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बड़ी खबर :16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की घोषणा

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नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। इसके तहत देश के 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापक स्तर पर मतदाता सूची का सत्यापन और पुनरीक्षण किया जाएगा। आयोग के अनुसार यह अभियान मई 2026 से शुरू होकर दिसंबर 2026 तक चलेगा।

चुनाव आयोग ने बताया कि तीसरे चरण में करीब 3.94 लाख बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर लगभग 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया जनगणना के तहत चल रही गृह-सूचीकरण व्यवस्था के साथ समन्वय बनाकर संचालित की जाएगी, ताकि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया जा सके।

तीसरे चरण में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, झारखंड, महाराष्ट्र, मिजोरम, मणिपुर, मेघालय, कर्नाटक, तेलंगाना, सिक्किम, नगालैंड और त्रिपुरा को शामिल किया गया है। वहीं केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली, चंडीगढ़ तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन-दीव में भी एसआईआर अभियान चलाया जाएगा।

चुनाव आयोग के मुताबिक, इस चरण के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य पूरा हो जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम और बर्फबारी की परिस्थितियों को देखते हुए कार्यक्रम की घोषणा बाद में की जाएगी।

दिल्ली में अंतिम मतदाता सूची 7 अक्तूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी, जबकि अन्य राज्यों में अंतिम मतदाता सूची सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच जारी होने की संभावना है।

गौरतलब है कि एसआईआर का पहला चरण केवल बिहार में लागू किया गया था। इसके बाद दूसरे चरण में छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभियान चलाया गया था। अब तीसरे चरण के जरिए चुनाव आयोग देशभर में मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है।

उत्तराखंड : बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से खेती तबाह, 522 किसानों की फसलें प्रभावित

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उत्तराखंड में इस बार गर्मी शुरू होते ही मौसम ने अचानक करवट ले ली। प्रदेशभर में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों और काश्तकारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अप्रैल से मई के शुरुआती सप्ताह तक लगातार हुई अतिवृष्टि ने मैदानी से लेकर पर्वतीय जिलों तक फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

179 हेक्टेयर से अधिक खेती प्रभावित

कृषि निदेशालय उत्तराखंड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल से 5 मई 2026 के बीच प्रदेश में करीब 179.47 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है। इस दौरान 522 किसानों की फसलें खराब होने की सूचना विभाग को मिली है। कई क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने और ओलावृष्टि के कारण तैयार फसलें बर्बाद हो गईं।

टिहरी, पिथौरागढ़ और देहरादून सबसे ज्यादा प्रभावित

रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक नुकसान टिहरी जिले में दर्ज किया गया, जहां करीब 87.40 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ। इसके अलावा पिथौरागढ़ में 48.47 हेक्टेयर और देहरादून में 38.50 हेक्टेयर खेती को नुकसान पहुंचा। अल्मोड़ा और चम्पावत में भी फसल क्षति की सूचना सामने आई है।

गेहूं, टमाटर और दलहनी फसलें बर्बाद

कृषि विभाग के अनुसार अतिवृष्टि से गेहूं, जौ, मटर, मसूर, बीन्स और टमाटर जैसी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। मैदानी इलाकों में गेहूं और टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में जौ, मटर और दलहनी फसलें मौसम की मार झेल रही हैं। विभाग का कहना है कि नुकसान का बड़ा हिस्सा असिंचित क्षेत्रों में सामने आया है।

ओलावृष्टि से पॉलीहाउस और बागवानी को नुकसान

देहरादून किसान संगठन के पदाधिकारी आशीष राजवंशी ने बताया कि लगातार बारिश और ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान सब्जी उत्पादकों और काश्तकारों को हुआ है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर ओले इतने बड़े और तेज थे कि पॉलीहाउस तक क्षतिग्रस्त हो गए। मैदानों में आम और लीची की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

किसानों ने उठाई मुआवजे की मांग

किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और मुआवजा समय पर नहीं मिल पाता। आशीष राजवंशी के अनुसार सरकार पॉलीहाउस जैसी संरचनाओं के रखरखाव में मदद तो करती है, लेकिन पारंपरिक किसानों तक राहत योजनाओं का लाभ तेजी से नहीं पहुंच पाता। किसानों ने प्रभावित फसलों का जल्द सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

सरकार ने शुरू किया नुकसान का आकलन

आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद सुमन ने कहा कि प्रदेश में कृषि और बागवानी को हुए नुकसान का लगातार आकलन किया जा रहा है। कृषि, उद्यान और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं और नुकसान का डेटा जुटाया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकारी वाहनों के निजी इस्तेमाल पर उठे सवाल, स्कूलों के बाहर दिख रहीं विभागीय गाड़ियां

