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ज्ञानेश कुमार बने देश के नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त, विवेक जोशी होंगे अगले निर्वाचन आयुक्त

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ज्ञानेश कुमार बने देश के नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त, विवेक जोशी को निर्वाचन आयुक्त की जिम्मेदारी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में देश के नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के रूप में ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की गई है। कानून मंत्रालय ने सोमवार को इस संबंध में आधिकारिक जानकारी दी। कुमार निर्वाचन आयोग के नए कानून के तहत नियुक्त होने वाले पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक रहेगा, जिसके कुछ ही दिनों बाद अगले लोकसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है।

विवेक जोशी बने नए निर्वाचन आयुक्त

हरियाणा कैडर के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी विवेक जोशी को निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है। 58 वर्षीय जोशी का जन्म 21 मई 1966 को हुआ था और वह 2031 तक निर्वाचन आयोग में सेवाएं देंगे।

चुनाव आयोग के कार्यकाल और नियम

नए कानून के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक पद पर रह सकते हैं या फिर छह साल का कार्यकाल पूरा होने पर सेवानिवृत्त हो सकते हैं।

इससे पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के पूर्व अध्यक्ष सुशील चंद्रा को भी निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था। आयोग में शामिल होने से पहले चंद्रा ने CBDT से इस्तीफा दे दिया था।

बिहार समेत कई राज्यों के चुनावों की जिम्मेदारी

ज्ञानेश कुमार देश के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वे 2024 के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव और 2026 में केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

अनुच्छेद 370 हटाने में निभाई थी अहम भूमिका

कुमार ने 15 मार्च 2024 को निर्वाचन आयुक्त का कार्यभार संभाला था। इससे पहले वे केंद्रीय गृह मंत्रालय में तैनात थे और जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद इसे लागू करने में अहम भूमिका निभाई थी।

ज्ञानेश कुमार का शैक्षिक और प्रशासनिक सफर

  • कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।
  • उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया है।
  • इसके बाद उन्होंने आईसीएफएआई से बिजनेस फाइनेंस और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (HIID) से पर्यावरण अर्थशास्त्र का अध्ययन किया।

प्रशासनिक अनुभव

ज्ञानेश कुमार ने केरल सरकार और भारत सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं:

  • केरल में एर्णाकुलम के सहायक जिलाधिकारी, अडूर के उपजिलाधिकारी और कोचीन निगम के नगर आयुक्त के रूप में कार्य किया।
  • केरल सरकार में वित्त संसाधन, लोक निर्माण विभाग और फास्ट-ट्रैक प्रोजेक्ट्स संभाले।
  • रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव, गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव, संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव एवं सहकारिता मंत्रालय में सचिव के रूप में सेवाएं दी।

आने वाले चुनावों में बड़ी जिम्मेदारी

ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश में आगामी लोकसभा चुनाव 2029, कई विधानसभा चुनाव और अन्य महत्वपूर्ण चुनावों की तैयारियां हो रही हैं। उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमताओं से भारतीय चुनाव प्रणाली को और मजबूती मिलेगी।

सीएम धामी के निर्देश, जल्द शुरू करें रिस्पना और बिंदाल कॉरिडोर का कार्य

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में देहरादून एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर एक अहम बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रिस्पना और बिंदाल कॉरिडोर का कार्य जल्द शुरू किया जाए। मुख्यमंत्री ने देहरादून एलिवेटेड कॉरिडोर को एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग मांगने और राज्य सेक्टर से शीघ्र कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

यातायात और बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए निर्णय

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में आबादी और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, साथ ही पर्यटकों की आमद भी बढ़ी है। इसके अलावा, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद ट्रैफिक में और इज़ाफा होने की संभावना है। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए देहरादून एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी।

कॉरिडोर के निर्माण की योजना

रिस्पना और बिंदाल नदियों के तल पर बनने वाले इस एलिवेटेड कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 26 किलोमीटर होगी, जिसमें—


  • रिस्पना नदी के तल पर 11 किलोमीटर।
  • बिंदाल नदी के तल पर 15 किलोमीटर का चार लेन एलिवेटेड कॉरिडोर प्रस्तावित है।

इस परियोजना के तहत नदियों के भीतर स्थित विद्युत लाइनों, हाई टेंशन लाइनों और सीवर लाइनों का विस्थापन किया जाएगा। साथ ही नदियों के दोनों किनारों पर रिटेनिंग वॉल और बाढ़ सुरक्षा कार्य भी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

अन्य शहरों के लिए भी सुनियोजित योजना की जरूरत

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सिर्फ देहरादून ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य शहरों में भी भविष्य को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित योजनाएं बनाई जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर विकास कार्य का धरातल पर स्पष्ट असर दिखना चाहिए और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता व समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।

नंदा राजजात यात्रा की तैयारियों पर जोर

मुख्यमंत्री ने बैठक में आगामी नंदा राजजात यात्रा की तैयारियों को भी प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि यूआईआईडीबी, देहरादून एलिवेटेड रोड, गढ़वाल और कुमाऊं की कनेक्टिविटी परियोजनाओं, मानसखंड मंदिर माला मिशन, और नंदा राजजात यात्रा की तैयारियों की नियमित समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी समय-समय पर इन योजनाओं की समीक्षा करेंगे।

मुख्यमंत्री धामी के इन निर्देशों से साफ है कि राज्य सरकार देहरादून और अन्य शहरों में बढ़ती आबादी व ट्रैफिक के मद्देनजर बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर तेज़ी से काम करने की योजना बना रही है। रिस्पना और बिंदाल कॉरिडोर का निर्माण, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी और धार्मिक यात्रा मार्गों की समीक्षा, इस दिशा में बड़े कदम साबित हो सकते हैं।

 

 

‘स्प्रिंगशेड प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूलन’ पर कार्यशाला का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

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देहरादून। नीति आयोग, भारत सरकार के तत्वावधान में जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (एनआईएचई), अल्मोड़ा और अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) के संयुक्त सहयोग से देहरादून के राजपुर रोड स्थित एक होटल में ‘स्प्रिंगशेड प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूलन: भारतीय हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास के लिए रणनीतियां’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारतीय हिमालय क्षेत्र: एक सतत भविष्य की ओर’ का भी विमोचन किया गया।

मुख्यमंत्री बोले – जल स्रोतों के पुनर्जीवन को मिलेगी गति

कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह आयोजन भारतीय हिमालयी क्षेत्र में जल स्रोतों के पुनर्जीवन को बल देगा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने में मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्प्रिंगशेड मैनेजमेंट और जलवायु संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है और पर्यावरण संतुलन व जैव विविधता बनाए रखने के लिए इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन स्थापित कर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में जीडीपी की तर्ज पर जीईपी (ग्रॉस एनवायरनमेंटल प्रोडक्ट) इंडेक्स तैयार किया जा रहा है, जिससे जल, वन, भूमि और पर्वतों के पर्यावरणीय योगदान का आकलन किया जा सके। उन्होंने उत्तराखंड को देश का ‘वॉटर टॉवर’ बताते हुए कहा कि यहां के ग्लेशियर जल स्रोतों का आधार हैं और जलवायु परिवर्तन व पारिस्थितिकी संकट से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य में ‘स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी’ का गठन किया गया है। इसके तहत 5500 जमीनी जल स्रोतों और 292 सहायक नदियों की पहचान कर उनके पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। हरेला पर्व के दौरान व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया गया और ‘अमृत सरोवर योजना’ के तहत राज्य में 1092 अमृत सरोवरों का निर्माण पूरा किया गया है।

मुख्यमंत्री ने नदी जोड़ो परियोजना के तहत पिंडर नदी को कोसी, गगास, गोमती और गरुड़ नदी से जोड़ने का अनुरोध नीति आयोग से किया और उम्मीद जताई कि यह कार्यशाला न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे भारतीय हिमालयी क्षेत्र के जल स्रोतों के वैज्ञानिक पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

नीति आयोग उपाध्यक्ष ने ‘वाइब्रेंट विलेज’ पर दिया जोर

नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के. बेरी ने हिमालयी राज्यों में खाली हो रहे गांवों के पुनर्जीवन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बाहर बसे प्रवासी लोगों को वापस गांव लाने और ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत इन गांवों में रोजगार व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए विज्ञान, सामुदायिक सहभागिता और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर देने की बात कही। साथ ही ब्रॉडबैंड सेवाओं के विस्तार और इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने पर बल दिया ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास की नई संभावनाएं खुल सकें।

सिंचाई मंत्री ने जल संरक्षण पर दिए सुझाव

सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्राकृतिक जल स्रोतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उत्तराखंड की परंपरा में जल स्रोतों को पवित्र माना जाता है और इनकी पूजा की जाती है। उन्होंने जल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यशाला में नीति आयोग और पर्यावरणविदों की भागीदारी

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, उत्तराखंड की मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, नीति आयोग के सलाहकार सुरेंद्र मेहरा, प्रमुख वन संरक्षक धनंजय मोहन, उप निदेशक आईसीआईएमओडी सुश्री इजाबेल, और एनआईएचई के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल सहित कई पर्यावरणविद, वैज्ञानिक और नीति विशेषज्ञ उपस्थित थे।

ICC Champions Trophy 2025 : कराची में भारत का झंडा न लगाए जाने को लेकर उठा विवाद

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ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की शुरुआत से पहले ही एक नया विवाद उभरकर सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में पाकिस्तान के कराची स्टेडियम में सभी देशों के झंडे लगे हुए हैं, लेकिन भारत का झंडा नहीं दिखाई दे रहा है। आईसीसी के नियमों के अनुसार, मेज़बान देश को बहु-राष्ट्रीय टूर्नामेंट के दौरान सभी भाग लेने वाले देशों के झंडे लगाना अनिवार्य होता है। लेकिन कराची में आयोजित इस टूर्नामेंट में 8 देशों में से केवल 7 देशों के झंडे लगाए गए हैं, जिससे नया विवाद शुरू हो गया है।

इस मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट फैंस नाराज हैं और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को आलोचनाओं का शिकार बना रहे हैं। यह वीडियो एक बार फिर से बहस का विषय बन गया है।

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की शुरुआत 19 फरवरी को होनी है, और पहला मुकाबला पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम सुरक्षा कारणों के चलते अपने सभी मैच दुबई में खेलेगी, जबकि पाकिस्तान का कराची स्टेडियम न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और इंग्लैंड टीमों के मैचों की मेज़बानी करेगा।

कुछ लोगों का कहना है कि भारत का झंडा नहीं लगाने की वजह यह हो सकती है कि भारतीय टीम इस मैदान पर अपने मैच नहीं खेलेगी, लेकिन इस मैदान पर ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के मैच नहीं होने के बावजूद उनके झंडे लगाए गए हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है।

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का आयोजन पाकिस्तान में हाईब्रिड मॉडल पर किया जा रहा है, जिसके तहत भारतीय टीम अपने सभी मैच दुबई में खेलेगी। यदि भारत नॉकआउट राउंड में क्वालीफाई करता है, तो सेमीफाइनल और फाइनल समेत उसके सभी मैच दुबई में ही होंगे।

BJP को जल्द मिलेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, अगले महीने हो सकता है चुनाव

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जल्द ही नेतृत्व परिवर्तन होने वाला है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल अब खत्म होने को है और पार्टी अगले महीने नया अध्यक्ष चुन सकती है। फिलहाल प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया जारी है, जिसके ठीक बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।

अब कौन संभालेगा कमान

जेपी नड्डा 2020 से BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने अमित शाह के बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। उनका कार्यकाल पहले 2023 में खत्म होना था, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर इसे एक साल के लिए बढ़ा दिया गया था। अब जब लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं, तो पार्टी नए चेहरे को कमान सौंप सकती है।

BJP में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी

BJP में संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया जारी है। पहले प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की जा रही है और इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा होगी। पार्टी नेतृत्व इस बार ऐसे व्यक्ति को चुन सकता है जो आगामी राज्य चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को मजबूती से आगे ले जा सके।

कौन बन सकता है नया अध्यक्ष?

हालांकि अभी तक BJP ने किसी नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन पार्टी में कई दिग्गज नेता इस दौड़ में माने जा रहे हैं। संभावित नामों में शामिल हैं:

  • भूपेंद्र यादव (केंद्रीय मंत्री और संगठन में मजबूत पकड़)
  • धर्मेंद्र प्रधान (वरिष्ठ नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री)
  • अनुराग ठाकुर (युवा चेहरा और पार्टी में सक्रिय भूमिका)
  • विनोद तावड़े (संगठन महामंत्री, मजबूत रणनीतिकार)

क्या नड्डा को मिलेगा दूसरा कार्यकाल?

BJP में यह परंपरा रही है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष को दो कार्यकाल नहीं दिए जाते। अमित शाह और राजनाथ सिंह के बाद अब नड्डा का कार्यकाल खत्म हो रहा है, इसलिए नए चेहरे को मौका मिलने की संभावना ज्यादा है। हालांकि, अगर शीर्ष नेतृत्व चाहे तो जेपी नड्डा को फिर से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दे सकता है।

BJP के लिए क्यों अहम है नया अध्यक्ष?

BJP इस समय राज्यों में विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। ऐसे में पार्टी एक ऐसा नेता चाहती है जो मोदी सरकार की नीतियों को जनता तक पहुंचाने में सक्षम हो और संगठन को और मजबूत कर सके। जल्द ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस पर चर्चा होगी और अगले महीने तक BJP को नया अध्यक्ष मिल सकता है।

अमेरिका से डिपोर्ट 112 भारतीयों का तीसरा बैच भी पहुंचा

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अमृतसर : अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 112 भारतीयों को वहां की सरकार ने डिपोर्ट कर दिया है। ये सभी प्रवासी 16 फरवरी की रात 10 बजे अमृतसर एयरपोर्ट पर उतरे। अमेरिकी एयरफोर्स के C-17A ग्लोबमास्टर विमान से लौटे इन लोगों में हरियाणा के 44 और पंजाब के 33 नागरिक शामिल हैं।

यह तीसरा बैच है, जिसे अमेरिका ने वापस भेजा है। इससे पहले भी कई भारतीयों को अवैध तरीके से अमेरिका में प्रवेश करने और रहने के कारण देश वापस भेजा गया था। डिपोर्ट हुए लोगों के परिवारों में निराशा देखी जा रही है। वहीं, भारतीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जरूरतमंदों को कानूनी सहायता और पुनर्वास में मदद दी जाएगी।

हाल के महीनों में अमेरिका ने अवैध प्रवासियों पर सख्त कार्रवाई तेज कर दी है। इससे कई भारतीय, जो टूरिस्ट वीजा या अन्य तरीकों से अमेरिका में बसने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें वापस भेजा जा रहा है। इस घटना के बाद प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे अमेरिकी कानूनों का पालन करें और अवैध तरीकों से प्रवास करने से बचें।

दिल्ली-NCR भूकंप के तेज झटकों से कांपी धरती, 4.0 थी तीव्रता के

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नई दिल्ली: सोमवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में भूकंप के तेज झटकों से दहशत का माहौल बन गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, सुबह 5:36 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता 4.0 मापी गई। भूकंप का केंद्र धौला कुआं बताया जा रहा है, जो कि शहर के भीतर स्थित है। भले ही तीव्रता मध्यम दर्जे की थी, लेकिन झटके इतने तेज थे कि लोगों को अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलना पड़ा।

सड़कों पर भागते दिखे लोग, सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो

भूकंप के झटके इतने तेज थे कि कई इलाकों में लोग घबराकर सड़कों पर निकल आए। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास एक दुकानदार अनीश ने बताया, “अचानक सब कुछ हिलने लगा, ग्राहक घबरा गए और चिल्लाने लगे। ऐसा पहले कभी महसूस नहीं हुआ।” वहीं, सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि झटकों के दौरान वस्तुएं तेजी से हिल रही थीं।

कम तीव्रता के बावजूद क्यों लगे इतने तेज झटके?

