Home Blog Page 276

दिल्ली को शाम को मिलेगा नया CM, जोरों पर शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां

0

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए 11 दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक राजधानी को नया मुख्यमंत्री नहीं मिला है। इस राजनीतिक असमंजस के बीच आज यानी बुधवार को बीजेपी के सभी 48 नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक होगी, जिसमें विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इसके बाद दिल्ली को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा।

शाम 7 बजे होगा नाम का ऐलान

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बताया कि नेता चुनने की बैठक शाम 7 बजे पार्टी कार्यालय में होगी। इस बैठक के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और हरियाणा के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष ओपी धनखड़ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।

शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरी

बीजेपी ने 20 फरवरी को रामलीला मैदान में नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने की योजना बनाई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा की।

समारोह में होंगे तीन मंच:

  1. मुख्य मंच – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल्ली के उपराज्यपाल और नए मुख्यमंत्री के लिए।
  2. दूसरा मंच – धर्मगुरुओं के लिए।
  3. तीसरा मंच – सांसदों और विधायकों के लिए।

बीजेपी ने कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव को भी समारोह में आमंत्रित किया है।

दिल्ली रहेगी हाई अलर्ट पर, ट्रैफिक पर कई पाबंदियां

दिल्ली पुलिस ने शपथ ग्रहण समारोह को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है। ट्रैफिक पुलिस ने रामलीला मैदान के आसपास सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक कई सड़कों पर यातायात प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।

ये मार्ग रहेंगे प्रभावित:

  • बीएसजेड मार्ग (आईटीओ से दिल्ली गेट)
  • जेएलएन मार्ग (दिल्ली गेट से गुरु नानक चौक)
  • अरुणा आसिफ अली रोड
  • मिंटो रोड से कमला मार्केट
  • रणजीत सिंह फ्लाईओवर से तुर्कमान गेट

यातायात पुलिस ने समारोह में शामिल होने वालों और आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, मल्टी-लेयर सिक्योरिटी

रामलीला मैदान को मल्टी-लेयर सिक्योरिटी से कवर किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।

सुरक्षा के विशेष इंतजाम:

  • वीआईपी और वीवीआईपी एंट्री के लिए चार गेट बनाए गए हैं, जहां मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं।
  • बिना जांच के किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
  • सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन सर्विलांस के जरिए निगरानी की जा रही है।
  • कमान्डो, क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), पीसीआर वैन और स्वाट टीम को 2500 से अधिक स्थानों पर तैनात किया गया है।
  • स्नाइपर्स को भी रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है।

बॉलीवुड और साधु-संत भी होंगे शामिल

शपथ ग्रहण समारोह में बॉलीवुड सितारों और साधु-संतों के शामिल होने की भी संभावना है। सुरक्षा के लिहाज से स्पेशल पास बनाए गए हैं, जो समारोह स्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के पास अनिवार्य रूप से रहेंगे।

क्या बोले आप नेता गोपाल राय?

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता गोपाल राय ने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा,
“देशभर में सरकार चलाने वाली बीजेपी शपथ ग्रहण समारोह के कार्ड तो बांट रही है, लेकिन यह नहीं पता कि किसका शपथ ग्रहण हो रहा है। उम्मीद है कि आज बीजेपी इस रहस्य से पर्दा उठा देगी।”

अब सबकी नजरें नए मुख्यमंत्री के ऐलान पर

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि दिल्ली के नए मुख्यमंत्री कौन होंगे? बीजेपी के अंदर कई दावेदारों के नाम चर्चा में हैं, लेकिन आधिकारिक ऐलान आज शाम 7 बजे के बाद ही होगा।

अब तक क्या हुआ? (संक्षिप्त अपडेट)

✅ शाम 7 बजे बीजेपी विधायक दल की बैठक में नाम तय होगा।
✅ 20 फरवरी को रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह।
✅ हाई सिक्योरिटी अलर्ट और ट्रैफिक प्रतिबंध लागू।
✅ बॉलीवुड, संतों और राजनीतिक हस्तियों को न्योता।
✅ कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव को भी आमंत्रण।

धामी सरकार का बड़ा फैसला, भू-कानून संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी

0

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की जनता की लंबे समय से उठ रही मांग को स्वीकार करते हुए सख्त भू-कानून को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस ऐतिहासिक फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह कानून राज्य के संसाधनों, सांस्कृतिक धरोहर और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा।

क्या है नया भू-कानून?

इस नए भू-कानून के तहत बाहरी लोगों द्वारा राज्य में भूमि खरीदने पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इससे अनियंत्रित भूमि अधिग्रहण पर रोक लगेगी और प्रदेश की पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित किया जा सकेगा।

जनता की मांग और सरकार का फैसला

प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्थानीय जनता और राजनीतिक दलों की ओर से लंबे समय से सख्त भू-कानून की मांग की जा रही थी। लोगों का कहना था कि बाहरी निवेशकों और बड़े बिल्डरों द्वारा की जा रही अनियंत्रित भूमि खरीद राज्य की भौगोलिक और सांस्कृतिक संरचना को प्रभावित कर रही है। कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब राज्य की पहचान को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।


मुख्यमंत्री धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी देते हुए लिखा, “राज्य, संस्कृति और मूल स्वरूप की रक्षक हमारी सरकार! प्रदेश की जनता की लंबे समय से उठ रही मांग और उनकी भावनाओं का पूरी तरह सम्मान करते हुए आज कैबिनेट ने सख्त भू-कानून को मंजूरी दे दी है। यह ऐतिहासिक कदम राज्य के संसाधनों, सांस्कृतिक धरोहर और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा, साथ ही प्रदेश की मूल पहचान को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”


कानून से क्या होंगे लाभ?

  1. राज्य की मूल पहचान की रक्षा – अनियंत्रित भूमि खरीद-फरोख्त पर रोक लगने से पहाड़ी क्षेत्रों की पारंपरिक संस्कृति सुरक्षित रहेगी।
  2. स्थानीय लोगों को प्राथमिकता – भूमि खरीद और उपयोग में स्थानीय लोगों को अधिक अधिकार मिलेंगे।
  3. बाहरी कब्जे और अतिक्रमण पर रोक – बाहरी निवेशकों द्वारा अनावश्यक भूमि अधिग्रहण को नियंत्रित किया जाएगा।
  4. पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण – अनियंत्रित निर्माण कार्यों पर लगाम लगाकर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जाएगा।

विपक्ष और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

जहां एक ओर स्थानीय संगठनों और जनता ने इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नए भू-कानून से राज्य में निवेश प्रभावित न हो। विपक्ष ने भी इस कानून पर स्पष्टता की मांग की है और इसके क्रियान्वयन की पारदर्शिता पर जोर दिया है।

Uttarakhand budget session : विधानसभा में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

0

देहरादून : उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन के बाहर विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस के विधायक नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में भू-कानून लागू करने, स्मार्ट मीटर के विरोध और सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।

बुधवार सुबह विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के बाहर धरना दिया। उन्होंने भू-कानून को सख्त बनाने, स्मार्ट मीटरों को वापस लेने और सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भू-कानून पर संशय को खारिज करते हुए कहा कि सरकार वही करेगी, जो जनभावना के अनुरूप होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे भू-कानून हो या कोई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा, सरकार जनता की मांग को सर्वोपरि रखेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस एक तरफ सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग कर रही है और दूसरी तरफ सदन में चर्चा करने के बजाय हंगामा कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय विपक्ष सिर्फ संसाधनों की बर्बादी कर रहा है।

बुधवार सुबह मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें भू-कानून संशोधन विधेयक समेत कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होगी। इसके अलावा, राज्य की विभिन्न रिपोर्ट्स भी सदन के पटल पर रखी जाएंगी।

राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्षी दलों द्वारा किए गए हंगामे को मुख्यमंत्री धामी ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि सदन में गरिमा बनाए रखना सभी विधायकों की जिम्मेदारी है। महिला विधायकों की मौजूदगी में इस तरह का व्यवहार संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

NIA की ताबड़तोड़ छापामारी, नजरे सद्दाम का घर खंगाला

0

भागलपुर : बिहार के भागलपुर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की छापेमारी से हड़कंप मच गया है। इशाकचक थाना क्षेत्र के भीखनपुर में स्थित नजरे सद्दाम के घर पर NIA ने बुधवार सुबह दबिश दी, जहां देशविरोधी संगठनों और जाली नोटों के काले कारोबार से जुड़े अहम सबूत मिले हैं। दिल्ली और पटना से पहुंची NIA टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से यह कार्रवाई की।

NIA की छापेमारी और जब्त दस्तावेज

NIA टीम ने नजरे सद्दाम के पिता मुहम्मद मसिउज्जमा और परिवार के अन्य सदस्यों से गहन पूछताछ की। इस दौरान टीम को जाली नोटों से जुड़े दस्तावेज, संदिग्ध लेन-देन के रिकॉर्ड और विस्फोटकों से संबंधित अहम जानकारियां मिलीं। जांच एजेंसी को शक है कि नजरे सद्दाम के तार पाकिस्तानी एजेंटों और कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं।

NIA को क्यों करना पड़ा छापा?

इस छापेमारी की जड़ें 5 सितंबर 2024 की एक बड़ी कार्रवाई से जुड़ी हैं। उस समय, मोतिहारी पुलिस ने जाली नोटों की तस्करी के मामले में नजरे सद्दाम समेत तीन तस्करों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 500 रुपये के तीन सौ जाली नोट (कुल 1.95 लाख रुपये) बरामद किए गए थे। जांच में खुलासा हुआ था कि नजरे सद्दाम ने कश्मीर के अनंतनाग में एक संदिग्ध व्यक्ति मुहम्मद सरफराज को जाली नोटों की आपूर्ति की थी, जो आतंकवादी संगठनों से जुड़ा था।

नेपाल के रास्ते पाकिस्तान से कनेक्शन!

NIA की जांच में यह भी सामने आया है कि नजरे सद्दाम नेपाल के भोरे गांव में पाकिस्तानी एजेंटों से मुलाकात करता था। वहीं से उसे जाली नोटों की खेप मिलती थी, जिसे वह बॉर्डर पार कर कश्मीर के अनंतनाग तक पहुंचाता था। सरफराज और अन्य आतंकी संगठनों से जुड़कर वह इस गोरखधंधे का अहम हिस्सा बन चुका था।

कश्मीर तक फैला था नेटवर्क

NIA के सूत्रों के अनुसार, नजरे सद्दाम नेपाल में संतोष सहनी नामक व्यक्ति से नकली नोट लेकर कश्मीर के अनंतनाग में सरफराज को डिलीवरी देता था। कश्मीर में ये जाली नोट आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। इसके अलावा, नजरे का करीबी दोस्त वर्क मुमताज भी आतंकियों के नेटवर्क में शामिल था, जिसे लेकर पहले भी पूछताछ की जा चुकी है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

बुधवार सुबह जब NIA की टीम भागलपुर के भीखनपुर पहुंची, तो इलाके में खलबली मच गई। बड़ी मस्जिद लेन के आसपास लोग घरों की छतों से कार्रवाई को देखते रहे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भागलपुर SSP हृदय कांत और इशाकचक थाना अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार की देखरेख में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

धामी कैबिनेट की अहम बैठक आज, क्या भू-कानून संशोधन पर होगा फैसला?

0

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र 2025 की शुरुआत मंगलवार को हो चुकी है। राज्यपाल के अभिभाषण और विधानसभा अध्यक्ष के पारण के बाद पहले दिन सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। आज, बुधवार को धामी कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस सत्र में भू-कानून संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा?

भू-कानून पर सरकार का बड़ा फैसला संभव

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार उत्तराखंड में भू-कानून को और सख्त बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसके लिए सरकार इस बजट सत्र में भू-कानून संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। राज्य के विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से मूल निवास और सशक्त भू-कानून को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है।

भू-कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन

विधानसभा सत्र शुरू होने के साथ ही विधानसभा के बाहर भू-कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इस दौरान घनसाली के पूर्व विधायक भीमलाल आर्या ने विधानसभा गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके चलते पुलिस को उन्हें हिरासत में लेना पड़ा। वहीं, भू-कानून संघर्ष समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी ने मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।

धामी कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों पर मुहर!

आज होने वाली कैबिनेट बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया जा सकता है:

  1. संशोधित भू-कानून विधेयक को सदन से पारित कराने का प्रस्ताव।
  2. उत्तराखंड ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली-2025 को लागू करने का प्रस्ताव।
  3. परिवहन विभाग की रोड सेफ्टी पॉलिसी को मंजूरी।
  4. शिक्षा विभाग में 4100 पदों पर भर्ती (बीआरपी-सीआरपी और चतुर्थ श्रेणी पद)।
  5. प्रदेश के सभी नगर निकायों में एक समान टैक्स प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव।
  6. पुराने बाजारों के री-डेवलपमेंट के लिए नई नीति पर विचार।
  7. उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में पीजी कर रहे डॉक्टरों के लिए बांड सिस्टम (पीजी के बाद दो साल तक राज्य में सेवा देना अनिवार्य)।
  8. मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना को मंजूरी देने की संभावना।

क्या सशक्त भू-कानून को मिलेगा हरी झंडी?

भू-कानून को लेकर पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हुई है। इस मुद्दे को लेकर भू-कानून संघर्ष समिति, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों ने कई बार आंदोलन किया है। मंगलवार को पूर्व विधायक भीमलाल आर्या ने विधानसभा गेट पर प्रदर्शन किया, जिसके चलते पुलिस को उन्हें हिरासत में लेना पड़ा। वहीं, भू-कानून संघर्ष समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी ने मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।

भू-कानून क्यों जरूरी है?

  1. पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन की अंधाधुंध खरीद – बाहरी निवेशकों और बड़े कारोबारियों द्वारा पहाड़ी जिलों में जमीन खरीदी जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए जमीन महंगी होती जा रही है।
  2. पर्यावरण पर प्रभाव – अराजक भूमि खरीदारी से जंगल कट रहे हैं, पहाड़ों पर अनियंत्रित निर्माण हो रहा है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ रहा है।
  3. स्थानीय संस्कृति और परंपराओं पर खतरा – बाहरी लोगों के बढ़ते प्रभाव से स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और रहन-सहन पर असर पड़ रहा है।
  4. स्थानीय लोगों को विस्थापन का खतरा – जमीनों की बढ़ती कीमतों के कारण उत्तराखंड के मूल निवासी अपनी ही जमीन से बेदखल होने की कगार पर हैं
  5. भूमाफिया और अवैध कब्जों पर रोक – कमजोर भू-कानून के कारण उत्तराखंड में भूमाफिया सक्रिय हैं, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन खरीदने और कब्जा करने में लगे हैं

BC Jewels Lounge लेकर आया हरिद्वार में एलीट ज्वेलरी शॉपिंग एक्सपीरियंस

0
गंगा किनारे बसे हरिद्वार में, BC Jewels Lounge, एलीट क्लास के लिए लेकर आया है सोने, चांदी और हीरे के अद्भुत आभूषणों का खजाना। यहां आपको मिलेगा ट्रेंडी और क्लासिक डिज़ाइनों का बेहतरीन कलेक्शन। BC Jewels Lounge में आपको शादी के लिए ब्राइडल ज्वेलरी से लेकर पार्टी वियर और डेली वियर तक, हर मौके के लिए शानदार ऑप्शन्स मिलेंगे। यहां हर पीस बारीकी से तराशा गया है, जो इसे बनाता है सबसे खास। इस अनोखे ज्वेलरी स्टोर का उद्घाटन हरिद्वार की महापौर ने किया था, जिसमें शहर की कई जानी-मानी हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और स्टोर के शानदार इंटीरियर और कलेक्शन की जमकर तारीफ की।यहाँ आने वाले ग्राहक न सिर्फ गहने खरीदते हैं, बल्कि एक यादगार अनुभव लेकर जाते हैं। CHI00473 यहाँ की सर्विस और पर्सनल अटेंशन उन्हें विशेष महसूस कराती है। यह ज्वेलरी डेस्टिनेशन अपने ग्राहकों को कस्टमाइज्ड डिज़ाइनिंग की सुविधा भी प्रदान करता है। आप अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार गहने बनवा सकते हैं। इसके अलावा, यहाँ एक प्राइवेट लाउंज एरिया भी है जहाँ आप आराम से बैठकर अपने गहनों का चयन कर सकते हैं।  

Live-in relationship : “जब आप बिना शादी के साथ रह रहे हैं, तो गोपनीयता कैसी?”

0

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में लिव-इन संबंधों के अनिवार्य पंजीकरण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ी मौखिक टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने लिव-इन संबंधों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि केवल उनका पंजीकरण अनिवार्य किया है।

“जब आप बिना शादी के साथ रह रहे हैं, तो गोपनीयता कैसी?”

याचिकाकर्ता देहरादून निवासी 23 वर्षीय जय त्रिपाठी ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को निजता का हनन बताते हुए इसे चुनौती दी थी। उनके वकील अभिजय नेगी ने सुप्रीम कोर्ट के 2017 के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि निजता का अधिकार संविधान में संरक्षित है और पंजीकरण की अनिवार्यता से याचिकाकर्ता की गोपनीयता भंग हो रही है।

हालांकि, इस तर्क को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि “आप दोनों साथ रह रहे हैं, आपका पड़ोसी जानता है, समाज जानता है, दुनिया जानती है। फिर आप किस गोपनीयता की बात कर रहे हैं? क्या आप किसी गुफा में गुप्त रूप से रह रहे हैं? आप समाज में रहते हुए, बिना शादी किए साथ रह रहे हैं। इसमें गोपनीयता कहां है?”

“गपशप को संस्थागत रूप देने का प्रयास?”

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि सरकार लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को अनिवार्य करके ‘गपशप’ को संस्थागत रूप देने की कोशिश कर रही है। इस पर अदालत ने कहा कि यूसीसी में केवल पंजीकरण का प्रावधान है, कोई घोषणा की अनिवार्यता नहीं है।

“लोगों को जागरूक करने के लिए काम करें”

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अल्मोड़ा की एक घटना का जिक्र किया, जिसमें एक युवक की हत्या केवल इसलिए कर दी गई थी क्योंकि वह अंतरधार्मिक लिव-इन रिलेशनशिप में था। इस पर अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि वह लोगों को जागरूक करने के लिए कुछ कार्य करें।

अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ा जाएगा मामला

खंडपीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले को समान नागरिक संहिता (UCC) को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ा जाएगा। साथ ही, अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होती है, तो वह राहत के लिए कोर्ट आ सकता है।

अगली सुनवाई 1 अप्रैल को

कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 1 अप्रैल, 2025 तय की है।उत्तराखंड में लागू हो रही यूसीसी को लेकर पहले से ही राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। इस फैसले पर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा, यह आगामी सुनवाई में साफ होगा।

राज्यपाल के अभिभाषण के साथ उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू, विपक्ष ने किया हंगामा

0

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र 2025 आज से शुरू हो गया है। सत्र के पहले दिन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने विधानसभा में आकर अपना अभिभाषण दिया। विधानसभा के प्रवेश द्वार पर उनका स्वागत गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, और संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल भी मौजूद थे।

राज्यपाल का अभिभाषण

राज्यपाल ने अपने अभिभाषण की शुरुआत करते हुए समान नागरिक संहिता लागू करने में उत्तराखंड को देश का पहला राज्य बताते हुए कहा कि इस कदम से महिला हितों की रक्षा की गई है। साथ ही राज्य सरकार की कई योजनाओं और कार्यों का भी उल्लेख किया।

विपक्ष का हंगामा

राज्यपाल का अभिभाषण जारी रहते हुए विपक्षी विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की। इसके अलावा, विपक्षी विधायक वेल में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान सदन में सरकार की उपलब्धियों पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने मेजें थपथपाई। इसके साथ ही कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट और संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।

लैंसडाउन विधायक का सदन में पहुंचे

लैंसडाउन से भाजपा विधायक दलीप सिंह रावत, जिन्होंने पहले विधानसभा सत्र का बहिष्कार किया था, आज सत्र में पहुंचे। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण होने के कारण वे इसका विरोध नहीं करना चाहते थे। रावत ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रेमचंद अग्रवाल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वन अधिनियम पर तीन से चार घंटे तक चर्चा कराई जाएगी। हालांकि, यदि इस मसले पर चर्चा नहीं की गई तो वे कल से सत्र का बहिष्कार करेंगे।

विधानसभा में आगामी चर्चा

बजट सत्र के दौरान विभिन्न विषयों पर बहस और चर्चा की संभावना है। वन अधिनियम और समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हो सकते हैं, जिन पर आगामी दिनों में राजनीति गरमाने की संभावना जताई जा रही है।