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देहरादून में सरकारी वाहनों के निजी उपयोग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें ईंधन बचाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और संसाधनों के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग का संदेश दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के कई नामी निजी स्कूलों के बाहर सरकारी नंबर प्लेट लगी गाड़ियां बच्चों को छोड़ने और लेने पहुंचती दिखाई दे रही हैं।

राजधानी के सेंट जोजेफ्स, कान्वेंट ऑफ जीजस एंड मैरी, ब्राइटलैंड, समरवैली, दून इंटरनेशनल, एशियन स्कूल, सेंट मैरी और सेंट थॉमस जैसे प्रतिष्ठित स्कूलों के बाहर सुबह और छुट्टी के समय बड़ी संख्या में सरकारी वाहन देखे जा सकते हैं। इनमें कई गाड़ियों पर विभागीय स्टिकर और सरकारी नंबर प्लेट स्पष्ट रूप से नजर आती हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार इन वाहनों में नेताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न विभागों से जुड़े लोगों के बच्चे स्कूल आते-जाते हैं। कई मामलों में सरकारी वाहनों के चालक घंटों तक स्कूल परिसर के बाहर इंतजार करते भी दिखाई देते हैं।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र सरकार लगातार पेट्रोल-डीजल की बचत और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की अपील कर रही है। हाल ही में राज्य सरकार ने भी कर्मचारियों से सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर कार्यालय आने की पहल शुरू की है।

इसके बावजूद सरकारी संसाधनों के निजी उपयोग की तस्वीरें सरकारी अभियानों की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रही हैं। शहर के राजपुर रोड, जीएमएस रोड, ईसी रोड, सहारनपुर रोड और डालनवाला क्षेत्र में स्थित कई स्कूलों के बाहर रोजाना ऐसे वाहन देखे जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल समय में बढ़ते ट्रैफिक दबाव का एक कारण निजी और सरकारी वाहनों की अत्यधिक आवाजाही भी है। कई बार एक ही बच्चे को छोड़ने के लिए अलग वाहन स्कूल पहुंचता है, जिससे सड़क पर अनावश्यक भीड़ बढ़ती है और ईंधन की खपत भी अधिक होती है।

प्रशासनिक नियमों के अनुसार सरकारी वाहनों का उपयोग केवल अधिकृत सरकारी कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। परिवार के सदस्यों के नियमित निजी आवागमन के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नियमों की भावना के विपरीत माना जाता है, जब तक संबंधित अधिकारी को विशेष सुविधा प्राप्त न हो। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब आम लोगों और कर्मचारियों से ईंधन बचाने की अपील की जा रही है, तब सरकारी वाहनों के निजी उपयोग पर नियंत्रण कब और कैसे लगाया जाएगा।

उत्तराखंड: पीएम मोदी की अपील का असर, सप्ताह में एक दिन रहेगा ‘नो व्हीकल डे’

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देहरादून। पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक स्तर पर बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच उत्तराखंड सरकार ने राज्य में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए कई अहम निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ऊर्जा संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और ईंधन बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अल्पकालिक और दीर्घकालिक कदमों को मंजूरी दी गई।

सरकार ने सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत आम नागरिकों को भी सप्ताह में एक दिन निजी वाहन का उपयोग न करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक घटाई जाएगी। जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी है, वे एक ही वाहन का इस्तेमाल करेंगे।

कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री Narendra Modi की ऊर्जा बचत संबंधी अपील पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड महामारी के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध और वर्तमान पश्चिम एशिया संकट के चलते वैश्विक बाजार में ईंधन, खाद्य पदार्थ और उर्वरकों पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। ऐसे में छोटे-छोटे व्यवहारिक बदलावों के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन बचत में सहयोग जरूरी है।

सरकारी विभागों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकों को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि निजी क्षेत्र में वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहित किया जाएगा। लोगों को सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग के लिए जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा सरकारी और निजी भवनों में एसी के सीमित उपयोग पर भी जोर दिया जाएगा।

जल्द लागू होगी नई ईवी नीति

राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई ईवी पॉलिसी जल्द लागू करने की बात कही है। नए सरकारी वाहनों की खरीद में 50 प्रतिशत वाहन अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक होंगे। राज्यभर में ईवी चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

इसके अलावा सरकारी विदेशी यात्राओं को सीमित करने, घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने और ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया है। सरकार धार्मिक, ग्रामीण, वेलनेस और इको-टूरिज्म सर्किटों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर देगी।

मुंबई महानगर क्षेत्र में CNG महंगी, कीमत में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी

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Mahanagar Gas Limited ने मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में CNG की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद अब मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई समेत पूरे MMR क्षेत्र में CNG ₹84 प्रति किलोग्राम की दर से मिलेगी।

इससे पहले उपभोक्ताओं को CNG ₹82 प्रति किलोग्राम के भाव पर उपलब्ध कराई जा रही थी। कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का असर निजी वाहन चालकों के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन और व्यावसायिक वाहनों पर भी पड़ने की संभावना है।

माना जा रहा है कि गैस की खरीद लागत और परिचालन खर्च बढ़ने के चलते कंपनी ने यह फैसला लिया है। CNG के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

बस में महिला से सामूहिक दुष्कर्म, ड्राइवर और हेल्पर गिरफ्तार

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दिल्ली के नांगलोई इलाके में एक महिला के साथ चलती प्राइवेट बस में सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस चालक और हेल्पर को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी है।

पुलिस के अनुसार पीड़ित महिला नांगलोई स्थित एक फैक्ट्री में काम करती है। बुधवार देर रात वह फैक्ट्री से पैदल अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान रास्ते में एक स्लीपर बस के चालक और हेल्पर ने उसे जबरन बस के अंदर खींच लिया। आरोप है कि दोनों ने करीब सात किलोमीटर तक बस चलाते हुए महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

वारदात के बाद आरोपी महिला को रात करीब दो बजे सड़क पर छोड़कर फरार हो गए। पीड़िता ने घटना की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पुलिस ने दोनों आरोपियों की पहचान सुदेश (30) और अमन (26) के रूप में की है। सुदेश बस का ड्राइवर जबकि अमन हेल्पर बताया जा रहा है। दोनों के खिलाफ रानी बाग थाने में सामूहिक दुष्कर्म समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

पुलिस ने घटना में इस्तेमाल बस को भी जब्त कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है। घटना के बाद इलाके में लोगों में आक्रोश का माहौल है।

आंधी-तूफान का कहर: 96 लोगों की मौत, कई घायल, जनजीवन अस्त-व्यस्त

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उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बुधवार को आए तेज आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचा दी। तेज हवाओं और धूल भरी आंधी के चलते पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। खराब मौसम की चपेट में आने से प्रदेशभर में 96 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

सबसे अधिक असर वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर मंडल में देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकान और टीन शेड उड़ गए, वहीं खेतों में खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर पेड़ गिरने से सड़क यातायात बाधित रहा और लोगों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा।

मृतकों में भदोही में 18, प्रयागराज में 17, मिर्जापुर में 15, फतेहपुर में 10, उन्नाव और बदायूं में 6-6, प्रतापगढ़ और बरेली में 4-4 लोगों की जान गई। इसके अलावा सीतापुर, रायबरेली, चंदौली, कानपुर देहात, हरदोई और संभल में दो-दो तथा कौशांबी, शाहजहांपुर, सोनभद्र और लखीमपुरखीरी में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेमौसम बारिश, आंधी और बिजली गिरने से हुई जनहानि पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पीड़ित परिवारों को 24 घंटे के भीतर राहत और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। साथ ही सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

एक ओर जहां आंधी और बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिली, वहीं बुंदेलखंड और दक्षिणी जिलों में गर्मी का प्रकोप जारी रहा। बांदा प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा झांसी में 44.5, प्रयागराज में 43.5 और हमीरपुर में 43.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार बृहस्पतिवार से तापमान में फिर धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने की संभावना है।

आंधी-तूफान का असर रेल यातायात पर भी पड़ा। फतेहपुर में पेड़ गिरने से ओएचई लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग करीब डेढ़ घंटे तक बाधित रहा। कानपुर होकर गुजरने वाली लगभग 22 ट्रेनें प्रभावित हुईं। वहीं प्रयागराज-जौनपुर रेलखंड पर भी पेड़ गिरने के कारण ट्रेनों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया। शाम तक रेलवे कर्मचारियों ने राहत कार्य चलाकर ट्रेनों का संचालन बहाल किया।

उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले, पहाड़ों में स्वैच्छिक चकबंदी नीति को मंजूरी, होम स्टे में अब बना सकेंगे 8 कमरे

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देहरादून। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में ग्रामीण विकास, पर्यटन, ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों को राज्य के विकास और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कैबिनेट ने पहाड़ी क्षेत्रों में स्वैच्छिक चकबंदी नीति को मंजूरी प्रदान की। सरकार का मानना है कि इस नीति से भूमि प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के साथ कृषि और ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही राज्य गठन से पूर्व उत्तराखंड में तैनात चकबंदी कर्मचारियों के विभागीय समायोजन का निर्णय भी लिया गया।

पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सरकार ने होम स्टे नियमावली में संशोधन करते हुए अब छह के स्थान पर आठ कमरे बनाने की अनुमति दे दी है। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी और पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

शिक्षा और खेल क्षेत्र में कैबिनेट ने महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, लोहाघाट में प्राचार्य सहित 16 नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी। वहीं, ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा निर्णय लेते हुए राज्य के तीनों ऊर्जा निगमों में अब बाहरी विशेषज्ञों की भी प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया गया है।

अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों के लिए भी सरकार ने अहम निर्णय लिया। कैबिनेट ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त करने हेतु आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक शर्तों को मंजूरी प्रदान की।

ग्रामीण विकास को मजबूती देने के लिए पंचायत भवन निर्माण हेतु दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट ने चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में 11 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी। इसके अलावा Government Medical College Srinagar में कार्यरत 277 संविदा कर्मचारियों को “समान कार्य के लिए समान वेतन” देने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई।

इसके अतिरिक्त, राज्य में ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लघु जल विद्युत परियोजनाओं से संबंधित नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

दर्दनाक हादसा: तूफानी बारिश में दीवार गिरने से छह श्रद्धालुओं की मौत, 15 घायल

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महाराष्ट्र के सांगली जिले में मंगलवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने धार्मिक कार्यक्रम की खुशियों को मातम में बदल दिया। जाट तालुका के मोटेवाड़ी गांव में तेज तूफानी हवाओं और बारिश के दौरान दीवार गिरने से छह श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 15 अन्य घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।

जानकारी के अनुसार मोटेवाड़ी में देवी मुरुगबाई के धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होने पहुंचे थे। शाम करीब पांच बजे अचानक मौसम खराब हो गया और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश और तूफान से बचने के लिए श्रद्धालु पास में चल रहे एक निर्माण स्थल पर बने शेड के नीचे जाकर खड़े हो गए।

इसी दौरान तेज हवाओं के कारण बड़ा नालीदार मेटल शेड उखड़कर पास की पत्थर और ईंटों से बनी दीवार पर जा गिरा। भारी दबाव पड़ने से दीवार भरभराकर गिर गई और उसके नीचे खड़े कई श्रद्धालु दब गए। हादसा इतना भयावह था कि छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

मृतकों की पहचान मंगल भाऊसाहेब मोठे (45), अरुण विजय गेजगे (14), सोनू लक्ष्मण गेजगे (14), कोंडिबा सौबा गेजगे (65), संजूबाई राम चौधरी (51) और शंकर आबा लोखंडे (75) के रूप में हुई है। वहीं, हादसे में घायल दरियप्पा नागा कोकरे, मुर्शिद पुजारी, मरिबा नागा कोकरे, संजू अप्पासो एवले, शिवा गेजगे, कोंडिबा बीरा गेजगे और बीरू विजू गेजगे समेत अन्य लोगों को इलाज के लिए सांख, मिराज और कर्नाटक के विजयपुरा स्थित अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, जिसके कारण दीवार तेज हवा का दबाव नहीं झेल सकी और हादसा हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। राहत एवं बचाव कार्य चलाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

इस घटना पर भाजपा विधायक Gopichand Padalkar ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को तत्काल राहत कार्य के निर्देश दिए गए हैं और घायलों के बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय किया जा रहा है। विधायक ने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

मोदी सरकार के फैसले से सोना-चांदी में आग, गोल्ड ₹11 हजार उछला, चांदी ₹3 लाख पार

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नई दिल्ली। देश में सोना-चांदी खरीदना अब और महंगा हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा गोल्ड और सिल्वर पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के फैसले के बाद सर्राफा बाजार और एमसीएक्स में कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। बुधवार को सोने के दाम में एक झटके में करीब ₹11 हजार प्रति 10 ग्राम की तेजी आई, जबकि चांदी की कीमत ₹3 लाख प्रति किलो के पार पहुंच गई।

सरकार ने सोना-चांदी पर लगने वाली कुल प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इसमें बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत और एग्रीकल्चर इंफ्रा एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) 5 प्रतिशत शामिल है। नई दरें बुधवार से लागू हो गई हैं।

एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोने का भाव मंगलवार को जहां 1,53,442 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, वहीं बुधवार को बाजार खुलते ही यह बढ़कर 1,64,497 रुपये तक पहुंच गया। यानी एक ही दिन में करीब 7 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। दूसरी ओर चांदी का भाव 2,79,062 रुपये प्रति किलो से उछलकर 3,01,429 रुपये प्रति किलो पहुंच गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और सोने के आयात को नियंत्रित करना है। भारत अपनी अधिकांश सोने की जरूरत आयात से पूरी करता है, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ता है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी।