की गई। इस दौरान कुल 33 प्रस्तावों पर सहमति बनी। कैबिनेट ने आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। इसके अलावा, सड़क सुरक्षा नियमावली को भी स्वीकृति दी गई, जिसे परिवहन विभाग ने राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनजर तैयार किया है। साथ ही, निर्वाचन विभाग के ढांचे के पुनर्गठन के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई।

पूर्व विधायकों की पेंशन में बढ़ोतरी

मंत्रिमंडल ने पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पहले 40,000 रुपये पेंशन पाने वाले पूर्व विधायक अब 60,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन प्राप्त करेंगे। इसके अलावा, हर वर्ष पेंशन में 3,000 रुपये की बढ़ोतरी होगी, जो पहले 2,500 रुपये थी। सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए विधायकों को दिए जाने वाले पेट्रोल भत्ते में भी वृद्धि की गई है।

वनाग्नि रोकथाम के लिए विशेष समिति को धनराशि

उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए गठित समितियों को 30,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। वन विभाग की ओर से इस पहल को मंजूरी दी गई है ताकि वनाग्नि से बचाव के लिए बेहतर प्रयास किए जा सकें।

केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोपवे परियोजना

पर्यटन विभाग के तहत केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोपवे परियोजना के डीपीआर को भारत सरकार को भेजने पर सहमति बनी। यह परियोजना धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा में इजाफा करेगी।

सैनिक कल्याण विभाग को निशुल्क भूमि

सैनिक कल्याण विभाग की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल ने विभाग को निशुल्क भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

आवासीय क्षेत्र में तब्दील करने की मंजूरी

मंत्रिमंडल ने खुरपिया फार्म की भूमि को आवासीय उपयोग के लिए चिह्नित करने की सहमति दे दी है। इससे क्षेत्र में आवासीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

विभिन्न विभागों के प्रस्तावों को मंजूरी

मंत्रिमंडल ने पर्यटन, उद्योग, आवास और ऊर्जा विभाग से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी। वनाग्नि की रोकथाम के लिए जनसहभागिता को बढ़ावा देने हेतु ग्राम पंचायत, युवक मंगल दल, महिला मंगल दल सहित वन विभाग और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को शामिल करने की योजना पर भी सहमति बनी। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बैठक के बाद बताया कि राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिससे प्रशासनिक और बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

EVM को लेकर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को बड़ा आदेश, डिलीट नहीं कर पाएंगे डाटा

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में चुनाव आयोग को EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से डेटा डिलीट करने से रोक दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई हारा हुआ उम्मीदवार वोटिंग प्रक्रिया पर संदेह जताते हुए स्पष्टीकरण मांगता है, तो चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं हुई है।

इंजीनियर को देना होगा प्रमाण

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी उम्मीदवार को संदेह होता है कि EVM से छेड़छाड़ हुई है, तो चुनाव आयोग को इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के माध्यम से यह साबित करना होगा कि मशीन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई

चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर

न्यायालय ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इसलिए EVM का डेटा सुरक्षित रखा जाना चाहिए ताकि बाद में किसी भी संदेह या विवाद की स्थिति में उसकी जांच की जा सके।

चुनाव आयोग पर बढ़ेगी जिम्मेदारी

इस फैसले के बाद चुनाव आयोग की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। अब आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि ईवीएम का डेटा संरक्षित रहे और किसी भी उम्मीदवार की शिकायत पर उपयुक्त तकनीकी प्रमाण प्रस्तुत किए जाएं

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

इस फैसले पर विपक्षी दलों ने संतोष जताया है। कई नेताओं ने कहा कि यह निर्णय चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद करेगा। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

साइबर सुरक्षा में देशभर में तीसरे स्थान पर उत्तराखंड पुलिस

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नई दिल्ली/देहरादून : भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार 11 जनवरी 2025 को आयोजित साइबर कमांडो परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया है। इस परीक्षा में उत्तराखंड पुलिस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। परीक्षा में विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय पुलिस संगठनों से लगभग 3200 पुलिस कर्मियों ने भाग लिया था। उत्तराखंड राज्य से कुल 72 पुलिस कर्मियों का चयन हुआ, जिससे राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया।

उत्तराखंड के टॉप-3 चयनित पुलिस कर्मी

उत्तराखंड के तीन पुलिस कर्मियों ने पूरे भारत में शीर्ष 10 रैंक में स्थान प्राप्त किया:

  1. कॉन्स्टेबल हरेन्द्र भण्डारी (साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून) – ऑल इंडिया रैंक: 2
  2. कॉन्स्टेबल कादर खान (एसटीएफ, उत्तराखंड, देहरादून) – ऑल इंडिया रैंक: 6
  3. अपर उपनिरीक्षक चन्द्रमोहन (संचार साइबर सैल, अल्मोड़ा) – ऑल इंडिया रैंक: 10

राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का शानदार प्रदर्शन

देशभर से सर्वाधिक चयनित पुलिस कर्मियों की सूची में उत्तराखंड तीसरे स्थान पर रहा।

  1. तेलंगाना172 चयनित
  2. केरल73 चयनित
  3. उत्तराखंड72 चयनित

साइबर सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम

माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड के निर्देशों के तहत साइबर अपराध की रोकथाम और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। डीजीपी श्री दीपम सेठ के मार्गदर्शन में साइबर पुलिस का नेतृत्व आईजी श्री नीलेश आनंद भरने द्वारा किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ, उत्तराखंड श्री नवनीत सिंह ने जानकारी दी कि गृह मंत्रालय (I4C – भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र) के परामर्श के तहत ‘साइबर कमांडो की विशेष शाखा’ की स्थापना की जा रही है। इसी के अंतर्गत, 11 जनवरी 2025 को नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU), दिल्ली के विभिन्न परीक्षा केंद्रों में यह परीक्षा आयोजित की गई।

उत्तराखंड में यह परीक्षा पुलिस उपाधीक्षक श्री अंकुश मिश्रा, आई4सी गृह मंत्रालय और एनएफएसयू टीम के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई। उत्तराखंड से कुल 242 पुलिस कर्मियों ने परीक्षा दी, जिनमें से एसटीएफ और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के 7 कर्मियों सहित कुल 72 कर्मियों का चयन हुआ।

विशेष प्रशिक्षण एवं भूमिका

चयनित साइबर कमांडो को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों, जैसे आईआईटी और राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) में गहन व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इन प्रशिक्षित कर्मियों को उनके मूल संगठनों में वापस भेजा जाएगा, जहां वे डिजिटल फोरेंसिक, घटना प्रतिक्रिया और आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) संरचना की सुरक्षा में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करेंगे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ उत्तराखंड ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को बधाई दी और भविष्य में साइबर सुरक्षा क्षेत्र में और अधिक सफलता प्राप्त करने की शुभकामनाएं दीं। इस सफलता से उत्तराखंड पुलिस की साइबर सुरक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूती मिलेगी और साइबर अपराधों से निपटने में राज्य को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।

माघी पूर्णिमा स्नान : संगम तट पर श्रद्धालुओं का सैलाब, हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा जारी

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प्रयागराज : माघ पूर्णिमा के पावन पर्व पर संगम तट पर आस्था और श्रद्धा की लहर उमड़ पड़ी है। घंटा-घड़ियाल और शंखनाद के बीच 44 घाटों पर महास्नान जारी है। श्रद्धालु हर-हर गंगे और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। सरकारी अनुमान के अनुसार, इस विशेष स्नान पर्व पर करीब 2.5 करोड़ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे।

1.02 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

सुबह 8 बजे तक 1.02 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान कर चुके थे। मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं का सैलाब लगातार बढ़ रहा है, और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

हेलीकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा

माघ पूर्णिमा स्नान पर्व को और अधिक भव्य बनाने के लिए हेलीकॉप्टर से श्रद्धालुओं और साधु-संतों पर पुष्पवर्षा की जा रही है। यह नजारा बेहद अलौकिक और भक्तिमय वातावरण का निर्माण कर रहा है।

सीएम योगी वार रूम से कर रहे निगरानी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी श्रद्धालुओं को माघ पूर्णिमा की बधाई दी और महाकुंभ में शामिल संतों, धर्माचार्यों और कल्पवासियों का स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने वार रूम से मेले की व्यवस्थाओं की निगरानी भी की।

“माँ गंगा, माँ यमुना और माँ सरस्वती सभी के मनोरथ पूर्ण करें, यही कामना है,” – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन सतर्क

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विशेष सतर्कता बरत रही है। भीड़ नियंत्रण के लिए 15 जिलों के डीएम, 20 आईएएस और 85 पीसीएस अधिकारी तैनात किए गए हैं। पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर विशेष पार्किंग स्थल बनाए गए हैं ताकि यातायात सुचारू रूप से चलता रहे।

काली रोड बंद, रूट डायवर्जन लागू

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए काली रोड को बंद कर दिया गया है और केंद्रीय अस्पताल के सामने से रूट डायवर्ट कर वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर भेजा जा रहा है।

श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ रही भीड़

महाकुंभ मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन की सतर्कता के कारण भीड़ नियंत्रण में है। स्नान करने के बाद श्रद्धालु संगम तट से सुचारू रूप से बाहर निकल रहे हैं, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी है।

श्रद्धालुओं की आस्था का महासंगम

माघ पूर्णिमा स्नान पर्व पर देशभर से आए लाखों श्रद्धालु संगम तट पर आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए स्नान कर रहे हैं। इस शुभ अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण है और हर कोई पुण्य की डुबकी लगाने में मग्न है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन जारी

माघ पूर्णिमा स्नान के साथ ही महाकुंभ 2025 की भव्यता और दिव्यता और अधिक बढ़ गई है। श्रद्धालु संगम में स्नान करने के लिए लगातार आ रहे हैं और प्रशासन भी उनकी सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रहा है।

ठंड में गर्मी का एहसास, सीजन का सबसे गर्म दिन, आने वाले दिनों में ऐसा रहेगा हाल

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नई दिल्ली। इस साल फरवरी की शुरुआत से ही गर्मी ने अपने रिकॉर्ड तोड़ने शुरू कर दिए हैं। बीते तीन दिनों से दिल्ली का अधिकतम तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे हर नया दिन सीजन का सबसे गर्म दिन बनता जा रहा है। मंगलवार को भी यही सिलसिला जारी रहा, और अनुमान है कि महीने के उत्तरार्ध में तापमान और बढ़ सकता है।

मंगलवार को तापमान सामान्य से अधिक

मंगलवार को दिनभर आसमान साफ रहा और तेज धूप खिली रही। इस दौरान अधिकतम तापमान 29.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 6.3 डिग्री अधिक रहा। वहीं, न्यूनतम तापमान 9.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.4 डिग्री ज्यादा था। हवा में नमी का स्तर 97 से 30 फीसदी के बीच रहा। पीतमपुरा का अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री दर्ज किया गया, जिससे यह दिल्ली का सबसे गर्म क्षेत्र बना।

आज सुबह स्मॉग और धुंध

मौसम विभाग के अनुसार, आज सुबह दिल्ली में स्मॉग और हल्की धुंध देखने को मिला। हालांकि, दिनभर आसमान साफ रहेगा और 20 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। अधिकतम तापमान 27 डिग्री और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में और वृद्धि हो सकती है।

दिल्ली की वायु गुणवत्ता अभी भी खराब

मंगलवार को भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बनी रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 293 दर्ज किया गया, जो सोमवार को 271 था। यानी 24 घंटों में AQI में 22 अंकों की वृद्धि हुई है। एनसीआर के अन्य शहरों की वायु गुणवत्ता भी मध्यम से खराब श्रेणी में बनी हुई है और फिलहाल इसमें सुधार की उम्मीद नहीं है।