4,340 करोड़ के चंदे के साथ भाजपा शीर्ष पर, कांग्रेस को मिले 1,225 करोड़

0

नई दिल्ली : चुनाव सुधारों पर नजर रखने वाली संस्था एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट में भाजपा को वित्त वर्ष 2023-24 में सबसे ज्यादा चंदा मिलने वाला दल बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा को कुल 4,340.47 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो कि छह राष्ट्रीय दलों की कुल आय का 74.57% है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा ने इसका केवल 50.96% (2,211.69 करोड़ रुपये) खर्च किया।

वहीं, कांग्रेस को 1,225.12 करोड़ रुपये की आय हुई, जिसमें से उसने 83.69% (1,025.25 करोड़ रुपये) खर्च कर दिए।

चुनावी बॉन्ड से किसे कितना मिला?

राजनीतिक दलों की आय का बड़ा हिस्सा चुनावी बॉन्ड के जरिए आता है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • भाजपा को 1,685.63 करोड़ रुपये
  • कांग्रेस को 828.36 करोड़ रुपये
  • आम आदमी पार्टी (AAP) को 10.15 करोड़ रुपये

इन तीनों राष्ट्रीय दलों ने कुल 2,524.13 करोड़ रुपये चुनावी बॉन्ड के जरिए जुटाए, जो उनकी कुल आय का 43.36% है।

कुल 4,507 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड भुनाए गए

रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न राजनीतिक दलों ने 4,507.56 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड भुनाए। इसमें से राष्ट्रीय दलों का हिस्सा 55.99% (2,524.13 करोड़ रुपये) रहा।

शोपियां और पुलवामा में IED बरामद, सुरक्षाबलों ने इलाके को घेरा

0

श्रीनगर: दक्षिण कश्मीर के शोपियां और पुलवामा जिलों में सुरक्षा बलों ने दो अलग-अलग स्थानों से इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद की हैं। शोपियां के जेनपोरा इलाके में एक प्रेशर कुकर IED मिली, जबकि पुलवामा के पिंगलिश नागवाड़ी, तराल में भी एक IED बरामद की गई है। इसके बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया

IED मिलने के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया और सड़क को आम यातायात के लिए बंद कर दिया। बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंच चुका है और IED को निष्क्रिय करने की कार्रवाई जारी है। सुरक्षा एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि इन विस्फोटकों के पीछे किन आतंकी संगठनों का हाथ है।

LOC पर पाकिस्तान की नापाक हरकतें जारी

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान जम्मू संभाग में पिछले 10 दिनों में IED धमाकों और संघर्षविराम उल्लंघन सहित 8 घटनाओं को अंजाम दे चुका है। हालांकि, भारतीय सेना की मुंहतोड़ जवाबी कार्रवाई में कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ है।

भारतीय सेना की रणनीति से पाकिस्तान बैकफुट पर

सरकारी तंत्र में छिपे आतंकी समर्थकों और अलगाववादी विचारधारा रखने वाले सरकारी अधिकारियों को बर्खास्त किया जा रहा है। अब स्थानीय युवा आतंकी संगठनों के बहकावे में नहीं आ रहे हैं, जिससे पाकिस्तान की आतंक फैलाने की साजिशें नाकाम हो रही हैं।

पाकिस्तान चौतरफा दबाव में

इस बीच, पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर चौतरफा दबाव बढ़ता जा रहा है। चार बड़े कारणों से पाकिस्तान पर संकट गहराया हुआ है:

  1. अंतरराष्ट्रीय दबाव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस और अमेरिका दौरे के बाद पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ा है।
  2. आंतरिक अस्थिरता: जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास का नया दौर पाकिस्तान के लिए चुनौती बन गया है।
  3. LOC पर सख्ती: भारतीय सेना की LoC पर कंटीली तारबंदी से आतंकी संगठनों के घुसपैठ के रास्ते बंद हो रहे हैं, जिससे पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
  4. आतंकी नेटवर्क पर वार: केंद्र सरकार की आतंकवाद विरोधी स्पष्ट नीति के चलते जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के फंडिंग नेटवर्क और नार्को-टेररिज्म पर कड़ा प्रहार किया जा रहा है।