आमतौर पर 4.0 तीव्रता का भूकंप अधिक नुकसान नहीं करता, लेकिन इस बार झटके तीव्र महसूस हुए। इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं:

  1. शहर के भीतर था भूकंप का केंद्र:

    • जब किसी शहर के अंदर ही भूकंप का केंद्र होता है, तो झटके अधिक तीव्र लगते हैं क्योंकि भूकंपीय तरंगों को संरचनाओं तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है।
    • इस बार भूकंप का केंद्र महज 5 किमी की गहराई पर था, जिससे झटकों की तीव्रता और अधिक बढ़ गई।
  2. दिल्ली की मिट्टी की संरचना:

    • दिल्ली के कई हिस्सों की मिट्टी नरम जलोढ़ (Alluvial Soil) है, जिससे भूकंपीय तरंगें अधिक प्रभावी हो जाती हैं और कंपन अधिक महसूस होता है।
  3. भूकंपीय क्षेत्र IV में आता है दिल्ली-NCR:

    • दिल्ली सक्रिय फॉल्ट लाइनों के पास स्थित है और इसे भूकंपीय क्षेत्र IV में रखा गया है, जहां मध्यम से बड़े भूकंप की संभावना हमेशा बनी रहती है।
  4. ऊंची इमारतों की अधिकता:

    • दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में ऊंची इमारतों की संख्या बहुत ज्यादा है।
    • ऊंची इमारतें अपनी डिज़ाइन के कारण अधिक हिलती हैं, जिससे भूकंप के झटके और अधिक महसूस होते हैं।

भविष्य में भूकंप का खतरा बना हुआ है

विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र कई टेक्टोनिक फॉल्ट लाइनों पर स्थित हैं। हाल के वर्षों में छोटे-मध्यम भूकंपों की संख्या में वृद्धि हुई है, जो बड़े भूकंप का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने और भूकंप के दौरान आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

प्रशासन और विशेषज्ञों की अपील

दिल्ली प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय भूकंप सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग भूकंप के समय घबराने के बजाय टेबल या किसी मजबूत संरचना के नीचे छिपें और कंपन रुकने के बाद ही बाहर निकलें।

13वें जलोटा वेलफेयर फाउंडेशन ‘गौरव पुरस्कार’ की घोषणा, 18 फरवरी को होगा सम्मान समारोह

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मुंबई : जलोटा वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा दिए जाने वाले प्रतिष्ठित 13वें गौरव पुरस्कार 2025 की घोषणा भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा ने कर दी है।

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ये पुरस्कार भारतीय संगीत, नृत्य, भक्ति संगीत और अन्य कला क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को प्रदान किए जाते हैं। यह भव्य सम्मान समारोह मंगलवार, 18 फरवरी 2025 को शाम 7 बजे इस्कॉन, जुहू, मुंबई में आयोजित होगा।

पुरस्कार विजेताओं की सूची:

भजन सम्राट पद्मश्री पुरूषोत्तमदास जलोटा संगीत सेवा पुरस्कार:

सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक अजय पोहनकर को सम्मानित किया जाएगा। वह किराना घराने से हैं और 1988-2001 तक मुंबई विश्वविद्यालय में संगीत के प्रोफेसर रहे हैं। उन्होंने 5 वर्ष की उम्र से अपनी मां डॉ. सुशीला पोहनकर से संगीत की शिक्षा प्राप्त की।

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Ajay Pohankar

 

भजन महर्षि पंडित हरिओम शरण भक्ति संगीत पुरस्कार:

यह सम्मान कुमार विशु को प्रदान किया जाएगा। कुमार विशु प्रसिद्ध भजन गायक और फिल्म पार्श्व गायक हैं, जिन्होंने विभिन्न भाषाओं में भक्ति गीत गाए हैं।

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p Kumar Vishu

पद्मश्री डॉ. रवींद्र जैन बहुमुखी प्रतिभा पुरस्कार:

सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका डॉ. जसपिंदर नरूला को यह पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने फिल्मों और मंच पर कई हिट गाने गाए हैं।

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Jaspinder Narula

 मेधा जलोटा श्रेष्ठतम मेधावी नृत्यांगना पुरस्कार:

यह पुरस्कार प्रतिभाशाली युवा नृत्यांगना  सरिता कालेले को दिया जाएगा। वह दूरदर्शन की “ए” ग्रेड कलाकार हैं और दिल्ली में एक प्रसिद्ध नृत्य गुरु हैं।

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Sarita kalele

लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार:

यह सम्मान वरिष्ठ रेडियो उद्घोषक और कार्यक्रम संचालक किशन शर्मा को दिया जाएगा। वह ऑल इंडिया रेडियो के वरिष्ठ उद्घोषक रह चुके हैं और कई महान संगीतकारों के कार्यक्रमों का संचालन कर चुके हैं।

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Kishan Sharma

विशेष प्रस्तुति:

समारोह के दौरान पद्मश्री अनूप जलोटा और उनके शिष्य संगीत की विशेष प्रस्तुति देंगे, जिससे यह संगीतमयी शाम और भी खास बन जाएगी। इस कार्यक्रम का आयोजन “तथास्तु प्रोडक्शंस” द्वारा किया जा रहा है। भारतीय संगीत और संस्कृति के संरक्षण और प्रोत्साहन में जलोटा वेलफेयर फाउंडेशन का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।

 

मुख्यमंत्री धामी ने संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम में 261 संस्कृत विद्यार्थियों को किया सम्मानित।

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सरकार संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने का कर रही है कार्य- मुख्यमंत्री

देहरादून 16 फरवरी 2025। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित किए गए कार्यक्रम में संस्कृत शिक्षा से जुड़े हुए 261 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया।
उन्होंने संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान में 2024- 25 हेतु 10 वीं और 12 वीं के कुल 24 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को क्रमशः रु 5100, रु 4100 और रु 3100 रुपए की धनराशि दी गई।

डॉ भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति- जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति योजना 2024 – 25 हेतु कुल 148 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया।
इसी प्रकार से मुख्यमंत्री ने गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना 2024- 25 के अंतर्गत कुल 89 छात्राओं को सम्मानित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संस्कृत शिक्षा के छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के माध्यम से संस्कृत विद्यालयों में अध्यनरत बालिकाओं के प्रोत्साहन हेतु प्रथम बार गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना का शुभारंभ किया गया है। जिसके अंतर्गत संस्कृत विद्यालय में अध्यनरत सभी वर्गों की बालिकाओं को 3012 रुपए वार्षिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है।
डॉ भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 3012 रु वार्षिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है।

संस्कृत शिक्षा के मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रेरित करने के लिए संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान योजना संचालित की जा रही है। जिसके तहत हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में संस्कृत शिक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले तीन-तीन विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने पर क्रमशः 5100, 4100 और 3100 रुपए की धनराशि प्रदान की जा रही है। कहा कि प्रदेश के 13 जनपदों में 13 संस्कृत ग्राम विकसित करने के लिए सरकार कार्य कर रही है। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के माध्यम से सरकार प्रतिवर्ष अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन, अखिल भारतीय वेद सम्मेलन, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, संस्कृत शिक्षा कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यशाला, संस्कृत छात्र प्रतियोगिता आदि विविध कार्यक्रमों का आयोजन कर देव भाषा संस्कृत के प्रचार – प्रसार हेतु निरंतर प्रयत्नशील है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन मौलिक विरासत और संस्कृति के उत्थान के तौर से गुजर रहा है। भारत के प्राचीन वैभव और गौरव को प्रदर्शित करने वाली पहचान और प्रतीकों का संरक्षण और संवर्धन हो रहा है। उत्तराखंड भी हर दिशा में नवाचार के दौर से गुजर रहा है। उत्तराखंड में स्थानीय स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर भी मार्गदर्शन का कार्य कर रहे हैं। विकास के नित नए आयाम स्थापित किया जा रहे हैं। कहा कि उत्तराखंड के प्रवासी भी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि उनके पूर्वजों की देवभूमि तेजी से उन्नति के दौर से गुजर रही है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सरिता कपूर, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार गैरोला, निदेशक संस्कृत शिक्षा आनंद भारद्वाज आदि उपस्थित थे।

भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष दिलीप संघानी से कृषि मंत्री गणेश जोशी किया शिष्टाचार भेंट ।

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देहरादून, 16 फरवरी 2025 । सूबे के कृषि मंत्री गणेश जोशी से आज उनके शासकीय आवास पर भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मंत्री गणेश जोशी ने उनका उत्तराखण्ड आगमन पर पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर कई समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।